[00:00] कॉन्सिट्यूशन क्लब में हो रही इस बेहद [00:03] जरूरी बहस में डिबेट में आप सभी का [00:05] बहुत-बहुत स्वागत है। मेरा नाम सौरभ [00:07] द्विवेदी है। मैं इंडिया टुडे हिंदी [00:10] मैगजीन का और ललन टॉप का संपादक हूं और आज [00:13] की इस बहस का मॉडरेटर भी। [00:16] इससे पहले कि यह बहस जिसका शीर्षक जिसका [00:19] टॉपिक है डस गॉड एकिस्ट? [00:22] यह शुरू हो दो विद्वानों के बीच जिनके नाम [00:26] हैं श्री जावेद अख्तर और श्री मुफ्ती [00:29] शमाइल नदवी जी। मैं कुछ बुनियादी चीजें आप [00:33] लोगों को बता दूं ताकि यह बहस व्यवस्थित [00:36] ढंग से चले। वैसे नहीं जैसी बहसों को [00:39] देखने के हम इन दिनों आदि हो गए हैं। पढ़ी [00:42] लिखी अकादमिक बहस। [00:44] इस बहस का प्रारूप कैसा होगा? इसका [00:47] स्ट्रक्चर कैसा होगा? पहले मैं आपको यह [00:49] बता देता हूं। [00:50] सबसे पहले [00:53] नौजवान [00:55] विद्वान मुफ्ती शमाल नदवी जी 10 मिनट अपनी [00:58] दलीलें आप लोगों के सामने रखेंगे। उसके [01:02] बाद जावेद अख्तर साहब 10 मिनट अपनी बात [01:05] रखेंगे। उसके बाद जिसको हम अंग्रेजी में [01:08] रिबटल कहते हैं। एक जवाबी दौर रहेगा कि [01:11] आपने जो कहा मैं उससे मुतमाइन हूं कि नहीं [01:13] हूं और हमने जो कहा। इसके बाद बहस का [01:16] राउंड टू शुरू होगा। दोनों विद्वानों को [01:19] फिर से 7-सा मिनट का वक्त मिलेगा और इसके [01:22] बाद रिबर्टल राउंड टू होगा 5-प मिनट का। [01:27] इसके बाद एक दूसरे से सवाल जवाब होंगे। [01:30] इसके लिए हमने लगभग 16 मिनट का वक्त तय [01:32] किया है। अब यह सवालों की प्रकृति पर [01:35] निर्भर करता है कि कितने सवाल होंगे। [01:37] इसीलिए हमने वक्त की पाबंदी रखी है और [01:40] इसके बाद आखिरी में 5-प मिनट का वक्त [01:43] दोनों विद्वानों को एक बार फिर से दिया [01:45] जाएगा अपने क्लोजिंग आर्गुमेंट के लिए और [01:48] उसके बाद जो इस बहस के लिए सबसे जरूरी चीज [01:52] है कि आप और हम और इंटरनेट पर देख रहे [01:56] लाखों करोड़ों लोग उनके सवाल जवाब होंगे। [01:58] तो आप लोग जो यहां मौजूद हैं आपके हम कुछ [02:01] सवाल लेने की कोशिश करेंगे। 30 मिनट का [02:04] वक्त हमने उसके लिए तय कर रखा है। इस तरह [02:06] से यह 2 घंटे की बहस पूरी होगी। [02:10] दो तीन बुनियादी बातें हैं जिनका हमें [02:12] ध्यान रखना है। किसी भी किस्म की नारेबाजी [02:15] में हमें शरीक नहीं होना है। यह [02:18] हल्लागुल्ला नहीं है क्योंकि पूरी दुनिया [02:20] देख रही है तो एक नजीर कायम करनी है। एक [02:22] उदाहरण लोगों के सामने रखना है कि पढ़े [02:24] लिखे लोग इत्तेफाकी और नाइत्तेफाकी रखते [02:28] हुए भी एक दूसरे से सहमति और असहमति रखते [02:30] हुए भी बात कह सकते हैं। यहां पर मेरे [02:33] जेएनयू के प्रोफेसर बैठे हैं पुरुषोत्तम [02:35] अग्रवाल जी जिन्होंने हमें क्लास में [02:36] सिखाया है कि सहमति का [02:40] साहस और असहमति का विवेक और इसका ठीक उलट [02:44] भी यह बड़ा जरूरी है। [02:47] दूसरी बात यह किसी एक धर्म के बारे में [02:51] बहस नहीं है। यह बात सबको स्पष्ट होनी [02:54] चाहिए। किसी धर्म को महान बताने या किसी [02:57] धर्म को कमतर बताने की यह बहस नहीं है। तो [03:00] यदि कोई इस उम्मीद से देख रहा है या यहां [03:03] आया है तो मैं आपको आश्वस्त करना चाहता [03:05] हूं कि आपको नाउद ही हाथ लगेगी। [03:09] इस बहस में बहुत ज्यादा धार्मिक प्रतीकों [03:12] के इस्तेमाल को लेकर भी यह दोनों लोग जो [03:14] अभी आपको गंभीर दिख रहे हैं। भले लोग हैं। [03:17] कल शाम को चाय पर मिले थे। बहुत हंसीज़ाक [03:21] भी इनके बीच हुआ था और गलवैया डालते हुए [03:23] एक तस्वीर भी हुई थी। यह इस बात का प्रमाण [03:27] है कि इंटरनेट पर जो हल्ला मचा हुआ है [03:30] उसके मुकाबले यह दोनों लोग बहुत ही अच्छे [03:34] शांत ढंग से बहस के लिए राजी हो गए हैं। [03:36] Twitter की बातें Twitter तक सीमित एलन [03:39] मस्क आजकल उसको एक्स कहते हैं [03:42] और अब इस बहस की शुरुआत मैं इन विद्वानों [03:46] का हालांकि इनको परिचय की जरूरत नहीं है [03:48] पर हो सकता है। हमें पत्रकारिता में [03:51] सिखाया जाता है कि नेवर अस्यूम विज्ञान भी [03:54] यही कहता है। मुफ्ती शमाल नदवी साहब [03:56] इस्लामिक विद्वान शिक्षाविद हैं। कोलकाता [03:58] के वाहियान फाउंडेशन के संस्थापक हैं। [04:01] लखनऊ की प्रतिष्ठित दारुल उलूम नदतुल उलमा [04:04] से ग्रेजुएशन किया है। सोशल मीडिया और [04:06] सार्वजनिक मंचों पर अध्यापन और बौद्धिक [04:08] कामों में सक्रिय हैं। और इस समय [04:10] इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी मलेशिया [04:13] से पीएचडी कर रहे हैं। अच्छी बात यह है कि [04:16] पढ़ाई के साथ-साथ ट्रेवल ब्लॉग भी बनाते [04:18] हैं। पेट्रोनस टावर के सामने का ब्लॉग [04:20] हमने देखा। [04:22] हमारे साथ जावेद अख्तर साहब हैं। जावेद [04:25] अख्तर साहब कवि हैं, शायर हैं। गद्य भी [04:29] लिखते हैं। फिल्मों के लिए संवाद लिखे [04:32] हैं, गीत लिखे हैं। इससे इत [04:37] वैज्ञानिक सोच को लेकर या अपने डिक्लेयर्ड [04:41] एथिज्म को लेकर भी मुखरित रहते हैं और [04:43] अपने तैशनालिटी की बात करते हैं। देवियों [04:46] और सज्जनों, डस गॉड एकिस्ट? इस सवाल का [04:50] जवाब सब अपने-अपने त खोजने की कोशिश कर [04:53] रहे हैं। कोई इसको गॉड डम पार्टिकल की खोज [04:56] बताता है। कोई गॉड पार्टिकल की खोज बताता [04:58] है। कोई हिक्स बोसान की खोज बताता है। कोई [05:01] यह सवाल जवाब तलाशने की कोशिश करता है कि [05:04] मास एग्जिस्टेंस में आखिर आया कैसे? हुआ [05:07] क्या था? सृष्टि के पहले, समय के पहले [05:09] क्या था? और कोई यह कहता है कि ये सारी [05:12] खोजें जिस मस्तिष्क में हो रही है, [05:14] प्रकृति के क्रम में वो कैसे विकसित हुआ? [05:16] मैं उम्मीद करता हूं कि हम आज इन बुनियादी [05:21] सवालों के कुछ जवाब हासिल करने में कामयाब [05:23] हो। मैं सबसे पहले मंच पर आमंत्रित कर रहा [05:26] हूं मुफ्ती शमाल नदवी साहब को। आइए सर। [05:29] जी [05:32] [प्रशंसा] [05:42] एक आपकी गुजारिश बोलना शुरू करें। आप लोग [05:45] प्लीज अपने फोन लाइव मोड पे या साइकिल एक [05:49] बार चेक कर ले कई बार बेहानी हो जाती है। [06:00] तमाम तारीफें उस क्रिएटर के लिए जिसने इस [06:03] यूनिवर्स को एक मकसद के तहत पैदा किया है। [06:07] रिस्पेक्टेड जनाब जावेद अख्तर साहब, [06:09] मिस्टर सौरभ द्विवेदी और रिस्पेक्टेड [06:12] ऑडियंस थैंक यू ऑल फॉर बीइंग हियर टुडे। [06:15] आज की डिबेट में क्योंकि हम बात करने वाले [06:18] हैं डस गॉड एक्सिस्ट के टॉपिक पर तो यह एक [06:22] ऐसा टॉपिक है जिसके मुतालिक कोई भी डिसीजन [06:25] लेने के लिए अलग-अलग स्टैंडर्ड्स हो सकते [06:27] हैं। लिहाजा डिबेट के शुरू में यह जरूरी [06:31] है कि हम यह जान लें कि आज के इस टॉपिक [06:34] में कौन सा स्टैंडर्ड सही होगा और कौन सा [06:38] गलत होगा। सबसे पहला स्टैंडर्ड जिसे मैं [06:42] समझता हूं कि हमारे रिस्पेक्टेड जनाब [06:44] जावेद अख्तर साहब बड़ी तेजी के साथ उसकी [06:47] तरफ लपकेंगे वो है साइंस। जबकि साइंस दर [06:51] हकीकत खुदा के एग्जिस्टेंस को डायरेक्टली [06:54] साबित करने या उसके एकिस्टेंस को डिनाई [06:58] करने के लिए स्टैंडर्ड नहीं बन सकती। और [07:00] उसकी वजह क्या है? ये मैं नहीं कह रहा। यह [07:04] वो लोग कह रहे हैं जो साइंस के एक्सपर्ट्स [07:07] हैं। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस कहती है साइंस [07:12] डजंट हैव द प्रोसेससेस टू प्रूव और [07:16] डिस्प्रूव द एकिस्टेंस ऑफ़ गॉड। व्हाई? [07:19] क्योंकि साइंस का ताल्लुक एंपेरिकल [07:22] एविडेंस से है और एंपेरिकल एविडेंसेस का [07:24] ताल्लुक हमारे नेचुरल और फिजिकल वर्ल्ड से [07:27] है। जबकि गॉड नॉन फिजिकल और सुपर नेचुरल [07:31] रियलिटी है। लिहाजा नॉन फिजिकल रियलिटी को [07:35] आप उस टूल के साथ नहीं चेक कर सकते जिसका [07:38] काम फिजिकल रियलिटी को तलाश करना है। [07:41] लिहाजा आज इस डिबेट में गॉड की [07:44] एग्ज़िस्टेंस को साबित करने या उसे डिनाई [07:47] करने में साइंटिफिक एविडेंस को एक्सेप्ट [07:50] नहीं किया जाएगा। दूसरा स्टैंडर्ड हो सकता [07:54] है रेवुलेशन कि रेवेलेशन के जरिए हम ये [07:57] साबित करें कि गॉड एकिस्ट करता है या [08:00] नहीं। लेकिन ये स्टैंडर्ड भी आज [08:02] इररेलेवेंट है। क्यों? क्योंकि रेवोलेशन [08:05] मेरे नजदीक सोर्स ऑफ नॉलेज है। वैलिड [08:09] सोर्स ऑफ नॉलेज है। लेकिन हमारे जावेद [08:11] अख्तर साहब के नजदीक ये वैलिड सोर्स ऑफ [08:13] नॉलेज नहीं है। लिहाजा आज की डिबेट में [08:16] मैं एक भी एविडेंस किसी भी मजहबी [08:19] स्क्रिप्चर से नहीं दूंगा। ताकि जावेद [08:22] अख्तर साहब के लिए वो अनएक्सेप्टेबल ना [08:24] हो। तीसरा जो मयार हो सकता है वो है [08:28] ऑब्जरवेशन के भाई कोई कहे कि हमें खुदा [08:31] दिखाओ। अगर है तो दिखाओ या ये कि खुदा के [08:34] एकिस्टेंस पर एंपेरिकल एविडेंस दो। तो ये [08:37] है दर हकीकत गलत टूल का इस्तेमाल करना। ये [08:40] ऐसा ही है कि जावेद साहब मुझसे ये मुतालबा [08:42] करें कि मुफ्ती साहब आप मेटल डिटक्टर के [08:45] जरिए प्लास्टिक डिटेक्ट करके दिखाएं। अबकि [08:47] प्लास्टिक डिटेक्ट नहीं हो पा रही है। [08:49] लिहाजा प्लास्टिक डज नॉट एक्सिस्ट। नो यू [08:52] आर यूजिंग द रोंग टूल। इस टूल से [08:54] प्लास्टिक को डिटेक्ट नहीं किया जाता। [08:56] लिहाजा [08:58] मैं समझता हूं कि गॉड के एकिस्टेंस पर [09:01] एंपेरिकल एविडेंस का मुतालबा करना एक [09:04] बचकाना मुतालबा है और हमारे रिस्पेक्टेड [09:06] जनाब जावेद अख्तर साहब इस स्टेज से अब [09:09] बहुत आगे निकल चुके हैं। अब बचता है एक ही [09:12] स्टैंडर्ड और वो स्टैंडर्ड है अकल लॉजिक [09:17] रीजनिंग और यही वो स्टैंडर्ड है जिसके तहत [09:21] गॉड के एक्जिस्टेंस को साबित किया जाएगा [09:24] या गॉड की एक्सिस्टेंस को डिनाई किया [09:26] जाएगा। लेकिन चूंकि ये बहुत इंपॉर्टेंट और [09:29] सेंसिटिव टॉपिक है। इसलिए लॉजिकल [09:32] आर्गुमेंट भी ऐसा होना चाहिए जो डेफिनेटिव [09:35] हो। इनडेफिनेटिव ना हो जो दो और दो चार की [09:38] तरह बिल्कुल वाज़ हो। जिसे लॉजिकली रिजेक्ट [09:41] करना पॉसिबल नहीं हो। फॉर एग्जांपल हम [09:43] कहें हमारे रिस्पेक्टेड मिस्टर सौरभ साहब [09:47] ये एक इंसान है और तमाम इंसान कॉन्शियस [09:51] बीइंग है। लिहाजा नतीजा क्या निकला? हमारे [09:54] सौरभ साहब भी कॉन्शियस बीइंग हैं। क्या ये [09:56] इनडेफिनेट आर्गुमेंट है या डेफिनेट [09:58] आर्गुमेंट? है? ये डेफिनेट आर्गुमेंट है। [10:00] ये दो और दो की तरह वाज़ है। इसमें किसी [10:03] तरह जो है लॉजिकली इसको रिजेक्ट नहीं किया [10:05] जा सकता। तो अगर आज हमारे जावेद अख्तर [10:08] साहब ऐसी कोई अकली दलील और लॉजिकल एविडेंस [10:13] दें खुदा के ना होने पर जो डेफिनेट भी हो [10:16] तो मैं ये ऐलान करता हूं कि यकीनन मैं उस [10:19] एविडेंस को कबूल करूंगा और उस पर गौर [10:22] करूंगा। लेकिन साथ में ये भी ऐलान कर देता [10:24] हूं प्रेडिक्शन के तौर पर कि ऐसा कोई [10:26] डेफिनेट आर्गुमेंट कोई नहीं पेश कर सकता। [10:30] दलील हम देंगे और डेफिनेटिव दलील देंगे। [10:35] लॉजिकल दलील देंगे। ऐसी दलील देंगे जो [10:38] एंटायर एथिस्टिक वर्ल्ड उसे रेफ्यूट नहीं [10:42] कर सकती। चल अब हम एक एग्जांपल सोचते हैं। [10:45] एक सिनेरियो सिंपल सिनेरियो तमाम ऑडियंस [10:47] से गुजारिश है। हम और आप एक आइसोलेटेड [10:50] आइलैंड पर हैं। ऐसा आइलैंड जहां पे हमसे [10:53] पहले कोई कभी नहीं गया। चलते-चलते आपके [10:56] सामने अचानक आपने देखा एक पिंक कलर की बॉल [10:59] पड़ी हुई है। सबसे पहला सवाल आपके ज़हन में [11:02] क्या आएगा कि ये बॉल यहां क्यों आई? कैसे [11:05] आई? यह पिंक कलर की ही क्यों है? कोई और [11:07] कलर भी हो सकता था। यह इसी शेप में क्यों [11:10] है? कोई और शेप भी हो सकता था। नेचुरली आप [11:13] इस तरफ पहुंचेंगे कि कोई ना कोई है जिसने [11:16] इन स्पेसिफिक प्रॉपर्टीज के साथ इस बॉल को [11:19] बनाया है और यहां पे रखा है। चकि आप जानते [11:23] हैं कि ये जो बॉल है इसका एग्ज़िस्ट करना [11:26] जरूरी नहीं है। ये एग्ज़िस्ट कर भी सकती थी [11:28] नहीं भी कर सकती थी। और एक्सिस्ट करना ही [11:30] था तो किसी और फॉर्म में करती। किसी और [11:32] कलर में करती। अब आप इस बॉल को एक्सपेंड [11:35] करते चले जाएं। एक्सपेंड करते चले जाएं। [11:37] एक्सपैंड करते चले जाएं। यहां तक कि ये [11:39] बॉल यूनिवर्स के साइज की हो जाए। बताइए कि [11:42] क्या साइज साइज के बढ़ जाने से सवाल बदल [11:44] जाएगा? हरगिज़ नहीं बदलेगा। अभी भी सवाल [11:47] रहेगा। ये यूनिवर्स कहां से आया? इन [11:49] स्पेसिफिक प्रॉपर्टीज के साथ कहां से आया? [11:52] क्यों आया? किसने बनाया? ये सवाल उस वक्त [11:55] भी वैलिड रहेगा। [11:57] लेकिन यह सवाल अगर हम जनाब जावेद अख्तर [12:01] साहब से करें तो क्योंकि इनका वर्ल्ड व्यू [12:03] एथिस्टिक है और सिर्फ इनका नहीं मतलब [12:05] जितने भी एथिस्ट हैं और एथिस्टिक वर्ल्ड [12:07] व्यू को रखने वाले से अगर आप ये सवाल करें [12:10] कि ये यूनिवर्स कहां से आया तो इनका जवाब [12:14] या तो आर्गुमेंट फ्रॉम इग्नोरेंस होगा या [12:17] डॉग्मैटिक होगा। या तो यह कहेंगे कि मुझे [12:20] नहीं पता कि यह कहां से आया। लिहाजा गॉड [12:23] डज नॉट एक्सिस्ट। या आर्गुमेंट फ्रॉम [12:25] इग्नोरेंस है या ये कहेंगे के ये यूनिवर्स [12:30] खुद ब खुद बन गया। इसका मतलब यह है कि उस [12:32] बॉल को भी खुद ब खुद बन जाना चाहिए। लेकिन [12:34] बॉल के ताल्लुक से ये एक्सप्लेनेशन [12:36] एक्सेप्ट नहीं की जाएगी कि ये खुद ब खुद [12:38] बन गई। लेकिन यूनिवर्स के ताल्लुक से कर [12:40] दिया जाएगा। इसे हम दूसरे अल्फाज़ में [12:42] डॉग्मा भी कह सकते हैं। दूसरी चीज हमारे [12:46] जावेद अख्तर साहब जरूर गॉड ऑफ गैप्स की [12:49] मिसाल भी जरूर देंगे। और मिसाल देंगे कि [12:52] पहले जमाने में बिजलियां कड़कती थी तो [12:54] लोगों ने किसी एक खुदा की तरफ और बारिश [12:56] होती थी तो दूसरे खुदा की तरफ मंसूब कर [12:57] दिया। उनके पास दलील नहीं थी। ये हमारा [12:59] वर्ल्ड व्यू है ही नहीं। ये हमारा वर्ल्ड [13:01] व्यू है ही नहीं। क्योंकि नेचुरल फेनोमिना [13:04] के प्रोसेस की इंटरप्रिटेशन को जान लेने [13:07] से ये कहां से साबित हो गया कि गॉड [13:09] एक्सिस्ट नहीं करता है। इस पर मैं [13:10] इंशाल्लाह अभी आगे बात करूंगा। आप हजरात [13:14] यह भी देखेंगे और मैं यह एक्सपेक्ट करता [13:16] हूं कि हमारे रिस्पेक्टेड जनाब जावेद [13:19] अख्तर साहब जरूर इमोशनल आर्गुमेंट्स भी [13:21] देंगे जो कि एक लॉजिकल फैलेसी है जब बात [13:24] आती है ट्रुथ को डिसाइड करने में। क्यों? [13:27] मिसाल के तौर पर वो कहेंगे कि अगर गॉड है [13:30] तो इविल क्यों एक्सिस्ट करता है? जबकि मैं [13:32] कहता हूं इविल का एक्सिस्ट करना गॉड के [13:34] एग्जिस्ट हो एक्सिस्ट करने की दलील है। [13:36] उसके खिलाफ नहीं है। क्योंकि अगर गॉड है [13:38] तो हम सब उसके सामने अकाउंटेबल हैं। और [13:41] अगर हम अकाउंटेबल हैं तो अकाउंटेबिलिटी के [13:43] लिए इविल का मौजूद होना जरूरी है। उसके [13:45] बगैर हम अकाउंटेबल नहीं हो सकते। और अगर [13:48] हम अकाउंटेबल नहीं हैं तो हम जनाब जावेद [13:50] अख्तर साहब से पूछेंगे कि आप बताएं कि फिर [13:53] सफरिंग इस दुनिया में क्यों है? अगर खुदा [13:55] नहीं है तो सफरिंग क्यों है? और उन लोगों [13:58] के जज्बे का क्या जिनके अंदर सफरिंग के के [14:00] बाद इंतकाम लेने का जज्बा पाया जाता है और [14:03] वो इस दुनिया से ऐसे ही चले गए। क्या उनकी [14:05] सारी तकलीफें बेकार चली जाएंगी? अब आ जाए [14:07] उसी एग्जांपल की तरफ कि बॉल मुझसे अगर कोई [14:10] पूछे इस बॉल को किसने बनाया और या इस [14:13] एक्सपेंडेड बॉल को किसने बनाया? मैं [14:15] कहूंगा क्योंकि ये यूनिवर्स और इस [14:18] यूनिवर्स की तमाम चीजें कंटिंजेंट हैं। [14:20] कंटिंजेंट होने का मतलब ये होता है कि जो [14:22] अपने एक्सिस्टेंस पे किसी के ऊपर डिपेंड [14:24] करती हो। तो जाहिर है ये यूनिवर्स [14:27] कंटिंजेंट है। और अगर कोई चीज कंटिंजेंट [14:30] नहीं है तो मैं रिक्वेस्ट करूंगा कि मुझे [14:32] दिखा दें कि कौन सी चीज यूनिवर्स में [14:33] कंटिंजेंट नहीं है। हम भी जरा गौर कर लें [14:35] और हम भी देख लें। और जब कॉन्टिंजेंट [14:38] चीजें मौजूद हैं तो फिलॉसोफर्स की इस्तिला [14:41] के मुताबिक हम उस टर्मिनोलॉजी के मुताबिक [14:44] हम उस जगह तक पहुंचते हैं और उस हस्ती तक [14:47] पहुंचते हैं जिसे नेसेसरी बीइंग कहा जाता [14:49] है कि ये वो नेसेसरी बीइंग है जिसका मौजूद [14:52] ना होना नामुमकिन हो चूंकि अगर ये मौजूद [14:54] ना हो तो सारी चीजें एकिस्टेंस में आएंगी [14:56] ही नहीं और ये सारी डिप कंटिंजेंट चीजें [14:59] उसी के ऊपर डिपेंड करती हैं। अब अगर आप ये [15:01] सवाल करते हैं कि फिर उस हस्ती को किसने [15:03] बनाया? फिर उसका कॉज क्या है? फिर उसका [15:05] कॉज क्या है? फिर उसका कॉज क्या है? और [15:07] एंडलेसली चले जाएं। इसे हम कहते हैं [15:09] इनफिनिट रिग्रेस ऑफ कॉजेस जो कि लॉजिकल [15:12] फैलेसी है। कॉनसेप्चुअली इंफिनिटी पॉसिबल [15:15] है। मिसाल के तौर पे न्यूमेरिकल्स वन टू [15:18] थ्री गिनते चले जाएं। इनफिनिट नंबर्स हैं। [15:19] मैं कॉनसेप्चुअली बात नहीं कर रहा। [15:21] प्रैक्टिकली रियलिटी में साबित करके [15:23] दिखाएं कि इनफिनिट रिग्रेस ऑफ़ कॉजेस [15:25] पॉसिबल है या नहीं। अगर पॉसिबल है तो हम [15:27] मान लेंगे। मिसाल दे दें और पॉसिबल नहीं [15:30] है तो एक ही ऑप्शन बचता है जिसे हम कहते [15:32] हैं नेसेसरी बीइंग। ऐसी नेसेसरी बीइंग जो [15:34] इंडिपेंडेंट है क्योंकि अगर वो डिपेंडेंट [15:37] हुई तो वो नेसेसरी नहीं रहेगी। ऐसी [15:39] इंडिपेंडेंट बीइंग जो इटरनल है। अगर वो [15:41] इटरनल नहीं होगी उसकी बिगिनिंग होगी तो वो [15:43] खुद कंटिंजेंट है। ऐसी बीइंग जो पावरफुल [15:46] है। क्योंकि कंटिंजेंट को एक्चुअलाइज करने [15:48] के लिए पावर चाहिए। ऐसी बीइंग जो [15:50] इंटेलिजेंट है और नॉलेजेबल है। क्योंकि ये [15:53] यूनिवर्स स्पेसिफिक फॉर्म और स्पेसिफिक [15:55] लॉज़ ऑफ नेचर के तहत प्रिसाइजली चल रहा है। [15:59] थैंक यू। [15:59] थैंक यू साहब। [प्रशंसा] [16:03] मैं इन दलीलों के बाद जावेद अख्तर साहब से [16:06] गुजारिश करूंगा। आप बैठ के बोलना चाहेंगे? [16:09] जी। [16:15] [प्रशंसा] [16:20] पहले तो मैं मुफ्ती साहब को एक अच्छी खबर [16:22] देना चाहूंगा कि मेरी नॉलेज साइंस के बारे [16:25] में बड़ी मामूली है। तो आप फिक्र ना करें [16:27] उसकी। लेकिन कुछ कॉमन सेंस है मुझ में। [16:32] देखिए ये खुदा का तसवुर कोई नया तसवुर [16:36] नहीं है। ये सदियों से रहा है। ये कुछ [16:40] रिलजन 3000 साल पुराने होंगे। 