WEBVTT

00:00:00.240 --> 00:00:05.600
कॉन्सिट्यूशन क्लब में हो रही इस बेहद

00:00:03.279 --> 00:00:07.839
जरूरी बहस में डिबेट में आप सभी का

00:00:05.599 --> 00:00:10.000
बहुत-बहुत स्वागत है। मेरा नाम सौरभ

00:00:07.839 --> 00:00:13.359
द्विवेदी है। मैं इंडिया टुडे हिंदी

00:00:10.000 --> 00:00:16.480
मैगजीन का और ललन टॉप का संपादक हूं और आज

00:00:13.359 --> 00:00:19.519
की इस बहस का मॉडरेटर भी।

00:00:16.480 --> 00:00:22.480
इससे पहले कि यह बहस जिसका शीर्षक जिसका

00:00:19.519 --> 00:00:26.079
टॉपिक है डस गॉड एकिस्ट?

00:00:22.480 --> 00:00:29.920
यह शुरू हो दो विद्वानों के बीच जिनके नाम

00:00:26.079 --> 00:00:33.759
हैं श्री जावेद अख्तर और श्री मुफ्ती

00:00:29.920 --> 00:00:36.160
शमाइल नदवी जी। मैं कुछ बुनियादी चीजें आप

00:00:33.759 --> 00:00:39.039
लोगों को बता दूं ताकि यह बहस व्यवस्थित

00:00:36.159 --> 00:00:42.238
ढंग से चले। वैसे नहीं जैसी बहसों को

00:00:39.039 --> 00:00:44.960
देखने के हम इन दिनों आदि हो गए हैं। पढ़ी

00:00:42.238 --> 00:00:47.280
लिखी अकादमिक बहस।

00:00:44.960 --> 00:00:49.039
इस बहस का प्रारूप कैसा होगा? इसका

00:00:47.280 --> 00:00:50.960
स्ट्रक्चर कैसा होगा? पहले मैं आपको यह

00:00:49.039 --> 00:00:53.198
बता देता हूं।

00:00:50.960 --> 00:00:55.439
सबसे पहले

00:00:53.198 --> 00:00:58.960
नौजवान

00:00:55.439 --> 00:01:02.320
विद्वान मुफ्ती शमाल नदवी जी 10 मिनट अपनी

00:00:58.960 --> 00:01:05.920
दलीलें आप लोगों के सामने रखेंगे। उसके

00:01:02.320 --> 00:01:08.879
बाद जावेद अख्तर साहब 10 मिनट अपनी बात

00:01:05.920 --> 00:01:11.280
रखेंगे। उसके बाद जिसको हम अंग्रेजी में

00:01:08.879 --> 00:01:13.438
रिबटल कहते हैं। एक जवाबी दौर रहेगा कि

00:01:11.280 --> 00:01:16.799
आपने जो कहा मैं उससे मुतमाइन हूं कि नहीं

00:01:13.438 --> 00:01:19.118
हूं और हमने जो कहा। इसके बाद बहस का

00:01:16.799 --> 00:01:22.159
राउंड टू शुरू होगा। दोनों विद्वानों को

00:01:19.118 --> 00:01:27.040
फिर से 7-सा मिनट का वक्त मिलेगा और इसके

00:01:22.159 --> 00:01:30.080
बाद रिबर्टल राउंड टू होगा 5-प मिनट का।

00:01:27.040 --> 00:01:32.799
इसके बाद एक दूसरे से सवाल जवाब होंगे।

00:01:30.079 --> 00:01:35.438
इसके लिए हमने लगभग 16 मिनट का वक्त तय

00:01:32.799 --> 00:01:37.200
किया है। अब यह सवालों की प्रकृति पर

00:01:35.438 --> 00:01:40.798
निर्भर करता है कि कितने सवाल होंगे।

00:01:37.200 --> 00:01:43.680
इसीलिए हमने वक्त की पाबंदी रखी है और

00:01:40.799 --> 00:01:45.520
इसके बाद आखिरी में 5-प मिनट का वक्त

00:01:43.680 --> 00:01:48.720
दोनों विद्वानों को एक बार फिर से दिया

00:01:45.519 --> 00:01:52.959
जाएगा अपने क्लोजिंग आर्गुमेंट के लिए और

00:01:48.719 --> 00:01:56.078
उसके बाद जो इस बहस के लिए सबसे जरूरी चीज

00:01:52.959 --> 00:01:58.959
है कि आप और हम और इंटरनेट पर देख रहे

00:01:56.078 --> 00:02:01.519
लाखों करोड़ों लोग उनके सवाल जवाब होंगे।

00:01:58.959 --> 00:02:04.319
तो आप लोग जो यहां मौजूद हैं आपके हम कुछ

00:02:01.519 --> 00:02:06.959
सवाल लेने की कोशिश करेंगे। 30 मिनट का

00:02:04.319 --> 00:02:10.560
वक्त हमने उसके लिए तय कर रखा है। इस तरह

00:02:06.959 --> 00:02:12.479
से यह 2 घंटे की बहस पूरी होगी।

00:02:10.560 --> 00:02:15.360
दो तीन बुनियादी बातें हैं जिनका हमें

00:02:12.479 --> 00:02:18.399
ध्यान रखना है। किसी भी किस्म की नारेबाजी

00:02:15.360 --> 00:02:20.319
में हमें शरीक नहीं होना है। यह

00:02:18.400 --> 00:02:22.319
हल्लागुल्ला नहीं है क्योंकि पूरी दुनिया

00:02:20.318 --> 00:02:24.958
देख रही है तो एक नजीर कायम करनी है। एक

00:02:22.318 --> 00:02:28.159
उदाहरण लोगों के सामने रखना है कि पढ़े

00:02:24.959 --> 00:02:30.560
लिखे लोग इत्तेफाकी और नाइत्तेफाकी रखते

00:02:28.159 --> 00:02:33.199
हुए भी एक दूसरे से सहमति और असहमति रखते

00:02:30.560 --> 00:02:35.120
हुए भी बात कह सकते हैं। यहां पर मेरे

00:02:33.199 --> 00:02:36.639
जेएनयू के प्रोफेसर बैठे हैं पुरुषोत्तम

00:02:35.120 --> 00:02:40.080
अग्रवाल जी जिन्होंने हमें क्लास में

00:02:36.639 --> 00:02:44.479
सिखाया है कि सहमति का

00:02:40.080 --> 00:02:47.440
साहस और असहमति का विवेक और इसका ठीक उलट

00:02:44.479 --> 00:02:51.679
भी यह बड़ा जरूरी है।

00:02:47.439 --> 00:02:54.239
दूसरी बात यह किसी एक धर्म के बारे में

00:02:51.680 --> 00:02:57.599
बहस नहीं है। यह बात सबको स्पष्ट होनी

00:02:54.239 --> 00:03:00.640
चाहिए। किसी धर्म को महान बताने या किसी

00:02:57.598 --> 00:03:03.280
धर्म को कमतर बताने की यह बहस नहीं है। तो

00:03:00.639 --> 00:03:05.759
यदि कोई इस उम्मीद से देख रहा है या यहां

00:03:03.280 --> 00:03:09.039
आया है तो मैं आपको आश्वस्त करना चाहता

00:03:05.759 --> 00:03:12.239
हूं कि आपको नाउद ही हाथ लगेगी।

00:03:09.039 --> 00:03:14.479
इस बहस में बहुत ज्यादा धार्मिक प्रतीकों

00:03:12.239 --> 00:03:17.120
के इस्तेमाल को लेकर भी यह दोनों लोग जो

00:03:14.479 --> 00:03:21.280
अभी आपको गंभीर दिख रहे हैं। भले लोग हैं।

00:03:17.120 --> 00:03:23.920
कल शाम को चाय पर मिले थे। बहुत हंसीज़ाक

00:03:21.280 --> 00:03:27.439
भी इनके बीच हुआ था और गलवैया डालते हुए

00:03:23.919 --> 00:03:30.639
एक तस्वीर भी हुई थी। यह इस बात का प्रमाण

00:03:27.439 --> 00:03:34.079
है कि इंटरनेट पर जो हल्ला मचा हुआ है

00:03:30.639 --> 00:03:36.559
उसके मुकाबले यह दोनों लोग बहुत ही अच्छे

00:03:34.080 --> 00:03:39.200
शांत ढंग से बहस के लिए राजी हो गए हैं।

00:03:36.560 --> 00:03:42.878
Twitter की बातें Twitter तक सीमित एलन

00:03:39.199 --> 00:03:46.560
मस्क आजकल उसको एक्स कहते हैं

00:03:42.878 --> 00:03:48.479
और अब इस बहस की शुरुआत मैं इन विद्वानों

00:03:46.560 --> 00:03:51.039
का हालांकि इनको परिचय की जरूरत नहीं है

00:03:48.479 --> 00:03:54.158
पर हो सकता है। हमें पत्रकारिता में

00:03:51.039 --> 00:03:56.959
सिखाया जाता है कि नेवर अस्यूम विज्ञान भी

00:03:54.158 --> 00:03:58.878
यही कहता है। मुफ्ती शमाल नदवी साहब

00:03:56.959 --> 00:04:01.280
इस्लामिक विद्वान शिक्षाविद हैं। कोलकाता

00:03:58.878 --> 00:04:04.479
के वाहियान फाउंडेशन के संस्थापक हैं।

00:04:01.280 --> 00:04:06.799
लखनऊ की प्रतिष्ठित दारुल उलूम नदतुल उलमा

00:04:04.479 --> 00:04:08.959
से ग्रेजुएशन किया है। सोशल मीडिया और

00:04:06.799 --> 00:04:10.879
सार्वजनिक मंचों पर अध्यापन और बौद्धिक

00:04:08.959 --> 00:04:13.120
कामों में सक्रिय हैं। और इस समय

00:04:10.878 --> 00:04:16.238
इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी मलेशिया

00:04:13.120 --> 00:04:18.239
से पीएचडी कर रहे हैं। अच्छी बात यह है कि

00:04:16.238 --> 00:04:20.319
पढ़ाई के साथ-साथ ट्रेवल ब्लॉग भी बनाते

00:04:18.238 --> 00:04:22.239
हैं। पेट्रोनस टावर के सामने का ब्लॉग

00:04:20.319 --> 00:04:25.279
हमने देखा।

00:04:22.240 --> 00:04:29.680
हमारे साथ जावेद अख्तर साहब हैं। जावेद

00:04:25.279 --> 00:04:32.959
अख्तर साहब कवि हैं, शायर हैं। गद्य भी

00:04:29.680 --> 00:04:37.360
लिखते हैं। फिल्मों के लिए संवाद लिखे

00:04:32.959 --> 00:04:41.039
हैं, गीत लिखे हैं। इससे इत

00:04:37.360 --> 00:04:43.919
वैज्ञानिक सोच को लेकर या अपने डिक्लेयर्ड

00:04:41.040 --> 00:04:46.639
एथिज्म को लेकर भी मुखरित रहते हैं और

00:04:43.918 --> 00:04:50.799
अपने तैशनालिटी की बात करते हैं। देवियों

00:04:46.639 --> 00:04:53.360
और सज्जनों, डस गॉड एकिस्ट? इस सवाल का

00:04:50.800 --> 00:04:56.400
जवाब सब अपने-अपने त खोजने की कोशिश कर

00:04:53.360 --> 00:04:58.879
रहे हैं। कोई इसको गॉड डम पार्टिकल की खोज

00:04:56.399 --> 00:05:01.359
बताता है। कोई गॉड पार्टिकल की खोज बताता

00:04:58.879 --> 00:05:04.159
है। कोई हिक्स बोसान की खोज बताता है। कोई

00:05:01.360 --> 00:05:07.120
यह सवाल जवाब तलाशने की कोशिश करता है कि

00:05:04.160 --> 00:05:09.680
मास एग्जिस्टेंस में आखिर आया कैसे? हुआ

00:05:07.120 --> 00:05:12.399
क्या था? सृष्टि के पहले, समय के पहले

00:05:09.680 --> 00:05:14.478
क्या था? और कोई यह कहता है कि ये सारी

00:05:12.399 --> 00:05:16.959
खोजें जिस मस्तिष्क में हो रही है,

00:05:14.478 --> 00:05:21.038
प्रकृति के क्रम में वो कैसे विकसित हुआ?

