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Does God Exist? Javed Akhtar और Mufti Shamail Nadwi के बीच बहस में क्या हुआ? Saurabh Dwivedi
The Lallantop
·
May 10, 2026
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Transcript
0:00
कॉन्सिट्यूशन क्लब में हो रही इस बेहद
0:03
जरूरी बहस में डिबेट में आप सभी का
0:05
बहुत-बहुत स्वागत है। मेरा नाम सौरभ
0:07
द्विवेदी है। मैं इंडिया टुडे हिंदी
0:10
मैगजीन का और ललन टॉप का संपादक हूं और आज
0:13
की इस बहस का मॉडरेटर भी।
0:16
इससे पहले कि यह बहस जिसका शीर्षक जिसका
0:19
टॉपिक है डस गॉड एकिस्ट?
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यह शुरू हो दो विद्वानों के बीच जिनके नाम
0:26
हैं श्री जावेद अख्तर और श्री मुफ्ती
0:29
शमाइल नदवी जी। मैं कुछ बुनियादी चीजें आप
0:33
लोगों को बता दूं ताकि यह बहस व्यवस्थित
0:36
ढंग से चले। वैसे नहीं जैसी बहसों को
0:39
देखने के हम इन दिनों आदि हो गए हैं। पढ़ी
0:42
लिखी अकादमिक बहस।
0:44
इस बहस का प्रारूप कैसा होगा? इसका
0:47
स्ट्रक्चर कैसा होगा? पहले मैं आपको यह
0:49
बता देता हूं।
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सबसे पहले
0:53
नौजवान
0:55
विद्वान मुफ्ती शमाल नदवी जी 10 मिनट अपनी
0:58
दलीलें आप लोगों के सामने रखेंगे। उसके
1:02
बाद जावेद अख्तर साहब 10 मिनट अपनी बात
1:05
रखेंगे। उसके बाद जिसको हम अंग्रेजी में
1:08
रिबटल कहते हैं। एक जवाबी दौर रहेगा कि
1:11
आपने जो कहा मैं उससे मुतमाइन हूं कि नहीं
1:13
हूं और हमने जो कहा। इसके बाद बहस का
1:16
राउंड टू शुरू होगा। दोनों विद्वानों को
1:19
फिर से 7-सा मिनट का वक्त मिलेगा और इसके
1:22
बाद रिबर्टल राउंड टू होगा 5-प मिनट का।
1:27
इसके बाद एक दूसरे से सवाल जवाब होंगे।
1:30
इसके लिए हमने लगभग 16 मिनट का वक्त तय
1:32
किया है। अब यह सवालों की प्रकृति पर
1:35
निर्भर करता है कि कितने सवाल होंगे।
1:37
इसीलिए हमने वक्त की पाबंदी रखी है और
1:40
इसके बाद आखिरी में 5-प मिनट का वक्त
1:43
दोनों विद्वानों को एक बार फिर से दिया
1:45
जाएगा अपने क्लोजिंग आर्गुमेंट के लिए और
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उसके बाद जो इस बहस के लिए सबसे जरूरी चीज
1:52
है कि आप और हम और इंटरनेट पर देख रहे
1:56
लाखों करोड़ों लोग उनके सवाल जवाब होंगे।
1:58
तो आप लोग जो यहां मौजूद हैं आपके हम कुछ
2:01
सवाल लेने की कोशिश करेंगे। 30 मिनट का
2:04
वक्त हमने उसके लिए तय कर रखा है। इस तरह
2:06
से यह 2 घंटे की बहस पूरी होगी।
2:10
दो तीन बुनियादी बातें हैं जिनका हमें
2:12
ध्यान रखना है। किसी भी किस्म की नारेबाजी
2:15
में हमें शरीक नहीं होना है। यह
2:18
हल्लागुल्ला नहीं है क्योंकि पूरी दुनिया
2:20
देख रही है तो एक नजीर कायम करनी है। एक
2:22
उदाहरण लोगों के सामने रखना है कि पढ़े
2:24
लिखे लोग इत्तेफाकी और नाइत्तेफाकी रखते
2:28
हुए भी एक दूसरे से सहमति और असहमति रखते
2:30
हुए भी बात कह सकते हैं। यहां पर मेरे
2:33
जेएनयू के प्रोफेसर बैठे हैं पुरुषोत्तम
2:35
अग्रवाल जी जिन्होंने हमें क्लास में
2:36
सिखाया है कि सहमति का
2:40
साहस और असहमति का विवेक और इसका ठीक उलट
2:44
भी यह बड़ा जरूरी है।
2:47
दूसरी बात यह किसी एक धर्म के बारे में
2:51
बहस नहीं है। यह बात सबको स्पष्ट होनी
2:54
चाहिए। किसी धर्म को महान बताने या किसी
2:57
धर्म को कमतर बताने की यह बहस नहीं है। तो
3:00
यदि कोई इस उम्मीद से देख रहा है या यहां
3:03
आया है तो मैं आपको आश्वस्त करना चाहता
3:05
हूं कि आपको नाउद ही हाथ लगेगी।
3:09
इस बहस में बहुत ज्यादा धार्मिक प्रतीकों
3:12
के इस्तेमाल को लेकर भी यह दोनों लोग जो
3:14
अभी आपको गंभीर दिख रहे हैं। भले लोग हैं।
3:17
कल शाम को चाय पर मिले थे। बहुत हंसीज़ाक
3:21
भी इनके बीच हुआ था और गलवैया डालते हुए
3:23
एक तस्वीर भी हुई थी। यह इस बात का प्रमाण
3:27
है कि इंटरनेट पर जो हल्ला मचा हुआ है
3:30
उसके मुकाबले यह दोनों लोग बहुत ही अच्छे
3:34
शांत ढंग से बहस के लिए राजी हो गए हैं।
3:36
Twitter की बातें Twitter तक सीमित एलन
3:39
मस्क आजकल उसको एक्स कहते हैं
3:42
और अब इस बहस की शुरुआत मैं इन विद्वानों
3:46
का हालांकि इनको परिचय की जरूरत नहीं है
3:48
पर हो सकता है। हमें पत्रकारिता में
3:51
सिखाया जाता है कि नेवर अस्यूम विज्ञान भी
3:54
यही कहता है। मुफ्ती शमाल नदवी साहब
3:56
इस्लामिक विद्वान शिक्षाविद हैं। कोलकाता
3:58
के वाहियान फाउंडेशन के संस्थापक हैं।
4:01
लखनऊ की प्रतिष्ठित दारुल उलूम नदतुल उलमा
4:04
से ग्रेजुएशन किया है। सोशल मीडिया और
4:06
सार्वजनिक मंचों पर अध्यापन और बौद्धिक
4:08
कामों में सक्रिय हैं। और इस समय
4:10
इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी मलेशिया
4:13
से पीएचडी कर रहे हैं। अच्छी बात यह है कि
4:16
पढ़ाई के साथ-साथ ट्रेवल ब्लॉग भी बनाते
4:18
हैं। पेट्रोनस टावर के सामने का ब्लॉग
4:20
हमने देखा।
4:22
हमारे साथ जावेद अख्तर साहब हैं। जावेद
4:25
अख्तर साहब कवि हैं, शायर हैं। गद्य भी
4:29
लिखते हैं। फिल्मों के लिए संवाद लिखे
4:32
हैं, गीत लिखे हैं। इससे इत
4:37
वैज्ञानिक सोच को लेकर या अपने डिक्लेयर्ड
4:41
एथिज्म को लेकर भी मुखरित रहते हैं और
4:43
अपने तैशनालिटी की बात करते हैं। देवियों
4:46
और सज्जनों, डस गॉड एकिस्ट? इस सवाल का
4:50
जवाब सब अपने-अपने त खोजने की कोशिश कर
4:53
रहे हैं। कोई इसको गॉड डम पार्टिकल की खोज
4:56
बताता है। कोई गॉड पार्टिकल की खोज बताता
4:58
है। कोई हिक्स बोसान की खोज बताता है। कोई
5:01
यह सवाल जवाब तलाशने की कोशिश करता है कि
5:04
मास एग्जिस्टेंस में आखिर आया कैसे? हुआ
5:07
क्या था? सृष्टि के पहले, समय के पहले
5:09
क्या था? और कोई यह कहता है कि ये सारी
5:12
खोजें जिस मस्तिष्क में हो रही है,
5:14
प्रकृति के क्रम में वो कैसे विकसित हुआ?
5:16
मैं उम्मीद करता हूं कि हम आज इन बुनियादी
5:21
सवालों के कुछ जवाब हासिल करने में कामयाब
5:23
हो। मैं सबसे पहले मंच पर आमंत्रित कर रहा
5:26
हूं मुफ्ती शमाल नदवी साहब को। आइए सर।
5:29
जी
5:32
[प्रशंसा]
5:42
एक आपकी गुजारिश बोलना शुरू करें। आप लोग
5:45
प्लीज अपने फोन लाइव मोड पे या साइकिल एक
5:49
बार चेक कर ले कई बार बेहानी हो जाती है।
6:00
तमाम तारीफें उस क्रिएटर के लिए जिसने इस
6:03
यूनिवर्स को एक मकसद के तहत पैदा किया है।
6:07
रिस्पेक्टेड जनाब जावेद अख्तर साहब,
6:09
मिस्टर सौरभ द्विवेदी और रिस्पेक्टेड
6:12
ऑडियंस थैंक यू ऑल फॉर बीइंग हियर टुडे।
6:15
आज की डिबेट में क्योंकि हम बात करने वाले
6:18
हैं डस गॉड एक्सिस्ट के टॉपिक पर तो यह एक
6:22
ऐसा टॉपिक है जिसके मुतालिक कोई भी डिसीजन
6:25
लेने के लिए अलग-अलग स्टैंडर्ड्स हो सकते
6:27
हैं। लिहाजा डिबेट के शुरू में यह जरूरी
6:31
है कि हम यह जान लें कि आज के इस टॉपिक
6:34
में कौन सा स्टैंडर्ड सही होगा और कौन सा
6:38
गलत होगा। सबसे पहला स्टैंडर्ड जिसे मैं
6:42
समझता हूं कि हमारे रिस्पेक्टेड जनाब
6:44
जावेद अख्तर साहब बड़ी तेजी के साथ उसकी
6:47
तरफ लपकेंगे वो है साइंस। जबकि साइंस दर
6:51
हकीकत खुदा के एग्जिस्टेंस को डायरेक्टली
6:54
साबित करने या उसके एकिस्टेंस को डिनाई
6:58
करने के लिए स्टैंडर्ड नहीं बन सकती। और
7:00
उसकी वजह क्या है? ये मैं नहीं कह रहा। यह
7:04
वो लोग कह रहे हैं जो साइंस के एक्सपर्ट्स
7:07
हैं। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस कहती है साइंस
7:12
डजंट हैव द प्रोसेससेस टू प्रूव और
7:16
डिस्प्रूव द एकिस्टेंस ऑफ़ गॉड। व्हाई?
7:19
क्योंकि साइंस का ताल्लुक एंपेरिकल
7:22
एविडेंस से है और एंपेरिकल एविडेंसेस का
7:24
ताल्लुक हमारे नेचुरल और फिजिकल वर्ल्ड से
7:27
है। जबकि गॉड नॉन फिजिकल और सुपर नेचुरल
7:31
रियलिटी है। लिहाजा नॉन फिजिकल रियलिटी को
7:35
आप उस टूल के साथ नहीं चेक कर सकते जिसका
7:38
काम फिजिकल रियलिटी को तलाश करना है।
7:41
लिहाजा आज इस डिबेट में गॉड की
7:44
एग्ज़िस्टेंस को साबित करने या उसे डिनाई
7:47
करने में साइंटिफिक एविडेंस को एक्सेप्ट
7:50
नहीं किया जाएगा। दूसरा स्टैंडर्ड हो सकता
7:54
है रेवुलेशन कि रेवेलेशन के जरिए हम ये
7:57
साबित करें कि गॉड एकिस्ट करता है या
8:00
नहीं। लेकिन ये स्टैंडर्ड भी आज
8:02
इररेलेवेंट है। क्यों? क्योंकि रेवोलेशन
8:05
मेरे नजदीक सोर्स ऑफ नॉलेज है। वैलिड
8:09
सोर्स ऑफ नॉलेज है। लेकिन हमारे जावेद
8:11
अख्तर साहब के नजदीक ये वैलिड सोर्स ऑफ
8:13
नॉलेज नहीं है। लिहाजा आज की डिबेट में
8:16
मैं एक भी एविडेंस किसी भी मजहबी
8:19
स्क्रिप्चर से नहीं दूंगा। ताकि जावेद
8:22
अख्तर साहब के लिए वो अनएक्सेप्टेबल ना
8:24
हो। तीसरा जो मयार हो सकता है वो है
8:28
ऑब्जरवेशन के भाई कोई कहे कि हमें खुदा
8:31
दिखाओ। अगर है तो दिखाओ या ये कि खुदा के
8:34
एकिस्टेंस पर एंपेरिकल एविडेंस दो। तो ये
8:37
है दर हकीकत गलत टूल का इस्तेमाल करना। ये
8:40
ऐसा ही है कि जावेद साहब मुझसे ये मुतालबा
8:42
करें कि मुफ्ती साहब आप मेटल डिटक्टर के
8:45
जरिए प्लास्टिक डिटेक्ट करके दिखाएं। अबकि
8:47
प्लास्टिक डिटेक्ट नहीं हो पा रही है।
8:49
लिहाजा प्लास्टिक डज नॉट एक्सिस्ट। नो यू
8:52
आर यूजिंग द रोंग टूल। इस टूल से
8:54
प्लास्टिक को डिटेक्ट नहीं किया जाता।
8:56
लिहाजा
8:58
मैं समझता हूं कि गॉड के एकिस्टेंस पर
9:01
एंपेरिकल एविडेंस का मुतालबा करना एक
9:04
बचकाना मुतालबा है और हमारे रिस्पेक्टेड
9:06
जनाब जावेद अख्तर साहब इस स्टेज से अब
9:09
बहुत आगे निकल चुके हैं। अब बचता है एक ही
9:12
स्टैंडर्ड और वो स्टैंडर्ड है अकल लॉजिक
9:17
रीजनिंग और यही वो स्टैंडर्ड है जिसके तहत
9:21
गॉड के एक्जिस्टेंस को साबित किया जाएगा
9:24
या गॉड की एक्सिस्टेंस को डिनाई किया
9:26
जाएगा। लेकिन चूंकि ये बहुत इंपॉर्टेंट और
9:29
सेंसिटिव टॉपिक है। इसलिए लॉजिकल
9:32
आर्गुमेंट भी ऐसा होना चाहिए जो डेफिनेटिव
9:35
हो। इनडेफिनेटिव ना हो जो दो और दो चार की
9:38
तरह बिल्कुल वाज़ हो। जिसे लॉजिकली रिजेक्ट
9:41
करना पॉसिबल नहीं हो। फॉर एग्जांपल हम
9:43
कहें हमारे रिस्पेक्टेड मिस्टर सौरभ साहब
9:47
ये एक इंसान है और तमाम इंसान कॉन्शियस
9:51
बीइंग है। लिहाजा नतीजा क्या निकला? हमारे
9:54
सौरभ साहब भी कॉन्शियस बीइंग हैं। क्या ये
9:56
इनडेफिनेट आर्गुमेंट है या डेफिनेट
9:58
आर्गुमेंट? है? ये डेफिनेट आर्गुमेंट है।
10:00
ये दो और दो की तरह वाज़ है। इसमें किसी
10:03
तरह जो है लॉजिकली इसको रिजेक्ट नहीं किया
10:05
जा सकता। तो अगर आज हमारे जावेद अख्तर
10:08
साहब ऐसी कोई अकली दलील और लॉजिकल एविडेंस
10:13
दें खुदा के ना होने पर जो डेफिनेट भी हो
10:16
तो मैं ये ऐलान करता हूं कि यकीनन मैं उस
10:19
एविडेंस को कबूल करूंगा और उस पर गौर
10:22
करूंगा। लेकिन साथ में ये भी ऐलान कर देता
10:24
हूं प्रेडिक्शन के तौर पर कि ऐसा कोई
10:26
डेफिनेट आर्गुमेंट कोई नहीं पेश कर सकता।
10:30
दलील हम देंगे और डेफिनेटिव दलील देंगे।
10:35
लॉजिकल दलील देंगे। ऐसी दलील देंगे जो
10:38
एंटायर एथिस्टिक वर्ल्ड उसे रेफ्यूट नहीं
10:42
कर सकती। चल अब हम एक एग्जांपल सोचते हैं।
10:45
एक सिनेरियो सिंपल सिनेरियो तमाम ऑडियंस
10:47
से गुजारिश है। हम और आप एक आइसोलेटेड
10:50
आइलैंड पर हैं। ऐसा आइलैंड जहां पे हमसे
10:53
पहले कोई कभी नहीं गया। चलते-चलते आपके
10:56
सामने अचानक आपने देखा एक पिंक कलर की बॉल
10:59
पड़ी हुई है। सबसे पहला सवाल आपके ज़हन में
11:02
क्या आएगा कि ये बॉल यहां क्यों आई? कैसे
11:05
आई? यह पिंक कलर की ही क्यों है? कोई और
11:07
कलर भी हो सकता था। यह इसी शेप में क्यों
11:10
है? कोई और शेप भी हो सकता था। नेचुरली आप
11:13
इस तरफ पहुंचेंगे कि कोई ना कोई है जिसने
11:16
इन स्पेसिफिक प्रॉपर्टीज के साथ इस बॉल को
11:19
बनाया है और यहां पे रखा है। चकि आप जानते
11:23
हैं कि ये जो बॉल है इसका एग्ज़िस्ट करना
11:26
जरूरी नहीं है। ये एग्ज़िस्ट कर भी सकती थी
11:28
नहीं भी कर सकती थी। और एक्सिस्ट करना ही
11:30
था तो किसी और फॉर्म में करती। किसी और
11:32
कलर में करती। अब आप इस बॉल को एक्सपेंड
11:35
करते चले जाएं। एक्सपेंड करते चले जाएं।
11:37
एक्सपैंड करते चले जाएं। यहां तक कि ये
11:39
बॉल यूनिवर्स के साइज की हो जाए। बताइए कि
11:42
क्या साइज साइज के बढ़ जाने से सवाल बदल
11:44
जाएगा? हरगिज़ नहीं बदलेगा। अभी भी सवाल
11:47
रहेगा। ये यूनिवर्स कहां से आया? इन
11:49
स्पेसिफिक प्रॉपर्टीज के साथ कहां से आया?
11:52
क्यों आया? किसने बनाया? ये सवाल उस वक्त
11:55
भी वैलिड रहेगा।
11:57
लेकिन यह सवाल अगर हम जनाब जावेद अख्तर
12:01
साहब से करें तो क्योंकि इनका वर्ल्ड व्यू
12:03
एथिस्टिक है और सिर्फ इनका नहीं मतलब
12:05
जितने भी एथिस्ट हैं और एथिस्टिक वर्ल्ड
12:07
व्यू को रखने वाले से अगर आप ये सवाल करें
12:10
कि ये यूनिवर्स कहां से आया तो इनका जवाब
12:14
या तो आर्गुमेंट फ्रॉम इग्नोरेंस होगा या
12:17
डॉग्मैटिक होगा। या तो यह कहेंगे कि मुझे
12:20
नहीं पता कि यह कहां से आया। लिहाजा गॉड
12:23
डज नॉट एक्सिस्ट। या आर्गुमेंट फ्रॉम
12:25
इग्नोरेंस है या ये कहेंगे के ये यूनिवर्स
12:30
खुद ब खुद बन गया। इसका मतलब यह है कि उस
12:32
बॉल को भी खुद ब खुद बन जाना चाहिए। लेकिन
12:34
बॉल के ताल्लुक से ये एक्सप्लेनेशन
12:36
एक्सेप्ट नहीं की जाएगी कि ये खुद ब खुद
12:38
बन गई। लेकिन यूनिवर्स के ताल्लुक से कर
12:40
दिया जाएगा। इसे हम दूसरे अल्फाज़ में
12:42
डॉग्मा भी कह सकते हैं। दूसरी चीज हमारे
12:46
जावेद अख्तर साहब जरूर गॉड ऑफ गैप्स की
12:49
मिसाल भी जरूर देंगे। और मिसाल देंगे कि
12:52
पहले जमाने में बिजलियां कड़कती थी तो
12:54
लोगों ने किसी एक खुदा की तरफ और बारिश
12:56
होती थी तो दूसरे खुदा की तरफ मंसूब कर
12:57
दिया। उनके पास दलील नहीं थी। ये हमारा
12:59
वर्ल्ड व्यू है ही नहीं। ये हमारा वर्ल्ड
13:01
व्यू है ही नहीं। क्योंकि नेचुरल फेनोमिना
13:04
के प्रोसेस की इंटरप्रिटेशन को जान लेने
13:07
से ये कहां से साबित हो गया कि गॉड
13:09
एक्सिस्ट नहीं करता है। इस पर मैं
13:10
इंशाल्लाह अभी आगे बात करूंगा। आप हजरात
13:14
यह भी देखेंगे और मैं यह एक्सपेक्ट करता
13:16
हूं कि हमारे रिस्पेक्टेड जनाब जावेद
13:19
अख्तर साहब जरूर इमोशनल आर्गुमेंट्स भी
13:21
देंगे जो कि एक लॉजिकल फैलेसी है जब बात
13:24
आती है ट्रुथ को डिसाइड करने में। क्यों?