4000 साल [16:43] पुराने होंगे। लेकिन इंसान कोई 10,000 [16:46] 12000 साल से एकिस्ट करता है होमोसेपियर [16:49] की शक्ल में और हमेशा कुछ ना कुछ मजहब [16:52] रहे। [16:54] ये मजहब जाहिलों के नहीं थे। ये मजहब एक [16:58] ऐसी ग्रीक सोसाइटी के थे जहां बड़े-बड़े [17:02] फिलॉसफर पैदा हुए। ये मजहब इजिपशियंस के [17:06] थे जिन्होंने पिरामिड्स बनाए थे। ये रोमंस [17:10] के थे कि जिनका आर्किटेक्चर और सेनेट यानी [17:13] पहली बुनियाद डेमोक्रेसी थी। लिमिटेड थी [17:16] मगर डेमोक्रेसी थी। ये उन लोगों ने किए [17:19] थे। तो इनका जो जुपिटर था रा था जस था [17:25] उन्हें उस पर इतना ही एतमा था जितना आज [17:28] किसी मजहबी आदमी को अपने खुदा पे होगा। [17:32] क्रिश्चियनिटी आने से पहले यूरोप में एक [17:36] मजहब था जर्मेनिक रिलीजन। उसका एक खुदा [17:40] था। उसकी एक बीवी थी। उसके दो बेटे थे। एक [17:44] बेटी थी। कि जर्मनी में जब यूरोप में [17:47] क्रिश्चियनिटी आई तो वो खुदा उसकी बीवी और [17:50] पूरे खानदान चला गया। तो हमने अगर हम [17:54] हिस्ट्री देखें तो खुदा जो है वो ज्यादातर [17:58] फनी है। वो हमेशा रहे नहीं और वो जो लोग [18:03] इन्हें मानते थे उनको आप कहे वो तो जाहिल [18:06] थे। उन्हें तो कुछ पता ही नहीं था। ऐसा [18:08] नहीं है। वो अपने वक्त में बड़े काबिल लोग [18:11] थे। और अपने वक्त में उन्होंने बड़े-बड़े [18:14] काम किए हैं। फिलॉसफर्स थे, साइंटिस्ट थे। [18:18] लेकिन उनका मजहब कहां गया? उनके खुदा कहां [18:21] गए? आज जो खुदा है दुनिया में लोग उन्हें [18:25] मानते हैं। आपको क्या मालूम कि कितने [18:27] बरसों के बाद क्या होने वाला है? हम यूरोप [18:29] में देखते हैं तो चर्च खाली है तो वक्त के [18:33] साथ चीजें बदलती हैं। जहां तक इसका [18:37] ताल्लुक है मजहबों का [18:40] हर मजहब आपसे एक चीज मांगता है। फेथ [18:45] ये फेथ क्या चीज होती है? [18:49] व्हाट इज द डिफरेंस बिटवीन फेथ एंड बिलीफ? [18:52] ये कोई ये तो बहुत ही अहमखाना बात होगी कि [18:55] कोई आदमी कहे साहब अगर खुदा है तो मुझे [18:57] दिखाइए। ये तो जाहिला में बात हुई। मैंने [19:00] तो नॉर्थ पोल नहीं देखा है। मगर मैं मानता [19:03] हूं कि नॉर्थ पोल है। मैं क्यों मानता [19:06] हूं? इसलिए कि अगर ये दुनिया राउंड है तो [19:09] उसका कोई टॉप होगा। कुछ लोग हैं जो वहां [19:12] गए भी हैं। कॉमन सेंस कहता है कि ऐसा [19:14] होगा। सबूत है, गवाह है, रीजन है। तो ये [19:19] मेरा फेथ नहीं है। तो फेथ में और बिलीफ [19:23] में डिफरेंस क्या है? [19:25] जो मजहब मांगता है आपसे हर मजहब फथ मांगता [19:29] फथ का मतलब यह है कि ना कोई गवाह हो ना [19:33] कोई सबूत हो ना कोई रैशन हो ना कोई लॉजिक [19:37] हो ना कोई प्रूफ हो मगर तुम एक बात को [19:39] मानो ये है फेथ [19:43] वरना बिलीफ होता अगर इसमें कुछ भी सबूत [19:46] होते गवाह होते तो फिर इसे आप बिलीफ कहते [19:49] जैसे मेरा बिलीफ है कि नॉर्थ पोल है मेरा [19:52] फेथ थोड़ी है [19:54] फेथ इन तमाम शर्तों को रद्द करता है। [20:00] तो फिर स्टुपिडिटी क्या है? [20:02] अगर मैं एक बात ऐसी मानू जिसकी ना कोई [20:05] लॉजिक है, ना कोई रैशन है, ना कोई प्रूफ [20:08] है, ना कोई गवाह है, [20:12] ना कोई सबूत है और मैं उसे मानूं। तो ये [20:16] स्टुपिडिटी हुई। इसे ही वही कल को मैं [20:19] यकीन कर लूं कि ईलॉन मस्क जो है मेरा भाई [20:22] है तो मुझे इंतहाई खुशी होगी सुकून भी [20:25] बहुत मिलेगा मुझे लेकिन और कहे भाई क्यों [20:28] मानते हो क्या सबूत है भाई वो तो अमेरिकन [20:30] है और तुम तो इंडियन हो वो तो नस्ल अलग है [20:33] तुम्हें कभी मिले भी नहीं साहब देखिए ये [20:35] मेरा फेथ है ये बात किया फेथ का मतलब ही [20:40] यह है कि आप प्रूव नहीं कर सकते अगर आप [20:43] प्रूफ कर सकते हो तो फेथ की जरूरत ही नहीं [20:46] फिर तो आप बात करेंगे। आप कितनी बहस कर [20:48] लीजिए। अल्टीमेटली दुनिया का हर मजहब फेथ [20:51] पे टिका है। और फेथ का मतलब है एक ऐसा [20:54] यकीन जिसका कोई सबूत, कोई गवाह, कोई [20:57] प्रेशर नहीं। [21:01] अब आप ये कहें कि आप ये क्यों कह रहे हैं [21:04] कि साहब ये कायनात किसने बनाई? कमाल ये है [21:09] कि आपने बताया कि एक आइलैंड पे गए और एक [21:12] बॉल देखी। [21:14] आपने ये नहीं कहा कि आइलैंड किसने बनाया? [21:17] आपको सिर्फ बॉल पर हैरत हुई। [21:21] हमने आइलैंड पे हमने हैरत नहीं की। होते [21:23] हैं आइलैंड। इसी तरह ये आइलैंड है। सितारे [21:26] ये गैलेक्सीस ये सब आइलैंड है। खलम है। हम [21:31] उन्हें टेकन फॉर ग्रांटेड लेते हैं। हम [21:33] पूछते नहीं किसने बनाए? आपने गदी के बारे [21:35] में भी नहीं पूछा। हैं। [21:38] मेरी पैदाइश कैसे हुई? [21:41] क्या मैं प्लान पैदा हुआ था? [21:44] आई वास प्ल टू बी बोर्न [21:48] या एक लकी स्पम था जो किसी एक से चिपक [21:50] गया। [21:52] मेरी पैदाइश रैंडम है। रैंडम [21:57] और इंसाफ जिसे आप कहते हैं इंसाफ का तो [22:01] नेचर से कोई वास्ता ही नहीं है। जो आप [22:04] कहते हैं कि एक दिन इंसाफ मिलेगा। इंसाफ [22:06] इज अ ह्यूमन कासेप्ट। नेचर में कोई इंसाफ [22:10] नहीं। अगर शेर हिरण को खा जाता है तो उसे [22:14] कोई सुविधा नहीं मिलती। [22:16] अगर एक आंधी आती है और हरेभरे पेड़ों को [22:19] उखाड़ के फेंक देती है तो आंधियों की जेल [22:21] नहीं होती है। [22:24] नेचर में इंसाफ नहीं है। इसलिए उसे नेचर [22:28] को इंसाफ की जरूरत भी नहीं। नेचर तमाम एक [22:31] है। अब हम कहे कि साहब ये देखिए जो मैंने [22:34] खाना खाया था मेरी आंख तो नहीं यूं कर [22:36] दिया उसे तो इसे सजा मिलने। नहीं वो [22:39] सिस्टम है ऐसे ही चल रहा है। नेचर बगैर [22:44] इंसाफ के है। इंसाफ इज अ ह्यूमन कासेप्ट। [22:48] तो जो आपसे कहता है कि मैं तुम्हें इंसाफ [22:51] दूंगा वो इंसानी बहन की बात है। ये नेचुरल [22:55] है ही नहीं। ये आसमानी है ही नहीं। नेचर [22:59] का तसवुर इंसाफ का तसुर। भाई आप साथ मिलते [23:03] हैं। अब आप लेफ्ट हैंड ड्राइव करते हैं। [23:06] ये क्या है? तमाम सच, तमाम नेकी, तमाम [23:10] शराफत लेफ्ट हैंड राइट है। वरना क्या [23:14] होगा? या तो आप कॉस कर देंगे, आपका [23:16] एक्सीडेंट हो जाएगा या आप किसी को मार [23:18] देंगे या ट्रैफिक जाम हो जाएगा। झूठ, [23:22] बेईमानी, रिश्वतखोरी ये तमाम जो है [23:25] ड्राइविंग अंदर आउटसाइड है। इसके ऊपर कुछ [23:28] नहीं। ये तो हमने बनाया है। जैसे हमने [23:31] लेफ्ट हैंड ड्राइव बनाए। ये कासेप्ट ऑफ [23:34] इंसाफ जो है ये हमारा है। इसका नेचर से [23:38] कोई वास्ता नहीं। शेर खा जाता है हिरन को [23:40] उसे जेल होती है क्या? कुछ भी है ही नहीं। [23:46] तो ये जो दुनिया के रिलीजन प्रॉमिस करते [23:49] हैं आपसे इंसाफ इसी से मालूम होता है कि [23:52] ये मैनमेंट है। ये तसवुर कहीं और का है ही [23:57] नहीं। जो नेचर है कुछ लोग कहते हैं नेचर [24:00] ही खुदा है। तो नेचर में तो इंसाफ नहीं [24:03] कहीं। [24:05] और आप वादा कर रहे हैं कि तुम्हें मरने के [24:07] बाद इंसाफ मिलेगा। [24:09] मुझे अगर मिलेगा तो मैं बहुत खुश हूंगा। [24:12] लेकिन मैं यकीन नहीं कर पाता हूं। इसलिए [24:16] कि मैं फेथ नहीं पैदा कर सकता। द वेरी [24:20] फैक्ट रिलीज डिमांड फेथ। [24:24] इसका मतलब है कि उनके पास जस्टिफिकेशन [24:28] नहीं है। [24:30] अच्छा था। फिर [24:33] रिलीजन अगर मॉडरेशन में है कोई सा भी वो [24:37] आप में कुछ खूबियां भी पैदा करता होगा [24:40] देखिए उसे ये फायदा है वो फायदा है [24:42] अल्कोहल जो है [24:45] वो ज्यादातर दवाओं में यूज़ होती है और एक [24:50] सर्वे किया गया था अमेरिका में कि [24:52] लोंगिटिविटी किन लोगों की है तो एक तरफ वो [24:55] लोग थे जो शराब पीते ही नहीं थे और एक तरफ [24:57] वो थे जो एक बोतल शराब पीते थे सबसे [25:01] ज्यादा लंबी लंबी उम्र उनकी है जो दो [25:04] पैगराब के शराब पीते हैं और खाना खाते [25:06] हैं। [25:07] मगर हम शराब को बुरा समझते हैं। मैं भी [25:10] बड़ा समझता हूं। क्यों? [25:13] ऐसा होता नहीं। कुछ चीजों में आदत होती है [25:17] जो बढ़ती है। आज तक मैं एक आदमी दूध पीता [25:20] है। आप 10 साल बाद भी मिलेंगे तो एक ही [25:22] गिलास पीता होगा। ऐसा नहीं होता। सुबह से [25:25] दूध पीता रहता है। [25:28] अल्कोहलिक मैंने नहीं देखे। अलकोहलिक [25:31] खोलते हैं। ये टेंडेंसी है मजहब की कि वो [25:35] बढ़ता है। जैसे कैंसर बढ़ता है, जैसे शराब [25:39] बढ़ती है। [25:41] कुछ लोग होंगे जो उसे सही तरह से यूज़ करते [25:45] हैं। मुझे यकीन है कि हमारे मुफ़्ती साहब [25:47] भी होंगे। एक बहुत खुशी हुई मुझे इनसे [25:50] मिलके। लेकिन कितने लोग हैं आज आप देखते [25:52] हैं दुनिया में जो तबाहया है इनमें कितना [25:55] हाथ है उन लोगों का जो बिलीव है कहते मजहब [25:59] ये नहीं कहता ना कहता होगा मगर जब ये मजहब [26:02] पीते हैं तो ऐसे बिहेव करते हैं थोड़ा सा [26:06] अगर हो तो शायद बहुत अच्छी बात है लेकिन [26:09] शराब थोड़ी सी नहीं रहती उसमें टेंडेंसी [26:13] है पहले थोड़ा सा अगर दो तीन कैंसर के सेल [26:15] हो ना बॉडी में तो आदमी सिम रहेगा लेकिन [26:18] वो दो तीन सेल नहीं रहते वो मल्टीप्लाई [26:21] होते हैं। जावेद साहब टाइम पूरा हो गया। [26:23] टाइम हो गया। बस बात खत्म हो गई। अच्छा [26:25] मुझे कुछ और कहने को था भी नहीं। [26:29] [प्रशंसा] [26:31] जी मैं पहले जवाबी दौर के लिए इनवाइट कर [26:35] रहा हूं मुफ्ती साहब को। योर रिबटल राउंड [26:37] वन। यू हैव से मिनट्स। [26:44] थैंक यू वेरी मच जावेद साहब। आपकी बात को [26:47] सुनकर बड़े महजूस हुए हैं हम महजूस डू यू [26:50] अंडरस्टैंड वी एंजॉय ओके अब थोड़ा सा [26:53] लॉजिकली उसको हम लोग [26:54] दरअसल हम लोगों ने कल गुजारिश की थी [26:56] मुफ्ती साहब से भी जावेद साहब से भी कि [26:58] हिंदुस्तानी जबान आम फहम सबको समझ में आ [27:01] जाए और जहां कहीं आप मुश्किल शब्द [27:02] इस्तेमाल करें वहां बताते भी चलें थैंक यू [27:06] तो सबसे पहले हमारे रिस्पेक्टेड जावेद [27:09] साहब ने हवाला दिया कि खुदा फानी है कितने [27:11] मजहब आ गए चले गए किसी ने जुपिटर को खुदा [27:14] माना किसी ने किसी को माना मैं कहता हूं [27:16] जिसने कॉन्टिंजेंट चीज को खुदा माना गलत [27:18] माना वो खुदा ही नहीं वो खुदा ही नहीं है। [27:21] [प्रशंसा] [27:22] हम तो नेसेसरी बीन को साबित करने बैठे [27:25] हैं। वो नेसेसरी कॉज जो इटरनल है जो जो [27:28] अबदी भी है और अजली भी है। हम किसी और को [27:31] साबित करने नहीं बैठे। दूसरी चीज उन्होंने [27:33] कहा के फेथ एंड बिलीफ ये एक [27:38] ऐसी डेफिनेशन है फेथ की जो इन्होंने पहली [27:42] मर्तबा पेश की है या माफ़ कीजिएगा इन्होंने [27:44] पहली मर्तबा पेश नहीं की है। रिचर्ड [27:46] डॉकिंस ने पहली मर्तबा पेश की है। मुझे [27:48] मालूम है ये सोर्स कहां से है। [27:49] एपिस्टेमोलॉजिकली [27:51] फेथ और बिलीफ का फर्क आप इस तरह नहीं कर [27:54] सकते सर। फेथ सही भी होता है, गलत भी होता [27:57] है। बिलीफ सही भी होता है, गलत भी होता [27:59] है। जो लॉजिक रीजन और एविडेंस से बैक्ट [28:03] होगा वो फेथ सही होगा। और आप जिस फेथ की [28:06] बात कर रहे हैं कि इलॉजिकल है और उसके [28:08] पीछे नहीं है तो वी आर ऑन द सेम पेज। हम [28:11] नहीं मानते उस फेथ को। जो फेथ ऐसा हो [28:14] जिसके पीछे कोई लॉजिक ना हो। एविडेंस ना [28:16] हो। हम नहीं मानते। हम तो उस फेथ के कायल [28:18] हैं जिसके पीछे लॉजिक हो और एविडेंस हो। [28:21] तो बिलीफ सही भी होता है, गलत भी होता है, [28:23] फेथ भी सही होता है और गलत भी होता है। तो [28:25] आज फेथ और बिलीफ के डिफरेंस पे बात नहीं [28:28] हो रही है। आज आप चाहे फेथ एक्सेप्ट कर [28:30] लें या बिलीफ एक्सेप्ट कर लें। आज ये बात [28:32] होगी कि ट्रुथ क्या है? चाहे ट्रू बिलीफ [28:35] सही है या ट्रू फेथ सही है और फॉल्स फेथ [28:38] क्या है और फॉल्स बिलीफ क्या है? बात इसपे [28:40] हो रही है। दूसरी चीज इन्होंने पूछा [28:41] स्टुपिडिटी फिर क्या है? अगर फेथ रिलीजन [28:44] स्टुपिडिटी नहीं है तो और क्या है? [28:45] क्योंकि फेथ का मुतालबा करते हैं तो [28:47] स्टुपिडिटी स्टुपिडिटी क्या है? मैं कहता [28:49] हूं स्टुबिडिटी एथिज्म है। उसकी वजह ये है [28:52] कि आप एक सड़क पे जा रहे हो और आप किसी [28:54] गार्डन में जाएं और देखें वहां लिखा है [28:56] फूलों के साथ आई लव जावेद अख्तर एंड आई [28:59] रियली डू आई लव यू सर। सो [29:02] जब आप [प्रशंसा] [29:05] वहां पर पहुंचे तो वहां पहुंचकर अब ये [29:08] बताएं क्या आप ये कहेंगे वाओ व्हाट अ [29:11] नेचुरल सेक्शन। ये क्या नेचुरल सेक्शन है? [29:14] नहीं। यह प्रिसाइजली डिजाइन है। इसके पीछे [29:18] डिजाइनर है। लिहाजा अगर कोई एक ऐसी कॉमन [29:22] सेंस की बात को कबूल नहीं कर रहा है कि [29:24] यूनिवर्स जो इतनी प्रिसाइजली काम कर रहा [29:26] है। हम कह दें कि खुद ब खुद बन गई। मैं [29:28] समझता हूं इससे बड़ी स्टुबिडिटी और कुछ [29:30] नहीं है। ये इररेशनल चीज है। [प्रशंसा] [29:34] फिर हमारे सर ने कहा कि आपने बॉल पे फोकस [29:38] किया, आइलैंड पे फोकस नहीं किया। अरे [29:41] आइलैंड को किसने बनाया यही समझाने के लिए [29:43] तो बॉल की मिसाल दे रहा हूं। [29:47] और बॉल भी कॉन्टिंजेंट है, आइलैंड भी [29:50] कंटिंजेंट है। दोनों नेसेसरी बीइंग का [29:52] मुतालबा करते हैं। आगे इन्होंने कहा कि [29:54] नेचर में कोई इंसाफ नहीं है। हम डिसाइड [29:57] करते हैं कि मोरालिटी क्या होती है? इंसाफ [29:59] क्या होता है? हम डिसाइड करते हैं जैसे [30:02] ड्राइविंग सीट में, ट्रैफिक वाला ये तो [30:03] किसी खुदा ने नहीं कहा। ये है इसे कहते [30:05] हैं फॉल्स इक्विवेलेंस। ये एक लॉजिकल [30:08] फैलेसी है। आपने जो है मिसाल दी ड्राइविंग [30:11] की और ट्रैफिक की। ये सब्जेक्टिव मोरालिटी [30:13] है। आप सब्जेक्टिव मोरालिटी को मिसाल [30:15] बनाकर ऑब्जेक्टिव मोरालिटी के ऊपर नहीं [30:17] थोप सकते। इंसाफ ये ऑब्जेक्टिव मोरालिटी [30:19] है। अगर आप ये कहते हैं कि नेचर में इंसाफ [30:21] नहीं है तो इंसाफ का ना होना ये नेचुरल [30:24] हुआ तो फिर नेचर को नेचर रहने दे। क्यों [30:26] हम इतना स्ट्राइव कर रहे हैं दुनिया में [30:28] इंसाफ लाने के लिए? यह तो इलॉजिकल बात है, [30:30] इरशनल बात है। इसलिए बहुत सी चीजें ऐसी [30:33] हैं जो ऑब्जेक्टिवली जो है इविल या गुड [30:36] हैं और बहुत सी चीजें ऐसी हैं जो [30:38] सब्जेक्टिवली हैं। सब्जेक्टिवली जो मोरल [30:41] होता है या इमोरल होता है उसको हम सोशल [30:43] कंसेंस कंसेंसेस से या पर्सनल प्रेफरेंस [30:46] से डिसाइड करते हैं। लेकिन जो ऑब्जेक्टिव [30:48] मोरालिटी है जिसमें इंसाफ आया जो इन्होंने [30:50] बार-बार रिपीट किया ये ऑब्जेक्टिव है। [30:53] सब्जेक्टिव नहीं है। अगर आप कहते हैं ये [30:55] सब्जेक्टिव है। तो मेरा सवाल आपसे यह है [30:57] क्या सोशल कंसेंसेस के जरिए अगर जुल्म को [31:00] सही करार दे दिया जाएगा तो आप जुल्म को [31:02] जस्टिफाई करेंगे? दूसरी चीज इन्होंने ये [31:06] कहा कि दो पैक शराब पी लें तो वो उतने पे [31:11] नहीं रहता बढ़ जाता है। यही मामला मजहब के [31:14] साथ है। दो पैक आप पी लें बढ़ेगा। तो ये [31:16] एक ऐसी मिसाल है इसको कहीं भी फिट कर लें [31:19] कि आप