00:05:16.959 --> 00:05:23.680
मैं उम्मीद करता हूं कि हम आज इन बुनियादी

00:05:21.038 --> 00:05:26.159
सवालों के कुछ जवाब हासिल करने में कामयाब

00:05:23.680 --> 00:05:29.918
हो। मैं सबसे पहले मंच पर आमंत्रित कर रहा

00:05:26.160 --> 00:05:32.743
हूं मुफ्ती शमाल नदवी साहब को। आइए सर।

00:05:29.918 --> 00:05:34.762
जी

00:05:32.742 --> 00:05:34.762
[प्रशंसा]

00:05:42.720 --> 00:05:49.120
एक आपकी गुजारिश बोलना शुरू करें। आप लोग

00:05:45.839 --> 00:05:54.038
प्लीज अपने फोन लाइव मोड पे या साइकिल एक

00:05:49.120 --> 00:05:54.038
बार चेक कर ले कई बार बेहानी हो जाती है।

00:06:00.879 --> 00:06:07.279
तमाम तारीफें उस क्रिएटर के लिए जिसने इस

00:06:03.839 --> 00:06:09.599
यूनिवर्स को एक मकसद के तहत पैदा किया है।

00:06:07.279 --> 00:06:12.239
रिस्पेक्टेड जनाब जावेद अख्तर साहब,

00:06:09.600 --> 00:06:15.919
मिस्टर सौरभ द्विवेदी और रिस्पेक्टेड

00:06:12.240 --> 00:06:18.720
ऑडियंस थैंक यू ऑल फॉर बीइंग हियर टुडे।

00:06:15.918 --> 00:06:22.159
आज की डिबेट में क्योंकि हम बात करने वाले

00:06:18.720 --> 00:06:25.520
हैं डस गॉड एक्सिस्ट के टॉपिक पर तो यह एक

00:06:22.160 --> 00:06:27.919
ऐसा टॉपिक है जिसके मुतालिक कोई भी डिसीजन

00:06:25.519 --> 00:06:31.120
लेने के लिए अलग-अलग स्टैंडर्ड्स हो सकते

00:06:27.918 --> 00:06:34.959
हैं। लिहाजा डिबेट के शुरू में यह जरूरी

00:06:31.120 --> 00:06:38.319
है कि हम यह जान लें कि आज के इस टॉपिक

00:06:34.959 --> 00:06:42.000
में कौन सा स्टैंडर्ड सही होगा और कौन सा

00:06:38.319 --> 00:06:44.000
गलत होगा। सबसे पहला स्टैंडर्ड जिसे मैं

00:06:42.000 --> 00:06:47.038
समझता हूं कि हमारे रिस्पेक्टेड जनाब

00:06:44.000 --> 00:06:51.600
जावेद अख्तर साहब बड़ी तेजी के साथ उसकी

00:06:47.038 --> 00:06:54.719
तरफ लपकेंगे वो है साइंस। जबकि साइंस दर

00:06:51.600 --> 00:06:58.240
हकीकत खुदा के एग्जिस्टेंस को डायरेक्टली

00:06:54.720 --> 00:07:00.960
साबित करने या उसके एकिस्टेंस को डिनाई

00:06:58.240 --> 00:07:04.639
करने के लिए स्टैंडर्ड नहीं बन सकती। और

00:07:00.959 --> 00:07:07.359
उसकी वजह क्या है? ये मैं नहीं कह रहा। यह

00:07:04.639 --> 00:07:12.800
वो लोग कह रहे हैं जो साइंस के एक्सपर्ट्स

00:07:07.360 --> 00:07:16.560
हैं। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस कहती है साइंस

00:07:12.800 --> 00:07:19.520
डजंट हैव द प्रोसेससेस टू प्रूव और

00:07:16.560 --> 00:07:22.079
डिस्प्रूव द एकिस्टेंस ऑफ़ गॉड। व्हाई?

