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Why Mirza Ghalib is Timeless | Javed Akhtar’s Tribute | Jashn-e-Rekhta Festival 1:00:50

Why Mirza Ghalib is Timeless | Javed Akhtar’s Tribute | Jashn-e-Rekhta Festival

Jashn-e-Rekhta · May 10, 2026
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Transcript ~7112 words · 1:00:50
0:00
[संगीत]
0:11
आदाब नमस्कार
0:19
[प्रशंसा]
0:50
तो मैं आपसे यह जानना चाहता हूं की आपका
0:53
जो ग़ालिब है वो आपको कितना याद है तो अगर
0:56
आप इजाजत दें तो मैं पहला मिश्रा कहूं और
1:01
यह पुरी ऑडियंस यहां जितने नाजरीन हैं ऐसा
1:05
में है वो दूसरा जो मिश्र है अगर आपको याद
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1:08
पड़ता है तो जोर से कहिए चीख के कहिए
1:10
पूछते हैं वो के ग़ालिब कौन है
1:17
क्या बात है साहब वह तालियां आप सब लोगों
1:20
के लिए इसलिए
1:21
[प्रशंसा]
1:24
अब पहले मिश्रा ए रहा है दिल ए नादान तुझे
1:27
हुआ क्या है
1:33
है और भी दुनिया में सुखांवर बहुत अच्छे
1:36
[प्रशंसा]
1:40
जब ऐसा यह आपकी ऑडियंस है भाई
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1:45
[हंसी]
1:51
तो जैसा आप सब लोग जानते हैं की तकरीबन
1:55
1797 के हम बात कर रहे हैं 1797 मिर्ज़ा
1:59
असादुल्लाह बैंक 27 दिसंबर को आगरे में
2:03
पैदा होते हैं
2:04
असद तकल्लुफ रखते हैं पहले फिर कई bujuhat
2:09
हैं असद का taklliftar को उठाकर टाक पर रख
2:13
देते हैं और ग़ालिब के नाम से और ज्यादा
2:16
मशहूर होते हैं और आज का जो हमारा टाइटल
2:19
है वो आपके सामने है तो मैं जावेद साहब
2:22
यहां अब आपको लाना चाहता हूं
2:25
की ग़ालिब एक सुपरस्टार की तरह
2:30
अमिताभ बच्चन हैं इंडस्ट्री के जैसे होता
2:33
ना वह दिलीप कुमार हैं वह कोई और दुनिया
2:37
के कोई अगर आदमी
2:39
निशानी हो सकती है कोई सिंपल
2:51
करती है उनको तकरीबन पैदा हुए सवा 200 साल
2:53
होने को ए रहे हैं और यही दिसंबर का महीना
2:55
है जिसमें 27 दिसंबर मैंने कहा ना की उनके
2:58
होम में पैदाइश है तो ग़ालिब को हम क्यों
3:02
इतना याद रखते हैं और भी बहुत सारे शो हुए
3:05
हैं जॉब हैं अमीर हैं एक से एक बड़े शायर
3:09
है
3:12
सही का रहे हैं आप देखिए किसी ने एक बात
3:16
कही थी और
3:18
मुझे ऐसा पढ़ते लगा था की काश ये मैंने
3:21
कही होती बहुत अच्छी बात
3:24
डी ग्रेट शायरी इस
3:27
फेल्ट थॉट
3:30
वह दिल ने महसूस किए हो दिमाग में समझिए
3:34
वो बात जो है वो पायदान होती है अगर बात
3:37
में सिर्फ इमोशन है जज्बात है तो थोड़ी
3:40
देर तक आपको bahlayega और फिर इमोशन खत्म
3:43
हो जाते हैं बाद में अगर सिर्फ अक्ल है
3:46
लॉजिक है रीजन है तो आपके दिल को अपील
3:49
नहीं करेगी
3:50
ग़ालिब की शायरी में खूबी यह है की वो
3:53
फेल्ट थॉट उसमें लॉजिक है उसमें
4:00
एक आगे देखती हुई नजर है जो तू जो है
4:06
और उसके साथ भी उसमें जज्बात की नरमी
4:10
रास्ते में है यह कांबिनेशन
4:26
की कहानी हो कोई आपकी जाती हम उलझन दुख
4:32
तन्हाई का एहसास या हैरत की दिन दुनिया
4:37
में क्या हो रहा है
4:38
जो कुछ दुनिया में होता है और जो कुछ दिल
4:42
में होता है उसके लिए आपको शेयर मिल जाएगा
4:45
इतनी सी की किताब
4:53
का भी उसका कोई मुकाबला नहीं
4:57
इस वजह से वो आज तक जिंदा है और जो बात
5:02
उसने पॉइंट्स निकले हैं ह्यूमन रिलेशनशिप
5:05
में वह हम कभी सोच भी नहीं सकते द की यह
5:08
भी हान यह भी एक बात तो वही जो है जो
5:11
हमारी आंखों के सामने है उसी में से वो
5:13
कुछ निकल के हमको देता है जो हम नहीं देख
5:16
पाए द
5:23
इलेक्शन से पहले वादे बहुत होते हैं यह कर
5:26
देंगे वह कर देंगे अब मुझे आजकल एक शेर
5:29
वाली बहुत याद आता है
5:33
जाम के जब शराब पार्टी जाती थी और जाम
5:38
बैठे जाते द तो मेरे से तो पहुंचने नहीं द
5:42
यह मुस्ताक कैसे पहुंच गया
5:48
साकी ने कुछ मिलना दिया हो शराब में
5:54
कुछ मिला ना दिया हो शराब में
6:00
अनोखा अछूता एंगल है तो यह आपको मिलता ही
6:05
रहता है
6:06
और कोई भी जिंदगी का पहलू हो उसमें आपको
6:10
ghalip का रेलवे शेयर मिल जाएगा ही वो
6:13
थिंकर एंड मैन विद ग्रेट इमोशन
6:16
यह कम होता है की दिल भी हो और दिमाग भी
6:20
हो यह गालिब क्या है ग़ालिब की शायरी जो
6:24
है वो उसमें सेल्फ की नहीं है
6:27
उसमें एक भाई टेंपरामेंट है इस विक्टोरियस
6:31
पॉइंट और वह देखता है वो बड़े ऑब्जेक्ट
6:36
केवली राम को भी एनालाइज करके देखता है तो
6:40
ये बड़ी रेल क्वालिटी
6:42
का गम को एनालाइज करता है बहुत बार शिकायत
6:45
ये होती है की थोड़ा सडिस्ट हो जाते हैं
6:48
ग़ालिब राम को बहुत ज्यादा एंजॉय करते हैं
6:50
इन लुत्फ लेते हैं मजा आता है उनको अपने
6:53
आप को तकलीफ देने में शेर बताएं कोई इन आप
6:55
लोगों के पांव से घबरा गया था मैं जी हुआ
6:57
वो खुश हुआ है राव को हर देखकर एक और शेर
7:00
जैसे की याद है और गली मुझे वो दिन के
7:04
बछड़े शौक में याद है गली- मुझे वो दिन के
7:09
वजह सेक में जख्म से गिरता तो पलकों से च
7:13
था नामक
7:15
चलिए दोनों शेर एनालाइज कर लेते हैं क्या
7:17
बात इसमें
7:20
के एक इसे मैं ट्रांसलेट करता हूं सिंपल
7:22
लैंग्वेज में क्योंकि इधर लिए
7:26
मेरे पैरों में जो चले पद गए द मैं उनसे
7:30
बहुत दुखी था परेशान था की क्या हो गया और
7:33
रास्ते में जो कांटे में देख रहा हूं तो
7:36
खुश हुआ है मेरा दिल की चले futenge हम
7:40
साला सिंबल है जो इंटरनल सोलो सोलो का चला
7:46
सिंबल है जो आप भुगत रहे हैं आप ही भुगत
7:48
रहे आपके अंदर है ये कांटे जिंदगी के
7:51
इम्तिहान जिंदगी मुश्किलों जिंदगी की
