WEBVTT

00:00:00.330 --> 00:00:09.150
[संगीत]

00:00:11.218 --> 00:00:14.779
आदाब नमस्कार

00:00:19.000 --> 00:00:27.710
[प्रशंसा]

00:00:50.520 --> 00:00:56.760
तो मैं आपसे यह जानना चाहता हूं की आपका

00:00:53.640 --> 00:01:01.920
जो ग़ालिब है वो आपको कितना याद है तो अगर

00:00:56.759 --> 00:01:05.099
आप इजाजत दें तो मैं पहला मिश्रा कहूं और

00:01:01.920 --> 00:01:08.640
यह पुरी ऑडियंस यहां जितने नाजरीन हैं ऐसा

00:01:05.099 --> 00:01:10.879
में है वो दूसरा जो मिश्र है अगर आपको याद

00:01:08.640 --> 00:01:15.439
पड़ता है तो जोर से कहिए चीख के कहिए

00:01:10.879 --> 00:01:15.438
पूछते हैं वो के ग़ालिब कौन है

00:01:17.459 --> 00:01:21.449
क्या बात है साहब वह तालियां आप सब लोगों

00:01:20.099 --> 00:01:24.739
के लिए इसलिए

00:01:21.450 --> 00:01:27.780
[प्रशंसा]

00:01:24.739 --> 00:01:30.618
अब पहले मिश्रा ए रहा है दिल ए नादान तुझे

00:01:27.780 --> 00:01:30.618
हुआ क्या है

00:01:33.060 --> 00:01:40.439
है और भी दुनिया में सुखांवर बहुत अच्छे

00:01:36.519 --> 00:01:45.539
[प्रशंसा]

00:01:40.438 --> 00:01:49.599
जब ऐसा यह आपकी ऑडियंस है भाई

00:01:45.540 --> 00:01:49.600
[हंसी]