00:07:19.519 --> 00:07:24.799
क्योंकि साइंस का ताल्लुक एंपेरिकल

00:07:22.079 --> 00:07:27.279
एविडेंस से है और एंपेरिकल एविडेंसेस का

00:07:24.800 --> 00:07:31.680
ताल्लुक हमारे नेचुरल और फिजिकल वर्ल्ड से

00:07:27.279 --> 00:07:35.279
है। जबकि गॉड नॉन फिजिकल और सुपर नेचुरल

00:07:31.680 --> 00:07:38.478
रियलिटी है। लिहाजा नॉन फिजिकल रियलिटी को

00:07:35.279 --> 00:07:41.198
आप उस टूल के साथ नहीं चेक कर सकते जिसका

00:07:38.478 --> 00:07:44.399
काम फिजिकल रियलिटी को तलाश करना है।

00:07:41.199 --> 00:07:47.520
लिहाजा आज इस डिबेट में गॉड की

00:07:44.399 --> 00:07:50.638
एग्ज़िस्टेंस को साबित करने या उसे डिनाई

00:07:47.519 --> 00:07:54.478
करने में साइंटिफिक एविडेंस को एक्सेप्ट

00:07:50.639 --> 00:07:57.759
नहीं किया जाएगा। दूसरा स्टैंडर्ड हो सकता

00:07:54.478 --> 00:08:00.560
है रेवुलेशन कि रेवेलेशन के जरिए हम ये

00:07:57.759 --> 00:08:02.800
साबित करें कि गॉड एकिस्ट करता है या

00:08:00.560 --> 00:08:05.839
नहीं। लेकिन ये स्टैंडर्ड भी आज

00:08:02.800 --> 00:08:09.199
इररेलेवेंट है। क्यों? क्योंकि रेवोलेशन

00:08:05.839 --> 00:08:11.439
मेरे नजदीक सोर्स ऑफ नॉलेज है। वैलिड

00:08:09.199 --> 00:08:13.520
सोर्स ऑफ नॉलेज है। लेकिन हमारे जावेद

00:08:11.439 --> 00:08:16.319
अख्तर साहब के नजदीक ये वैलिड सोर्स ऑफ

00:08:13.519 --> 00:08:19.359
नॉलेज नहीं है। लिहाजा आज की डिबेट में

00:08:16.319 --> 00:08:22.080
मैं एक भी एविडेंस किसी भी मजहबी

00:08:19.360 --> 00:08:24.319
स्क्रिप्चर से नहीं दूंगा। ताकि जावेद

00:08:22.079 --> 00:08:28.719
अख्तर साहब के लिए वो अनएक्सेप्टेबल ना

00:08:24.319 --> 00:08:31.680
हो। तीसरा जो मयार हो सकता है वो है

00:08:28.720 --> 00:08:34.639
ऑब्जरवेशन के भाई कोई कहे कि हमें खुदा

00:08:31.680 --> 00:08:37.278
दिखाओ। अगर है तो दिखाओ या ये कि खुदा के

00:08:34.639 --> 00:08:40.240
एकिस्टेंस पर एंपेरिकल एविडेंस दो। तो ये

00:08:37.278 --> 00:08:42.719
है दर हकीकत गलत टूल का इस्तेमाल करना। ये

00:08:40.240 --> 00:08:45.278
ऐसा ही है कि जावेद साहब मुझसे ये मुतालबा

00:08:42.719 --> 00:08:47.920
करें कि मुफ्ती साहब आप मेटल डिटक्टर के

00:08:45.278 --> 00:08:49.519
जरिए प्लास्टिक डिटेक्ट करके दिखाएं। अबकि

00:08:47.919 --> 00:08:52.319
प्लास्टिक डिटेक्ट नहीं हो पा रही है।

00:08:49.519 --> 00:08:54.959
लिहाजा प्लास्टिक डज नॉट एक्सिस्ट। नो यू

00:08:52.320 --> 00:08:56.959
आर यूजिंग द रोंग टूल। इस टूल से

00:08:54.958 --> 00:08:58.639
प्लास्टिक को डिटेक्ट नहीं किया जाता।

00:08:56.958 --> 00:09:01.278
लिहाजा

00:08:58.639 --> 00:09:04.000
मैं समझता हूं कि गॉड के एकिस्टेंस पर

00:09:01.278 --> 00:09:06.399
एंपेरिकल एविडेंस का मुतालबा करना एक

00:09:04.000 --> 00:09:09.360
बचकाना मुतालबा है और हमारे रिस्पेक्टेड

00:09:06.399 --> 00:09:12.240
जनाब जावेद अख्तर साहब इस स्टेज से अब

00:09:09.360 --> 00:09:17.759
बहुत आगे निकल चुके हैं। अब बचता है एक ही

00:09:12.240 --> 00:09:21.759
स्टैंडर्ड और वो स्टैंडर्ड है अकल लॉजिक

00:09:17.759 --> 00:09:24.399
रीजनिंग और यही वो स्टैंडर्ड है जिसके तहत

00:09:21.759 --> 00:09:26.399
गॉड के एक्जिस्टेंस को साबित किया जाएगा

00:09:24.399 --> 00:09:29.919
या गॉड की एक्सिस्टेंस को डिनाई किया

00:09:26.399 --> 00:09:32.639
जाएगा। लेकिन चूंकि ये बहुत इंपॉर्टेंट और

00:09:29.919 --> 00:09:35.439
सेंसिटिव टॉपिक है। इसलिए लॉजिकल

00:09:32.639 --> 00:09:38.480
आर्गुमेंट भी ऐसा होना चाहिए जो डेफिनेटिव

00:09:35.440 --> 00:09:41.519
हो। इनडेफिनेटिव ना हो जो दो और दो चार की

00:09:38.480 --> 00:09:43.759
तरह बिल्कुल वाज़ हो। जिसे लॉजिकली रिजेक्ट

00:09:41.519 --> 00:09:47.360
करना पॉसिबल नहीं हो। फॉर एग्जांपल हम

00:09:43.759 --> 00:09:51.519
कहें हमारे रिस्पेक्टेड मिस्टर सौरभ साहब

00:09:47.360 --> 00:09:54.320
ये एक इंसान है और तमाम इंसान कॉन्शियस

00:09:51.519 --> 00:09:56.879
बीइंग है। लिहाजा नतीजा क्या निकला? हमारे

00:09:54.320 --> 00:09:58.640
सौरभ साहब भी कॉन्शियस बीइंग हैं। क्या ये

00:09:56.879 --> 00:10:00.480
इनडेफिनेट आर्गुमेंट है या डेफिनेट

00:09:58.639 --> 00:10:03.199
आर्गुमेंट? है? ये डेफिनेट आर्गुमेंट है।

00:10:00.480 --> 00:10:05.839
ये दो और दो की तरह वाज़ है। इसमें किसी

00:10:03.200 --> 00:10:08.959
तरह जो है लॉजिकली इसको रिजेक्ट नहीं किया

00:10:05.839 --> 00:10:13.120
जा सकता। तो अगर आज हमारे जावेद अख्तर

00:10:08.958 --> 00:10:16.639
साहब ऐसी कोई अकली दलील और लॉजिकल एविडेंस

00:10:13.120 --> 00:10:19.839
दें खुदा के ना होने पर जो डेफिनेट भी हो

00:10:16.639 --> 00:10:22.078
तो मैं ये ऐलान करता हूं कि यकीनन मैं उस

00:10:19.839 --> 00:10:24.480
एविडेंस को कबूल करूंगा और उस पर गौर

00:10:22.078 --> 00:10:26.799
करूंगा। लेकिन साथ में ये भी ऐलान कर देता

00:10:24.480 --> 00:10:30.240
हूं प्रेडिक्शन के तौर पर कि ऐसा कोई

00:10:26.799 --> 00:10:35.359
डेफिनेट आर्गुमेंट कोई नहीं पेश कर सकता।

00:10:30.240 --> 00:10:38.639
दलील हम देंगे और डेफिनेटिव दलील देंगे।

00:10:35.360 --> 00:10:42.000
लॉजिकल दलील देंगे। ऐसी दलील देंगे जो

00:10:38.639 --> 00:10:45.679
एंटायर एथिस्टिक वर्ल्ड उसे रेफ्यूट नहीं

00:10:42.000 --> 00:10:47.839
कर सकती। चल अब हम एक एग्जांपल सोचते हैं।

00:10:45.679 --> 00:10:50.879
एक सिनेरियो सिंपल सिनेरियो तमाम ऑडियंस

00:10:47.839 --> 00:10:53.440
से गुजारिश है। हम और आप एक आइसोलेटेड

00:10:50.879 --> 00:10:56.480
आइलैंड पर हैं। ऐसा आइलैंड जहां पे हमसे

00:10:53.440 --> 00:10:59.200
पहले कोई कभी नहीं गया। चलते-चलते आपके

00:10:56.480 --> 00:11:02.079
सामने अचानक आपने देखा एक पिंक कलर की बॉल

00:10:59.200 --> 00:11:05.360
पड़ी हुई है। सबसे पहला सवाल आपके ज़हन में

00:11:02.078 --> 00:11:07.759
क्या आएगा कि ये बॉल यहां क्यों आई? कैसे

00:11:05.360 --> 00:11:10.159
आई? यह पिंक कलर की ही क्यों है? कोई और

00:11:07.759 --> 00:11:13.200
कलर भी हो सकता था। यह इसी शेप में क्यों

00:11:10.159 --> 00:11:16.559
है? कोई और शेप भी हो सकता था। नेचुरली आप

00:11:13.200 --> 00:11:19.680
इस तरफ पहुंचेंगे कि कोई ना कोई है जिसने

00:11:16.559 --> 00:11:23.039
इन स्पेसिफिक प्रॉपर्टीज के साथ इस बॉल को

00:11:19.679 --> 00:11:26.319
बनाया है और यहां पे रखा है। चकि आप जानते

00:11:23.039 --> 00:11:28.879
हैं कि ये जो बॉल है इसका एग्ज़िस्ट करना

00:11:26.320 --> 00:11:30.640
जरूरी नहीं है। ये एग्ज़िस्ट कर भी सकती थी

00:11:28.879 --> 00:11:32.879
नहीं भी कर सकती थी। और एक्सिस्ट करना ही

00:11:30.639 --> 00:11:35.600
था तो किसी और फॉर्म में करती। किसी और

00:11:32.879 --> 00:11:37.600
कलर में करती। अब आप इस बॉल को एक्सपेंड

00:11:35.600 --> 00:11:39.759
करते चले जाएं। एक्सपेंड करते चले जाएं।

00:11:37.600 --> 00:11:42.399
एक्सपैंड करते चले जाएं। यहां तक कि ये

00:11:39.759 --> 00:11:44.799
बॉल यूनिवर्स के साइज की हो जाए। बताइए कि

00:11:42.399 --> 00:11:47.278
क्या साइज साइज के बढ़ जाने से सवाल बदल

00:11:44.799 --> 00:11:49.919
जाएगा? हरगिज़ नहीं बदलेगा। अभी भी सवाल

00:11:47.278 --> 00:11:52.559
रहेगा। ये यूनिवर्स कहां से आया? इन

00:11:49.919 --> 00:11:55.519
स्पेसिफिक प्रॉपर्टीज के साथ कहां से आया?

00:11:52.559 --> 00:11:57.599
क्यों आया? किसने बनाया? ये सवाल उस वक्त

00:11:55.519 --> 00:12:01.120
भी वैलिड रहेगा।

00:11:57.600 --> 00:12:03.440
लेकिन यह सवाल अगर हम जनाब जावेद अख्तर

00:12:01.120 --> 00:12:05.278
साहब से करें तो क्योंकि इनका वर्ल्ड व्यू

00:12:03.440 --> 00:12:07.360
एथिस्टिक है और सिर्फ इनका नहीं मतलब

00:12:05.278 --> 00:12:10.958
जितने भी एथिस्ट हैं और एथिस्टिक वर्ल्ड

00:12:07.360 --> 00:12:14.240
व्यू को रखने वाले से अगर आप ये सवाल करें

00:12:10.958 --> 00:12:17.119
कि ये यूनिवर्स कहां से आया तो इनका जवाब

00:12:14.240 --> 00:12:20.879
या तो आर्गुमेंट फ्रॉम इग्नोरेंस होगा या

00:12:17.120 --> 00:12:23.919
डॉग्मैटिक होगा। या तो यह कहेंगे कि मुझे

00:12:20.879 --> 00:12:25.679
नहीं पता कि यह कहां से आया। लिहाजा गॉड

00:12:23.919 --> 00:12:30.399
डज नॉट एक्सिस्ट। या आर्गुमेंट फ्रॉम

00:12:25.679 --> 00:12:32.319
इग्नोरेंस है या ये कहेंगे के ये यूनिवर्स

00:12:30.399 --> 00:12:34.559
खुद ब खुद बन गया। इसका मतलब यह है कि उस

00:12:32.320 --> 00:12:36.639
बॉल को भी खुद ब खुद बन जाना चाहिए। लेकिन

00:12:34.559 --> 00:12:38.479
बॉल के ताल्लुक से ये एक्सप्लेनेशन

00:12:36.639 --> 00:12:40.720
एक्सेप्ट नहीं की जाएगी कि ये खुद ब खुद

00:12:38.480 --> 00:12:42.879
बन गई। लेकिन यूनिवर्स के ताल्लुक से कर

00:12:40.720 --> 00:12:46.399
दिया जाएगा। इसे हम दूसरे अल्फाज़ में

00:12:42.879 --> 00:12:49.360
डॉग्मा भी कह सकते हैं। दूसरी चीज हमारे

00:12:46.399 --> 00:12:52.240
जावेद अख्तर साहब जरूर गॉड ऑफ गैप्स की

00:12:49.360 --> 00:12:54.159
मिसाल भी जरूर देंगे। और मिसाल देंगे कि

00:12:52.240 --> 00:12:56.079
पहले जमाने में बिजलियां कड़कती थी तो

00:12:54.159 --> 00:12:57.919
लोगों ने किसी एक खुदा की तरफ और बारिश

00:12:56.078 --> 00:12:59.679
होती थी तो दूसरे खुदा की तरफ मंसूब कर

00:12:57.919 --> 00:13:01.919
दिया। उनके पास दलील नहीं थी। ये हमारा

00:12:59.679 --> 00:13:04.958
वर्ल्ड व्यू है ही नहीं। ये हमारा वर्ल्ड

00:13:01.919 --> 00:13:07.838
व्यू है ही नहीं। क्योंकि नेचुरल फेनोमिना

00:13:04.958 --> 00:13:09.359
के प्रोसेस की इंटरप्रिटेशन को जान लेने

00:13:07.839 --> 00:13:10.880
से ये कहां से साबित हो गया कि गॉड

00:13:09.360 --> 00:13:14.320
एक्सिस्ट नहीं करता है। इस पर मैं

00:13:10.879 --> 00:13:16.879
इंशाल्लाह अभी आगे बात करूंगा। आप हजरात

00:13:14.320 --> 00:13:19.040
यह भी देखेंगे और मैं यह एक्सपेक्ट करता

00:13:16.879 --> 00:13:21.120
हूं कि हमारे रिस्पेक्टेड जनाब जावेद

00:13:19.039 --> 00:13:24.078
अख्तर साहब जरूर इमोशनल आर्गुमेंट्स भी

00:13:21.120 --> 00:13:27.278
देंगे जो कि एक लॉजिकल फैलेसी है जब बात

00:13:24.078 --> 00:13:30.078
आती है ट्रुथ को डिसाइड करने में। क्यों?