7:53
दुश्वारियां का सिंबल है
7:55
अब मैं इन पे चलूंगा तो जो मेरे अंदर बाहर
7:58
ए जाएगा देखा जाएगा यह मतलब वह अपने छालों
8:03
को बचाकर नहीं रख रहा है वो जो पैर में
8:05
उसके अवल हैं वो उनमें रो नहीं रहा है वो
8:08
गर्म वाला दिल खुश हो रहा है की सामने केट
8:10
है अब ये चले futegi खत्म होगा|
8:20
की लज्जत देखिए
8:23
हम बार-बार ये इक यहां जारी रहेगा की
8:27
ग़ालिब के वो कौन से असर हैं और ग़ालिब का
8:29
वो कौन सा फलसफा है जो जिसकी वजह से गालिब
8:32
गालिब है लेकिन यहां
8:35
थोड़ा सा मैं चाहता हूं जरा सब माहौल
8:37
बदलने के लिए आपकी इजाजत के आम तौर पर
8:40
क्या हुआ है की ग़ालिब के जमाने से अब तक
8:42
जो गालिब ने कहा नहीं है वो भी ग़ालिब के
8:45
नाम मंसूब है
8:47
अटरीब्यूट किया जाता है और जो सोशल मीडिया
8:50
पर आपने जो लोग एक्टिव हैं सर गर्म है वो
8:53
उन्होंने कभी नोट किया होगा की एक बड़ी
8:56
तादाद में ऐसे शेर सर्कुलेट हो रहे हैं
8:57
जिसका सर्टिफिकेट से दूर-दूर तक कोई
8:59
ताल्लुक नहीं है और उनमें एक हमारे बहुत
9:02
मशहूर सियासत दाएं हैं बड़े प्यारे अच्छे
9:04
इंसान हैं और वज़ीर वगैरा भी रह चुके हैं
9:06
ऐसा उन्होंने एक ट्वीट लगाई और वो बड़ी
9:10
जबरदस्त ट्वीट थी लेकिन ये की वो अगर आप
9:12
इजाजत दें तो मैं उसको मुझे याद तो नहीं
9:15
है इसलिए की ग़ालिब का शेर होता तो याद
9:16
होता है जो चीज सर्कुलेट हो रही है मैं ये
9:19
आपको जरा सा दिखाना चाहता हूं की किस
9:23
किस्म का
9:25
किस किस्म का जो मटेरियल है ग़ालिब के नाम
9:28
से वो चल रहा है
9:30
खुदा की मोहब्बत को फना कौन करेगा सभी
9:34
बंदे नेक हैं तो गुना कौन करेगा
9:37
ए खुदा मेरे दोस्तों को सलामत रखना वर्ण
9:42
मेरी सलामती की दुआ कौन करेगा और रखना
9:45
मेरे दुश्मन को भी महसूस वर्ण मेरी तेरे
9:50
पास आने के दुआ कौन करेगा मैं और आगे
9:53
अंग्रेजी में लिखा है मिर्ज़ा ghalibs 228
9:56
बर्थडे सो में ग्रेट लाइंस यह एक बहुत
10:01
बड़े इंटेलेक्चुअल है और बड़े प्यारे
10:02
इंसानों में बार-बार का रहा हूं की वो कम
10:04
पढ़े लिखे नहीं हैं बहुत बड़े ऑथर हैं
10:06
लेकिन ये उनकी ट्वीट तो उसपे जावे साहब ने
10:11
जारी की
10:15
आपको याद दिखे
10:18
बहुत सारे अखबार वालों ने बना दी
10:23
लेकिन जिया ग़ालिब की लेने नहीं है
10:26
इसी तरह से एक और शेर पार्लियामेंट में
10:30
मतलब 12 प्राइम मिनिस्टर डिबेट में चल रहा
10:34
था मामला और एक और टॉप जिसको कहते हैं
10:37
साहब लोगों ने एक शेर पढ़ा वो आपने भी
10:40
बहुत सुना होगा की चेहरे पे धूल थी साफ
10:44
करता रहा कुछ आपको कुछ आए द क्या है वो
10:48
क्या है
10:49
मुझे गलत शेर याद नहीं रहते
10:53
[प्रशंसा]
10:57
चेहरे पे धुलती और ग़ालिब अपना चेहरा साफ
11:01
करने आईने पे धुलती गली अपने चेहरा साफ
11:03
करता रहा कुछ इस तरह का है पार्लियामेंट
11:06
से हुआ और जावेद साहब के भाई खुदा के
11:10
वास्ते यह भी गालिब नहीं है
11:14
ये ralib की जिंदगी में भी हुआ है की कुछ
11:17
भी लोगों ने लिखा है तो एक सांप ग़ालिब के
11:21
पास पहुंचे ट्रू इंसीडेंट है की सर ये एक
11:24
शेर सुना है हुजूर के
11:28
असत इस जफ़ा पर भी तूने वफा की
11:31
मेरे शेर शाबाश रहमत खुदा की तो चलिए आप
11:37
एक takllion
11:39
अगर यह मुझे सच कहा है तो लानत खुदा की
11:42
किसी औरत संस्कार है
11:44
[हंसी]
11:46
तो अब क्या होता है
11:49
वो मतलब दुनिया में एक बात बता डन आपको ये
11:54
नॉलेज की कोई लिमिट हो तो हो एक नाराज की
11:58
कोई लिमिट नहीं है
12:00
मुझे यह मैं आपको जोक नहीं सुना रहा हूं
12:04
एक पार्टी में आते कोई 15 20 साल पहले
12:08
मुझसे एक लेडी ने पूछा था
12:10
जावेद साहब आपका दीवाने खाली भेज हैं
12:15
[प्रशंसा]
12:22
ऐसा लगता है ग़ालिब का कहेंगे तो जरा
12:25
क्रेडिट इम्यूनिटी बढ़ जाएगी लेकिन बेचारे
12:27
ग़ालिब को इस मामले में बहुत मुसीबतें
12:30
झेलनी पद रही है आजकल और वैसे की जो उसने
12:33
कहा नहीं वो उसके नाम से ये तो बड़ा कॉमन
12:35
हो गया आजकल ये गली भी का मामला नहीं है
12:38
यह तो हमारे साथ भी होता है दूसरों के साथ
12:40
भी होता है उसने कहा ही नहीं का रहे तुम
12:42
ने कहा था तो यह सब होता रहता है तो हमने
12:46
जहां एक बात का आगाज किया था की ग़ालिब
12:49
इतने अजीम शायर क्यों हैं वह कौन से शेड्स
12:53
है जावे सब जो जाती तौर पर आपको गालिब के
12:55
बहुत ज्यादा पसंद आते हैं देखिए ग़ालिब
12:58
मतलब सवाल 200 साल पहले पैदा हुए द और उसे
13:01
जमाने में भी जब उन्होंने बड़ी इंगेजमेंट
13:03
में लिखना शुरू कर दिया था 11 साल की उम्र
13:05
से लिख रहे
13:06
तो उसे जमाने में भी ग़ालिब की जबान बहुत
13:09
मुश्किल मणि जाती थी और ग़ालिब क्या का
13:13
रहे हैं बहुत से लोग नहीं समझ पाते द और
13:15
नाराज होते द क्या लिखते हैं भाई ये मतलब
13:18
उसी अल्टीमेट ralib को यह शेयर लिखना पड़ा
13:21
एन सताए इश्क की तमन्ना ना चले की परवाह
13:24
घर नहीं है मेरे असर में माने ना सही तो
13:28
ये उनकी जो दुश्वार जबान थी और जो उनका
13:32
कॉम्प्लिकेटेड लेयर थॉट होता तो आम आदमी
13:35
तक पहुंच नहीं पता था तो उससे तब तकलीफ थी
13:39
तो अब तो होगी अब तो दबाना बदल गया जबान
13:42
भी बदल गई है कितनी मगर उनके जो शेर है
13:45
मुझे ट्रांसलेट करने पड़ेंगे सदा जमा जो
13:48
मुझे लगता है की देखिए कितना फॉरवर्ड
13:50
लुकिंग
14:06
क्या जिसका मतलब
14:26
जिस इंसान को कुछ पता है उसकी किस्मत में
14:30
लिखी हुई
14:35
और आज भी आप देखिए की दुनिया में
14:38
क्या-क्या हो रहा है फ्रॉम उस तो इंडिया
14:40
तू चीन तू एवरी बेयर तू योर अप तू स्वीडन