00:01:51.239 --> 00:01:59.879
तो जैसा आप सब लोग जानते हैं की तकरीबन

00:01:55.280 --> 00:02:03.359
1797 के हम बात कर रहे हैं 1797 मिर्ज़ा

00:01:59.879 --> 00:02:04.519
असादुल्लाह बैंक 27 दिसंबर को आगरे में

00:02:03.359 --> 00:02:09.000
पैदा होते हैं

00:02:04.519 --> 00:02:13.560
असद तकल्लुफ रखते हैं पहले फिर कई bujuhat

00:02:09.000 --> 00:02:16.500
हैं असद का taklliftar को उठाकर टाक पर रख

00:02:13.560 --> 00:02:19.800
देते हैं और ग़ालिब के नाम से और ज्यादा

00:02:16.500 --> 00:02:22.560
मशहूर होते हैं और आज का जो हमारा टाइटल

00:02:19.800 --> 00:02:25.819
है वो आपके सामने है तो मैं जावेद साहब

00:02:22.560 --> 00:02:30.560
यहां अब आपको लाना चाहता हूं

00:02:25.818 --> 00:02:30.560
की ग़ालिब एक सुपरस्टार की तरह

00:02:30.919 --> 00:02:37.559
अमिताभ बच्चन हैं इंडस्ट्री के जैसे होता

00:02:33.959 --> 00:02:39.800
ना वह दिलीप कुमार हैं वह कोई और दुनिया

00:02:37.560 --> 00:02:43.819
के कोई अगर आदमी

00:02:39.800 --> 00:02:43.819
निशानी हो सकती है कोई सिंपल

00:02:51.120 --> 00:02:55.739
करती है उनको तकरीबन पैदा हुए सवा 200 साल

00:02:53.878 --> 00:02:58.378
होने को ए रहे हैं और यही दिसंबर का महीना

00:02:55.739 --> 00:03:02.340
है जिसमें 27 दिसंबर मैंने कहा ना की उनके

00:02:58.378 --> 00:03:05.039
होम में पैदाइश है तो ग़ालिब को हम क्यों

00:03:02.340 --> 00:03:09.479
इतना याद रखते हैं और भी बहुत सारे शो हुए

00:03:05.039 --> 00:03:11.539
हैं जॉब हैं अमीर हैं एक से एक बड़े शायर

00:03:09.479 --> 00:03:11.539
है

00:03:12.180 --> 00:03:18.500
सही का रहे हैं आप देखिए किसी ने एक बात

00:03:16.199 --> 00:03:21.539
कही थी और

00:03:18.500 --> 00:03:24.959
मुझे ऐसा पढ़ते लगा था की काश ये मैंने

00:03:21.539 --> 00:03:27.799
कही होती बहुत अच्छी बात

00:03:24.959 --> 00:03:30.719
डी ग्रेट शायरी इस

00:03:27.800 --> 00:03:34.019
फेल्ट थॉट

00:03:30.719 --> 00:03:37.859
वह दिल ने महसूस किए हो दिमाग में समझिए

00:03:34.019 --> 00:03:40.860
वो बात जो है वो पायदान होती है अगर बात

00:03:37.860 --> 00:03:43.500
में सिर्फ इमोशन है जज्बात है तो थोड़ी

00:03:40.860 --> 00:03:46.140
देर तक आपको bahlayega और फिर इमोशन खत्म

00:03:43.500 --> 00:03:49.378
हो जाते हैं बाद में अगर सिर्फ अक्ल है

00:03:46.139 --> 00:03:50.779
लॉजिक है रीजन है तो आपके दिल को अपील

00:03:49.378 --> 00:03:53.759
नहीं करेगी

00:03:50.780 --> 00:04:00.500
ग़ालिब की शायरी में खूबी यह है की वो

00:03:53.759 --> 00:04:00.500
फेल्ट थॉट उसमें लॉजिक है उसमें

00:04:00.680 --> 00:04:10.739
एक आगे देखती हुई नजर है जो तू जो है

00:04:06.560 --> 00:04:14.719
और उसके साथ भी उसमें जज्बात की नरमी

00:04:10.739 --> 00:04:14.719
रास्ते में है यह कांबिनेशन

00:04:26.418 --> 00:04:37.319
की कहानी हो कोई आपकी जाती हम उलझन दुख

00:04:32.600 --> 00:04:38.960
तन्हाई का एहसास या हैरत की दिन दुनिया

00:04:37.319 --> 00:04:42.540
में क्या हो रहा है

00:04:38.959 --> 00:04:45.500
जो कुछ दुनिया में होता है और जो कुछ दिल

00:04:42.540 --> 00:04:48.740
में होता है उसके लिए आपको शेयर मिल जाएगा

00:04:45.500 --> 00:04:48.740
इतनी सी की किताब

00:04:53.540 --> 00:05:02.220
का भी उसका कोई मुकाबला नहीं

00:04:57.959 --> 00:05:05.279
इस वजह से वो आज तक जिंदा है और जो बात

00:05:02.220 --> 00:05:08.759
उसने पॉइंट्स निकले हैं ह्यूमन रिलेशनशिप

00:05:05.279 --> 00:05:11.579
में वह हम कभी सोच भी नहीं सकते द की यह

00:05:08.759 --> 00:05:13.860
भी हान यह भी एक बात तो वही जो है जो

00:05:11.579 --> 00:05:16.198
हमारी आंखों के सामने है उसी में से वो

00:05:13.860 --> 00:05:18.560
कुछ निकल के हमको देता है जो हम नहीं देख

00:05:16.199 --> 00:05:18.560
पाए द

00:05:23.000 --> 00:05:29.579
इलेक्शन से पहले वादे बहुत होते हैं यह कर

00:05:26.639 --> 00:05:32.600
देंगे वह कर देंगे अब मुझे आजकल एक शेर

00:05:29.579 --> 00:05:32.599
वाली बहुत याद आता है

00:05:33.740 --> 00:05:42.180
जाम के जब शराब पार्टी जाती थी और जाम

00:05:38.519 --> 00:05:45.859
बैठे जाते द तो मेरे से तो पहुंचने नहीं द

00:05:42.180 --> 00:05:45.860
यह मुस्ताक कैसे पहुंच गया

00:05:48.259 --> 00:05:53.300
साकी ने कुछ मिलना दिया हो शराब में

00:05:54.918 --> 00:05:59.299
कुछ मिला ना दिया हो शराब में

00:06:00.500 --> 00:06:06.600
अनोखा अछूता एंगल है तो यह आपको मिलता ही

00:06:05.160 --> 00:06:10.439
रहता है

00:06:06.600 --> 00:06:13.680
और कोई भी जिंदगी का पहलू हो उसमें आपको

00:06:10.439 --> 00:06:16.879
ghalip का रेलवे शेयर मिल जाएगा ही वो

00:06:13.680 --> 00:06:20.400
थिंकर एंड मैन विद ग्रेट इमोशन

00:06:16.879 --> 00:06:24.418
यह कम होता है की दिल भी हो और दिमाग भी

00:06:20.399 --> 00:06:27.538
हो यह गालिब क्या है ग़ालिब की शायरी जो

00:06:24.418 --> 00:06:31.198
है वो उसमें सेल्फ की नहीं है

00:06:27.538 --> 00:06:36.360
उसमें एक भाई टेंपरामेंट है इस विक्टोरियस

00:06:31.199 --> 00:06:40.080
पॉइंट और वह देखता है वो बड़े ऑब्जेक्ट

00:06:36.360 --> 00:06:42.560
केवली राम को भी एनालाइज करके देखता है तो

00:06:40.079 --> 00:06:45.839
ये बड़ी रेल क्वालिटी

00:06:42.560 --> 00:06:48.180
का गम को एनालाइज करता है बहुत बार शिकायत

00:06:45.839 --> 00:06:50.519
ये होती है की थोड़ा सडिस्ट हो जाते हैं

00:06:48.180 --> 00:06:53.100
ग़ालिब राम को बहुत ज्यादा एंजॉय करते हैं

00:06:50.519 --> 00:06:55.500
इन लुत्फ लेते हैं मजा आता है उनको अपने

00:06:53.100 --> 00:06:57.199
आप को तकलीफ देने में शेर बताएं कोई इन आप

00:06:55.500 --> 00:07:00.899
लोगों के पांव से घबरा गया था मैं जी हुआ

00:06:57.199 --> 00:07:04.879
वो खुश हुआ है राव को हर देखकर एक और शेर

00:07:00.899 --> 00:07:09.299
जैसे की याद है और गली मुझे वो दिन के

00:07:04.879 --> 00:07:13.918
बछड़े शौक में याद है गली- मुझे वो दिन के

00:07:09.300 --> 00:07:15.020
वजह सेक में जख्म से गिरता तो पलकों से च

00:07:13.918 --> 00:07:17.818
था नामक

00:07:15.019 --> 00:07:20.418
चलिए दोनों शेर एनालाइज कर लेते हैं क्या

00:07:17.819 --> 00:07:20.419
बात इसमें

00:07:20.639 --> 00:07:26.360
के एक इसे मैं ट्रांसलेट करता हूं सिंपल

00:07:22.978 --> 00:07:30.360
लैंग्वेज में क्योंकि इधर लिए

00:07:26.360 --> 00:07:33.900
मेरे पैरों में जो चले पद गए द मैं उनसे

00:07:30.360 --> 00:07:36.000
बहुत दुखी था परेशान था की क्या हो गया और

00:07:33.899 --> 00:07:40.219
रास्ते में जो कांटे में देख रहा हूं तो

00:07:36.000 --> 00:07:40.220
खुश हुआ है मेरा दिल की चले futenge हम

00:07:40.978 --> 00:07:48.300
साला सिंबल है जो इंटरनल सोलो सोलो का चला

00:07:46.079 --> 00:07:51.538
सिंबल है जो आप भुगत रहे हैं आप ही भुगत

00:07:48.300 --> 00:07:53.939
रहे आपके अंदर है ये कांटे जिंदगी के

00:07:51.538 --> 00:07:55.560
इम्तिहान जिंदगी मुश्किलों जिंदगी की

00:07:53.939 --> 00:07:58.620
दुश्वारियां का सिंबल है

00:07:55.560 --> 00:08:03.240
अब मैं इन पे चलूंगा तो जो मेरे अंदर बाहर

00:07:58.620 --> 00:08:05.639
ए जाएगा देखा जाएगा यह मतलब वह अपने छालों

00:08:03.240 --> 00:08:08.579
को बचाकर नहीं रख रहा है वो जो पैर में

00:08:05.639 --> 00:08:10.199
उसके अवल हैं वो उनमें रो नहीं रहा है वो

00:08:08.579 --> 00:08:14.959
गर्म वाला दिल खुश हो रहा है की सामने केट

00:08:10.199 --> 00:08:14.960
है अब ये चले futegi खत्म होगा|

00:08:20.240 --> 00:08:27.418
की लज्जत देखिए

00:08:23.478 --> 00:08:29.758
हम बार-बार ये इक यहां जारी रहेगा की

00:08:27.418 --> 00:08:32.399
ग़ालिब के वो कौन से असर हैं और ग़ालिब का

00:08:29.759 --> 00:08:35.060
वो कौन सा फलसफा है जो जिसकी वजह से गालिब

00:08:32.399 --> 00:08:37.679
गालिब है लेकिन यहां

00:08:35.059 --> 00:08:40.379
थोड़ा सा मैं चाहता हूं जरा सब माहौल

00:08:37.679 --> 00:08:42.500
बदलने के लिए आपकी इजाजत के आम तौर पर

00:08:40.379 --> 00:08:45.899
क्या हुआ है की ग़ालिब के जमाने से अब तक

00:08:42.500 --> 00:08:47.360
जो गालिब ने कहा नहीं है वो भी ग़ालिब के

00:08:45.899 --> 00:08:50.519
नाम मंसूब है

00:08:47.360 --> 00:08:53.700
अटरीब्यूट किया जाता है और जो सोशल मीडिया

00:08:50.519 --> 00:08:56.159
पर आपने जो लोग एक्टिव हैं सर गर्म है वो

00:08:53.700 --> 00:08:57.899
उन्होंने कभी नोट किया होगा की एक बड़ी

00:08:56.159 --> 00:08:59.879
तादाद में ऐसे शेर सर्कुलेट हो रहे हैं

00:08:57.899 --> 00:09:02.519
जिसका सर्टिफिकेट से दूर-दूर तक कोई

00:08:59.879 --> 00:09:04.139
ताल्लुक नहीं है और उनमें एक हमारे बहुत

00:09:02.519 --> 00:09:06.440
मशहूर सियासत दाएं हैं बड़े प्यारे अच्छे

00:09:04.139 --> 00:09:10.139
इंसान हैं और वज़ीर वगैरा भी रह चुके हैं

00:09:06.440 --> 00:09:12.240
ऐसा उन्होंने एक ट्वीट लगाई और वो बड़ी

00:09:10.139 --> 00:09:15.120
जबरदस्त ट्वीट थी लेकिन ये की वो अगर आप

00:09:12.240 --> 00:09:16.560
इजाजत दें तो मैं उसको मुझे याद तो नहीं

00:09:15.120 --> 00:09:19.639
है इसलिए की ग़ालिब का शेर होता तो याद

00:09:16.559 --> 00:09:23.039
होता है जो चीज सर्कुलेट हो रही है मैं ये

00:09:19.639 --> 00:09:25.799
आपको जरा सा दिखाना चाहता हूं की किस

00:09:23.039 --> 00:09:28.679
किस्म का

00:09:25.799 --> 00:09:30.899
किस किस्म का जो मटेरियल है ग़ालिब के नाम

00:09:28.679 --> 00:09:34.919
से वो चल रहा है

00:09:30.899 --> 00:09:37.940
खुदा की मोहब्बत को फना कौन करेगा सभी

00:09:34.919 --> 00:09:42.240
बंदे नेक हैं तो गुना कौन करेगा

00:09:37.940 --> 00:09:45.959
ए खुदा मेरे दोस्तों को सलामत रखना वर्ण

00:09:42.240 --> 00:09:50.278
मेरी सलामती की दुआ कौन करेगा और रखना

00:09:45.958 --> 00:09:53.399
मेरे दुश्मन को भी महसूस वर्ण मेरी तेरे

00:09:50.278 --> 00:09:56.879
पास आने के दुआ कौन करेगा मैं और आगे

00:09:53.399 --> 00:10:01.139
अंग्रेजी में लिखा है मिर्ज़ा ghalibs 228

00:09:56.879 --> 00:10:02.639
बर्थडे सो में ग्रेट लाइंस यह एक बहुत

00:10:01.139 --> 00:10:04.799
बड़े इंटेलेक्चुअल है और बड़े प्यारे

00:10:02.639 --> 00:10:06.539
इंसानों में बार-बार का रहा हूं की वो कम

00:10:04.799 --> 00:10:11.759
पढ़े लिखे नहीं हैं बहुत बड़े ऑथर हैं

00:10:06.539 --> 00:10:14.599
लेकिन ये उनकी ट्वीट तो उसपे जावे साहब ने

00:10:11.759 --> 00:10:14.600
जारी की

00:10:15.600 --> 00:10:18.680
आपको याद दिखे

00:10:18.799 --> 00:10:26.939
बहुत सारे अखबार वालों ने बना दी

00:10:23.179 --> 00:10:30.259
लेकिन जिया ग़ालिब की लेने नहीं है

00:10:26.940 --> 00:10:34.200
इसी तरह से एक और शेर पार्लियामेंट में

00:10:30.259 --> 00:10:37.019
मतलब 12 प्राइम मिनिस्टर डिबेट में चल रहा

00:10:34.200 --> 00:10:40.500
था मामला और एक और टॉप जिसको कहते हैं

00:10:37.019 --> 00:10:44.100
साहब लोगों ने एक शेर पढ़ा वो आपने भी

00:10:40.500 --> 00:10:48.000
बहुत सुना होगा की चेहरे पे धूल थी साफ

00:10:44.100 --> 00:10:49.040
करता रहा कुछ आपको कुछ आए द क्या है वो

00:10:48.000 --> 00:10:53.240
क्या है

00:10:49.039 --> 00:10:53.240
मुझे गलत शेर याद नहीं रहते

00:10:53.470 --> 00:11:01.259
[प्रशंसा]

00:10:57.320 --> 00:11:03.778
चेहरे पे धुलती और ग़ालिब अपना चेहरा साफ

00:11:01.259 --> 00:11:06.958
करने आईने पे धुलती गली अपने चेहरा साफ

00:11:03.778 --> 00:11:10.740
करता रहा कुछ इस तरह का है पार्लियामेंट

00:11:06.958 --> 00:11:13.759
से हुआ और जावेद साहब के भाई खुदा के

00:11:10.740 --> 00:11:13.759
वास्ते यह भी गालिब नहीं है

00:11:14.039 --> 00:11:21.778
ये ralib की जिंदगी में भी हुआ है की कुछ

00:11:17.339 --> 00:11:24.300
भी लोगों ने लिखा है तो एक सांप ग़ालिब के

00:11:21.778 --> 00:11:28.100
पास पहुंचे ट्रू इंसीडेंट है की सर ये एक

00:11:24.299 --> 00:11:28.099
शेर सुना है हुजूर के

00:11:28.320 --> 00:11:37.700
असत इस जफ़ा पर भी तूने वफा की

00:11:31.820 --> 00:11:39.860
मेरे शेर शाबाश रहमत खुदा की तो चलिए आप

00:11:37.700 --> 00:11:42.899
एक takllion

00:11:39.860 --> 00:11:44.210
अगर यह मुझे सच कहा है तो लानत खुदा की

00:11:42.899 --> 00:11:46.919
किसी औरत संस्कार है

00:11:44.210 --> 00:11:49.519
[हंसी]

00:11:46.919 --> 00:11:54.599
तो अब क्या होता है

00:11:49.519 --> 00:11:58.200
वो मतलब दुनिया में एक बात बता डन आपको ये

00:11:54.600 --> 00:12:00.000
नॉलेज की कोई लिमिट हो तो हो एक नाराज की

00:11:58.200 --> 00:12:04.379
कोई लिमिट नहीं है

00:12:00.000 --> 00:12:08.100
मुझे यह मैं आपको जोक नहीं सुना रहा हूं

00:12:04.379 --> 00:12:10.578
एक पार्टी में आते कोई 15 20 साल पहले

00:12:08.100 --> 00:12:15.330
मुझसे एक लेडी ने पूछा था

00:12:10.578 --> 00:12:18.598
जावेद साहब आपका दीवाने खाली भेज हैं

00:12:15.330 --> 00:12:18.599
[प्रशंसा]