13:27
मिसाल के तौर पर वो कहेंगे कि अगर गॉड है
13:30
तो इविल क्यों एक्सिस्ट करता है? जबकि मैं
13:32
कहता हूं इविल का एक्सिस्ट करना गॉड के
13:34
एग्जिस्ट हो एक्सिस्ट करने की दलील है।
13:36
उसके खिलाफ नहीं है। क्योंकि अगर गॉड है
13:38
तो हम सब उसके सामने अकाउंटेबल हैं। और
13:41
अगर हम अकाउंटेबल हैं तो अकाउंटेबिलिटी के
13:43
लिए इविल का मौजूद होना जरूरी है। उसके
13:45
बगैर हम अकाउंटेबल नहीं हो सकते। और अगर
13:48
हम अकाउंटेबल नहीं हैं तो हम जनाब जावेद
13:50
अख्तर साहब से पूछेंगे कि आप बताएं कि फिर
13:53
सफरिंग इस दुनिया में क्यों है? अगर खुदा
13:55
नहीं है तो सफरिंग क्यों है? और उन लोगों
13:58
के जज्बे का क्या जिनके अंदर सफरिंग के के
14:00
बाद इंतकाम लेने का जज्बा पाया जाता है और
14:03
वो इस दुनिया से ऐसे ही चले गए। क्या उनकी
14:05
सारी तकलीफें बेकार चली जाएंगी? अब आ जाए
14:07
उसी एग्जांपल की तरफ कि बॉल मुझसे अगर कोई
14:10
पूछे इस बॉल को किसने बनाया और या इस
14:13
एक्सपेंडेड बॉल को किसने बनाया? मैं
14:15
कहूंगा क्योंकि ये यूनिवर्स और इस
14:18
यूनिवर्स की तमाम चीजें कंटिंजेंट हैं।
14:20
कंटिंजेंट होने का मतलब ये होता है कि जो
14:22
अपने एक्सिस्टेंस पे किसी के ऊपर डिपेंड
14:24
करती हो। तो जाहिर है ये यूनिवर्स
14:27
कंटिंजेंट है। और अगर कोई चीज कंटिंजेंट
14:30
नहीं है तो मैं रिक्वेस्ट करूंगा कि मुझे
14:32
दिखा दें कि कौन सी चीज यूनिवर्स में
14:33
कंटिंजेंट नहीं है। हम भी जरा गौर कर लें
14:35
और हम भी देख लें। और जब कॉन्टिंजेंट
14:38
चीजें मौजूद हैं तो फिलॉसोफर्स की इस्तिला
14:41
के मुताबिक हम उस टर्मिनोलॉजी के मुताबिक
14:44
हम उस जगह तक पहुंचते हैं और उस हस्ती तक
14:47
पहुंचते हैं जिसे नेसेसरी बीइंग कहा जाता
14:49
है कि ये वो नेसेसरी बीइंग है जिसका मौजूद
14:52
ना होना नामुमकिन हो चूंकि अगर ये मौजूद
14:54
ना हो तो सारी चीजें एकिस्टेंस में आएंगी
14:56
ही नहीं और ये सारी डिप कंटिंजेंट चीजें
14:59
उसी के ऊपर डिपेंड करती हैं। अब अगर आप ये
15:01
सवाल करते हैं कि फिर उस हस्ती को किसने
15:03
बनाया? फिर उसका कॉज क्या है? फिर उसका
15:05
कॉज क्या है? फिर उसका कॉज क्या है? और
15:07
एंडलेसली चले जाएं। इसे हम कहते हैं
15:09
इनफिनिट रिग्रेस ऑफ कॉजेस जो कि लॉजिकल
15:12
फैलेसी है। कॉनसेप्चुअली इंफिनिटी पॉसिबल
15:15
है। मिसाल के तौर पे न्यूमेरिकल्स वन टू
15:18
थ्री गिनते चले जाएं। इनफिनिट नंबर्स हैं।
15:19
मैं कॉनसेप्चुअली बात नहीं कर रहा।
15:21
प्रैक्टिकली रियलिटी में साबित करके
15:23
दिखाएं कि इनफिनिट रिग्रेस ऑफ़ कॉजेस
15:25
पॉसिबल है या नहीं। अगर पॉसिबल है तो हम
15:27
मान लेंगे। मिसाल दे दें और पॉसिबल नहीं
15:30
है तो एक ही ऑप्शन बचता है जिसे हम कहते
15:32
हैं नेसेसरी बीइंग। ऐसी नेसेसरी बीइंग जो
15:34
इंडिपेंडेंट है क्योंकि अगर वो डिपेंडेंट
15:37
हुई तो वो नेसेसरी नहीं रहेगी। ऐसी
15:39
इंडिपेंडेंट बीइंग जो इटरनल है। अगर वो
15:41
इटरनल नहीं होगी उसकी बिगिनिंग होगी तो वो
15:43
खुद कंटिंजेंट है। ऐसी बीइंग जो पावरफुल
15:46
है। क्योंकि कंटिंजेंट को एक्चुअलाइज करने
15:48
के लिए पावर चाहिए। ऐसी बीइंग जो
15:50
इंटेलिजेंट है और नॉलेजेबल है। क्योंकि ये
15:53
यूनिवर्स स्पेसिफिक फॉर्म और स्पेसिफिक
15:55
लॉज़ ऑफ नेचर के तहत प्रिसाइजली चल रहा है।
15:59
थैंक यू।
15:59
थैंक यू साहब। [प्रशंसा]
16:03
मैं इन दलीलों के बाद जावेद अख्तर साहब से
16:06
गुजारिश करूंगा। आप बैठ के बोलना चाहेंगे?
16:09
जी।
16:15
[प्रशंसा]
16:20
पहले तो मैं मुफ्ती साहब को एक अच्छी खबर
16:22
देना चाहूंगा कि मेरी नॉलेज साइंस के बारे
16:25
में बड़ी मामूली है। तो आप फिक्र ना करें
16:27
उसकी। लेकिन कुछ कॉमन सेंस है मुझ में।
16:32
देखिए ये खुदा का तसवुर कोई नया तसवुर
16:36
नहीं है। ये सदियों से रहा है। ये कुछ
16:40
रिलजन 3000 साल पुराने होंगे। 4000 साल
16:43
पुराने होंगे। लेकिन इंसान कोई 10,000
16:46
12000 साल से एकिस्ट करता है होमोसेपियर
16:49
की शक्ल में और हमेशा कुछ ना कुछ मजहब
16:52
रहे।
16:54
ये मजहब जाहिलों के नहीं थे। ये मजहब एक
16:58
ऐसी ग्रीक सोसाइटी के थे जहां बड़े-बड़े
17:02
फिलॉसफर पैदा हुए। ये मजहब इजिपशियंस के
17:06
थे जिन्होंने पिरामिड्स बनाए थे। ये रोमंस
17:10
के थे कि जिनका आर्किटेक्चर और सेनेट यानी
17:13
पहली बुनियाद डेमोक्रेसी थी। लिमिटेड थी
17:16
मगर डेमोक्रेसी थी। ये उन लोगों ने किए
17:19
थे। तो इनका जो जुपिटर था रा था जस था
17:25
उन्हें उस पर इतना ही एतमा था जितना आज
17:28
किसी मजहबी आदमी को अपने खुदा पे होगा।
17:32
क्रिश्चियनिटी आने से पहले यूरोप में एक
17:36
मजहब था जर्मेनिक रिलीजन। उसका एक खुदा
17:40
था। उसकी एक बीवी थी। उसके दो बेटे थे। एक
17:44
बेटी थी। कि जर्मनी में जब यूरोप में
17:47
क्रिश्चियनिटी आई तो वो खुदा उसकी बीवी और
17:50
पूरे खानदान चला गया। तो हमने अगर हम
17:54
हिस्ट्री देखें तो खुदा जो है वो ज्यादातर
17:58
फनी है। वो हमेशा रहे नहीं और वो जो लोग
18:03
इन्हें मानते थे उनको आप कहे वो तो जाहिल
18:06
थे। उन्हें तो कुछ पता ही नहीं था। ऐसा
18:08
नहीं है। वो अपने वक्त में बड़े काबिल लोग
18:11
थे। और अपने वक्त में उन्होंने बड़े-बड़े
18:14
काम किए हैं। फिलॉसफर्स थे, साइंटिस्ट थे।
18:18
लेकिन उनका मजहब कहां गया? उनके खुदा कहां
18:21
गए? आज जो खुदा है दुनिया में लोग उन्हें
18:25
मानते हैं। आपको क्या मालूम कि कितने
18:27
बरसों के बाद क्या होने वाला है? हम यूरोप
18:29
में देखते हैं तो चर्च खाली है तो वक्त के
18:33
साथ चीजें बदलती हैं। जहां तक इसका
18:37
ताल्लुक है मजहबों का
18:40
हर मजहब आपसे एक चीज मांगता है। फेथ
18:45
ये फेथ क्या चीज होती है?
18:49
व्हाट इज द डिफरेंस बिटवीन फेथ एंड बिलीफ?
18:52
ये कोई ये तो बहुत ही अहमखाना बात होगी कि
18:55
कोई आदमी कहे साहब अगर खुदा है तो मुझे
18:57
दिखाइए। ये तो जाहिला में बात हुई। मैंने
19:00
तो नॉर्थ पोल नहीं देखा है। मगर मैं मानता
19:03
हूं कि नॉर्थ पोल है। मैं क्यों मानता
19:06
हूं? इसलिए कि अगर ये दुनिया राउंड है तो
19:09
उसका कोई टॉप होगा। कुछ लोग हैं जो वहां
19:12
गए भी हैं। कॉमन सेंस कहता है कि ऐसा
19:14
होगा। सबूत है, गवाह है, रीजन है। तो ये
19:19
मेरा फेथ नहीं है। तो फेथ में और बिलीफ
19:23
में डिफरेंस क्या है?
19:25
जो मजहब मांगता है आपसे हर मजहब फथ मांगता
19:29
फथ का मतलब यह है कि ना कोई गवाह हो ना
19:33
कोई सबूत हो ना कोई रैशन हो ना कोई लॉजिक
19:37
हो ना कोई प्रूफ हो मगर तुम एक बात को
19:39
मानो ये है फेथ
19:43
वरना बिलीफ होता अगर इसमें कुछ भी सबूत
19:46
होते गवाह होते तो फिर इसे आप बिलीफ कहते
19:49
जैसे मेरा बिलीफ है कि नॉर्थ पोल है मेरा
19:52
फेथ थोड़ी है
19:54
फेथ इन तमाम शर्तों को रद्द करता है।
20:00
तो फिर स्टुपिडिटी क्या है?
20:02
अगर मैं एक बात ऐसी मानू जिसकी ना कोई
20:05
लॉजिक है, ना कोई रैशन है, ना कोई प्रूफ
20:08
है, ना कोई गवाह है,
20:12
ना कोई सबूत है और मैं उसे मानूं। तो ये
20:16
स्टुपिडिटी हुई। इसे ही वही कल को मैं
20:19
यकीन कर लूं कि ईलॉन मस्क जो है मेरा भाई
20:22
है तो मुझे इंतहाई खुशी होगी सुकून भी
20:25
बहुत मिलेगा मुझे लेकिन और कहे भाई क्यों
20:28
मानते हो क्या सबूत है भाई वो तो अमेरिकन
20:30
है और तुम तो इंडियन हो वो तो नस्ल अलग है
20:33
तुम्हें कभी मिले भी नहीं साहब देखिए ये
20:35
मेरा फेथ है ये बात किया फेथ का मतलब ही
20:40
यह है कि आप प्रूव नहीं कर सकते अगर आप
20:43
प्रूफ कर सकते हो तो फेथ की जरूरत ही नहीं
20:46
फिर तो आप बात करेंगे। आप कितनी बहस कर
20:48
लीजिए। अल्टीमेटली दुनिया का हर मजहब फेथ
20:51
पे टिका है। और फेथ का मतलब है एक ऐसा
20:54
यकीन जिसका कोई सबूत, कोई गवाह, कोई
20:57
प्रेशर नहीं।
21:01
अब आप ये कहें कि आप ये क्यों कह रहे हैं
21:04
कि साहब ये कायनात किसने बनाई? कमाल ये है
21:09
कि आपने बताया कि एक आइलैंड पे गए और एक
21:12
बॉल देखी।
21:14
आपने ये नहीं कहा कि आइलैंड किसने बनाया?
21:17
आपको सिर्फ बॉल पर हैरत हुई।
21:21
हमने आइलैंड पे हमने हैरत नहीं की। होते
21:23
हैं आइलैंड। इसी तरह ये आइलैंड है। सितारे
21:26
ये गैलेक्सीस ये सब आइलैंड है। खलम है। हम
21:31
उन्हें टेकन फॉर ग्रांटेड लेते हैं। हम
21:33
पूछते नहीं किसने बनाए? आपने गदी के बारे
21:35
में भी नहीं पूछा। हैं।
21:38
मेरी पैदाइश कैसे हुई?
21:41
क्या मैं प्लान पैदा हुआ था?
21:44
आई वास प्ल टू बी बोर्न
21:48
या एक लकी स्पम था जो किसी एक से चिपक
21:50
गया।
21:52
मेरी पैदाइश रैंडम है। रैंडम
21:57
और इंसाफ जिसे आप कहते हैं इंसाफ का तो
22:01
नेचर से कोई वास्ता ही नहीं है। जो आप
22:04
कहते हैं कि एक दिन इंसाफ मिलेगा। इंसाफ
22:06
इज अ ह्यूमन कासेप्ट। नेचर में कोई इंसाफ
22:10
नहीं। अगर शेर हिरण को खा जाता है तो उसे
22:14
कोई सुविधा नहीं मिलती।
22:16
अगर एक आंधी आती है और हरेभरे पेड़ों को
22:19
उखाड़ के फेंक देती है तो आंधियों की जेल
22:21
नहीं होती है।
22:24
नेचर में इंसाफ नहीं है। इसलिए उसे नेचर
22:28
को इंसाफ की जरूरत भी नहीं। नेचर तमाम एक
22:31
है। अब हम कहे कि साहब ये देखिए जो मैंने
22:34
खाना खाया था मेरी आंख तो नहीं यूं कर
22:36
दिया उसे तो इसे सजा मिलने। नहीं वो
22:39
सिस्टम है ऐसे ही चल रहा है। नेचर बगैर
22:44
इंसाफ के है। इंसाफ इज अ ह्यूमन कासेप्ट।
22:48
तो जो आपसे कहता है कि मैं तुम्हें इंसाफ
22:51
दूंगा वो इंसानी बहन की बात है। ये नेचुरल
22:55
है ही नहीं। ये आसमानी है ही नहीं। नेचर
22:59
का तसवुर इंसाफ का तसुर। भाई आप साथ मिलते
23:03
हैं। अब आप लेफ्ट हैंड ड्राइव करते हैं।
23:06
ये क्या है? तमाम सच, तमाम नेकी, तमाम
23:10
शराफत लेफ्ट हैंड राइट है। वरना क्या
23:14
होगा? या तो आप कॉस कर देंगे, आपका
23:16
एक्सीडेंट हो जाएगा या आप किसी को मार
23:18
देंगे या ट्रैफिक जाम हो जाएगा। झूठ,
23:22
बेईमानी, रिश्वतखोरी ये तमाम जो है
23:25
ड्राइविंग अंदर आउटसाइड है। इसके ऊपर कुछ
23:28
नहीं। ये तो हमने बनाया है। जैसे हमने
23:31
लेफ्ट हैंड ड्राइव बनाए। ये कासेप्ट ऑफ
23:34
इंसाफ जो है ये हमारा है। इसका नेचर से
23:38
कोई वास्ता नहीं। शेर खा जाता है हिरन को
23:40
उसे जेल होती है क्या? कुछ भी है ही नहीं।
23:46
तो ये जो दुनिया के रिलीजन प्रॉमिस करते
23:49
हैं आपसे इंसाफ इसी से मालूम होता है कि
23:52
ये मैनमेंट है। ये तसवुर कहीं और का है ही
23:57
नहीं। जो नेचर है कुछ लोग कहते हैं नेचर
24:00
ही खुदा है। तो नेचर में तो इंसाफ नहीं
24:03
कहीं।
24:05
और आप वादा कर रहे हैं कि तुम्हें मरने के
24:07
बाद इंसाफ मिलेगा।
24:09
मुझे अगर मिलेगा तो मैं बहुत खुश हूंगा।
24:12
लेकिन मैं यकीन नहीं कर पाता हूं। इसलिए
24:16
कि मैं फेथ नहीं पैदा कर सकता। द वेरी
24:20
फैक्ट रिलीज डिमांड फेथ।
24:24
इसका मतलब है कि उनके पास जस्टिफिकेशन
24:28
नहीं है।
24:30
अच्छा था। फिर
24:33
रिलीजन अगर मॉडरेशन में है कोई सा भी वो
24:37
आप में कुछ खूबियां भी पैदा करता होगा
24:40
देखिए उसे ये फायदा है वो फायदा है
24:42
अल्कोहल जो है
24:45
वो ज्यादातर दवाओं में यूज़ होती है और एक
24:50
सर्वे किया गया था अमेरिका में कि
24:52
लोंगिटिविटी किन लोगों की है तो एक तरफ वो
24:55
लोग थे जो शराब पीते ही नहीं थे और एक तरफ
24:57
वो थे जो एक बोतल शराब पीते थे सबसे
25:01
ज्यादा लंबी लंबी उम्र उनकी है जो दो
25:04
पैगराब के शराब पीते हैं और खाना खाते
25:06
हैं।
25:07
मगर हम शराब को बुरा समझते हैं। मैं भी
25:10
बड़ा समझता हूं। क्यों?
25:13
ऐसा होता नहीं। कुछ चीजों में आदत होती है
25:17
जो बढ़ती है। आज तक मैं एक आदमी दूध पीता
25:20
है। आप 10 साल बाद भी मिलेंगे तो एक ही
25:22
गिलास पीता होगा। ऐसा नहीं होता। सुबह से
25:25
दूध पीता रहता है।
25:28
अल्कोहलिक मैंने नहीं देखे। अलकोहलिक
25:31
खोलते हैं। ये टेंडेंसी है मजहब की कि वो
25:35
बढ़ता है। जैसे कैंसर बढ़ता है, जैसे शराब
25:39
बढ़ती है।
25:41
कुछ लोग होंगे जो उसे सही तरह से यूज़ करते
25:45
हैं। मुझे यकीन है कि हमारे मुफ़्ती साहब
25:47
भी होंगे। एक बहुत खुशी हुई मुझे इनसे
25:50
मिलके। लेकिन कितने लोग हैं आज आप देखते
25:52
हैं दुनिया में जो तबाहया है इनमें कितना
25:55
हाथ है उन लोगों का जो बिलीव है कहते मजहब
25:59
ये नहीं कहता ना कहता होगा मगर जब ये मजहब
26:02
पीते हैं तो ऐसे बिहेव करते हैं थोड़ा सा
26:06
अगर हो तो शायद बहुत अच्छी बात है लेकिन
26:09
शराब थोड़ी सी नहीं रहती उसमें टेंडेंसी
26:13
है पहले थोड़ा सा अगर दो तीन कैंसर के सेल
26:15
हो ना बॉडी में तो आदमी सिम रहेगा लेकिन
26:18
वो दो तीन सेल नहीं रहते वो मल्टीप्लाई
26:21
होते हैं। जावेद साहब टाइम पूरा हो गया।
26:23
टाइम हो गया। बस बात खत्म हो गई। अच्छा
26:25
मुझे कुछ और कहने को था भी नहीं।
26:29
[प्रशंसा]
26:31
जी मैं पहले जवाबी दौर के लिए इनवाइट कर
26:35
रहा हूं मुफ्ती साहब को। योर रिबटल राउंड
26:37
वन। यू हैव से मिनट्स।
26:44
थैंक यू वेरी मच जावेद साहब। आपकी बात को
26:47
सुनकर बड़े महजूस हुए हैं हम महजूस डू यू
26:50
अंडरस्टैंड वी एंजॉय ओके अब थोड़ा सा
26:53
लॉजिकली उसको हम लोग
26:54
दरअसल हम लोगों ने कल गुजारिश की थी
26:56
मुफ्ती साहब से भी जावेद साहब से भी कि
26:58
हिंदुस्तानी जबान आम फहम सबको समझ में आ
27:01
जाए और जहां कहीं आप मुश्किल शब्द
27:02
इस्तेमाल करें वहां बताते भी चलें थैंक यू
27:06
तो सबसे पहले हमारे रिस्पेक्टेड जावेद
27:09
साहब ने हवाला दिया कि खुदा फानी है कितने
27:11
मजहब आ गए चले गए किसी ने जुपिटर को खुदा
27:14
माना किसी ने किसी को माना मैं कहता हूं
27:16
जिसने कॉन्टिंजेंट चीज को खुदा माना गलत
27:18
माना वो खुदा ही नहीं वो खुदा ही नहीं है।
27:21
[प्रशंसा]
27:22
हम तो नेसेसरी बीन को साबित करने बैठे
27:25
हैं। वो नेसेसरी कॉज जो इटरनल है जो जो
27:28
अबदी भी है और अजली भी है। हम किसी और को
27:31
साबित करने नहीं बैठे। दूसरी चीज उन्होंने
27:33
कहा के फेथ एंड बिलीफ ये एक
27:38
ऐसी डेफिनेशन है फेथ की जो इन्होंने पहली
27:42
मर्तबा पेश की है या माफ़ कीजिएगा इन्होंने
27:44
पहली मर्तबा पेश नहीं की है। रिचर्ड
27:46
डॉकिंस ने पहली मर्तबा पेश की है। मुझे
27:48
मालूम है ये सोर्स कहां से है।
27:49
एपिस्टेमोलॉजिकली
27:51
फेथ और बिलीफ का फर्क आप इस तरह नहीं कर
27:54
सकते सर। फेथ सही भी होता है, गलत भी होता
27:57
है। बिलीफ सही भी होता है, गलत भी होता
27:59
है। जो लॉजिक रीजन और एविडेंस से बैक्ट
28:03
होगा वो फेथ सही होगा। और आप जिस फेथ की
28:06
बात कर रहे हैं कि इलॉजिकल है और उसके
28:08
पीछे नहीं है तो वी आर ऑन द सेम पेज। हम
28:11
नहीं मानते उस फेथ को। जो फेथ ऐसा हो
28:14
जिसके पीछे कोई लॉजिक ना हो। एविडेंस ना
28:16
हो। हम नहीं मानते। हम तो उस फेथ के कायल
28:18
हैं जिसके पीछे लॉजिक हो और एविडेंस हो।
28:21
तो बिलीफ सही भी होता है, गलत भी होता है,
28:23
फेथ भी सही होता है और गलत भी होता है। तो
28:25
आज फेथ और बिलीफ के डिफरेंस पे बात नहीं
28:28
हो रही है। आज आप चाहे फेथ एक्सेप्ट कर
28:30
लें या बिलीफ एक्सेप्ट कर लें। आज ये बात
28:32
होगी कि ट्रुथ क्या है? चाहे ट्रू बिलीफ
28:35
सही है या ट्रू फेथ सही है और फॉल्स फेथ
28:38
क्या है और फॉल्स बिलीफ क्या है? बात इसपे
28:40
हो रही है। दूसरी चीज इन्होंने पूछा
28:41
स्टुपिडिटी फिर क्या है? अगर फेथ रिलीजन
28:44
स्टुपिडिटी नहीं है तो और क्या है?
28:45
क्योंकि फेथ का मुतालबा करते हैं तो
28:47
स्टुपिडिटी स्टुपिडिटी क्या है? मैं कहता
28:49
हूं स्टुबिडिटी एथिज्म है। उसकी वजह ये है
28:52
कि आप एक सड़क पे जा रहे हो और आप किसी
28:54
गार्डन में जाएं और देखें वहां लिखा है
28:56
फूलों के साथ आई लव जावेद अख्तर एंड आई
28:59
रियली डू आई लव यू सर। सो
29:02
जब आप [प्रशंसा]
29:05
वहां पर पहुंचे तो वहां पहुंचकर अब ये
29:08
बताएं क्या आप ये कहेंगे वाओ व्हाट अ
29:11
नेचुरल सेक्शन। ये क्या नेचुरल सेक्शन है?