14:44
क्यूट अपने एवरी टाइम में रहते हैं वो
14:47
खुशियां उनको कुछ पता ही नहीं क्या हो रहा
14:48
है क्या नहीं हो रहा है मजे में है हैप्पी
14:51
कूल
14:52
मगर जीने पता है की क्या हो रहा है और
14:55
क्या हो रहा है होता जा रहा है वो लोग जो
14:58
है वो बेचैन है बेताब है तो ये बेटा भी जो
15:01
है वो समझदार की और जो अवैध है
15:08
उसके किस्मत में लिखी हुई है बेचैनी दिल
15:11
की बाकी तो है सियाराम से हो बेचारे
15:15
यह अब देखिए यह कोई पुराना ख्याल तो नहीं
15:17
है आज का
15:19
और उसको आज की ही लिए शायरी कर रहा था
15:23
उसने शायरी अपने वक्त के लिए नहीं किए
15:26
उसकी शायरी बड़ी फ्यूचरिस्टिक थी उसका एक
15:30
और छोटा तो फिर उसे भी मुझे ट्रांसलेट
15:32
करना पड़ेगा
15:57
मैं तो उसे
16:01
बाग का पंछी हूं उसे बाग की कोयल हूं अगर
16:05
हिंदी में कहे हम की जो अभी बनाई नहीं है
16:09
मैं उसे पास का पंछी हूं जो बनेगा कभी
16:14
अब आप यह रिच देखिए यार
16:17
क्या का रहा है
16:25
टूट चुकी थी बहादुर शाह पर खत्म हो चुके द
16:28
एक लोगों में क्या होता है की जब आप तबाही
16:31
की तरफ जाते तो आप मेरे वायरल भी आता है
16:33
की नहीं साहब जो हमारा पहले था वो कितना
16:35
अच्छा था वो कैसे खत्म हो सकता है
16:38
उसका शेर सुनी है यह फॉरवर्ड लुकिंग आज भी
16:43
इमाम हुसैन
16:48
कब मेरे पीछे है
16:53
[प्रशंसा]
16:56
की जो ट्रेडिशनल है जो आज तक और जीने का
17:01
तरीका था वो मुझे रोक रहा है
17:04
और जो इन लोगों की नजर में खुश है जो गलत
17:08
है जो नया है जो डिफरेंस है वो मुझे खींच
17:12
रहा है
17:14
कब इस डी सिंबल ऑफ ट्रेडीशन वो मेरे पीछे
17:17
अलीशा इस डी मॉडर्न
17:24
जा रही थी और pianoli जा रही थी तो वो
17:27
सिंबल था नई नॉलेज का
17:31
वो मुझे बुला रहा है तो ही है ऑलवेज लुक
17:35
फॉरवर्ड
17:37
और उसकी शायरी में जगह-जगह पे आपको दिखाई
17:40
देता है की यह आदमी आने वाले जवानों को
17:43
देख रहा है डेट मेक सैम सो ग्रेट लेकिन
17:46
आने वाले जवानों को देखने का मतलब ये नहीं
17:49
है की वो कहां हम इंसान के दुख को नहीं
17:52
समझ रहा उसकी तन्हाई को उसकी मौजूद है तो
17:56
यह जो इतना ऑल है
18:01
डेट इस मैं मतलब पीपल मैं तो इतना काबिल
18:04
आदमी नहीं हूं जो कुछ भी थोड़ा बहुत जानता
18:07
हूं लेकिन पीपल हो अरे रियली
18:12
ऑन लिटरेचर सब डिफरेंट लैंग्वेज
18:24
दुनिया का सबसे बड़ा शहर
18:29
हुए लेकिन 19 सेंचुरी में जो पोएट्स द
18:32
चाहे हिंदुस्तान में हो फ्रांस में हूं
18:34
इंग्लैंड में हो जर्मनी में हो दूसरे
18:37
मुल्कों में हो ग़ालिब से बड़ा शहर में
18:40
ग़ालिब की जो एक हिम्मत है और जो करें से
18:43
एक तरफ का सीधा हनी करते हैं जिसके लिए वो
18:46
बहुत मशहूर हैं अच्छी लोगों की तारीफ करते
18:49
हैं
18:49
शाहू की shenshahon की तारीफ करते हैं और
18:53
दूसरी तरफ उनमें जो ब्लैक है एक एंटी
18:56
एस्टेब्लिशमेंट जो एलिमेंट है वो इरेवरेंट
18:59
भी है वो खुदा को चैलेंज करते हैं वो काफी
19:01
का जिक्र भी करते हैं वो जो एलिमेंट है
19:05
समझी तो वही करते हैं फिल्म के गाने भी
19:08
लिखते हैं और शायरी भी लिखते हैं तो अब
19:11
जमाने में फिर मैं तो होती नहीं होना जब
19:13
टॉप के सॉन्ग राइटर
19:21
थी अरे भाई
19:23
टायर जो है कोई धमक तो है नहीं की जिस
19:26
पेपर पे उसने लिखा उसी को खा जाएगा और
19:29
जिंदा रहेगा तो उसको रोटी भी चाहिए उसे छत
19:32
भी चाहिए उसे जिंदगी के कुछ कंफर्ट भी
19:35
चाहिए और आप उसे शायरी के बारे में बदले
19:38
नहीं देते हैं मतलब शर्म की बात तो दूसरों
19:41
के लिए है की उसे शादी से क्यों नहीं इतना
19:43
मिला की उसे कसीदा लिखना पड़ा
19:47
तो ग़ालिब का जो रेफरेंस वाले अक्षर है वो
19:49
कुछ दो-चार यहां पे जरा सा रे भाई वो तो
19:52
मतलब एक जन्नत है यह तो कुछ लोगों के ईमान
19:56
का हिस्सा है उनकी मुक़द्दस किताब में
19:59
बड़ी डिटेल में जन्नत का ज़िक्र है ये आज
20:02
से 200 साल पहले हमको मालूम है जन्नत की
20:05
हकीकत लेकिन दिल के खुश रखने को ख्याल
20:09
अच्छा
20:09
[प्रशंसा]
20:13
यह जिक्र किया था आपने और अभी जो जिक्र हो
20:16
रहा था ना वो जो काबे वाला शेर था उसमें
20:17
ग़ालिब का ही शेर है की गुमान नहीं पे मैन
20:21
के निकले हुए तो हैं काबे से उन भूतों को
20:24
भी निस्बत से दूर दूर
20:30
क्या बोलिए
20:35
उसका जिक्र बार-बार होता है मैं चाहता हूं
20:38
इस ऑडियंस को कई लोग जानना चाहते हैं की
20:40
शेर जो है चाहे वो ग़ालिब का हो या अमीर
20:43
का हो उसके पीछे एक रेफरेंस होती है और आप
20:45
खुद इस बात पे कई बार बात करते हैं तो वो
20:49
रेफरेंस के साथ
20:53
हुई है
20:55
तस्वीर का अब ये शेर आदमी ऐसे कैसे समझेगा
20:59
अगर हर लफ्ज़ के माने भी मालूम हो तो भी
21:01
नहीं समझ पाएगा
21:03
के यह जो इमेज है
21:07
यह किसके लिखने की
21:09
शोखी को उसकी शरारत की शिकायत कर रहा है
21:13
इसलिए की जितनी तस्वीरें हैं इनका लिबास
21:18
तो कागज का है
21:24
जब हम यह एक ट्रेडीशन जानते हो जो पुराने
21:26
जमाने में थी की फरियादी जब दरबार में
21:30
फरियाद करने जाता था बादशाह के तो कागज का
21:34
कपड़ा पहन के जाता था तो उसे पहचान लेते द
21:36
की फरियाद करने आया है जाहिर है की कागज
21:40
के ऊपर जो भी तस्वीर बनेगी उसका लिबास तो
21:43
कागज नहीं है तो यह जो तस्वीरें बनी है ये
21:46
किसकी शिकायत कर रही है दूसरी तरफ किसकी
21:50
शौक यह तेरी इस देर अन्य सुप्रीम पावर जो
21:54
इन तस्वीरें को बना रही है
21:57
उसकी शिकायत कर रहा है तो इसीलिए तस्वीरें
22:00
कांग्रेस के कपड़े पहने हुए हैं
22:02
कॉम्प्लिकेटेड