00:12:22.759 --> 00:12:27.958
ऐसा लगता है ग़ालिब का कहेंगे तो जरा

00:12:25.200 --> 00:12:30.420
क्रेडिट इम्यूनिटी बढ़ जाएगी लेकिन बेचारे

00:12:27.958 --> 00:12:33.778
ग़ालिब को इस मामले में बहुत मुसीबतें

00:12:30.419 --> 00:12:35.879
झेलनी पद रही है आजकल और वैसे की जो उसने

00:12:33.778 --> 00:12:38.278
कहा नहीं वो उसके नाम से ये तो बड़ा कॉमन

00:12:35.879 --> 00:12:40.620
हो गया आजकल ये गली भी का मामला नहीं है

00:12:38.278 --> 00:12:42.059
यह तो हमारे साथ भी होता है दूसरों के साथ

00:12:40.620 --> 00:12:46.500
भी होता है उसने कहा ही नहीं का रहे तुम

00:12:42.059 --> 00:12:49.439
ने कहा था तो यह सब होता रहता है तो हमने

00:12:46.500 --> 00:12:53.159
जहां एक बात का आगाज किया था की ग़ालिब

00:12:49.440 --> 00:12:55.560
इतने अजीम शायर क्यों हैं वह कौन से शेड्स

00:12:53.159 --> 00:12:58.019
है जावे सब जो जाती तौर पर आपको गालिब के

00:12:55.559 --> 00:13:01.018
बहुत ज्यादा पसंद आते हैं देखिए ग़ालिब

00:12:58.019 --> 00:13:03.360
मतलब सवाल 200 साल पहले पैदा हुए द और उसे

00:13:01.019 --> 00:13:05.278
जमाने में भी जब उन्होंने बड़ी इंगेजमेंट

00:13:03.360 --> 00:13:06.778
में लिखना शुरू कर दिया था 11 साल की उम्र

00:13:05.278 --> 00:13:09.958
से लिख रहे

00:13:06.778 --> 00:13:13.439
तो उसे जमाने में भी ग़ालिब की जबान बहुत

00:13:09.958 --> 00:13:15.899
मुश्किल मणि जाती थी और ग़ालिब क्या का

00:13:13.440 --> 00:13:18.480
रहे हैं बहुत से लोग नहीं समझ पाते द और

00:13:15.899 --> 00:13:21.200
नाराज होते द क्या लिखते हैं भाई ये मतलब

00:13:18.480 --> 00:13:24.420
उसी अल्टीमेट ralib को यह शेयर लिखना पड़ा

00:13:21.200 --> 00:13:28.379
एन सताए इश्क की तमन्ना ना चले की परवाह

00:13:24.419 --> 00:13:32.419
घर नहीं है मेरे असर में माने ना सही तो

00:13:28.379 --> 00:13:35.399
ये उनकी जो दुश्वार जबान थी और जो उनका

00:13:32.419 --> 00:13:39.719
कॉम्प्लिकेटेड लेयर थॉट होता तो आम आदमी

00:13:35.399 --> 00:13:42.778
तक पहुंच नहीं पता था तो उससे तब तकलीफ थी

00:13:39.720 --> 00:13:45.778
तो अब तो होगी अब तो दबाना बदल गया जबान

00:13:42.778 --> 00:13:48.600
भी बदल गई है कितनी मगर उनके जो शेर है

00:13:45.778 --> 00:13:50.519
मुझे ट्रांसलेट करने पड़ेंगे सदा जमा जो

00:13:48.600 --> 00:13:52.639
मुझे लगता है की देखिए कितना फॉरवर्ड

00:13:50.519 --> 00:13:52.639
लुकिंग

00:14:06.620 --> 00:14:10.879
क्या जिसका मतलब

00:14:26.839 --> 00:14:32.779
जिस इंसान को कुछ पता है उसकी किस्मत में

00:14:30.419 --> 00:14:32.778
लिखी हुई

00:14:35.700 --> 00:14:40.800
और आज भी आप देखिए की दुनिया में

00:14:38.159 --> 00:14:44.879
क्या-क्या हो रहा है फ्रॉम उस तो इंडिया

00:14:40.799 --> 00:14:47.639
तू चीन तू एवरी बेयर तू योर अप तू स्वीडन

00:14:44.879 --> 00:14:48.899
क्यूट अपने एवरी टाइम में रहते हैं वो

00:14:47.639 --> 00:14:51.120
खुशियां उनको कुछ पता ही नहीं क्या हो रहा

00:14:48.899 --> 00:14:52.639
है क्या नहीं हो रहा है मजे में है हैप्पी

00:14:51.120 --> 00:14:55.320
कूल

00:14:52.639 --> 00:14:58.139
मगर जीने पता है की क्या हो रहा है और

00:14:55.320 --> 00:15:01.440
क्या हो रहा है होता जा रहा है वो लोग जो

00:14:58.139 --> 00:15:07.339
है वो बेचैन है बेताब है तो ये बेटा भी जो

00:15:01.440 --> 00:15:07.339
है वो समझदार की और जो अवैध है

00:15:08.480 --> 00:15:15.420
उसके किस्मत में लिखी हुई है बेचैनी दिल

00:15:11.220 --> 00:15:17.759
की बाकी तो है सियाराम से हो बेचारे

00:15:15.419 --> 00:15:19.458
यह अब देखिए यह कोई पुराना ख्याल तो नहीं

00:15:17.759 --> 00:15:23.778
है आज का

00:15:19.458 --> 00:15:26.539
और उसको आज की ही लिए शायरी कर रहा था

00:15:23.778 --> 00:15:30.299
उसने शायरी अपने वक्त के लिए नहीं किए

00:15:26.539 --> 00:15:32.338
उसकी शायरी बड़ी फ्यूचरिस्टिक थी उसका एक

00:15:30.299 --> 00:15:34.819
और छोटा तो फिर उसे भी मुझे ट्रांसलेट

00:15:32.339 --> 00:15:34.820
करना पड़ेगा

00:15:57.740 --> 00:16:05.339
मैं तो उसे

00:16:01.159 --> 00:16:09.240
बाग का पंछी हूं उसे बाग की कोयल हूं अगर

00:16:05.339 --> 00:16:13.760
हिंदी में कहे हम की जो अभी बनाई नहीं है

00:16:09.240 --> 00:16:13.759
मैं उसे पास का पंछी हूं जो बनेगा कभी

00:16:14.039 --> 00:16:20.599
अब आप यह रिच देखिए यार

00:16:17.299 --> 00:16:20.599
क्या का रहा है

00:16:25.278 --> 00:16:31.500
टूट चुकी थी बहादुर शाह पर खत्म हो चुके द

00:16:28.559 --> 00:16:33.539
एक लोगों में क्या होता है की जब आप तबाही

00:16:31.500 --> 00:16:35.698
की तरफ जाते तो आप मेरे वायरल भी आता है

00:16:33.539 --> 00:16:38.879
की नहीं साहब जो हमारा पहले था वो कितना

00:16:35.698 --> 00:16:43.099
अच्छा था वो कैसे खत्म हो सकता है

00:16:38.879 --> 00:16:46.220
उसका शेर सुनी है यह फॉरवर्ड लुकिंग आज भी

00:16:43.100 --> 00:16:46.220
इमाम हुसैन

00:16:48.659 --> 00:16:52.519
कब मेरे पीछे है

00:16:53.129 --> 00:17:01.799
[प्रशंसा]

00:16:56.958 --> 00:17:04.438
की जो ट्रेडिशनल है जो आज तक और जीने का

00:17:01.799 --> 00:17:08.938
तरीका था वो मुझे रोक रहा है

00:17:04.439 --> 00:17:12.720
और जो इन लोगों की नजर में खुश है जो गलत

00:17:08.939 --> 00:17:14.100
है जो नया है जो डिफरेंस है वो मुझे खींच

00:17:12.720 --> 00:17:17.900
रहा है

00:17:14.099 --> 00:17:21.500
कब इस डी सिंबल ऑफ ट्रेडीशन वो मेरे पीछे

00:17:17.900 --> 00:17:21.500
अलीशा इस डी मॉडर्न

00:17:24.679 --> 00:17:31.100
जा रही थी और pianoli जा रही थी तो वो

00:17:27.599 --> 00:17:35.699
सिंबल था नई नॉलेज का

00:17:31.099 --> 00:17:37.319
वो मुझे बुला रहा है तो ही है ऑलवेज लुक

00:17:35.700 --> 00:17:40.380
फॉरवर्ड

00:17:37.319 --> 00:17:43.918
और उसकी शायरी में जगह-जगह पे आपको दिखाई

00:17:40.380 --> 00:17:46.860
देता है की यह आदमी आने वाले जवानों को

00:17:43.919 --> 00:17:49.620
देख रहा है डेट मेक सैम सो ग्रेट लेकिन

00:17:46.859 --> 00:17:52.139
आने वाले जवानों को देखने का मतलब ये नहीं

00:17:49.619 --> 00:17:56.639
है की वो कहां हम इंसान के दुख को नहीं

00:17:52.140 --> 00:18:01.100
समझ रहा उसकी तन्हाई को उसकी मौजूद है तो

00:17:56.640 --> 00:18:01.100
यह जो इतना ऑल है

00:18:01.460 --> 00:18:07.200
डेट इस मैं मतलब पीपल मैं तो इतना काबिल

00:18:04.440 --> 00:18:10.880
आदमी नहीं हूं जो कुछ भी थोड़ा बहुत जानता

00:18:07.200 --> 00:18:10.880
हूं लेकिन पीपल हो अरे रियली

00:18:12.259 --> 00:18:16.700
ऑन लिटरेचर सब डिफरेंट लैंग्वेज

00:18:24.000 --> 00:18:27.859
दुनिया का सबसे बड़ा शहर

00:18:29.119 --> 00:18:34.979
हुए लेकिन 19 सेंचुरी में जो पोएट्स द

00:18:32.880 --> 00:18:37.620
चाहे हिंदुस्तान में हो फ्रांस में हूं

00:18:34.980 --> 00:18:40.880
इंग्लैंड में हो जर्मनी में हो दूसरे

00:18:37.619 --> 00:18:43.859
मुल्कों में हो ग़ालिब से बड़ा शहर में

00:18:40.880 --> 00:18:46.559
ग़ालिब की जो एक हिम्मत है और जो करें से

00:18:43.859 --> 00:18:49.019
एक तरफ का सीधा हनी करते हैं जिसके लिए वो

00:18:46.558 --> 00:18:49.940
बहुत मशहूर हैं अच्छी लोगों की तारीफ करते

00:18:49.019 --> 00:18:53.759
हैं

00:18:49.940 --> 00:18:56.400
शाहू की shenshahon की तारीफ करते हैं और

00:18:53.759 --> 00:18:59.038
दूसरी तरफ उनमें जो ब्लैक है एक एंटी

00:18:56.400 --> 00:19:01.019
एस्टेब्लिशमेंट जो एलिमेंट है वो इरेवरेंट

00:18:59.038 --> 00:19:05.058
भी है वो खुदा को चैलेंज करते हैं वो काफी

00:19:01.019 --> 00:19:08.940
का जिक्र भी करते हैं वो जो एलिमेंट है

00:19:05.058 --> 00:19:11.220
समझी तो वही करते हैं फिल्म के गाने भी

00:19:08.940 --> 00:19:13.380
लिखते हैं और शायरी भी लिखते हैं तो अब

00:19:11.220 --> 00:19:16.339
जमाने में फिर मैं तो होती नहीं होना जब

00:19:13.380 --> 00:19:16.340
टॉप के सॉन्ग राइटर

00:19:21.079 --> 00:19:26.819
थी अरे भाई

00:19:23.940 --> 00:19:29.100
टायर जो है कोई धमक तो है नहीं की जिस

00:19:26.819 --> 00:19:32.939
पेपर पे उसने लिखा उसी को खा जाएगा और

00:19:29.099 --> 00:19:35.159
जिंदा रहेगा तो उसको रोटी भी चाहिए उसे छत

00:19:32.940 --> 00:19:38.519
भी चाहिए उसे जिंदगी के कुछ कंफर्ट भी

00:19:35.160 --> 00:19:41.279
चाहिए और आप उसे शायरी के बारे में बदले

00:19:38.519 --> 00:19:43.200
नहीं देते हैं मतलब शर्म की बात तो दूसरों

00:19:41.279 --> 00:19:47.058
के लिए है की उसे शादी से क्यों नहीं इतना

00:19:43.200 --> 00:19:47.058
मिला की उसे कसीदा लिखना पड़ा

00:19:47.279 --> 00:19:52.558
तो ग़ालिब का जो रेफरेंस वाले अक्षर है वो

00:19:49.558 --> 00:19:56.759
कुछ दो-चार यहां पे जरा सा रे भाई वो तो

00:19:52.558 --> 00:19:59.160
मतलब एक जन्नत है यह तो कुछ लोगों के ईमान

00:19:56.759 --> 00:20:02.220
का हिस्सा है उनकी मुक़द्दस किताब में

00:19:59.160 --> 00:20:05.880
बड़ी डिटेल में जन्नत का ज़िक्र है ये आज

00:20:02.220 --> 00:20:09.058
से 200 साल पहले हमको मालूम है जन्नत की

00:20:05.880 --> 00:20:09.430
हकीकत लेकिन दिल के खुश रखने को ख्याल

00:20:09.058 --> 00:20:13.558
अच्छा

00:20:09.430 --> 00:20:16.140
[प्रशंसा]

00:20:13.558 --> 00:20:17.779
यह जिक्र किया था आपने और अभी जो जिक्र हो

00:20:16.140 --> 00:20:21.660
रहा था ना वो जो काबे वाला शेर था उसमें

00:20:17.779 --> 00:20:24.599
ग़ालिब का ही शेर है की गुमान नहीं पे मैन

00:20:21.660 --> 00:20:28.640
के निकले हुए तो हैं काबे से उन भूतों को

00:20:24.599 --> 00:20:28.639
भी निस्बत से दूर दूर

00:20:30.200 --> 00:20:33.319
क्या बोलिए

00:20:35.720 --> 00:20:40.919
उसका जिक्र बार-बार होता है मैं चाहता हूं

00:20:38.519 --> 00:20:43.679
इस ऑडियंस को कई लोग जानना चाहते हैं की

00:20:40.919 --> 00:20:45.960
शेर जो है चाहे वो ग़ालिब का हो या अमीर

00:20:43.679 --> 00:20:49.019
का हो उसके पीछे एक रेफरेंस होती है और आप

00:20:45.960 --> 00:20:51.679
खुद इस बात पे कई बार बात करते हैं तो वो

00:20:49.019 --> 00:20:51.679
रेफरेंस के साथ

00:20:53.779 --> 00:20:59.160
हुई है

00:20:55.519 --> 00:21:01.918
तस्वीर का अब ये शेर आदमी ऐसे कैसे समझेगा

00:20:59.160 --> 00:21:03.298
अगर हर लफ्ज़ के माने भी मालूम हो तो भी

00:21:01.919 --> 00:21:07.020
नहीं समझ पाएगा

00:21:03.298 --> 00:21:09.980
के यह जो इमेज है

00:21:07.019 --> 00:21:13.460
यह किसके लिखने की

00:21:09.980 --> 00:21:18.058
शोखी को उसकी शरारत की शिकायत कर रहा है

00:21:13.460 --> 00:21:20.660
इसलिए की जितनी तस्वीरें हैं इनका लिबास

00:21:18.058 --> 00:21:20.660
तो कागज का है

00:21:24.019 --> 00:21:30.240
जब हम यह एक ट्रेडीशन जानते हो जो पुराने

00:21:26.940 --> 00:21:34.140
जमाने में थी की फरियादी जब दरबार में

00:21:30.240 --> 00:21:36.779
फरियाद करने जाता था बादशाह के तो कागज का

00:21:34.140 --> 00:21:40.080
कपड़ा पहन के जाता था तो उसे पहचान लेते द

00:21:36.779 --> 00:21:43.200
की फरियाद करने आया है जाहिर है की कागज

00:21:40.079 --> 00:21:46.859
के ऊपर जो भी तस्वीर बनेगी उसका लिबास तो

00:21:43.200 --> 00:21:50.519
कागज नहीं है तो यह जो तस्वीरें बनी है ये

00:21:46.859 --> 00:21:54.418
किसकी शिकायत कर रही है दूसरी तरफ किसकी

00:21:50.519 --> 00:21:57.139
शौक यह तेरी इस देर अन्य सुप्रीम पावर जो

00:21:54.419 --> 00:22:00.480
इन तस्वीरें को बना रही है

00:21:57.140 --> 00:22:02.038
उसकी शिकायत कर रहा है तो इसीलिए तस्वीरें

00:22:00.480 --> 00:22:05.038
कांग्रेस के कपड़े पहने हुए हैं

00:22:02.038 --> 00:22:05.038
कॉम्प्लिकेटेड

00:22:07.200 --> 00:22:14.220
जैसे ना था कुछ तो खुदा था यह बहुत

00:22:11.460 --> 00:22:17.579
इंपॉर्टेंट शेयर है देखिए बहुत बड़ा पहले

00:22:14.220 --> 00:22:20.519
मणि कौन एक बहुत अच्छे फिल्म द

00:22:17.579 --> 00:22:23.158
पर उसे जमाने में हम भी बहुत मुफली जी के

00:22:20.519 --> 00:22:26.179
आलम में द और वो भी बेचारे स्ट्रगल कर रहे

00:22:23.159 --> 00:22:29.100
द मुंबई में प्रवेश

00:22:26.179 --> 00:22:32.640
द उन्होंने शराब इसलिए बंद कर दी की उनका

00:22:29.099 --> 00:22:32.639
इंतकाल हो गया मैंने

00:22:35.220 --> 00:22:43.220
मैंने जीते जी बंद कर दी मुझे आज 31 साल

00:22:39.538 --> 00:22:43.220
हो गए मैंने शराब को हाथ नहीं लगाया है

00:22:43.440 --> 00:22:45.990
चलो आज शाम को सेलिब्रेट करेंगे

00:22:45.670 --> 00:22:47.190
[प्रशंसा]