00:13:27.278 --> 00:13:32.159
मिसाल के तौर पर वो कहेंगे कि अगर गॉड है

00:13:30.078 --> 00:13:34.479
तो इविल क्यों एक्सिस्ट करता है? जबकि मैं

00:13:32.159 --> 00:13:36.399
कहता हूं इविल का एक्सिस्ट करना गॉड के

00:13:34.480 --> 00:13:38.720
एग्जिस्ट हो एक्सिस्ट करने की दलील है।

00:13:36.399 --> 00:13:41.120
उसके खिलाफ नहीं है। क्योंकि अगर गॉड है

00:13:38.720 --> 00:13:43.600
तो हम सब उसके सामने अकाउंटेबल हैं। और

00:13:41.120 --> 00:13:45.360
अगर हम अकाउंटेबल हैं तो अकाउंटेबिलिटी के

00:13:43.600 --> 00:13:48.000
लिए इविल का मौजूद होना जरूरी है। उसके

00:13:45.360 --> 00:13:50.320
बगैर हम अकाउंटेबल नहीं हो सकते। और अगर

00:13:48.000 --> 00:13:53.039
हम अकाउंटेबल नहीं हैं तो हम जनाब जावेद

00:13:50.320 --> 00:13:55.680
अख्तर साहब से पूछेंगे कि आप बताएं कि फिर

00:13:53.039 --> 00:13:58.480
सफरिंग इस दुनिया में क्यों है? अगर खुदा

00:13:55.679 --> 00:14:00.958
नहीं है तो सफरिंग क्यों है? और उन लोगों

00:13:58.480 --> 00:14:03.519
के जज्बे का क्या जिनके अंदर सफरिंग के के

00:14:00.958 --> 00:14:05.518
बाद इंतकाम लेने का जज्बा पाया जाता है और

00:14:03.519 --> 00:14:07.919
वो इस दुनिया से ऐसे ही चले गए। क्या उनकी

00:14:05.519 --> 00:14:10.799
सारी तकलीफें बेकार चली जाएंगी? अब आ जाए

00:14:07.919 --> 00:14:13.120
उसी एग्जांपल की तरफ कि बॉल मुझसे अगर कोई

00:14:10.799 --> 00:14:15.198
पूछे इस बॉल को किसने बनाया और या इस

00:14:13.120 --> 00:14:18.000
एक्सपेंडेड बॉल को किसने बनाया? मैं

00:14:15.198 --> 00:14:20.240
कहूंगा क्योंकि ये यूनिवर्स और इस

00:14:18.000 --> 00:14:22.480
यूनिवर्स की तमाम चीजें कंटिंजेंट हैं।

00:14:20.240 --> 00:14:24.560
कंटिंजेंट होने का मतलब ये होता है कि जो

00:14:22.480 --> 00:14:27.519
अपने एक्सिस्टेंस पे किसी के ऊपर डिपेंड

00:14:24.559 --> 00:14:30.159
करती हो। तो जाहिर है ये यूनिवर्स

00:14:27.519 --> 00:14:32.159
कंटिंजेंट है। और अगर कोई चीज कंटिंजेंट

00:14:30.159 --> 00:14:33.679
नहीं है तो मैं रिक्वेस्ट करूंगा कि मुझे

00:14:32.159 --> 00:14:35.759
दिखा दें कि कौन सी चीज यूनिवर्स में

00:14:33.679 --> 00:14:38.319
कंटिंजेंट नहीं है। हम भी जरा गौर कर लें

00:14:35.759 --> 00:14:41.439
और हम भी देख लें। और जब कॉन्टिंजेंट

00:14:38.320 --> 00:14:44.720
चीजें मौजूद हैं तो फिलॉसोफर्स की इस्तिला

00:14:41.440 --> 00:14:47.040
के मुताबिक हम उस टर्मिनोलॉजी के मुताबिक

00:14:44.720 --> 00:14:49.360
हम उस जगह तक पहुंचते हैं और उस हस्ती तक

00:14:47.039 --> 00:14:52.240
पहुंचते हैं जिसे नेसेसरी बीइंग कहा जाता

00:14:49.360 --> 00:14:54.720
है कि ये वो नेसेसरी बीइंग है जिसका मौजूद

00:14:52.240 --> 00:14:56.639
ना होना नामुमकिन हो चूंकि अगर ये मौजूद

00:14:54.720 --> 00:14:59.278
ना हो तो सारी चीजें एकिस्टेंस में आएंगी

00:14:56.639 --> 00:15:01.759
ही नहीं और ये सारी डिप कंटिंजेंट चीजें

00:14:59.278 --> 00:15:03.759
उसी के ऊपर डिपेंड करती हैं। अब अगर आप ये

00:15:01.759 --> 00:15:05.919
सवाल करते हैं कि फिर उस हस्ती को किसने

00:15:03.759 --> 00:15:07.519
बनाया? फिर उसका कॉज क्या है? फिर उसका

00:15:05.919 --> 00:15:09.679
कॉज क्या है? फिर उसका कॉज क्या है? और

00:15:07.519 --> 00:15:12.639
एंडलेसली चले जाएं। इसे हम कहते हैं

00:15:09.679 --> 00:15:15.679
इनफिनिट रिग्रेस ऑफ कॉजेस जो कि लॉजिकल

00:15:12.639 --> 00:15:18.079
फैलेसी है। कॉनसेप्चुअली इंफिनिटी पॉसिबल

00:15:15.679 --> 00:15:19.838
है। मिसाल के तौर पे न्यूमेरिकल्स वन टू

00:15:18.078 --> 00:15:21.599
थ्री गिनते चले जाएं। इनफिनिट नंबर्स हैं।

00:15:19.839 --> 00:15:23.839
मैं कॉनसेप्चुअली बात नहीं कर रहा।

00:15:21.600 --> 00:15:25.680
प्रैक्टिकली रियलिटी में साबित करके

00:15:23.839 --> 00:15:27.920
दिखाएं कि इनफिनिट रिग्रेस ऑफ़ कॉजेस

00:15:25.679 --> 00:15:30.078
पॉसिबल है या नहीं। अगर पॉसिबल है तो हम

00:15:27.919 --> 00:15:32.319
मान लेंगे। मिसाल दे दें और पॉसिबल नहीं

00:15:30.078 --> 00:15:34.879
है तो एक ही ऑप्शन बचता है जिसे हम कहते

00:15:32.320 --> 00:15:37.040
हैं नेसेसरी बीइंग। ऐसी नेसेसरी बीइंग जो

00:15:34.879 --> 00:15:39.039
इंडिपेंडेंट है क्योंकि अगर वो डिपेंडेंट

00:15:37.039 --> 00:15:41.278
हुई तो वो नेसेसरी नहीं रहेगी। ऐसी

00:15:39.039 --> 00:15:43.519
इंडिपेंडेंट बीइंग जो इटरनल है। अगर वो

00:15:41.278 --> 00:15:46.240
इटरनल नहीं होगी उसकी बिगिनिंग होगी तो वो

00:15:43.519 --> 00:15:48.799
खुद कंटिंजेंट है। ऐसी बीइंग जो पावरफुल

00:15:46.240 --> 00:15:50.879
है। क्योंकि कंटिंजेंट को एक्चुअलाइज करने

00:15:48.799 --> 00:15:53.278
के लिए पावर चाहिए। ऐसी बीइंग जो

00:15:50.879 --> 00:15:55.759
इंटेलिजेंट है और नॉलेजेबल है। क्योंकि ये

00:15:53.278 --> 00:15:59.039
यूनिवर्स स्पेसिफिक फॉर्म और स्पेसिफिक

00:15:55.759 --> 00:15:59.759
लॉज़ ऑफ नेचर के तहत प्रिसाइजली चल रहा है।

00:15:59.039 --> 00:16:02.915
थैंक यू।

00:15:59.759 --> 00:16:02.916
थैंक यू साहब। [प्रशंसा]

00:16:03.198 --> 00:16:09.519
मैं इन दलीलों के बाद जावेद अख्तर साहब से

00:16:06.879 --> 00:16:12.519
गुजारिश करूंगा। आप बैठ के बोलना चाहेंगे?

00:16:09.519 --> 00:16:12.519
जी।

00:16:15.306 --> 00:16:17.326
[प्रशंसा]

00:16:20.240 --> 00:16:25.440
पहले तो मैं मुफ्ती साहब को एक अच्छी खबर

00:16:22.559 --> 00:16:27.838
देना चाहूंगा कि मेरी नॉलेज साइंस के बारे

00:16:25.440 --> 00:16:32.639
में बड़ी मामूली है। तो आप फिक्र ना करें

00:16:27.839 --> 00:16:36.160
उसकी। लेकिन कुछ कॉमन सेंस है मुझ में।

00:16:32.639 --> 00:16:40.399
देखिए ये खुदा का तसवुर कोई नया तसवुर

00:16:36.159 --> 00:16:43.360
नहीं है। ये सदियों से रहा है। ये कुछ

00:16:40.399 --> 00:16:46.078
रिलजन 3000 साल पुराने होंगे। 4000 साल

00:16:43.360 --> 00:16:49.759
पुराने होंगे। लेकिन इंसान कोई 10,000

00:16:46.078 --> 00:16:52.879
12000 साल से एकिस्ट करता है होमोसेपियर

00:16:49.759 --> 00:16:54.480
की शक्ल में और हमेशा कुछ ना कुछ मजहब

00:16:52.879 --> 00:16:58.720
रहे।

00:16:54.480 --> 00:17:02.320
ये मजहब जाहिलों के नहीं थे। ये मजहब एक

00:16:58.720 --> 00:17:06.078
ऐसी ग्रीक सोसाइटी के थे जहां बड़े-बड़े

00:17:02.320 --> 00:17:10.000
फिलॉसफर पैदा हुए। ये मजहब इजिपशियंस के

00:17:06.078 --> 00:17:13.279
थे जिन्होंने पिरामिड्स बनाए थे। ये रोमंस

00:17:10.000 --> 00:17:16.720
के थे कि जिनका आर्किटेक्चर और सेनेट यानी

00:17:13.279 --> 00:17:19.759
पहली बुनियाद डेमोक्रेसी थी। लिमिटेड थी

00:17:16.720 --> 00:17:25.679
मगर डेमोक्रेसी थी। ये उन लोगों ने किए

00:17:19.759 --> 00:17:28.640
थे। तो इनका जो जुपिटर था रा था जस था

00:17:25.679 --> 00:17:32.640
उन्हें उस पर इतना ही एतमा था जितना आज

00:17:28.640 --> 00:17:36.080
किसी मजहबी आदमी को अपने खुदा पे होगा।

00:17:32.640 --> 00:17:40.320
क्रिश्चियनिटी आने से पहले यूरोप में एक

00:17:36.079 --> 00:17:44.079
मजहब था जर्मेनिक रिलीजन। उसका एक खुदा

00:17:40.319 --> 00:17:47.599
था। उसकी एक बीवी थी। उसके दो बेटे थे। एक

00:17:44.079 --> 00:17:50.319
बेटी थी। कि जर्मनी में जब यूरोप में

00:17:47.599 --> 00:17:54.480
क्रिश्चियनिटी आई तो वो खुदा उसकी बीवी और

00:17:50.319 --> 00:17:58.639
पूरे खानदान चला गया। तो हमने अगर हम

00:17:54.480 --> 00:18:03.919
हिस्ट्री देखें तो खुदा जो है वो ज्यादातर

00:17:58.640 --> 00:18:06.640
फनी है। वो हमेशा रहे नहीं और वो जो लोग

00:18:03.919 --> 00:18:08.400
इन्हें मानते थे उनको आप कहे वो तो जाहिल

00:18:06.640 --> 00:18:11.679
थे। उन्हें तो कुछ पता ही नहीं था। ऐसा

00:18:08.400 --> 00:18:14.400
नहीं है। वो अपने वक्त में बड़े काबिल लोग

00:18:11.679 --> 00:18:18.160
थे। और अपने वक्त में उन्होंने बड़े-बड़े

00:18:14.400 --> 00:18:21.759
काम किए हैं। फिलॉसफर्स थे, साइंटिस्ट थे।

00:18:18.160 --> 00:18:25.360
लेकिन उनका मजहब कहां गया? उनके खुदा कहां

00:18:21.759 --> 00:18:27.599
गए? आज जो खुदा है दुनिया में लोग उन्हें

00:18:25.359 --> 00:18:29.519
मानते हैं। आपको क्या मालूम कि कितने

00:18:27.599 --> 00:18:33.918
बरसों के बाद क्या होने वाला है? हम यूरोप

00:18:29.519 --> 00:18:37.599
में देखते हैं तो चर्च खाली है तो वक्त के

00:18:33.919 --> 00:18:40.880
साथ चीजें बदलती हैं। जहां तक इसका

00:18:37.599 --> 00:18:45.918
ताल्लुक है मजहबों का

00:18:40.880 --> 00:18:49.440
हर मजहब आपसे एक चीज मांगता है। फेथ

00:18:45.919 --> 00:18:52.960
ये फेथ क्या चीज होती है?

00:18:49.440 --> 00:18:55.440
व्हाट इज द डिफरेंस बिटवीन फेथ एंड बिलीफ?

00:18:52.960 --> 00:18:57.200
ये कोई ये तो बहुत ही अहमखाना बात होगी कि

00:18:55.440 --> 00:19:00.798
कोई आदमी कहे साहब अगर खुदा है तो मुझे

00:18:57.200 --> 00:19:03.919
दिखाइए। ये तो जाहिला में बात हुई। मैंने

00:19:00.798 --> 00:19:06.480
तो नॉर्थ पोल नहीं देखा है। मगर मैं मानता

00:19:03.919 --> 00:19:09.280
हूं कि नॉर्थ पोल है। मैं क्यों मानता

00:19:06.480 --> 00:19:12.000
हूं? इसलिए कि अगर ये दुनिया राउंड है तो

00:19:09.279 --> 00:19:14.720
उसका कोई टॉप होगा। कुछ लोग हैं जो वहां

00:19:12.000 --> 00:19:19.599
गए भी हैं। कॉमन सेंस कहता है कि ऐसा

00:19:14.720 --> 00:19:23.759
होगा। सबूत है, गवाह है, रीजन है। तो ये

00:19:19.599 --> 00:19:25.839
मेरा फेथ नहीं है। तो फेथ में और बिलीफ

00:19:23.759 --> 00:19:29.679
में डिफरेंस क्या है?

00:19:25.839 --> 00:19:33.199
जो मजहब मांगता है आपसे हर मजहब फथ मांगता

00:19:29.679 --> 00:19:37.120
फथ का मतलब यह है कि ना कोई गवाह हो ना

00:19:33.200 --> 00:19:39.759
कोई सबूत हो ना कोई रैशन हो ना कोई लॉजिक

00:19:37.119 --> 00:19:43.439
हो ना कोई प्रूफ हो मगर तुम एक बात को

00:19:39.759 --> 00:19:46.400
मानो ये है फेथ

00:19:43.440 --> 00:19:49.600
वरना बिलीफ होता अगर इसमें कुछ भी सबूत

00:19:46.400 --> 00:19:52.160
होते गवाह होते तो फिर इसे आप बिलीफ कहते

00:19:49.599 --> 00:19:54.399
जैसे मेरा बिलीफ है कि नॉर्थ पोल है मेरा

00:19:52.160 --> 00:20:00.000
फेथ थोड़ी है

00:19:54.400 --> 00:20:02.880
फेथ इन तमाम शर्तों को रद्द करता है।

00:20:00.000 --> 00:20:05.599
तो फिर स्टुपिडिटी क्या है?