29:14
नहीं। यह प्रिसाइजली डिजाइन है। इसके पीछे
29:18
डिजाइनर है। लिहाजा अगर कोई एक ऐसी कॉमन
29:22
सेंस की बात को कबूल नहीं कर रहा है कि
29:24
यूनिवर्स जो इतनी प्रिसाइजली काम कर रहा
29:26
है। हम कह दें कि खुद ब खुद बन गई। मैं
29:28
समझता हूं इससे बड़ी स्टुबिडिटी और कुछ
29:30
नहीं है। ये इररेशनल चीज है। [प्रशंसा]
29:34
फिर हमारे सर ने कहा कि आपने बॉल पे फोकस
29:38
किया, आइलैंड पे फोकस नहीं किया। अरे
29:41
आइलैंड को किसने बनाया यही समझाने के लिए
29:43
तो बॉल की मिसाल दे रहा हूं।
29:47
और बॉल भी कॉन्टिंजेंट है, आइलैंड भी
29:50
कंटिंजेंट है। दोनों नेसेसरी बीइंग का
29:52
मुतालबा करते हैं। आगे इन्होंने कहा कि
29:54
नेचर में कोई इंसाफ नहीं है। हम डिसाइड
29:57
करते हैं कि मोरालिटी क्या होती है? इंसाफ
29:59
क्या होता है? हम डिसाइड करते हैं जैसे
30:02
ड्राइविंग सीट में, ट्रैफिक वाला ये तो
30:03
किसी खुदा ने नहीं कहा। ये है इसे कहते
30:05
हैं फॉल्स इक्विवेलेंस। ये एक लॉजिकल
30:08
फैलेसी है। आपने जो है मिसाल दी ड्राइविंग
30:11
की और ट्रैफिक की। ये सब्जेक्टिव मोरालिटी
30:13
है। आप सब्जेक्टिव मोरालिटी को मिसाल
30:15
बनाकर ऑब्जेक्टिव मोरालिटी के ऊपर नहीं
30:17
थोप सकते। इंसाफ ये ऑब्जेक्टिव मोरालिटी
30:19
है। अगर आप ये कहते हैं कि नेचर में इंसाफ
30:21
नहीं है तो इंसाफ का ना होना ये नेचुरल
30:24
हुआ तो फिर नेचर को नेचर रहने दे। क्यों
30:26
हम इतना स्ट्राइव कर रहे हैं दुनिया में
30:28
इंसाफ लाने के लिए? यह तो इलॉजिकल बात है,
30:30
इरशनल बात है। इसलिए बहुत सी चीजें ऐसी
30:33
हैं जो ऑब्जेक्टिवली जो है इविल या गुड
30:36
हैं और बहुत सी चीजें ऐसी हैं जो
30:38
सब्जेक्टिवली हैं। सब्जेक्टिवली जो मोरल
30:41
होता है या इमोरल होता है उसको हम सोशल
30:43
कंसेंस कंसेंसेस से या पर्सनल प्रेफरेंस
30:46
से डिसाइड करते हैं। लेकिन जो ऑब्जेक्टिव
30:48
मोरालिटी है जिसमें इंसाफ आया जो इन्होंने
30:50
बार-बार रिपीट किया ये ऑब्जेक्टिव है।
30:53
सब्जेक्टिव नहीं है। अगर आप कहते हैं ये
30:55
सब्जेक्टिव है। तो मेरा सवाल आपसे यह है
30:57
क्या सोशल कंसेंसेस के जरिए अगर जुल्म को
31:00
सही करार दे दिया जाएगा तो आप जुल्म को
31:02
जस्टिफाई करेंगे? दूसरी चीज इन्होंने ये
31:06
कहा कि दो पैक शराब पी लें तो वो उतने पे
31:11
नहीं रहता बढ़ जाता है। यही मामला मजहब के
31:14
साथ है। दो पैक आप पी लें बढ़ेगा। तो ये
31:16
एक ऐसी मिसाल है इसको कहीं भी फिट कर लें
31:19
कि आप एथिज्म पे जब फिट करें जब आप दो पैक
31:21
एथिज्म का लेंगे ना तो वो बढ़-बढ़ के
31:24
नॉर्थ कोरिया बनेगा। थैंक यू।
31:25
[प्रशंसा]
31:31
[प्रशंसा]
31:32
फर्स्ट राउंड की रिबटल के लिए मैं जावेद
31:34
साहब को इनवाइट कर रहा हूं। आपके पास 7
31:36
मिनट का वक्त है। रिसेट कर दीजिएगा प्लीज।
31:41
मुझे इस बात की खुशी है कि मुफ्ती साहब ने
31:43
भी मान लिया कि नेचर में कोई इंसाफ नहीं
31:46
है। तो कोई भी चीज जो इंसान ने नहीं बनाई
31:49
है उसमें इंसाफ नहीं होता है। एक बात मैं
31:52
आपसे अ करूं जरा पता लगा लीजिएगा। ये जो
31:54
आप बाग में जाते हैं बेहद खूबसूरत फूल
31:56
देखते हैं ना इनमें से कोई नेचुरल नहीं
31:58
है। ये सारे फूल क्रॉस करके बनाए गए हैं।
32:02
जो जंगल में फूल होते हैं निहायत मामूली
32:05
होते हैं। ये फूल इंसानों ने बनाए हैं जो
32:07
आप बाग में देख के वाहवाह कहते हैं। ये
32:10
इंसानों के बनाए हुए हैं। डिफरेंट फूलों
32:11
को क्रॉस करके डेवलप करके फिर क्रॉस करके
32:14
इस तरह से बनाए गए। नेचुरल फ्लावर्स नहीं।
32:16
किसी जंगल वीरान में जाके आप गुलाब के फूल
32:19
नहीं देखेंगे। ये सब बनाए हुए इंसान ने।
32:21
बहुत से काम इंसान ने किए हैं। बाकी ये कि
32:25
आपने मेरी एक बात का जवाब नहीं दिया जिससे
32:28
मुझे शिकायत है कि फथ क्या है? और आप फेथ
32:33
मांगते क्यों हैं मुझसे? आप तो लॉजिकल है।
32:36
आपके पास तो सारे रैशन हैं। आपके पास सारे
32:39
सबूत हैं। तो आपको फेथ की डिमांड क्यों
32:42
करते हो आप? कि भाई तुम सरेंडर कर दो और
32:45
सवाल मत करो। कोई मजहब सारे सवाल करने की
32:48
इजाजत नहीं देता है और मना करता है कि
32:51
ज्यादा सवाल ना करो बह जाओगे तुम। आप
32:54
क्यों रोकते हैं? हकीकत ये है कि इंसानी
32:58
तारीख क्या है? इंसानी तारीख यह है कि
33:01
दुनिया में दो तरह के लोग हुए हैं। एक वो
33:04
जिन्होंने अपनी लालमी की परस्तिश की है।
33:08
दूसरे वो जिन्होंने अपनी इग्नोरेंस या
33:10
लालमी से झगड़ा किया है और मालूम किया है
33:13
कि क्या है। ये जो आप कह रहे हैं आज आप
33:16
हैरान हैं कि भाई ये यूनिवर्स कैसे बनी?
33:20
लोग हैरान थे कि सूरज डूबता है तो इधर से
33:22
कैसे निकलता है
33:24
और आप एक कदम जाके हमेशा का मानने को
33:28
तैयार है एक कदम पीछे ही मत जाइए भाई आप
33:32
इसके पास जाते हैं और कहते हैं सवाल ना
33:33
करना कि ये कहां से आया ये पावर तो हमेशा
33:36
से हमेशा रहेगी तो आप यूनिवर्स के बारे
33:38
में माने क्या तकलीफ है एक कदम पहले या
33:40
रुक जाइए
33:42
ये हमेशा से थी या नहीं थी हमें मालूम
33:44
नहीं है और ये कहना कि हमें मालूम नहीं
33:47
है। कमाल यह है कि दुनिया के सारे मजहब सब
33:51
जानते हैं। ये दुनिया कैसे बनी थी? कैसे
33:54
मिटेगी? मरने के बाद क्या होगा? इनको सब
33:57
इल्म है। इनको किसी को डायनासोर होते थे
34:01
पहले ये नहीं पता था। किसी को नहीं पता।
34:06
किसी भी दुनिया की मजहबी किताब में
34:09
डायनासोर का जिक्र नहीं है।
34:12
लेकिन बाकी सब बातें हाउ टू मेक यूनिवर्सल
34:15
फोर ईजी लेसंस एंड बाकी सब पता है। जिसको
34:19
सब पता है वो गड़बड़ है। हम में ये इंकसार
34:23
ये ह्यूमिलिटी होनी चाहिए कि हम ये कहे कि
34:26
हमें ये बहुत सारी बातें नहीं मालूम।
34:28
लेकिन हम उनकी परस्त ना कर ले। अपनी लालमी
34:31
को की परस्त ना करें। हम उसे पता लगाने की
34:36
कोशिश करें। जिस दुनिया में आप बैठे हैं
34:38
सर ये हॉल जो है ये इलेक्ट्रिसिटी जो है
34:41
ये माइक जो है जिस हवाई जहाज से आप आए थे
34:43
वो जिस कार से आप यहां आए हैं ये सब उन
34:47
लोगों की बनाई हुई है जिन्होंने सवाल किए
34:49
थे।
34:52
[प्रशंसा]
34:52
ये दुनिया जिसमें आप आज आराम से हैं। ये
34:56
उन लोगों की बनाई है कि जिन्होंने सवाल
34:59
किए थे और हर स्टेज पे इन सवालों को
35:07
मकरू कहा गया था। गलत कहा गया था। आप जरा
35:10
तारीख पढ़िए। एक बड़ी दिलचस्प किताब है
35:12
बैटन की
35:15
जिसमें उसने रिलीजन एंड साइंस कि कब से
35:19
रिलीजन जो है साइंस के अगेंस्ट है और हद
35:23
तो ये है कि भाप के इंजन के खिलाफ थे
35:27
स्टीम इंजन के भी खिलाफ थे और फतवे उन पे
35:30
वेटिकन ने दिए
35:33
तो ये हमेशा अभी जैसे ही ये राइट फिंगर
35:37
आते हैं
35:39
अमेरिका में पावर तो वो जो अपना ये क्या
35:43
बोलते हैं उसे
35:46
सीड क्या है? शीट क्या
35:49
हां
35:50
नहीं नहीं शीट जो होती है
35:54
जी
35:59
नहीं भाई
36:01
वो जो ह्यूमन बॉडी के
36:10
बंद हो जाती है। रिपब्लिकन नहीं करने
36:13
देते। अरे भाई इतना डर क्या है तुम्हें?
36:16
एक जमाने में बहुत नाराज थे ये सारे मजहबी
36:20
लोग कि ये इंसान तो इंसान बनाने की कोशिश
36:22
कर रहा है। आपको क्या तकलीफ हुई बना ले तो
36:25
बना लेने दो। ये खौफ क्या है?
36:29
और ये सब आज जो आप कह रहे हैं नामुमकिन है
36:32
ये कैसे हुआ? मुझे किस्सा याद आता है। जब
36:35
मैं छठी क्लास में था तो मैं मैथमेटिक्स
36:38
में बहुत वीक था। तो एक टीचर रख दिया गया।
36:40
उसने एक दो तीन चार पांच छ सात तो सिखा
36:42
दिया मुझे। वो दिन मैं भूल नहीं सकता हूं
36:45
सब। जिस दिन उसने ये बताया कि 1/2 क्या
36:48
होता है और 3/4 क्या होता है। मुझे ऐसा
36:51
लगा कि मेरा सर बीच से फट जाएगा। ये आदमी
36:54
कह रहा है कि यू दीवार के अंदर जाओ वॉक
36:57
करते हुए। आज हंसता हूं मैं इस बात पे। तो
37:00
आज जो बातें आपके ज़हन से बिल्कुल परे है
37:03
और आप हैरान होते हो उन्हें देख के। एक
37:05
वक्त आएगा कि मामूली लगेंगे और हुआ है
37:08
आपकी इंसानी तारीख ही है। इतनी जल्दी सारे
37:11
फैसले आप मत कर लीजिए। थोड़ा ह्यूमिलिटी
37:14
रखिए कि भाई ये हमें नहीं मालूम। ये कहने
37:18
में क्या आ रहा है? ये यूनिवर्स कहां तक
37:20
फैली? ये कब से है और कब तक रहेगी? हमें
37:24
नहीं मालूम। आपने फैसला कर लिया कब बनी?
37:27
ये आपके हिसाब से कोई 14 बिलियन इयर्स
37:29
बनी। जो समझा जाता है उससे पहले हजारों
37:34
करोड़ों अरबों साल तक खुदा बैठा क्या कर
37:37
रहा था खामोश बैठा था ऐसे ही जमाइयां ले
37:40
रहा था फिर उसे आईडिया आया यार एक काम
37:43
करते हैं वक्त अच्छा गुजर जाएगा यूनिवर्स
37:45
पर
37:48
सोचिए
37:51
वो तो हमेशा से है ना मगर यूनिवर्स हमेशा
37:54
से नहीं है ये तो बनाई गई है और उससे पहले
37:58
क्या था इनका का क्या काम था?
38:02
कैसी बात थी? ये बड़ा आसान है। जो बात
38:05
हमें आज धीरे-धीरे पता चल रही है। बरसों
38:08
2000 और ढाई हजार साल पहले आपको किसी ने
38:10
बता दिया कि क्या था आप मान गए? और तब से
38:14
वही मान रहे हैं जो ढाई हजार साल पहले कहा
38:16
गया। सब कुछ बदल गया है। सॉल्व हो रही है
38:20
चीजें। अभी
38:22
साइंस बिल्कुल दावा नहीं करती या कोई
38:26
फिलॉसफर ये दावा नहीं करता कि हमें सब
38:28
मालूम बल्कि वो कहता है कि हमें जितना
38:30
मालूम होता है उससे ये मालूम होता है कि
38:32
हमें कितना कम मालूम है। तो हम अपनी
38:35
जियालत से लड़े उसकी परफेशना करें।
38:39
जी टाइम थैंक यू। थैंक यू सो मच।
38:42
[प्रशंसा]
38:44
मैं
38:46
तर्कों की श्रंखला में राउंड टू के लिए
38:48
मुफ्ती साहब को आमंत्रित कर रहा हूं। आपके
38:50
पास एक बार फिर से 7 मिनट का वक्त है।
38:57
शुक्रिया। जनाब जावेद अख्तर साहब कई
39:00
मर्तबा दोहरा रहे हैं कि फेथ का मतलब
39:02
बताइए। फेथ का मतलब बताइए। मैंने बता
39:04
दिया। फेथ सही भी होता है, गलत भी होता
39:07
है। और आज हम फेथ पे बात नहीं कर रहे। हम
39:10
ट्रुथ और डस गॉड एक्सिस्ट पे बात कर रहे
39:12
हैं। क्या डस गॉड एक्सिस्ट? ये ट्रुथ यानी
39:15
गॉड है या नहीं है? इसमें से दोनों ट्रुथ
39:18
क्या है? अब आप उसे फेथ कह लें, बिलीफ कह
39:20
लें नॉट माय बिनेस। उसके बाद आपने कहा कि
39:22
भाई सवाल करने से मजहब रोकता है। मैं कहता
39:26
हूं जो रोकता है वो रोकता होगा। मैं नहीं
39:29
रोकता। बल्कि सवाल करें। सवाल करना चाहिए।
39:33
सवाल कर के तो हम आगे बढ़ते हैं, तरक्की
39:35
करते हैं। और इसीलिए मैं आज यहां पे आया
39:37
हूं। लेकिन सवाल सिर्फ खुदा से नहीं होगा।
39:39
आपसे भी होगा। सवाल एथिज्म से भी होगा।
39:41
सवाल सिर्फ मजहब से नहीं होगा। सबसे होगा।
39:44
और आज मैं सवाल करूंगा और उम्मीद है कि आप
39:46
जवाब देंगे। अभी तक आपने वैसे कंटिंजेंसी
39:48
आर्गुमेंट का कोई जवाब नहीं दिया है। चलें
39:50
आपने कहा यूनिवर्स के बारे में इटरनल
39:52
क्यों नहीं बोल देते? ये क्योंकि लॉजिकली
39:55
पॉसिबल ही नहीं है कि यूनिवर्स इटरनल हो।
39:58
यूनिवर्स एक कंटिंजेंट
40:00
चीज है। जो टाइम एंड स्पेस के पाबंद है।
40:03
टाइम एंड स्पेस से बाउंड है। जो टाइम एंड
40:05
स्पेस से बाउंड होगा वो कंटिंजेंट होगा।
40:08
जो कंटिंजेंट होगा उसकी बिगिनिंग हुई
40:10
होगी। जिसकी बिगिनिंग हुई होगी वो इटरनल
40:12
नहीं हो सकता। ये तो कॉमन सी बात है।
40:16
[प्रशंसा]
40:17
आपने कहा कि किसी मजहबी किताब में
40:20
डायनासोर का जिक्र नहीं है। अफसोस कि आज
40:22
तक किसी मैथमेटिक्स के किताब में मुझे
40:24
डायनासोर का जिक्र नहीं मिला।
40:28
तो इसका मतलब मैथमेटिक्स की किताब बेकार
40:30
है। नहीं उसका वो टॉपिक नहीं है। रेवेलेशन
40:33
का और मजहबी किताबों का टॉपिक ये नहीं है
40:35
कि आपको आके बताएं साइकिल कैसे बनाते हैं।
40:37
ये आकर ये बताएं कि जो है डायनासोर कब था।
40:39
वो तो मोरालिटी सिखाने आया है। गॉड के
40:41
बारे में बताने आया। नॉन फिजिकल रियलिटी
40:44
की हकीकत को सिखाने के लिए आया। रिलीजियन
40:46
साइंस को रोकता है। नहीं रोकता। अगर रोकता
40:48
है तो गलत करता है। रिलीजन साइंटिज्म को
40:51
रोकता है जिसमें हमारे जावेद साहब मुख्तल
40:53
है।
40:56
साइंस
40:57
साइंस और साइंटिज्म में फर्क है।
41:00
साइंटिज्म ये है कि आप समझे के साइंस और
41:03
साइंटिफिक मेथोडोलॉजी ये नॉलेज को हासिल
41:07
करने का वाहिद सोर्स ऑफ नॉलेज है। ये है
41:09
साइंटिज्म। हम इसे रिजेक्ट करते हैं। हम
41:12
साइंस को तो तरक्की करते हैं। भाई आप
41:13
हमारी पूरी तारीख कर लें। पढ़ लें तो आपको
41:15
पता चल जाएगा। बहरहाल ये अलग टॉपिक है।
41:17
उसके बाद इन्होंने एक लफ्ज़ कहा वेटिकन ने
41:19
फतवा दिया। वेटिकन का फतवे से कोई ताल्लुक
41:21
नहीं है। दोनों कंट्राडिक्टरी अल्फ़ाज़
41:23
हैं। उसके बाद उन्होंने कहा कि भई हमें
41:25
नहीं मालूम। अगर नहीं मालूम तो क्लियरली
41:27
कह दे ना कि नहीं मालूम है इसमें क्या हरज
41:29
है? तो वही तो मैं कह रहा हूं ना कि आप कह
41:31
दें कि नहीं मालूम लेकिन क्लेम क्यों कर
41:33
रहे हैं कि गॉड एक्सिस्ट नहीं कर रहा है।
41:36
[प्रशंसा]
41:39
आप कह दे नहीं मालूम है। हो सकता है हो
41:42
सकता ना हो। लेकिन आप क्लेम कर रहे हैं। द
41:44
मोमेंट यू से गॉड डज नॉट एक्सिस्ट। दिस इज
41:47
अ क्लेम एंड नाउ द बर्डन ऑफ प्रूफ इज अपॉन
41:50
यू टू जैसे हमारे ऊपर है।
41:53
और क्यों है मैं बताता हूं। क्यों है ये
41:55
भी मैं बताता हूं। फिलॉसोफिकली
41:58
जो क्लेम होता है ना सिर्फ ये नहीं होता
42:01
कि इंसान कहे पॉजिटिव क्लेम करे और
42:04
नेगेटिव क्लेम करे तो बर्डन अप्रूव नहीं
42:05
है। आप मिसाल के तौर पे मैं कहूं कि फुलां
42:08
उस कमरे में कोई नहीं है। मैंने एक नॉलेज
42:10
का क्लेम किया है। उस कमरे में कोई नहीं
42:13
है। मैंने एक नॉलेज का क्लेम किया। या तो
42:15
मैं कहूं मुझे नहीं पता हो भी सकता है
42:16
नहीं भी हो सकता है। दिस इज़ नॉट अ क्लेम।
42:18
लेकिन जब मैं कह रहा हूं कि वहां कोई नहीं
42:20
है। या मैं कह रहा हूं वहां कोई है। दोनों
42:22
क्लेम है और दोनों के ऊपर बर्डन ऑफ प्रूफ
42:24
है। हमारे ऊपर भी बर्डन ऑफ प्रूफ है।
42:26
मैंने कंटिंजेंसी आर्गुमेंट दिया। इसे
42:27
तोड़ कर दिखाइए।
42:29
[प्रशंसा]
42:32
आखिरी चीज इन्होंने कहा कि खुदा दुनिया
42:35
बनाने से पहले 150 साल पहले या करोड़ों
42:38
साल पहले क्या कर रहा था। अरे हजरत
42:42
चलें बहरहाल मैं जवाब दे देता हूं। आप
42:45
हमारे रिस्पेक्टेड पर्सनालिटी हैं। अगर आप
42:46
नहीं होते तो मैं ऐसे एंटरटेन ही नहीं
42:48
करता।
42:51
[प्रशंसा]
42:52
टाइम ये 100 साल पहले या 100 साल बाद पहले
42:56
बाद में अभी ये वो अल्फाज़ हैं जिनका
42:59
ताल्लुक टाइम से है। टाइम शुरू ही हुआ है
43:02
यूनिवर्स की बिगिनिंग के बाद। तो उसके
43:04
पहले खुदा क्या कर रहा था? सवाल ही
43:05
इलॉजिकल है। ये फैलेसी है। यानी आप ये कह
43:08
रहे हैं कि यूनिवर्स के बनने से पहले खुदा
43:10
क्या कर रहा था? टाइम के बनने से पहले
43:13
पहले का ताल्लुक टाइम से है। टाइम उस वक्त
43:15
था ही नहीं। तो ये सवाल ही इनवैलिड है
43:17
खुदा के ताल्लुक से। [प्रशंसा]
43:21
दूसरी चीज आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी जो
43:25
मैंने आपके सामने पेश की है। आपने बार-बार
43:28
ये प्रूफ किया और ये कह रहे हैं कि गॉड ऑफ
43:30
गैप्स। देखिए पहले नहीं मालूम था साइंस ने
43:32
कर दिया। सिंपल इसकी मिसाल से मैं समझा
43:34
देता हूं। जिस गैप्स की आप बात कर रहे हैं
43:37
ना साइंस उन गैप्स को जिन चीज के जरिए भी
43:40
प्रूव करेगा वो कंटिंजेंट ही होगा। अब
43:43
चाहे वो फोर्स हो, मैटर हो या एनर्जी हो।
43:47
लिहाजा सवाल हमारा उस वक्त भी वैलिड होगा
43:49
जब तक कि आप नेसेसरी बीइंग पे ना आ जाएं।
43:52
और इनफिनिट रिग्रेस पॉसिबल नहीं है ऑफ
43:54
कॉजेस इन प्रैक्टिकल वर्ल्ड। तो जाहिर है
43:57
कहीं रुकना पड़ेगा। जहां रुकेंगे वही खुदा
44:00
है। दूसरी चीज़ आपने
44:04
ये कहा क्या कह रहा था मैं? किस पॉइंट को?