00:22:45.990 --> 00:22:51.720
[हंसी]

00:22:47.190 --> 00:22:55.380
[प्रशंसा]

00:22:51.720 --> 00:22:57.659
उनसे मेरी एक दारू का अड्डा था वह मिलती

00:22:55.380 --> 00:22:58.460
थी देसी शराब तो वहां हम लोग पी रहे द बहस

00:22:57.659 --> 00:23:01.380
हो गई

00:22:58.460 --> 00:23:03.419
बरसों बात मुझे समझ में आया की वो सही का

00:23:01.380 --> 00:23:06.080
रहा था और अगर वो जिंदा होता तो मैं जागीर

00:23:03.419 --> 00:23:06.080
से माफी मांगता

00:23:06.960 --> 00:23:12.779
उन्होंने कहा की गली बहुत पॉसिबल नहीं है

00:23:09.538 --> 00:23:15.319
इंडिया से बाहर खाली नहीं हो सकता था कोई

00:23:12.779 --> 00:23:17.700
और शायर हो जाता

00:23:15.319 --> 00:23:20.339
जीनियस था वो कहीं भी पैदा होता तो अच्छी

00:23:17.700 --> 00:23:22.880
शायरी करता लेकिन बरसों के बाद मैंने

00:23:20.339 --> 00:23:24.798
realaiz किया की मैं गलत किया

00:23:22.880 --> 00:23:29.419
ग़ालिब की शायरी

00:23:24.798 --> 00:23:29.418
हिंदुस्तान के अलावा कहीं नहीं हो सकती थी

00:23:30.000 --> 00:23:36.679
आप देखिए जो 70 रिलीजियस है

00:23:33.259 --> 00:23:36.679
जुड़ाइएसएम क्रिश्चियन

00:23:41.240 --> 00:23:50.339
वो क्रिएटर है वो आपको जज कर रहा है वो

00:23:45.480 --> 00:23:54.120
आपको देखा जो आदित्य का कॉन्सेप्ट है ये

00:23:50.339 --> 00:23:57.839
आया है वेदों से जिसमें क्रिएटर और

00:23:54.119 --> 00:24:00.839
क्रिएशन अलग नहीं है एक ही है जहां से हम

00:23:57.839 --> 00:24:02.579
ब्रह्मा जहां से सूफी इसमें बाद में गया

00:24:00.839 --> 00:24:06.199
एनालॉग

00:24:02.579 --> 00:24:09.678
है तो यह जो सब कुछ वही है

00:24:06.200 --> 00:24:13.259
यह कॉन्सेप्ट सिमिट्रिक रिलीजियस का नहीं

00:24:09.679 --> 00:24:15.259
यह है अद्वैत का

00:24:13.259 --> 00:24:19.980
अब क्या कहता है

00:24:15.259 --> 00:24:22.220
एन था कुछ तो खुदा था कुछ ना होता तो खुदा

00:24:19.980 --> 00:24:22.220
होता है

00:24:23.659 --> 00:24:31.740
मुझको इसमें हो गई जो बोया मुझको होने में

00:24:28.220 --> 00:24:34.519
होता तो क्या होता

00:24:31.740 --> 00:24:37.140
की अगर मैं नहीं होता तो मैं तो गोद होता

00:24:34.519 --> 00:24:40.288
यह मेरे होने में

00:24:37.140 --> 00:24:40.288
[प्रशंसा]

00:24:40.980 --> 00:24:51.200
चला है जिस्म यहां दिल भी जल गया होगा

00:24:45.900 --> 00:24:51.200
जला है जिस्म जहां दिल भी जल गया होगा

00:25:01.700 --> 00:25:05.940
सऊदी अरब में चलता है कहां चलता है

00:25:04.279 --> 00:25:07.279
हिंदुस्तान में चलती

00:25:05.940 --> 00:25:09.200
[प्रशंसा]

00:25:07.279 --> 00:25:11.599
हो जो अब रात

00:25:09.200 --> 00:25:15.659
[प्रशंसा]

00:25:11.599 --> 00:25:18.079
के लिए वह कहां होता है हिंदुस्तान में

00:25:15.659 --> 00:25:18.080
होता है

00:25:20.359 --> 00:25:24.619
अफ़ग़ानिस्तान में नहीं लिख सकता था

00:25:44.640 --> 00:25:50.759
तो आपको

00:25:46.980 --> 00:25:52.740
मिलते ही चले जाएंगे ऐसे शेर जो आपको

00:25:50.759 --> 00:25:56.658
लगेगा की हान भाई यह शेर तो हिंदुस्तान

00:25:52.740 --> 00:26:00.720
में लिखा जा सकता तो

00:25:56.659 --> 00:26:02.659
परफेक्ट सिंथेसिस ऑफ वाटेवर गुड ही गुड

00:26:00.720 --> 00:26:06.000
ब्रिंग फ्रॉम डी सेंट्रल एशिया

00:26:02.659 --> 00:26:11.278
फ्रॉम सेंट्रल एशिया एंड वाटेवर ब्यूटीफुल

00:26:06.000 --> 00:26:15.179
डी आर ऑन लैंड कूद ऑफर हिम ये दोनों मिक्स

00:26:11.278 --> 00:26:20.058
होके एक नई तहजीब एक नई जुबान एक नई सोच

00:26:15.179 --> 00:26:20.059
बनी उसका नाम खा लेना क्या बात है वह

00:26:21.000 --> 00:26:30.000
जब ये सब गली का जो कलम है और जो दीवान है

00:26:25.940 --> 00:26:32.700
इंतखाब है उनके कलम का वो समझाया जाता है

00:26:30.000 --> 00:26:37.440
की चकरी में 18-19 साल के हैं और तभी से

00:26:32.700 --> 00:26:40.019
किसने किसी क्षति में आने लगा एक जावेद

00:26:37.440 --> 00:26:43.500
साहब के खानदान से भी एक सिलसिला है इसलिए

00:26:40.019 --> 00:26:49.940
उसको भी जहां में रखिएगा आप इस बात को की

00:26:43.500 --> 00:26:49.940
एक मौलवी मौलाना फ़ज़ल हौला ना फैसले

00:26:50.359 --> 00:26:58.740
अल्लामा अल्लामा fazlehab जी तो वो आपके

00:26:55.500 --> 00:27:02.659
जो दादा है उनके दादा दादा

00:26:58.740 --> 00:27:07.940
है और वह समझा जाता है की ग़ालिब का जो

00:27:02.659 --> 00:27:10.860
दीवान है जो ऑफिशल जिसको कहते हैं ना

00:27:07.940 --> 00:27:13.500
जो ग़ालिब के जमाने में जिसको तरतीब दे

00:27:10.859 --> 00:27:16.199
दिया गया था जिसमें ग़ालिब की sifarishad

00:27:13.500 --> 00:27:19.259
और ग़ालिब के mashhre ये भी चीज शामिल हैं

00:27:16.200 --> 00:27:22.558
जिसमें एक मौलाना फ़ज़ल हक कभी अपना एक

00:27:19.259 --> 00:27:24.419
कहीं ना कहीं कंट्रीब्यूशन है आप उसे के

00:27:22.558 --> 00:27:26.759
हवाले से कुछ इस बात पे रोशनी दल सकते हैं

00:27:24.419 --> 00:27:31.860
की ग़ालिब का जो मुझसे ना दीवान है हमारे

00:27:26.759 --> 00:27:33.419
सामने वो कौन सा है और यह मौलाना फ़ज़ल

00:27:31.859 --> 00:27:36.479
हाफ साहब का जो कंट्रीब्यूशन भूल जाएंगे

00:27:33.419 --> 00:27:39.620
वो आपके दादा के दादा होते द लेकिन ये के

00:27:36.480 --> 00:27:43.460
वो कम जो हमारे सामने आया है

00:27:39.619 --> 00:27:43.459
अभी आपने याद दिलाया

00:27:44.278 --> 00:27:48.440
तो वह दीवान क्या हवा से

00:27:50.900 --> 00:27:58.798
विक्रम सुल्तान भूत मेरे बाप बैश द अरे वो

00:27:55.558 --> 00:28:01.500
होंगे तुम कौन हो बताओ तो वही यहां पर यह

00:27:58.798 --> 00:28:03.960
बड़ा कॉमन है आपके शहर में तुम्हें मालूम

00:28:01.500 --> 00:28:06.480
है मेरे फादर कौन है

00:28:03.960 --> 00:28:08.400
मेरा कभी जी चाहता है की इसका जवाब कोई ये

00:28:06.480 --> 00:28:10.880
दे के जवाब को खुद ही नहीं मालूम तो मुझे

00:28:08.400 --> 00:28:10.880
कहां से मालूम

00:28:12.659 --> 00:28:17.760
तो

00:28:14.460 --> 00:28:20.159
तो यह मेरे ग्रैंडफादर के जो ग्रैंडफादर द

00:28:17.759 --> 00:28:22.619
अल्लामा फ़ज़ल है खैराबादी वह तो मेरी

00:28:20.159 --> 00:28:24.620
इंटरेस्टिंग मैन उनकी कब्र कला पानी में

00:28:22.619 --> 00:28:27.359
अभी भी है वो

00:28:24.619 --> 00:28:30.658
1857 में फिर वो फ्रीडम मूवमेंट पे चले गए

00:28:27.359 --> 00:28:32.819
द उन्हें तक अनएक्टिव पार्ट जिसकी वजह से

00:28:30.659 --> 00:28:34.460
उन्हें अरेस्ट कर लिया गया फिर उन पे केस

00:28:32.819 --> 00:28:38.480
चला फिर उन्हें कला पानी

00:28:34.460 --> 00:28:41.720
59 में 1859 में कला पानी भेज दिया गया

00:28:38.480 --> 00:28:44.278
था आगे ये क्या

00:28:41.720 --> 00:28:45.329
मैंने कहा माफी मांगने से इनकार भी कर

00:28:44.278 --> 00:28:49.319
दिया था खैर आगे

00:28:45.329 --> 00:28:51.599
[प्रशंसा]