एथिज्म पे जब फिट करें जब आप दो पैक [31:21] एथिज्म का लेंगे ना तो वो बढ़-बढ़ के [31:24] नॉर्थ कोरिया बनेगा। थैंक यू। [31:25] [प्रशंसा] [31:31] [प्रशंसा] [31:32] फर्स्ट राउंड की रिबटल के लिए मैं जावेद [31:34] साहब को इनवाइट कर रहा हूं। आपके पास 7 [31:36] मिनट का वक्त है। रिसेट कर दीजिएगा प्लीज। [31:41] मुझे इस बात की खुशी है कि मुफ्ती साहब ने [31:43] भी मान लिया कि नेचर में कोई इंसाफ नहीं [31:46] है। तो कोई भी चीज जो इंसान ने नहीं बनाई [31:49] है उसमें इंसाफ नहीं होता है। एक बात मैं [31:52] आपसे अ करूं जरा पता लगा लीजिएगा। ये जो [31:54] आप बाग में जाते हैं बेहद खूबसूरत फूल [31:56] देखते हैं ना इनमें से कोई नेचुरल नहीं [31:58] है। ये सारे फूल क्रॉस करके बनाए गए हैं। [32:02] जो जंगल में फूल होते हैं निहायत मामूली [32:05] होते हैं। ये फूल इंसानों ने बनाए हैं जो [32:07] आप बाग में देख के वाहवाह कहते हैं। ये [32:10] इंसानों के बनाए हुए हैं। डिफरेंट फूलों [32:11] को क्रॉस करके डेवलप करके फिर क्रॉस करके [32:14] इस तरह से बनाए गए। नेचुरल फ्लावर्स नहीं। [32:16] किसी जंगल वीरान में जाके आप गुलाब के फूल [32:19] नहीं देखेंगे। ये सब बनाए हुए इंसान ने। [32:21] बहुत से काम इंसान ने किए हैं। बाकी ये कि [32:25] आपने मेरी एक बात का जवाब नहीं दिया जिससे [32:28] मुझे शिकायत है कि फथ क्या है? और आप फेथ [32:33] मांगते क्यों हैं मुझसे? आप तो लॉजिकल है। [32:36] आपके पास तो सारे रैशन हैं। आपके पास सारे [32:39] सबूत हैं। तो आपको फेथ की डिमांड क्यों [32:42] करते हो आप? कि भाई तुम सरेंडर कर दो और [32:45] सवाल मत करो। कोई मजहब सारे सवाल करने की [32:48] इजाजत नहीं देता है और मना करता है कि [32:51] ज्यादा सवाल ना करो बह जाओगे तुम। आप [32:54] क्यों रोकते हैं? हकीकत ये है कि इंसानी [32:58] तारीख क्या है? इंसानी तारीख यह है कि [33:01] दुनिया में दो तरह के लोग हुए हैं। एक वो [33:04] जिन्होंने अपनी लालमी की परस्तिश की है। [33:08] दूसरे वो जिन्होंने अपनी इग्नोरेंस या [33:10] लालमी से झगड़ा किया है और मालूम किया है [33:13] कि क्या है। ये जो आप कह रहे हैं आज आप [33:16] हैरान हैं कि भाई ये यूनिवर्स कैसे बनी? [33:20] लोग हैरान थे कि सूरज डूबता है तो इधर से [33:22] कैसे निकलता है [33:24] और आप एक कदम जाके हमेशा का मानने को [33:28] तैयार है एक कदम पीछे ही मत जाइए भाई आप [33:32] इसके पास जाते हैं और कहते हैं सवाल ना [33:33] करना कि ये कहां से आया ये पावर तो हमेशा [33:36] से हमेशा रहेगी तो आप यूनिवर्स के बारे [33:38] में माने क्या तकलीफ है एक कदम पहले या [33:40] रुक जाइए [33:42] ये हमेशा से थी या नहीं थी हमें मालूम [33:44] नहीं है और ये कहना कि हमें मालूम नहीं [33:47] है। कमाल यह है कि दुनिया के सारे मजहब सब [33:51] जानते हैं। ये दुनिया कैसे बनी थी? कैसे [33:54] मिटेगी? मरने के बाद क्या होगा? इनको सब [33:57] इल्म है। इनको किसी को डायनासोर होते थे [34:01] पहले ये नहीं पता था। किसी को नहीं पता। [34:06] किसी भी दुनिया की मजहबी किताब में [34:09] डायनासोर का जिक्र नहीं है। [34:12] लेकिन बाकी सब बातें हाउ टू मेक यूनिवर्सल [34:15] फोर ईजी लेसंस एंड बाकी सब पता है। जिसको [34:19] सब पता है वो गड़बड़ है। हम में ये इंकसार [34:23] ये ह्यूमिलिटी होनी चाहिए कि हम ये कहे कि [34:26] हमें ये बहुत सारी बातें नहीं मालूम। [34:28] लेकिन हम उनकी परस्त ना कर ले। अपनी लालमी [34:31] को की परस्त ना करें। हम उसे पता लगाने की [34:36] कोशिश करें। जिस दुनिया में आप बैठे हैं [34:38] सर ये हॉल जो है ये इलेक्ट्रिसिटी जो है [34:41] ये माइक जो है जिस हवाई जहाज से आप आए थे [34:43] वो जिस कार से आप यहां आए हैं ये सब उन [34:47] लोगों की बनाई हुई है जिन्होंने सवाल किए [34:49] थे। [34:52] [प्रशंसा] [34:52] ये दुनिया जिसमें आप आज आराम से हैं। ये [34:56] उन लोगों की बनाई है कि जिन्होंने सवाल [34:59] किए थे और हर स्टेज पे इन सवालों को [35:07] मकरू कहा गया था। गलत कहा गया था। आप जरा [35:10] तारीख पढ़िए। एक बड़ी दिलचस्प किताब है [35:12] बैटन की [35:15] जिसमें उसने रिलीजन एंड साइंस कि कब से [35:19] रिलीजन जो है साइंस के अगेंस्ट है और हद [35:23] तो ये है कि भाप के इंजन के खिलाफ थे [35:27] स्टीम इंजन के भी खिलाफ थे और फतवे उन पे [35:30] वेटिकन ने दिए [35:33] तो ये हमेशा अभी जैसे ही ये राइट फिंगर [35:37] आते हैं [35:39] अमेरिका में पावर तो वो जो अपना ये क्या [35:43] बोलते हैं उसे [35:46] सीड क्या है? शीट क्या [35:49] हां [35:50] नहीं नहीं शीट जो होती है [35:54] जी [35:59] नहीं भाई [36:01] वो जो ह्यूमन बॉडी के [36:10] बंद हो जाती है। रिपब्लिकन नहीं करने [36:13] देते। अरे भाई इतना डर क्या है तुम्हें? [36:16] एक जमाने में बहुत नाराज थे ये सारे मजहबी [36:20] लोग कि ये इंसान तो इंसान बनाने की कोशिश [36:22] कर रहा है। आपको क्या तकलीफ हुई बना ले तो [36:25] बना लेने दो। ये खौफ क्या है? [36:29] और ये सब आज जो आप कह रहे हैं नामुमकिन है [36:32] ये कैसे हुआ? मुझे किस्सा याद आता है। जब [36:35] मैं छठी क्लास में था तो मैं मैथमेटिक्स [36:38] में बहुत वीक था। तो एक टीचर रख दिया गया। [36:40] उसने एक दो तीन चार पांच छ सात तो सिखा [36:42] दिया मुझे। वो दिन मैं भूल नहीं सकता हूं [36:45] सब। जिस दिन उसने ये बताया कि 1/2 क्या [36:48] होता है और 3/4 क्या होता है। मुझे ऐसा [36:51] लगा कि मेरा सर बीच से फट जाएगा। ये आदमी [36:54] कह रहा है कि यू दीवार के अंदर जाओ वॉक [36:57] करते हुए। आज हंसता हूं मैं इस बात पे। तो [37:00] आज जो बातें आपके ज़हन से बिल्कुल परे है [37:03] और आप हैरान होते हो उन्हें देख के। एक [37:05] वक्त आएगा कि मामूली लगेंगे और हुआ है [37:08] आपकी इंसानी तारीख ही है। इतनी जल्दी सारे [37:11] फैसले आप मत कर लीजिए। थोड़ा ह्यूमिलिटी [37:14] रखिए कि भाई ये हमें नहीं मालूम। ये कहने [37:18] में क्या आ रहा है? ये यूनिवर्स कहां तक [37:20] फैली? ये कब से है और कब तक रहेगी? हमें [37:24] नहीं मालूम। आपने फैसला कर लिया कब बनी? [37:27] ये आपके हिसाब से कोई 14 बिलियन इयर्स [37:29] बनी। जो समझा जाता है उससे पहले हजारों [37:34] करोड़ों अरबों साल तक खुदा बैठा क्या कर [37:37] रहा था खामोश बैठा था ऐसे ही जमाइयां ले [37:40] रहा था फिर उसे आईडिया आया यार एक काम [37:43] करते हैं वक्त अच्छा गुजर जाएगा यूनिवर्स [37:45] पर [37:48] सोचिए [37:51] वो तो हमेशा से है ना मगर यूनिवर्स हमेशा [37:54] से नहीं है ये तो बनाई गई है और उससे पहले [37:58] क्या था इनका का क्या काम था? [38:02] कैसी बात थी? ये बड़ा आसान है। जो बात [38:05] हमें आज धीरे-धीरे पता चल रही है। बरसों [38:08] 2000 और ढाई हजार साल पहले आपको किसी ने [38:10] बता दिया कि क्या था आप मान गए? और तब से [38:14] वही मान रहे हैं जो ढाई हजार साल पहले कहा [38:16] गया। सब कुछ बदल गया है। सॉल्व हो रही है [38:20] चीजें। अभी [38:22] साइंस बिल्कुल दावा नहीं करती या कोई [38:26] फिलॉसफर ये दावा नहीं करता कि हमें सब [38:28] मालूम बल्कि वो कहता है कि हमें जितना [38:30] मालूम होता है उससे ये मालूम होता है कि [38:32] हमें कितना कम मालूम है। तो हम अपनी [38:35] जियालत से लड़े उसकी परफेशना करें। [38:39] जी टाइम थैंक यू। थैंक यू सो मच। [38:42] [प्रशंसा] [38:44] मैं [38:46] तर्कों की श्रंखला में राउंड टू के लिए [38:48] मुफ्ती साहब को आमंत्रित कर रहा हूं। आपके [38:50] पास एक बार फिर से 7 मिनट का वक्त है। [38:57] शुक्रिया। जनाब जावेद अख्तर साहब कई [39:00] मर्तबा दोहरा रहे हैं कि फेथ का मतलब [39:02] बताइए। फेथ का मतलब बताइए। मैंने बता [39:04] दिया। फेथ सही भी होता है, गलत भी होता [39:07] है। और आज हम फेथ पे बात नहीं कर रहे। हम [39:10] ट्रुथ और डस गॉड एक्सिस्ट पे बात कर रहे [39:12] हैं। क्या डस गॉड एक्सिस्ट? ये ट्रुथ यानी [39:15] गॉड है या नहीं है? इसमें से दोनों ट्रुथ [39:18] क्या है? अब आप उसे फेथ कह लें, बिलीफ कह [39:20] लें नॉट माय बिनेस। उसके बाद आपने कहा कि [39:22] भाई सवाल करने से मजहब रोकता है। मैं कहता [39:26] हूं जो रोकता है वो रोकता होगा। मैं नहीं [39:29] रोकता। बल्कि सवाल करें। सवाल करना चाहिए। [39:33] सवाल कर के तो हम आगे बढ़ते हैं, तरक्की [39:35] करते हैं। और इसीलिए मैं आज यहां पे आया [39:37] हूं। लेकिन सवाल सिर्फ खुदा से नहीं होगा। [39:39] आपसे भी होगा। सवाल एथिज्म से भी होगा। [39:41] सवाल सिर्फ मजहब से नहीं होगा। सबसे होगा। [39:44] और आज मैं सवाल करूंगा और उम्मीद है कि आप [39:46] जवाब देंगे। अभी तक आपने वैसे कंटिंजेंसी [39:48] आर्गुमेंट का कोई जवाब नहीं दिया है। चलें [39:50] आपने कहा यूनिवर्स के बारे में इटरनल [39:52] क्यों नहीं बोल देते? ये क्योंकि लॉजिकली [39:55] पॉसिबल ही नहीं है कि यूनिवर्स इटरनल हो। [39:58] यूनिवर्स एक कंटिंजेंट [40:00] चीज है। जो टाइम एंड स्पेस के पाबंद है। [40:03] टाइम एंड स्पेस से बाउंड है। जो टाइम एंड [40:05] स्पेस से बाउंड होगा वो कंटिंजेंट होगा। [40:08] जो कंटिंजेंट होगा उसकी बिगिनिंग हुई [40:10] होगी। जिसकी बिगिनिंग हुई होगी वो इटरनल [40:12] नहीं हो सकता। ये तो कॉमन सी बात है। [40:16] [प्रशंसा] [40:17] आपने कहा कि किसी मजहबी किताब में [40:20] डायनासोर का जिक्र नहीं है। अफसोस कि आज [40:22] तक किसी मैथमेटिक्स के किताब में मुझे [40:24] डायनासोर का जिक्र नहीं मिला। [40:28] तो इसका मतलब मैथमेटिक्स की किताब बेकार [40:30] है। नहीं उसका वो टॉपिक नहीं है। रेवेलेशन [40:33] का और मजहबी किताबों का टॉपिक ये नहीं है [40:35] कि आपको आके बताएं साइकिल कैसे बनाते हैं। [40:37] ये आकर ये बताएं कि जो है डायनासोर कब था। [40:39] वो तो मोरालिटी सिखाने आया है। गॉड के [40:41] बारे में बताने आया। नॉन फिजिकल रियलिटी [40:44] की हकीकत को सिखाने के लिए आया। रिलीजियन [40:46] साइंस को रोकता है। नहीं रोकता। अगर रोकता [40:48] है तो गलत करता है। रिलीजन साइंटिज्म को [40:51] रोकता है जिसमें हमारे जावेद साहब मुख्तल [40:53] है। [40:56] साइंस [40:57] साइंस और साइंटिज्म में फर्क है। [41:00] साइंटिज्म ये है कि आप समझे के साइंस और [41:03] साइंटिफिक मेथोडोलॉजी ये नॉलेज को हासिल [41:07] करने का वाहिद सोर्स ऑफ नॉलेज है। ये है [41:09] साइंटिज्म। हम इसे रिजेक्ट करते हैं। हम [41:12] साइंस को तो तरक्की करते हैं। भाई आप [41:13] हमारी पूरी तारीख कर लें। पढ़ लें तो आपको [41:15] पता चल जाएगा। बहरहाल ये अलग टॉपिक है। [41:17] उसके बाद इन्होंने एक लफ्ज़ कहा वेटिकन ने [41:19] फतवा दिया। वेटिकन का फतवे से कोई ताल्लुक [41:21] नहीं है। दोनों कंट्राडिक्टरी अल्फ़ाज़ [41:23] हैं। उसके बाद उन्होंने कहा कि भई हमें [41:25] नहीं मालूम। अगर नहीं मालूम तो क्लियरली [41:27] कह दे ना कि नहीं मालूम है इसमें क्या हरज [41:29] है? तो वही तो मैं कह रहा हूं ना कि आप कह [41:31] दें कि नहीं मालूम लेकिन क्लेम क्यों कर [41:33] रहे हैं कि गॉड एक्सिस्ट नहीं कर रहा है। [41:36] [प्रशंसा] [41:39] आप कह दे नहीं मालूम है। हो सकता है हो [41:42] सकता ना हो। लेकिन आप क्लेम कर रहे हैं। द [41:44] मोमेंट यू से गॉड डज नॉट एक्सिस्ट। दिस इज [41:47] अ क्लेम एंड नाउ द बर्डन ऑफ प्रूफ इज अपॉन [41:50] यू टू जैसे हमारे ऊपर है। [41:53] और क्यों है मैं बताता हूं। क्यों है ये [41:55] भी मैं बताता हूं। फिलॉसोफिकली [41:58] जो क्लेम होता है ना सिर्फ ये नहीं होता [42:01] कि इंसान कहे पॉजिटिव क्लेम करे और [42:04] नेगेटिव क्लेम करे तो बर्डन अप्रूव नहीं [42:05] है। आप मिसाल के तौर पे मैं कहूं कि फुलां [42:08] उस कमरे में कोई नहीं है। मैंने एक नॉलेज [42:10] का क्लेम किया है। उस कमरे में कोई नहीं [42:13] है। मैंने एक नॉलेज का क्लेम किया। या तो [42:15] मैं कहूं मुझे नहीं पता हो भी सकता है [42:16] नहीं भी हो सकता है। दिस इज़ नॉट अ क्लेम। [42:18] लेकिन जब मैं कह रहा हूं कि वहां कोई नहीं [42:20] है। या मैं कह रहा हूं वहां कोई है। दोनों [42:22] क्लेम है और दोनों के ऊपर बर्डन ऑफ प्रूफ [42:24] है। हमारे ऊपर भी बर्डन ऑफ प्रूफ है। [42:26] मैंने कंटिंजेंसी आर्गुमेंट दिया। इसे [42:27] तोड़ कर दिखाइए। [42:29] [प्रशंसा] [42:32] आखिरी चीज इन्होंने कहा कि खुदा दुनिया [42:35] बनाने से पहले 150 साल पहले या करोड़ों [42:38] साल पहले क्या कर रहा था। अरे हजरत [42:42] चलें बहरहाल मैं जवाब दे देता हूं। आप [42:45] हमारे रिस्पेक्टेड पर्सनालिटी हैं। अगर आप [42:46] नहीं होते तो मैं ऐसे एंटरटेन ही नहीं [42:48] करता। [42:51] [प्रशंसा] [42:52] टाइम ये 100 साल पहले या 100 साल बाद पहले [42:56] बाद में अभी ये वो अल्फाज़ हैं जिनका [42:59] ताल्लुक टाइम से है। टाइम शुरू ही हुआ है [43:02] यूनिवर्स की बिगिनिंग के बाद। तो उसके [43:04] पहले खुदा क्या कर रहा था? सवाल ही [43:05] इलॉजिकल है। ये फैलेसी है। यानी आप ये कह [43:08] रहे हैं कि यूनिवर्स के बनने से पहले खुदा [43:10] क्या कर रहा था? टाइम के बनने से पहले [43:13] पहले का ताल्लुक टाइम से है। टाइम उस वक्त [43:15] था ही नहीं। तो ये सवाल ही इनवैलिड है [43:17] खुदा के ताल्लुक से। [प्रशंसा] [43:21] दूसरी चीज आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी जो [43:25] मैंने आपके सामने पेश की है। आपने बार-बार [43:28] ये प्रूफ किया और ये कह रहे हैं कि गॉड ऑफ [43:30] गैप्स। देखिए पहले नहीं मालूम था साइंस ने [43:32] कर दिया। सिंपल इसकी मिसाल से मैं समझा [43:34] देता हूं। जिस गैप्स की आप बात कर रहे हैं [43:37] ना साइंस उन गैप्स को जिन चीज के जरिए भी [43:40] प्रूव करेगा वो कंटिंजेंट ही होगा। अब [43:43] चाहे वो फोर्स हो, मैटर हो या एनर्जी हो। [43:47] लिहाजा सवाल हमारा उस वक्त भी वैलिड होगा [43:49] जब तक कि आप नेसेसरी बीइंग पे ना आ जाएं। [43:52] और इनफिनिट रिग्रेस पॉसिबल नहीं है ऑफ [43:54] कॉजेस इन प्रैक्टिकल वर्ल्ड। तो जाहिर है [43:57] कहीं रुकना पड़ेगा। जहां रुकेंगे वही खुदा [44:00] है। दूसरी चीज़ आपने [44:04] ये कहा क्या कह रहा था मैं? किस पॉइंट को? [44:15] जस्ट जस्ट जस्ट [44:19] हां जहां रुकेंगे वही खुदा है। बहरहाल तो [44:22] टाइम का जिक्र हो गया। गॉड ऑफ़ गैप सॉरी या [44:24] इसकी एक मिसाल आप ले लें। एक कार है। एक [44:28] साहब ने देखा कि भाई कार जो है उसके [44:32] व्हील्स कितने अच्छे लगे हुए हैं। सही जगह [44:34] पे स्टीयरिंग जो है कितने अच्छे जगह पे [44:38] लगी हुई है। और सीट्स कितने वेल डिज़ है। [44:41] कितनी प्रिसाइजली ये कार काम कर रही है। [44:44] तो जरूर कोई ना कोई इसे क्रिएट किया है। [44:46] किसी ने क्रिएट किया है। अब जावेद साहब आए [44:48] और कहे अरे जनाब बोननेट खोलिए। इसमें इंजन [44:50] है। इंजन इस कार को चला रहा है। हेंस [44:53] प्रूव्ड नो वन हैज़ क्रिएटेड द कार। दिस इज़ [44:55] इलॉजिकल। दिस इज़ इरशनल। आपने इंजन के जरिए [44:59] उस गैप को तो साबित किया लेकिन क्या उससे [45:04] कार की जो क्रिएशन है और उसका जो क्रिएटर [45:08] है ये इंपॉसिबल हो जाए ऐसा पॉसिबल है उसका [45:10] सवाल खत्म हो जाए ऐसा पॉसिबल है नहीं आपने [45:13] गैप्स को फिल करके कंटिंजेंट चीजों से [45:16] गैप्स को फिल करके हमारे ऑब्जरवेशन को और [45:18] ब्रॉड कर दिया अब हमें और पता चल गया कि [45:21] ये जो कार है इसका सिस्टम कितना ज्यादा [45:24] कॉम्प्लेक्स है। पहले कम समझते थे। अब [45:25] कॉम्प्लेक्सिटी और ज्यादा वाज़ हो गई। अब [45:27] हमें समझ में आ रहा है कि हमारी सर्टेनिटी [45:29] और बढ़ गई कि जरूर इस कार को किसी ना किसी [45:32] ने बनाया। यही मामला यूनिवर्स का है। [45:34] साइंस हमेशा फिजिकल वर्ल्ड की चीजों को ही [45:36] फिल करती जाएगी और फिजिकल चीजों से ही [45:38] करती जाएगी। चूंकि एंपेरिकल एविडेंस का [45:40] ताल्लुक फिजिकल वर्ल्ड से है। आप साइंस के [45:43] जरिए मेटाफिजिकल रियलिटी को कभी साबित [45:45] नहीं कर सकते। ये रॉन्ग टूल का इस्तेमाल [45:47] करना है। यह वही काम है कि आप मेटल [45:49] डिटक्टर से प्लास्टिक डिटक्टर करने चलें [45:52] जो कि जाहिर है सही नहीं है। थैंक यू। [45:55] [प्रशंसा] [45:59] जी। [46:01] ये आर्गुमेंट का राउंड टू है। [46:03] सात मिनट। [46:05] पहले तो मैं आपसे अर्ज करूं कि आपने कहा [46:07] कि जब कायनात ही नहीं थी तो वक्त भी नहीं [46:09] था, कुछ भी नहीं था। कैसे नहीं था? खुदा [46:11] था। [46:13] एक एक्सिस्टेंट तो था ना खुदा का तो जब [46:16] खुदा था तो व भी होगा। ऐसा नहीं है कि कुछ [46:19] भी नहीं था। खुदा था। अच्छा बाकी है कि [46:22] आपने कहा साहब आप साबित कीजिए। आपके पास [46:24] भी लॉजिक है या मेरे पास भी लॉजिक है आप [46:26] मेरा जिम्मेदारी नहीं है साबित करना कि [46:28] खुदा है। बर्टन रसेल ने बड़ी अच्छी बात [46:31] कही। [46:33] बर्टन रसेल ने बड़ी अच्छी बात कही है। मैं [46:35] आपसे अगर यह दावा करूं कि चाय की केतली [46:38] मिररी के चारों तरफ घूम रही है मार्स के [46:40] चारों तरफ तो ये आपका काम नहीं है कि आप [46:43] साबित करें कि