22:07
जैसे ना था कुछ तो खुदा था यह बहुत
22:11
इंपॉर्टेंट शेयर है देखिए बहुत बड़ा पहले
22:14
मणि कौन एक बहुत अच्छे फिल्म द
22:17
पर उसे जमाने में हम भी बहुत मुफली जी के
22:20
आलम में द और वो भी बेचारे स्ट्रगल कर रहे
22:23
द मुंबई में प्रवेश
22:26
द उन्होंने शराब इसलिए बंद कर दी की उनका
22:29
इंतकाल हो गया मैंने
22:35
मैंने जीते जी बंद कर दी मुझे आज 31 साल
22:39
हो गए मैंने शराब को हाथ नहीं लगाया है
22:43
चलो आज शाम को सेलिब्रेट करेंगे
22:45
[प्रशंसा]
22:45
[हंसी]
22:47
[प्रशंसा]
22:51
उनसे मेरी एक दारू का अड्डा था वह मिलती
22:55
थी देसी शराब तो वहां हम लोग पी रहे द बहस
22:57
हो गई
22:58
बरसों बात मुझे समझ में आया की वो सही का
23:01
रहा था और अगर वो जिंदा होता तो मैं जागीर
23:03
से माफी मांगता
23:06
उन्होंने कहा की गली बहुत पॉसिबल नहीं है
23:09
इंडिया से बाहर खाली नहीं हो सकता था कोई
23:12
और शायर हो जाता
23:15
जीनियस था वो कहीं भी पैदा होता तो अच्छी
23:17
शायरी करता लेकिन बरसों के बाद मैंने
23:20
realaiz किया की मैं गलत किया
23:22
ग़ालिब की शायरी
23:24
हिंदुस्तान के अलावा कहीं नहीं हो सकती थी
23:30
आप देखिए जो 70 रिलीजियस है
23:33
जुड़ाइएसएम क्रिश्चियन
23:41
वो क्रिएटर है वो आपको जज कर रहा है वो
23:45
आपको देखा जो आदित्य का कॉन्सेप्ट है ये
23:50
आया है वेदों से जिसमें क्रिएटर और
23:54
क्रिएशन अलग नहीं है एक ही है जहां से हम
23:57
ब्रह्मा जहां से सूफी इसमें बाद में गया
24:00
एनालॉग
24:02
है तो यह जो सब कुछ वही है
24:06
यह कॉन्सेप्ट सिमिट्रिक रिलीजियस का नहीं
24:09
यह है अद्वैत का
24:13
अब क्या कहता है
24:15
एन था कुछ तो खुदा था कुछ ना होता तो खुदा
24:19
होता है
24:23
मुझको इसमें हो गई जो बोया मुझको होने में
24:28
होता तो क्या होता
24:31
की अगर मैं नहीं होता तो मैं तो गोद होता
24:34
यह मेरे होने में
24:37
[प्रशंसा]
24:40
चला है जिस्म यहां दिल भी जल गया होगा
24:45
जला है जिस्म जहां दिल भी जल गया होगा
25:01
सऊदी अरब में चलता है कहां चलता है
25:04
हिंदुस्तान में चलती
25:05
[प्रशंसा]
25:07
हो जो अब रात
25:09
[प्रशंसा]
25:11
के लिए वह कहां होता है हिंदुस्तान में
25:15
होता है
25:20
अफ़ग़ानिस्तान में नहीं लिख सकता था
25:44
तो आपको
25:46
मिलते ही चले जाएंगे ऐसे शेर जो आपको
25:50
लगेगा की हान भाई यह शेर तो हिंदुस्तान
25:52
में लिखा जा सकता तो
25:56
परफेक्ट सिंथेसिस ऑफ वाटेवर गुड ही गुड
26:00
ब्रिंग फ्रॉम डी सेंट्रल एशिया
26:02
फ्रॉम सेंट्रल एशिया एंड वाटेवर ब्यूटीफुल
26:06
डी आर ऑन लैंड कूद ऑफर हिम ये दोनों मिक्स
26:11
होके एक नई तहजीब एक नई जुबान एक नई सोच
26:15
बनी उसका नाम खा लेना क्या बात है वह
26:21
जब ये सब गली का जो कलम है और जो दीवान है
26:25
इंतखाब है उनके कलम का वो समझाया जाता है
26:30
की चकरी में 18-19 साल के हैं और तभी से
26:32
किसने किसी क्षति में आने लगा एक जावेद
26:37
साहब के खानदान से भी एक सिलसिला है इसलिए
26:40
उसको भी जहां में रखिएगा आप इस बात को की
26:43
एक मौलवी मौलाना फ़ज़ल हौला ना फैसले
26:50
अल्लामा अल्लामा fazlehab जी तो वो आपके
26:55
जो दादा है उनके दादा दादा
26:58
है और वह समझा जाता है की ग़ालिब का जो
27:02
दीवान है जो ऑफिशल जिसको कहते हैं ना
27:07
जो ग़ालिब के जमाने में जिसको तरतीब दे
27:10
दिया गया था जिसमें ग़ालिब की sifarishad
27:13
और ग़ालिब के mashhre ये भी चीज शामिल हैं
27:16
जिसमें एक मौलाना फ़ज़ल हक कभी अपना एक
27:19
कहीं ना कहीं कंट्रीब्यूशन है आप उसे के
27:22
हवाले से कुछ इस बात पे रोशनी दल सकते हैं
27:24
की ग़ालिब का जो मुझसे ना दीवान है हमारे
27:26
सामने वो कौन सा है और यह मौलाना फ़ज़ल
27:31
हाफ साहब का जो कंट्रीब्यूशन भूल जाएंगे
27:33
वो आपके दादा के दादा होते द लेकिन ये के
27:36
वो कम जो हमारे सामने आया है
27:39
अभी आपने याद दिलाया
27:44
तो वह दीवान क्या हवा से
27:50
विक्रम सुल्तान भूत मेरे बाप बैश द अरे वो
27:55
होंगे तुम कौन हो बताओ तो वही यहां पर यह
27:58
बड़ा कॉमन है आपके शहर में तुम्हें मालूम
28:01
है मेरे फादर कौन है
28:03
मेरा कभी जी चाहता है की इसका जवाब कोई ये
28:06
दे के जवाब को खुद ही नहीं मालूम तो मुझे
28:08
कहां से मालूम
28:12
तो
28:14
तो यह मेरे ग्रैंडफादर के जो ग्रैंडफादर द
28:17
अल्लामा फ़ज़ल है खैराबादी वह तो मेरी
28:20
इंटरेस्टिंग मैन उनकी कब्र कला पानी में
28:22
अभी भी है वो
28:24
1857 में फिर वो फ्रीडम मूवमेंट पे चले गए
28:27
द उन्हें तक अनएक्टिव पार्ट जिसकी वजह से
28:30
उन्हें अरेस्ट कर लिया गया फिर उन पे केस
28:32
चला फिर उन्हें कला पानी
28:34
59 में 1859 में कला पानी भेज दिया गया
28:38
था आगे ये क्या
28:41
मैंने कहा माफी मांगने से इनकार भी कर
28:44
दिया था खैर आगे
28:45
[प्रशंसा]
28:49
तो
28:51
अभी मांग लेते तो वापस ए जाते
28:54
कुछ अंग्रेजों की खिदमत कर लेते मगर नहीं
28:58
किया तो वह ग़ालिब के बड़े करीबी दोस्त है
29:03
और ग़ालिब के जो लेटर छपे हैं उसमें कई
29:06
लेटर्स में उनका बड़ा दिख रहा है एवं जब
29:08
उन्हें कला पानी की सजा हुई तब भी ग़ालिब
29:11
ने खत अपने दोस्त को इस बारे में लिखा
29:15
हुआ जी बड़े काबिल आदमी द और
29:20
उनके बारे में एक और बात बताऊं
29:23
1857 में एक बहुत बड़ी काउंसिल बनी थी कोई
29:26
किस आदमी भाई इस आदमी द जो प्लान कर रही
29:29
थी यह रिवोल्ट
29:32
वह हुआ यह इतने लोग जज्बात से भरे हुए द
29:36
की वह मेरठ में एक चिंगारी ने भड़का दिया
29:38
उसे और वह बहुत पहले शुरू हो गया है जो कई
29:41
महीने बाद होना था ऑर्गेनाइज तेरी और शायद