00:28:49.319 --> 00:28:54.678
तो

00:28:51.599 --> 00:28:58.798
अभी मांग लेते तो वापस ए जाते

00:28:54.679 --> 00:29:03.600
कुछ अंग्रेजों की खिदमत कर लेते मगर नहीं

00:28:58.798 --> 00:29:06.240
किया तो वह ग़ालिब के बड़े करीबी दोस्त है

00:29:03.599 --> 00:29:08.579
और ग़ालिब के जो लेटर छपे हैं उसमें कई

00:29:06.240 --> 00:29:11.159
लेटर्स में उनका बड़ा दिख रहा है एवं जब

00:29:08.579 --> 00:29:14.839
उन्हें कला पानी की सजा हुई तब भी ग़ालिब

00:29:11.159 --> 00:29:14.840
ने खत अपने दोस्त को इस बारे में लिखा

00:29:15.079 --> 00:29:23.058
हुआ जी बड़े काबिल आदमी द और

00:29:20.179 --> 00:29:26.700
उनके बारे में एक और बात बताऊं

00:29:23.058 --> 00:29:29.759
1857 में एक बहुत बड़ी काउंसिल बनी थी कोई

00:29:26.700 --> 00:29:32.880
किस आदमी भाई इस आदमी द जो प्लान कर रही

00:29:29.759 --> 00:29:36.480
थी यह रिवोल्ट

00:29:32.880 --> 00:29:38.880
वह हुआ यह इतने लोग जज्बात से भरे हुए द

00:29:36.480 --> 00:29:41.640
की वह मेरठ में एक चिंगारी ने भड़का दिया

00:29:38.880 --> 00:29:45.120
उसे और वह बहुत पहले शुरू हो गया है जो कई

00:29:41.640 --> 00:29:48.000
महीने बाद होना था ऑर्गेनाइज तेरी और शायद

00:29:45.119 --> 00:29:50.519
उसी वजह से आगे गड़बड़ी हुए हैं

00:29:48.000 --> 00:29:52.880
तो ये उसे कमेटी में द और इसी वजह से हो

00:29:50.519 --> 00:29:52.879
जेल गए

00:29:53.759 --> 00:29:58.759
इनकी गहरी दोस्ती थी राजीव को मालूम था

00:29:56.220 --> 00:30:01.980
काबिल आदमी है दिल्ली में ये

00:29:58.759 --> 00:30:05.879
अवध में अवध में शत्रु से दूर यानी के

00:30:01.980 --> 00:30:08.038
जस्टिस भी रह चुके तो जो इस कमेटी ने

00:30:05.880 --> 00:30:09.720
कॉन्स्टिट्यूशन फॉर्म किया था की जब

00:30:08.038 --> 00:30:12.359
हिंदुस्तान आजाद हो जाएगा तो

00:30:09.720 --> 00:30:14.339
कॉन्स्टिट्यूशन क्या होगा उसका वो

00:30:12.359 --> 00:30:18.119
इन्होंने ड्राफ्ट किया था

00:30:14.339 --> 00:30:21.298
जिसका जिक्र हमारे दोस्त हैं बालवीर पुंज

00:30:18.119 --> 00:30:23.459
जो के बीजेपी के एमपी भी द एक ज़माने में

00:30:21.298 --> 00:30:27.079
अब नहीं है उन्होंने अपने एक मजबूत में

00:30:23.460 --> 00:30:27.079
बड़ी डिटेल में सब कुछ लिखा है

00:30:27.240 --> 00:30:34.019
तो ग़ालिब ने अपना दीवाने ना दिया की भाई

00:30:30.298 --> 00:30:36.599
ये मनुष्य है इसमें से तुम जो काटना चाहो

00:30:34.019 --> 00:30:38.038
तुम्हें लगे कमजोर हो काट दो अब आप देखिए

00:30:36.599 --> 00:30:41.219
उसे जमाने में इस तरह की एडिटिंग नहीं

00:30:38.038 --> 00:30:43.259
होती थी फॉरवर्ड लुकिंग आदमी उसे जमाने के

00:30:41.220 --> 00:30:46.159
जो दूसरे शायर हैं उनकी जिंदो पे दिल दे

00:30:43.259 --> 00:30:51.379
है जो लिखा छुप गया जो लिखा छुप गया

00:30:46.159 --> 00:30:51.380
ग़ालिब ने ऐसा नहीं किया ये देखिए कितना

00:30:54.440 --> 00:31:00.120
शेयर

00:30:57.380 --> 00:31:02.299
बिल्कुल ठीक हो जाना चाहिए

00:31:00.119 --> 00:31:06.119
है तो उन्होंने कुछ

00:31:02.298 --> 00:31:09.480
लोग कहते हैं की एक छठ हिस्सा उसे विमान

00:31:06.119 --> 00:31:11.939
का काट दिया अब उसमें कई शेर ऐसे भी कट गए

00:31:09.480 --> 00:31:15.240
जो फिर दूसरे majboon में मिल जाते हैं

00:31:11.940 --> 00:31:17.899
लेकिन जो इनका अपना था उसमें नहीं था जो

00:31:15.240 --> 00:31:17.899
दिल्ली से छपरा

00:31:18.019 --> 00:31:24.778
भोपाल में उसका रामपुर में अभी भी वो रखे

00:31:21.778 --> 00:31:26.220
हुए हैं उनके लाइब्रेरीज में कुछ तूफान

00:31:24.778 --> 00:31:28.579
हूं

00:31:26.220 --> 00:31:33.679
ही कहां तमन्ना का

00:31:28.579 --> 00:31:33.678
दूसरा कदम या रब है कहां तमन्ना

00:31:46.380 --> 00:31:52.500
तो 1 फुटप्रिंट के बराबर है पॉसिबिलिटी तो

00:31:50.099 --> 00:31:55.678
दूसरा पैर कहां रखा है ह्यूमन इमोशन में

00:31:52.500 --> 00:31:59.278
आप ऐसा लगता है ये शेर के इस फूटने और

00:31:55.679 --> 00:32:01.700
स्पेस में जाने के बाद देखा गया है शेर

00:31:59.278 --> 00:32:05.419
इसकी देखिए इसकी ग्रोथ क्या है

00:32:01.700 --> 00:32:10.919
ये शेर काट दिया दादा के दादा ने हमारे

00:32:05.419 --> 00:32:16.278
बड़ी गलती की अरे भाई उन्होंने क्यों काटा

00:32:10.919 --> 00:32:19.820
हमने दर्शाते इनका को एक नक्श के पाप पाया

00:32:16.278 --> 00:32:19.819
कान कुछ नहीं लगता

00:32:20.119 --> 00:32:26.879
बहुत इंपॉर्टेंट है और वो जबान जो है ऐसी

00:32:24.000 --> 00:32:30.179
होनी चाहिए कान को खराब ना लगे बहुत

00:32:26.880 --> 00:32:33.299
ज्यादा इस मामले में उर्दू शायरी सेंसेटिव

00:32:30.179 --> 00:32:36.798
रही है तो इसलिए वह शेर इतना बड़े माने का

00:32:33.298 --> 00:32:36.798
शेर उसमें से निकल दिया गया

00:32:38.579 --> 00:32:43.759
तो यह उन्होंने किया था

00:32:40.759 --> 00:32:43.759
जो

00:32:44.000 --> 00:32:50.538
उनकी कुछ आपके पास कोई चीज हैं ऐसी मेरे

00:32:48.659 --> 00:32:52.590
पास तो उनकी बहुत

00:32:50.538 --> 00:32:56.379
जाएंगे अंडमान में मिल जाएंगे

00:32:52.589 --> 00:32:56.379
[प्रशंसा]

00:32:57.140 --> 00:33:03.120
किसी भी अंडमान के आदमी से पूछे वो

00:32:59.819 --> 00:33:06.740
खैराबादी साहब की कब्र गांव में बता देगा

00:33:03.119 --> 00:33:12.859
लेकिन मेरे पास एक बहुत

00:33:06.740 --> 00:33:15.960
रेयर चीज है उसे दबाने में कुसुम था की जो

00:33:12.859 --> 00:33:18.599
आजादी के लिए लड़ रहे द अगर उन्हें फांसी

00:33:15.960 --> 00:33:22.159
की सजा होती थी या उम्र कैद कला पानी में

00:33:18.599 --> 00:33:26.819
तो उनका घर डिमोलिश कर दिया जाता था तो

00:33:22.159 --> 00:33:30.600
उनका घर जो कलेक्टर था लखनऊ का उसका ऑर्डर

00:33:26.819 --> 00:33:34.889
था की यह इनका घर डिमोलिश कर दिया जाए वह

00:33:30.599 --> 00:33:38.178
जो ऑर्डर है उसकी ओरिजिनल कॉपी मेरे पास

00:33:34.890 --> 00:33:38.179
[प्रशंसा]