44:15
जस्ट जस्ट जस्ट
44:19
हां जहां रुकेंगे वही खुदा है। बहरहाल तो
44:22
टाइम का जिक्र हो गया। गॉड ऑफ़ गैप सॉरी या
44:24
इसकी एक मिसाल आप ले लें। एक कार है। एक
44:28
साहब ने देखा कि भाई कार जो है उसके
44:32
व्हील्स कितने अच्छे लगे हुए हैं। सही जगह
44:34
पे स्टीयरिंग जो है कितने अच्छे जगह पे
44:38
लगी हुई है। और सीट्स कितने वेल डिज़ है।
44:41
कितनी प्रिसाइजली ये कार काम कर रही है।
44:44
तो जरूर कोई ना कोई इसे क्रिएट किया है।
44:46
किसी ने क्रिएट किया है। अब जावेद साहब आए
44:48
और कहे अरे जनाब बोननेट खोलिए। इसमें इंजन
44:50
है। इंजन इस कार को चला रहा है। हेंस
44:53
प्रूव्ड नो वन हैज़ क्रिएटेड द कार। दिस इज़
44:55
इलॉजिकल। दिस इज़ इरशनल। आपने इंजन के जरिए
44:59
उस गैप को तो साबित किया लेकिन क्या उससे
45:04
कार की जो क्रिएशन है और उसका जो क्रिएटर
45:08
है ये इंपॉसिबल हो जाए ऐसा पॉसिबल है उसका
45:10
सवाल खत्म हो जाए ऐसा पॉसिबल है नहीं आपने
45:13
गैप्स को फिल करके कंटिंजेंट चीजों से
45:16
गैप्स को फिल करके हमारे ऑब्जरवेशन को और
45:18
ब्रॉड कर दिया अब हमें और पता चल गया कि
45:21
ये जो कार है इसका सिस्टम कितना ज्यादा
45:24
कॉम्प्लेक्स है। पहले कम समझते थे। अब
45:25
कॉम्प्लेक्सिटी और ज्यादा वाज़ हो गई। अब
45:27
हमें समझ में आ रहा है कि हमारी सर्टेनिटी
45:29
और बढ़ गई कि जरूर इस कार को किसी ना किसी
45:32
ने बनाया। यही मामला यूनिवर्स का है।
45:34
साइंस हमेशा फिजिकल वर्ल्ड की चीजों को ही
45:36
फिल करती जाएगी और फिजिकल चीजों से ही
45:38
करती जाएगी। चूंकि एंपेरिकल एविडेंस का
45:40
ताल्लुक फिजिकल वर्ल्ड से है। आप साइंस के
45:43
जरिए मेटाफिजिकल रियलिटी को कभी साबित
45:45
नहीं कर सकते। ये रॉन्ग टूल का इस्तेमाल
45:47
करना है। यह वही काम है कि आप मेटल
45:49
डिटक्टर से प्लास्टिक डिटक्टर करने चलें
45:52
जो कि जाहिर है सही नहीं है। थैंक यू।
45:55
[प्रशंसा]
45:59
जी।
46:01
ये आर्गुमेंट का राउंड टू है।
46:03
सात मिनट।
46:05
पहले तो मैं आपसे अर्ज करूं कि आपने कहा
46:07
कि जब कायनात ही नहीं थी तो वक्त भी नहीं
46:09
था, कुछ भी नहीं था। कैसे नहीं था? खुदा
46:11
था।
46:13
एक एक्सिस्टेंट तो था ना खुदा का तो जब
46:16
खुदा था तो व भी होगा। ऐसा नहीं है कि कुछ
46:19
भी नहीं था। खुदा था। अच्छा बाकी है कि
46:22
आपने कहा साहब आप साबित कीजिए। आपके पास
46:24
भी लॉजिक है या मेरे पास भी लॉजिक है आप
46:26
मेरा जिम्मेदारी नहीं है साबित करना कि
46:28
खुदा है। बर्टन रसेल ने बड़ी अच्छी बात
46:31
कही।
46:33
बर्टन रसेल ने बड़ी अच्छी बात कही है। मैं
46:35
आपसे अगर यह दावा करूं कि चाय की केतली
46:38
मिररी के चारों तरफ घूम रही है मार्स के
46:40
चारों तरफ तो ये आपका काम नहीं है कि आप
46:43
साबित करें कि कोई चाय की केतली नहीं है।
46:45
ये मेरा काम है। मैंने दावा किया है। ये
46:47
दावा तो मजहबी लोग करते हैं कि खुदा है।
46:50
मैं क्यों साबित करूं कि नहीं है? जब तक
46:52
आप मुझे कंफस नहीं कर देंगे मैं नहीं
46:54
मानूंगा।
46:56
आपकी जिम्मेदारी है। मेरी जिम्मेदारी नहीं
46:59
है।
47:01
दो यह कि यह जो आप कह रहे हैं जो गैप्स है
47:04
ये गैप्स जब जब किसी मजहब को चैलेंज करते
47:08
हैं। जब ऐसा कोई बात आती है तो हंगामा हो
47:11
जाता है। के जब वो चैलेंज करें किसी फेथ
47:15
को ये तमाम साइन जो है इसे मुख्तलिफ जगहों
47:20
पे मुख्तलिफ वक्तों में मजहब ने रोकने की
47:24
कोशिश की है। ये किताब है रिलजन एंड साइंस
47:27
बटर की पढ़िएगा अच्छी लगेगी आपको। तारीख
47:32
ही है साइंस मजहब की साइंस से उसका यही
47:35
रिश्ता है। अच्छा अब ये हम सोचे कि बहाल
47:39
ये वजूद जो है मजहब और ये बिलीफ इन गॉड
47:42
इंसान को बेहतर बना देता है। तो एक काम
47:45
कीजिए हिंदुस्तान वर्ल्ड का नक्शा लीजिए
47:47
और मार्क कीजिए कि रिलजन कहां-कहां ज्यादा
47:49
है। कहां-कहां चाहे वो लैटिन अमेरिका हो
47:52
या मिडिल ईस्ट हो या फस्ट हो या
47:55
हिंदुस्तान के वो इलाके जहां मजहबियत
47:57
ज्यादा है। रख दीजिए नक्शा अलग। अब दूसरा
48:01
नक्शा कि कहां-कहां नाइंसाफी, रिप्रेशन,
48:05
औरतों के हुकूक की पामाली, जुल्म,
48:08
डिक्टेटरशिप कहां है? नक्शा एक ही होगा।
48:14
तो आप मुझे बताएं के जो इसका तरकीब
48:18
इस्तेमाल क्या है?
48:20
खुदा का तरकीब इस्तेमाल तो बताइए। आप छोटी
48:23
सी दवा सड़क पे बेचते हैं उसकी भी तरकीब
48:25
इस्तेमाल बताते हैं। इसके इस्तेमाल से तो
48:27
फायदा ही नहीं हुआ किसी को। जो सारे के
48:31
सारे खराब मुल्क है, खराब समाज है वो सारे
48:34
जुल्म खुदा के नाम पे करते हैं। वो गलत
48:37
करते हैं, सही करते हैं। मुझे क्या लेना
48:39
देना उससे? इस्तेमाल से मालूम होता ना। एक
48:43
विस््की की बोतल कभी शायद देखी हो आपने।
48:45
लाल रंग की होती है। उस पे रोशनी और छिपड़
48:47
इंतहाई खूबसूरत लगती है। क्या बिगाड़ रही
48:49
है किसी का? उसका इस्तेमाल गलत है। इसलिए
48:52
आप उसे नापसंद करते हैं। इसका इस्तेमाल
48:55
गलत है। इस तसवुर का
48:59
इस्तेमाल ही गलत है और हमेशा से गलत हुआ
49:01
है। आप देख लीजिए इंसानी तारीख देख लीजिए।
49:04
आज देख लीजिए हिंदुस्तान देख लीजिए।
49:05
दुनिया देख लीजिए। क्या हो रहा है?
49:09
इसे कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं? फेथ वाले
49:11
लोग क्या फेयर हैं? जस्ट हैं जो अपने
49:15
खुदाओं पे यकीन रखते हैं। वो किस तरह के
49:18
लोग हैं?
49:19
वो लोगों को इंसाफ देते हैं। वो बेहतर
49:21
इंसान बने। तो इस दवा का फायदा क्या है?
49:24
चलो बहुत फायदा हो रहा तो मैं इस्तेमाल कर
49:26
लूंगा। मुझे तो इस दवा का कोई फायदा दिखता
49:29
ही नहीं। मुझे तो ऐसा लगता मैं एक और बात
49:32
बताऊं। अगर कोई आदमी मजहबी है और अच्छा
49:35
आदमी है तो मैं उसकी बहुत इज्जत करता हूं।
49:38
इसलिए कि मेरा ख्याल है मजहबी आदमी का
49:40
अच्छा होना मुझसे अच्छा होने से ज्यादा
49:42
मुश्किल है। भाई हर चीज की एक लिमिट है।
49:47
आप इतना भाग सकते हैं, इतना नहीं भाग
49:49
सकते। इतना वजन उठा सकते, इतना नहीं उठा
49:51
सकते। इतना दूर देख सकते हैं, इतना दूर
49:54
नहीं देख सकते। उसी तरह कॉमन सेंस कहता है
49:56
कि आप में नेकी का भी एक कोटा होगा। अब आप
49:59
अगर सुबह जाते हैं अपनी इबादतगाह और इबादत
50:03
करते हैं तो बाहर निकलते हैं तो आप तो यही
50:05
महसूस करते हैं कि आपने बहुत अच्छा काम
50:07
किया। आपकी नेकी का एक बहुत बड़ा कोटा
50:09
खर्च हो गया जिससे किसी का कोई फायदा नहीं
50:11
होगा। मैं तो नहीं जाता हूं तो मुझे तो
50:14
किसी को खाना खिलाना पड़ेगा। किसी बेवा की
50:16
मदद करनी पड़ेगी। मैं अपना कोटा कैसे
50:19
कंज्यूम करूं? आप अपना कोटा सारे मजहबी
50:22
लोग इंतहाई यूज़लेस कामों में यूज़ करते
50:25
हैं। उसके बाद भी अगर आप में बचती है थोड़ी
50:27
सी शराफत तो भाई वाह क्या बात है।
50:31
[प्रशंसा]
50:35
एक तो मुझे यह बात बहुत अच्छी लग रही है
50:37
कि दोनों ही विद्वान समय को मानते हैं और
50:42
बहुत समय से अपनी दलीलें और बाज दफा समय
50:46
से पहले अपनी तकरीरें पूरी करके अपनीपनी
50:48
कुर्सी पर बैठ रहे हैं। ये इस आर्गुमेंट
50:51
का राउंड टू पूरा हुआ। अब रिबर्टल का
50:54
राउंड टू है और उसके बाद क्रॉस
50:56
एग्जामिनेशन होगा।
50:59
नहीं आपका आर्गुमेंट हो गया सर।
51:03
हमारे यहां स्कूल के सिलेबस में पंच
51:06
परमेश्वर कहानी पढ़ाई जाती है प्रेमचंद जी
51:08
की लिखी हुई। आप निश्चिंत रहिए। आपके कोई
51:10
राउंड मैं मिस नहीं होने दूंगा। रिबटल का
51:12
राउंड टू मुफ्ती शमाल नदी साहब।
51:19
असल में जो हकीकी प्रॉब्लम है असल
51:22
प्रॉब्लम है वो यह है कि जावेद साहब के
51:24
पास कासेप्ट ऑफ गॉड क्लियर नहीं है।
51:27
इन्होंने कहा कि कायनात से पहले खुदा तो
51:30
था तब भी तो टाइम होगा कि खुद कायनात टाइम
51:34
कायनात का हिस्सा है। हम खुदा उस खुदा को
51:38
मानते हैं। नेसेसरी बीइंग का टाइमलेस होना
51:40
जरूरी है। क्योंकि वो टाइम का क्रिएटर है।
51:42
जब उसने टाइम को क्रिएट किया तो वो खुद
51:44
टाइम पे कैसे होगा? उसने जब स्पेस को
51:46
क्रिएट किया तो खुद स्पेस में कैसे होगा?
51:48
अगर वो टाइम एंड स्पेस को पहले से ही उस
51:51
का पाबंद है तो फिर किस चीज को उसने
51:52
क्रिएट किया? लिहाजा ये सवाल गलत है के
51:55
खुदा था तो टाइम होगा। बिल्कुल नहीं। टाइम
51:58
के पाबंद हम है खुदा नहीं है। हम फिजिकल
52:00
वर्ल्ड से ताल्लुक रखते हैं। वो
52:02
मेटाफिजिकल रियलिटी है। दूसरी चीज
52:04
इन्होंने मिसाल दी कि चाय की केतली हवा
52:06
में घूम रही होगी और पता नहीं शायद वो
52:08
बर्टन रसेल का उन्होंने हवाला दिया।
52:10
बहरहाल यही प्रॉब्लम है। प्रॉब्लम यही है
52:13
कि हम चीजों के दरमियान डिफरेंशिएट नहीं
52:15
कर पाते हैं। ये जो आपने मिसाल दी ये
52:17
इमेजिनेशन है और मैं जो साबित कर रहा हूं
52:20
वो लॉजिकल नेसेसिटी है।
52:24
[प्रशंसा]
52:25
आप इमेजिन करने आए तो कुछ भी करें। जुपिटर
52:27
में पिंक एलीफेंट होगा, यूनिकॉर्न होगा
52:29
करें। उससे कायनात पे क्या फर्क पड़ता है?
52:32
उससे आप लॉजिकल नेसेसिटी साबित नहीं कर
52:34
सकते। मैं तो उस प्राइम कॉज की बात कर रहा
52:37
हूं। उस नेसेसरी बीइंग की बात कर रहा हूं
52:39
जिसके बगैर इस कायनात का एकिस्टेंस मुमकिन
52:42
नहीं है। दूसरी चीज मजहब को साइंस चैलेंज
52:44
करती है वगैरह-वगैरह ये हमारा टॉपिक ही
52:46
नहीं है। मैं मैं इस पे बात करूंगा तो फिर
52:48
मेरा वक्त चला जाएगा। मजहब के ऊपर क्योंकि
52:50
हमारी डिस्कशन नहीं है। साइंस को मजहब और
52:54
बिलखसूस मैं और हमारा वर्ल्ड व्यू कम से
52:57
कम साइंस को पीछा नहीं पीछे नहीं करता है।
52:59
साइंटिज्म की मज़म्मत करता है। इसकी वजाहत
53:01
मैंने पहले कर दी। दूसरी ची चीज इन्होंने
53:04
कहा वर्ल्ड का नक्शा लीजिए। वर्ल्ड मैप
53:06
लीजिए दो अलग-अलग जगह की। हजरत मैंने ये
53:09
होमवर्क किया था और मैंने मिडिल ईस्ट
53:11
मिडिल ईस्ट का एक नक्शा लिया और यूरोप का
53:14
एक नक्शा लिया। ये मजहबी इलाका और ये
53:18
लिबरल और एथस्ट इलाका। मुझे पता चला कि
53:21
सबसे ज्यादा रेप केसेस जो है वहां पर है।
53:25
[प्रशंसा]
53:29
मुझे ये पता चला यूएन की रिपोर्ट के
53:31
मुताबिक। मैं ये अपने घर से नहीं लेके आ
53:33
रहा कि जो वर्किंग वुमेन है यूरोपियन
53:36
कंट्रीज में उसमें 81%
53:38
वुमेन सेक्सुअल हरासमेंट का वर्क में जो
53:41
शुमार ये मिडिल ईस्ट में नहीं हो रहा है।
53:43
[प्रशंसा] वो मजहबी लोग हैं इसलिए नहीं हो
53:45
रहा है। दूसरी चीज आपने ये कहा के मजहबी
53:50
आदमी का अच्छा होना हमारे अच्छे होने से
53:53
बहुत मुश्किल है। बहुत मुश्किल है। तो
53:56
इसका मतलब ये है कि गॉड के अलावा आपके पास
53:58
अच्छे और बुरे का कोई स्टैंडर्ड है। मैं
54:01
चाहूंगा कि कन्वर्सेशनल स्टाइल वाले
54:04
डिस्कशन और सेगमेंट पे इसी पे बात कर लेते
54:06
हैं। थैंक यू वेरी मच। [प्रशंसा]
54:13
ये रिबर्टल का राउंड टू है। आपके पास 5
54:16
मिनट का वक्त है और इसके बाद क्रॉस
54:19
एग्जामिनेशन शुरू करेंगे। आप चाहे तो जो
54:21
इन्होंने सवाल पूछे उनके जवाब आप रिबर्टल
54:23
में भी दे सकते हैं।
54:24
जी
54:26
देखिए पहले तो ये बात कि ये मिसाल गलत
54:29
नहीं है। गलत है। इन्होंने पहले ही हमको
54:31
डिस्म कर दिया। कह अकल से मामला सॉल्व
54:34
नहीं हो सकता। लॉजिक से आप पहुंच नहीं
54:36
सकते। ये एक मेटाफिजिकल चीज है।
54:38
मेटाफिजिकल अजीब सा लब्ज़ है। ठीक से किसी
54:40
को माने नहीं मालूम इसके तो ऐसा लगता है
54:42
कुछ बड़ी चीज है। अरे भाई क्या होता है
54:45
मेटाफिजिकल? बताओ खड़ी हो। ये एक लफज़ है जो
54:50
कहीं भी इस्तेमाल हो जाता है। जब आप एक
54:53
बात कर रहे हैं और आप मुझसे बहस कर रहे
54:55
हैं तो मुझे मेटाफिजिकल मत बताइए। आप
54:57
लॉजिकली मुझे प्रूफ किए और अगर लॉजिकली आप
55:00
नहीं बात करते साहब ये मेटोफिजिकल है तो
55:02
फिर हम आप बात क्या कर रहे हैं मेरा आपका
55:04
किस जुबान में कन्वर्सेशन हुआ
55:07
और ये कहना कि वक्त पहले नहीं था तो फिर
55:10
क्यों कहते हैं ये हमेशा से और हमेशा
55:12
रहेगा हमेशा वक्त है तो आप कैसे कहते हैं
55:16
वो हमेशा से है और हमेशा रहेगा हमेशा का
55:19
मतलब है कोई वक्त अगर वक्त ही नहीं है तो
55:22
हमेशा कैसे
55:25
बहरहाल वो रहेगा। अब मैं ये देखता हूं।
55:29
आपने कहा ना कि वहां रेप ज्यादा होते हैं।
55:31
तो हम एक बात देखते हैं कि ये दुनिया
55:34
जिसमें वो कादरे मुतलक है। जिसकी मर्जी के
55:36
बगैर पत्ता भी नहीं हिलता वो ओमनीपोटेंट
55:39
है। ये दुनिया चल कैसे रही है? और इस
55:43
दुनिया का हाल क्या है? 45,000
55:47
बच्चे
55:49
जो 10 साल की उम्र से कम थे वो गदा में
55:54
मरे हैं।
55:56
भूख से काला हांडी में बच्चे मरते हैं और
55:59
डिप्थेरिया से मरते हैं। डिप्थेरिया अजीब
56:02
मर्ज़ है। गले में जाली मरना शुरू होती है।
56:05
बच्चा नीला हो जाता है। गरीब का बच्चा
56:08
इसलिए कि वो पास आती है। ये कादरे मुक है
56:11
जो चाहे कर दे। इससे आप दुआएं मांगते हैं
56:14
हमारी ये काम कर दे वो कर दे तो इसका मतलब
56:16
है डे टू डे लाइफ में वो इंटरफेयर करता है
56:20
और ये देख रहा है वो अगर वो वाकई भी है
56:23
फॉर डिस्कशन सेक तो मैं जब दुनिया देखता
56:26
हूं तो मेरे दिल में उसके लिए कोई इज्जत
56:28
नहीं पैदा होती क्या कर रहे हो तुम
56:32
[प्रशंसा]
56:33
पूरे ऑल पावरफुल हो ओमनीपोटेंट हो ओमनी
56:37
प्रेजेंट हो तुम तो वहां गदा में रहेगे ना
56:40
तुम हर जगह हो तुम देख रहे थे कि बच्चे की
56:43
कैसे धज्जियां उड़ गई। तुम देख रहे थे और
56:47
तुम चाहते हो मैं तुम्हारी परश कर तुम हो
56:50
भी।
56:52
अरे यार इससे अच्छे तो हमारे चीफ प्राइम
56:54
मिनिस्टर हैं। कुछ तो ख्याल करते हैं।
56:59
[हंसी]
57:00
आप किसकी इबादत कर रहे हैं? अगर वो है भी
57:03
यह दुनिया नाइंसाफी से जुल्म से जब्र से
57:07
तशद्दुद से भरी हुई है और आप ये मत कहिएगा
57:11
कि वो देख रहा है और वो बताएगा एक दिन अगर
57:14
वो देख रहा है और इंटरफेयर नहीं करता तो
57:16
आप दुआ क्यों मांगते आप कहते हैं मेरा ये
57:19
काम करा दे इसका मतलब है वो दखल दे सकता
57:22
है वो आपको नौकरी दिलवा सकता है भले दूसरे
57:26
आदमी को ना मिले मगर आपका काम कर देगा
57:29
क्योंकि आपने दुआ मांगी है तो तो जब वो
57:31
आपको नौकरी दिला सकता है, लड़की की शादी
57:34
कर सकता है, बेटे को ग्रीन कार्ड दिलवा
57:36
सकता है तो कम से कम ये जो मर रहे हैं
57:39
बच्चे इनको रोकते हैं। कुछ तो करें। मुझे
57:42
तो दुनिया में इस दुनिया का कोई मालिक है।
57:44
इसका ओमनीपोटेंट
57:47
कोई रूलर है। और ये दुनिया ऐसी चल रही है।
57:51
मैं तो चाहूंगा कि भाई ना हो। अगर हो तो
57:55
बड़ी शर्मिंदगी की बात है। शुक्रिया।
57:59
[प्रशंसा]
58:03
देवियों और सज्जनों इस बहस के दो राउंड और
58:07
दो रिबटल पूरे हो चुके हैं। अब सबसे जरूरी
58:11
और सबसे मुश्किल राउंड शुरू हो रहा है
58:14
क्रॉस एग्जामिनेशन का। अब इन विद्वानों की
58:17
सज्जनता की एक परख भी होगी और वक्त हमने
58:20
16 मिनट का तय किया है। अह पहला सवाल आप
58:24
पूछना चाहेंगे?
58:26
जी बिलकुल।
58:28
पहले बोले
58:30
[हंसी]
58:30
आप माइक ले लीजिएगा हाथ में
58:34
नीचे से
58:38
जी मैं मैं
58:41
ये डाइस हटा सकते हैं क्या हम थोड़ा
58:44
क्विकली
58:47
डाइस पीछे कर दीजिए बस थोड़ा सा ताकि ये जो
58:51
दाएं बाएं लोग बैठे हैं इसे हटा ही दीजिए
58:53
अब हम वहां तो जाने वाले नहीं आराम से
58:56
आराम
58:57
दोनों तरफ से
59:08
इस बीच आप लोग भी अपनेप सवाल तैयार कर
59:10
लें। ये ध्यान रखेंगे कि मैं यहां से सवाल
59:14
लूंगा। आप लोगों को अपना हाथ ऊपर करना है।
59:16
अपना नाम बताना है और अधिकतम तीन वाक्यों
59:20
में अपना सवाल पूरा करना है। कई लोग सवाल
59:22
की जगह भाषण देने लगते हैं। उससे आज बचना
59:25
है।
59:27
जी मुफ्ती साहब पहला सवाल आपका 16 मिनट है
59:30
हम दोनों लोगों के सवाल जी
59:31
जी बहुत शुक्रिया आप आपकी जो अभी बात हुई
59:35
बहुत अहम थी मैं इसको चाहूंगा कि आगे
59:36
डिस्कस करूं लेकिनकि अभी इस वो सेगमेंट है
59:40
क्रॉस एग्जामिनेशन
59:42
तो सबसे पहला सवाल आपसे ये है कि जो मैं
59:46
इतनी देर से कॉन्टिंजेंसी आर्गुमेंट आपको
59:49
बता रहा था ये अक्कल से ही बता रहा था
59:51
हजरत आप ये बताएं के आप इनफिनिट रिग्रेस
59:55
ऑफ कॉज को पॉसिबल मानते हैं या नेसेसरी
59:57
बीइंग के एक्सिस्टेंस को सही समझते हैं।
59:59
क्योंकि दो ही ऑप्शन हो सकता है। आप ये
1:00:01
बताएं।
1:00:02
देखिए आपको मैं ईमानदारी से बात करूंगा।
1:00:04
एक तो मैं कॉन्टिजेंसी वर्ड ठीक से समझता
1:00:06
हूं और इस वक्त भी जो आपने अंग्रेजी के
1:00:09
अल्फाज़ इस्तेमाल किए वो जरा थोड़े से मुझे
1:00:12
डिफिकल्ट और कॉम्प्लिकेटेड लगे। तो आप जरा
1:00:14
सिंपल सवाल में ये सवाल कर सकते हैं।
1:00:16
बिल्कुल कर सकता हूं। जी
1:00:18
यूनिवर्स की हर चीज कंटिंजेंट होने का
1:00:20
मतलब ये है कि वो अपने एक्सिस्टेंस में
1:00:22
किसी के ऊपर डिपेंडेंट है। जो भी चीज
1:00:25
डिपेंडेंट होगी वो चीज इंडिपेंडेंट नहीं
1:00:27
हो सकती तो उसका कोई ना कोई कॉज होगा। तो
1:00:30
अब आप क्या समझते हैं कि ये इनफिनिट
1:00:32
रिग्रेस है यानी कॉज पर कॉज कॉज पर कॉज
1:00:35
कॉज पर कॉज और कभी कोई यानी एंडलेसली चलता
1:00:37
रहा। क्योंकि अगर ऐसा होगा तो हम तो
1:00:39
एक्सिस्टेंस में आते ही नहीं। लॉजिकली ये
1:00:41
मुत्तफक अल चीज है। मुत्तफक अल अग्रीड
1:00:44
अपॉन ओके
1:00:47
इस पे हमने एग्री किया था कि मुश्किल शब्द
1:00:49
आएगा तो अर्थ बताना पड़ेगा।
1:00:50
तो इनफिनिट रिग्रेस तो पॉसिबल नहीं है। तो
1:00:52
कहीं ना कहीं आपको रुकना पड़ेगा ऐसे
1:00:54
नेसेसिटी पर।
1:00:55
नहीं कोई जरूरत नहीं रुकने की। किसने कहा
1:00:58
रुकना पड़ेगा? आप रुकते हैं वो होता है।
1:01:00
आप नहीं रुकते। आप कहते हैं वो हमेशा से
1:01:03
है। जब उस वक्त से है जब वक्त नहीं था। आप
1:01:07
कहां रुकते हैं? कि अब हुआ था वो। आप नहीं
1:01:10
कहते। हम क्यों नहीं मान सकते कि यूनिवर्स
1:01:12
जो है और बल्कि मल्टीिवर्स जो है वो हमेशा
1:01:16
से है वो बनती है सब एक हमारे यहां एक चीज
1:01:20
है ब्लैक होल वो समेट लेता है वापस फिर
1:01:23
ब्लास्ट होता है फिर फैल जाता है और इसमें
1:01:26
हमारी तो खैर कोई औकात ही नहीं है इंसान
1:01:28
की एक छोटे से दर्रे पे हम 50 60 साल की
1:01:32
उम्र रखते हैं जो करोरा अरबों साल की
1:01:36
कायनात हो उसमें और पैदा भी निहायती
1:01:39
बेहूदा वजह से हुए थे। तो तो इसमें ये
1:01:43
सोचना कि इसकी वजूहात और ये क्यों है? ये
1:01:47
डिपेंडेंट है। ये हम देख रहे हैं। क्या
1:01:49
मालूम? आप सोचिए कि ये जो फैल रही है
1:01:52
कायनात ये कहां फैल रही है? ये कहां जा
1:01:55
रही है? और ये फैल क्यों रही है? अरे बना
1:01:58
ली थी तुमने। रुको भैया हमें काफी है। ये
1:02:00
फैल क्यों रही है? ये और कौन सी कायनात?