29:45
उसी वजह से आगे गड़बड़ी हुए हैं
29:48
तो ये उसे कमेटी में द और इसी वजह से हो
29:50
जेल गए
29:53
इनकी गहरी दोस्ती थी राजीव को मालूम था
29:56
काबिल आदमी है दिल्ली में ये
29:58
अवध में अवध में शत्रु से दूर यानी के
30:01
जस्टिस भी रह चुके तो जो इस कमेटी ने
30:05
कॉन्स्टिट्यूशन फॉर्म किया था की जब
30:08
हिंदुस्तान आजाद हो जाएगा तो
30:09
कॉन्स्टिट्यूशन क्या होगा उसका वो
30:12
इन्होंने ड्राफ्ट किया था
30:14
जिसका जिक्र हमारे दोस्त हैं बालवीर पुंज
30:18
जो के बीजेपी के एमपी भी द एक ज़माने में
30:21
अब नहीं है उन्होंने अपने एक मजबूत में
30:23
बड़ी डिटेल में सब कुछ लिखा है
30:27
तो ग़ालिब ने अपना दीवाने ना दिया की भाई
30:30
ये मनुष्य है इसमें से तुम जो काटना चाहो
30:34
तुम्हें लगे कमजोर हो काट दो अब आप देखिए
30:36
उसे जमाने में इस तरह की एडिटिंग नहीं
30:38
होती थी फॉरवर्ड लुकिंग आदमी उसे जमाने के
30:41
जो दूसरे शायर हैं उनकी जिंदो पे दिल दे
30:43
है जो लिखा छुप गया जो लिखा छुप गया
30:46
ग़ालिब ने ऐसा नहीं किया ये देखिए कितना
30:54
शेयर
30:57
बिल्कुल ठीक हो जाना चाहिए
31:00
है तो उन्होंने कुछ
31:02
लोग कहते हैं की एक छठ हिस्सा उसे विमान
31:06
का काट दिया अब उसमें कई शेर ऐसे भी कट गए
31:09
जो फिर दूसरे majboon में मिल जाते हैं
31:11
लेकिन जो इनका अपना था उसमें नहीं था जो
31:15
दिल्ली से छपरा
31:18
भोपाल में उसका रामपुर में अभी भी वो रखे
31:21
हुए हैं उनके लाइब्रेरीज में कुछ तूफान
31:24
हूं
31:26
ही कहां तमन्ना का
31:28
दूसरा कदम या रब है कहां तमन्ना
31:46
तो 1 फुटप्रिंट के बराबर है पॉसिबिलिटी तो
31:50
दूसरा पैर कहां रखा है ह्यूमन इमोशन में
31:52
आप ऐसा लगता है ये शेर के इस फूटने और
31:55
स्पेस में जाने के बाद देखा गया है शेर
31:59
इसकी देखिए इसकी ग्रोथ क्या है
32:01
ये शेर काट दिया दादा के दादा ने हमारे
32:05
बड़ी गलती की अरे भाई उन्होंने क्यों काटा
32:10
हमने दर्शाते इनका को एक नक्श के पाप पाया
32:16
कान कुछ नहीं लगता
32:20
बहुत इंपॉर्टेंट है और वो जबान जो है ऐसी
32:24
होनी चाहिए कान को खराब ना लगे बहुत
32:26
ज्यादा इस मामले में उर्दू शायरी सेंसेटिव
32:30
रही है तो इसलिए वह शेर इतना बड़े माने का
32:33
शेर उसमें से निकल दिया गया
32:38
तो यह उन्होंने किया था
32:40
जो
32:44
उनकी कुछ आपके पास कोई चीज हैं ऐसी मेरे
32:48
पास तो उनकी बहुत
32:50
जाएंगे अंडमान में मिल जाएंगे
32:52
[प्रशंसा]
32:57
किसी भी अंडमान के आदमी से पूछे वो
32:59
खैराबादी साहब की कब्र गांव में बता देगा
33:03
लेकिन मेरे पास एक बहुत
33:06
रेयर चीज है उसे दबाने में कुसुम था की जो
33:12
आजादी के लिए लड़ रहे द अगर उन्हें फांसी
33:15
की सजा होती थी या उम्र कैद कला पानी में
33:18
तो उनका घर डिमोलिश कर दिया जाता था तो
33:22
उनका घर जो कलेक्टर था लखनऊ का उसका ऑर्डर
33:26
था की यह इनका घर डिमोलिश कर दिया जाए वह
33:30
जो ऑर्डर है उसकी ओरिजिनल कॉपी मेरे पास
33:34
[प्रशंसा]
33:42
मेरे घर के लोग आज भी मुझे जादुई कहते हैं
33:44
तो वह किताब छाप रही है
33:48
मेरे दोस्तों के बारे में रिश्तेदार
33:51
फैमिली फिल्म
34:03
रहा उसका उन्होंने फोटो
34:05
इमेज छपी है उसे
34:15
किताबें हैं
34:17
लेकिन मुश्किल के हैंडराइटिंग में है मेरे
34:19
पास वो
34:21
क्या है धीरे-धीरे मेरा फैमिली ड्रामा
34:24
इसमें शामिल हो रहा है लिए वापस चलबे की
34:27
तरफ
34:28
ग़ालिब ने एक जब कलकत्ते के लिए रावण हुए
34:32
तो रास्ते में बहुत मौका आता है कहीं
34:35
बीमार हुए और वह उनको जाना था कब और
34:38
पहुंचे फांसी देर से बनारस
34:56
ये बनारस का इसमें रास्ते में क्यों पड़ता
34:59
है वो बनारस
35:03
द कोलकाता का जो जिक्र किया तूने हम नशीन
35:05
एक तीर मेरे साइन में मारा के हाय-हाय ये
35:09
शेर कोलकाता के हवाले से था लेकिन मैं
35:11
आपसे ये दोनों चीजों के बारे में जानना
35:13
चाह रहा था उनका कलकत्ते का दौरा और ये
35:16
बनारस में जो वो मसनवी है देखिए
35:20
असल में
35:22
आमतौर से उर्दू शायरी बहुत सारे जो नॉन
35:25
उर्दू स्पीकिंग यार रीडिंग राइटिंग पीपल
35:28
है जिनकी मदर तंग या फर्स्ट रैंक उर्दू
35:31
नहीं है बहुत लोगों तक सबके नहीं बहुत हो
35:35
गए द जिनके पास उर्दू जो ग़ज़ल सिंगर हैं
35:40
उनसे पूछिए तो उनको कुछ इंप्रेशन ऐसा है
35:44
की उर्दू शायरी का मतलब आशिकी और कुछ
35:48
परवाना शर्मा
35:59
गया है उसको शायरी कहना जो है बड़ा
36:02
मुश्किल तो
36:06
12 जो संजीदा शायरी है और जो उस्तादों की
36:10
लिखी हुई है 300 400 साल
36:13
वह शायरी के बारे में बहुत कम लोग जानते द
36:17
ग़ालिब ने एक बहुत मतलबी डिटेल में उसकी
36:21
टेक्नोलॉजी
36:23
पोयम लिखी है मैं उसे मतलबी को पोयम ही
36:26
कहूंगा चिराग
36:29
उन्होंने जो बनारस का उसके घाट उसके मंदिर
36:34
में उसकी रश्मि उसके तौर तरीके उसका जो
36:36
बयान किया है उसमें वह आपको लगता है की इस
36:40
शख्स यह कितनी मोहब्बत से और कितने
36:44
लिख रहा है सब कुछ यह जो पहलू है उर्दू
36:50
मैं इसके अलावा भी और शायर हुए हैं
36:53
जिन्होंने बनारस के घाट पर तुलसी घाट पर
36:57
मंदिर
37:17
था पवित्रता का मिला देखो
37:20
तो
37:22
यह शायरी जो है यह कोई नई बात नहीं है
37:25
उर्दू में और ग़ालिब जैसा सेकुलर और
37:30
फॉरवर्ड लुकिंग
37:31
जाहिर है की जब दुनिया के चंद पुराने
37:35
शहरों में से बनारस और उसकी जो ट्रेडीशन
37:37
रही हैं और आज भी हैं वो उसे कितनी
37:40
फेसिनेट की होंगी उतने दिल्ली आगरा में
37:42
देखा होगा मैं इस पैमाने पे नहीं देखा
37:44
होगा जो बनारस में होता है तो उसने उसको