00:33:42.019 --> 00:33:48.558
मेरे घर के लोग आज भी मुझे जादुई कहते हैं

00:33:44.960 --> 00:33:51.120
तो वह किताब छाप रही है

00:33:48.558 --> 00:33:54.720
मेरे दोस्तों के बारे में रिश्तेदार

00:33:51.119 --> 00:33:54.719
फैमिली फिल्म

00:34:03.058 --> 00:34:09.739
रहा उसका उन्होंने फोटो

00:34:05.720 --> 00:34:09.740
इमेज छपी है उसे

00:34:15.079 --> 00:34:19.918
किताबें हैं

00:34:17.358 --> 00:34:21.980
लेकिन मुश्किल के हैंडराइटिंग में है मेरे

00:34:19.918 --> 00:34:24.719
पास वो

00:34:21.980 --> 00:34:27.480
क्या है धीरे-धीरे मेरा फैमिली ड्रामा

00:34:24.719 --> 00:34:28.219
इसमें शामिल हो रहा है लिए वापस चलबे की

00:34:27.480 --> 00:34:32.480
तरफ

00:34:28.219 --> 00:34:35.759
ग़ालिब ने एक जब कलकत्ते के लिए रावण हुए

00:34:32.480 --> 00:34:38.960
तो रास्ते में बहुत मौका आता है कहीं

00:34:35.760 --> 00:34:43.940
बीमार हुए और वह उनको जाना था कब और

00:34:38.960 --> 00:34:43.940
पहुंचे फांसी देर से बनारस

00:34:56.119 --> 00:35:02.240
ये बनारस का इसमें रास्ते में क्यों पड़ता

00:34:59.760 --> 00:35:02.240
है वो बनारस

00:35:03.000 --> 00:35:09.539
द कोलकाता का जो जिक्र किया तूने हम नशीन

00:35:05.940 --> 00:35:11.940
एक तीर मेरे साइन में मारा के हाय-हाय ये

00:35:09.539 --> 00:35:13.858
शेर कोलकाता के हवाले से था लेकिन मैं

00:35:11.940 --> 00:35:16.679
आपसे ये दोनों चीजों के बारे में जानना

00:35:13.858 --> 00:35:20.900
चाह रहा था उनका कलकत्ते का दौरा और ये

00:35:16.679 --> 00:35:22.699
बनारस में जो वो मसनवी है देखिए

00:35:20.900 --> 00:35:25.980
असल में

00:35:22.699 --> 00:35:28.500
आमतौर से उर्दू शायरी बहुत सारे जो नॉन

00:35:25.980 --> 00:35:31.019
उर्दू स्पीकिंग यार रीडिंग राइटिंग पीपल

00:35:28.500 --> 00:35:35.219
है जिनकी मदर तंग या फर्स्ट रैंक उर्दू

00:35:31.019 --> 00:35:40.519
नहीं है बहुत लोगों तक सबके नहीं बहुत हो

00:35:35.219 --> 00:35:44.699
गए द जिनके पास उर्दू जो ग़ज़ल सिंगर हैं

00:35:40.519 --> 00:35:48.380
उनसे पूछिए तो उनको कुछ इंप्रेशन ऐसा है

00:35:44.699 --> 00:35:51.679
की उर्दू शायरी का मतलब आशिकी और कुछ

00:35:48.380 --> 00:35:51.680
परवाना शर्मा

00:35:59.420 --> 00:36:05.940
गया है उसको शायरी कहना जो है बड़ा

00:36:02.579 --> 00:36:05.940
मुश्किल तो

00:36:06.539 --> 00:36:13.739
12 जो संजीदा शायरी है और जो उस्तादों की

00:36:10.739 --> 00:36:17.299
लिखी हुई है 300 400 साल

00:36:13.739 --> 00:36:21.118
वह शायरी के बारे में बहुत कम लोग जानते द

00:36:17.300 --> 00:36:23.300
ग़ालिब ने एक बहुत मतलबी डिटेल में उसकी

00:36:21.119 --> 00:36:26.640
टेक्नोलॉजी

00:36:23.300 --> 00:36:29.820
पोयम लिखी है मैं उसे मतलबी को पोयम ही

00:36:26.639 --> 00:36:34.199
कहूंगा चिराग

00:36:29.820 --> 00:36:36.900
उन्होंने जो बनारस का उसके घाट उसके मंदिर

00:36:34.199 --> 00:36:40.799
में उसकी रश्मि उसके तौर तरीके उसका जो

00:36:36.900 --> 00:36:44.480
बयान किया है उसमें वह आपको लगता है की इस

00:36:40.800 --> 00:36:50.839
शख्स यह कितनी मोहब्बत से और कितने

00:36:44.480 --> 00:36:53.880
लिख रहा है सब कुछ यह जो पहलू है उर्दू

00:36:50.838 --> 00:36:57.299
मैं इसके अलावा भी और शायर हुए हैं

00:36:53.880 --> 00:36:59.599
जिन्होंने बनारस के घाट पर तुलसी घाट पर

00:36:57.300 --> 00:36:59.599
मंदिर

00:37:17.059 --> 00:37:22.039
था पवित्रता का मिला देखो

00:37:20.639 --> 00:37:25.920
तो

00:37:22.039 --> 00:37:30.358
यह शायरी जो है यह कोई नई बात नहीं है

00:37:25.920 --> 00:37:31.700
उर्दू में और ग़ालिब जैसा सेकुलर और

00:37:30.358 --> 00:37:35.098
फॉरवर्ड लुकिंग

00:37:31.699 --> 00:37:37.679
जाहिर है की जब दुनिया के चंद पुराने

00:37:35.099 --> 00:37:40.079
शहरों में से बनारस और उसकी जो ट्रेडीशन

00:37:37.679 --> 00:37:42.719
रही हैं और आज भी हैं वो उसे कितनी

00:37:40.079 --> 00:37:44.820
फेसिनेट की होंगी उतने दिल्ली आगरा में

00:37:42.719 --> 00:37:48.118
देखा होगा मैं इस पैमाने पे नहीं देखा

00:37:44.820 --> 00:37:50.760
होगा जो बनारस में होता है तो उसने उसको

00:37:48.119 --> 00:37:51.680
रुक गया वो कहां मेरे खर्चे एक दो महीने

00:37:50.760 --> 00:37:54.540
मारा

00:37:51.679 --> 00:37:57.960
और जा रहा था कोलकाता रास्ते में सफर ही

00:37:54.539 --> 00:37:59.239
रोक दिया और बनारस से जो उसने अपना इश्क

00:37:57.960 --> 00:38:02.539
और अपना

00:37:59.239 --> 00:38:02.539
श्रद्धा दिखाइए

00:38:20.579 --> 00:38:26.880
बनारस कितनी जो उनकी अकीदत है मोहब्बत है

00:38:24.079 --> 00:38:28.800
जिसको ज़ाहिर किया है वो समझता है की वो

00:38:26.880 --> 00:38:30.539
अपने आप में शायरी का एक जबरदस्त नमूना है

00:38:28.800 --> 00:38:32.820
जो शायद हिंदुस्तान की सारी जवानों को भी

00:38:30.539 --> 00:38:34.739
सामने रखेंगे तो मैं ये नहीं का रहा की

00:38:32.820 --> 00:38:38.099
उनमें कोई हल्का कम होगा लेकिन ग़ालिब का

00:38:34.739 --> 00:38:39.899
कम उसमें एक बहुत पसंद है और एक बात आपने

00:38:38.099 --> 00:38:43.079
कल अपने इंट्रोडक्शन में बड़ी dilchas बात

00:38:39.900 --> 00:38:45.420
कही थी जब यहां इस्तक करते हुए की जैसे

00:38:43.079 --> 00:38:48.240
होली पर यह गली से थोड़ा सा भटक रहे हैं

00:38:45.420 --> 00:38:51.059
हम की जो नज़्म उर्दू में हैं शायद ही

00:38:48.239 --> 00:38:53.338
किसी और जुबान में हो ऐसे ही जैसे ग़ालिब

00:38:51.059 --> 00:38:55.519
की ये जो मसाला भी है बनारस शायद ही किसी

00:38:53.338 --> 00:38:55.519
और

00:38:55.880 --> 00:39:03.838
ने इस्तेमाल किया था

00:38:59.000 --> 00:39:06.380
मैंने कहा था की उर्दू में होली पर जो

00:39:03.838 --> 00:39:06.380
नज्में हैं

00:39:10.139 --> 00:39:15.118
मैं तो बहुत सारे त्यौहार जिनके बारे में

00:39:12.480 --> 00:39:16.740
मैं जानता नहीं था वह मैंने उर्दू शायरी

00:39:15.119 --> 00:39:19.940
से सीखे हैं

00:39:16.739 --> 00:39:23.519
मतलब एक त्यौहार है

00:39:19.940 --> 00:39:26.338
जिसमें जैनी त्यौहार बड़ा खूबसूरत

00:39:23.519 --> 00:39:28.139
देना अच्छा मावनी जिसमें आप किसी से भी

00:39:26.338 --> 00:39:30.838
आपको लगे की मैंने गलत बात की तो जाकर

00:39:28.139 --> 00:39:33.239
क्षमा मांग लीजिए वो आपका मांगना कर्तव्य

00:39:30.838 --> 00:39:37.380
है उसका माफ करना कर्तव्य है कितनी

00:39:33.239 --> 00:39:40.139
खूबसूरत इस त्यौहार पे एक पोयम है उर्दू

00:39:37.380 --> 00:39:43.079
में उसे पोयम के जरिए मुझे इस त्यौहार का

00:39:40.139 --> 00:39:44.819
पता चला जन्माष्टमी होली दिवाली तो खैर हम

00:39:43.079 --> 00:39:46.619
सब जानते ही है हमारी जिंदगी का हिस्सा है

00:39:44.820 --> 00:39:51.900
मुझे chhamauni के बारे में नहीं पता था

00:39:46.619 --> 00:39:53.660
तो ये आप एक कम करिए मेरा आपको सजेस्ट

00:39:51.900 --> 00:39:58.200
करूंगा की यहां पर

00:39:53.659 --> 00:40:00.779
राजकमल जो पब्लिकेशन है उसने यहां शायद

00:39:58.199 --> 00:40:03.059
आपको मिल भी जाए हिंदुस्तान हमारा दो

00:40:00.780 --> 00:40:06.060
वॉल्यूम है जिसमें उर्दू शायरी है

00:40:03.059 --> 00:40:10.259
हिंदुस्तान की जो हिस्ट्री है हिंदुस्तान

00:40:06.059 --> 00:40:12.779
के हिंदुस्तान में जो रिवॉल्यूशन के खिलाफ

00:40:10.260 --> 00:40:15.240
हर पीरियड में हिंदुस्तान की जो बड़े-बड़े

00:40:12.780 --> 00:40:21.079
हीरोज पैदा हुए इस देश में उनके बारे में

00:40:15.239 --> 00:40:25.039
सारी हर मौसम शहर सब पे आपको

00:40:21.079 --> 00:40:27.839
मेरे फादर ने एडिट की थी तो वो ये ये

00:40:25.039 --> 00:40:30.000
रिप्रेजेंटेटिव शायरी है उर्दू में इन

00:40:27.838 --> 00:40:32.299
टॉपिक्स पे आप जाकर सिर्फ उसका जब वह

00:40:30.000 --> 00:40:34.800
देखेंगे इंडेक्स तो ये आप हैरान हो जाएगा

00:40:32.300 --> 00:40:37.440
झांसी की रानी पे एक पोयम है उर्दू में

00:40:34.800 --> 00:40:40.500
मैं आज तक ये उम्र हो गई मेरी वो नजम में

00:40:37.440 --> 00:40:42.838
बिना रो पद ही नहीं पता हूं तो ऐसा ऐसा कम

00:40:40.500 --> 00:40:48.079
है मगर वो लोगों तक नहीं पहुंचा हुआ है

00:40:42.838 --> 00:40:48.078
इसीलिए उनका कुछ इमेज जो है उर्दू का

00:40:48.358 --> 00:40:53.400
बड़ी खूबसूरत बड़ी शायराना जबान है और

00:40:51.358 --> 00:40:55.619
उसमें बड़ी मोहब्बत की बातें सिर्फ

00:40:53.400 --> 00:40:59.099
मोहब्बत की बातें नहीं होती उसमें हर बात

00:40:55.619 --> 00:41:01.440
होती है जब ये सब मैं मैं खासतौर पे

00:40:59.099 --> 00:41:03.140
ऑडियंस के लिए यहां थोड़ा सा एक जिक्र कर

00:41:01.440 --> 00:41:06.420
डन की अभी हाल ही में

00:41:03.139 --> 00:41:09.838
दया गैर फारसी में उसका तर्जुमा हुआ है

00:41:06.420 --> 00:41:12.838
अंग्रेजी में बहुत नौजवान साथी हैं पढ़ते

00:41:09.838 --> 00:41:16.139
हैं mansbin बिलाल इत्तेफाक से इस वक्त

00:41:12.838 --> 00:41:17.519
यहां नहीं है और उन्होंने टेंपल लैंप नाम

00:41:16.139 --> 00:41:20.940
से उसका तर्जुमा किया है अंग्रेजी में

00:41:17.519 --> 00:41:23.639
किताब मौजूद है इसी तरह से गालिब के असर

00:41:20.940 --> 00:41:25.980
का ग़ालिब की बहुत सारी चीजों का अंग्रेजी

00:41:23.639 --> 00:41:28.920
में तर्जुमा हो रहा है और अब बहुत ज्यादा

00:41:25.980 --> 00:41:30.719
तेजी से हो रहा है जनाब इस संजीत सर आप

00:41:28.920 --> 00:41:33.320
साहब यहां मौजूद हैं उनके किताब हमने

00:41:30.719 --> 00:41:36.559
पिछले जो रिश्ते का एडिशन हुआ था

00:41:33.320 --> 00:41:41.400
ग़ालिब शारीरिक खमन ना भाई वो वाला पूरा

00:41:36.559 --> 00:41:45.539
आते हैं वेब से ये mazami ख्याल में वो

00:41:41.400 --> 00:41:48.780
पूरा एक एक अच्छी सेहतमंद कृष्ण की किताब

00:41:45.539 --> 00:41:50.779
है जिसमें बहुत सारे असर हैं और आज एक

00:41:48.780 --> 00:41:55.560
किताब का इतता होने वाला है

00:41:50.780 --> 00:41:58.560
3.5 बजे डॉक्टर नजीब जंग साहब ने ग़ालिब

00:41:55.559 --> 00:42:01.559
का जो पूरा दीवान है उसका अंग्रेजी में

00:41:58.559 --> 00:42:04.259
तर्जुमा किया है तो उसे पे आज यही रखता

00:42:01.559 --> 00:42:06.838
में एक सेशन है उसमें तशरीफ़ लाएगा मैं एक

00:42:04.260 --> 00:42:10.980
बात आपको थोड़ा सा ये याद दिलाना चाह रहा

00:42:06.838 --> 00:42:14.039
था की 1969 में ग़ालिब की बरसी हुई

00:42:10.980 --> 00:42:18.780
और गांधी जी की जयंती भी हुई

00:42:14.039 --> 00:42:21.239
एक अंसार हरवानी साहब आपके मामू आपके मामू

00:42:18.780 --> 00:42:24.359
और वो बैठे हैं कोने में जो आखिरी और

00:42:21.239 --> 00:42:26.819
खुशबू कर रहे हैं उनके वालिद नासिर हरवानी

00:42:24.358 --> 00:42:30.299
वहां बैठे हुए हैं अंसार आडवाणी साहब के

00:42:26.820 --> 00:42:32.579
बेटे वो चेयरमैन सेलिब्रेशन उसके हवाले से

00:42:30.300 --> 00:42:35.720
एक-दो कुछ किस हैं आपको याद है नहीं मुझे

00:42:32.579 --> 00:42:35.720
उसमें क्या है

00:42:46.519 --> 00:42:56.280
अलग-अलग और 14 अगस्त को वहां से छूट द