00:20:02.880 --> 00:20:08.720
अगर मैं एक बात ऐसी मानू जिसकी ना कोई

00:20:05.599 --> 00:20:12.959
लॉजिक है, ना कोई रैशन है, ना कोई प्रूफ

00:20:08.720 --> 00:20:16.640
है, ना कोई गवाह है,

00:20:12.960 --> 00:20:19.440
ना कोई सबूत है और मैं उसे मानूं। तो ये

00:20:16.640 --> 00:20:22.400
स्टुपिडिटी हुई। इसे ही वही कल को मैं

00:20:19.440 --> 00:20:25.120
यकीन कर लूं कि ईलॉन मस्क जो है मेरा भाई

00:20:22.400 --> 00:20:28.480
है तो मुझे इंतहाई खुशी होगी सुकून भी

00:20:25.119 --> 00:20:30.959
बहुत मिलेगा मुझे लेकिन और कहे भाई क्यों

00:20:28.480 --> 00:20:33.360
मानते हो क्या सबूत है भाई वो तो अमेरिकन

00:20:30.960 --> 00:20:35.600
है और तुम तो इंडियन हो वो तो नस्ल अलग है

00:20:33.359 --> 00:20:40.000
तुम्हें कभी मिले भी नहीं साहब देखिए ये

00:20:35.599 --> 00:20:43.199
मेरा फेथ है ये बात किया फेथ का मतलब ही

00:20:40.000 --> 00:20:46.880
यह है कि आप प्रूव नहीं कर सकते अगर आप

00:20:43.200 --> 00:20:48.880
प्रूफ कर सकते हो तो फेथ की जरूरत ही नहीं

00:20:46.880 --> 00:20:51.840
फिर तो आप बात करेंगे। आप कितनी बहस कर

00:20:48.880 --> 00:20:54.720
लीजिए। अल्टीमेटली दुनिया का हर मजहब फेथ

00:20:51.839 --> 00:20:57.678
पे टिका है। और फेथ का मतलब है एक ऐसा

00:20:54.720 --> 00:21:01.319
यकीन जिसका कोई सबूत, कोई गवाह, कोई

00:20:57.679 --> 00:21:01.320
प्रेशर नहीं।

00:21:01.839 --> 00:21:09.599
अब आप ये कहें कि आप ये क्यों कह रहे हैं

00:21:04.798 --> 00:21:12.079
कि साहब ये कायनात किसने बनाई? कमाल ये है

00:21:09.599 --> 00:21:14.158
कि आपने बताया कि एक आइलैंड पे गए और एक

00:21:12.079 --> 00:21:17.279
बॉल देखी।

00:21:14.159 --> 00:21:21.120
आपने ये नहीं कहा कि आइलैंड किसने बनाया?

00:21:17.279 --> 00:21:23.119
आपको सिर्फ बॉल पर हैरत हुई।

00:21:21.119 --> 00:21:26.558
हमने आइलैंड पे हमने हैरत नहीं की। होते

00:21:23.119 --> 00:21:31.519
हैं आइलैंड। इसी तरह ये आइलैंड है। सितारे

00:21:26.558 --> 00:21:33.119
ये गैलेक्सीस ये सब आइलैंड है। खलम है। हम

00:21:31.519 --> 00:21:35.359
उन्हें टेकन फॉर ग्रांटेड लेते हैं। हम

00:21:33.119 --> 00:21:38.798
पूछते नहीं किसने बनाए? आपने गदी के बारे

00:21:35.359 --> 00:21:41.918
में भी नहीं पूछा। हैं।

00:21:38.798 --> 00:21:44.879
मेरी पैदाइश कैसे हुई?

00:21:41.919 --> 00:21:48.000
क्या मैं प्लान पैदा हुआ था?

00:21:44.880 --> 00:21:50.480
आई वास प्ल टू बी बोर्न

00:21:48.000 --> 00:21:52.880
या एक लकी स्पम था जो किसी एक से चिपक

00:21:50.480 --> 00:21:57.440
गया।

00:21:52.880 --> 00:22:01.520
मेरी पैदाइश रैंडम है। रैंडम

00:21:57.440 --> 00:22:04.320
और इंसाफ जिसे आप कहते हैं इंसाफ का तो

00:22:01.519 --> 00:22:06.960
नेचर से कोई वास्ता ही नहीं है। जो आप

00:22:04.319 --> 00:22:10.399
कहते हैं कि एक दिन इंसाफ मिलेगा। इंसाफ

00:22:06.960 --> 00:22:14.159
इज अ ह्यूमन कासेप्ट। नेचर में कोई इंसाफ

00:22:10.400 --> 00:22:16.720
नहीं। अगर शेर हिरण को खा जाता है तो उसे

00:22:14.159 --> 00:22:19.600
कोई सुविधा नहीं मिलती।

00:22:16.720 --> 00:22:21.839
अगर एक आंधी आती है और हरेभरे पेड़ों को

00:22:19.599 --> 00:22:24.240
उखाड़ के फेंक देती है तो आंधियों की जेल

00:22:21.839 --> 00:22:28.000
नहीं होती है।

00:22:24.240 --> 00:22:31.279
नेचर में इंसाफ नहीं है। इसलिए उसे नेचर

00:22:28.000 --> 00:22:34.720
को इंसाफ की जरूरत भी नहीं। नेचर तमाम एक

00:22:31.279 --> 00:22:36.960
है। अब हम कहे कि साहब ये देखिए जो मैंने

00:22:34.720 --> 00:22:39.839
खाना खाया था मेरी आंख तो नहीं यूं कर

00:22:36.960 --> 00:22:44.558
दिया उसे तो इसे सजा मिलने। नहीं वो

00:22:39.839 --> 00:22:48.959
सिस्टम है ऐसे ही चल रहा है। नेचर बगैर

00:22:44.558 --> 00:22:51.678
इंसाफ के है। इंसाफ इज अ ह्यूमन कासेप्ट।

00:22:48.960 --> 00:22:55.840
तो जो आपसे कहता है कि मैं तुम्हें इंसाफ

00:22:51.679 --> 00:22:59.280
दूंगा वो इंसानी बहन की बात है। ये नेचुरल

00:22:55.839 --> 00:23:03.439
है ही नहीं। ये आसमानी है ही नहीं। नेचर

00:22:59.279 --> 00:23:06.639
का तसवुर इंसाफ का तसुर। भाई आप साथ मिलते

00:23:03.440 --> 00:23:10.640
हैं। अब आप लेफ्ट हैंड ड्राइव करते हैं।

00:23:06.640 --> 00:23:14.559
ये क्या है? तमाम सच, तमाम नेकी, तमाम

00:23:10.640 --> 00:23:16.880
शराफत लेफ्ट हैंड राइट है। वरना क्या

00:23:14.558 --> 00:23:18.879
होगा? या तो आप कॉस कर देंगे, आपका

00:23:16.880 --> 00:23:22.159
एक्सीडेंट हो जाएगा या आप किसी को मार

00:23:18.880 --> 00:23:25.120
देंगे या ट्रैफिक जाम हो जाएगा। झूठ,

00:23:22.159 --> 00:23:28.080
बेईमानी, रिश्वतखोरी ये तमाम जो है

00:23:25.119 --> 00:23:31.439
ड्राइविंग अंदर आउटसाइड है। इसके ऊपर कुछ

00:23:28.079 --> 00:23:34.480
नहीं। ये तो हमने बनाया है। जैसे हमने

00:23:31.440 --> 00:23:38.558
लेफ्ट हैंड ड्राइव बनाए। ये कासेप्ट ऑफ

00:23:34.480 --> 00:23:40.880
इंसाफ जो है ये हमारा है। इसका नेचर से

00:23:38.558 --> 00:23:46.000
कोई वास्ता नहीं। शेर खा जाता है हिरन को

00:23:40.880 --> 00:23:49.520
उसे जेल होती है क्या? कुछ भी है ही नहीं।

00:23:46.000 --> 00:23:52.960
तो ये जो दुनिया के रिलीजन प्रॉमिस करते

00:23:49.519 --> 00:23:57.038
हैं आपसे इंसाफ इसी से मालूम होता है कि

00:23:52.960 --> 00:24:00.480
ये मैनमेंट है। ये तसवुर कहीं और का है ही

00:23:57.038 --> 00:24:03.519
नहीं। जो नेचर है कुछ लोग कहते हैं नेचर

00:24:00.480 --> 00:24:05.440
ही खुदा है। तो नेचर में तो इंसाफ नहीं

00:24:03.519 --> 00:24:07.599
कहीं।

00:24:05.440 --> 00:24:09.840
और आप वादा कर रहे हैं कि तुम्हें मरने के

00:24:07.599 --> 00:24:12.558
बाद इंसाफ मिलेगा।

00:24:09.839 --> 00:24:16.399
मुझे अगर मिलेगा तो मैं बहुत खुश हूंगा।

00:24:12.558 --> 00:24:20.319
लेकिन मैं यकीन नहीं कर पाता हूं। इसलिए

00:24:16.400 --> 00:24:24.720
कि मैं फेथ नहीं पैदा कर सकता। द वेरी

00:24:20.319 --> 00:24:28.480
फैक्ट रिलीज डिमांड फेथ।

00:24:24.720 --> 00:24:30.960
इसका मतलब है कि उनके पास जस्टिफिकेशन

00:24:28.480 --> 00:24:33.679
नहीं है।

00:24:30.960 --> 00:24:37.519
अच्छा था। फिर

00:24:33.679 --> 00:24:40.080
रिलीजन अगर मॉडरेशन में है कोई सा भी वो

00:24:37.519 --> 00:24:42.960
आप में कुछ खूबियां भी पैदा करता होगा

00:24:40.079 --> 00:24:45.439
देखिए उसे ये फायदा है वो फायदा है

00:24:42.960 --> 00:24:50.000
अल्कोहल जो है

00:24:45.440 --> 00:24:52.080
वो ज्यादातर दवाओं में यूज़ होती है और एक

00:24:50.000 --> 00:24:55.440
सर्वे किया गया था अमेरिका में कि

00:24:52.079 --> 00:24:57.759
लोंगिटिविटी किन लोगों की है तो एक तरफ वो

00:24:55.440 --> 00:25:01.120
लोग थे जो शराब पीते ही नहीं थे और एक तरफ

00:24:57.759 --> 00:25:04.000
वो थे जो एक बोतल शराब पीते थे सबसे

00:25:01.119 --> 00:25:06.158
ज्यादा लंबी लंबी उम्र उनकी है जो दो

00:25:04.000 --> 00:25:07.759
पैगराब के शराब पीते हैं और खाना खाते

00:25:06.159 --> 00:25:10.559
हैं।

00:25:07.759 --> 00:25:13.599
मगर हम शराब को बुरा समझते हैं। मैं भी

00:25:10.558 --> 00:25:17.359
बड़ा समझता हूं। क्यों?

00:25:13.599 --> 00:25:20.719
ऐसा होता नहीं। कुछ चीजों में आदत होती है

00:25:17.359 --> 00:25:22.879
जो बढ़ती है। आज तक मैं एक आदमी दूध पीता

00:25:20.720 --> 00:25:25.200
है। आप 10 साल बाद भी मिलेंगे तो एक ही

00:25:22.880 --> 00:25:28.240
गिलास पीता होगा। ऐसा नहीं होता। सुबह से

00:25:25.200 --> 00:25:31.360
दूध पीता रहता है।

00:25:28.240 --> 00:25:35.839
अल्कोहलिक मैंने नहीं देखे। अलकोहलिक

00:25:31.359 --> 00:25:39.519
खोलते हैं। ये टेंडेंसी है मजहब की कि वो

00:25:35.839 --> 00:25:41.918
बढ़ता है। जैसे कैंसर बढ़ता है, जैसे शराब

00:25:39.519 --> 00:25:45.278
बढ़ती है।

00:25:41.919 --> 00:25:47.919
कुछ लोग होंगे जो उसे सही तरह से यूज़ करते

00:25:45.278 --> 00:25:50.159
हैं। मुझे यकीन है कि हमारे मुफ़्ती साहब

00:25:47.919 --> 00:25:52.960
भी होंगे। एक बहुत खुशी हुई मुझे इनसे

00:25:50.159 --> 00:25:55.840
मिलके। लेकिन कितने लोग हैं आज आप देखते

00:25:52.960 --> 00:25:59.600
हैं दुनिया में जो तबाहया है इनमें कितना

00:25:55.839 --> 00:26:02.558
हाथ है उन लोगों का जो बिलीव है कहते मजहब

00:25:59.599 --> 00:26:06.558
ये नहीं कहता ना कहता होगा मगर जब ये मजहब

00:26:02.558 --> 00:26:09.440
पीते हैं तो ऐसे बिहेव करते हैं थोड़ा सा

00:26:06.558 --> 00:26:13.038
अगर हो तो शायद बहुत अच्छी बात है लेकिन

00:26:09.440 --> 00:26:15.679
शराब थोड़ी सी नहीं रहती उसमें टेंडेंसी

00:26:13.038 --> 00:26:18.480
है पहले थोड़ा सा अगर दो तीन कैंसर के सेल

00:26:15.679 --> 00:26:21.360
हो ना बॉडी में तो आदमी सिम रहेगा लेकिन

00:26:18.480 --> 00:26:23.919
वो दो तीन सेल नहीं रहते वो मल्टीप्लाई

00:26:21.359 --> 00:26:25.759
होते हैं। जावेद साहब टाइम पूरा हो गया।

00:26:23.919 --> 00:26:29.048
टाइम हो गया। बस बात खत्म हो गई। अच्छा

00:26:25.759 --> 00:26:31.067
मुझे कुछ और कहने को था भी नहीं।

00:26:29.048 --> 00:26:31.067
[प्रशंसा]