37:48
रुक गया वो कहां मेरे खर्चे एक दो महीने
37:50
मारा
37:51
और जा रहा था कोलकाता रास्ते में सफर ही
37:54
रोक दिया और बनारस से जो उसने अपना इश्क
37:57
और अपना
37:59
श्रद्धा दिखाइए
38:20
बनारस कितनी जो उनकी अकीदत है मोहब्बत है
38:24
जिसको ज़ाहिर किया है वो समझता है की वो
38:26
अपने आप में शायरी का एक जबरदस्त नमूना है
38:28
जो शायद हिंदुस्तान की सारी जवानों को भी
38:30
सामने रखेंगे तो मैं ये नहीं का रहा की
38:32
उनमें कोई हल्का कम होगा लेकिन ग़ालिब का
38:34
कम उसमें एक बहुत पसंद है और एक बात आपने
38:38
कल अपने इंट्रोडक्शन में बड़ी dilchas बात
38:39
कही थी जब यहां इस्तक करते हुए की जैसे
38:43
होली पर यह गली से थोड़ा सा भटक रहे हैं
38:45
हम की जो नज़्म उर्दू में हैं शायद ही
38:48
किसी और जुबान में हो ऐसे ही जैसे ग़ालिब
38:51
की ये जो मसाला भी है बनारस शायद ही किसी
38:53
और
38:55
ने इस्तेमाल किया था
38:59
मैंने कहा था की उर्दू में होली पर जो
39:03
नज्में हैं
39:10
मैं तो बहुत सारे त्यौहार जिनके बारे में
39:12
मैं जानता नहीं था वह मैंने उर्दू शायरी
39:15
से सीखे हैं
39:16
मतलब एक त्यौहार है
39:19
जिसमें जैनी त्यौहार बड़ा खूबसूरत
39:23
देना अच्छा मावनी जिसमें आप किसी से भी
39:26
आपको लगे की मैंने गलत बात की तो जाकर
39:28
क्षमा मांग लीजिए वो आपका मांगना कर्तव्य
39:30
है उसका माफ करना कर्तव्य है कितनी
39:33
खूबसूरत इस त्यौहार पे एक पोयम है उर्दू
39:37
में उसे पोयम के जरिए मुझे इस त्यौहार का
39:40
पता चला जन्माष्टमी होली दिवाली तो खैर हम
39:43
सब जानते ही है हमारी जिंदगी का हिस्सा है
39:44
मुझे chhamauni के बारे में नहीं पता था
39:46
तो ये आप एक कम करिए मेरा आपको सजेस्ट
39:51
करूंगा की यहां पर
39:53
राजकमल जो पब्लिकेशन है उसने यहां शायद
39:58
आपको मिल भी जाए हिंदुस्तान हमारा दो
40:00
वॉल्यूम है जिसमें उर्दू शायरी है
40:03
हिंदुस्तान की जो हिस्ट्री है हिंदुस्तान
40:06
के हिंदुस्तान में जो रिवॉल्यूशन के खिलाफ
40:10
हर पीरियड में हिंदुस्तान की जो बड़े-बड़े
40:12
हीरोज पैदा हुए इस देश में उनके बारे में
40:15
सारी हर मौसम शहर सब पे आपको
40:21
मेरे फादर ने एडिट की थी तो वो ये ये
40:25
रिप्रेजेंटेटिव शायरी है उर्दू में इन
40:27
टॉपिक्स पे आप जाकर सिर्फ उसका जब वह
40:30
देखेंगे इंडेक्स तो ये आप हैरान हो जाएगा
40:32
झांसी की रानी पे एक पोयम है उर्दू में
40:34
मैं आज तक ये उम्र हो गई मेरी वो नजम में
40:37
बिना रो पद ही नहीं पता हूं तो ऐसा ऐसा कम
40:40
है मगर वो लोगों तक नहीं पहुंचा हुआ है
40:42
इसीलिए उनका कुछ इमेज जो है उर्दू का
40:48
बड़ी खूबसूरत बड़ी शायराना जबान है और
40:51
उसमें बड़ी मोहब्बत की बातें सिर्फ
40:53
मोहब्बत की बातें नहीं होती उसमें हर बात
40:55
होती है जब ये सब मैं मैं खासतौर पे
40:59
ऑडियंस के लिए यहां थोड़ा सा एक जिक्र कर
41:01
डन की अभी हाल ही में
41:03
दया गैर फारसी में उसका तर्जुमा हुआ है
41:06
अंग्रेजी में बहुत नौजवान साथी हैं पढ़ते
41:09
हैं mansbin बिलाल इत्तेफाक से इस वक्त
41:12
यहां नहीं है और उन्होंने टेंपल लैंप नाम
41:16
से उसका तर्जुमा किया है अंग्रेजी में
41:17
किताब मौजूद है इसी तरह से गालिब के असर
41:20
का ग़ालिब की बहुत सारी चीजों का अंग्रेजी
41:23
में तर्जुमा हो रहा है और अब बहुत ज्यादा
41:25
तेजी से हो रहा है जनाब इस संजीत सर आप
41:28
साहब यहां मौजूद हैं उनके किताब हमने
41:30
पिछले जो रिश्ते का एडिशन हुआ था
41:33
ग़ालिब शारीरिक खमन ना भाई वो वाला पूरा
41:36
आते हैं वेब से ये mazami ख्याल में वो
41:41
पूरा एक एक अच्छी सेहतमंद कृष्ण की किताब
41:45
है जिसमें बहुत सारे असर हैं और आज एक
41:48
किताब का इतता होने वाला है
41:50
3.5 बजे डॉक्टर नजीब जंग साहब ने ग़ालिब
41:55
का जो पूरा दीवान है उसका अंग्रेजी में
41:58
तर्जुमा किया है तो उसे पे आज यही रखता
42:01
में एक सेशन है उसमें तशरीफ़ लाएगा मैं एक
42:04
बात आपको थोड़ा सा ये याद दिलाना चाह रहा
42:06
था की 1969 में ग़ालिब की बरसी हुई
42:10
और गांधी जी की जयंती भी हुई
42:14
एक अंसार हरवानी साहब आपके मामू आपके मामू
42:18
और वो बैठे हैं कोने में जो आखिरी और
42:21
खुशबू कर रहे हैं उनके वालिद नासिर हरवानी
42:24
वहां बैठे हुए हैं अंसार आडवाणी साहब के
42:26
बेटे वो चेयरमैन सेलिब्रेशन उसके हवाले से
42:30
एक-दो कुछ किस हैं आपको याद है नहीं मुझे
42:32
उसमें क्या है
42:46
अलग-अलग और 14 अगस्त को वहां से छूट द
42:51
कोलकाता जेल से तो वो कांग्रेस के एमपी भी
42:56
रहे काफी दिनों तक मेरे ख्याल से आहिस्ता
42:59
उठ के सामने से लोग जा रहे हैं तो नहीं
43:02
कोई बात नहीं तो
43:04
है तो
43:06
तो अब जल्दी से जल्दी
43:14
लिखिए
43:19
हम दोनों क्या कातिल हैं दोनों के पुजारी
43:25
हम गांधी की तो बड़ी इज्जत करते हैं लेकिन
43:28
गांधी की जो वैल्यूज है उनको हम भूल जाते
43:31
हैं हम गालिब की बड़ी इज्जत करते हैं जो
43:33
लेकिन ग़ालिब की जो जुबान थी उसे भूल जाते
43:35
हैं तो हमें गांधी की वैल्यू की जबान
43:40
दोनों को याद रखना चाहिए
43:43
मैं उनसे बात कर रहा था फोन पर ऐसी बात
43:45
उन्होंने
43:47
साहब का की उसे जमाने में मशहूर था की दिन
43:50
में अंसार हरवानी गांधी जयंती करते हैं और
43:53
रात में ग़ालिब की बरसी
43:55
और और उसे हवाले से बहुत सारी चीज उसे
44:01
वक्त तरतीब दी गई थी हालांकि लोगों ने
44:03
मजाक उदय साहिब ने की तरफ आपने इशारा किया
44:06
लेकिन साथ ही साथ ये भी है की एवं वाले
44:08
मेरे ख्याल से इन सब की शुरुआत
44:20
थी लेकिन हमें दोनों को याद रखना है दोनों