कोई चाय की केतली नहीं है। [46:45] ये मेरा काम है। मैंने दावा किया है। ये [46:47] दावा तो मजहबी लोग करते हैं कि खुदा है। [46:50] मैं क्यों साबित करूं कि नहीं है? जब तक [46:52] आप मुझे कंफस नहीं कर देंगे मैं नहीं [46:54] मानूंगा। [46:56] आपकी जिम्मेदारी है। मेरी जिम्मेदारी नहीं [46:59] है। [47:01] दो यह कि यह जो आप कह रहे हैं जो गैप्स है [47:04] ये गैप्स जब जब किसी मजहब को चैलेंज करते [47:08] हैं। जब ऐसा कोई बात आती है तो हंगामा हो [47:11] जाता है। के जब वो चैलेंज करें किसी फेथ [47:15] को ये तमाम साइन जो है इसे मुख्तलिफ जगहों [47:20] पे मुख्तलिफ वक्तों में मजहब ने रोकने की [47:24] कोशिश की है। ये किताब है रिलजन एंड साइंस [47:27] बटर की पढ़िएगा अच्छी लगेगी आपको। तारीख [47:32] ही है साइंस मजहब की साइंस से उसका यही [47:35] रिश्ता है। अच्छा अब ये हम सोचे कि बहाल [47:39] ये वजूद जो है मजहब और ये बिलीफ इन गॉड [47:42] इंसान को बेहतर बना देता है। तो एक काम [47:45] कीजिए हिंदुस्तान वर्ल्ड का नक्शा लीजिए [47:47] और मार्क कीजिए कि रिलजन कहां-कहां ज्यादा [47:49] है। कहां-कहां चाहे वो लैटिन अमेरिका हो [47:52] या मिडिल ईस्ट हो या फस्ट हो या [47:55] हिंदुस्तान के वो इलाके जहां मजहबियत [47:57] ज्यादा है। रख दीजिए नक्शा अलग। अब दूसरा [48:01] नक्शा कि कहां-कहां नाइंसाफी, रिप्रेशन, [48:05] औरतों के हुकूक की पामाली, जुल्म, [48:08] डिक्टेटरशिप कहां है? नक्शा एक ही होगा। [48:14] तो आप मुझे बताएं के जो इसका तरकीब [48:18] इस्तेमाल क्या है? [48:20] खुदा का तरकीब इस्तेमाल तो बताइए। आप छोटी [48:23] सी दवा सड़क पे बेचते हैं उसकी भी तरकीब [48:25] इस्तेमाल बताते हैं। इसके इस्तेमाल से तो [48:27] फायदा ही नहीं हुआ किसी को। जो सारे के [48:31] सारे खराब मुल्क है, खराब समाज है वो सारे [48:34] जुल्म खुदा के नाम पे करते हैं। वो गलत [48:37] करते हैं, सही करते हैं। मुझे क्या लेना [48:39] देना उससे? इस्तेमाल से मालूम होता ना। एक [48:43] विस््की की बोतल कभी शायद देखी हो आपने। [48:45] लाल रंग की होती है। उस पे रोशनी और छिपड़ [48:47] इंतहाई खूबसूरत लगती है। क्या बिगाड़ रही [48:49] है किसी का? उसका इस्तेमाल गलत है। इसलिए [48:52] आप उसे नापसंद करते हैं। इसका इस्तेमाल [48:55] गलत है। इस तसवुर का [48:59] इस्तेमाल ही गलत है और हमेशा से गलत हुआ [49:01] है। आप देख लीजिए इंसानी तारीख देख लीजिए। [49:04] आज देख लीजिए हिंदुस्तान देख लीजिए। [49:05] दुनिया देख लीजिए। क्या हो रहा है? [49:09] इसे कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं? फेथ वाले [49:11] लोग क्या फेयर हैं? जस्ट हैं जो अपने [49:15] खुदाओं पे यकीन रखते हैं। वो किस तरह के [49:18] लोग हैं? [49:19] वो लोगों को इंसाफ देते हैं। वो बेहतर [49:21] इंसान बने। तो इस दवा का फायदा क्या है? [49:24] चलो बहुत फायदा हो रहा तो मैं इस्तेमाल कर [49:26] लूंगा। मुझे तो इस दवा का कोई फायदा दिखता [49:29] ही नहीं। मुझे तो ऐसा लगता मैं एक और बात [49:32] बताऊं। अगर कोई आदमी मजहबी है और अच्छा [49:35] आदमी है तो मैं उसकी बहुत इज्जत करता हूं। [49:38] इसलिए कि मेरा ख्याल है मजहबी आदमी का [49:40] अच्छा होना मुझसे अच्छा होने से ज्यादा [49:42] मुश्किल है। भाई हर चीज की एक लिमिट है। [49:47] आप इतना भाग सकते हैं, इतना नहीं भाग [49:49] सकते। इतना वजन उठा सकते, इतना नहीं उठा [49:51] सकते। इतना दूर देख सकते हैं, इतना दूर [49:54] नहीं देख सकते। उसी तरह कॉमन सेंस कहता है [49:56] कि आप में नेकी का भी एक कोटा होगा। अब आप [49:59] अगर सुबह जाते हैं अपनी इबादतगाह और इबादत [50:03] करते हैं तो बाहर निकलते हैं तो आप तो यही [50:05] महसूस करते हैं कि आपने बहुत अच्छा काम [50:07] किया। आपकी नेकी का एक बहुत बड़ा कोटा [50:09] खर्च हो गया जिससे किसी का कोई फायदा नहीं [50:11] होगा। मैं तो नहीं जाता हूं तो मुझे तो [50:14] किसी को खाना खिलाना पड़ेगा। किसी बेवा की [50:16] मदद करनी पड़ेगी। मैं अपना कोटा कैसे [50:19] कंज्यूम करूं? आप अपना कोटा सारे मजहबी [50:22] लोग इंतहाई यूज़लेस कामों में यूज़ करते [50:25] हैं। उसके बाद भी अगर आप में बचती है थोड़ी [50:27] सी शराफत तो भाई वाह क्या बात है। [50:31] [प्रशंसा] [50:35] एक तो मुझे यह बात बहुत अच्छी लग रही है [50:37] कि दोनों ही विद्वान समय को मानते हैं और [50:42] बहुत समय से अपनी दलीलें और बाज दफा समय [50:46] से पहले अपनी तकरीरें पूरी करके अपनीपनी [50:48] कुर्सी पर बैठ रहे हैं। ये इस आर्गुमेंट [50:51] का राउंड टू पूरा हुआ। अब रिबर्टल का [50:54] राउंड टू है और उसके बाद क्रॉस [50:56] एग्जामिनेशन होगा। [50:59] नहीं आपका आर्गुमेंट हो गया सर। [51:03] हमारे यहां स्कूल के सिलेबस में पंच [51:06] परमेश्वर कहानी पढ़ाई जाती है प्रेमचंद जी [51:08] की लिखी हुई। आप निश्चिंत रहिए। आपके कोई [51:10] राउंड मैं मिस नहीं होने दूंगा। रिबटल का [51:12] राउंड टू मुफ्ती शमाल नदी साहब। [51:19] असल में जो हकीकी प्रॉब्लम है असल [51:22] प्रॉब्लम है वो यह है कि जावेद साहब के [51:24] पास कासेप्ट ऑफ गॉड क्लियर नहीं है। [51:27] इन्होंने कहा कि कायनात से पहले खुदा तो [51:30] था तब भी तो टाइम होगा कि खुद कायनात टाइम [51:34] कायनात का हिस्सा है। हम खुदा उस खुदा को [51:38] मानते हैं। नेसेसरी बीइंग का टाइमलेस होना [51:40] जरूरी है। क्योंकि वो टाइम का क्रिएटर है। [51:42] जब उसने टाइम को क्रिएट किया तो वो खुद [51:44] टाइम पे कैसे होगा? उसने जब स्पेस को [51:46] क्रिएट किया तो खुद स्पेस में कैसे होगा? [51:48] अगर वो टाइम एंड स्पेस को पहले से ही उस [51:51] का पाबंद है तो फिर किस चीज को उसने [51:52] क्रिएट किया? लिहाजा ये सवाल गलत है के [51:55] खुदा था तो टाइम होगा। बिल्कुल नहीं। टाइम [51:58] के पाबंद हम है खुदा नहीं है। हम फिजिकल [52:00] वर्ल्ड से ताल्लुक रखते हैं। वो [52:02] मेटाफिजिकल रियलिटी है। दूसरी चीज [52:04] इन्होंने मिसाल दी कि चाय की केतली हवा [52:06] में घूम रही होगी और पता नहीं शायद वो [52:08] बर्टन रसेल का उन्होंने हवाला दिया। [52:10] बहरहाल यही प्रॉब्लम है। प्रॉब्लम यही है [52:13] कि हम चीजों के दरमियान डिफरेंशिएट नहीं [52:15] कर पाते हैं। ये जो आपने मिसाल दी ये [52:17] इमेजिनेशन है और मैं जो साबित कर रहा हूं [52:20] वो लॉजिकल नेसेसिटी है। [52:24] [प्रशंसा] [52:25] आप इमेजिन करने आए तो कुछ भी करें। जुपिटर [52:27] में पिंक एलीफेंट होगा, यूनिकॉर्न होगा [52:29] करें। उससे कायनात पे क्या फर्क पड़ता है? [52:32] उससे आप लॉजिकल नेसेसिटी साबित नहीं कर [52:34] सकते। मैं तो उस प्राइम कॉज की बात कर रहा [52:37] हूं। उस नेसेसरी बीइंग की बात कर रहा हूं [52:39] जिसके बगैर इस कायनात का एकिस्टेंस मुमकिन [52:42] नहीं है। दूसरी चीज मजहब को साइंस चैलेंज [52:44] करती है वगैरह-वगैरह ये हमारा टॉपिक ही [52:46] नहीं है। मैं मैं इस पे बात करूंगा तो फिर [52:48] मेरा वक्त चला जाएगा। मजहब के ऊपर क्योंकि [52:50] हमारी डिस्कशन नहीं है। साइंस को मजहब और [52:54] बिलखसूस मैं और हमारा वर्ल्ड व्यू कम से [52:57] कम साइंस को पीछा नहीं पीछे नहीं करता है। [52:59] साइंटिज्म की मज़म्मत करता है। इसकी वजाहत [53:01] मैंने पहले कर दी। दूसरी ची चीज इन्होंने [53:04] कहा वर्ल्ड का नक्शा लीजिए। वर्ल्ड मैप [53:06] लीजिए दो अलग-अलग जगह की। हजरत मैंने ये [53:09] होमवर्क किया था और मैंने मिडिल ईस्ट [53:11] मिडिल ईस्ट का एक नक्शा लिया और यूरोप का [53:14] एक नक्शा लिया। ये मजहबी इलाका और ये [53:18] लिबरल और एथस्ट इलाका। मुझे पता चला कि [53:21] सबसे ज्यादा रेप केसेस जो है वहां पर है। [53:25] [प्रशंसा] [53:29] मुझे ये पता चला यूएन की रिपोर्ट के [53:31] मुताबिक। मैं ये अपने घर से नहीं लेके आ [53:33] रहा कि जो वर्किंग वुमेन है यूरोपियन [53:36] कंट्रीज में उसमें 81% [53:38] वुमेन सेक्सुअल हरासमेंट का वर्क में जो [53:41] शुमार ये मिडिल ईस्ट में नहीं हो रहा है। [53:43] [प्रशंसा] वो मजहबी लोग हैं इसलिए नहीं हो [53:45] रहा है। दूसरी चीज आपने ये कहा के मजहबी [53:50] आदमी का अच्छा होना हमारे अच्छे होने से [53:53] बहुत मुश्किल है। बहुत मुश्किल है। तो [53:56] इसका मतलब ये है कि गॉड के अलावा आपके पास [53:58] अच्छे और बुरे का कोई स्टैंडर्ड है। मैं [54:01] चाहूंगा कि कन्वर्सेशनल स्टाइल वाले [54:04] डिस्कशन और सेगमेंट पे इसी पे बात कर लेते [54:06] हैं। थैंक यू वेरी मच। [प्रशंसा] [54:13] ये रिबर्टल का राउंड टू है। आपके पास 5 [54:16] मिनट का वक्त है और इसके बाद क्रॉस [54:19] एग्जामिनेशन शुरू करेंगे। आप चाहे तो जो [54:21] इन्होंने सवाल पूछे उनके जवाब आप रिबर्टल [54:23] में भी दे सकते हैं। [54:24] जी [54:26] देखिए पहले तो ये बात कि ये मिसाल गलत [54:29] नहीं है। गलत है। इन्होंने पहले ही हमको [54:31] डिस्म कर दिया। कह अकल से मामला सॉल्व [54:34] नहीं हो सकता। लॉजिक से आप पहुंच नहीं [54:36] सकते। ये एक मेटाफिजिकल चीज है। [54:38] मेटाफिजिकल अजीब सा लब्ज़ है। ठीक से किसी [54:40] को माने नहीं मालूम इसके तो ऐसा लगता है [54:42] कुछ बड़ी चीज है। अरे भाई क्या होता है [54:45] मेटाफिजिकल? बताओ खड़ी हो। ये एक लफज़ है जो [54:50] कहीं भी इस्तेमाल हो जाता है। जब आप एक [54:53] बात कर रहे हैं और आप मुझसे बहस कर रहे [54:55] हैं तो मुझे मेटाफिजिकल मत बताइए। आप [54:57] लॉजिकली मुझे प्रूफ किए और अगर लॉजिकली आप [55:00] नहीं बात करते साहब ये मेटोफिजिकल है तो [55:02] फिर हम आप बात क्या कर रहे हैं मेरा आपका [55:04] किस जुबान में कन्वर्सेशन हुआ [55:07] और ये कहना कि वक्त पहले नहीं था तो फिर [55:10] क्यों कहते हैं ये हमेशा से और हमेशा [55:12] रहेगा हमेशा वक्त है तो आप कैसे कहते हैं [55:16] वो हमेशा से है और हमेशा रहेगा हमेशा का [55:19] मतलब है कोई वक्त अगर वक्त ही नहीं है तो [55:22] हमेशा कैसे [55:25] बहरहाल वो रहेगा। अब मैं ये देखता हूं। [55:29] आपने कहा ना कि वहां रेप ज्यादा होते हैं। [55:31] तो हम एक बात देखते हैं कि ये दुनिया [55:34] जिसमें वो कादरे मुतलक है। जिसकी मर्जी के [55:36] बगैर पत्ता भी नहीं हिलता वो ओमनीपोटेंट [55:39] है। ये दुनिया चल कैसे रही है? और इस [55:43] दुनिया का हाल क्या है? 45,000 [55:47] बच्चे [55:49] जो 10 साल की उम्र से कम थे वो गदा में [55:54] मरे हैं। [55:56] भूख से काला हांडी में बच्चे मरते हैं और [55:59] डिप्थेरिया से मरते हैं। डिप्थेरिया अजीब [56:02] मर्ज़ है। गले में जाली मरना शुरू होती है। [56:05] बच्चा नीला हो जाता है। गरीब का बच्चा [56:08] इसलिए कि वो पास आती है। ये कादरे मुक है [56:11] जो चाहे कर दे। इससे आप दुआएं मांगते हैं [56:14] हमारी ये काम कर दे वो कर दे तो इसका मतलब [56:16] है डे टू डे लाइफ में वो इंटरफेयर करता है [56:20] और ये देख रहा है वो अगर वो वाकई भी है [56:23] फॉर डिस्कशन सेक तो मैं जब दुनिया देखता [56:26] हूं तो मेरे दिल में उसके लिए कोई इज्जत [56:28] नहीं पैदा होती क्या कर रहे हो तुम [56:32] [प्रशंसा] [56:33] पूरे ऑल पावरफुल हो ओमनीपोटेंट हो ओमनी [56:37] प्रेजेंट हो तुम तो वहां गदा में रहेगे ना [56:40] तुम हर जगह हो तुम देख रहे थे कि बच्चे की [56:43] कैसे धज्जियां उड़ गई। तुम देख रहे थे और [56:47] तुम चाहते हो मैं तुम्हारी परश कर तुम हो [56:50] भी। [56:52] अरे यार इससे अच्छे तो हमारे चीफ प्राइम [56:54] मिनिस्टर हैं। कुछ तो ख्याल करते हैं। [56:59] [हंसी] [57:00] आप किसकी इबादत कर रहे हैं? अगर वो है भी [57:03] यह दुनिया नाइंसाफी से जुल्म से जब्र से [57:07] तशद्दुद से भरी हुई है और आप ये मत कहिएगा [57:11] कि वो देख रहा है और वो बताएगा एक दिन अगर [57:14] वो देख रहा है और इंटरफेयर नहीं करता तो [57:16] आप दुआ क्यों मांगते आप कहते हैं मेरा ये [57:19] काम करा दे इसका मतलब है वो दखल दे सकता [57:22] है वो आपको नौकरी दिलवा सकता है भले दूसरे [57:26] आदमी को ना मिले मगर आपका काम कर देगा [57:29] क्योंकि आपने दुआ मांगी है तो तो जब वो [57:31] आपको नौकरी दिला सकता है, लड़की की शादी [57:34] कर सकता है, बेटे को ग्रीन कार्ड दिलवा [57:36] सकता है तो कम से कम ये जो मर रहे हैं [57:39] बच्चे इनको रोकते हैं। कुछ तो करें। मुझे [57:42] तो दुनिया में इस दुनिया का कोई मालिक है। [57:44] इसका ओमनीपोटेंट [57:47] कोई रूलर है। और ये दुनिया ऐसी चल रही है। [57:51] मैं तो चाहूंगा कि भाई ना हो। अगर हो तो [57:55] बड़ी शर्मिंदगी की बात है। शुक्रिया। [57:59] [प्रशंसा] [58:03] देवियों और सज्जनों इस बहस के दो राउंड और [58:07] दो रिबटल पूरे हो चुके हैं। अब सबसे जरूरी [58:11] और सबसे मुश्किल राउंड शुरू हो रहा है [58:14] क्रॉस एग्जामिनेशन का। अब इन विद्वानों की [58:17] सज्जनता की एक परख भी होगी और वक्त हमने [58:20] 16 मिनट का तय किया है। अह पहला सवाल आप [58:24] पूछना चाहेंगे? [58:26] जी बिलकुल। [58:28] पहले बोले [58:30] [हंसी] [58:30] आप माइक ले लीजिएगा हाथ में [58:34] नीचे से [58:38] जी मैं मैं [58:41] ये डाइस हटा सकते हैं क्या हम थोड़ा [58:44] क्विकली [58:47] डाइस पीछे कर दीजिए बस थोड़ा सा ताकि ये जो [58:51] दाएं बाएं लोग बैठे हैं इसे हटा ही दीजिए [58:53] अब हम वहां तो जाने वाले नहीं आराम से [58:56] आराम [58:57] दोनों तरफ से [59:08] इस बीच आप लोग भी अपनेप सवाल तैयार कर [59:10] लें। ये ध्यान रखेंगे कि मैं यहां से सवाल [59:14] लूंगा। आप लोगों को अपना हाथ ऊपर करना है। [59:16] अपना नाम बताना है और अधिकतम तीन वाक्यों [59:20] में अपना सवाल पूरा करना है। कई लोग सवाल [59:22] की जगह भाषण देने लगते हैं। उससे आज बचना [59:25] है। [59:27] जी मुफ्ती साहब पहला सवाल आपका 16 मिनट है [59:30] हम दोनों लोगों के सवाल जी [59:31] जी बहुत शुक्रिया आप आपकी जो अभी बात हुई [59:35] बहुत अहम थी मैं इसको चाहूंगा कि आगे [59:36] डिस्कस करूं लेकिनकि अभी इस वो सेगमेंट है [59:40] क्रॉस एग्जामिनेशन [59:42] तो सबसे पहला सवाल आपसे ये है कि जो मैं [59:46] इतनी देर से कॉन्टिंजेंसी आर्गुमेंट आपको [59:49] बता रहा था ये अक्कल से ही बता रहा था [59:51] हजरत आप ये बताएं के आप इनफिनिट रिग्रेस [59:55] ऑफ कॉज को पॉसिबल मानते हैं या नेसेसरी [59:57] बीइंग के एक्सिस्टेंस को सही समझते हैं। [59:59] क्योंकि दो ही ऑप्शन हो सकता है। आप ये [01:00:01] बताएं। [01:00:02] देखिए आपको मैं ईमानदारी से बात करूंगा। [01:00:04] एक तो मैं कॉन्टिजेंसी वर्ड ठीक से समझता [01:00:06] हूं और इस वक्त भी जो आपने अंग्रेजी के [01:00:09] अल्फाज़ इस्तेमाल किए वो जरा थोड़े से मुझे [01:00:12] डिफिकल्ट और कॉम्प्लिकेटेड लगे। तो आप जरा [01:00:14] सिंपल सवाल में ये सवाल कर सकते हैं। [01:00:16] बिल्कुल कर सकता हूं। जी [01:00:18] यूनिवर्स की हर चीज कंटिंजेंट होने का [01:00:20] मतलब ये है कि वो अपने एक्सिस्टेंस में [01:00:22] किसी के ऊपर डिपेंडेंट है। जो भी चीज [01:00:25] डिपेंडेंट होगी वो चीज इंडिपेंडेंट नहीं [01:00:27] हो सकती तो उसका कोई ना कोई कॉज होगा। तो [01:00:30] अब आप क्या समझते हैं कि ये इनफिनिट [01:00:32] रिग्रेस है यानी कॉज पर कॉज कॉज पर कॉज [01:00:35] कॉज पर कॉज और कभी कोई यानी एंडलेसली चलता [01:00:37] रहा। क्योंकि अगर ऐसा होगा तो हम तो [01:00:39] एक्सिस्टेंस में आते ही नहीं। लॉजिकली ये [01:00:41] मुत्तफक अल चीज है। मुत्तफक अल अग्रीड [01:00:44] अपॉन ओके [01:00:47] इस पे हमने एग्री किया था कि मुश्किल शब्द [01:00:49] आएगा तो अर्थ बताना पड़ेगा। [01:00:50] तो इनफिनिट रिग्रेस तो पॉसिबल नहीं है। तो [01:00:52] कहीं ना कहीं आपको रुकना पड़ेगा ऐसे [01:00:54] नेसेसिटी पर। [01:00:55] नहीं कोई जरूरत नहीं रुकने की। किसने कहा [01:00:58] रुकना पड़ेगा? आप रुकते हैं वो होता है। [01:01:00] आप नहीं रुकते। आप कहते हैं वो हमेशा से [01:01:03] है। जब उस वक्त से है जब वक्त नहीं था। आप [01:01:07] कहां रुकते हैं? कि अब हुआ था वो। आप नहीं [01:01:10] कहते। हम क्यों नहीं मान सकते कि यूनिवर्स [01:01:12] जो है और बल्कि मल्टीिवर्स जो है वो हमेशा [01:01:16] से है वो बनती है सब एक हमारे यहां एक चीज [01:01:20] है ब्लैक होल वो समेट लेता है वापस फिर [01:01:23] ब्लास्ट होता है फिर फैल जाता है और इसमें [01:01:26] हमारी तो खैर कोई औकात ही नहीं है इंसान [01:01:28] की एक छोटे से दर्रे पे हम 50 60 साल की [01:01:32] उम्र रखते हैं जो करोरा अरबों साल की [01:01:36] कायनात हो उसमें और पैदा भी निहायती [01:01:39] बेहूदा वजह से हुए थे। तो तो इसमें ये [01:01:43] सोचना कि इसकी वजूहात और ये क्यों है? ये [01:01:47] डिपेंडेंट है। ये हम देख रहे हैं। क्या [01:01:49] मालूम? आप सोचिए कि ये जो फैल रही है [01:01:52] कायनात ये कहां फैल रही है? ये कहां जा [01:01:55] रही है? और ये फैल क्यों रही है? अरे बना [01:01:58] ली थी तुमने। रुको भैया हमें काफी है। ये [01:02:00] फैल क्यों रही है? ये और कौन सी कायनात? [01:02:03] जिसे मैं दूरबीन से देखता हूं तो दो [01:02:05] बिलियन लाइट ईयर पे है। उससे मेरा कोई [01:02:08] वास्ता ही नहीं है। दो बिलियन ईयर यानी [01:02:11] अगर मैं 80 थाउजेंड माइल्स पर सेकंड से [01:02:16] चलूं तो 20 करोड़ साल में वहां पहुंच [01:02:19] जाऊंगा। इसकी जरूरत क्या थी? ये दुनिया ये [01:02:23] कायनात तो इंसान अशरफुल मखलूकात के लिए [01:02:25] बनाई गई ना। तो ये सब [01:02:27] टर्म समझ में नहीं आया। [01:02:31] इसमें कोई खास समझने वाली बात थी नहीं। [01:02:35] ये जो अल्टीमेट कहा ये जाता है कि ये जो [01:02:38] पूरी यूनिवर्स है ये जो दुनिया है ये [01:02:40] इंसान के लिए बनाई गई। [01:02:42] अच्छा ये सब इंसान के लिए क्यों साहब सही [01:02:44] है ना? [01:02:44] बिल्कुल लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि किसी [01:02:46] चीज के पीछे रीज़ आपको नहीं पता तो रीज़ [01:02:48] नहीं है। इसे कहते हैं [01:02:51] मुझे मुझे नहीं पता। लेकिन मेरी [01:02:53] जिम्मेदारी नहीं है। वो बिल्कुल सही कहा [01:02:55] था उसने। बल्टन रसल ने। आपने उसे मजाक में [01:02:58] टाल दिया कि भाई आप एक दावा कर रहे हैं। [01:03:01] मैं क्यों कहूं कि ये गलत है दावा। आप [01:03:03] प्रूफ कीजिए। मेरे पे जिम्मेदारी ही नहीं [01:03:06] है। मैंने थोड़ी कहा है। आप प्रूफ कीजिए [01:03:09] कि यह सही है। [01:03:10] आप आर्गुमेंट ऑफ कंटजेंसी का जवाब सवाल [01:03:12] पूछना चाहेंगे? [01:03:13] आप सवाल पूछना चाहेंगे मुफ्ती साहब से? [01:03:17] क्योंकि ये क्रॉस एग्जामिनेशन का दौर है। [01:03:19] आप जैसे पहले बोल रहे थे फेथ को लेके कुछ? [01:03:21] मैं ये पूछना चाहूंगा कि खुदा ने जो भी [01:03:24] रेवोलेशन किए है एक मजहब के नहीं बहुत से [01:03:26] मजहबों में किए है अलग-अलग रेवोलशन है। [01:03:28] कहीं कुछ एक बातें हैं कंट्राडिक्शन भी है [01:03:31] आपस में कहीं कुछ आप कर सकते हैं कहीं कुछ [01:03:34] नहीं कर सकते। ऐसा नहीं है कि सबकी कोड ऑफ़ [01:03:37] मोरल एक है। तो [01:03:42] ये [01:03:44] किस्सा क्या है? अब आप ये देखिए कि मुझे [01:03:47] कभी-कभी लगता है कि ये जो फुटबॉल फाइनल [01:03:50] होता है [01:03:51] लाखों लोग होते हैं। फिर वो टीवी कवर करती [01:03:53] करोड़ों लोग। अगर उसमें खुदा की एक घूम [01:03:56] आवाज आ जाती मैं गॉड हूं। तो सारे लोग अभी [01:04:00] सुन लेते और टीवी पे भी सुन लेते किस्सा [01:04:03] खत्म होता। ये इतनी राजदारी क्या है कि [01:04:06] तुम सामने कुछ तो सबूत दे दो हमें। सॉलिड [01:04:09] ये कह साहब ये यूनिवर्स कैसे बनेगा? इससे [01:04:12] मसला क्या हल होगा? मैं पूछूंगा आपसे खुदा [01:04:14] कैसे बना? क्यों नहीं पूछूंगा? कैसे बना? [01:04:17] बल्कि वो तो कायनात से कहीं ज्यादा [01:04:20] इंटेलिजेंट है। कायनात से कहीं ज्यादा जी [01:04:22] वो हमेशा से सही आप कहेंगे मैं मान लूंगा। [01:04:26] अच्छा दोयम वो काद मुखल यानी कादरे मुख का [01:04:30] मतलब ओमनीपोटेंट है। जो चाहे कर सकता है। [01:04:33] आपको नौकरी दिलवा सकता है। आपकी अच्छी जगह [01:04:36] शादी करवा सकता है। आपके पड़ोसी का मुकदमा [01:04:40] हरवा सकता है। आपको जिता सकता है। सब काम [01:04:42] करता है। [01:04:42] थोड़ा सा माइक [01:04:44] वो इस दुनिया को चला कैसे रहा है? [01:04:47] यह दुनिया कैसे चल रही है? आपको इसमें [01:04:49] हैरत नहीं होती या कयामत के बाद कभी एक [01:04:53] जस्टिस होगा जब ये बच्चा मर चुका होगा [01:04:56] जिसकी धज्जियां उड़ गई बम से इसको इंसाफ [01:04:59] मिलेगा तब [01:05:01] अच्छा [01:05:02] अब जवाब दूं [01:05:03] मैं इसीलिए आपकी तरफ [01:05:05] सबसे पहले आपने रेवोलेशन और स्क्रिप्चर की [01:05:08] बात की इस पे मैं बात कर सकता हूं लेकिन [01:05:10] आज नहीं करूंगा क्योंकि वक्त कम है कभी और [01:05:12] इस पे डिस्कस करेंगे मैं तैयार हूं उसप भी [01:05:14] बात करने के लिए [01:05:14] ये अभी से राउंड टू की भूमिका तय हो रही [01:05:17] है डस गॉट एक्सिस्ट राउंड टू [01:05:20] जीकि आज गॉड के एक्सिस्टेंस पे बात है तो [01:05:23] मैं उसी के रिलेटेड जो है आपके सवालात को [01:05:26] एंटरटेन भी करूंगा और मैं भी पूछूंगा। [01:05:28] आपने कहा कि आपने साबित ही नहीं किया जबकि [01:05:31] आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी बुनियादी [01:05:33] आर्गुमेंट है। [01:05:34] आप मुझे कॉनंटिंजेंसी का मतलब बताइए। आपका [01:05:36] मतलब क्या है? कंटिंजेंसी? कंटिंजेंसी का [01:05:39] मतलब यह हुआ के हर वो वजूद जो किसी भी चीज [01:05:44] का पाबंद है। हर वो वजूद या हर वो चीज जो [01:05:47] अपने एकिस्टेंस में किसी भी चीज के पाबंद [01:05:50] है और उससे बाउंड है। उसको उसकी जरूरत है। [01:05:53] उस पर डिपेंड करती है। तो जाहिर सी बात है [01:05:55] कि उसका कोई ना कोई कॉज होता है। ये तो [01:05:57] अक्ल की बात है। ये आप रीजनिंग की बात [01:05:59] करते हैं। मैं वही कर रहा हूं। दूसरी चीज [01:06:01] आपने ये बात कही कि [01:06:04] इतने बिलियन लाइट इयर्स दूर है उसका मेरा [01:06:07] क्या लेना देना फिर मेरे ख्याल से आपको ये [01:06:09] नहीं कहना चाहिए आई एम आई थिंक देयर फॉर [01:06:12] आई एम एन एथिस्ट आपको सोचना चाहिए सिर्फ [01:06:14] आप एक लिमिटेड दायरे में रहकर नहीं सोचे [01:06:17] बल्कि बाहर निकल कर सोचें आपने तीसरा सवाल [01:06:20] किया आपने दो तीन सवाल एक साथ [01:06:21] ऐसी बातें ना कीजिए कुछों को एतराज हो [01:06:23] जाएगा आप पे कि आप कुछ भी सोचिए ये इजाजत [01:06:27] आपको है नहीं मुझे है [हंसी] [01:06:34] [प्रशंसा] [01:06:35] जी आप आपने प्रॉब्लम ऑफ इविल के ताल्लुक [01:06:39] से सवाल किया और बार-बार आप एक लफ्ज रिपीट [01:06:41] कर रहे हैं के ओमनीपोटेंट गॉड है। ऑल [01:06:44] पावरफुल गॉड है। यही तो दरअसल समझना है कि [01:06:48] गॉड का कांसेप्ट क्या है? प्रॉब्लम ऑफ [01:06:50] इविल जो है प्रॉब्लम ऑफ इविल दर हकीकत दो [01:06:53] असमशन पर कायम है। अगर आप इन दो असंप्शनंस [01:06:55] को समझ जाएं तो ये प्रॉब्लम प्रॉब्लम नहीं [01:06:57] रहेगी। आर्गुमेंट आपको समझ में आ जाएगी कि [01:06:59] ये कोलैप्स कर जाता है। पॉइंट नंबर वन [01:07:01] यानी जो आपका सबसे पहला फॉल्स असमशन है कि [01:07:05] गॉड मर्सफुल है, ओमनीपोटेंट है। दुनिया [01:07:08] में जुल्म हो रहा है। लेकिन आपको ये समझना [01:07:10] चाहिए कि हमारे वर्ल्ड व्यू के मुताबिक [01:07:12] गॉड सिर्फ ओमनीपोटेंट और सिर्फ मर्सफुल [01:07:14] नहीं है बल्कि वो ऑल वाइज भी है और वो ऑल [01:07:17] नोइंग भी है। उसके हर काम के पीछे हिकमत [01:07:20] और विज़डम है। ये कोई जरूरी नहीं है कि वो [01:07:22] हिकमत और विज़डम आपको समझ में आए या मुझे [01:07:24] समझ में आए। अगर आप जो समझ रहे हैं उसके [01:07:26] मुताबिक आप फैसला कर रहे हैं। ये लिमिटेड [01:07:28] पर्सपेक्टिव से आर्गुमेंट है और इस चीज को [01:07:30] हम अपनी दुनिया में अपने लाइफ में डेली [01:07:33] लाइफ में इस प्रिंसिपल को एक्सेप्ट करते [01:07:34] हैं। हम जब किसी डॉक्टर के पास जाते हैं [01:07:37] डॉक्टर के पास जाकर वो अगर उसने हमें कोई [01:07:39] दवाई दी है तो हम ये तो नहीं कहते कि जब [01:07:42] तक आपके पास जितना नॉलेज और जितना विज़डम [01:07:44] नहीं है आपने क्यों ये दवाई दी है तब तक [01:07:46] हम इस चीज को एक्सेप्ट नहीं करेंगे। नहीं [01:07:48] कहते। हम उसकी अथॉरिटी को तस्लीम करते [01:07:50] हैं। क्यों? क्योंकि उसकी हम जानते हैं कि [01:07:52] वो नॉलेजेबल है। वो विज़डम वाला है। हमसे [01:07:55] ज्यादा नॉलेज और हमसे ज्यादा विज़डम है। [01:07:56] बताएं सर। [01:07:57] नहीं डॉक्टर में खुदा में बड़ा डिफरेंस है। [01:08:00] डॉक्टर पढ़ा लिखा होता है। एक तो मैं उसकी [01:08:03] बात सुनूंगा। [01:08:05] दो नहीं कुछ जवाब तो ये भी नहीं है। [01:08:08] सर प्लीज आप [01:08:09] अगर सब ऑडियंस से बोलने लगेंगे तो फिर [01:08:11] मतलब नहीं इस बहस में। [01:08:12] मतलब आप ये कहें कि क्योंकि आप डॉक्टर पे [01:08:14] बिलीव करते हैं इसलिए खुदा पे बिलीव [01:08:16] कीजिए। क्या [01:08:16] ये मिसाल आपको समझाने के लिए [01:08:18] आर्गुममेंट है इस पे आपको एतराज नहीं है [01:08:22] तो [01:08:25] सिंपल बात ये है कि मैं अगर ये यकीन कर [01:08:28] लूं कि एक ओमनीपटेंट उसकी मसलहत है ये जो [01:08:31] बच्चे मर रहे हैं ये मसलहत है उसकी मुझे [01:08:35] नहीं चाहिए थी मसलहत [01:08:36] उसकी मसलहत नहीं यही तो समझना है [01:08:38] मतलब एक्सपीरियंस [01:08:40] अच्छा [01:08:40] इस आपने अभी मेरी बात पूरी सुनी नहीं [01:08:43] मैंने कहा आपका पूरा आर्गुमेंट दो फॉल्स [01:08:45] असमशन पर है। एक फॉल्स असमशन मैंने बता [01:08:48] दिया। दूसरा फॉल्स असमशन ये है कि इस [01:08:51] दुनिया में इविल के होने का कोई गुड रीज़ [01:08:53] नहीं है। जबकि हमारे पास बाज़ रीज़ंस मौजूद [01:08:56] हैं। हमारे पास बाज़ वजूहात मौजूद हैं। अगर [01:08:58] इस दुनिया में इविल ना हो तो आप गुड को [01:09:00] डिफाइन कैसे करेंगे? अगर जुल्म ना हो, आप [01:09:02] इंसाफ को समझेंगे कैसे? अगर तारीकी ना हो, [01:09:04] तो आप लाइट को समझेंगे कैसे? [01:09:08] [प्रशंसा] [01:09:08] बहुत अच्छे। [01:09:09] अभी और सुन अभी और बाकी है। [01:09:11] ये तो बात बहुत पसंद आई साहब मुझे के जब [01:09:14] तक रेप ना हो तब तक औरतों की इज्जत का [01:09:16] ख्याल आप [01:09:17] आपने मेरा जवाब पूरा सुना ही नहीं। [01:09:18] जब तक के बच्चों का कत्ल ना किया जाए तब [01:09:21] तक आपको बच्चों की मासूमियत की इज्जत [01:09:23] आपने पूरा जवाब सुना ही नहीं। [01:09:24] क्या बात है? क्या आपने नुक्ता निकाला [01:09:26] हुआ? [01:09:27] आपने पूरा जवाब सुना ही नहीं। आप सुन ले। [01:09:29] मेरी बात सुन लें। ये मैंने आपको एक चीज [01:09:30] बताई। दूसरी चीज इस दुनिया में हम आए हैं [01:09:34] टेस्ट के लिए। हमारा टेस्ट हो रहा है और [01:09:35] हर इंसान का अलग-अलग अंदाज में टेस्ट होता [01:09:38] है और इस दुनिया में अगर इविल मौजूद है तो [01:09:41] वो इविल जरिया है हमारे अंदर ह्यूमन नोबल [01:09:44] क्वालिटीज को डेवलप करने का और अलग-अलग [01:09:47] फील्ड में प्रोग्रेस करने का और अगर हमारे [01:09:50] अंदर और इस दुनिया में इविल नहीं होता तो [01:09:53] बताइए टेस्ट का मतलब क्या होता है? अगर [01:09:55] मैं अपने स्टूडेंट को एमसीक्यूस दूं और [01:09:57] उसमें सिर्फ राइट आंसर लिख कर दे दूं और [01:09:59] कहूं तुम्हारा टेस्ट हो गया। ये मीनिंगलेस [01:10:00] है। इस दुनिया में अगर हम टेस्ट के लिए आए [01:10:02] हैं तो जाहिर है गुड एंड इविल दोनों मौजूद [01:10:05] है। [01:10:07] [प्रशंसा] [01:10:08] तो अगर गुड एंड इविल दोनों मौजूद है तो ये [01:10:11] इवल भी खुदा का बनाया हुआ है। [01:10:13] जी हां खुदा का बनाया हुआ है। लेकिन [01:10:14] अच्छा चलो अच्छी बात है। [01:10:15] जी बिल्कुल। [01:10:16] तो अभी अभी तो ये है कि जो मेजॉरिटी [01:10:21] है दुनिया में वो इविल है। तो ये खुदा [01:10:24] एक्चुअली इविल के साइड पे लग रहा है मुझे। [01:10:26] बिल्कुल मेजॉरिटी में तो वो है। [01:10:29] [प्रशंसा] [01:10:30] क्या बात कर रहे हैं भाई आप कोई भी जो [01:10:32] मुसिफ होगा चाहे आपका अपना घर हो जिसके आप [01:10:35] सबसे बड़े हैं चाहे आपकी ऑर्गेनाइजेशन हो [01:10:38] जो आप चलाते हैं वहां पर आप इवल रखेंगे [01:10:42] साबित करने को कि बाकी लोग शरीफ है [01:10:44] मेरी बात सुनिए [01:10:44] क्या ये आर्गुमेंट ही गलत है कि जब तक के [01:10:47] कोई इवल नहीं होगा तब तक के शरीफ आदमी [01:10:49] शरीफ नहीं लगेगा [01:10:50] अगर एग्जामिनर इ गलत ऑप्शन दे रहा है तो [01:10:53] एग्जामिनर इविल नहीं हो गया जो गलत ऑप्शन [01:10:56] को सेलेक्ट कर रहा है वो फेल होगा क्रिएटर [01:10:58] ने इविल को बनाया है लेकिन वो इविल नहीं [01:11:01] है। [01:11:01] सुनिए मेरी बात सर लेट मी कंप्लीट सर [01:11:05] क्रिएटर ने इविल को बनाया है टेस्ट के लिए [01:11:08] वो इविल नहीं है। इविल वो होगा वो होगा जो [01:11:11] उसे इख्तियार करेगा। छुरी को बनाने वाला [01:11:13] गलत नहीं होता है। छुरी का गलत इस्तेमाल [01:11:15] करने वाला गलत होता है। [01:11:21] रेप को कैसे गलत इस्तेमाल करते हैं? [01:11:24] रेप इंसान के फ्री व्हील का नतीजा है। ये [01:11:26] माइक [01:11:28] ये रेप कैसे गलत इस्तेमाल होता है? ये [01:11:31] अब सुन ले। अब सुन ले इस्तेमाल होता है। [01:11:33] हां मैं बता रहा हूं ना कैसे [01:11:34] मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं कि जो [01:11:36] इविल इस दुनिया में मौजूद है। उसके कई [01:11:39] सारे तरीके हैं। एक तरीका इंसान का अपना [01:11:42] फ्री विल है। अब अगर कोई रेपिस्ट रेप कर [01:11:44] रहा है तो इसका गॉड का कसूर नहीं है। वो [01:11:46] अपने फ्री विल का गलत इस्तेमाल करना कर [01:11:48] रहा है। उसको सजा मिलनी चाहिए। और उसी के [01:11:50] लिए जहन्नुम बनाई गई है। [01:11:51] यह फ्री विल का भी बड़ा चक्कर है। आप जब [01:11:54] कोई बुरा काम करते हैं या कोई बुराई होती [01:11:56] है तो यह कहा जाता है कि ये फ्री विल है। [01:11:59] 7 बिलियन फ्री विल्स आर मूविंग ऑन दिस [01:12:02] प्लनेट। 7 बिलियन फ्री विल। और एक आदमी [01:12:06] अपनी फ्री विल से मुझे कत्ल कर दे तो मैं [01:12:08] खुदा की मर्जी से मरा हूं। क्या इसकी फ्री [01:12:10] विल की वजह से? [01:12:12] मेरी मौत खुदा के हाथ है या इस फ्री विल [01:12:14] वाले के हाथ है? [01:12:16] खुदा ने फ्री विल का निजाम बनाया है और उस [01:12:19] निजाम का गलत इस्तेमाल करके कोई आपको मार [01:12:21] रहा है। [01:12:21] इस्तेमाल करके मेरा कत्ल कर देता है। अब [01:12:24] मेरी मौत का जिम्मेदार कौन है? [01:12:25] वो इंसान जिम्मेदार है। [01:12:26] वो इंसान। [01:12:27] तो ये कहना कि [01:12:28] और उसको उसको उसको सजा मिलेगी। [01:12:30] तो अब आप आगे चलिए कि ये तय करना कि [01:12:33] अल्लाह ही या खुदा सॉरी अल्लाह नहीं। खुदा [01:12:36] ही जिंदगी देता है। खुदा ही मौत देता है। [01:12:38] ये गलत है। [01:12:39] बिल्कुल गलत नहीं है। [01:12:40] हां नहीं। [01:12:41] निजाम उसी ने बनाया फ्री विल का। निजाम [01:12:43] मौत और हयात का उसी ने बनाया। [01:12:45] यू आर कंट्राडिक्टिंग योरसेल्फ। अभी आपने [01:12:47] कहा कि एक आदमी ने फ्री विल से आपको मार [01:12:50] दिया। इसमें उसे फ्री विल दी गई थी। उसने [01:12:52] गलत इस्तेमाल किया। 7 बिलियन फ्री विल्स [01:12:56] आर मूविंग ऑन दिस प्लेनेट। और आप चाह रहे [01:12:58] हैं कि मैं सिर्फ खुदा का ध्यान करूं। ये [01:13:00] 7 बिलियन फ्री विल्स को मुझे लुक आफ्टर [01:13:03] करना पड़ेगा कि नहीं? ये तो तबाहियां कर [01:13:05] रही है और तबाहियां ज्यादा हो रही हैं। [01:13:08] बिल्कुल। तो अगर आप बताएं आप बताएं अगर [01:13:11] खुदा नहीं है फॉर एग्जांपल तो आप इविल को [01:13:14] कैसे डिसाइड करेंगे? यानी हाउ कैन यू [01:13:16] डिफाइन इविल ऑब्जेक्टिवली विदाउट गॉड? [01:13:19] इविल को डिफाइन। [01:13:22] देखिए दुनिया में दो तरह के जानवर है। एक [01:13:25] जो अकेले रहते हैं जंगल में और एक जो [01:13:28] ग्रुप्स में रहते हैं। ग्रुप में जो भी [01:13:32] रहेगा चाहे वो आपका फाउंडेशन हो, चाहे कोई [01:13:36] क्लब हो, चाहे कोई पिटिकल पार्टी हो, चाहे [01:13:40] कोई यूनिट हो, उसमें आपको इंटलेक्ट करने [01:13:44] के रूल बनाने पड़ेंगे। [01:13:45] यानी लोग तय करेंगे। [01:13:47] लोग तय करेंगे। अगर लोगों ने यह तय किया [01:13:49] कि किसी का रेप करना सही है, आप जस्टिफाई [01:13:50] करेंगे? [01:13:51] नहीं। [01:13:52] आपका फाउंडेशन तो यह हो गया ना कि लोग [01:13:53] इविल डिसाइड करेंगे। [01:13:55] नहीं नहीं अरे [प्रशंसा] [01:13:58] दुनिया में ऐसे ग्रुप्स हैं जो रेप को [01:14:02] जायज मानते हैं सर्टेन हालात में। मैं [01:14:06] डिटेल में नहीं जानूंगा। आप भी जानते हैं। [01:14:08] ये जो आईिस वाले थे जिन्होंने क्या किया [01:14:11] था? तो [01:14:13] उन्होंने क्या किया? उसका खुदा से कोई [01:14:14] ताल्लुक नहीं है सर। मैंने सिंपल सवाल [01:14:16] किया कि इविल को आप डिफाइन करते कैसे हैं? [01:14:18] आइए वापस आइए। [01:14:19] जी [01:14:21] आप साथ में तभी रह सकते हैं जब कुछ आप ऐसे [01:14:24] उसूल डेवलप करें जिसमें हर एक का बेसिक [01:14:27] तहफुल हर एक का बेसिक राइट हो और हर एक को [01:14:30] कोई आराम मिले। यही तरीका है किसी भी [01:14:34] ऑर्गेनाइजेशन जिसमें एक से ज्यादा लोग हैं [01:14:37] और वो ऐसे चलती है जिंदगी। उसमें अगर आप [01:14:40] गड़बड़ करेंगे तो तबाही होगी, नुकसान [01:14:43] होगा, बर्बादियां आएंगी। और अगर उसमें आप [01:14:46] घर ले लीजिए ना एक हस्बैंड है, एक वाइफ [01:14:49] है, बच्चे हैं, वालिदा भी है, दो बहनें भी [01:14:52] है, एक भाई भी है। अब इसमें कोई निजाम [01:14:55] आपको चाहिए साथ में रहने का। और एक दूसरे [01:14:58] पे भरोसा रहे। एक दूसरे के वही ख्वाब हो, [01:15:01] एक दूसरे की मदद करें। ऐसी जिंदगी [01:15:03] सर आपकी बात आ गई। आप ये कह रहे हैं कि [01:15:05] लोग डिसाइड करेंगे क्या सही है क्या गलत [01:15:07] है। यही है मेजॉरिटी डिसाइड करेगी क्या [01:15:09] सही है क्या गलत है। अरे भाई बिल्कुल [01:15:11] मेजॉरिटी अगर ये कहे कि नाज़ जर्मनी के साथ [01:15:14] जिस तरह मेजॉरिटी थी कि जेनोसाइड करना सही [01:15:16] है आप जस्टिफाई करेंगे [01:15:18] [प्रशंसा] [01:15:19] उस वक्त उस वक्त [01:15:20] आपका आपका ये [01:15:22] सिर्फ उसके बाद उस वक्त प्लनेट पे जो लोग [01:15:25] थे [01:15:26] उनमें कितने लोग हिट को सही समझते [01:15:28] अच्छा प्लनेट की मेजॉरिटी तय करी सोसाइटी [01:15:30] की नहीं प्लनेट की मेजॉरिटी गॉड के [01:15:32] एक्सिस्टेंस को सही मानती है आप क्यों [01:15:33] नहीं मानते [01:15:39] ये [01:15:40] हेलो हेलो हेलो [प्रशंसा] ये क्रॉस [01:15:43] क्वेश्चन का राउंड यहां पर समाप्त होता है [01:15:47] और ये बड़ा अच्छा है कि इस तरह से [01:15:48] फ्रेगमेंट कर दिया गया है ताकि जो मरकरी [01:15:50] ऊपर जा रहा है नीचे [01:15:52] जी [01:15:52] प्लेनेट की ज्यादातर मेजरिटी [01:15:56] कुछ दूसरे मजहबों के खुदा को मानती है [01:16:00] नहीं आप तो मेजॉरिटी की बात कर रहे हैं [01:16:03] आप ये कह रहे हैं इविल और गुड को डिसाइड [01:16:05] मेजॉरिटी करेगी मेजॉरिटी जो कर दे वो सही [01:16:07] हो जाएगा [01:16:09] इसको जैसा आप ही लोगों ने तय किया है उसी [01:16:11] फॉर्मेट को फॉलो कर लेते हैं। [01:16:14] भाई मैंने तो भले लोगों पे ऐतबार किया पर [01:16:17] तब मॉडरेशन तय किया। जी आपके पास 5 मिनट [01:16:20] का वक्त है क्लोजिंग आर्गुमेंट है। उसके [01:16:22] बाद हम ऑडियंस से क्वेश्चन आंसर लेंगे [01:16:24] जावेद साहब के क्लोजिंग आर्गुमेंट के बाद। [01:16:25] ओके टाइम स्टार्ट। [01:16:26] बहुत शुक्रिया। [01:16:27] हमारा जो टॉपिक है डस गॉड एक्सिस्ट? मैं [01:16:31] इस पे इतने एकेडमिक तैयारी करके आया था। [01:16:33] मुझे था कि मैं मैंने सोचा था कि कई सारे [01:16:36] मैं आर्गुमेंट्स दूंगा। लेकिन वक्त की भी [01:16:38] किल्लत और जावेद साहब बार-बार इधर-उधर चले [01:16:40] जा रहे थे तो उसको भी थोड़ा एंटरटेन करना [01:16:42] पड़ गया। डस गॉड एक्सिस्ट पे मैं एक ही [01:16:44] आर्गुमेंट दे पाया। आर्गुमेंट्स बहुत हैं [01:16:47] और डेफिनेटिव आर्गुमेंट्स हैं और मेरे [01:16:49] आर्गुमेंट को किसी एक राउंड में भी [01:16:51] इन्होंने एंटरटेन नहीं किया और रेफ्यूट [01:16:53] नहीं किया है। एक राउंड में भी नहीं। एक [01:16:55] राउंड में भी नहीं। [01:16:57] और ना ही अभी अभी आपका क्लोजिंग आर्गुमेंट [01:16:59] आएगा। बता देना। [01:17:00] आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी सर। [01:17:02] अरे मैं आपसे कई बार कह चुका हूं [01:17:03] कंटिंजेंसी का मतलब [01:17:04] अब मैं कैसे समझाऊं [हंसी] आपको? आपस में [01:17:06] हां आप [01:17:07] और कितने आसानी से समझाऊं मैं मुझे तो [01:17:09] नहीं समझ में आ रहा है बस आप अपनी [01:17:11] कंटिजेंसी उर्दू में बोल सकते हैं [01:17:14] हां आप अपनी बात पूरी कर लें आखरी चार [01:17:16] मिनट [01:17:17] दूसरी चीज [01:17:19] जस्ट अ मिनट प्लीज मैम कैन आई टॉक [01:17:24] दूसरी चीज ये है कि आपने एक तो इसका जवाब [01:17:26] नहीं दिया दूसरा आपने गॉड के ना होने पर [01:17:29] कोई डेफिनेटिव आर्गुमेंट नहीं दिया सिर्फ [01:17:31] मजहब पे बात कर रहे हैं आप मजहब तो आज [01:17:33] हमारा टॉपिक ही नहीं था आज तो हमारा टॉपिक [01:17:35] को आप मजहब से ले लेकर आईएस आईएस तक चले [01:17:38] गए। भाई हमारा क्या ताल्लुक है उससे? वी [01:17:40] कंडेम देम। और उसका गॉड से क्या ताल्लुक [01:17:42] है? अगर कोई गलत काम कर रहा है। किसी ने [01:17:44] किसी को कत्ल किया, किसी ने किसी का रेप [01:17:46] किया उसको सजा मिलनी चाहिए। और आपके पास [01:17:49] कोई भी कोई भी रैशन स्ट्रांग फाउंडेशन ऑफ [01:17:52] मोरालिटी नहीं है। आपने कहा कि मेजॉरिटी [01:17:56] तय करेगी सोसाइटी की वो सही होगा। मैंने [01:17:58] कहा हिटलर को फिर आप सही कहेंगे। नहीं [01:18:00] नहीं नहीं। प्लेनेट की सोसाइट की मेजॉरिटी [01:18:02] तय करेगी। तो प्लनेट की मेजॉरिटी गॉड के [01:18:04] एक्सिस्टेंस को मानती है। आप कह रहे हैं [01:18:06] ये रिलीजियस है। तो यानी आपके पास कोई [01:18:08] स्ट्रांग फाउंडेशन नहीं है ऑब्जेक्टिव [01:18:10] मोरालिटी का। ऑब्जेक्टिव मोरालिटी का अगर [01:18:13] कोई फाउंडेशन है तो वो सिर्फ गॉड है। गॉड [01:18:16] है। गॉड है। जी ये मुफ्ती शमालय नदवी साहब [01:18:21] का क्लोजिंग आर्गुमेंट था। अब हमारे पास [01:18:24] जी मैं [01:18:26] जी [हंसी] [01:18:28] ये बड़ा अच्छा है कि दोनों लोगों को [01:18:31] मॉडरेटर से शिकायत भी और बोल रहे हैं भाई [01:18:33] हमारी शाबाशी भी तो करते चलो [01:18:36] अब मेरी बात [01:18:37] जी आपके पास जावेद अख्तर साहब पांच मिनट [01:18:39] का वक्त है ये आपका क्लोजिंग आर्गुमेंट है [01:18:41] टाइम रिसेट कर दें [01:18:42] जी [01:18:44] देखिए बहुत सारी बातें हैं। गॉड का [01:18:47] डेफिनेशन दुनिया के किसी भी रिलजन में है [01:18:49] कि वो भी पोटेंट है। वो भी प्रेजेंट है। [01:18:51] ही इज़ जस्ट, ही इज़ काइंड, ही लव्स यू एंड [01:18:55] सो ऑन। मैं जब दुनिया देखता हूं तो मुझे [01:18:58] कोई ऐसा सुप्रीम पावर यहां दिखाई नहीं [01:19:01] देती है जो इंसान की बेहबूती के लिए कुछ [01:19:04] कर रही हो, कमजोर को बचा रही हो, मदद कर [01:19:07] रही हो, जालिम को पीछे हटा रही हो। मैं [01:19:09] नहीं देखा। तारीख में नहीं। एक तो अगर है [01:19:12] और ये देख रहा है तमाशा तो उसका होना ना [01:19:16] होना बराबर है। दो ये कि [01:19:20] ये जो है जब आप ये कहते हैं कि कायनात [01:19:24] जिसकी कंटिंजेंसी है मैं देखिए लफज़ [01:19:26] इस्तेमाल किया मैंने तो ये कैसे हो सकती [01:19:29] है बात और फौरन आप सरेंडर कर देते हैं कि [01:19:33] जाहिर है कि इसका बनाने वाला तो इतने [01:19:35] 10,000 गुना ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड होगा। [01:19:37] उस पर आपके होने पर कोई एतराज नहीं है। [01:19:40] उसे वो टाइमलेस है। वो पहले से था। टाइम [01:19:42] तो बहुत बाद में आया। ये सब आप मानने को [01:19:45] तैयार है। जिसका आपके पास कोई सबूत नहीं। [01:19:48] आपके पास कोई रीज़ नहीं है। आपकी तारीफ [01:19:50] क्या है मजहबों की? बिलीफ की जो खुदा का [01:19:54] बिलीफ है। ये कास्टेंटली गलत साबित होता [01:19:56] रहा है। मतलब आप कहे कि एस्टोटिस के जमाने [01:19:59] में तो सब जाहिल थे। वो भी इतने ही यकीन [01:20:02] से खुदा पे यकीन रखते थे जो अब नहीं रहा। [01:20:06] यह भी नहीं रहेगा। आप लिख लीजिए और इसके [01:20:10] आसार आपको दुनिया में दिखाई देना शुरू हो [01:20:12] चुके हैं। ये बहस क्या आज से 100 साल पहले [01:20:16] इस तरह हो सकती थी? यहां तक तो आपको हम ले [01:20:19] आए हैं। तो [01:20:24] सर सर [प्रशंसा] [01:20:26] अरे इनको मदद की जरूरत नहीं। भाई ये सेल्फ [01:20:28] सफिशिएंट आदमी है। आप क्यों इनकी मदद कर [01:20:30] रहे हैं? [01:20:31] सर सर सर [हंसी] सर प्लीज प्लीज [01:20:33] तो ये जो है तमाम बातें अपनी जगह है ये एक [01:20:37] पैकेज है आप अकेले कोई आदमी ऐसा नहीं है [01:20:39] जो सिर्फ गॉड को मानता हो उसके साथ बहुत [01:20:42] पैराफनेलिया आता है अलग-अलग पैराफनेलिया [01:20:45] आते हैं दे आर ओनली दे हैव ऑलवेज क्रिएटेड [01:20:49] इन द सोसाइटी मैं तो आपको सीधा ऑफर देता [01:20:52] हूं कि दुनिया में 10 इंपॉर्टेंट बिलीव [01:20:55] दैट आप एक मानते हैं नौ नहीं मानते नौ में [01:20:59] आप एक चीज है नौ को आप बिल्कुल रीज़नेबली [01:21:02] मेरी तरह देखते हैं [01:21:05] तो 90 मजहबी आदमी भी 90स है वो दूसरे खुदा [01:21:09] नहीं मानता एक खुदा मानता है अपना वाला [01:21:12] बाकियों को कहता है गलत है [01:21:15] अगर आप मानना ही बंद कर दे तो आपका 10% [01:21:18] चांस है कि आप सही है और 90% चांस है कि [01:21:20] आप गलत है। मेरा मशवरा है आप मानना छोड़ [01:21:22] दिए तो 50% चांस होगा कि आप सही है और 50% [01:21:26] चांस होगा। 40% आप गेन करेंगे बाय बिकम एन [01:21:30] एथ। [01:21:36] ये एक फसूदा ख्याल है। ये खत्म हो रहा है। [01:21:39] हो सकता है मेरी जिंदगी में ना हो। लेकिन [01:21:42] ये हो जाएगा। जो बातें ये इनको आप [01:21:45] मेटाफिजिकल ये वो ऐसे रिस्पेक्टेबल टर्म [01:21:48] दे दिए। ये तो उन लोग के हैं जिन्हें ना [01:21:51] फिजिक्स मालूम थी ना मेटा मालूम था। ये [01:21:53] उन्होंने आपको दिए हैं। [01:21:57] जी बहुत शुक्रिया आप दोनों लोगों का और अब [01:22:00] इस बातचीत का आखिरी राउंड शुरू होगा डस [01:22:03] गॉड एक्सिस्ट की ये बहस मुफ्ती शमाइल नदवी [01:22:06] और जावेद अख्तर साहब के बीच आप लोग अपने [01:22:08] अपने हाथ ऊपर करेंगे मैं यहां से तय [01:22:11] करूंगा और माइक हमारे पास है क्या एक ही [01:22:14] माइक है ऑडियंस के लिए दो माइक है एक इस [01:22:16] तरफ एक इस तरफ ठीक है तो जी सबसे पहले [01:22:20] हमारी सहयोगी है मारिया मारिया शकी जी [01:22:23] पूछिए सवाल थोड़ा सा रुकेंगे ताकि कैमरे [01:22:25] फ्रेम आप पर आ जाए। आपकी तो प्रैक्टिस है [01:22:28] टीवी की। जी [01:22:30] नजवी साहब मैं खुदा को मानती हूं। पहले [01:22:34] मैं इसी प्रमाइस से शुरू कर रही हूं और ये [01:22:36] बता रही हूं आपको। मैं मानती हूं। लेकिन [01:22:39] कुछ कुछ सवाल है जो जावेद साहब ने उठाया। [01:22:41] उसका जवाब आपको देना चाहिए। पहला सवाल ये [01:22:45] कि गजा में सालों से छोटे बच्चे मर रहे [01:22:50] हैं वो उनको अगर खुदा मर्सफुल है हम मानते [01:22:54] हैं कि अल्लाह ताला में बहुत ताकत है तो [01:22:57] वो बच्चे क्यों मर रहे हैं? दूसरी बात यह [01:23:00] कि अगर कंटिंजेंसी की जो आप बात करते हैं [01:23:03] पूरे मुस्लिम मुालिक [01:23:06] मिलकर के भी उन गजा के बच्चों को क्यों [01:23:08] नहीं बचा पा रहे हैं? क्योंकि अगर वो [01:23:11] चाहते क्योंकि अल्लाह ताला उन पर हुकूमत [01:23:14] करते हैं। सब पर हुकूमत करते हैं तो वो [01:23:16] उनको क्यों नहीं बचा? [01:23:17] जी थैंक यू। [01:23:18] थैंक यू वेरी मच। बहुत अच्छा किया। आपने [01:23:20] इस चीज को जिक्र कर दिया। मैं इसको और [01:23:22] अच्छे से एक्सप्लेन करने की कोशिश करता [01:23:24] हूं। [01:23:25] देखें जहां तक आपने कहा कि गजा के बच्चों [01:23:28] को मारा जा रहा है। देखिए दो वर्ल्ड व्यू [01:23:30] है। एक एथिस्टिक वर्ल्ड व्यू एक थिस्टिक [01:23:32] वर्ल्ड व्यू है। बच्चे मर रहे हैं दोनों [01:23:35] वर्ल्ड व्यू में है। लेकिन हमारा वर्ल्ड [01:23:37] व्यू कह रहा है कि रिकंपेंस है। ये कह रहे [01:23:39] हैं कि उनका मर उनका मरना बेकार जाने वाला [01:23:41] है। कोई उसका रिकंपैेंस नहीं है। क्योंकि [01:23:44] इनके यहां आखिरत और अल्लाह का कोई तसवुर [01:23:46] या गॉड का कोई तसवुर नहीं है। आपने ये [01:23:48] सवाल किया कि गॉड मर्सफुल है। क्यों नहीं [01:23:51] रोकता? ये मैंने बताया कि ये मिसकंसेप्शन [01:23:54] है लोगों के दरमियान कि गॉड को सिर्फ [01:23:57] मर्सफुल और ओमनीपोटेंट समझते हैं। गॉड के [01:23:59] सिर्फ यही दो एट्रिब्यूट्स नहीं है। गॉड [01:24:01] के कई सारे एट्रिब्यूट्स हैं। उनमें से अल [01:24:03] हकीम भी है। उनमें से सॉरी ऑल ऑल ऑल वाइज [01:24:08] भी है। ऑल नोइंग भी है। लिहाजा अगर इस [01:24:11] दुनिया में किसी को तकलीफ आ रही है और गॉड [01:24:14] उसको नहीं रोक रहा है। वो इसलिए नहीं रोक [01:24:16] रहा है क्योंकि इंसानों को फ्री विल दिया [01:24:18] गया है। ठीक इसी सुनिए सुनिए। ठीक इसी [01:24:20] तरीके से अगर एक डॉक्टर किसी छोटे बच्चे [01:24:22] को इंजेक्शन लगा रहा है उसे तकलीफ पहुंच [01:24:24] रही है। उसके लिमिटेड पर्सपेक्टिव के [01:24:26] ऐतबार से ये गलत हो रहा है और डॉक्टर बुरा [01:24:29] है। लेकिन जब आप ब्रॉडर पिक्चर को देखेंगी [01:24:32] आपके और हमारे पास सिर्फ एक पिक्सल है। [01:24:34] हमें इतना नजर आ रहा है कि गज्जा में कत्ल [01:24:36] हो रहा है। लेकिन इसके पीछे कितना रिकमेंस [01:24:39] उनको मिलने वाला है। पूरा पिक्चर गॉड के [01:24:42] पास है। तो एक पिक्सल से आप पूरे पिक्चर [01:24:44] को कभी भी जज नहीं कर सकती। [01:24:46] आप आप इसमें कुछ जोड़ना चाहेंगे? आपको कुछ [01:24:48] बोलना है इसमें? [01:24:51] भाई आपने बहुत अच्छा जस्टिफिकेशन दिया या [01:24:53] आप वो जो वहां के प्राइम मिनिस्टर है [01:24:55] इजराइल के उन्हें भेजिए। वो बहुत खुश [01:24:57] होंगे। [01:24:58] आप जस्टिफिकेशन दे देना कि अगर गॉड नहीं [01:25:00] है तो बच्चे क्यों मर रहे हैं? आप बताएं। [01:25:02] वो ये सवाल पूछ रहे हैं कि अगर आप ईश्वर [01:25:05] का अस्तित्व नहीं मानते हैं तो उन बच्चों [01:25:07] की मौत को आप कैसे इंटरप्रेट करते हैं? [01:25:11] भाई ये दुनिया जो है जो ताकतवर लोग होते [01:25:14] हैं वो एक नाइंसाफी करते हैं। [01:25:17] तो ये अच्छा काम है। आपके नजदीक तो नेचर [01:25:19] नाइंसाफी पे मबनी है। [01:25:20] अरे मेरे भाई आप नेचर की कहां बात कर तो [01:25:23] इंसान की बात [01:25:23] तो फिर जब मैं इंसान की बात कर रहा था आप [01:25:25] नेचर की बात करने लग गए। [01:25:26] क्रॉस एग्जामिनेशन हां अगर मुझे बोलने [01:25:29] नहीं देंगे तो अलग बात है। आप बोलिए मैं [01:25:31] मुझे कोई [01:25:32] नहीं ये क्रॉस एग्जामिनेशन [01:25:35] मुझे बोल तो लेने दीजिए। [01:25:37] ठीक है बात [01:25:38] बात ये है के ह्यूमन सोसाइटी तभी साथ में [01:25:42] रह सकती है जब वो मोहब्बत से एकता से एक [01:25:44] दूसरे के एतराम करके रहे। इसके अलावा [01:25:47] पॉसिबल नहीं है। अकेले तो इंसान रह ही [01:25:49] नहीं सकता। वहां पर कुछ लोग हैं जो फाउल [01:25:51] करते हैं। वो फाउल हमेशा से तारीख में [01:25:55] होता आया है। आज ये हो रहा है जो हो रहा [01:25:58] है बहुत बुरा हो रहा है। बहुत जालिमाना [01:26:00] है। बहुत जाबराना है। उसको आप कहे कि ये [01:26:03] बच्चों को कंपनसेशन मिल जाएगा या इसकी [01:26:06] इंजेक्शन है। इंजेक्शन तो हेल्थ के लिए [01:26:09] दिया जाता है। आप ये कह रहे हैं कि ये [01:26:11] बच्चों की जो धज्जियां उड़ रही है ये [01:26:13] इंजेक्शन है। [01:26:14] ये टेस्ट है। यह टेस्ट है और उस टेस्ट में [01:26:17] उनको उनको ऐसा रिकफेंस मिलेगा जो आपके [01:26:20] तसवुर के बाहर है। [01:26:21] ये आप तीन बरस के बच्चे को बारूद से उड़ा [01:26:23] के टेस्ट ले रहे हैं। [01:26:24] वाह! [01:26:25] वो नहीं ले रहा है। खुदा नहीं उड़ा रहा है। [01:26:26] इजराइल उड़ा रहा है। तो उसको उसको [01:26:29] अगला सवाल लेते हैं। अगला सवाल लेते हैं [01:26:32] प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल। [01:26:34] मुफ्ती साहब एक निवेदन आपसे है कि कम से [01:26:36] कम [01:26:37] थोड़ा सा माइक क्लोज। [01:26:38] एक रिलीजियस और फिलोसफिकल [01:26:40] कर रहे कर रहे हैं। करम प्लीज [01:26:42] एक रिलीजियस और फिलोसफिकल ट्रेडिशन है। [01:26:45] जो ब्रह्मांड को यानी यूनिवर्स को ही [01:26:48] अंतिम मानती है। सर्वम खल इदम ब्रह्मम। [01:26:52] दिस इज छंदोग उपनिषद एंड इट कंप्लीटली [01:26:56] रूल्स आउट द एकिस्टेंस और नेसेसिटी आपके [01:26:59] शब्दों में नेसेसिटी ऑफ़ अ क्रिएटर। द [01:27:02] क्रिएशन इटसेल्फ इज द क्रिएटर। तो एक मिनट [01:27:06] प्लीज। दूसरा जो सवाल आपने अभी जो आप [01:27:09] बार-बार कह रहे हैं कि भगवान विद्वान भी [01:27:11] है, वाइज सब जानने वाला। तो अगर विडम में [01:27:16] दुनिया भर के पापों और अत्याचारों को [01:27:18] बर्दाश्त करना शामिल है तो फिर इसका मतलब [01:27:21] ये हुआ कि अगर मैं फ्री विल से उसको अपोज [01:27:23] करता हूं तो ईश्वर की विज़डम और मेरी फ्री [01:27:25] विल में कंट्राडिक्शन है। बिकॉज़ व्हेन आई [01:27:28] एम अपोजिंग व्हाटएवर हैपनिंग इन गाजा देन [01:27:30] आई एम अपोजिंग द गॉड्स विल और गॉड्स विज़डम [01:27:33] जवाब ले क्योंकि तो गॉड की विज़डम एक मिनट [01:27:35] सॉरी प्लीज सर [हंसी] ये एक एक जुमला गॉड [01:27:38] की विज़डम है कि गाजा में जो कुछ हो रहा है [01:27:40] वो हो रहा है। मैं उसका अपोज कर रहा हूं [01:27:43] तो मैं गॉड की विडम के खिलाफ जा रहा हूं। [01:27:45] एक सवाल दूसरा यह [01:27:47] नहीं नहीं आपने दो ऑलरेडी [01:27:50] सर [01:27:50] आप और सवाल कर लें लेकिन मुझे दो जवाब [01:27:52] देने पहले आपने ये कहा सुनिए मेरी बात [01:27:54] सुनिए के मुताबिक थोड़ा ठीक हो रहा है ना [01:27:57] नहीं नहीं हो रहा है ठीक नहीं हो रहा है [01:27:58] मैं बता रहा हूं क्या हो रहा है आप तशरीफ [01:28:00] रखिए मैं बता रहा हूं क्या हो रहा है लेट [01:28:01] मी कंप्लीट प्लीज [01:28:02] एक सेकंड गाइस एक सेकंड ये देखिए ऐसा है [01:28:05] कि ये सब बड़ा आपस में विचार विमर्श के [01:28:09] बाद ये तय हुआ था कि कुछ नियम बना लिए [01:28:11] जाएं ताकि एक टाइम बाउंड बातचीत चले और [01:28:15] भाई साहब आप बड़ा