00:42:51.179 --> 00:42:59.399
कोलकाता जेल से तो वो कांग्रेस के एमपी भी

00:42:56.280 --> 00:43:02.460
रहे काफी दिनों तक मेरे ख्याल से आहिस्ता

00:42:59.400 --> 00:43:04.740
उठ के सामने से लोग जा रहे हैं तो नहीं

00:43:02.460 --> 00:43:06.019
कोई बात नहीं तो

00:43:04.739 --> 00:43:10.699
है तो

00:43:06.019 --> 00:43:10.699
तो अब जल्दी से जल्दी

00:43:14.119 --> 00:43:17.119
लिखिए

00:43:19.579 --> 00:43:24.440
हम दोनों क्या कातिल हैं दोनों के पुजारी

00:43:25.338 --> 00:43:31.380
हम गांधी की तो बड़ी इज्जत करते हैं लेकिन

00:43:28.380 --> 00:43:33.838
गांधी की जो वैल्यूज है उनको हम भूल जाते

00:43:31.380 --> 00:43:35.940
हैं हम गालिब की बड़ी इज्जत करते हैं जो

00:43:33.838 --> 00:43:40.139
लेकिन ग़ालिब की जो जुबान थी उसे भूल जाते

00:43:35.940 --> 00:43:43.099
हैं तो हमें गांधी की वैल्यू की जबान

00:43:40.139 --> 00:43:43.098
दोनों को याद रखना चाहिए

00:43:43.699 --> 00:43:47.000
मैं उनसे बात कर रहा था फोन पर ऐसी बात

00:43:45.960 --> 00:43:50.039
उन्होंने

00:43:47.000 --> 00:43:53.280
साहब का की उसे जमाने में मशहूर था की दिन

00:43:50.039 --> 00:43:55.940
में अंसार हरवानी गांधी जयंती करते हैं और

00:43:53.280 --> 00:44:01.800
रात में ग़ालिब की बरसी

00:43:55.940 --> 00:44:03.780
और और उसे हवाले से बहुत सारी चीज उसे

00:44:01.800 --> 00:44:06.839
वक्त तरतीब दी गई थी हालांकि लोगों ने

00:44:03.780 --> 00:44:08.940
मजाक उदय साहिब ने की तरफ आपने इशारा किया

00:44:06.838 --> 00:44:12.799
लेकिन साथ ही साथ ये भी है की एवं वाले

00:44:08.940 --> 00:44:12.800
मेरे ख्याल से इन सब की शुरुआत

00:44:20.000 --> 00:44:26.699
थी लेकिन हमें दोनों को याद रखना है दोनों

00:44:23.460 --> 00:44:28.679
को इज्ज हैं और दोनों ने जो हमें बताया एक

00:44:26.699 --> 00:44:31.439
ने हमें एक जुबान जी एक ने हमें एक

00:44:28.679 --> 00:44:32.879
संस्कार दिया उन्हें भी तो याद रखना जरूरी

00:44:31.440 --> 00:44:36.059
है ना

00:44:32.880 --> 00:44:40.079
अच्छा ऐसा है सबके आपके जो कुछ पसंदीदा

00:44:36.059 --> 00:44:42.000
कुछ असर जो रह गए हो उनका जिक्र शुरू करना

00:44:40.079 --> 00:44:45.240
चाहें गली के

00:44:42.000 --> 00:44:47.099
थोड़ा सा इसलिए की जब आप आशा के बारे में

00:44:45.239 --> 00:44:49.019
बात करते हैं और समझते हैं एक जमाने में

00:44:47.099 --> 00:44:52.039
आप चैनल भी कुछ ऐसी चलती थी आपकी जिसमें

00:44:49.019 --> 00:44:52.960
आप देखना छोड़ दिया वो अभी चल रही है

00:44:52.039 --> 00:44:56.039
[हंसी]

00:44:52.960 --> 00:44:59.579
[प्रशंसा]

00:44:56.039 --> 00:45:02.659
तो वो गालिब पर कुछ अक्षर एक तश्री लोग

00:44:59.579 --> 00:45:02.660
फरमाइश कर रहे हैं पीछे से

00:45:02.960 --> 00:45:07.740
रेफरेंस याद आते हैं लेकिन मैंने कुछ शेयर

00:45:05.519 --> 00:45:10.039
जो मुझे बहुत पसंद है वो मैंने लिख लिए द

00:45:07.739 --> 00:45:10.039
मैं देखता हूं

00:45:14.818 --> 00:45:19.920
रगों में दौड़ते दौड़ते फिरने के हम नहीं

00:45:18.179 --> 00:45:24.618
आए

00:45:19.920 --> 00:45:24.619
जवाब ही से मैं टपका तो फिर लहू क्या है

00:45:28.500 --> 00:45:32.119
रंग से कुकर हुआ

00:45:37.099 --> 00:45:44.280
हिंसा तो मिट जाता है रंज

00:45:41.039 --> 00:45:45.269
मुश्किलें मुझमें पर पड़ी इतनी क्या आशा

00:45:44.280 --> 00:45:50.699
हो गई

00:45:45.269 --> 00:45:50.699
[प्रशंसा]

00:45:52.818 --> 00:45:58.380
अल्टीमेटली जो प्लेजर है

00:45:55.280 --> 00:45:59.940
ड्रॉप का वो ये है की वो दरिया में जाकर

00:45:58.380 --> 00:46:03.150
खो जाए

00:45:59.940 --> 00:46:08.708
दर्द का हद से गुजरना है

00:46:03.150 --> 00:46:08.709
[प्रशंसा]

00:46:11.719 --> 00:46:15.199
लंबी फेरे

00:46:20.900 --> 00:46:23.900
जी जी

00:46:33.559 --> 00:46:38.639
मत करो

00:46:35.818 --> 00:46:40.338
मारे bukhane में तो काबे में गढ़ो

00:46:38.639 --> 00:46:43.078
ब्राह्मण को

00:46:40.338 --> 00:46:46.199
मंदिर में मार्ता है वही चना रिस्पेक्टबल

00:46:43.079 --> 00:46:49.859
है की यू कैन वेरी एम इन डी कब

00:46:46.199 --> 00:46:54.480
की उसे अपनी जो बिलीव है उससे वह फैठफुल

00:46:49.858 --> 00:46:56.900
है उससे वो नहीं पुरी तरह से कमिटेड है

00:46:54.480 --> 00:46:56.900
क्या

00:46:59.719 --> 00:47:04.818
बंदे में घिराई एन कुछ सुबह

00:47:07.519 --> 00:47:12.679
ब्राह्मण की आजमाइश है ये तो सब जानते हैं

00:47:12.739 --> 00:47:21.719
और ना जनेऊ के घेरे में कोई बात है

00:47:17.219 --> 00:47:22.379
ब्राह्मण और शेर की आजमाइश तो वफादारी में

00:47:21.719 --> 00:47:24.858
है

00:47:22.380 --> 00:47:28.579
[प्रशंसा]

00:47:24.858 --> 00:47:28.578
यह सबसे नहीं चलेगा

00:48:06.559 --> 00:48:10.259
अजीब-अजीब शेर है अब देखिए आप उनका एक शेर

00:48:08.818 --> 00:48:13.519
है की

00:48:10.260 --> 00:48:17.700
पढ़ते हुए खुद से है शबनम को फना की तालीम

00:48:13.519 --> 00:48:19.940
के जब सूरज की किरण पड़ती है उसकी बूंद पे

00:48:17.699 --> 00:48:24.059
तो वो उद जाती है

00:48:19.940 --> 00:48:26.659
प्रोग्राम है तो इवेपरेट जैसे ही सूरज की

00:48:24.059 --> 00:48:26.659
किरण न्यूज़ पर पड़े

00:48:26.719 --> 00:48:34.919
शबनम को फना की ताली

00:48:29.940 --> 00:48:38.818
मैं भी हूं एक इनायत की नजर होने तक

00:48:34.920 --> 00:48:40.318
जैसे ही मुझे अप्रिशिएसन मिला मैं भी खत्म

00:48:38.818 --> 00:48:43.500
हो जाऊं

00:48:40.318 --> 00:48:44.719
जैसे की सूरज की बूंद सूरज की किरण पढ़ते

00:48:43.500 --> 00:48:48.719
ही खत्म हो जाते

00:48:44.719 --> 00:48:51.618
क्या क्या अजीब अजीब शेर है उसके हान वो

00:48:48.719 --> 00:48:51.618
नहीं वफा पर

00:48:51.889 --> 00:49:01.039
[प्रशंसा]

00:48:55.639 --> 00:49:04.920
है बेवफा सही जिसको हो जानू दिल

00:49:01.039 --> 00:49:07.338
से जिसको हो जानो दिल अजीब उसकी गली में

00:49:04.920 --> 00:49:07.338
जाए क्यों

00:49:08.579 --> 00:49:12.500
इसको लोग दिनों दिल अज़ीज़ भी कहते हैं

00:49:23.119 --> 00:49:28.740
तो

00:49:25.579 --> 00:49:31.380
ग़ालिब को आने वाले दिनों में हम कैसे याद

00:49:28.739 --> 00:49:34.019
कर सकते हैं इसलिए की नौजवान नसीब के लोग

00:49:31.380 --> 00:49:37.440
एक बड़ी तादाद में यहां मौजूद हैं डिजिटल

00:49:34.019 --> 00:49:42.259
मीडिया है जमाना बदल रहा है अब वो किताबें

00:49:37.440 --> 00:49:42.260
वगैरा तो पढ़ते हैं लोग लेकिन फिर क्या है

00:49:56.338 --> 00:50:02.818
आज जो है विटामिन की गोली

00:49:59.579 --> 00:50:07.160
आप जब कांस्टेंटली 8 को कंज्यूम करते हैं

00:50:02.818 --> 00:50:07.159
अप्रिशिएट करते हैं तो आपका

00:50:08.059 --> 00:50:13.318
डिवेलप होता है

00:50:10.338 --> 00:50:16.739
आपको समझ में आता है क्या खूबसूरत है और

00:50:13.318 --> 00:50:20.159
क्या खूबसूरत नहीं है धीरे-धीरे

00:50:16.739 --> 00:50:24.118
जो बुरा है वो खूबसूरत नहीं है तो अच्छा

00:50:20.159 --> 00:50:27.420
है वो खूबसूरत होता है तो आपको स्टैटिकली

00:50:24.119 --> 00:50:30.660
अच्छे और बुरे की तमीज होने लगती है

00:50:27.420 --> 00:50:33.900
कोई आदमी जो दीप इन शायरी और शायरी को री

00:50:30.659 --> 00:50:35.940
अप्रिशिएट करता हो वो बहुत नफरत अपने दिल

00:50:33.900 --> 00:50:36.769
में नहीं रख पाएगा शायरी नफरत करने नहीं

00:50:35.940 --> 00:50:39.659
देगी आपको

00:50:36.769 --> 00:50:41.759
[प्रशंसा]

00:50:39.659 --> 00:50:44.219
तो

00:50:41.760 --> 00:50:47.700
अभी हम लोग थोड़ा क्या हो रहा है हमारी जो

00:50:44.219 --> 00:50:48.439
प्रोग्रेस है आगे इंडिविजुअल को लोपिड हो

00:50:47.699 --> 00:50:52.618
रही है

00:50:48.440 --> 00:50:55.200
हमारे हाथ तो आसमान को छू रहे मगर पैर

00:50:52.619 --> 00:50:59.220
जमीन से अलग हो गए थोड़े से

00:50:55.199 --> 00:51:01.618
यह जो हमारी सदियों की तहजीब है ट्रेडीशंस

00:50:59.219 --> 00:51:04.558
है चाहे वो हमारा फाग कार्ट हो चाहे हमारी

00:51:01.619 --> 00:51:07.260
शायरी हो चाहे हमारे डांस हो चाहे मैं

00:51:04.559 --> 00:51:10.140
क्लासिकल म्यूजिक हो दुनिया में एक मुल्क

00:51:07.260 --> 00:51:12.780
हिंदुस्तान जिसमें दो क्लासिकल ट्रेडीशंस

00:51:10.139 --> 00:51:15.659
हैं हिंदुस्तानी संगीत कर्नाटक संगीत

00:51:12.780 --> 00:51:18.300
दुनिया में कोई दूसरा मुल्क नहीं है जो

00:51:15.659 --> 00:51:20.578
वेरिएशन आपका म्यूजिक का महाराष्ट्र जा के

00:51:18.300 --> 00:51:23.420
मणिपुर तक मिलेगा जो कश्मीर से

00:51:20.579 --> 00:51:23.420
कन्याकुमारी मिलेगी

00:51:55.619 --> 00:52:01.318
उन्हें मिलके यहां मैं कंप्लीट पर्सनैलिटी

00:51:58.559 --> 00:52:03.300
बनेंगे वह यह रहा है की हम इसको थोड़ा

00:52:01.318 --> 00:52:06.179
इग्नोर कर गए

00:52:03.300 --> 00:52:09.059
मुझे खुशी है की यह गलती मेरी जेनरेशन से

00:52:06.179 --> 00:52:11.759
हुई थी लेकिन जो आपकी जेनरेशन है आज के जो

00:52:09.059 --> 00:52:14.579
यंगस्टर है उनमें तलाश है की कुछ समान

00:52:11.760 --> 00:52:16.700
कहीं खो गया है वो कहां है आप उसे ढूंढ

00:52:14.579 --> 00:52:16.700
रहे हैं

00:52:19.019 --> 00:52:26.300
तो अब हम आप ही के भरोसे हैं

00:52:22.858 --> 00:52:26.299
और ग़ालिब क्या कर सकते हैं इसमें

00:52:26.480 --> 00:52:32.818
बहुत बड़ा पार्ट है आपके हेरिटेज का उसमें

00:52:29.880 --> 00:52:34.920
कोई शक ही नहीं है और बहुत से लोग हैं

00:52:32.818 --> 00:52:36.380
उनमें से खाली भी है इंपॉर्टेंट आदमी है

00:52:34.920 --> 00:52:40.099
और

00:52:36.380 --> 00:52:40.099
जो हमारे कल्चर

00:52:46.880 --> 00:52:52.260
इतना बड़ा पेट जो है हमारे यहां पैदा हुए

00:52:49.739 --> 00:52:54.959
जैसे हम प्राउड फुल करते हैं की 3.5 हजार

00:52:52.260 --> 00:53:00.660
साल पहले हमारे यहां 4000 साल पहले

00:52:54.960 --> 00:53:03.659
कालिदास हुए हमारे यहां मिर्च के गए हमारे

00:53:00.659 --> 00:53:06.358
यहां अरे अजीब अजीब बातें हुई हैं लोगों

00:53:03.659 --> 00:53:10.399
को पता ही नहीं है दुनिया में पहला मुल्क

00:53:06.358 --> 00:53:12.539
है हिंदुस्तान जहां पर एक ऑर्गेनाइज्ड

00:53:10.400 --> 00:53:15.358
मूवमेंट शुरू हुआ

00:53:12.539 --> 00:53:17.000
3.5 हजार साल पहले

00:53:15.358 --> 00:53:20.338
चार्वाक

00:53:17.000 --> 00:53:24.318
लीडर द बृहस्पति

00:53:20.338 --> 00:53:29.219
साधे 3000 साल पहले वो लोग पैदा

00:53:24.318 --> 00:53:31.619
द की मौत के बाद कुछ नहीं है सब बकवास जिस

00:53:29.219 --> 00:53:33.358
दिन तो मार गए उसे दिन खत्म हो गए ये सबके

00:53:31.619 --> 00:53:36.240
कोई तुम्हें बैठा देख रहा और तुम्हें सजा

00:53:33.358 --> 00:53:39.299
मिलेगी और ये कुछ नहीं होने वाला

00:53:36.239 --> 00:53:41.939
वो गलत कहते द सही कहते द अलग बहस है मगर

00:53:39.300 --> 00:53:44.039
यह कहते तो द

00:53:41.940 --> 00:53:47.159
उद्योग मानते होंगे कुछ लोग नहीं मानते

00:53:44.039 --> 00:53:47.159
होंगे तो

00:53:50.099 --> 00:53:56.000
[प्रशंसा]