44:23
को इज्ज हैं और दोनों ने जो हमें बताया एक
44:26
ने हमें एक जुबान जी एक ने हमें एक
44:28
संस्कार दिया उन्हें भी तो याद रखना जरूरी
44:31
है ना
44:32
अच्छा ऐसा है सबके आपके जो कुछ पसंदीदा
44:36
कुछ असर जो रह गए हो उनका जिक्र शुरू करना
44:40
चाहें गली के
44:42
थोड़ा सा इसलिए की जब आप आशा के बारे में
44:45
बात करते हैं और समझते हैं एक जमाने में
44:47
आप चैनल भी कुछ ऐसी चलती थी आपकी जिसमें
44:49
आप देखना छोड़ दिया वो अभी चल रही है
44:52
[हंसी]
44:52
[प्रशंसा]
44:56
तो वो गालिब पर कुछ अक्षर एक तश्री लोग
44:59
फरमाइश कर रहे हैं पीछे से
45:02
रेफरेंस याद आते हैं लेकिन मैंने कुछ शेयर
45:05
जो मुझे बहुत पसंद है वो मैंने लिख लिए द
45:07
मैं देखता हूं
45:14
रगों में दौड़ते दौड़ते फिरने के हम नहीं
45:18
आए
45:19
जवाब ही से मैं टपका तो फिर लहू क्या है
45:28
रंग से कुकर हुआ
45:37
हिंसा तो मिट जाता है रंज
45:41
मुश्किलें मुझमें पर पड़ी इतनी क्या आशा
45:44
हो गई
45:45
[प्रशंसा]
45:52
अल्टीमेटली जो प्लेजर है
45:55
ड्रॉप का वो ये है की वो दरिया में जाकर
45:58
खो जाए
45:59
दर्द का हद से गुजरना है
46:03
[प्रशंसा]
46:11
लंबी फेरे
46:20
जी जी
46:33
मत करो
46:35
मारे bukhane में तो काबे में गढ़ो
46:38
ब्राह्मण को
46:40
मंदिर में मार्ता है वही चना रिस्पेक्टबल
46:43
है की यू कैन वेरी एम इन डी कब
46:46
की उसे अपनी जो बिलीव है उससे वह फैठफुल
46:49
है उससे वो नहीं पुरी तरह से कमिटेड है
46:54
क्या
46:59
बंदे में घिराई एन कुछ सुबह
47:07
ब्राह्मण की आजमाइश है ये तो सब जानते हैं
47:12
और ना जनेऊ के घेरे में कोई बात है
47:17
ब्राह्मण और शेर की आजमाइश तो वफादारी में
47:21
है
47:22
[प्रशंसा]
47:24
यह सबसे नहीं चलेगा
48:06
अजीब-अजीब शेर है अब देखिए आप उनका एक शेर
48:08
है की
48:10
पढ़ते हुए खुद से है शबनम को फना की तालीम
48:13
के जब सूरज की किरण पड़ती है उसकी बूंद पे
48:17
तो वो उद जाती है
48:19
प्रोग्राम है तो इवेपरेट जैसे ही सूरज की
48:24
किरण न्यूज़ पर पड़े
48:26
शबनम को फना की ताली
48:29
मैं भी हूं एक इनायत की नजर होने तक
48:34
जैसे ही मुझे अप्रिशिएसन मिला मैं भी खत्म
48:38
हो जाऊं
48:40
जैसे की सूरज की बूंद सूरज की किरण पढ़ते
48:43
ही खत्म हो जाते
48:44
क्या क्या अजीब अजीब शेर है उसके हान वो
48:48
नहीं वफा पर
48:51
[प्रशंसा]
48:55
है बेवफा सही जिसको हो जानू दिल
49:01
से जिसको हो जानो दिल अजीब उसकी गली में
49:04
जाए क्यों
49:08
इसको लोग दिनों दिल अज़ीज़ भी कहते हैं
49:23
तो
49:25
ग़ालिब को आने वाले दिनों में हम कैसे याद
49:28
कर सकते हैं इसलिए की नौजवान नसीब के लोग
49:31
एक बड़ी तादाद में यहां मौजूद हैं डिजिटल
49:34
मीडिया है जमाना बदल रहा है अब वो किताबें
49:37
वगैरा तो पढ़ते हैं लोग लेकिन फिर क्या है
49:56
आज जो है विटामिन की गोली
49:59
आप जब कांस्टेंटली 8 को कंज्यूम करते हैं
50:02
अप्रिशिएट करते हैं तो आपका
50:08
डिवेलप होता है
50:10
आपको समझ में आता है क्या खूबसूरत है और
50:13
क्या खूबसूरत नहीं है धीरे-धीरे
50:16
जो बुरा है वो खूबसूरत नहीं है तो अच्छा
50:20
है वो खूबसूरत होता है तो आपको स्टैटिकली
50:24
अच्छे और बुरे की तमीज होने लगती है
50:27
कोई आदमी जो दीप इन शायरी और शायरी को री
50:30
अप्रिशिएट करता हो वो बहुत नफरत अपने दिल
50:33
में नहीं रख पाएगा शायरी नफरत करने नहीं
50:35
देगी आपको
50:36
[प्रशंसा]
50:39
तो
50:41
अभी हम लोग थोड़ा क्या हो रहा है हमारी जो
50:44
प्रोग्रेस है आगे इंडिविजुअल को लोपिड हो
50:47
रही है
50:48
हमारे हाथ तो आसमान को छू रहे मगर पैर
50:52
जमीन से अलग हो गए थोड़े से
50:55
यह जो हमारी सदियों की तहजीब है ट्रेडीशंस
50:59
है चाहे वो हमारा फाग कार्ट हो चाहे हमारी
51:01
शायरी हो चाहे हमारे डांस हो चाहे मैं
51:04
क्लासिकल म्यूजिक हो दुनिया में एक मुल्क
51:07
हिंदुस्तान जिसमें दो क्लासिकल ट्रेडीशंस
51:10
हैं हिंदुस्तानी संगीत कर्नाटक संगीत
51:12
दुनिया में कोई दूसरा मुल्क नहीं है जो
51:15
वेरिएशन आपका म्यूजिक का महाराष्ट्र जा के
51:18
मणिपुर तक मिलेगा जो कश्मीर से
51:20
कन्याकुमारी मिलेगी
51:55
उन्हें मिलके यहां मैं कंप्लीट पर्सनैलिटी
51:58
बनेंगे वह यह रहा है की हम इसको थोड़ा
52:01
इग्नोर कर गए
52:03
मुझे खुशी है की यह गलती मेरी जेनरेशन से
52:06
हुई थी लेकिन जो आपकी जेनरेशन है आज के जो
52:09
यंगस्टर है उनमें तलाश है की कुछ समान
52:11
कहीं खो गया है वो कहां है आप उसे ढूंढ
52:14
रहे हैं
52:19
तो अब हम आप ही के भरोसे हैं
52:22
और ग़ालिब क्या कर सकते हैं इसमें
52:26
बहुत बड़ा पार्ट है आपके हेरिटेज का उसमें
52:29
कोई शक ही नहीं है और बहुत से लोग हैं
52:32
उनमें से खाली भी है इंपॉर्टेंट आदमी है
52:34
और
52:36
जो हमारे कल्चर
52:46
इतना बड़ा पेट जो है हमारे यहां पैदा हुए
52:49
जैसे हम प्राउड फुल करते हैं की 3.5 हजार
52:52
साल पहले हमारे यहां 4000 साल पहले
52:54
कालिदास हुए हमारे यहां मिर्च के गए हमारे
53:00
यहां अरे अजीब अजीब बातें हुई हैं लोगों
53:03
को पता ही नहीं है दुनिया में पहला मुल्क
53:06
है हिंदुस्तान जहां पर एक ऑर्गेनाइज्ड
53:10
मूवमेंट शुरू हुआ
53:12
3.5 हजार साल पहले
53:15
चार्वाक
53:17
लीडर द बृहस्पति
53:20
साधे 3000 साल पहले वो लोग पैदा
53:24
द की मौत के बाद कुछ नहीं है सब बकवास जिस
53:29
दिन तो मार गए उसे दिन खत्म हो गए ये सबके
53:31
कोई तुम्हें बैठा देख रहा और तुम्हें सजा
53:33
मिलेगी और ये कुछ नहीं होने वाला
53:36
वो गलत कहते द सही कहते द अलग बहस है मगर
53:39
यह कहते तो द
53:41