00:26:31.278 --> 00:26:37.038
जी मैं पहले जवाबी दौर के लिए इनवाइट कर

00:26:35.200 --> 00:26:41.400
रहा हूं मुफ्ती साहब को। योर रिबटल राउंड

00:26:37.038 --> 00:26:41.400
वन। यू हैव से मिनट्स।

00:26:44.880 --> 00:26:50.400
थैंक यू वेरी मच जावेद साहब। आपकी बात को

00:26:47.839 --> 00:26:53.519
सुनकर बड़े महजूस हुए हैं हम महजूस डू यू

00:26:50.400 --> 00:26:54.960
अंडरस्टैंड वी एंजॉय ओके अब थोड़ा सा

00:26:53.519 --> 00:26:56.720
लॉजिकली उसको हम लोग

00:26:54.960 --> 00:26:58.400
दरअसल हम लोगों ने कल गुजारिश की थी

00:26:56.720 --> 00:27:01.038
मुफ्ती साहब से भी जावेद साहब से भी कि

00:26:58.400 --> 00:27:02.880
हिंदुस्तानी जबान आम फहम सबको समझ में आ

00:27:01.038 --> 00:27:06.879
जाए और जहां कहीं आप मुश्किल शब्द

00:27:02.880 --> 00:27:09.120
इस्तेमाल करें वहां बताते भी चलें थैंक यू

00:27:06.880 --> 00:27:11.919
तो सबसे पहले हमारे रिस्पेक्टेड जावेद

00:27:09.119 --> 00:27:14.239
साहब ने हवाला दिया कि खुदा फानी है कितने

00:27:11.919 --> 00:27:16.080
मजहब आ गए चले गए किसी ने जुपिटर को खुदा

00:27:14.240 --> 00:27:18.240
माना किसी ने किसी को माना मैं कहता हूं

00:27:16.079 --> 00:27:21.447
जिसने कॉन्टिंजेंट चीज को खुदा माना गलत

00:27:18.240 --> 00:27:22.960
माना वो खुदा ही नहीं वो खुदा ही नहीं है।

00:27:21.448 --> 00:27:25.200
[प्रशंसा]

00:27:22.960 --> 00:27:28.558
हम तो नेसेसरी बीन को साबित करने बैठे

00:27:25.200 --> 00:27:31.200
हैं। वो नेसेसरी कॉज जो इटरनल है जो जो

00:27:28.558 --> 00:27:33.359
अबदी भी है और अजली भी है। हम किसी और को

00:27:31.200 --> 00:27:38.960
साबित करने नहीं बैठे। दूसरी चीज उन्होंने

00:27:33.359 --> 00:27:42.240
कहा के फेथ एंड बिलीफ ये एक

00:27:38.960 --> 00:27:44.558
ऐसी डेफिनेशन है फेथ की जो इन्होंने पहली

00:27:42.240 --> 00:27:46.400
मर्तबा पेश की है या माफ़ कीजिएगा इन्होंने

00:27:44.558 --> 00:27:48.000
पहली मर्तबा पेश नहीं की है। रिचर्ड

00:27:46.400 --> 00:27:49.759
डॉकिंस ने पहली मर्तबा पेश की है। मुझे

00:27:48.000 --> 00:27:51.519
मालूम है ये सोर्स कहां से है।

00:27:49.759 --> 00:27:54.158
एपिस्टेमोलॉजिकली

00:27:51.519 --> 00:27:57.599
फेथ और बिलीफ का फर्क आप इस तरह नहीं कर

00:27:54.159 --> 00:27:59.760
सकते सर। फेथ सही भी होता है, गलत भी होता

00:27:57.599 --> 00:28:03.439
है। बिलीफ सही भी होता है, गलत भी होता

00:27:59.759 --> 00:28:06.640
है। जो लॉजिक रीजन और एविडेंस से बैक्ट

00:28:03.440 --> 00:28:08.640
होगा वो फेथ सही होगा। और आप जिस फेथ की

00:28:06.640 --> 00:28:11.840
बात कर रहे हैं कि इलॉजिकल है और उसके

00:28:08.640 --> 00:28:14.640
पीछे नहीं है तो वी आर ऑन द सेम पेज। हम

00:28:11.839 --> 00:28:16.879
नहीं मानते उस फेथ को। जो फेथ ऐसा हो

00:28:14.640 --> 00:28:18.960
जिसके पीछे कोई लॉजिक ना हो। एविडेंस ना

00:28:16.880 --> 00:28:21.039
हो। हम नहीं मानते। हम तो उस फेथ के कायल

00:28:18.960 --> 00:28:23.200
हैं जिसके पीछे लॉजिक हो और एविडेंस हो।

00:28:21.038 --> 00:28:25.278
तो बिलीफ सही भी होता है, गलत भी होता है,

00:28:23.200 --> 00:28:28.080
फेथ भी सही होता है और गलत भी होता है। तो

00:28:25.278 --> 00:28:30.319
आज फेथ और बिलीफ के डिफरेंस पे बात नहीं

00:28:28.079 --> 00:28:32.158
हो रही है। आज आप चाहे फेथ एक्सेप्ट कर

00:28:30.319 --> 00:28:35.439
लें या बिलीफ एक्सेप्ट कर लें। आज ये बात

00:28:32.159 --> 00:28:38.399
होगी कि ट्रुथ क्या है? चाहे ट्रू बिलीफ

00:28:35.440 --> 00:28:40.080
सही है या ट्रू फेथ सही है और फॉल्स फेथ

00:28:38.398 --> 00:28:41.759
क्या है और फॉल्स बिलीफ क्या है? बात इसपे

00:28:40.079 --> 00:28:44.480
हो रही है। दूसरी चीज इन्होंने पूछा

00:28:41.759 --> 00:28:45.839
स्टुपिडिटी फिर क्या है? अगर फेथ रिलीजन

00:28:44.480 --> 00:28:47.200
स्टुपिडिटी नहीं है तो और क्या है?

00:28:45.839 --> 00:28:49.439
क्योंकि फेथ का मुतालबा करते हैं तो

00:28:47.200 --> 00:28:52.000
स्टुपिडिटी स्टुपिडिटी क्या है? मैं कहता

00:28:49.440 --> 00:28:54.240
हूं स्टुबिडिटी एथिज्म है। उसकी वजह ये है

00:28:52.000 --> 00:28:56.159
कि आप एक सड़क पे जा रहे हो और आप किसी

00:28:54.240 --> 00:28:59.440
गार्डन में जाएं और देखें वहां लिखा है

00:28:56.159 --> 00:29:02.640
फूलों के साथ आई लव जावेद अख्तर एंड आई

00:28:59.440 --> 00:29:05.200
रियली डू आई लव यू सर। सो

00:29:02.640 --> 00:29:08.960
जब आप [प्रशंसा]

00:29:05.200 --> 00:29:11.360
वहां पर पहुंचे तो वहां पहुंचकर अब ये

00:29:08.960 --> 00:29:14.880
बताएं क्या आप ये कहेंगे वाओ व्हाट अ

00:29:11.359 --> 00:29:18.639
नेचुरल सेक्शन। ये क्या नेचुरल सेक्शन है?

00:29:14.880 --> 00:29:22.799
नहीं। यह प्रिसाइजली डिजाइन है। इसके पीछे

00:29:18.640 --> 00:29:24.640
डिजाइनर है। लिहाजा अगर कोई एक ऐसी कॉमन

00:29:22.798 --> 00:29:26.720
सेंस की बात को कबूल नहीं कर रहा है कि

00:29:24.640 --> 00:29:28.880
यूनिवर्स जो इतनी प्रिसाइजली काम कर रहा

00:29:26.720 --> 00:29:30.640
है। हम कह दें कि खुद ब खुद बन गई। मैं

00:29:28.880 --> 00:29:34.559
समझता हूं इससे बड़ी स्टुबिडिटी और कुछ

00:29:30.640 --> 00:29:38.559
नहीं है। ये इररेशनल चीज है। [प्रशंसा]