1:02:03
जिसे मैं दूरबीन से देखता हूं तो दो
1:02:05
बिलियन लाइट ईयर पे है। उससे मेरा कोई
1:02:08
वास्ता ही नहीं है। दो बिलियन ईयर यानी
1:02:11
अगर मैं 80 थाउजेंड माइल्स पर सेकंड से
1:02:16
चलूं तो 20 करोड़ साल में वहां पहुंच
1:02:19
जाऊंगा। इसकी जरूरत क्या थी? ये दुनिया ये
1:02:23
कायनात तो इंसान अशरफुल मखलूकात के लिए
1:02:25
बनाई गई ना। तो ये सब
1:02:27
टर्म समझ में नहीं आया।
1:02:31
इसमें कोई खास समझने वाली बात थी नहीं।
1:02:35
ये जो अल्टीमेट कहा ये जाता है कि ये जो
1:02:38
पूरी यूनिवर्स है ये जो दुनिया है ये
1:02:40
इंसान के लिए बनाई गई।
1:02:42
अच्छा ये सब इंसान के लिए क्यों साहब सही
1:02:44
है ना?
1:02:44
बिल्कुल लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि किसी
1:02:46
चीज के पीछे रीज़ आपको नहीं पता तो रीज़
1:02:48
नहीं है। इसे कहते हैं
1:02:51
मुझे मुझे नहीं पता। लेकिन मेरी
1:02:53
जिम्मेदारी नहीं है। वो बिल्कुल सही कहा
1:02:55
था उसने। बल्टन रसल ने। आपने उसे मजाक में
1:02:58
टाल दिया कि भाई आप एक दावा कर रहे हैं।
1:03:01
मैं क्यों कहूं कि ये गलत है दावा। आप
1:03:03
प्रूफ कीजिए। मेरे पे जिम्मेदारी ही नहीं
1:03:06
है। मैंने थोड़ी कहा है। आप प्रूफ कीजिए
1:03:09
कि यह सही है।
1:03:10
आप आर्गुमेंट ऑफ कंटजेंसी का जवाब सवाल
1:03:12
पूछना चाहेंगे?
1:03:13
आप सवाल पूछना चाहेंगे मुफ्ती साहब से?
1:03:17
क्योंकि ये क्रॉस एग्जामिनेशन का दौर है।
1:03:19
आप जैसे पहले बोल रहे थे फेथ को लेके कुछ?
1:03:21
मैं ये पूछना चाहूंगा कि खुदा ने जो भी
1:03:24
रेवोलेशन किए है एक मजहब के नहीं बहुत से
1:03:26
मजहबों में किए है अलग-अलग रेवोलशन है।
1:03:28
कहीं कुछ एक बातें हैं कंट्राडिक्शन भी है
1:03:31
आपस में कहीं कुछ आप कर सकते हैं कहीं कुछ
1:03:34
नहीं कर सकते। ऐसा नहीं है कि सबकी कोड ऑफ़
1:03:37
मोरल एक है। तो
1:03:42
ये
1:03:44
किस्सा क्या है? अब आप ये देखिए कि मुझे
1:03:47
कभी-कभी लगता है कि ये जो फुटबॉल फाइनल
1:03:50
होता है
1:03:51
लाखों लोग होते हैं। फिर वो टीवी कवर करती
1:03:53
करोड़ों लोग। अगर उसमें खुदा की एक घूम
1:03:56
आवाज आ जाती मैं गॉड हूं। तो सारे लोग अभी
1:04:00
सुन लेते और टीवी पे भी सुन लेते किस्सा
1:04:03
खत्म होता। ये इतनी राजदारी क्या है कि
1:04:06
तुम सामने कुछ तो सबूत दे दो हमें। सॉलिड
1:04:09
ये कह साहब ये यूनिवर्स कैसे बनेगा? इससे
1:04:12
मसला क्या हल होगा? मैं पूछूंगा आपसे खुदा
1:04:14
कैसे बना? क्यों नहीं पूछूंगा? कैसे बना?
1:04:17
बल्कि वो तो कायनात से कहीं ज्यादा
1:04:20
इंटेलिजेंट है। कायनात से कहीं ज्यादा जी
1:04:22
वो हमेशा से सही आप कहेंगे मैं मान लूंगा।
1:04:26
अच्छा दोयम वो काद मुखल यानी कादरे मुख का
1:04:30
मतलब ओमनीपोटेंट है। जो चाहे कर सकता है।
1:04:33
आपको नौकरी दिलवा सकता है। आपकी अच्छी जगह
1:04:36
शादी करवा सकता है। आपके पड़ोसी का मुकदमा
1:04:40
हरवा सकता है। आपको जिता सकता है। सब काम
1:04:42
करता है।
1:04:42
थोड़ा सा माइक
1:04:44
वो इस दुनिया को चला कैसे रहा है?
1:04:47
यह दुनिया कैसे चल रही है? आपको इसमें
1:04:49
हैरत नहीं होती या कयामत के बाद कभी एक
1:04:53
जस्टिस होगा जब ये बच्चा मर चुका होगा
1:04:56
जिसकी धज्जियां उड़ गई बम से इसको इंसाफ
1:04:59
मिलेगा तब
1:05:01
अच्छा
1:05:02
अब जवाब दूं
1:05:03
मैं इसीलिए आपकी तरफ
1:05:05
सबसे पहले आपने रेवोलेशन और स्क्रिप्चर की
1:05:08
बात की इस पे मैं बात कर सकता हूं लेकिन
1:05:10
आज नहीं करूंगा क्योंकि वक्त कम है कभी और
1:05:12
इस पे डिस्कस करेंगे मैं तैयार हूं उसप भी
1:05:14
बात करने के लिए
1:05:14
ये अभी से राउंड टू की भूमिका तय हो रही
1:05:17
है डस गॉट एक्सिस्ट राउंड टू
1:05:20
जीकि आज गॉड के एक्सिस्टेंस पे बात है तो
1:05:23
मैं उसी के रिलेटेड जो है आपके सवालात को
1:05:26
एंटरटेन भी करूंगा और मैं भी पूछूंगा।
1:05:28
आपने कहा कि आपने साबित ही नहीं किया जबकि
1:05:31
आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी बुनियादी
1:05:33
आर्गुमेंट है।
1:05:34
आप मुझे कॉनंटिंजेंसी का मतलब बताइए। आपका
1:05:36
मतलब क्या है? कंटिंजेंसी? कंटिंजेंसी का
1:05:39
मतलब यह हुआ के हर वो वजूद जो किसी भी चीज
1:05:44
का पाबंद है। हर वो वजूद या हर वो चीज जो
1:05:47
अपने एकिस्टेंस में किसी भी चीज के पाबंद
1:05:50
है और उससे बाउंड है। उसको उसकी जरूरत है।
1:05:53
उस पर डिपेंड करती है। तो जाहिर सी बात है
1:05:55
कि उसका कोई ना कोई कॉज होता है। ये तो
1:05:57
अक्ल की बात है। ये आप रीजनिंग की बात
1:05:59
करते हैं। मैं वही कर रहा हूं। दूसरी चीज
1:06:01
आपने ये बात कही कि
1:06:04
इतने बिलियन लाइट इयर्स दूर है उसका मेरा
1:06:07
क्या लेना देना फिर मेरे ख्याल से आपको ये
1:06:09
नहीं कहना चाहिए आई एम आई थिंक देयर फॉर
1:06:12
आई एम एन एथिस्ट आपको सोचना चाहिए सिर्फ
1:06:14
आप एक लिमिटेड दायरे में रहकर नहीं सोचे
1:06:17
बल्कि बाहर निकल कर सोचें आपने तीसरा सवाल
1:06:20
किया आपने दो तीन सवाल एक साथ
1:06:21
ऐसी बातें ना कीजिए कुछों को एतराज हो
1:06:23
जाएगा आप पे कि आप कुछ भी सोचिए ये इजाजत
1:06:27
आपको है नहीं मुझे है [हंसी]
1:06:34
[प्रशंसा]
1:06:35
जी आप आपने प्रॉब्लम ऑफ इविल के ताल्लुक
1:06:39
से सवाल किया और बार-बार आप एक लफ्ज रिपीट
1:06:41
कर रहे हैं के ओमनीपोटेंट गॉड है। ऑल
1:06:44
पावरफुल गॉड है। यही तो दरअसल समझना है कि
1:06:48
गॉड का कांसेप्ट क्या है? प्रॉब्लम ऑफ
1:06:50
इविल जो है प्रॉब्लम ऑफ इविल दर हकीकत दो
1:06:53
असमशन पर कायम है। अगर आप इन दो असंप्शनंस
1:06:55
को समझ जाएं तो ये प्रॉब्लम प्रॉब्लम नहीं
1:06:57
रहेगी। आर्गुमेंट आपको समझ में आ जाएगी कि
1:06:59
ये कोलैप्स कर जाता है। पॉइंट नंबर वन
1:07:01
यानी जो आपका सबसे पहला फॉल्स असमशन है कि
1:07:05
गॉड मर्सफुल है, ओमनीपोटेंट है। दुनिया
1:07:08
में जुल्म हो रहा है। लेकिन आपको ये समझना
1:07:10
चाहिए कि हमारे वर्ल्ड व्यू के मुताबिक
1:07:12
गॉड सिर्फ ओमनीपोटेंट और सिर्फ मर्सफुल
1:07:14
नहीं है बल्कि वो ऑल वाइज भी है और वो ऑल
1:07:17
नोइंग भी है। उसके हर काम के पीछे हिकमत
1:07:20
और विज़डम है। ये कोई जरूरी नहीं है कि वो
1:07:22
हिकमत और विज़डम आपको समझ में आए या मुझे
1:07:24
समझ में आए। अगर आप जो समझ रहे हैं उसके
1:07:26
मुताबिक आप फैसला कर रहे हैं। ये लिमिटेड
1:07:28
पर्सपेक्टिव से आर्गुमेंट है और इस चीज को
1:07:30
हम अपनी दुनिया में अपने लाइफ में डेली
1:07:33
लाइफ में इस प्रिंसिपल को एक्सेप्ट करते
1:07:34
हैं। हम जब किसी डॉक्टर के पास जाते हैं
1:07:37
डॉक्टर के पास जाकर वो अगर उसने हमें कोई
1:07:39
दवाई दी है तो हम ये तो नहीं कहते कि जब
1:07:42
तक आपके पास जितना नॉलेज और जितना विज़डम
1:07:44
नहीं है आपने क्यों ये दवाई दी है तब तक
1:07:46
हम इस चीज को एक्सेप्ट नहीं करेंगे। नहीं
1:07:48
कहते। हम उसकी अथॉरिटी को तस्लीम करते
1:07:50
हैं। क्यों? क्योंकि उसकी हम जानते हैं कि
1:07:52
वो नॉलेजेबल है। वो विज़डम वाला है। हमसे
1:07:55
ज्यादा नॉलेज और हमसे ज्यादा विज़डम है।
1:07:56
बताएं सर।
1:07:57
नहीं डॉक्टर में खुदा में बड़ा डिफरेंस है।
1:08:00
डॉक्टर पढ़ा लिखा होता है। एक तो मैं उसकी
1:08:03
बात सुनूंगा।
1:08:05
दो नहीं कुछ जवाब तो ये भी नहीं है।
1:08:08
सर प्लीज आप
1:08:09
अगर सब ऑडियंस से बोलने लगेंगे तो फिर
1:08:11
मतलब नहीं इस बहस में।
1:08:12
मतलब आप ये कहें कि क्योंकि आप डॉक्टर पे
1:08:14
बिलीव करते हैं इसलिए खुदा पे बिलीव
1:08:16
कीजिए। क्या
1:08:16
ये मिसाल आपको समझाने के लिए
1:08:18
आर्गुममेंट है इस पे आपको एतराज नहीं है
1:08:22
तो
1:08:25
सिंपल बात ये है कि मैं अगर ये यकीन कर
1:08:28
लूं कि एक ओमनीपटेंट उसकी मसलहत है ये जो
1:08:31
बच्चे मर रहे हैं ये मसलहत है उसकी मुझे
1:08:35
नहीं चाहिए थी मसलहत
1:08:36
उसकी मसलहत नहीं यही तो समझना है
1:08:38
मतलब एक्सपीरियंस
1:08:40
अच्छा
1:08:40
इस आपने अभी मेरी बात पूरी सुनी नहीं
1:08:43
मैंने कहा आपका पूरा आर्गुमेंट दो फॉल्स
1:08:45
असमशन पर है। एक फॉल्स असमशन मैंने बता
1:08:48
दिया। दूसरा फॉल्स असमशन ये है कि इस
1:08:51
दुनिया में इविल के होने का कोई गुड रीज़
1:08:53
नहीं है। जबकि हमारे पास बाज़ रीज़ंस मौजूद
1:08:56
हैं। हमारे पास बाज़ वजूहात मौजूद हैं। अगर
1:08:58
इस दुनिया में इविल ना हो तो आप गुड को
1:09:00
डिफाइन कैसे करेंगे? अगर जुल्म ना हो, आप
1:09:02
इंसाफ को समझेंगे कैसे? अगर तारीकी ना हो,
1:09:04
तो आप लाइट को समझेंगे कैसे?
1:09:08
[प्रशंसा]
1:09:08
बहुत अच्छे।
1:09:09
अभी और सुन अभी और बाकी है।
1:09:11
ये तो बात बहुत पसंद आई साहब मुझे के जब
1:09:14
तक रेप ना हो तब तक औरतों की इज्जत का
1:09:16
ख्याल आप
1:09:17
आपने मेरा जवाब पूरा सुना ही नहीं।
1:09:18
जब तक के बच्चों का कत्ल ना किया जाए तब
1:09:21
तक आपको बच्चों की मासूमियत की इज्जत
1:09:23
आपने पूरा जवाब सुना ही नहीं।
1:09:24
क्या बात है? क्या आपने नुक्ता निकाला
1:09:26
हुआ?
1:09:27
आपने पूरा जवाब सुना ही नहीं। आप सुन ले।
1:09:29
मेरी बात सुन लें। ये मैंने आपको एक चीज
1:09:30
बताई। दूसरी चीज इस दुनिया में हम आए हैं
1:09:34
टेस्ट के लिए। हमारा टेस्ट हो रहा है और
1:09:35
हर इंसान का अलग-अलग अंदाज में टेस्ट होता
1:09:38
है और इस दुनिया में अगर इविल मौजूद है तो
1:09:41
वो इविल जरिया है हमारे अंदर ह्यूमन नोबल
1:09:44
क्वालिटीज को डेवलप करने का और अलग-अलग
1:09:47
फील्ड में प्रोग्रेस करने का और अगर हमारे
1:09:50
अंदर और इस दुनिया में इविल नहीं होता तो
1:09:53
बताइए टेस्ट का मतलब क्या होता है? अगर
1:09:55
मैं अपने स्टूडेंट को एमसीक्यूस दूं और
1:09:57
उसमें सिर्फ राइट आंसर लिख कर दे दूं और
1:09:59
कहूं तुम्हारा टेस्ट हो गया। ये मीनिंगलेस
1:10:00
है। इस दुनिया में अगर हम टेस्ट के लिए आए
1:10:02
हैं तो जाहिर है गुड एंड इविल दोनों मौजूद
1:10:05
है।
1:10:07
[प्रशंसा]
1:10:08
तो अगर गुड एंड इविल दोनों मौजूद है तो ये
1:10:11
इवल भी खुदा का बनाया हुआ है।
1:10:13
जी हां खुदा का बनाया हुआ है। लेकिन
1:10:14
अच्छा चलो अच्छी बात है।
1:10:15
जी बिल्कुल।
1:10:16
तो अभी अभी तो ये है कि जो मेजॉरिटी
1:10:21
है दुनिया में वो इविल है। तो ये खुदा
1:10:24
एक्चुअली इविल के साइड पे लग रहा है मुझे।
1:10:26
बिल्कुल मेजॉरिटी में तो वो है।
1:10:29
[प्रशंसा]
1:10:30
क्या बात कर रहे हैं भाई आप कोई भी जो
1:10:32
मुसिफ होगा चाहे आपका अपना घर हो जिसके आप
1:10:35
सबसे बड़े हैं चाहे आपकी ऑर्गेनाइजेशन हो
1:10:38
जो आप चलाते हैं वहां पर आप इवल रखेंगे
1:10:42
साबित करने को कि बाकी लोग शरीफ है
1:10:44
मेरी बात सुनिए
1:10:44
क्या ये आर्गुमेंट ही गलत है कि जब तक के
1:10:47
कोई इवल नहीं होगा तब तक के शरीफ आदमी
1:10:49
शरीफ नहीं लगेगा
1:10:50
अगर एग्जामिनर इ गलत ऑप्शन दे रहा है तो
1:10:53
एग्जामिनर इविल नहीं हो गया जो गलत ऑप्शन
1:10:56
को सेलेक्ट कर रहा है वो फेल होगा क्रिएटर
1:10:58
ने इविल को बनाया है लेकिन वो इविल नहीं
1:11:01
है।
1:11:01
सुनिए मेरी बात सर लेट मी कंप्लीट सर
1:11:05
क्रिएटर ने इविल को बनाया है टेस्ट के लिए
1:11:08
वो इविल नहीं है। इविल वो होगा वो होगा जो
1:11:11
उसे इख्तियार करेगा। छुरी को बनाने वाला
1:11:13
गलत नहीं होता है। छुरी का गलत इस्तेमाल
1:11:15
करने वाला गलत होता है।
1:11:21
रेप को कैसे गलत इस्तेमाल करते हैं?
1:11:24
रेप इंसान के फ्री व्हील का नतीजा है। ये
1:11:26
माइक
1:11:28
ये रेप कैसे गलत इस्तेमाल होता है? ये
1:11:31
अब सुन ले। अब सुन ले इस्तेमाल होता है।
1:11:33
हां मैं बता रहा हूं ना कैसे
1:11:34
मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं कि जो
1:11:36
इविल इस दुनिया में मौजूद है। उसके कई
1:11:39
सारे तरीके हैं। एक तरीका इंसान का अपना
1:11:42
फ्री विल है। अब अगर कोई रेपिस्ट रेप कर
1:11:44
रहा है तो इसका गॉड का कसूर नहीं है। वो
1:11:46
अपने फ्री विल का गलत इस्तेमाल करना कर
1:11:48
रहा है। उसको सजा मिलनी चाहिए। और उसी के
1:11:50
लिए जहन्नुम बनाई गई है।
1:11:51
यह फ्री विल का भी बड़ा चक्कर है। आप जब
1:11:54
कोई बुरा काम करते हैं या कोई बुराई होती
1:11:56
है तो यह कहा जाता है कि ये फ्री विल है।
1:11:59
7 बिलियन फ्री विल्स आर मूविंग ऑन दिस
1:12:02
प्लनेट। 7 बिलियन फ्री विल। और एक आदमी
1:12:06
अपनी फ्री विल से मुझे कत्ल कर दे तो मैं
1:12:08
खुदा की मर्जी से मरा हूं। क्या इसकी फ्री
1:12:10
विल की वजह से?
1:12:12
मेरी मौत खुदा के हाथ है या इस फ्री विल
1:12:14
वाले के हाथ है?
1:12:16
खुदा ने फ्री विल का निजाम बनाया है और उस
1:12:19
निजाम का गलत इस्तेमाल करके कोई आपको मार
1:12:21
रहा है।
1:12:21
इस्तेमाल करके मेरा कत्ल कर देता है। अब
1:12:24
मेरी मौत का जिम्मेदार कौन है?
1:12:25
वो इंसान जिम्मेदार है।
1:12:26
वो इंसान।
1:12:27
तो ये कहना कि
1:12:28
और उसको उसको उसको सजा मिलेगी।
1:12:30
तो अब आप आगे चलिए कि ये तय करना कि
1:12:33
अल्लाह ही या खुदा सॉरी अल्लाह नहीं। खुदा
1:12:36
ही जिंदगी देता है। खुदा ही मौत देता है।
1:12:38
ये गलत है।
1:12:39
बिल्कुल गलत नहीं है।
1:12:40
हां नहीं।
1:12:41
निजाम उसी ने बनाया फ्री विल का। निजाम
1:12:43
मौत और हयात का उसी ने बनाया।
1:12:45
यू आर कंट्राडिक्टिंग योरसेल्फ। अभी आपने
1:12:47
कहा कि एक आदमी ने फ्री विल से आपको मार
1:12:50
दिया। इसमें उसे फ्री विल दी गई थी। उसने
1:12:52
गलत इस्तेमाल किया। 7 बिलियन फ्री विल्स
1:12:56
आर मूविंग ऑन दिस प्लेनेट। और आप चाह रहे
1:12:58
हैं कि मैं सिर्फ खुदा का ध्यान करूं। ये
1:13:00
7 बिलियन फ्री विल्स को मुझे लुक आफ्टर
1:13:03
करना पड़ेगा कि नहीं? ये तो तबाहियां कर
1:13:05
रही है और तबाहियां ज्यादा हो रही हैं।
1:13:08
बिल्कुल। तो अगर आप बताएं आप बताएं अगर
1:13:11
खुदा नहीं है फॉर एग्जांपल तो आप इविल को
1:13:14
कैसे डिसाइड करेंगे? यानी हाउ कैन यू
1:13:16
डिफाइन इविल ऑब्जेक्टिवली विदाउट गॉड?
1:13:19
इविल को डिफाइन।
1:13:22
देखिए दुनिया में दो तरह के जानवर है। एक
1:13:25
जो अकेले रहते हैं जंगल में और एक जो
1:13:28
ग्रुप्स में रहते हैं। ग्रुप में जो भी
1:13:32
रहेगा चाहे वो आपका फाउंडेशन हो, चाहे कोई
1:13:36
क्लब हो, चाहे कोई पिटिकल पार्टी हो, चाहे
1:13:40
कोई यूनिट हो, उसमें आपको इंटलेक्ट करने
1:13:44
के रूल बनाने पड़ेंगे।
1:13:45
यानी लोग तय करेंगे।
1:13:47
लोग तय करेंगे। अगर लोगों ने यह तय किया
1:13:49
कि किसी का रेप करना सही है, आप जस्टिफाई
1:13:50
करेंगे?
1:13:51
नहीं।
1:13:52
आपका फाउंडेशन तो यह हो गया ना कि लोग
1:13:53
इविल डिसाइड करेंगे।
1:13:55
नहीं नहीं अरे [प्रशंसा]
1:13:58
दुनिया में ऐसे ग्रुप्स हैं जो रेप को
1:14:02
जायज मानते हैं सर्टेन हालात में। मैं
1:14:06
डिटेल में नहीं जानूंगा। आप भी जानते हैं।
1:14:08
ये जो आईिस वाले थे जिन्होंने क्या किया
1:14:11
था? तो
1:14:13
उन्होंने क्या किया? उसका खुदा से कोई
1:14:14
ताल्लुक नहीं है सर। मैंने सिंपल सवाल
1:14:16
किया कि इविल को आप डिफाइन करते कैसे हैं?