00:53:54.059 --> 00:54:01.619
लेकिन यह

00:53:56.000 --> 00:54:03.139
थॉट थी और कमल क्या है की इस समाज ने

00:54:01.619 --> 00:54:06.900
बृहस्पति को

00:54:03.139 --> 00:54:10.578
उसे समाज ने जिसने चारबाग जैसे मोमिन चलाए

00:54:06.900 --> 00:54:12.150
द गोली नहीं मार दी थी कानपुर की तरह

00:54:10.579 --> 00:54:17.559
पंसारे की तरह

00:54:12.150 --> 00:54:17.559
[प्रशंसा]

00:54:17.719 --> 00:54:23.338
की थी मेरे ख्याल से कुछ लोग जानना

00:54:20.699 --> 00:54:26.338
चाहेंगे की कहा जाता है की ग़ालिब हमने

00:54:23.338 --> 00:54:29.099
सिर्फ शायरी की बात की है आपको पता है

00:54:26.338 --> 00:54:32.338
गालिब ने बहुत सारे लिखे हैं और कुछ

00:54:29.099 --> 00:54:36.300
स्कॉलरशिप यहां तक कहते हैं की ग़ालिब के

00:54:32.338 --> 00:54:39.779
जो खाटू हैं उनका प्रस में तकरीबन उतना ही

00:54:36.300 --> 00:54:43.460
मकाम है जितना शायरी में उनके असर की वजह

00:54:39.780 --> 00:54:43.460
से उनके खुद के बारे में कुछ

00:54:44.000 --> 00:54:50.519
दुनिया में

00:54:46.039 --> 00:54:51.980
99% लोग यह बिलीव करते हैं की जो नहीं हुआ

00:54:50.519 --> 00:54:55.559
है वह नहीं होना चाहिए

00:54:51.980 --> 00:54:58.380
नथिंग शोल्ड हैपन फॉर डी फर्स्ट टाइम अरे

00:54:55.559 --> 00:55:01.339
भाई पहली बार नहीं होगा तो होगा कैसे मगर

00:54:58.380 --> 00:55:04.338
पहली बार कुछ करने को लोग तैयार नहीं होते

00:55:01.338 --> 00:55:04.338
फिर

00:55:06.079 --> 00:55:13.500
जमाने में एक बड़ा फॉर्मल तरीका था लेटर

00:55:09.780 --> 00:55:15.780
लिखने का उसकी लैंग्वेज भी अलग होती थी जो

00:55:13.500 --> 00:55:17.900
आप बात नहीं करते वो लेटेस्ट में होती थी

00:55:15.780 --> 00:55:22.519
ग़ालिब ने उसे तोड़ दिया

00:55:17.900 --> 00:55:22.519
फिर सामने बैठ के बात कर रहा है ऐसे

00:55:24.800 --> 00:55:30.119
किसी ने इस तरह के हथिनी पड़े द इस अंदाज़

00:55:28.019 --> 00:55:32.759
से के जैसे बात हो रही है लिख तो रही ही

00:55:30.119 --> 00:55:35.880
नहीं वो तो वो हंगामा कर दिया उन्होंने

00:55:32.760 --> 00:55:39.180
इसलिए की वो पहली बार इस तरह के खत लिखे

00:55:35.880 --> 00:55:41.539
गए हैं पहली बार बहुत कम लोग होते हैं जो

00:55:39.179 --> 00:55:45.118
कोई नया कम करने की हिम्मत रखते हैं

00:55:41.539 --> 00:55:46.279
ग़ालिब ने किया और फिर उसका जबान पे भी

00:55:45.119 --> 00:55:49.380
असर

00:55:46.280 --> 00:55:51.780
पडले पे भी असर पड़ा जो लेटर राइटिंग है

00:55:49.380 --> 00:55:54.559
उसे पर भी असर पड़ा और आज जो लिटरेचर की

00:55:51.780 --> 00:55:54.559
तरह पढ़े जाते हैं

00:55:56.480 --> 00:56:02.639
लेटेस्ट इसलिए की वो बहुत पढ़ने वाली बात

00:55:59.519 --> 00:56:04.199
है और बहुत dilchas में उनके खाते हैं और

00:56:02.639 --> 00:56:06.779
जो अंदाज़ है उनका वो लिखने का वो बस

00:56:04.199 --> 00:56:10.019
दिलचस्प है मेरे ख्याल से हमारा वक्त हुआ

00:56:06.780 --> 00:56:11.880
जाता है जब ये सब बहुत ने हमारा तो वक्त

00:56:10.019 --> 00:56:15.659
नहीं होता है

00:56:11.880 --> 00:56:16.980
ये ये प्रोग्राम खत्म हो रहा है हमारा

00:56:15.659 --> 00:56:19.699
वक्त तो अभी बहुत दिनों बाद आएगा

00:56:16.980 --> 00:56:22.500
[प्रशंसा]

00:56:19.699 --> 00:56:23.719
स्टार के साथ यहां बैठ के बात करना आप देख

00:56:22.500 --> 00:56:26.119
रहे हैं

00:56:23.719 --> 00:56:29.098
हमारे दोस्त हैं

00:56:26.119 --> 00:56:31.680
वो अंग्रेजी के जर्नलिस्ट है अपने

00:56:29.099 --> 00:56:34.500
पॉप्युलर है तो उन्हें ख्याल आया की भाई

00:56:31.679 --> 00:56:36.598
मैं अंग्रेजी में जर्नलिज्म करता हूं तो

00:56:34.500 --> 00:56:38.818
एक सर्टेन सर्कल तक पहुंचता हूं मुझे

00:56:36.599 --> 00:56:41.940
हिंदी में भी इंटरव्यू लेना चाहिए ताकि

00:56:38.818 --> 00:56:44.579
मेरा सर्कल बड़ा हो तो मेरी सहमत पहला

00:56:41.940 --> 00:56:47.240
इंटरव्यू उन्होंने मेरे ही ले लिया और वो

00:56:44.579 --> 00:56:52.640
अपना सवाल लिख के ले द ठीक चलते रहे

00:56:47.239 --> 00:56:52.639
आखिरी सवाल में उन्होंने पोल खोल दी

00:56:54.179 --> 00:57:00.598
आपको इतने वोट मिले हैं इतने ऑनर्स मिले

00:56:57.300 --> 00:57:04.400
हैं इतनी आपने अचीवमेंट किए हैं

00:57:00.599 --> 00:57:04.400
आपकी कोई आखिरी ख्वाहिश है

00:57:04.800 --> 00:57:09.539
वो कहना चाहे ये चाह रहा था की अब आपका

00:57:06.960 --> 00:57:12.659
क्या एंबीशन है क्या आपकी कोई आखिरी

00:57:09.539 --> 00:57:14.880
ख्वाहिश है तो मैंने उनसे पूछा की मतलब इस

00:57:12.659 --> 00:57:15.799
इंटरव्यू के बाद आप क्या मुझे गोली मरने

00:57:14.880 --> 00:57:18.480
वाले हैं

00:57:15.800 --> 00:57:20.640
ये आप फांसी देने वाले हैं जो आप मेरी

00:57:18.480 --> 00:57:23.519
आखिरी ख्वाहिश पूछ रहे हैं

00:57:20.639 --> 00:57:25.920
तो ऐसा हो जाता है तो हमारा वक्त नहीं आया

00:57:23.519 --> 00:57:30.179
देखिए कुछ नहीं वो सवाल मेरे ख्याल से है

00:57:25.920 --> 00:57:32.159
नहीं साहब इनका सवाल तो होगा देखा जाए

00:57:30.179 --> 00:57:35.349
पोयम का रही हैं सुनने के लिए

00:57:32.159 --> 00:57:35.349
[प्रशंसा]

00:57:37.940 --> 00:57:43.220
हान साहब

00:57:39.409 --> 00:57:46.889
[प्रशंसा]

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इतनी देर से सिर्फ कैसे करो हो रहा है

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[प्रशंसा]

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ठीक है 225 साल नहीं हुए तो क्या हुआ

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ठीक है

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ना तो रोशन है इंशाल्लाह 225 साल तक के

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अब हो तो क्या ना हो तो क्या

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तब तक हमारा वक्त हो जाएगा

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एक छोटी सी पोयम सुना देता हूं भैया

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चलते-चलते

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उसका नाम है यह खेल क्या है

00:58:15.510 --> 00:58:21.040
[प्रशंसा]

00:58:21.900 --> 00:58:28.639
मेरे मुखालिफ ने चाल चल दिए

00:58:24.440 --> 00:58:28.639
और अब मेरी चाल के इंतजार

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खानों में रखे काले सफेद मुहर्रम को देखता

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हूं मैं सोचता हूं ये मेरे क्या है अगर

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मैं समझूं की ये जो बोल रहे हैं सिर्फ

00:58:40.260 --> 00:58:47.339
लकड़ी के हैं खिलौने है तो जितना क्या है

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हर ना क्या है ना यह जरूरी ना वो है अगर

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खुशी है ना जितने की नहाने का ही कोई गम

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है तो फिर क्या

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मैं सोचता हूं जो खेलना है तो अपने दिल

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में यकीन कर लूं

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यह मोर सचमुच के बादशाह हो अज़ीज़ सचमुच

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के हैं प्याज

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और इनकी आगे है दुश्मनों की फौज रखती है

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जो की मुझको तबाह करने

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मगर मैं ऐसा क्यों

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सोचता हूं यह खेल कब है

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यह जंग है जिसको जितना है ये जंग है

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जिसमें सब है

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कोई ये कहता है जैसे मुझसे ये जंग भी है

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यह खेल भी है यह जंग है पर खिलाड़ियों की

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ये खेल है जंग की तरह का

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मैं सोचता हूं जो खेल है इसमें इस तरह का

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उसूल क्यों है

00:59:38.659 --> 00:59:44.899
मगर जो है बादशाह कभी उसे पर आंच भी ना आए

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सोचता हूं जो खेल है इसमें

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जाए मगर जो है बादशाह उसे पर कभी कोई आंच

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भी ना आए

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वज़ीर को ही वह बस इजाजत की जिस तरफ भी

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चाहे

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मैं सोचता हूं जो खेल है उसमें इस तरह का

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उसूल क्यों है प्यादा जो अपने घर से निकले

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पलट के वापस ना जाने पाए

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मैं सोचता हूं अगर यही है उसूल तो फिर

01:00:19.980 --> 01:00:25.940
उसूल क्या है

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अगर यही है यह खेल तो फिर ये खेल क्या है

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बहन सवालों से जाने कबसे रहा हूं मेरे

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मुखालिफ ने चल चल दिए और अब मेरी चाल है

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इंतजार में

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बहुत-बहुत शुक्रिया जावेद अख्तर साहब

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[संगीत]

01:00:48.820 --> 01:00:51.349
[संगीत]