00:29:34.558 --> 00:29:41.119
फिर हमारे सर ने कहा कि आपने बॉल पे फोकस

00:29:38.558 --> 00:29:43.599
किया, आइलैंड पे फोकस नहीं किया। अरे

00:29:41.119 --> 00:29:47.439
आइलैंड को किसने बनाया यही समझाने के लिए

00:29:43.599 --> 00:29:50.319
तो बॉल की मिसाल दे रहा हूं।

00:29:47.440 --> 00:29:52.320
और बॉल भी कॉन्टिंजेंट है, आइलैंड भी

00:29:50.319 --> 00:29:54.879
कंटिंजेंट है। दोनों नेसेसरी बीइंग का

00:29:52.319 --> 00:29:57.678
मुतालबा करते हैं। आगे इन्होंने कहा कि

00:29:54.880 --> 00:29:59.840
नेचर में कोई इंसाफ नहीं है। हम डिसाइड

00:29:57.679 --> 00:30:02.000
करते हैं कि मोरालिटी क्या होती है? इंसाफ

00:29:59.839 --> 00:30:03.678
क्या होता है? हम डिसाइड करते हैं जैसे

00:30:02.000 --> 00:30:05.839
ड्राइविंग सीट में, ट्रैफिक वाला ये तो

00:30:03.679 --> 00:30:08.159
किसी खुदा ने नहीं कहा। ये है इसे कहते

00:30:05.839 --> 00:30:11.359
हैं फॉल्स इक्विवेलेंस। ये एक लॉजिकल

00:30:08.159 --> 00:30:13.440
फैलेसी है। आपने जो है मिसाल दी ड्राइविंग

00:30:11.359 --> 00:30:15.599
की और ट्रैफिक की। ये सब्जेक्टिव मोरालिटी

00:30:13.440 --> 00:30:17.440
है। आप सब्जेक्टिव मोरालिटी को मिसाल

00:30:15.599 --> 00:30:19.439
बनाकर ऑब्जेक्टिव मोरालिटी के ऊपर नहीं

00:30:17.440 --> 00:30:21.840
थोप सकते। इंसाफ ये ऑब्जेक्टिव मोरालिटी

00:30:19.440 --> 00:30:24.480
है। अगर आप ये कहते हैं कि नेचर में इंसाफ

00:30:21.839 --> 00:30:26.720
नहीं है तो इंसाफ का ना होना ये नेचुरल

00:30:24.480 --> 00:30:28.159
हुआ तो फिर नेचर को नेचर रहने दे। क्यों

00:30:26.720 --> 00:30:30.240
हम इतना स्ट्राइव कर रहे हैं दुनिया में

00:30:28.159 --> 00:30:33.840
इंसाफ लाने के लिए? यह तो इलॉजिकल बात है,

00:30:30.240 --> 00:30:36.798
इरशनल बात है। इसलिए बहुत सी चीजें ऐसी

00:30:33.839 --> 00:30:38.240
हैं जो ऑब्जेक्टिवली जो है इविल या गुड

00:30:36.798 --> 00:30:41.200
हैं और बहुत सी चीजें ऐसी हैं जो

00:30:38.240 --> 00:30:43.679
सब्जेक्टिवली हैं। सब्जेक्टिवली जो मोरल

00:30:41.200 --> 00:30:46.399
होता है या इमोरल होता है उसको हम सोशल

00:30:43.679 --> 00:30:48.480
कंसेंस कंसेंसेस से या पर्सनल प्रेफरेंस

00:30:46.398 --> 00:30:50.558
से डिसाइड करते हैं। लेकिन जो ऑब्जेक्टिव

00:30:48.480 --> 00:30:53.519
मोरालिटी है जिसमें इंसाफ आया जो इन्होंने

00:30:50.558 --> 00:30:55.359
बार-बार रिपीट किया ये ऑब्जेक्टिव है।

00:30:53.519 --> 00:30:57.759
सब्जेक्टिव नहीं है। अगर आप कहते हैं ये

00:30:55.359 --> 00:31:00.639
सब्जेक्टिव है। तो मेरा सवाल आपसे यह है

00:30:57.759 --> 00:31:02.558
क्या सोशल कंसेंसेस के जरिए अगर जुल्म को

00:31:00.640 --> 00:31:06.559
सही करार दे दिया जाएगा तो आप जुल्म को

00:31:02.558 --> 00:31:11.278
जस्टिफाई करेंगे? दूसरी चीज इन्होंने ये

00:31:06.558 --> 00:31:14.158
कहा कि दो पैक शराब पी लें तो वो उतने पे

00:31:11.278 --> 00:31:16.720
नहीं रहता बढ़ जाता है। यही मामला मजहब के

00:31:14.159 --> 00:31:19.039
साथ है। दो पैक आप पी लें बढ़ेगा। तो ये

00:31:16.720 --> 00:31:21.839
एक ऐसी मिसाल है इसको कहीं भी फिट कर लें

00:31:19.038 --> 00:31:24.079
कि आप एथिज्म पे जब फिट करें जब आप दो पैक

00:31:21.839 --> 00:31:25.765
एथिज्म का लेंगे ना तो वो बढ़-बढ़ के

00:31:24.079 --> 00:31:27.785
नॉर्थ कोरिया बनेगा। थैंक यू।

00:31:25.766 --> 00:31:27.786
[प्रशंसा]

00:31:31.661 --> 00:31:34.960
[प्रशंसा]

00:31:32.798 --> 00:31:36.639
फर्स्ट राउंड की रिबटल के लिए मैं जावेद

00:31:34.960 --> 00:31:41.159
साहब को इनवाइट कर रहा हूं। आपके पास 7

00:31:36.640 --> 00:31:41.159
मिनट का वक्त है। रिसेट कर दीजिएगा प्लीज।

00:31:41.440 --> 00:31:46.240
मुझे इस बात की खुशी है कि मुफ्ती साहब ने

00:31:43.919 --> 00:31:49.840
भी मान लिया कि नेचर में कोई इंसाफ नहीं

00:31:46.240 --> 00:31:52.319
है। तो कोई भी चीज जो इंसान ने नहीं बनाई

00:31:49.839 --> 00:31:54.319
है उसमें इंसाफ नहीं होता है। एक बात मैं

00:31:52.319 --> 00:31:56.319
आपसे अ करूं जरा पता लगा लीजिएगा। ये जो

00:31:54.319 --> 00:31:58.398
आप बाग में जाते हैं बेहद खूबसूरत फूल

00:31:56.319 --> 00:32:02.960
देखते हैं ना इनमें से कोई नेचुरल नहीं

00:31:58.398 --> 00:32:05.119
है। ये सारे फूल क्रॉस करके बनाए गए हैं।

00:32:02.960 --> 00:32:07.840
जो जंगल में फूल होते हैं निहायत मामूली

00:32:05.119 --> 00:32:10.000
होते हैं। ये फूल इंसानों ने बनाए हैं जो

00:32:07.839 --> 00:32:11.839
आप बाग में देख के वाहवाह कहते हैं। ये

00:32:10.000 --> 00:32:14.558
इंसानों के बनाए हुए हैं। डिफरेंट फूलों

00:32:11.839 --> 00:32:16.720
को क्रॉस करके डेवलप करके फिर क्रॉस करके

00:32:14.558 --> 00:32:19.038
इस तरह से बनाए गए। नेचुरल फ्लावर्स नहीं।

00:32:16.720 --> 00:32:21.919
किसी जंगल वीरान में जाके आप गुलाब के फूल

00:32:19.038 --> 00:32:25.440
नहीं देखेंगे। ये सब बनाए हुए इंसान ने।

00:32:21.919 --> 00:32:28.960
बहुत से काम इंसान ने किए हैं। बाकी ये कि

00:32:25.440 --> 00:32:33.200
आपने मेरी एक बात का जवाब नहीं दिया जिससे

00:32:28.960 --> 00:32:36.720
मुझे शिकायत है कि फथ क्या है? और आप फेथ

00:32:33.200 --> 00:32:39.600
मांगते क्यों हैं मुझसे? आप तो लॉजिकल है।

00:32:36.720 --> 00:32:42.079
आपके पास तो सारे रैशन हैं। आपके पास सारे

00:32:39.599 --> 00:32:45.439
सबूत हैं। तो आपको फेथ की डिमांड क्यों

00:32:42.079 --> 00:32:48.558
करते हो आप? कि भाई तुम सरेंडर कर दो और

00:32:45.440 --> 00:32:51.679
सवाल मत करो। कोई मजहब सारे सवाल करने की

00:32:48.558 --> 00:32:54.879
इजाजत नहीं देता है और मना करता है कि

00:32:51.679 --> 00:32:58.399
ज्यादा सवाल ना करो बह जाओगे तुम। आप

00:32:54.880 --> 00:33:01.440
क्यों रोकते हैं? हकीकत ये है कि इंसानी

00:32:58.398 --> 00:33:04.319
तारीख क्या है? इंसानी तारीख यह है कि

00:33:01.440 --> 00:33:08.000
दुनिया में दो तरह के लोग हुए हैं। एक वो

00:33:04.319 --> 00:33:10.480
जिन्होंने अपनी लालमी की परस्तिश की है।

00:33:08.000 --> 00:33:13.679
दूसरे वो जिन्होंने अपनी इग्नोरेंस या

00:33:10.480 --> 00:33:16.960
लालमी से झगड़ा किया है और मालूम किया है

00:33:13.679 --> 00:33:20.240
कि क्या है। ये जो आप कह रहे हैं आज आप

00:33:16.960 --> 00:33:22.399
हैरान हैं कि भाई ये यूनिवर्स कैसे बनी?

00:33:20.240 --> 00:33:24.640
लोग हैरान थे कि सूरज डूबता है तो इधर से

00:33:22.398 --> 00:33:28.959
कैसे निकलता है

00:33:24.640 --> 00:33:32.000
और आप एक कदम जाके हमेशा का मानने को

00:33:28.960 --> 00:33:33.600
तैयार है एक कदम पीछे ही मत जाइए भाई आप

00:33:32.000 --> 00:33:36.159
इसके पास जाते हैं और कहते हैं सवाल ना

00:33:33.599 --> 00:33:38.398
करना कि ये कहां से आया ये पावर तो हमेशा

00:33:36.159 --> 00:33:40.399
से हमेशा रहेगी तो आप यूनिवर्स के बारे

00:33:38.398 --> 00:33:42.158
में माने क्या तकलीफ है एक कदम पहले या

00:33:40.398 --> 00:33:44.719
रुक जाइए

00:33:42.159 --> 00:33:47.519
ये हमेशा से थी या नहीं थी हमें मालूम

00:33:44.720 --> 00:33:51.440
नहीं है और ये कहना कि हमें मालूम नहीं

00:33:47.519 --> 00:33:54.480
है। कमाल यह है कि दुनिया के सारे मजहब सब

00:33:51.440 --> 00:33:57.120
जानते हैं। ये दुनिया कैसे बनी थी? कैसे

00:33:54.480 --> 00:34:01.599
मिटेगी? मरने के बाद क्या होगा? इनको सब

00:33:57.119 --> 00:34:06.879
इल्म है। इनको किसी को डायनासोर होते थे

00:34:01.599 --> 00:34:09.519
पहले ये नहीं पता था। किसी को नहीं पता।

00:34:06.880 --> 00:34:12.639
किसी भी दुनिया की मजहबी किताब में

00:34:09.519 --> 00:34:15.440
डायनासोर का जिक्र नहीं है।

00:34:12.639 --> 00:34:19.440
लेकिन बाकी सब बातें हाउ टू मेक यूनिवर्सल

00:34:15.440 --> 00:34:23.440
फोर ईजी लेसंस एंड बाकी सब पता है। जिसको

00:34:19.440 --> 00:34:26.079
सब पता है वो गड़बड़ है। हम में ये इंकसार

00:34:23.440 --> 00:34:28.720
ये ह्यूमिलिटी होनी चाहिए कि हम ये कहे कि

00:34:26.079 --> 00:34:31.919
हमें ये बहुत सारी बातें नहीं मालूम।

00:34:28.719 --> 00:34:36.398
लेकिन हम उनकी परस्त ना कर ले। अपनी लालमी

00:34:31.918 --> 00:34:38.559
को की परस्त ना करें। हम उसे पता लगाने की

00:34:36.398 --> 00:34:41.118
कोशिश करें। जिस दुनिया में आप बैठे हैं

00:34:38.559 --> 00:34:43.918
सर ये हॉल जो है ये इलेक्ट्रिसिटी जो है

00:34:41.119 --> 00:34:47.200
ये माइक जो है जिस हवाई जहाज से आप आए थे

00:34:43.918 --> 00:34:49.838
वो जिस कार से आप यहां आए हैं ये सब उन

00:34:47.199 --> 00:34:52.093
लोगों की बनाई हुई है जिन्होंने सवाल किए

00:34:49.838 --> 00:34:52.639
थे।

00:34:52.094 --> 00:34:56.720
[प्रशंसा]

00:34:52.639 --> 00:34:59.599
ये दुनिया जिसमें आप आज आराम से हैं। ये

00:34:56.719 --> 00:35:06.679
उन लोगों की बनाई है कि जिन्होंने सवाल

00:34:59.599 --> 00:35:06.680
किए थे और हर स्टेज पे इन सवालों को

00:35:07.280 --> 00:35:12.640
मकरू कहा गया था। गलत कहा गया था। आप जरा

00:35:10.960 --> 00:35:15.679
तारीख पढ़िए। एक बड़ी दिलचस्प किताब है

00:35:12.639 --> 00:35:19.759
बैटन की

00:35:15.679 --> 00:35:23.279
जिसमें उसने रिलीजन एंड साइंस कि कब से

00:35:19.760 --> 00:35:27.599
रिलीजन जो है साइंस के अगेंस्ट है और हद

00:35:23.280 --> 00:35:30.880
तो ये है कि भाप के इंजन के खिलाफ थे

00:35:27.599 --> 00:35:33.838
स्टीम इंजन के भी खिलाफ थे और फतवे उन पे

00:35:30.880 --> 00:35:37.440
वेटिकन ने दिए

00:35:33.838 --> 00:35:39.679
तो ये हमेशा अभी जैसे ही ये राइट फिंगर

00:35:37.440 --> 00:35:43.760
आते हैं

00:35:39.679 --> 00:35:46.078
अमेरिका में पावर तो वो जो अपना ये क्या

00:35:43.760 --> 00:35:49.280
बोलते हैं उसे

00:35:46.079 --> 00:35:50.240
सीड क्या है? शीट क्या

00:35:49.280 --> 00:35:54.320
हां

00:35:50.239 --> 00:35:57.319
नहीं नहीं शीट जो होती है

00:35:54.320 --> 00:35:57.320
जी

00:35:59.039 --> 00:36:05.400
नहीं भाई

00:36:01.039 --> 00:36:05.400
वो जो ह्यूमन बॉडी के

00:36:10.000 --> 00:36:16.480
बंद हो जाती है। रिपब्लिकन नहीं करने

00:36:13.119 --> 00:36:20.320
देते। अरे भाई इतना डर क्या है तुम्हें?