1:14:18
आइए वापस आइए।
1:14:19
जी
1:14:21
आप साथ में तभी रह सकते हैं जब कुछ आप ऐसे
1:14:24
उसूल डेवलप करें जिसमें हर एक का बेसिक
1:14:27
तहफुल हर एक का बेसिक राइट हो और हर एक को
1:14:30
कोई आराम मिले। यही तरीका है किसी भी
1:14:34
ऑर्गेनाइजेशन जिसमें एक से ज्यादा लोग हैं
1:14:37
और वो ऐसे चलती है जिंदगी। उसमें अगर आप
1:14:40
गड़बड़ करेंगे तो तबाही होगी, नुकसान
1:14:43
होगा, बर्बादियां आएंगी। और अगर उसमें आप
1:14:46
घर ले लीजिए ना एक हस्बैंड है, एक वाइफ
1:14:49
है, बच्चे हैं, वालिदा भी है, दो बहनें भी
1:14:52
है, एक भाई भी है। अब इसमें कोई निजाम
1:14:55
आपको चाहिए साथ में रहने का। और एक दूसरे
1:14:58
पे भरोसा रहे। एक दूसरे के वही ख्वाब हो,
1:15:01
एक दूसरे की मदद करें। ऐसी जिंदगी
1:15:03
सर आपकी बात आ गई। आप ये कह रहे हैं कि
1:15:05
लोग डिसाइड करेंगे क्या सही है क्या गलत
1:15:07
है। यही है मेजॉरिटी डिसाइड करेगी क्या
1:15:09
सही है क्या गलत है। अरे भाई बिल्कुल
1:15:11
मेजॉरिटी अगर ये कहे कि नाज़ जर्मनी के साथ
1:15:14
जिस तरह मेजॉरिटी थी कि जेनोसाइड करना सही
1:15:16
है आप जस्टिफाई करेंगे
1:15:18
[प्रशंसा]
1:15:19
उस वक्त उस वक्त
1:15:20
आपका आपका ये
1:15:22
सिर्फ उसके बाद उस वक्त प्लनेट पे जो लोग
1:15:25
थे
1:15:26
उनमें कितने लोग हिट को सही समझते
1:15:28
अच्छा प्लनेट की मेजॉरिटी तय करी सोसाइटी
1:15:30
की नहीं प्लनेट की मेजॉरिटी गॉड के
1:15:32
एक्सिस्टेंस को सही मानती है आप क्यों
1:15:33
नहीं मानते
1:15:39
ये
1:15:40
हेलो हेलो हेलो [प्रशंसा] ये क्रॉस
1:15:43
क्वेश्चन का राउंड यहां पर समाप्त होता है
1:15:47
और ये बड़ा अच्छा है कि इस तरह से
1:15:48
फ्रेगमेंट कर दिया गया है ताकि जो मरकरी
1:15:50
ऊपर जा रहा है नीचे
1:15:52
जी
1:15:52
प्लेनेट की ज्यादातर मेजरिटी
1:15:56
कुछ दूसरे मजहबों के खुदा को मानती है
1:16:00
नहीं आप तो मेजॉरिटी की बात कर रहे हैं
1:16:03
आप ये कह रहे हैं इविल और गुड को डिसाइड
1:16:05
मेजॉरिटी करेगी मेजॉरिटी जो कर दे वो सही
1:16:07
हो जाएगा
1:16:09
इसको जैसा आप ही लोगों ने तय किया है उसी
1:16:11
फॉर्मेट को फॉलो कर लेते हैं।
1:16:14
भाई मैंने तो भले लोगों पे ऐतबार किया पर
1:16:17
तब मॉडरेशन तय किया। जी आपके पास 5 मिनट
1:16:20
का वक्त है क्लोजिंग आर्गुमेंट है। उसके
1:16:22
बाद हम ऑडियंस से क्वेश्चन आंसर लेंगे
1:16:24
जावेद साहब के क्लोजिंग आर्गुमेंट के बाद।
1:16:25
ओके टाइम स्टार्ट।
1:16:26
बहुत शुक्रिया।
1:16:27
हमारा जो टॉपिक है डस गॉड एक्सिस्ट? मैं
1:16:31
इस पे इतने एकेडमिक तैयारी करके आया था।
1:16:33
मुझे था कि मैं मैंने सोचा था कि कई सारे
1:16:36
मैं आर्गुमेंट्स दूंगा। लेकिन वक्त की भी
1:16:38
किल्लत और जावेद साहब बार-बार इधर-उधर चले
1:16:40
जा रहे थे तो उसको भी थोड़ा एंटरटेन करना
1:16:42
पड़ गया। डस गॉड एक्सिस्ट पे मैं एक ही
1:16:44
आर्गुमेंट दे पाया। आर्गुमेंट्स बहुत हैं
1:16:47
और डेफिनेटिव आर्गुमेंट्स हैं और मेरे
1:16:49
आर्गुमेंट को किसी एक राउंड में भी
1:16:51
इन्होंने एंटरटेन नहीं किया और रेफ्यूट
1:16:53
नहीं किया है। एक राउंड में भी नहीं। एक
1:16:55
राउंड में भी नहीं।
1:16:57
और ना ही अभी अभी आपका क्लोजिंग आर्गुमेंट
1:16:59
आएगा। बता देना।
1:17:00
आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी सर।
1:17:02
अरे मैं आपसे कई बार कह चुका हूं
1:17:03
कंटिंजेंसी का मतलब
1:17:04
अब मैं कैसे समझाऊं [हंसी] आपको? आपस में
1:17:06
हां आप
1:17:07
और कितने आसानी से समझाऊं मैं मुझे तो
1:17:09
नहीं समझ में आ रहा है बस आप अपनी
1:17:11
कंटिजेंसी उर्दू में बोल सकते हैं
1:17:14
हां आप अपनी बात पूरी कर लें आखरी चार
1:17:16
मिनट
1:17:17
दूसरी चीज
1:17:19
जस्ट अ मिनट प्लीज मैम कैन आई टॉक
1:17:24
दूसरी चीज ये है कि आपने एक तो इसका जवाब
1:17:26
नहीं दिया दूसरा आपने गॉड के ना होने पर
1:17:29
कोई डेफिनेटिव आर्गुमेंट नहीं दिया सिर्फ
1:17:31
मजहब पे बात कर रहे हैं आप मजहब तो आज
1:17:33
हमारा टॉपिक ही नहीं था आज तो हमारा टॉपिक
1:17:35
को आप मजहब से ले लेकर आईएस आईएस तक चले
1:17:38
गए। भाई हमारा क्या ताल्लुक है उससे? वी
1:17:40
कंडेम देम। और उसका गॉड से क्या ताल्लुक
1:17:42
है? अगर कोई गलत काम कर रहा है। किसी ने
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किसी को कत्ल किया, किसी ने किसी का रेप
1:17:46
किया उसको सजा मिलनी चाहिए। और आपके पास
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कोई भी कोई भी रैशन स्ट्रांग फाउंडेशन ऑफ
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मोरालिटी नहीं है। आपने कहा कि मेजॉरिटी
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तय करेगी सोसाइटी की वो सही होगा। मैंने
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कहा हिटलर को फिर आप सही कहेंगे। नहीं
1:18:00
नहीं नहीं। प्लेनेट की सोसाइट की मेजॉरिटी
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तय करेगी। तो प्लनेट की मेजॉरिटी गॉड के
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एक्सिस्टेंस को मानती है। आप कह रहे हैं
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ये रिलीजियस है। तो यानी आपके पास कोई
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स्ट्रांग फाउंडेशन नहीं है ऑब्जेक्टिव
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मोरालिटी का। ऑब्जेक्टिव मोरालिटी का अगर
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कोई फाउंडेशन है तो वो सिर्फ गॉड है। गॉड
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है। गॉड है। जी ये मुफ्ती शमालय नदवी साहब
1:18:21
का क्लोजिंग आर्गुमेंट था। अब हमारे पास
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जी मैं
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जी [हंसी]
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ये बड़ा अच्छा है कि दोनों लोगों को
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मॉडरेटर से शिकायत भी और बोल रहे हैं भाई
1:18:33
हमारी शाबाशी भी तो करते चलो
1:18:36
अब मेरी बात
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जी आपके पास जावेद अख्तर साहब पांच मिनट
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का वक्त है ये आपका क्लोजिंग आर्गुमेंट है
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टाइम रिसेट कर दें
1:18:42
जी
1:18:44
देखिए बहुत सारी बातें हैं। गॉड का
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डेफिनेशन दुनिया के किसी भी रिलजन में है
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कि वो भी पोटेंट है। वो भी प्रेजेंट है।
1:18:51
ही इज़ जस्ट, ही इज़ काइंड, ही लव्स यू एंड
1:18:55
सो ऑन। मैं जब दुनिया देखता हूं तो मुझे
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कोई ऐसा सुप्रीम पावर यहां दिखाई नहीं
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देती है जो इंसान की बेहबूती के लिए कुछ
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कर रही हो, कमजोर को बचा रही हो, मदद कर
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रही हो, जालिम को पीछे हटा रही हो। मैं
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नहीं देखा। तारीख में नहीं। एक तो अगर है
1:19:12
और ये देख रहा है तमाशा तो उसका होना ना
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होना बराबर है। दो ये कि
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ये जो है जब आप ये कहते हैं कि कायनात
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जिसकी कंटिंजेंसी है मैं देखिए लफज़
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इस्तेमाल किया मैंने तो ये कैसे हो सकती
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है बात और फौरन आप सरेंडर कर देते हैं कि
1:19:33
जाहिर है कि इसका बनाने वाला तो इतने
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10,000 गुना ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड होगा।
1:19:37
उस पर आपके होने पर कोई एतराज नहीं है।
1:19:40
उसे वो टाइमलेस है। वो पहले से था। टाइम
1:19:42
तो बहुत बाद में आया। ये सब आप मानने को
1:19:45
तैयार है। जिसका आपके पास कोई सबूत नहीं।
1:19:48
आपके पास कोई रीज़ नहीं है। आपकी तारीफ
1:19:50
क्या है मजहबों की? बिलीफ की जो खुदा का
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बिलीफ है। ये कास्टेंटली गलत साबित होता
1:19:56
रहा है। मतलब आप कहे कि एस्टोटिस के जमाने
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में तो सब जाहिल थे। वो भी इतने ही यकीन
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से खुदा पे यकीन रखते थे जो अब नहीं रहा।
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यह भी नहीं रहेगा। आप लिख लीजिए और इसके
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आसार आपको दुनिया में दिखाई देना शुरू हो
1:20:12
चुके हैं। ये बहस क्या आज से 100 साल पहले
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इस तरह हो सकती थी? यहां तक तो आपको हम ले
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आए हैं। तो
1:20:24
सर सर [प्रशंसा]
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अरे इनको मदद की जरूरत नहीं। भाई ये सेल्फ
1:20:28
सफिशिएंट आदमी है। आप क्यों इनकी मदद कर
1:20:30
रहे हैं?
1:20:31
सर सर सर [हंसी] सर प्लीज प्लीज
1:20:33
तो ये जो है तमाम बातें अपनी जगह है ये एक
1:20:37
पैकेज है आप अकेले कोई आदमी ऐसा नहीं है
1:20:39
जो सिर्फ गॉड को मानता हो उसके साथ बहुत
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पैराफनेलिया आता है अलग-अलग पैराफनेलिया
1:20:45
आते हैं दे आर ओनली दे हैव ऑलवेज क्रिएटेड
1:20:49
इन द सोसाइटी मैं तो आपको सीधा ऑफर देता
1:20:52
हूं कि दुनिया में 10 इंपॉर्टेंट बिलीव
1:20:55
दैट आप एक मानते हैं नौ नहीं मानते नौ में
1:20:59
आप एक चीज है नौ को आप बिल्कुल रीज़नेबली
1:21:02
मेरी तरह देखते हैं
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तो 90 मजहबी आदमी भी 90स है वो दूसरे खुदा
1:21:09
नहीं मानता एक खुदा मानता है अपना वाला
1:21:12
बाकियों को कहता है गलत है
1:21:15
अगर आप मानना ही बंद कर दे तो आपका 10%
1:21:18
चांस है कि आप सही है और 90% चांस है कि
1:21:20
आप गलत है। मेरा मशवरा है आप मानना छोड़
1:21:22
दिए तो 50% चांस होगा कि आप सही है और 50%
1:21:26
चांस होगा। 40% आप गेन करेंगे बाय बिकम एन
1:21:30
एथ।
1:21:36
ये एक फसूदा ख्याल है। ये खत्म हो रहा है।
1:21:39
हो सकता है मेरी जिंदगी में ना हो। लेकिन
1:21:42
ये हो जाएगा। जो बातें ये इनको आप
1:21:45
मेटाफिजिकल ये वो ऐसे रिस्पेक्टेबल टर्म
1:21:48
दे दिए। ये तो उन लोग के हैं जिन्हें ना
1:21:51
फिजिक्स मालूम थी ना मेटा मालूम था। ये
1:21:53
उन्होंने आपको दिए हैं।
1:21:57
जी बहुत शुक्रिया आप दोनों लोगों का और अब
1:22:00
इस बातचीत का आखिरी राउंड शुरू होगा डस
1:22:03
गॉड एक्सिस्ट की ये बहस मुफ्ती शमाइल नदवी
1:22:06
और जावेद अख्तर साहब के बीच आप लोग अपने
1:22:08
अपने हाथ ऊपर करेंगे मैं यहां से तय
1:22:11
करूंगा और माइक हमारे पास है क्या एक ही
1:22:14
माइक है ऑडियंस के लिए दो माइक है एक इस
1:22:16
तरफ एक इस तरफ ठीक है तो जी सबसे पहले
1:22:20
हमारी सहयोगी है मारिया मारिया शकी जी
1:22:23
पूछिए सवाल थोड़ा सा रुकेंगे ताकि कैमरे
1:22:25
फ्रेम आप पर आ जाए। आपकी तो प्रैक्टिस है
1:22:28
टीवी की। जी
1:22:30
नजवी साहब मैं खुदा को मानती हूं। पहले
1:22:34
मैं इसी प्रमाइस से शुरू कर रही हूं और ये
1:22:36
बता रही हूं आपको। मैं मानती हूं। लेकिन
1:22:39
कुछ कुछ सवाल है जो जावेद साहब ने उठाया।
1:22:41
उसका जवाब आपको देना चाहिए। पहला सवाल ये
1:22:45
कि गजा में सालों से छोटे बच्चे मर रहे
1:22:50
हैं वो उनको अगर खुदा मर्सफुल है हम मानते
1:22:54
हैं कि अल्लाह ताला में बहुत ताकत है तो
1:22:57
वो बच्चे क्यों मर रहे हैं? दूसरी बात यह
1:23:00
कि अगर कंटिंजेंसी की जो आप बात करते हैं
1:23:03
पूरे मुस्लिम मुालिक
1:23:06
मिलकर के भी उन गजा के बच्चों को क्यों
1:23:08
नहीं बचा पा रहे हैं? क्योंकि अगर वो
1:23:11
चाहते क्योंकि अल्लाह ताला उन पर हुकूमत
1:23:14
करते हैं। सब पर हुकूमत करते हैं तो वो
1:23:16
उनको क्यों नहीं बचा?
1:23:17
जी थैंक यू।
1:23:18
थैंक यू वेरी मच। बहुत अच्छा किया। आपने
1:23:20
इस चीज को जिक्र कर दिया। मैं इसको और
1:23:22
अच्छे से एक्सप्लेन करने की कोशिश करता
1:23:24
हूं।
1:23:25
देखें जहां तक आपने कहा कि गजा के बच्चों
1:23:28
को मारा जा रहा है। देखिए दो वर्ल्ड व्यू
1:23:30
है। एक एथिस्टिक वर्ल्ड व्यू एक थिस्टिक
1:23:32
वर्ल्ड व्यू है। बच्चे मर रहे हैं दोनों
1:23:35
वर्ल्ड व्यू में है। लेकिन हमारा वर्ल्ड
1:23:37
व्यू कह रहा है कि रिकंपेंस है। ये कह रहे
1:23:39
हैं कि उनका मर उनका मरना बेकार जाने वाला
1:23:41
है। कोई उसका रिकंपैेंस नहीं है। क्योंकि
1:23:44
इनके यहां आखिरत और अल्लाह का कोई तसवुर
1:23:46
या गॉड का कोई तसवुर नहीं है। आपने ये
1:23:48
सवाल किया कि गॉड मर्सफुल है। क्यों नहीं
1:23:51
रोकता? ये मैंने बताया कि ये मिसकंसेप्शन
1:23:54
है लोगों के दरमियान कि गॉड को सिर्फ
1:23:57
मर्सफुल और ओमनीपोटेंट समझते हैं। गॉड के
1:23:59
सिर्फ यही दो एट्रिब्यूट्स नहीं है। गॉड
1:24:01
के कई सारे एट्रिब्यूट्स हैं। उनमें से अल
1:24:03
हकीम भी है। उनमें से सॉरी ऑल ऑल ऑल वाइज
1:24:08
भी है। ऑल नोइंग भी है। लिहाजा अगर इस
1:24:11
दुनिया में किसी को तकलीफ आ रही है और गॉड
1:24:14
उसको नहीं रोक रहा है। वो इसलिए नहीं रोक
1:24:16
रहा है क्योंकि इंसानों को फ्री विल दिया
1:24:18
गया है। ठीक इसी सुनिए सुनिए। ठीक इसी
1:24:20
तरीके से अगर एक डॉक्टर किसी छोटे बच्चे
1:24:22
को इंजेक्शन लगा रहा है उसे तकलीफ पहुंच
1:24:24
रही है। उसके लिमिटेड पर्सपेक्टिव के
1:24:26
ऐतबार से ये गलत हो रहा है और डॉक्टर बुरा
1:24:29
है। लेकिन जब आप ब्रॉडर पिक्चर को देखेंगी
1:24:32
आपके और हमारे पास सिर्फ एक पिक्सल है।
1:24:34
हमें इतना नजर आ रहा है कि गज्जा में कत्ल
1:24:36
हो रहा है। लेकिन इसके पीछे कितना रिकमेंस
1:24:39
उनको मिलने वाला है। पूरा पिक्चर गॉड के
1:24:42
पास है। तो एक पिक्सल से आप पूरे पिक्चर
1:24:44
को कभी भी जज नहीं कर सकती।
1:24:46
आप आप इसमें कुछ जोड़ना चाहेंगे? आपको कुछ
1:24:48
बोलना है इसमें?
1:24:51
भाई आपने बहुत अच्छा जस्टिफिकेशन दिया या
1:24:53
आप वो जो वहां के प्राइम मिनिस्टर है
1:24:55
इजराइल के उन्हें भेजिए। वो बहुत खुश
1:24:57
होंगे।
1:24:58
आप जस्टिफिकेशन दे देना कि अगर गॉड नहीं
1:25:00
है तो बच्चे क्यों मर रहे हैं? आप बताएं।
1:25:02
वो ये सवाल पूछ रहे हैं कि अगर आप ईश्वर
1:25:05
का अस्तित्व नहीं मानते हैं तो उन बच्चों
1:25:07
की मौत को आप कैसे इंटरप्रेट करते हैं?
1:25:11
भाई ये दुनिया जो है जो ताकतवर लोग होते
1:25:14
हैं वो एक नाइंसाफी करते हैं।
1:25:17
तो ये अच्छा काम है। आपके नजदीक तो नेचर
1:25:19
नाइंसाफी पे मबनी है।
1:25:20
अरे मेरे भाई आप नेचर की कहां बात कर तो
1:25:23
इंसान की बात
1:25:23
तो फिर जब मैं इंसान की बात कर रहा था आप
1:25:25
नेचर की बात करने लग गए।
1:25:26
क्रॉस एग्जामिनेशन हां अगर मुझे बोलने
1:25:29
नहीं देंगे तो अलग बात है। आप बोलिए मैं
1:25:31
मुझे कोई
1:25:32
नहीं ये क्रॉस एग्जामिनेशन
1:25:35
मुझे बोल तो लेने दीजिए।
1:25:37
ठीक है बात
1:25:38
बात ये है के ह्यूमन सोसाइटी तभी साथ में
1:25:42
रह सकती है जब वो मोहब्बत से एकता से एक
1:25:44
दूसरे के एतराम करके रहे। इसके अलावा
1:25:47
पॉसिबल नहीं है। अकेले तो इंसान रह ही
1:25:49
नहीं सकता। वहां पर कुछ लोग हैं जो फाउल
1:25:51
करते हैं। वो फाउल हमेशा से तारीख में
1:25:55
होता आया है। आज ये हो रहा है जो हो रहा
1:25:58
है बहुत बुरा हो रहा है। बहुत जालिमाना
1:26:00
है। बहुत जाबराना है। उसको आप कहे कि ये
1:26:03
बच्चों को कंपनसेशन मिल जाएगा या इसकी
1:26:06
इंजेक्शन है। इंजेक्शन तो हेल्थ के लिए
1:26:09
दिया जाता है। आप ये कह रहे हैं कि ये
1:26:11
बच्चों की जो धज्जियां उड़ रही है ये
1:26:13
इंजेक्शन है।
1:26:14
ये टेस्ट है। यह टेस्ट है और उस टेस्ट में
1:26:17
उनको उनको ऐसा रिकफेंस मिलेगा जो आपके
1:26:20
तसवुर के बाहर है।
1:26:21
ये आप तीन बरस के बच्चे को बारूद से उड़ा
1:26:23
के टेस्ट ले रहे हैं।
1:26:24
वाह!
1:26:25
वो नहीं ले रहा है। खुदा नहीं उड़ा रहा है।
1:26:26
इजराइल उड़ा रहा है। तो उसको उसको
1:26:29
अगला सवाल लेते हैं। अगला सवाल लेते हैं
1:26:32
प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल।
1:26:34
मुफ्ती साहब एक निवेदन आपसे है कि कम से
1:26:36
कम
1:26:37
थोड़ा सा माइक क्लोज।
1:26:38
एक रिलीजियस और फिलोसफिकल
1:26:40
कर रहे कर रहे हैं। करम प्लीज
1:26:42
एक रिलीजियस और फिलोसफिकल ट्रेडिशन है।
1:26:45
जो ब्रह्मांड को यानी यूनिवर्स को ही
1:26:48
अंतिम मानती है। सर्वम खल इदम ब्रह्मम।
1:26:52
दिस इज छंदोग उपनिषद एंड इट कंप्लीटली
1:26:56
रूल्स आउट द एकिस्टेंस और नेसेसिटी आपके
1:26:59
शब्दों में नेसेसिटी ऑफ़ अ क्रिएटर। द
1:27:02
क्रिएशन इटसेल्फ इज द क्रिएटर। तो एक मिनट
1:27:06
प्लीज। दूसरा जो सवाल आपने अभी जो आप
1:27:09
बार-बार कह रहे हैं कि भगवान विद्वान भी
1:27:11
है, वाइज सब जानने वाला। तो अगर विडम में
1:27:16
दुनिया भर के पापों और अत्याचारों को
1:27:18
बर्दाश्त करना शामिल है तो फिर इसका मतलब
1:27:21
ये हुआ कि अगर मैं फ्री विल से उसको अपोज
1:27:23
करता हूं तो ईश्वर की विज़डम और मेरी फ्री
1:27:25
विल में कंट्राडिक्शन है। बिकॉज़ व्हेन आई
1:27:28
एम अपोजिंग व्हाटएवर हैपनिंग इन गाजा देन
1:27:30
आई एम अपोजिंग द गॉड्स विल और गॉड्स विज़डम
1:27:33
जवाब ले क्योंकि तो गॉड की विज़डम एक मिनट
1:27:35
सॉरी प्लीज सर [हंसी] ये एक एक जुमला गॉड
1:27:38
की विज़डम है कि गाजा में जो कुछ हो रहा है
1:27:40
वो हो रहा है। मैं उसका अपोज कर रहा हूं
1:27:43
तो मैं गॉड की विडम के खिलाफ जा रहा हूं।
1:27:45
एक सवाल दूसरा यह
1:27:47
नहीं नहीं आपने दो ऑलरेडी
1:27:50
सर
1:27:50
आप और सवाल कर लें लेकिन मुझे दो जवाब
1:27:52
देने पहले आपने ये कहा सुनिए मेरी बात
1:27:54
सुनिए के मुताबिक थोड़ा ठीक हो रहा है ना
1:27:57
नहीं नहीं हो रहा है ठीक नहीं हो रहा है
1:27:58
मैं बता रहा हूं क्या हो रहा है आप तशरीफ
1:28:00
रखिए मैं बता रहा हूं क्या हो रहा है लेट
1:28:01
मी कंप्लीट प्लीज
1:28:02
एक सेकंड गाइस एक सेकंड ये देखिए ऐसा है
1:28:05
कि ये सब बड़ा आपस में विचार विमर्श के
1:28:09
बाद ये तय हुआ था कि कुछ नियम बना लिए
1:28:11
जाएं ताकि एक टाइम बाउंड बातचीत चले और
1:28:15
भाई साहब आप बड़ा जरूरी काम कर रहे हैं
1:28:18
लेकिन कैमरे के फ्रेम में आके उस काम को
1:28:20
गड़बड़ कर दे रहे हैं। ठीक है गुरु अब
1:28:22
मेरे को कहीं का गुस्सा कहीं निकालना था।
1:28:24
सॉरी [हंसी]
1:28:26
नहीं कोई गुस्सा नहीं है। जी तो प्रोफेसर
1:28:28
ने सवाल पूछे आप उनके जवाब दें। और थोड़ा
1:28:31
ये सब लोग थोड़ा ख्याल रखें। भाई सवाल
1:28:33
संक्षिप्त रखें। आपने दो सवाल किए। सबसे
1:28:37
पहला ये कहा कि हमारे पास ये कांसेप्ट है
1:28:39
कि ये यूनिवर्स खुद नेसेसरी बीइंग है।
1:28:42
क्रिएशन इटसेल्फ इज द क्रिएटर।
1:28:44
हाउ इररेशनल इज दिस? कि मैं एक्सिस्ट
1:28:48
करूंगा बाद में लेकिन अभी एक्सिस्ट कर भी
1:28:49
रहा हूं। यानी एक ही टाइम में एक्सिस्ट भी
1:28:51
कर रहे हैं, नहीं भी कर रहे हैं। दिस इज
1:28:52
नॉट ट्रू। दूसरी चीज आपने कहा के अगर
1:28:56
इजराइल में सॉरी माफ कीजिएगा इजराइल डजंट
1:28:59
एक्सिस्ट। ऑक्युपाइड पैलेस्टाइन में अगर
1:29:06
अगर ऑक्युपाइड पैलेस्टाइन में बच्चों को
1:29:09
मारा जा रहा है फ्री विल की वजह से और गॉड
1:29:11
नहीं रोक रहा ये कंट्राडिक्शन है ये बताइए
1:29:14
कि एक एग्जाम में एक बच्चा गलत आंसर लिख
1:29:16
रहा है सुनिए एग्जामिनर चाहे तो रोक रोक
1:29:19
सकता है| क्यों नहीं रोक रहा है?