जरूरी काम कर रहे हैं [01:28:18] लेकिन कैमरे के फ्रेम में आके उस काम को [01:28:20] गड़बड़ कर दे रहे हैं। ठीक है गुरु अब [01:28:22] मेरे को कहीं का गुस्सा कहीं निकालना था। [01:28:24] सॉरी [हंसी] [01:28:26] नहीं कोई गुस्सा नहीं है। जी तो प्रोफेसर [01:28:28] ने सवाल पूछे आप उनके जवाब दें। और थोड़ा [01:28:31] ये सब लोग थोड़ा ख्याल रखें। भाई सवाल [01:28:33] संक्षिप्त रखें। आपने दो सवाल किए। सबसे [01:28:37] पहला ये कहा कि हमारे पास ये कांसेप्ट है [01:28:39] कि ये यूनिवर्स खुद नेसेसरी बीइंग है। [01:28:42] क्रिएशन इटसेल्फ इज द क्रिएटर। [01:28:44] हाउ इररेशनल इज दिस? कि मैं एक्सिस्ट [01:28:48] करूंगा बाद में लेकिन अभी एक्सिस्ट कर भी [01:28:49] रहा हूं। यानी एक ही टाइम में एक्सिस्ट भी [01:28:51] कर रहे हैं, नहीं भी कर रहे हैं। दिस इज [01:28:52] नॉट ट्रू। दूसरी चीज आपने कहा के अगर [01:28:56] इजराइल में सॉरी माफ कीजिएगा इजराइल डजंट [01:28:59] एक्सिस्ट। ऑक्युपाइड पैलेस्टाइन में अगर [01:29:06] अगर ऑक्युपाइड पैलेस्टाइन में बच्चों को [01:29:09] मारा जा रहा है फ्री विल की वजह से और गॉड [01:29:11] नहीं रोक रहा ये कंट्राडिक्शन है ये बताइए [01:29:14] कि एक एग्जाम में एक बच्चा गलत आंसर लिख [01:29:16] रहा है सुनिए एग्जामिनर चाहे तो रोक रोक [01:29:19] सकता है| क्यों नहीं रोक रहा है? [01:29:21] ये कंट्राडिक्शन है या कंट्राडिक्शन नहीं [01:29:23] है? [01:29:25] सर माइक नहीं सर ये आपस में [हंसी] [01:29:29] ये क्या आपका सवाल माइक माइक माइक माइक [01:29:32] दीजिए [01:29:33] फ्री विल दिया गया है टेस्ट के लिए [01:29:35] अकाउंटेबिलिटी के लिए अगर फ्री विल नहीं [01:29:37] होता तो आप कहते हमें रोबोट बना दिया गया [01:29:39] नॉट रिप्रेजेंट माय पोजीशन आपकी जो भी [01:29:41] पोजीशन मैं अपनी फ्री विल के नाते अपने [01:29:45] ह्यूमन विज़डम के नाते गाजा में हो रही [01:29:47] अत्याचार का विरोध करता हूं [01:29:48] बिल्कुल करना चाहिए [01:29:49] आपके हिसाब से मैं गॉड की विज़डम का विरोध [01:29:50] कर रहा हूं [01:29:51] बिल्कुल नहीं [01:29:51] समाज हो रहा है गॉड [01:29:52] बिल्कुल भी नहीं बिल्कुल भी नहीं। उसका [01:29:55] वहां पर गाजा में कत्ल होना यह इंसानों के [01:29:58] गलत इस्तेमाल का नतीजा है। फ्री विल के [01:30:01] इस्तेमाल का नतीजा है। गॉड इसको गॉड इसका [01:30:03] हुक्म नहीं देता। उससे रोकता है। यही तो [01:30:05] मसला है ना आपके लिए कांसेप्ट क्लियर है। [01:30:07] नहीं नहीं भाई आपने तो बताया था इंजेक्शन [01:30:09] लगाने से बच्चे को तकलीफ होती है। ये [01:30:11] इंजेक्शन लगा [01:30:12] सर आप ऐसे रेटोरिक स्टेटमेंट दे तब तो कोई [01:30:14] मसला नहीं समझते रहेंगे। दिस इज अ रेटोरिक [01:30:16] स्टेटमेंट। दिस इज नॉट अ लॉजिकल आर्गुमेंट [01:30:18] सर। आई एम सॉरी। आई एम सॉरी। सर आखरी 30 [01:30:20] मिनट बड़े मुश्किल होने वाले हैं। जी [01:30:22] मुफ्ती साहब आगे बैठे हैं। इनको माइक [01:30:24] दीजिए। [01:30:25] हां तरुण माइक आप अपने पास रखिए। आपको [01:30:27] कैमरे का फ्रेम पता है। [01:30:28] जी [01:30:30] सबसे पहले दोनों को मुबारकबाद। [01:30:31] एक सर अपना आप नाम बता दें। आप अमेरिका [01:30:35] में शिकागो में रहते हैं। इतना मुझे याद [01:30:36] है। [01:30:37] बताएं आपको। यासिर नदीम अलवाजदी मेरा नाम [01:30:39] है। जावेद सर आपसे क्वेश्चन है इनफिनिटी [01:30:42] इंग्रेस के ताल्लुक से। एक हाइपोथेटिकल [01:30:43] सिनेरियो है। मसल अगर आप [01:30:45] सर माइक थोड़ा सा प्लीज क्लोज। जी [01:30:47] अगर आप शायर इसलिए हैं कि आपके कोई उस्ताद [01:30:50] शायर थे और वो इसलिए शायर थे कि उनके कोई [01:30:52] उस्ताद शायर थे और इसी तरीके से हम माज़ [01:30:55] में पीछे चलते चलते चले जाए और कहीं ना [01:30:58] रुके तो माफ़ कीजिएगा आप कभी शायर नहीं हो [01:31:00] सकते लेकिन आप शायर हैं। आपका शायर [01:31:02] एक्सिस्ट करता है। इसका मतलब ये है कि आप [01:31:04] कहीं ना कहीं रुके हैं। तो मेरा सवाल यह [01:31:06] है कि क्या आप इनफिनिट रिग्रेस ऑफ कॉजेस [01:31:09] को लॉजिकल फैलेसी मानते हैं या नहीं [01:31:13] मानते? हां या ना? [01:31:17] मैं इन्हें लॉजिकल फैलेसी नहीं मानता हूं। [01:31:20] लेकिन मैं मेरा प्रॉब्लम यह है कि जब मैं [01:31:23] नहीं मानता हूं तो आई विल कंटिन्यू विद [01:31:25] दिस लॉजिक जो फैलेसी नहीं हो। आप एक जगह [01:31:28] रुक जाते हैं जाके। आप कहते हैं ये गेंद [01:31:31] कैसे बनी? ये जजीरा कैसे बना? ये समंदर [01:31:33] कैसे बना? ये जमीन कैसे बनी? और अचानक गॉड [01:31:36] पे जाके आपको ब्रेक लग जाता है। एक बार आप [01:31:39] सवाल नहीं करते कि भाई इनको बनाने वाला तो [01:31:42] इनसे भी कॉम्प्लिकेटेड होगा। वो कैसे बना [01:31:45] उसके बारे में आपने इत्मीनान कर लिया वो [01:31:47] हमेशा से तो अगर आप उसे हमेशा से मानते [01:31:50] हैं तो फिर ये मान लीजिए कि कायनात हमेशा [01:31:52] से क्या तकलीफ है [01:31:53] फिर हम वजूद में नहीं आते [01:31:54] जी [01:31:55] हम मौजूद नहीं [01:31:56] अच्छा सर सर सर [01:31:57] क्यों नहीं होते मैं बताऊंगा प्लीज [01:31:59] जैसे मैंने मिसाल दी आपके शेर [01:32:01] आपका शेर कभी वजूद में ना आता अगर शायद [01:32:03] इसी तरह चलता रहे हमेशा [01:32:05] माइक माइक मेरे ख्याल से इनफिनिट रिग्रेस [01:32:08] का कांसेप्ट क्लियर नहीं हो पाया ऐसा रहने [01:32:09] दे लेट्स गोप [01:32:10] ठीक है [01:32:10] हां थोड़ा सा मॉडरेटर का भी ख्याल रखें। [01:32:14] नहीं नहीं आपने तो रखा है। आपने रखा है। [01:32:16] यहां पे गौहर रजा साहब है। वो भी एक सवाल [01:32:18] पूछना चाहते हैं। [01:32:21] माइक या नहीं तो ऑन करिए। [01:32:26] पहले तो ये कह दूं के [01:32:29] मैं उन बच्चों से शर्मिंदा हूं जिनको गजा [01:32:33] में कत्ल किया गया। [01:32:35] [प्रशंसा] [01:32:36] क्योंकि हमारे होते हुए कत्ल किया गया। [01:32:39] लेकिन उससे ज्यादा शर्मिंदगीगी इस बात से [01:32:41] हुई कि मुझे लगा कि मुफ्ती साहब उसको [01:32:44] जस्टिफाई कर रहे हैं। [01:32:47] बिल्कुल भी नहीं आप आप गलत मुझे लगा मैं [01:32:49] गलत हो सकता हूं। गलत मैं सवाल पूछ रहा [01:32:51] हूं। मैं सवाल [01:32:54] मैं जावेद भाई से डिसए्री करता हूं। [01:32:56] एक सेकंड आस्किंग [01:32:57] देखिए अगर देखिए ऐसा एक सेकंड [01:33:00] आप सर वेट वेट अरे आप मैं कुछ मेरे पहले [01:33:02] मुझे अपनी बात कह लेने दीजिए। अगर ऑडियंस [01:33:05] तय करेगी तो फिर मॉडरेटर का मतलब नहीं। [01:33:07] मेरा आप सबसे यह कहना है ये बहस दो लोगों [01:33:12] के बीच में है। एक तरफ मुफ्ती साहब, एक [01:33:14] तरफ जावेद साहब। पिछले डेढ़ घंटे से ये [01:33:17] लोग अपने-अपने तर्क रख रहे हैं। आपकी इनसे [01:33:20] इत्तेफाकी हो सकती है ना इत्तेफाकी हो [01:33:22] सकती है। मेरे उस्ताद मुझे सिखा गए हैं कि [01:33:25] मुखा मुखम में असहमति की गुंजाइश बची रहनी [01:33:29] चाहिए। अगर मैं आपकी बहुत इज्जत करता हूं [01:33:33] गौर साहब। आपने जो कमाल की किताबें लिखी [01:33:35] हैं साइंटिफिक टरामेंट लेकिन मेरी ये [01:33:37] गुजारिश है आप सबसे कि यदि आप इन लोगों ने [01:33:41] जो बोला उनप टिप्पणियां करेंगे तो ना वक्त [01:33:43] की पाबंदी रहेगी ना वनशा आप सवाल पूछ लें [01:33:46] उस सवाल में जो बात आ जाए वो आ जाए मैं [01:33:49] जावेद साहब से डिसए्री करता हूं इसलिए [01:33:51] जावेद साहब से सवाल पूछ रहा हूं आपका सवाल [01:33:54] जावेद अख्तर साहब से [01:33:55] और सवाल ये है मेरा कि जावेद साहब ने कई [01:33:57] बार लॉजिक का इस्तेमाल किया के साइंस में [01:34:01] लॉजिक है और रिलजन में लॉजिक लॉजिक नहीं [01:34:03] है। मेरा ख्याल ये है कि रिलजन में भी [01:34:06] लॉजिक है। लेकिन उस लॉजिक की बेसिस ये है [01:34:10] कि आप रुक जाते हैं जिसका जिक्र जावेद [01:34:12] साहब ने बार-बार किया। यानी खुदा के तसवुर [01:34:15] पे आते हुए, गॉड के तसवुर पे आते हुए रुक [01:34:17] जाते हैं। और इसके इसमें सवाल पूछना मतलब [01:34:22] फॉरबिटन होता है। सवाल ये है कि क्या [01:34:25] जावेद साहब इससे एग्री करते हैं कि साइंस [01:34:28] की लॉजिक अलग है और रिलीजन की लॉजिक अलग [01:34:32] है। [01:34:33] बताइए सर। [01:34:36] देखिए तीन चीजें हैं। साइंस है, एक है [01:34:40] मंतिक है, इ्तदाल है। और एक जो है कुछ भी [01:34:44] नहीं है। फथ है, अकीदा है। मैं अकीदे के [01:34:48] लॉजिक का कायल नहीं हूं। मुझे आप इ्तदाल [01:34:52] से, लॉजिक से, रीज़ से समझाइए। मैं मानने [01:34:55] को तैयार हूं। मेरा क्या नुकसान होगा? [01:34:58] लेकिन ये कि अकीदे पे मैं नहीं जा सकता [01:35:00] हूं। अकीदे का मतलब है कि तुम ये मान लो [01:35:03] सवाल को ये नहीं आप सारी बातें करके बड़ी [01:35:07] साइंटिफिक बातें करके एक जगह जाके खुदा के [01:35:09] हुजूद पे रुक जाते हैं सरेंडर कर देते हैं [01:35:11] मैं सरेंडर करने को तैयार हूं दैट्स ऑल [01:35:15] जी ये आगे सर बैठे हुए हैं इनको माइक [01:35:18] दीजिए [01:35:18] भाई वो वो आप पूछना चाह रहे थे ना [01:35:20] हां नहीं मैं ये [01:35:22] जी आपका नाम [01:35:23] आसिम इफ्तखार [01:35:25] आसिम जी पूछिए [01:35:26] सर जावेद सर से सवाल है कि आपने अपनी [01:35:29] क्लोजिंग [01:35:29] माइक थोड़ा करीब आपने क्लोजिंग स्टेटमेंट [01:35:31] में ये बात कही थी के मजहब का जो फ्यूचर [01:35:35] है वो ज्यादा दिन नहीं जाने वाला है। [01:35:38] लेकिन मैं देख पा रहा हूं कि जो ऑक्सफोर्ड [01:35:40] यूनिवर्सिटी की एक स्टडी है 2011 में हुई [01:35:42] है जिसके 50 एकेडमिशंस ने इसको अंजाम दिया [01:35:45] था। उसमें वो ये कहते हैं कि जो फथ इन गॉड [01:35:50] है वो इनबिल्ट है ह्यूमन नेचर के अंदर [01:35:53] जिसको हम कहते हैं फितरत के अंदर शामिल है [01:35:55] वो और वो ये कहते हैं कि अगर कोई ये समझता [01:35:58] है के मजहब को वो खत्म कर देगा तो ये उसकी [01:36:02] गलतफहमी है तो आप इसके बारे में इस स्टडीज [01:36:05] के बारे में क्या कहते हैं? [01:36:06] ठीक है। मैं उनसे एग्री नहीं करता हूं। वो [01:36:09] कौन से प्रोफेसर होंगे ऐसा [01:36:10] उनके पास डाटा है। इन्होंने डाटा के [01:36:12] होगा। डाटा क्या हो सकता है? फ्यूचर का [01:36:14] डाटा तो नहीं हो सकता ना उनके पास [01:36:16] प्रेजेंट का डाटा हो सकता है। डाटा आपने [01:36:19] सुना 100 साल पहले का बाद का डाटा मैंने [01:36:21] तो नहीं सुना अब तक तो आज उनकी ये राय है [01:36:25] और होगी राय है। ठीक है? दुनिया में [01:36:27] तरह-तरह की राय है लोग। लेकिन मैं समझता [01:36:30] हूं कि वक्त के साथ इंसान ज्यादा से [01:36:32] ज्यादा रीज़नेबल और लॉजिकल होता जा रहा है। [01:36:35] आज आप देखिए वेस्टर्न यूरोप में क्या [01:36:38] परसेंटेज है नॉन बिलीवर्स की। बहुत हाई। [01:36:42] वहां चर्च खाली पड़े होते हैं। तो [01:36:45] अल्टीमेटली [01:36:46] तो इंसान कोई ऐसी बात बहुत अरसे तक नहीं [01:36:50] मान सकेगा चाहे गलत या सही जो उसे उसके [01:36:54] दिमाग को उसके ज़हन को उसके लॉजिक को अपील [01:36:57] ना करे। वो कह रहे हैं तो ऑक्सफोर्ड के [01:36:59] होंगे तो केवरेज के होंगे तो मुझे क्या [01:37:01] लेना देना? उनका डाटा मुस्तकबिल का नहीं [01:37:04] हो सकता है। [01:37:05] जी दीपक हां पूछिए। मैं आऊंगा अभी पीछे की [01:37:09] साइड भी आऊंगा। माइक व भेजूंगा दो-ती साल [01:37:11] के लिए। जी। [01:37:12] जावेद साहब आपसे सवाल है। नमस्ते। [01:37:14] अरे भाई [01:37:14] सर अगर आप ही लोगों को तय करना है तो फिर [01:37:17] सब फिर 200 लोग तय कर लेंगे। नहीं सर [01:37:19] प्लीज डोंट डू दिस सर। सर एवरीबडी हैज़ अ [01:37:21] राइट सर। बट वी कैन ओनली टेक सिलेक्टेड [01:37:24] क्वेश्चन। [01:37:25] सर ये यंग लोग भी हैं तो इनकी ये आप उतने [01:37:29] यंग भाई आप यंग है कि नहीं है? [01:37:31] वो कह रहे हैं वो भी यंग है साहब। आप उनकी [01:37:33] नौजवानी पर दावा उनको ही करने दें। [01:37:36] हां। मुफ्ती साहब आप यंग हां पूछिए। [01:37:40] अरे भैया मेरा सवाल यह है [01:37:41] इनसे भी तो पूछो जी [01:37:43] बस आपसे एक सवाल [हंसी] है जैसे थीस्टो के [01:37:46] पास अपने जो ईश्वर को मानते हैं उनके पास [01:37:48] अपने सोशल गेट टुगेदर्स हैं पांच रोजा [01:37:49] क्रिसमस आने वाला है होली है दिवाली है ईद [01:37:52] है एथिस्ट क्या ऑफर कर रहे हैं मतलब मैं [01:37:54] इनकी दुकान से दूर में आना चाहता हूं उस [01:37:55] तरफ पर मैं अट्रैक्ट नहीं हो पा रहा हूं [01:37:57] मैं सोशल गेट टुगेदर्स क्या है आपके पास [01:38:01] वो ये कह रहे हैं कि जो धार्मिक लोग हैं [01:38:04] अलग-अलग धर्म के लोग उनके उत्सव त्यौहार [01:38:07] बहुत है [01:38:08] अब आपको मैं एक सुनाता हूं यहां [01:38:09] हिस्टोरियन भी बैठे हैं। मृदुला जी आप [01:38:12] बताइएगा सही है क्या? ये एक कॉन्सेंटाइन [01:38:16] एक ग्रीक रोमन भाषा था जो क्रिश्चियनिटी [01:38:19] आने के 400 साल बाद उसने डिसाइड किया कि [01:38:23] मैं क्रिश्चियन हो जाऊंगा। मेरी पूरी [01:38:24] स्टेट कैंसिल हो जाएगी। उस जमाने में ऐसे [01:38:27] ही होता था राजा जो धर्म इख्तियार करता था [01:38:29] वो जनता भी कर लेती थी। [01:38:32] इसलिए कि वो हो गया था बैंककरप्ट और उसे [01:38:34] जो मेडिटेरियन पोस्ट के रिच क्रिश्चियन वो [01:38:38] थे मर्चेंट उससे पैसा चाहिए था। तो उसने [01:38:41] कहा यार क्रिश्चियन हो जाओ। तो उसने अपने [01:38:44] वजीर से कहा कि भाई ये हिस्ट्री है के अब [01:38:47] हम लोग क्रिश्चियन हो जाते हैं। कहते सर [01:38:49] हो जाएंगे कोई प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन एक [01:38:52] प्रॉब्लम ये है कि 17 दिसंबर से 25 दिसंबर [01:38:57] तक जो पिगम फेस्टिवल होता जो पिगम स्टेबल [01:39:00] हो जो फेस्टिवल होता है वो बंद हो जाएगा। [01:39:03] इसलिए कि हम क्रिश्चियन हो गए तो होगा [01:39:04] नहीं। तो वो बच्चों को बहुत बुरा लगेगा। [01:39:07] पब्लिक को बहुत डे बहुत एंजॉय करते हैं। [01:39:10] खास तौर से 25 को मेन डे उसने कहा हां ये [01:39:12] तो सही कह रहे हो ये जीसस क्राइस्ट की [01:39:14] पैदाइश कब थी? कह साहब वो अप्रैल में थी [01:39:17] नहीं कट करो वो 25 दिसंबर को [हंसी] [01:39:20] ये हकीकत है। [01:39:23] और 400 साल बाद क्रिश्चियनिटी के अप्रैल [01:39:26] से दिसंबर ले आए और इसलिए कि यहां बेगम [01:39:29] फेस्टिवल होता था। अब मनाते हैं आप आराम [01:39:31] से। ये जो सारे फेस्टिवल है ये रिलीजन थे। [01:39:35] हर एक को एक एंटरटेनमेंट डिपार्टमेंट [01:39:37] चाहिए होता है अपनी कंपनी चलाने के लिए। [01:39:40] तो ये रिलीजंस ने ये सेुलर त्यहार थे [01:39:43] जिन्हें रिलीजंस ने ले लिया है। ये मौसम [01:39:46] के थे, फसलों के थे, किसानों के थे। उसको [01:39:49] आपने लेके रिलीजियस रंग दे दिया। ये ये [01:39:52] कोई रिवीजन से थोड़ी आए आप आप अच्छा हमें [01:39:56] देखिए हम तो मुद है हम ईद मनाते हैं हम [01:40:00] दिवाली मनाते हैं हम होली मनाते हैं हम [01:40:02] क्रिसमस मनाते हैं मुंबई की फिल्म [01:40:04] इंडस्ट्री की सबसे बड़ी होली हमारे घर में [01:40:07] सबसे बड़ी ईद हमारे घर में वो हमारी सोशल [01:40:11] वो है हमारे यहां हेरिटेज है ऐसा थोड़ी है [01:40:14] कि वी विल थ्रो द बेबी अलोंग वि द वाटर ये [01:40:17] तो अच्छी चीज है इन्हें रखो तो बेकार है [01:40:20] फेंक दो [01:40:21] जी हां हेलो जी मेरा सवाल नादरी जी से है। [01:40:26] जैसा कि आपने बोला कि गॉड टाइम के भी परे [01:40:30] हैं और गॉड इतनी कॉम्प्लेक्स चीज है कि [01:40:32] उसे ह्यूमन माइंड समझ नहीं सकता और गॉड ने [01:40:36] अर्थ पे फ्री वेल भी दे दी है। तो आप अपना [01:40:38] वक्त जाया क्यों कर रहे हैं गॉड के बारे [01:40:40] में बात करके। अपन को तो बात करनी चाहिए [01:40:42] कि सोसाइटी को बेहतर कैसे करें? [01:40:44] मैं गॉड वही बताता है सोसाइटी को कैसे [01:40:46] बेहतर करें? अभी मैं आपका जवाब देता हूं। [01:40:48] आपने कहा कि टाइम पे वो एक्सिस्ट नहीं [01:40:52] करता। सो [01:40:54] नहीं मेरा सवाल ये है कि जैसा आपने बोला [01:40:58] कि गॉड बहुत ही कॉम्प्लेक्स चीज है। [01:41:00] मैंने कहा ही नहीं कि कॉम्प्लेक्स है ये [01:41:01] तो आपके अल्फाज़ हैं। कॉम्प्लेक्स का लव्स [01:41:04] गॉड के लिए सूटेबल नहीं है। क्यों? [01:41:06] क्योंकि कॉम्प्लेक्स वो चीजें होती है जो [01:41:07] ऑब्जेक्ट हो। गॉड इज नॉट एन ऑब्जेक्ट [01:41:09] जिसको आप इंस्ट्रूमेंट के जरिए लैबोरेटरी [01:41:12] में जाकर टेस्ट करें। ओह इट्स वैरी [01:41:13] कॉम्प्लेक्स। वो कोई कार का इंजन नहीं है। [01:41:16] वो फिलोसफिकली [01:41:18] नेसेसरी बीइंग ऐसी बीइंग है जो सिंपल [01:41:21] बीइंग है। हां आप उसको मुकम्मल तौर पे [01:41:24] उसकी तमाम हिकमतों को जान ले और हर चीज को [01:41:26] जान ले ये पॉसिबल नहीं है। क्योंकि वो ऑल [01:41:28] वाइज है आप ऑल वाइज नहीं है और वो खुदा है [01:41:31] वो आपको सारी चीजें बता दे ये जरूरी नहीं [01:41:33] है। [01:41:34] मेरा सवाल ये नहीं था। मेरा सवाल यह था कि [01:41:36] जब गॉड इतना परे है इस दुनिया से कि उसने [01:41:40] अर्थ पे फ्री विल भी दी है हम सब ह्यूमंस [01:41:42] की फ्री विल है और जो सोसाइटी में हो रहा [01:41:45] है वो अपन लोग डिसाइड करेंगे तो अपन लोग [01:41:48] डिसाइड नहीं करेंगे ना अपन लोग डिसाइड [01:41:50] नहीं करेंगे गॉड जो है गॉड ने वो उसकी जात [01:41:54] उसकी एकिस्टेंस टाइम एंड स्पेस से परे है [01:41:57] लेकिन वो हमारा टेस्ट ले रहा है और उसी [01:41:58] गॉड ने हमें बताया कि तुम्हें क्या करना [01:42:01] है क्या नहीं करना है तो जाहिर है उस गॉड [01:42:02] की बात सुनेंगे ना हम [01:42:03] जी [01:42:04] वो पीछे पीछे एक चश्मा लगा है जो मैम खड़ी [01:42:07] है उनको दीजिए। हां आप आप [01:42:11] जी जी बिलकुल आएंगे देखिए मैं कोशिश कर [01:42:14] रहा हूं सब तरफ जाने की हां उनको दीजिए [01:42:16] माइक जी [01:42:20] हेलो सर [01:42:21] मैं ओमनी प्रेजेंट नहीं हूं टाइम पाबंद [01:42:23] हूं और जहां तक कोशिश कर सकता हूं करूंगा [01:42:26] जी अपना नाम बताइए [01:42:27] मेरा नाम उर्सला है मैं दिल्ली [01:42:29] यूनिवर्सिटी की एक स्टूडेंट हूं और मैं [01:42:30] स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया से हूं अ मेरा [01:42:34] सवाल मुफ्ती जी से है कि इस हॉल के इस [01:42:37] कमरे में बैठ के हम हम लोग रेप की [01:42:38] मोरालिटी के बारे में फिलॉसफिकली बात तो [01:42:41] कर सकते हैं। बट असलियत ये है कि रोजमर्रा [01:42:44] की जिंदगी में औरतें रेप के थ्रू गुजरती [01:42:46] हैं। और हम लोग सिर्फ नंबर्स पे इस तरह [01:42:49] नहीं देख सकते क्योंकि कितनी औरतें हैं इन [01:42:52] कंट्रीज में जहां पे आप बता रहे हैं कि [01:42:54] केसेस कम है जिनका एक्सेस है कि वो जाके [01:42:56] केस फाइल कर सके। कितनी औरतें हैं जो [01:42:59] वर्किंग जिनको काम करने की आजादी है उन [01:43:03] कंट्रीज में। यूरोप में ये आजादी आ गई। [01:43:05] यूरोप में ये रूल्स आ गए। तो हम आज उसके [01:43:07] बारे में बात कर पा रहे हैं। [01:43:08] जी जाओ। [01:43:10] आपने ये कहा कि कमरे में बंद होकर हम लोग [01:43:14] इस पर फिलॉसफिकली बात कर सकते हैं। लेकिन [01:43:16] हकीकत में क्या हो रहा है वो ग्राउंड लेवल [01:43:19] पे क्या हो रहा है? जो बहुत गलत हो रहा है [01:43:22] और वो सफर कर रही हैं। आई एग्री? बहुत गलत [01:43:24] हो रहा है। और जो गलत हो रहा है उसको हमें [01:43:26] रोकना है। और क्यों रोकना है? वो गलत [01:43:28] क्यों है? हमारे पास इसका ऑब्जेक्टिव [01:43:30] फाउंडेशन है। इनके पास उसका ऑब्जेक्टिव [01:43:33] फाउंडेशन नहीं है। मैं ये कहना चाह रहा [01:43:35] हूं कि जहां पे भी जुल्म हो रहा है, जहां [01:43:37] पे भी औरत पे जुल्म हो रहा है या उसकी [01:43:39] इज्जत लूटी जा रही है या उसे तकलीफ [01:43:41] पहुंचाई जा रही है। और सिर्फ औरत नहीं [01:43:42] किसी इंसान के ऊपर भी जुल्म हो रहा है तो [01:43:45] उसके खिलाफ खड़ा होना ये मोरालिटी हमारे [01:43:48] पास गॉड के पास से आई है। वरना जावेद साहब [01:43:50] तो कह रहे हैं कि जो है मेजॉरिटी डिसाइड [01:43:52] करेगी तो मेजॉरिटी तो कभी भी बदल सकती है। [01:43:57] क्या आप ये थोड़ी सी आपको गलतफहमी है। मैं [01:44:01] अगर मेरे जुमले से ये मजला निकला या मैंने [01:44:04] कहा तो ये जुमला मैं वापस लेता हूं। ये [01:44:06] मेरा मतलब ही नहीं था कि मेजरिटी डिसाइड [01:44:08] करेगा। मेजरिटी डिसाइड करे तो दुनिया में [01:44:11] बड़ी [01:44:12] वैसे आपने कहा था ये जुमला। [01:44:13] मैं मान रहा हूं। [01:44:14] बाद में रीकैप कर लेंगे। [01:44:15] अरे एक सेकंड मैं अपनी एक्सप्लेनेशन देता [01:44:18] हूं। [01:44:18] मुनासिब बात ये है कि हम सब के सब दिल में [01:44:21] जानते हैं कि क्या अच्छा है, क्या बुरा [01:44:23] है। हमें पता है अच्छी तरह से। जो लोग [01:44:26] बुरे काम करते हैं उन्हें भी मालूम है [01:44:27] अच्छा अच्छा [01:44:29] यही तो सवाल था हजरत कि फिर ये मोरालिटी [01:44:31] आई कहां से [01:44:32] क्रॉस एग्जामिनेशन हां जी हां जी [01:44:33] मोरालिटी साथ रहने की डिजायर से आई [01:44:36] यानी साथ रहकर जो कुछ कह दे जो कुछ कर दे [01:44:38] वो हो जाएगा [01:44:39] नहीं [01:44:40] तो [01:44:40] आप कायदे से रहित सकते हैं जब तक लोगों [01:44:43] में मोरालिटी हो वरना केस हो जाएगा [01:44:45] ये आपको कैसे पता [01:44:47] जी हमने देखा ना जहां मोरालिटी का कॉस हो [01:44:49] गया हम देखते हैं [01:44:51] कहां पे देखते हैं [01:44:51] भाई दुनिया में आप क्यों [01:44:55] अगर गलत हो रहा है इसको आप सर आपोलॉजी की [01:45:00] बात कर रहे हैं मैं ऑटोलॉजी की बात कर रहा [01:45:02] हूं मैं इस दोनों लोगों को चैट करूंगा [01:45:05] वहां पे क्रॉस एग्जामिनेशन कर लीजिएगा अभी [01:45:07] ऑडियंस का हक मार रहे हैं आप लोग भाई जस्ट [01:45:09] लोग हैं आप लोग और भाई ये [01:45:12] हां उधर उधर आएंगे उधर जी सर आएंगे आएंगे [01:45:15] सर सर मेरा नाम लख उर रहमान है और मैं [01:45:17] अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का स्टूडेंट [01:45:19] हूं और जहां तक मुझे पता है कि सर यू आर [01:45:21] आल्सो प्रोडक्ट ऑफ अलीगढ़ मुस्लिम [01:45:23] मैं भी उसी चमन का बुलबुल हूं सर तो बड़ी [01:45:26] खुशी हुई मुझे जान के कि मैं आपसे [01:45:28] मिलूंगा। सवाल [01:45:28] सर मेरा सवाल ये है कि सर सैयद अली रहमा [01:45:31] का नजरिया ये था के खुदा के वजूद को अकल [01:45:35] के दायरे में रह के तलाश करना ना के पूरी [01:45:39] तौर से उसका इंकार कर देना। सर हाउ विल यू [01:45:42] डिफाइन इट? नहीं नहीं तो यह तो आप इन्हें [01:45:45] बताइए सवाल है कि खुदा का वजूद साबित कर [01:45:48] रहे हैं। तो सर आपने इनकार रखा है। इस वजह [01:45:51] से मेरा क्वेश्चन [01:45:52] उन्होंने यही सर एक सेकंड सर सैयद ने यही [01:45:55] कहा है ना कि अकल से आप खुदा के वजूद को [01:45:58] साबित नहीं कर सकते। यही कहा ना भाई [01:46:01] वो उन्होंने कहा है कर सकते हैं और वो कर [01:46:03] दिया गया आज। [01:46:04] वो फ़ [01:46:06] तलाश करना या साबित करना अक्ल से ताल्लुक [01:46:09] अक्ल से नहीं। अरे सवाल तो सुन लीजिए। जी [01:46:12] अक्ल से नहीं हो सकता। यही कहा ना आपने? [01:46:15] अक्ल से हो सकता है। अरे वो यही कह रहे [01:46:18] हैं भाई आप बता रहे हो सकता है। वो तो कुछ [01:46:20] और [01:46:22] आप अगर सर देखो नौजवान [01:46:24] फ़ इतनी कमाल की यूनिवर्सिटी है [01:46:27] भाई दे दो जरा एक मिनट। अरे भाई मेरी बात [01:46:30] सुनो। माइक पे बोलो ताकि जो लाखों लोग देख [01:46:33] रहे हैं। [01:46:33] माइक दे दो ना। [01:46:34] अरे देंगे ना माइक तुम ठहरो तो। हां सर [01:46:38] मेरा सवाल यह था कि सर सैयद अल रहमा का एक [01:46:41] नजरिया था अपना के खुदा का जो वजूद है [01:46:45] उसको अकल के दायरे में रह के तलाश करना है [01:46:48] ना कि पूरे तौर से इंकार कर देना है ये ये [01:46:51] उनका कांसेप्ट था लेकिन मेरा सवाल ये है [01:46:53] कि आप इसको कैसे डिफाइन करते हैं [01:46:55] एक्सप्लेन कैसे करेंगे मैं आपसे जानना [01:46:57] चाहता हूंकि यू आर द प्रोडक्ट ऑफ अलीगढ़ [01:46:59] मुस्लिम यूनिवर्सिटी [01:47:00] मुझे अली मुझे अकल के दायरे में मैंने [01:47:04] बहुत तलाश की मुझे मिला नहीं [01:47:06] [हंसी] [01:47:08] हां ये इधर उधर वो चश्मा लगाए हां उनको दे [01:47:11] दीजिए [01:47:14] जी जी फटाफट पूछिए बस पांच मिनट है पांच [01:47:16] मिनट में खत्म हो रहा है हां [01:47:17] अस्सलाम वालेकुम मुफ्ती साहब एंड मेरा [01:47:18] सवाल मेरा सवाल जावेद अख्तर साहब से [01:47:21] क्या नाम है आपका [01:47:22] अरे भैया मुझे पूछ रहे हो यार [01:47:24] फैज फैज फैज [01:47:25] फैज पूछिए फैज साहब [01:47:26] तो मेरा सवाल ये है कि अभी जो एथियस्ट है [01:47:30] वो प्रॉब्लम ऑफ इवल आर्गुमेंट यूज कर रहे [01:47:32] हैं अगेंस्ट मुस्लिम्स राइट कि इस दुनिया [01:47:34] में इतना सारा ईवल है और अगेंस्ट मुस्लिम [01:47:36] तो यहां [01:47:37] अगेंस्ट थिएस्ट अगेंस्ट थिएस्ट हां थोड़ा [01:47:39] सा करेक्ट कर लीजिए भाई पूरी मशक्कत ही [01:47:41] इसी बात की थी कि किसी एक मजहब पे बात ना [01:47:43] टिके। [01:47:44] जी तो बेसिकली ये आर्गुमेंट ऐसा है कि इस [01:47:47] दुनिया में इतना ज्यादा ईवल एक्सिस्ट करता [01:47:48] है और अगर एक ऑल गुड गॉड है तो वो रोकता [01:47:50] क्यों नहीं है? लेकिन इस सवाल में एक हिडन [01:47:52] असंप्शन ये है कि इस दुनिया में ईवल [01:47:54] एक्सिस्ट करता है। अब एथियस कि कैसे [01:47:56] ऑनटोलॉजिकली प्रूव कर सकते हैं कि इस [01:47:58] दुनिया में ईवल एक्सिस्ट करता है। मैं [01:47:59] आपको बताता हूं थोड़ा सा समझा। [01:48:00] नहीं नहीं सर [हंसी] [01:48:02] इनको सुनिए। नहीं नहीं प्लीज डोंट डू। [01:48:04] नहीं। [01:48:04] आई वांट टू एक्सप्लेन ऑनटोलॉजी। [01:48:06] नहीं नहीं हम समझ गए, सर। इनको आप जवाब [01:48:07] देने दीजिए। [01:48:08] अच्छा सवाल पूछ रहा हूं मैं। [01:48:09] अभी तक क्या था? [01:48:10] वो मैं थोड़ा सा ऐड ऑन कर लेता हूं। [01:48:12] तुम गुरु तो हम जब इसका राउंड 13 करेंगे [01:48:15] ना, तब तुमको स्टेज पे बिठाएंगे। [01:48:17] जी, जी। तो, हां, जल्दी से। तो, तो देखिए, [01:48:20] एथिज, एथिज्म के हिसाब से सब कुछ रैंडमली [01:48:22] बन गया है। सब कुछ एटम्स और मॉलिक्यूल्स [01:48:24] है। एक पत्थर में और मुझ में सिर्फ इतना [01:48:26] फर्क है कि हम लोग एटम्स और मॉलिक्यूल्स [01:48:28] का अलग-अलग रिअरेंजमेंट है। अब एक पत्थर [01:48:29] को कोई इंसान तलवार से दो टुकड़ों में [01:48:31] काटते हैं या मुझे? अकॉर्डिंग टू एथिज्म [01:48:33] इट इज़ सेम। देयर इज नो इवल एंड गुड [01:48:34] अकॉर्डिंग टू एथिज्म। [01:48:37] जी। अच्छा फैज साहब का सवाल ये है कि [01:48:41] कोशिश भी करते तो इससे गलत सवाल नहीं कर [01:48:43] पाते। [01:48:45] एक लाइफ फॉर्म है और लाइफ फॉर्म में [01:48:48] फीलिंग्स है। मतलब लाइफ फॉर्म सुनता है, [01:48:51] देखता है, टेस्ट कर सकता है, फील कर सकता [01:48:55] है। तो उसकी जो ये जो क्वालिटी एक बबल में [01:48:59] आ गई है कि वो जानवर में भी है, इंसान में [01:49:01] भी है। तो जाहिर है कि उसे कोई तकलीफ [01:49:04] पहुंचेगी तोकि उसके पास वो सेंसिटिविटी है [01:49:06] तो करेगा। पत्थर में वह सेंसिटिविटी नहीं [01:49:10] है। तो यह क्या सवाल हुआ कि अगर पत्थर को [01:49:12] काटा तो पत्थर को तकलीफ नहीं होती तो आपको [01:49:14] काटे तो आपको क्यों तकलीफ होगी? बैठ जाइए। [01:49:17] जी हां अगला सवाल [01:49:19] हां पूछिए पूछिए पूछिए। [01:49:20] जी जावेद अख्तर साहब। [01:49:22] अरे भैया सब आप लोग मुफ्ती साहब को छोड़ [01:49:25] रहे हैं। वो मेरे ही पीछे पड़े हैं। क्या? [01:49:28] चलो बोलो भाई। [01:49:30] यू यू आस्क हाउ गॉड कैन एक्सिस्ट व्हेन [01:49:32] चिल्ड्रन डाई एंड गाज़ा। हां यू आस्क्ड [01:49:35] हाउ गॉड कैन एकिस्ट व्हेन चिल्ड्रन डाई इन [01:49:38] काज़ा एंड यू आल्सो मेंशन द राइज़ ऑफ़ एथिज्म [01:49:41] इन यूरोप बट द सेम इवेंट्स आल्सो आर [01:49:44] लीडिंग मेनी एथिस्ट एंड नॉट बिलीवर्स टू [01:49:46] टर्न टुवर्ड्स फेथ हाउ डू यू इंटरप्रेट [01:49:49] दिस कंट्राडिक्शन वेल सफरिंग पुशेस सम अवे [01:49:52] फ्रॉम गॉड येट ब्रिंग्स अदर्स क्लोजर टू [01:49:55] बिलीफ आपको एक बात बताऊं दुनिया परफेक्ट [01:49:58] तो कहीं भी नहीं है हर जगह कुछ खामियां है [01:50:01] बेटा एक मिनट मैं आप ही को कहेंगे देखो वो [01:50:05] तो कुछ खामियां कमजोरियां खराबियां सब जगह [01:50:09] है लेकिन अगर देखोगे ईमानदारी से कि [01:50:12] दुनिया सबसे ज्यादा मुजब कहां है एक आम [01:50:15] शहरी को कहां हुकूक हासिल है वो बोल सकता [01:50:20] है अपनी मर्जी से काम कर सकता है अपनी [01:50:22] मर्जी से राय दे सकता है हुकूमत के खिलाफ [01:50:24] बोल सकता है बरसरे इख्तेदार लोगों के बारे [01:50:28] में बोल सकता है सरमायादारों के खिलाफ बोल [01:50:31] सकता है तो आपको ये स्कडी नेवियन कंट्रीज [01:50:33] में मिलेगा। वेस्टर्न यूरोप में मिलेगा। [01:50:35] मैं नहीं कह रहा वो परफेक्ट है। बिल्कुल [01:50:37] नहीं। वहां बहुत खराबियां भी है। परफेक्ट [01:50:39] तो कोई नहीं। लेकिन जिनजिन मुल्कों में [01:50:41] लैटिन अमेरिका देखो, गल्फ देखो। वहां पर [01:50:46] आपको ये जरूर है कि रेप नहीं होते होंगे। [01:50:48] रेप की जरूरत क्या है? भ उसको तो खरीद लो। [01:50:51] घर में रखो। तो सड़क पे रेप करने की क्या [01:50:53] जरूरत है? मगर सुनिए सुनिए सुनिए। मगर [01:50:57] हकीकत ये है कि वहां शख्स आजादी राय देने [01:51:01] की बोलने की नहीं है। [01:51:04] जी ये एक आखरी सवाल मुफ्ती साहब से हां [01:51:06] मैम इनको माइक दीजिए। [01:51:09] शुक्रिया। मेरा नाम मनीषा है। मैं हरियाणा [01:51:12] से आई हूं। मैं मुफ्ती साहब से एक बात [01:51:14] पूछना चाहती हूं। आप बार-बार जावेद साहब [01:51:16] को कंट्राडिक्ट तो कर रहे हैं कि आपने ये [01:51:18] कहा ये कहा। लेकिन आप भी एजम्पशनंस के [01:51:20] बेसिस पे बात कर रहे हैं। आपने खुदा के [01:51:23] होने का कौन सा प्रूफ पेश किया है? खुदा [01:51:26] की एक्सिस्टेंस का। अब मां इस सवाल को अलग [01:51:28] रहने दीजिए कौन एथस्ट है कौन नहीं है। और [01:51:30] दूसरी बात जो आपने एक छोटी सी कही थी के [01:51:33] ये फ्री विल का इस्तेमाल करता है इंसान [01:51:36] अपनी। लेकिन उस फ्री विल का इस्तेमाल में [01:51:38] मतलब खुदा ने ये दे दी सबको ये इजाजत के [01:51:42] वो कितना घिनौनापन और कितने ज्यादा खराब [01:51:45] से खराब तरीके इस्तेमाल कर सकते हैं। लोग [01:51:46] जब आप [01:51:47] आप फ्री विल को मानती है ना या कहती है कि [01:51:50] फ्री विल नहीं है। [01:51:51] है ना? मानती है ना? तो अब आपके पास इसका [01:51:55] कोई एक्सप्लेनेशन नहीं है कि अगर एक इंसान [01:51:58] उस फ्री विल का इस्तेमाल करके गलत काम कर [01:52:01] रहा है और बच के अच्छी जिंदगी गुजार के [01:52:03] निकल जा रहा है उसका कोई रिकंपेंस नहीं [01:52:05] है। हमारे वर्ल्ड व्यू में जो इंसान गलत [01:52:10] काम कर रहा है उसको भी रिकंपैेंस यानी [01:52:12] उसका बुरा बदला मिलना है और जो सही काम कर [01:52:15] रहा है उसको सही बदला मिलना है। लिहाजा जो [01:52:18] फ्री विल है वो इस तरीके से है कि एक [01:52:20] लिमिटेड टाइम तक खुदा ने मोहलत दी है। ऐसा [01:52:23] नहीं कि छूट दे दी जो करना है करते रहो [01:52:25] हमेशा। वक्त आएगा जब एग्जाम का टाइम खत्म [01:52:28] होगा तब रिजल्ट आएगा। दौरान एग्जाम [01:52:30] जबरदस्ती आपको नहीं बताया जाएगा। [01:52:32] अरे भाई एक सेकंड सवाल मुफ़्ती साहब से [01:52:34] मेरा मैम मुफ्ती साहब सेम [01:52:40] एक सेकंड रुक जाइए। आपसे आपसे [01:52:44] मैं मुफ्ती साहब एक ही सवाल करता हूं [01:52:47] के अगर जो हो रहा है फ्री विल से हो रहा [01:52:50] है और एक दिन बरोज़ कयामत इंसाफ होगा महशर [01:52:55] में वगैरह वगैरह [01:52:57] तो दुआ क्यों मांगते हैं लोग [01:52:59] दुआ मांगते हैं इसके मतलब है अभी भी उसने [01:53:02] ये डिपार्टमेंट रखा है कि मैं रोजमर्रा की [01:53:05] जिंदगी में इंटरव्यू ही कैन [01:53:08] तो तुम कैन हो तुम मुझे नौकरी दिला देते [01:53:11] हो। मेरे बेटे को ग्रीन कार्ड दिला देते [01:53:13] हो और 45,000 बच्चे मरते हैं उन्हें रोकते [01:53:16] नहीं हो। [01:53:16] नहीं। तो क्या आप ये कह रहे हैं कि इस [01:53:18] दुनिया में जालिमों को कभी पकड़ ही नहीं [01:53:20] होती है। [01:53:20] अरे जो भी पकड़ होगी वो बच्चे रोते हैं। [01:53:23] बिल्कुल देखिए मैंने अपने ओपनिंग [01:53:25] स्टेटमेंट में यही कहा था कि जनाब जावेद [01:53:27] साहब सिर्फ इमोशनल आर्गुमेंट है। दिस इज़ [01:53:30] एन इमोशनल आर्गुमेंट। [01:53:31] ये छोटे इसके पीछे [01:53:34] इसके पीछे का रीज़न मैंने बताया क्या है? [01:53:36] इसके पीछे का विज़डम क्या है? मैंने बताया। [01:53:38] मंच से आप लोगों को सज्जनों इसलिए कह रहा [01:53:41] हूं ताकि थोड़ा सा आपके कॉन्शेंस पे जोर [01:53:43] रहे कि आपको आर्डर बचा के रखना है। वक्त [01:53:46] तय हुआ था। ये वक्त पूरा हुआ। आपने इतने [01:53:49] धैर्य पूर्वक सुना। मैं आप सबका बहुत-बहुत [01:53:52] शुक्रगुजार हूं। यदि इन दोनों विद्वानों [01:53:55] की इच्छा होगी। तो कभी हम इस बातचीत का [01:53:58] राउंड टू राउंड थ्री यही तो देखिए खूबी है [01:54:00] इंसान की कि बहस मुबासे में वो पड़ा रहता [01:54:02] है। आप लोगों ने बड़े धैर्य का परिचय [01:54:04] दिया। बहुत-बहुत शुक्रिया। इसी के साथ ये [01:54:06] बातचीत [01:54:06] आप लोग को मैं एक बात बता दूं। ये सारी [01:54:09] बहस हो गई। अब मुफ्ती साहब और बड़े मुफ्ती [01:54:12] साहब इन सब के साथ में खाना खाने वाला [01:54:14] हूं। [01:54:18] [संगीत]