उद्योग मानते होंगे कुछ लोग नहीं मानते
53:44
होंगे तो
53:50
[प्रशंसा]
53:54
लेकिन यह
53:56
थॉट थी और कमल क्या है की इस समाज ने
54:01
बृहस्पति को
54:03
उसे समाज ने जिसने चारबाग जैसे मोमिन चलाए
54:06
द गोली नहीं मार दी थी कानपुर की तरह
54:10
पंसारे की तरह
54:12
[प्रशंसा]
54:17
की थी मेरे ख्याल से कुछ लोग जानना
54:20
चाहेंगे की कहा जाता है की ग़ालिब हमने
54:23
सिर्फ शायरी की बात की है आपको पता है
54:26
गालिब ने बहुत सारे लिखे हैं और कुछ
54:29
स्कॉलरशिप यहां तक कहते हैं की ग़ालिब के
54:32
जो खाटू हैं उनका प्रस में तकरीबन उतना ही
54:36
मकाम है जितना शायरी में उनके असर की वजह
54:39
से उनके खुद के बारे में कुछ
54:44
दुनिया में
54:46
99% लोग यह बिलीव करते हैं की जो नहीं हुआ
54:50
है वह नहीं होना चाहिए
54:51
नथिंग शोल्ड हैपन फॉर डी फर्स्ट टाइम अरे
54:55
भाई पहली बार नहीं होगा तो होगा कैसे मगर
54:58
पहली बार कुछ करने को लोग तैयार नहीं होते
55:01
फिर
55:06
जमाने में एक बड़ा फॉर्मल तरीका था लेटर
55:09
लिखने का उसकी लैंग्वेज भी अलग होती थी जो
55:13
आप बात नहीं करते वो लेटेस्ट में होती थी
55:15
ग़ालिब ने उसे तोड़ दिया
55:17
फिर सामने बैठ के बात कर रहा है ऐसे
55:24
किसी ने इस तरह के हथिनी पड़े द इस अंदाज़
55:28
से के जैसे बात हो रही है लिख तो रही ही
55:30
नहीं वो तो वो हंगामा कर दिया उन्होंने
55:32
इसलिए की वो पहली बार इस तरह के खत लिखे
55:35
गए हैं पहली बार बहुत कम लोग होते हैं जो
55:39
कोई नया कम करने की हिम्मत रखते हैं
55:41
ग़ालिब ने किया और फिर उसका जबान पे भी
55:45
असर
55:46
पडले पे भी असर पड़ा जो लेटर राइटिंग है
55:49
उसे पर भी असर पड़ा और आज जो लिटरेचर की
55:51
तरह पढ़े जाते हैं
55:56
लेटेस्ट इसलिए की वो बहुत पढ़ने वाली बात
55:59
है और बहुत dilchas में उनके खाते हैं और
56:02
जो अंदाज़ है उनका वो लिखने का वो बस
56:04
दिलचस्प है मेरे ख्याल से हमारा वक्त हुआ
56:06
जाता है जब ये सब बहुत ने हमारा तो वक्त
56:10
नहीं होता है
56:11
ये ये प्रोग्राम खत्म हो रहा है हमारा
56:15
वक्त तो अभी बहुत दिनों बाद आएगा
56:16
[प्रशंसा]
56:19
स्टार के साथ यहां बैठ के बात करना आप देख
56:22
रहे हैं
56:23
हमारे दोस्त हैं
56:26
वो अंग्रेजी के जर्नलिस्ट है अपने
56:29
पॉप्युलर है तो उन्हें ख्याल आया की भाई
56:31
मैं अंग्रेजी में जर्नलिज्म करता हूं तो
56:34
एक सर्टेन सर्कल तक पहुंचता हूं मुझे
56:36
हिंदी में भी इंटरव्यू लेना चाहिए ताकि
56:38
मेरा सर्कल बड़ा हो तो मेरी सहमत पहला
56:41
इंटरव्यू उन्होंने मेरे ही ले लिया और वो
56:44
अपना सवाल लिख के ले द ठीक चलते रहे
56:47
आखिरी सवाल में उन्होंने पोल खोल दी
56:54
आपको इतने वोट मिले हैं इतने ऑनर्स मिले
56:57
हैं इतनी आपने अचीवमेंट किए हैं
57:00
आपकी कोई आखिरी ख्वाहिश है
57:04
वो कहना चाहे ये चाह रहा था की अब आपका
57:06
क्या एंबीशन है क्या आपकी कोई आखिरी
57:09
ख्वाहिश है तो मैंने उनसे पूछा की मतलब इस
57:12
इंटरव्यू के बाद आप क्या मुझे गोली मरने
57:14
वाले हैं
57:15
ये आप फांसी देने वाले हैं जो आप मेरी
57:18
आखिरी ख्वाहिश पूछ रहे हैं
57:20
तो ऐसा हो जाता है तो हमारा वक्त नहीं आया
57:23
देखिए कुछ नहीं वो सवाल मेरे ख्याल से है
57:25
नहीं साहब इनका सवाल तो होगा देखा जाए
57:30
पोयम का रही हैं सुनने के लिए
57:32
[प्रशंसा]
57:37
हान साहब
57:39
[प्रशंसा]
57:43
इतनी देर से सिर्फ कैसे करो हो रहा है
57:46
[प्रशंसा]
57:51
ठीक है 225 साल नहीं हुए तो क्या हुआ
57:55
ठीक है
57:57
ना तो रोशन है इंशाल्लाह 225 साल तक के
58:01
अब हो तो क्या ना हो तो क्या
58:04
तब तक हमारा वक्त हो जाएगा
58:08
एक छोटी सी पोयम सुना देता हूं भैया
58:10
चलते-चलते
58:12
उसका नाम है यह खेल क्या है
58:15
[प्रशंसा]
58:21
मेरे मुखालिफ ने चाल चल दिए
58:24
और अब मेरी चाल के इंतजार
58:30
खानों में रखे काले सफेद मुहर्रम को देखता
58:34
हूं मैं सोचता हूं ये मेरे क्या है अगर
58:38
मैं समझूं की ये जो बोल रहे हैं सिर्फ
58:40
लकड़ी के हैं खिलौने है तो जितना क्या है
58:43
हर ना क्या है ना यह जरूरी ना वो है अगर
58:47
खुशी है ना जितने की नहाने का ही कोई गम
58:50
है तो फिर क्या
58:54
मैं सोचता हूं जो खेलना है तो अपने दिल
58:57
में यकीन कर लूं
58:59
यह मोर सचमुच के बादशाह हो अज़ीज़ सचमुच
59:03
के हैं प्याज
59:04
और इनकी आगे है दुश्मनों की फौज रखती है
59:08
जो की मुझको तबाह करने
59:12
मगर मैं ऐसा क्यों
59:15
सोचता हूं यह खेल कब है
59:18
यह जंग है जिसको जितना है ये जंग है
59:21
जिसमें सब है
59:22
कोई ये कहता है जैसे मुझसे ये जंग भी है
59:25
यह खेल भी है यह जंग है पर खिलाड़ियों की
59:28
ये खेल है जंग की तरह का
59:31
मैं सोचता हूं जो खेल है इसमें इस तरह का
59:35
उसूल क्यों है
59:38
मगर जो है बादशाह कभी उसे पर आंच भी ना आए
59:48
सोचता हूं जो खेल है इसमें
59:53
जाए मगर जो है बादशाह उसे पर कभी कोई आंच
59:57
भी ना आए
59:59
वज़ीर को ही वह बस इजाजत की जिस तरफ भी
1:00:03
चाहे
1:00:06
मैं सोचता हूं जो खेल है उसमें इस तरह का
1:00:08
उसूल क्यों है प्यादा जो अपने घर से निकले
1:00:11
पलट के वापस ना जाने पाए
1:00:16
मैं सोचता हूं अगर यही है उसूल तो फिर
1:00:19
उसूल क्या है
1:00:21
अगर यही है यह खेल तो फिर ये खेल क्या है
1:00:25
बहन सवालों से जाने कबसे रहा हूं मेरे
1:00:30
मुखालिफ ने चल चल दिए और अब मेरी चाल है
1:00:33
इंतजार में
1:00:37
बहुत-बहुत शुक्रिया जावेद अख्तर साहब
1:00:40
[संगीत]
1:00:48
[संगीत]
— end of transcript —
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