1:29:21
ये कंट्राडिक्शन है या कंट्राडिक्शन नहीं
1:29:23
है?
1:29:25
सर माइक नहीं सर ये आपस में [हंसी]
1:29:29
ये क्या आपका सवाल माइक माइक माइक माइक
1:29:32
दीजिए
1:29:33
फ्री विल दिया गया है टेस्ट के लिए
1:29:35
अकाउंटेबिलिटी के लिए अगर फ्री विल नहीं
1:29:37
होता तो आप कहते हमें रोबोट बना दिया गया
1:29:39
नॉट रिप्रेजेंट माय पोजीशन आपकी जो भी
1:29:41
पोजीशन मैं अपनी फ्री विल के नाते अपने
1:29:45
ह्यूमन विज़डम के नाते गाजा में हो रही
1:29:47
अत्याचार का विरोध करता हूं
1:29:48
बिल्कुल करना चाहिए
1:29:49
आपके हिसाब से मैं गॉड की विज़डम का विरोध
1:29:50
कर रहा हूं
1:29:51
बिल्कुल नहीं
1:29:51
समाज हो रहा है गॉड
1:29:52
बिल्कुल भी नहीं बिल्कुल भी नहीं। उसका
1:29:55
वहां पर गाजा में कत्ल होना यह इंसानों के
1:29:58
गलत इस्तेमाल का नतीजा है। फ्री विल के
1:30:01
इस्तेमाल का नतीजा है। गॉड इसको गॉड इसका
1:30:03
हुक्म नहीं देता। उससे रोकता है। यही तो
1:30:05
मसला है ना आपके लिए कांसेप्ट क्लियर है।
1:30:07
नहीं नहीं भाई आपने तो बताया था इंजेक्शन
1:30:09
लगाने से बच्चे को तकलीफ होती है। ये
1:30:11
इंजेक्शन लगा
1:30:12
सर आप ऐसे रेटोरिक स्टेटमेंट दे तब तो कोई
1:30:14
मसला नहीं समझते रहेंगे। दिस इज अ रेटोरिक
1:30:16
स्टेटमेंट। दिस इज नॉट अ लॉजिकल आर्गुमेंट
1:30:18
सर। आई एम सॉरी। आई एम सॉरी। सर आखरी 30
1:30:20
मिनट बड़े मुश्किल होने वाले हैं। जी
1:30:22
मुफ्ती साहब आगे बैठे हैं। इनको माइक
1:30:24
दीजिए।
1:30:25
हां तरुण माइक आप अपने पास रखिए। आपको
1:30:27
कैमरे का फ्रेम पता है।
1:30:28
जी
1:30:30
सबसे पहले दोनों को मुबारकबाद।
1:30:31
एक सर अपना आप नाम बता दें। आप अमेरिका
1:30:35
में शिकागो में रहते हैं। इतना मुझे याद
1:30:36
है।
1:30:37
बताएं आपको। यासिर नदीम अलवाजदी मेरा नाम
1:30:39
है। जावेद सर आपसे क्वेश्चन है इनफिनिटी
1:30:42
इंग्रेस के ताल्लुक से। एक हाइपोथेटिकल
1:30:43
सिनेरियो है। मसल अगर आप
1:30:45
सर माइक थोड़ा सा प्लीज क्लोज। जी
1:30:47
अगर आप शायर इसलिए हैं कि आपके कोई उस्ताद
1:30:50
शायर थे और वो इसलिए शायर थे कि उनके कोई
1:30:52
उस्ताद शायर थे और इसी तरीके से हम माज़
1:30:55
में पीछे चलते चलते चले जाए और कहीं ना
1:30:58
रुके तो माफ़ कीजिएगा आप कभी शायर नहीं हो
1:31:00
सकते लेकिन आप शायर हैं। आपका शायर
1:31:02
एक्सिस्ट करता है। इसका मतलब ये है कि आप
1:31:04
कहीं ना कहीं रुके हैं। तो मेरा सवाल यह
1:31:06
है कि क्या आप इनफिनिट रिग्रेस ऑफ कॉजेस
1:31:09
को लॉजिकल फैलेसी मानते हैं या नहीं
1:31:13
मानते? हां या ना?
1:31:17
मैं इन्हें लॉजिकल फैलेसी नहीं मानता हूं।
1:31:20
लेकिन मैं मेरा प्रॉब्लम यह है कि जब मैं
1:31:23
नहीं मानता हूं तो आई विल कंटिन्यू विद
1:31:25
दिस लॉजिक जो फैलेसी नहीं हो। आप एक जगह
1:31:28
रुक जाते हैं जाके। आप कहते हैं ये गेंद
1:31:31
कैसे बनी? ये जजीरा कैसे बना? ये समंदर
1:31:33
कैसे बना? ये जमीन कैसे बनी? और अचानक गॉड
1:31:36
पे जाके आपको ब्रेक लग जाता है। एक बार आप
1:31:39
सवाल नहीं करते कि भाई इनको बनाने वाला तो
1:31:42
इनसे भी कॉम्प्लिकेटेड होगा। वो कैसे बना
1:31:45
उसके बारे में आपने इत्मीनान कर लिया वो
1:31:47
हमेशा से तो अगर आप उसे हमेशा से मानते
1:31:50
हैं तो फिर ये मान लीजिए कि कायनात हमेशा
1:31:52
से क्या तकलीफ है
1:31:53
फिर हम वजूद में नहीं आते
1:31:54
जी
1:31:55
हम मौजूद नहीं
1:31:56
अच्छा सर सर सर
1:31:57
क्यों नहीं होते मैं बताऊंगा प्लीज
1:31:59
जैसे मैंने मिसाल दी आपके शेर
1:32:01
आपका शेर कभी वजूद में ना आता अगर शायद
1:32:03
इसी तरह चलता रहे हमेशा
1:32:05
माइक माइक मेरे ख्याल से इनफिनिट रिग्रेस
1:32:08
का कांसेप्ट क्लियर नहीं हो पाया ऐसा रहने
1:32:09
दे लेट्स गोप
1:32:10
ठीक है
1:32:10
हां थोड़ा सा मॉडरेटर का भी ख्याल रखें।
1:32:14
नहीं नहीं आपने तो रखा है। आपने रखा है।
1:32:16
यहां पे गौहर रजा साहब है। वो भी एक सवाल
1:32:18
पूछना चाहते हैं।
1:32:21
माइक या नहीं तो ऑन करिए।
1:32:26
पहले तो ये कह दूं के
1:32:29
मैं उन बच्चों से शर्मिंदा हूं जिनको गजा
1:32:33
में कत्ल किया गया।
1:32:35
[प्रशंसा]
1:32:36
क्योंकि हमारे होते हुए कत्ल किया गया।
1:32:39
लेकिन उससे ज्यादा शर्मिंदगीगी इस बात से
1:32:41
हुई कि मुझे लगा कि मुफ्ती साहब उसको
1:32:44
जस्टिफाई कर रहे हैं।
1:32:47
बिल्कुल भी नहीं आप आप गलत मुझे लगा मैं
1:32:49
गलत हो सकता हूं। गलत मैं सवाल पूछ रहा
1:32:51
हूं। मैं सवाल
1:32:54
मैं जावेद भाई से डिसए्री करता हूं।
1:32:56
एक सेकंड आस्किंग
1:32:57
देखिए अगर देखिए ऐसा एक सेकंड
1:33:00
आप सर वेट वेट अरे आप मैं कुछ मेरे पहले
1:33:02
मुझे अपनी बात कह लेने दीजिए। अगर ऑडियंस
1:33:05
तय करेगी तो फिर मॉडरेटर का मतलब नहीं।
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मेरा आप सबसे यह कहना है ये बहस दो लोगों
1:33:12
के बीच में है। एक तरफ मुफ्ती साहब, एक
1:33:14
तरफ जावेद साहब। पिछले डेढ़ घंटे से ये
1:33:17
लोग अपने-अपने तर्क रख रहे हैं। आपकी इनसे
1:33:20
इत्तेफाकी हो सकती है ना इत्तेफाकी हो
1:33:22
सकती है। मेरे उस्ताद मुझे सिखा गए हैं कि
1:33:25
मुखा मुखम में असहमति की गुंजाइश बची रहनी
1:33:29
चाहिए। अगर मैं आपकी बहुत इज्जत करता हूं
1:33:33
गौर साहब। आपने जो कमाल की किताबें लिखी
1:33:35
हैं साइंटिफिक टरामेंट लेकिन मेरी ये
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गुजारिश है आप सबसे कि यदि आप इन लोगों ने
1:33:41
जो बोला उनप टिप्पणियां करेंगे तो ना वक्त
1:33:43
की पाबंदी रहेगी ना वनशा आप सवाल पूछ लें
1:33:46
उस सवाल में जो बात आ जाए वो आ जाए मैं
1:33:49
जावेद साहब से डिसए्री करता हूं इसलिए
1:33:51
जावेद साहब से सवाल पूछ रहा हूं आपका सवाल
1:33:54
जावेद अख्तर साहब से
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और सवाल ये है मेरा कि जावेद साहब ने कई
1:33:57
बार लॉजिक का इस्तेमाल किया के साइंस में
1:34:01
लॉजिक है और रिलजन में लॉजिक लॉजिक नहीं
1:34:03
है। मेरा ख्याल ये है कि रिलजन में भी
1:34:06
लॉजिक है। लेकिन उस लॉजिक की बेसिस ये है
1:34:10
कि आप रुक जाते हैं जिसका जिक्र जावेद
1:34:12
साहब ने बार-बार किया। यानी खुदा के तसवुर
1:34:15
पे आते हुए, गॉड के तसवुर पे आते हुए रुक
1:34:17
जाते हैं। और इसके इसमें सवाल पूछना मतलब
1:34:22
फॉरबिटन होता है। सवाल ये है कि क्या
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जावेद साहब इससे एग्री करते हैं कि साइंस
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की लॉजिक अलग है और रिलीजन की लॉजिक अलग
1:34:32
है।
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बताइए सर।
1:34:36
देखिए तीन चीजें हैं। साइंस है, एक है
1:34:40
मंतिक है, इ्तदाल है। और एक जो है कुछ भी
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नहीं है। फथ है, अकीदा है। मैं अकीदे के
1:34:48
लॉजिक का कायल नहीं हूं। मुझे आप इ्तदाल
1:34:52
से, लॉजिक से, रीज़ से समझाइए। मैं मानने
1:34:55
को तैयार हूं। मेरा क्या नुकसान होगा?
1:34:58
लेकिन ये कि अकीदे पे मैं नहीं जा सकता
1:35:00
हूं। अकीदे का मतलब है कि तुम ये मान लो
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सवाल को ये नहीं आप सारी बातें करके बड़ी
1:35:07
साइंटिफिक बातें करके एक जगह जाके खुदा के
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हुजूद पे रुक जाते हैं सरेंडर कर देते हैं
1:35:11
मैं सरेंडर करने को तैयार हूं दैट्स ऑल
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जी ये आगे सर बैठे हुए हैं इनको माइक
1:35:18
दीजिए
1:35:18
भाई वो वो आप पूछना चाह रहे थे ना
1:35:20
हां नहीं मैं ये
1:35:22
जी आपका नाम
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आसिम इफ्तखार
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आसिम जी पूछिए
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सर जावेद सर से सवाल है कि आपने अपनी
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क्लोजिंग
1:35:29
माइक थोड़ा करीब आपने क्लोजिंग स्टेटमेंट
1:35:31
में ये बात कही थी के मजहब का जो फ्यूचर
1:35:35
है वो ज्यादा दिन नहीं जाने वाला है।
1:35:38
लेकिन मैं देख पा रहा हूं कि जो ऑक्सफोर्ड
1:35:40
यूनिवर्सिटी की एक स्टडी है 2011 में हुई
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है जिसके 50 एकेडमिशंस ने इसको अंजाम दिया
1:35:45
था। उसमें वो ये कहते हैं कि जो फथ इन गॉड
1:35:50
है वो इनबिल्ट है ह्यूमन नेचर के अंदर
1:35:53
जिसको हम कहते हैं फितरत के अंदर शामिल है
1:35:55
वो और वो ये कहते हैं कि अगर कोई ये समझता
1:35:58
है के मजहब को वो खत्म कर देगा तो ये उसकी
1:36:02
गलतफहमी है तो आप इसके बारे में इस स्टडीज
1:36:05
के बारे में क्या कहते हैं?
1:36:06
ठीक है। मैं उनसे एग्री नहीं करता हूं। वो
1:36:09
कौन से प्रोफेसर होंगे ऐसा
1:36:10
उनके पास डाटा है। इन्होंने डाटा के
1:36:12
होगा। डाटा क्या हो सकता है? फ्यूचर का
1:36:14
डाटा तो नहीं हो सकता ना उनके पास
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प्रेजेंट का डाटा हो सकता है। डाटा आपने
1:36:19
सुना 100 साल पहले का बाद का डाटा मैंने
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तो नहीं सुना अब तक तो आज उनकी ये राय है
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और होगी राय है। ठीक है? दुनिया में
1:36:27
तरह-तरह की राय है लोग। लेकिन मैं समझता
1:36:30
हूं कि वक्त के साथ इंसान ज्यादा से
1:36:32
ज्यादा रीज़नेबल और लॉजिकल होता जा रहा है।
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आज आप देखिए वेस्टर्न यूरोप में क्या
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परसेंटेज है नॉन बिलीवर्स की। बहुत हाई।
1:36:42
वहां चर्च खाली पड़े होते हैं। तो
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अल्टीमेटली
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तो इंसान कोई ऐसी बात बहुत अरसे तक नहीं
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मान सकेगा चाहे गलत या सही जो उसे उसके
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दिमाग को उसके ज़हन को उसके लॉजिक को अपील
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ना करे। वो कह रहे हैं तो ऑक्सफोर्ड के
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होंगे तो केवरेज के होंगे तो मुझे क्या
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लेना देना? उनका डाटा मुस्तकबिल का नहीं
1:37:04
हो सकता है।
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जी दीपक हां पूछिए। मैं आऊंगा अभी पीछे की
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साइड भी आऊंगा। माइक व भेजूंगा दो-ती साल
1:37:11
के लिए। जी।
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जावेद साहब आपसे सवाल है। नमस्ते।
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अरे भाई
1:37:14
सर अगर आप ही लोगों को तय करना है तो फिर
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सब फिर 200 लोग तय कर लेंगे। नहीं सर
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प्लीज डोंट डू दिस सर। सर एवरीबडी हैज़ अ
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राइट सर। बट वी कैन ओनली टेक सिलेक्टेड
1:37:24
क्वेश्चन।
1:37:25
सर ये यंग लोग भी हैं तो इनकी ये आप उतने
1:37:29
यंग भाई आप यंग है कि नहीं है?
1:37:31
वो कह रहे हैं वो भी यंग है साहब। आप उनकी
1:37:33
नौजवानी पर दावा उनको ही करने दें।
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हां। मुफ्ती साहब आप यंग हां पूछिए।
1:37:40
अरे भैया मेरा सवाल यह है
1:37:41
इनसे भी तो पूछो जी
1:37:43
बस आपसे एक सवाल [हंसी] है जैसे थीस्टो के
1:37:46
पास अपने जो ईश्वर को मानते हैं उनके पास
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अपने सोशल गेट टुगेदर्स हैं पांच रोजा
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क्रिसमस आने वाला है होली है दिवाली है ईद
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है एथिस्ट क्या ऑफर कर रहे हैं मतलब मैं
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इनकी दुकान से दूर में आना चाहता हूं उस
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तरफ पर मैं अट्रैक्ट नहीं हो पा रहा हूं
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मैं सोशल गेट टुगेदर्स क्या है आपके पास
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वो ये कह रहे हैं कि जो धार्मिक लोग हैं
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अलग-अलग धर्म के लोग उनके उत्सव त्यौहार
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बहुत है
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अब आपको मैं एक सुनाता हूं यहां
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हिस्टोरियन भी बैठे हैं। मृदुला जी आप
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बताइएगा सही है क्या? ये एक कॉन्सेंटाइन
1:38:16
एक ग्रीक रोमन भाषा था जो क्रिश्चियनिटी
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आने के 400 साल बाद उसने डिसाइड किया कि
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मैं क्रिश्चियन हो जाऊंगा। मेरी पूरी
1:38:24
स्टेट कैंसिल हो जाएगी। उस जमाने में ऐसे
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ही होता था राजा जो धर्म इख्तियार करता था
1:38:29
वो जनता भी कर लेती थी।
1:38:32
इसलिए कि वो हो गया था बैंककरप्ट और उसे
1:38:34
जो मेडिटेरियन पोस्ट के रिच क्रिश्चियन वो
1:38:38
थे मर्चेंट उससे पैसा चाहिए था। तो उसने
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कहा यार क्रिश्चियन हो जाओ। तो उसने अपने
1:38:44
वजीर से कहा कि भाई ये हिस्ट्री है के अब
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हम लोग क्रिश्चियन हो जाते हैं। कहते सर
1:38:49
हो जाएंगे कोई प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन एक
1:38:52
प्रॉब्लम ये है कि 17 दिसंबर से 25 दिसंबर
1:38:57
तक जो पिगम फेस्टिवल होता जो पिगम स्टेबल
1:39:00
हो जो फेस्टिवल होता है वो बंद हो जाएगा।
1:39:03
इसलिए कि हम क्रिश्चियन हो गए तो होगा
1:39:04
नहीं। तो वो बच्चों को बहुत बुरा लगेगा।
1:39:07
पब्लिक को बहुत डे बहुत एंजॉय करते हैं।
1:39:10
खास तौर से 25 को मेन डे उसने कहा हां ये
1:39:12
तो सही कह रहे हो ये जीसस क्राइस्ट की
1:39:14
पैदाइश कब थी? कह साहब वो अप्रैल में थी
1:39:17
नहीं कट करो वो 25 दिसंबर को [हंसी]
1:39:20
ये हकीकत है।
1:39:23
और 400 साल बाद क्रिश्चियनिटी के अप्रैल
1:39:26
से दिसंबर ले आए और इसलिए कि यहां बेगम
1:39:29
फेस्टिवल होता था। अब मनाते हैं आप आराम
1:39:31
से। ये जो सारे फेस्टिवल है ये रिलीजन थे।
1:39:35
हर एक को एक एंटरटेनमेंट डिपार्टमेंट
1:39:37
चाहिए होता है अपनी कंपनी चलाने के लिए।
1:39:40
तो ये रिलीजंस ने ये सेुलर त्यहार थे
1:39:43
जिन्हें रिलीजंस ने ले लिया है। ये मौसम
1:39:46
के थे, फसलों के थे, किसानों के थे। उसको
1:39:49
आपने लेके रिलीजियस रंग दे दिया। ये ये
1:39:52
कोई रिवीजन से थोड़ी आए आप आप अच्छा हमें
1:39:56
देखिए हम तो मुद है हम ईद मनाते हैं हम
1:40:00
दिवाली मनाते हैं हम होली मनाते हैं हम
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क्रिसमस मनाते हैं मुंबई की फिल्म
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इंडस्ट्री की सबसे बड़ी होली हमारे घर में
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सबसे बड़ी ईद हमारे घर में वो हमारी सोशल
1:40:11
वो है हमारे यहां हेरिटेज है ऐसा थोड़ी है
1:40:14
कि वी विल थ्रो द बेबी अलोंग वि द वाटर ये
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तो अच्छी चीज है इन्हें रखो तो बेकार है
1:40:20
फेंक दो
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जी हां हेलो जी मेरा सवाल नादरी जी से है।
1:40:26
जैसा कि आपने बोला कि गॉड टाइम के भी परे
1:40:30
हैं और गॉड इतनी कॉम्प्लेक्स चीज है कि
1:40:32
उसे ह्यूमन माइंड समझ नहीं सकता और गॉड ने
1:40:36
अर्थ पे फ्री वेल भी दे दी है। तो आप अपना
1:40:38
वक्त जाया क्यों कर रहे हैं गॉड के बारे
1:40:40
में बात करके। अपन को तो बात करनी चाहिए
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कि सोसाइटी को बेहतर कैसे करें?
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मैं गॉड वही बताता है सोसाइटी को कैसे
1:40:46
बेहतर करें? अभी मैं आपका जवाब देता हूं।
1:40:48
आपने कहा कि टाइम पे वो एक्सिस्ट नहीं
1:40:52
करता। सो
1:40:54
नहीं मेरा सवाल ये है कि जैसा आपने बोला
1:40:58
कि गॉड बहुत ही कॉम्प्लेक्स चीज है।
1:41:00
मैंने कहा ही नहीं कि कॉम्प्लेक्स है ये
1:41:01
तो आपके अल्फाज़ हैं। कॉम्प्लेक्स का लव्स
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गॉड के लिए सूटेबल नहीं है। क्यों?
1:41:06
क्योंकि कॉम्प्लेक्स वो चीजें होती है जो
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ऑब्जेक्ट हो। गॉड इज नॉट एन ऑब्जेक्ट
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जिसको आप इंस्ट्रूमेंट के जरिए लैबोरेटरी
1:41:12
में जाकर टेस्ट करें। ओह इट्स वैरी
1:41:13
कॉम्प्लेक्स। वो कोई कार का इंजन नहीं है।
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वो फिलोसफिकली
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नेसेसरी बीइंग ऐसी बीइंग है जो सिंपल
1:41:21
बीइंग है। हां आप उसको मुकम्मल तौर पे
1:41:24
उसकी तमाम हिकमतों को जान ले और हर चीज को
1:41:26
जान ले ये पॉसिबल नहीं है। क्योंकि वो ऑल
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वाइज है आप ऑल वाइज नहीं है और वो खुदा है
1:41:31
वो आपको सारी चीजें बता दे ये जरूरी नहीं
1:41:33
है।
1:41:34
मेरा सवाल ये नहीं था। मेरा सवाल यह था कि
1:41:36
जब गॉड इतना परे है इस दुनिया से कि उसने
1:41:40
अर्थ पे फ्री विल भी दी है हम सब ह्यूमंस
1:41:42
की फ्री विल है और जो सोसाइटी में हो रहा
1:41:45
है वो अपन लोग डिसाइड करेंगे तो अपन लोग
1:41:48
डिसाइड नहीं करेंगे ना अपन लोग डिसाइड
1:41:50
नहीं करेंगे गॉड जो है गॉड ने वो उसकी जात
1:41:54
उसकी एकिस्टेंस टाइम एंड स्पेस से परे है
1:41:57
लेकिन वो हमारा टेस्ट ले रहा है और उसी
1:41:58
गॉड ने हमें बताया कि तुम्हें क्या करना
1:42:01
है क्या नहीं करना है तो जाहिर है उस गॉड
1:42:02
की बात सुनेंगे ना हम
1:42:03
जी
1:42:04
वो पीछे पीछे एक चश्मा लगा है जो मैम खड़ी
1:42:07
है उनको दीजिए। हां आप आप
1:42:11
जी जी बिलकुल आएंगे देखिए मैं कोशिश कर
1:42:14
रहा हूं सब तरफ जाने की हां उनको दीजिए
1:42:16
माइक जी
1:42:20
हेलो सर
1:42:21
मैं ओमनी प्रेजेंट नहीं हूं टाइम पाबंद
1:42:23
हूं और जहां तक कोशिश कर सकता हूं करूंगा
1:42:26
जी अपना नाम बताइए
1:42:27
मेरा नाम उर्सला है मैं दिल्ली
1:42:29
यूनिवर्सिटी की एक स्टूडेंट हूं और मैं
1:42:30
स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया से हूं अ मेरा
1:42:34
सवाल मुफ्ती जी से है कि इस हॉल के इस
1:42:37
कमरे में बैठ के हम हम लोग रेप की
1:42:38
मोरालिटी के बारे में फिलॉसफिकली बात तो
1:42:41
कर सकते हैं। बट असलियत ये है कि रोजमर्रा
1:42:44
की जिंदगी में औरतें रेप के थ्रू गुजरती
1:42:46
हैं। और हम लोग सिर्फ नंबर्स पे इस तरह
1:42:49
नहीं देख सकते क्योंकि कितनी औरतें हैं इन
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कंट्रीज में जहां पे आप बता रहे हैं कि
1:42:54
केसेस कम है जिनका एक्सेस है कि वो जाके
1:42:56
केस फाइल कर सके। कितनी औरतें हैं जो
1:42:59
वर्किंग जिनको काम करने की आजादी है उन
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कंट्रीज में। यूरोप में ये आजादी आ गई।
1:43:05
यूरोप में ये रूल्स आ गए। तो हम आज उसके
1:43:07
बारे में बात कर पा रहे हैं।
1:43:08
जी जाओ।
1:43:10
आपने ये कहा कि कमरे में बंद होकर हम लोग
1:43:14
इस पर फिलॉसफिकली बात कर सकते हैं। लेकिन
1:43:16
हकीकत में क्या हो रहा है वो ग्राउंड लेवल
1:43:19
पे क्या हो रहा है? जो बहुत गलत हो रहा है
1:43:22
और वो सफर कर रही हैं। आई एग्री? बहुत गलत
1:43:24
हो रहा है। और जो गलत हो रहा है उसको हमें
1:43:26
रोकना है। और क्यों रोकना है? वो गलत
1:43:28
क्यों है? हमारे पास इसका ऑब्जेक्टिव
1:43:30
फाउंडेशन है। इनके पास उसका ऑब्जेक्टिव
1:43:33
फाउंडेशन नहीं है। मैं ये कहना चाह रहा
1:43:35
हूं कि जहां पे भी जुल्म हो रहा है, जहां
1:43:37
पे भी औरत पे जुल्म हो रहा है या उसकी
1:43:39
इज्जत लूटी जा रही है या उसे तकलीफ
1:43:41
पहुंचाई जा रही है। और सिर्फ औरत नहीं
1:43:42
किसी इंसान के ऊपर भी जुल्म हो रहा है तो
1:43:45
उसके खिलाफ खड़ा होना ये मोरालिटी हमारे
1:43:48
पास गॉड के पास से आई है। वरना जावेद साहब
1:43:50
तो कह रहे हैं कि जो है मेजॉरिटी डिसाइड
1:43:52
करेगी तो मेजॉरिटी तो कभी भी बदल सकती है।
1:43:57
क्या आप ये थोड़ी सी आपको गलतफहमी है। मैं
1:44:01
अगर मेरे जुमले से ये मजला निकला या मैंने
1:44:04
कहा तो ये जुमला मैं वापस लेता हूं। ये
1:44:06
मेरा मतलब ही नहीं था कि मेजरिटी डिसाइड
1:44:08
करेगा। मेजरिटी डिसाइड करे तो दुनिया में
1:44:11
बड़ी
1:44:12
वैसे आपने कहा था ये जुमला।
1:44:13
मैं मान रहा हूं।
1:44:14
बाद में रीकैप कर लेंगे।
1:44:15
अरे एक सेकंड मैं अपनी एक्सप्लेनेशन देता
1:44:18
हूं।
1:44:18
मुनासिब बात ये है कि हम सब के सब दिल में
1:44:21
जानते हैं कि क्या अच्छा है, क्या बुरा
1:44:23
है। हमें पता है अच्छी तरह से। जो लोग
1:44:26
बुरे काम करते हैं उन्हें भी मालूम है
1:44:27
अच्छा अच्छा
1:44:29
यही तो सवाल था हजरत कि फिर ये मोरालिटी
1:44:31
आई कहां से
1:44:32
क्रॉस एग्जामिनेशन हां जी हां जी
1:44:33
मोरालिटी साथ रहने की डिजायर से आई
1:44:36
यानी साथ रहकर जो कुछ कह दे जो कुछ कर दे
1:44:38
वो हो जाएगा
1:44:39
नहीं
1:44:40
तो
1:44:40
आप कायदे से रहित सकते हैं जब तक लोगों
1:44:43
में मोरालिटी हो वरना केस हो जाएगा
1:44:45
ये आपको कैसे पता
1:44:47
जी हमने देखा ना जहां मोरालिटी का कॉस हो
1:44:49
गया हम देखते हैं
1:44:51
कहां पे देखते हैं
1:44:51
भाई दुनिया में आप क्यों
1:44:55
अगर गलत हो रहा है इसको आप सर आपोलॉजी की
1:45:00
बात कर रहे हैं मैं ऑटोलॉजी की बात कर रहा
1:45:02
हूं मैं इस दोनों लोगों को चैट करूंगा
1:45:05
वहां पे क्रॉस एग्जामिनेशन कर लीजिएगा अभी
1:45:07
ऑडियंस का हक मार रहे हैं आप लोग भाई जस्ट
1:45:09
लोग हैं आप लोग और भाई ये
1:45:12
हां उधर उधर आएंगे उधर जी सर आएंगे आएंगे
1:45:15
सर सर मेरा नाम लख उर रहमान है और मैं
1:45:17
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का स्टूडेंट
1:45:19
हूं और जहां तक मुझे पता है कि सर यू आर
1:45:21
आल्सो प्रोडक्ट ऑफ अलीगढ़ मुस्लिम
1:45:23
मैं भी उसी चमन का बुलबुल हूं सर तो बड़ी
1:45:26
खुशी हुई मुझे जान के कि मैं आपसे
1:45:28
मिलूंगा। सवाल
1:45:28
सर मेरा सवाल ये है कि सर सैयद अली रहमा
1:45:31
का नजरिया ये था के खुदा के वजूद को अकल
1:45:35
के दायरे में रह के तलाश करना ना के पूरी
1:45:39
तौर से उसका इंकार कर देना। सर हाउ विल यू
1:45:42
डिफाइन इट? नहीं नहीं तो यह तो आप इन्हें
1:45:45
बताइए सवाल है कि खुदा का वजूद साबित कर
1:45:48
रहे हैं। तो सर आपने इनकार रखा है। इस वजह
1:45:51
से मेरा क्वेश्चन
1:45:52
उन्होंने यही सर एक सेकंड सर सैयद ने यही
1:45:55
कहा है ना कि अकल से आप खुदा के वजूद को
1:45:58
साबित नहीं कर सकते। यही कहा ना भाई
1:46:01
वो उन्होंने कहा है कर सकते हैं और वो कर
1:46:03
दिया गया आज।
1:46:04
वो फ़
1:46:06
तलाश करना या साबित करना अक्ल से ताल्लुक
1:46:09
अक्ल से नहीं। अरे सवाल तो सुन लीजिए। जी
1:46:12
अक्ल से नहीं हो सकता। यही कहा ना आपने?
1:46:15
अक्ल से हो सकता है। अरे वो यही कह रहे
1:46:18
हैं भाई आप बता रहे हो सकता है। वो तो कुछ
1:46:20
और
1:46:22
आप अगर सर देखो नौजवान
1:46:24
फ़ इतनी कमाल की यूनिवर्सिटी है
1:46:27
भाई दे दो जरा एक मिनट। अरे भाई मेरी बात
1:46:30
सुनो। माइक पे बोलो ताकि जो लाखों लोग देख
1:46:33
रहे हैं।
1:46:33
माइक दे दो ना।
1:46:34
अरे देंगे ना माइक तुम ठहरो तो। हां सर
1:46:38
मेरा सवाल यह था कि सर सैयद अल रहमा का एक
1:46:41
नजरिया था अपना के खुदा का जो वजूद है
1:46:45
उसको अकल के दायरे में रह के तलाश करना है
1:46:48
ना कि पूरे तौर से इंकार कर देना है ये ये
1:46:51
उनका कांसेप्ट था लेकिन मेरा सवाल ये है
1:46:53
कि आप इसको कैसे डिफाइन करते हैं
1:46:55
एक्सप्लेन कैसे करेंगे मैं आपसे जानना
1:46:57
चाहता हूंकि यू आर द प्रोडक्ट ऑफ अलीगढ़
1:46:59
मुस्लिम यूनिवर्सिटी
1:47:00
मुझे अली मुझे अकल के दायरे में मैंने
1:47:04
बहुत तलाश की मुझे मिला नहीं
1:47:06
[हंसी]
1:47:08
हां ये इधर उधर वो चश्मा लगाए हां उनको दे
1:47:11
दीजिए
1:47:14
जी जी फटाफट पूछिए बस पांच मिनट है पांच
1:47:16
मिनट में खत्म हो रहा है हां
1:47:17
अस्सलाम वालेकुम मुफ्ती साहब एंड मेरा
1:47:18
सवाल मेरा सवाल जावेद अख्तर साहब से
1:47:21
क्या नाम है आपका
1:47:22
अरे भैया मुझे पूछ रहे हो यार
1:47:24
फैज फैज फैज
1:47:25
फैज पूछिए फैज साहब
1:47:26
तो मेरा सवाल ये है कि अभी जो एथियस्ट है
1:47:30
वो प्रॉब्लम ऑफ इवल आर्गुमेंट यूज कर रहे
1:47:32
हैं अगेंस्ट मुस्लिम्स राइट कि इस दुनिया
1:47:34
में इतना सारा ईवल है और अगेंस्ट मुस्लिम
1:47:36
तो यहां
1:47:37
अगेंस्ट थिएस्ट अगेंस्ट थिएस्ट हां थोड़ा
1:47:39
सा करेक्ट कर लीजिए भाई पूरी मशक्कत ही
1:47:41
इसी बात की थी कि किसी एक मजहब पे बात ना
1:47:43
टिके।
1:47:44
जी तो बेसिकली ये आर्गुमेंट ऐसा है कि इस
1:47:47
दुनिया में इतना ज्यादा ईवल एक्सिस्ट करता
1:47:48
है और अगर एक ऑल गुड गॉड है तो वो रोकता
1:47:50
क्यों नहीं है? लेकिन इस सवाल में एक हिडन
1:47:52
असंप्शन ये है कि इस दुनिया में ईवल
1:47:54
एक्सिस्ट करता है। अब एथियस कि कैसे
1:47:56
ऑनटोलॉजिकली प्रूव कर सकते हैं कि इस
1:47:58
दुनिया में ईवल एक्सिस्ट करता है। मैं
1:47:59
आपको बताता हूं थोड़ा सा समझा।
1:48:00
नहीं नहीं सर [हंसी]
1:48:02
इनको सुनिए। नहीं नहीं प्लीज डोंट डू।
1:48:04
नहीं।
1:48:04
आई वांट टू एक्सप्लेन ऑनटोलॉजी।
1:48:06
नहीं नहीं हम समझ गए, सर। इनको आप जवाब
1:48:07
देने दीजिए।
1:48:08
अच्छा सवाल पूछ रहा हूं मैं।
1:48:09
अभी तक क्या था?
1:48:10
वो मैं थोड़ा सा ऐड ऑन कर लेता हूं।
1:48:12
तुम गुरु तो हम जब इसका राउंड 13 करेंगे
1:48:15
ना, तब तुमको स्टेज पे बिठाएंगे।
1:48:17
जी, जी। तो, हां, जल्दी से। तो, तो देखिए,
1:48:20
एथिज, एथिज्म के हिसाब से सब कुछ रैंडमली
1:48:22
बन गया है। सब कुछ एटम्स और मॉलिक्यूल्स
1:48:24
है। एक पत्थर में और मुझ में सिर्फ इतना
1:48:26
फर्क है कि हम लोग एटम्स और मॉलिक्यूल्स
1:48:28
का अलग-अलग रिअरेंजमेंट है। अब एक पत्थर
1:48:29
को कोई इंसान तलवार से दो टुकड़ों में
1:48:31
काटते हैं या मुझे? अकॉर्डिंग टू एथिज्म
1:48:33
इट इज़ सेम। देयर इज नो इवल एंड गुड
1:48:34
अकॉर्डिंग टू एथिज्म।
1:48:37
जी। अच्छा फैज साहब का सवाल ये है कि
1:48:41
कोशिश भी करते तो इससे गलत सवाल नहीं कर
1:48:43
पाते।
1:48:45
एक लाइफ फॉर्म है और लाइफ फॉर्म में
1:48:48
फीलिंग्स है। मतलब लाइफ फॉर्म सुनता है,
1:48:51
देखता है, टेस्ट कर सकता है, फील कर सकता
1:48:55
है। तो उसकी जो ये जो क्वालिटी एक बबल में
1:48:59
आ गई है कि वो जानवर में भी है, इंसान में
1:49:01
भी है। तो जाहिर है कि उसे कोई तकलीफ
1:49:04
पहुंचेगी तोकि उसके पास वो सेंसिटिविटी है
1:49:06
तो करेगा। पत्थर में वह सेंसिटिविटी नहीं
1:49:10
है। तो यह क्या सवाल हुआ कि अगर पत्थर को
1:49:12
काटा तो पत्थर को तकलीफ नहीं होती तो आपको
1:49:14
काटे तो आपको क्यों तकलीफ होगी? बैठ जाइए।
1:49:17
जी हां अगला सवाल
1:49:19
हां पूछिए पूछिए पूछिए।
1:49:20
जी जावेद अख्तर साहब।
1:49:22
अरे भैया सब आप लोग मुफ्ती साहब को छोड़
1:49:25
रहे हैं। वो मेरे ही पीछे पड़े हैं। क्या?
1:49:28
चलो बोलो भाई।
1:49:30
यू यू आस्क हाउ गॉड कैन एक्सिस्ट व्हेन
1:49:32
चिल्ड्रन डाई एंड गाज़ा। हां यू आस्क्ड
1:49:35
हाउ गॉड कैन एकिस्ट व्हेन चिल्ड्रन डाई इन
1:49:38
काज़ा एंड यू आल्सो मेंशन द राइज़ ऑफ़ एथिज्म
1:49:41
इन यूरोप बट द सेम इवेंट्स आल्सो आर
1:49:44
लीडिंग मेनी एथिस्ट एंड नॉट बिलीवर्स टू
1:49:46
टर्न टुवर्ड्स फेथ हाउ डू यू इंटरप्रेट
1:49:49
दिस कंट्राडिक्शन वेल सफरिंग पुशेस सम अवे
1:49:52
फ्रॉम गॉड येट ब्रिंग्स अदर्स क्लोजर टू
1:49:55
बिलीफ आपको एक बात बताऊं दुनिया परफेक्ट
1:49:58
तो कहीं भी नहीं है हर जगह कुछ खामियां है
1:50:01
बेटा एक मिनट मैं आप ही को कहेंगे देखो वो
1:50:05
तो कुछ खामियां कमजोरियां खराबियां सब जगह
1:50:09
है लेकिन अगर देखोगे ईमानदारी से कि
1:50:12
दुनिया सबसे ज्यादा मुजब कहां है एक आम
1:50:15
शहरी को कहां हुकूक हासिल है वो बोल सकता
1:50:20
है अपनी मर्जी से काम कर सकता है अपनी
1:50:22
मर्जी से राय दे सकता है हुकूमत के खिलाफ
1:50:24
बोल सकता है बरसरे इख्तेदार लोगों के बारे
1:50:28
में बोल सकता है सरमायादारों के खिलाफ बोल
1:50:31
सकता है तो आपको ये स्कडी नेवियन कंट्रीज
1:50:33
में मिलेगा। वेस्टर्न यूरोप में मिलेगा।
1:50:35
मैं नहीं कह रहा वो परफेक्ट है। बिल्कुल
1:50:37
नहीं। वहां बहुत खराबियां भी है। परफेक्ट
1:50:39
तो कोई नहीं। लेकिन जिनजिन मुल्कों में
1:50:41
लैटिन अमेरिका देखो, गल्फ देखो। वहां पर
1:50:46
आपको ये जरूर है कि रेप नहीं होते होंगे।
1:50:48
रेप की जरूरत क्या है? भ उसको तो खरीद लो।
1:50:51
घर में रखो। तो सड़क पे रेप करने की क्या
1:50:53
जरूरत है? मगर सुनिए सुनिए सुनिए। मगर
1:50:57
हकीकत ये है कि वहां शख्स आजादी राय देने
1:51:01
की बोलने की नहीं है।
1:51:04
जी ये एक आखरी सवाल मुफ्ती साहब से हां
1:51:06
मैम इनको माइक दीजिए।
1:51:09
शुक्रिया। मेरा नाम मनीषा है। मैं हरियाणा
1:51:12
से आई हूं। मैं मुफ्ती साहब से एक बात
1:51:14
पूछना चाहती हूं। आप बार-बार जावेद साहब
1:51:16
को कंट्राडिक्ट तो कर रहे हैं कि आपने ये
1:51:18
कहा ये कहा। लेकिन आप भी एजम्पशनंस के
1:51:20
बेसिस पे बात कर रहे हैं। आपने खुदा के
1:51:23
होने का कौन सा प्रूफ पेश किया है? खुदा
1:51:26
की एक्सिस्टेंस का। अब मां इस सवाल को अलग
1:51:28
रहने दीजिए कौन एथस्ट है कौन नहीं है। और
1:51:30
दूसरी बात जो आपने एक छोटी सी कही थी के
1:51:33
ये फ्री विल का इस्तेमाल करता है इंसान
1:51:36
अपनी। लेकिन उस फ्री विल का इस्तेमाल में
1:51:38
मतलब खुदा ने ये दे दी सबको ये इजाजत के
1:51:42
वो कितना घिनौनापन और कितने ज्यादा खराब
1:51:45
से खराब तरीके इस्तेमाल कर सकते हैं। लोग
1:51:46
जब आप
1:51:47
आप फ्री विल को मानती है ना या कहती है कि
1:51:50
फ्री विल नहीं है।
1:51:51
है ना? मानती है ना? तो अब आपके पास इसका
1:51:55
कोई एक्सप्लेनेशन नहीं है कि अगर एक इंसान
1:51:58
उस फ्री विल का इस्तेमाल करके गलत काम कर
1:52:01
रहा है और बच के अच्छी जिंदगी गुजार के
1:52:03
निकल जा रहा है उसका कोई रिकंपेंस नहीं
1:52:05
है। हमारे वर्ल्ड व्यू में जो इंसान गलत
1:52:10
काम कर रहा है उसको भी रिकंपैेंस यानी
1:52:12
उसका बुरा बदला मिलना है और जो सही काम कर
1:52:15
रहा है उसको सही बदला मिलना है। लिहाजा जो
1:52:18
फ्री विल है वो इस तरीके से है कि एक
1:52:20
लिमिटेड टाइम तक खुदा ने मोहलत दी है। ऐसा
1:52:23
नहीं कि छूट दे दी जो करना है करते रहो
1:52:25
हमेशा। वक्त आएगा जब एग्जाम का टाइम खत्म
1:52:28
होगा तब रिजल्ट आएगा। दौरान एग्जाम
1:52:30
जबरदस्ती आपको नहीं बताया जाएगा।
1:52:32
अरे भाई एक सेकंड सवाल मुफ़्ती साहब से
1:52:34
मेरा मैम मुफ्ती साहब सेम
1:52:40
एक सेकंड रुक जाइए। आपसे आपसे
1:52:44
मैं मुफ्ती साहब एक ही सवाल करता हूं
1:52:47
के अगर जो हो रहा है फ्री विल से हो रहा
1:52:50
है और एक दिन बरोज़ कयामत इंसाफ होगा महशर
1:52:55
में वगैरह वगैरह
1:52:57
तो दुआ क्यों मांगते हैं लोग
1:52:59
दुआ मांगते हैं इसके मतलब है अभी भी उसने
1:53:02
ये डिपार्टमेंट रखा है कि मैं रोजमर्रा की
1:53:05
जिंदगी में इंटरव्यू ही कैन
1:53:08
तो तुम कैन हो तुम मुझे नौकरी दिला देते
1:53:11
हो। मेरे बेटे को ग्रीन कार्ड दिला देते
1:53:13
हो और 45,000 बच्चे मरते हैं उन्हें रोकते
1:53:16
नहीं हो।
1:53:16
नहीं। तो क्या आप ये कह रहे हैं कि इस
1:53:18
दुनिया में जालिमों को कभी पकड़ ही नहीं
1:53:20
होती है।
1:53:20
अरे जो भी पकड़ होगी वो बच्चे रोते हैं।
1:53:23
बिल्कुल देखिए मैंने अपने ओपनिंग
1:53:25
स्टेटमेंट में यही कहा था कि जनाब जावेद
1:53:27
साहब सिर्फ इमोशनल आर्गुमेंट है। दिस इज़
1:53:30
एन इमोशनल आर्गुमेंट।
1:53:31
ये छोटे इसके पीछे
1:53:34
इसके पीछे का रीज़न मैंने बताया क्या है?
1:53:36
इसके पीछे का विज़डम क्या है? मैंने बताया।
1:53:38
मंच से आप लोगों को सज्जनों इसलिए कह रहा
1:53:41
हूं ताकि थोड़ा सा आपके कॉन्शेंस पे जोर
1:53:43
रहे कि आपको आर्डर बचा के रखना है। वक्त
1:53:46
तय हुआ था। ये वक्त पूरा हुआ। आपने इतने
1:53:49
धैर्य पूर्वक सुना। मैं आप सबका बहुत-बहुत
1:53:52
शुक्रगुजार हूं। यदि इन दोनों विद्वानों
1:53:55
की इच्छा होगी। तो कभी हम इस बातचीत का
1:53:58
राउंड टू राउंड थ्री यही तो देखिए खूबी है
1:54:00
इंसान की कि बहस मुबासे में वो पड़ा रहता
1:54:02
है। आप लोगों ने बड़े धैर्य का परिचय
1:54:04
दिया। बहुत-बहुत शुक्रिया। इसी के साथ ये
1:54:06
बातचीत
1:54:06
आप लोग को मैं एक बात बता दूं। ये सारी
1:54:09
बहस हो गई। अब मुफ्ती साहब और बड़े मुफ्ती
1:54:12
साहब इन सब के साथ में खाना खाने वाला
1:54:14
हूं।
1:54:18
[संगीत]
— end of transcript —
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