00:36:16.480 --> 00:36:22.800
एक जमाने में बहुत नाराज थे ये सारे मजहबी

00:36:20.320 --> 00:36:25.039
लोग कि ये इंसान तो इंसान बनाने की कोशिश

00:36:22.800 --> 00:36:29.599
कर रहा है। आपको क्या तकलीफ हुई बना ले तो

00:36:25.039 --> 00:36:32.800
बना लेने दो। ये खौफ क्या है?

00:36:29.599 --> 00:36:35.760
और ये सब आज जो आप कह रहे हैं नामुमकिन है

00:36:32.800 --> 00:36:38.320
ये कैसे हुआ? मुझे किस्सा याद आता है। जब

00:36:35.760 --> 00:36:40.800
मैं छठी क्लास में था तो मैं मैथमेटिक्स

00:36:38.320 --> 00:36:42.880
में बहुत वीक था। तो एक टीचर रख दिया गया।

00:36:40.800 --> 00:36:45.440
उसने एक दो तीन चार पांच छ सात तो सिखा

00:36:42.880 --> 00:36:48.720
दिया मुझे। वो दिन मैं भूल नहीं सकता हूं

00:36:45.440 --> 00:36:51.920
सब। जिस दिन उसने ये बताया कि 1/2 क्या

00:36:48.719 --> 00:36:54.799
होता है और 3/4 क्या होता है। मुझे ऐसा

00:36:51.920 --> 00:36:57.280
लगा कि मेरा सर बीच से फट जाएगा। ये आदमी

00:36:54.800 --> 00:37:00.720
कह रहा है कि यू दीवार के अंदर जाओ वॉक

00:36:57.280 --> 00:37:03.760
करते हुए। आज हंसता हूं मैं इस बात पे। तो

00:37:00.719 --> 00:37:05.759
आज जो बातें आपके ज़हन से बिल्कुल परे है

00:37:03.760 --> 00:37:08.640
और आप हैरान होते हो उन्हें देख के। एक

00:37:05.760 --> 00:37:11.599
वक्त आएगा कि मामूली लगेंगे और हुआ है

00:37:08.639 --> 00:37:14.480
आपकी इंसानी तारीख ही है। इतनी जल्दी सारे

00:37:11.599 --> 00:37:18.000
फैसले आप मत कर लीजिए। थोड़ा ह्यूमिलिटी

00:37:14.480 --> 00:37:20.639
रखिए कि भाई ये हमें नहीं मालूम। ये कहने

00:37:18.000 --> 00:37:24.000
में क्या आ रहा है? ये यूनिवर्स कहां तक

00:37:20.639 --> 00:37:27.440
फैली? ये कब से है और कब तक रहेगी? हमें

00:37:24.000 --> 00:37:29.760
नहीं मालूम। आपने फैसला कर लिया कब बनी?

00:37:27.440 --> 00:37:34.559
ये आपके हिसाब से कोई 14 बिलियन इयर्स

00:37:29.760 --> 00:37:37.520
बनी। जो समझा जाता है उससे पहले हजारों

00:37:34.559 --> 00:37:40.960
करोड़ों अरबों साल तक खुदा बैठा क्या कर

00:37:37.519 --> 00:37:43.838
रहा था खामोश बैठा था ऐसे ही जमाइयां ले

00:37:40.960 --> 00:37:45.920
रहा था फिर उसे आईडिया आया यार एक काम

00:37:43.838 --> 00:37:48.159
करते हैं वक्त अच्छा गुजर जाएगा यूनिवर्स

00:37:45.920 --> 00:37:51.159
पर

00:37:48.159 --> 00:37:51.159
सोचिए

00:37:51.440 --> 00:37:58.960
वो तो हमेशा से है ना मगर यूनिवर्स हमेशा

00:37:54.079 --> 00:38:02.880
से नहीं है ये तो बनाई गई है और उससे पहले

00:37:58.960 --> 00:38:05.679
क्या था इनका का क्या काम था?

00:38:02.880 --> 00:38:08.240
कैसी बात थी? ये बड़ा आसान है। जो बात

00:38:05.679 --> 00:38:10.639
हमें आज धीरे-धीरे पता चल रही है। बरसों

00:38:08.239 --> 00:38:14.078
2000 और ढाई हजार साल पहले आपको किसी ने

00:38:10.639 --> 00:38:16.078
बता दिया कि क्या था आप मान गए? और तब से

00:38:14.079 --> 00:38:20.079
वही मान रहे हैं जो ढाई हजार साल पहले कहा

00:38:16.079 --> 00:38:22.320
गया। सब कुछ बदल गया है। सॉल्व हो रही है

00:38:20.079 --> 00:38:26.000
चीजें। अभी

00:38:22.320 --> 00:38:28.640
साइंस बिल्कुल दावा नहीं करती या कोई

00:38:26.000 --> 00:38:30.880
फिलॉसफर ये दावा नहीं करता कि हमें सब

00:38:28.639 --> 00:38:32.480
मालूम बल्कि वो कहता है कि हमें जितना

00:38:30.880 --> 00:38:35.599
मालूम होता है उससे ये मालूम होता है कि

00:38:32.480 --> 00:38:39.280
हमें कितना कम मालूम है। तो हम अपनी

00:38:35.599 --> 00:38:42.001
जियालत से लड़े उसकी परफेशना करें।

00:38:39.280 --> 00:38:44.000
जी टाइम थैंक यू। थैंक यू सो मच।

00:38:42.001 --> 00:38:46.079
[प्रशंसा]

00:38:44.000 --> 00:38:48.960
मैं

00:38:46.079 --> 00:38:50.720
तर्कों की श्रंखला में राउंड टू के लिए

00:38:48.960 --> 00:38:56.280
मुफ्ती साहब को आमंत्रित कर रहा हूं। आपके

00:38:50.719 --> 00:38:56.279
पास एक बार फिर से 7 मिनट का वक्त है।

00:38:57.599 --> 00:39:02.880
शुक्रिया। जनाब जावेद अख्तर साहब कई

00:39:00.719 --> 00:39:04.799
मर्तबा दोहरा रहे हैं कि फेथ का मतलब

00:39:02.880 --> 00:39:07.680
बताइए। फेथ का मतलब बताइए। मैंने बता

00:39:04.800 --> 00:39:10.079
दिया। फेथ सही भी होता है, गलत भी होता

00:39:07.679 --> 00:39:12.000
है। और आज हम फेथ पे बात नहीं कर रहे। हम

00:39:10.079 --> 00:39:15.599
ट्रुथ और डस गॉड एक्सिस्ट पे बात कर रहे

00:39:12.000 --> 00:39:18.079
हैं। क्या डस गॉड एक्सिस्ट? ये ट्रुथ यानी

00:39:15.599 --> 00:39:20.000
गॉड है या नहीं है? इसमें से दोनों ट्रुथ

00:39:18.079 --> 00:39:22.880
क्या है? अब आप उसे फेथ कह लें, बिलीफ कह

00:39:20.000 --> 00:39:26.079
लें नॉट माय बिनेस। उसके बाद आपने कहा कि

00:39:22.880 --> 00:39:29.760
भाई सवाल करने से मजहब रोकता है। मैं कहता

00:39:26.079 --> 00:39:33.119
हूं जो रोकता है वो रोकता होगा। मैं नहीं

00:39:29.760 --> 00:39:35.359
रोकता। बल्कि सवाल करें। सवाल करना चाहिए।

00:39:33.119 --> 00:39:37.119
सवाल कर के तो हम आगे बढ़ते हैं, तरक्की

00:39:35.358 --> 00:39:39.199
करते हैं। और इसीलिए मैं आज यहां पे आया

00:39:37.119 --> 00:39:41.838
हूं। लेकिन सवाल सिर्फ खुदा से नहीं होगा।

00:39:39.199 --> 00:39:44.639
आपसे भी होगा। सवाल एथिज्म से भी होगा।

00:39:41.838 --> 00:39:46.559
सवाल सिर्फ मजहब से नहीं होगा। सबसे होगा।

00:39:44.639 --> 00:39:48.480
और आज मैं सवाल करूंगा और उम्मीद है कि आप

00:39:46.559 --> 00:39:50.719
जवाब देंगे। अभी तक आपने वैसे कंटिंजेंसी

00:39:48.480 --> 00:39:52.960
आर्गुमेंट का कोई जवाब नहीं दिया है। चलें

00:39:50.719 --> 00:39:55.919
आपने कहा यूनिवर्स के बारे में इटरनल

00:39:52.960 --> 00:39:58.320
क्यों नहीं बोल देते? ये क्योंकि लॉजिकली

00:39:55.920 --> 00:40:00.639
पॉसिबल ही नहीं है कि यूनिवर्स इटरनल हो।

00:39:58.320 --> 00:40:03.519
यूनिवर्स एक कंटिंजेंट

00:40:00.639 --> 00:40:05.838
चीज है। जो टाइम एंड स्पेस के पाबंद है।

00:40:03.519 --> 00:40:08.000
टाइम एंड स्पेस से बाउंड है। जो टाइम एंड

00:40:05.838 --> 00:40:10.078
स्पेस से बाउंड होगा वो कंटिंजेंट होगा।

00:40:08.000 --> 00:40:12.000
जो कंटिंजेंट होगा उसकी बिगिनिंग हुई

00:40:10.079 --> 00:40:16.322
होगी। जिसकी बिगिनिंग हुई होगी वो इटरनल

00:40:12.000 --> 00:40:17.760
नहीं हो सकता। ये तो कॉमन सी बात है।

00:40:16.322 --> 00:40:20.559
[प्रशंसा]

00:40:17.760 --> 00:40:22.720
आपने कहा कि किसी मजहबी किताब में

00:40:20.559 --> 00:40:24.559
डायनासोर का जिक्र नहीं है। अफसोस कि आज

00:40:22.719 --> 00:40:28.439
तक किसी मैथमेटिक्स के किताब में मुझे

00:40:24.559 --> 00:40:28.440
डायनासोर का जिक्र नहीं मिला।

00:40:28.639 --> 00:40:33.199
तो इसका मतलब मैथमेटिक्स की किताब बेकार

00:40:30.800 --> 00:40:35.200
है। नहीं उसका वो टॉपिक नहीं है। रेवेलेशन

00:40:33.199 --> 00:40:37.279
का और मजहबी किताबों का टॉपिक ये नहीं है

00:40:35.199 --> 00:40:39.679
कि आपको आके बताएं साइकिल कैसे बनाते हैं।

00:40:37.280 --> 00:40:41.920
ये आकर ये बताएं कि जो है डायनासोर कब था।

00:40:39.679 --> 00:40:44.000
वो तो मोरालिटी सिखाने आया है। गॉड के

00:40:41.920 --> 00:40:46.480
बारे में बताने आया। नॉन फिजिकल रियलिटी

00:40:44.000 --> 00:40:48.880
की हकीकत को सिखाने के लिए आया। रिलीजियन

00:40:46.480 --> 00:40:51.519
साइंस को रोकता है। नहीं रोकता। अगर रोकता

00:40:48.880 --> 00:40:53.519
है तो गलत करता है। रिलीजन साइंटिज्म को

00:40:51.519 --> 00:40:56.159
रोकता है जिसमें हमारे जावेद साहब मुख्तल

00:40:53.519 --> 00:40:57.838
है।

00:40:56.159 --> 00:41:00.559
साइंस

00:40:57.838 --> 00:41:03.920
साइंस और साइंटिज्म में फर्क है।

00:41:00.559 --> 00:41:07.279
साइंटिज्म ये है कि आप समझे के साइंस और

00:41:03.920 --> 00:41:09.599
साइंटिफिक मेथोडोलॉजी ये नॉलेज को हासिल

00:41:07.280 --> 00:41:12.240
करने का वाहिद सोर्स ऑफ नॉलेज है। ये है

00:41:09.599 --> 00:41:13.838
साइंटिज्म। हम इसे रिजेक्ट करते हैं। हम

00:41:12.239 --> 00:41:15.679
साइंस को तो तरक्की करते हैं। भाई आप

00:41:13.838 --> 00:41:17.599
हमारी पूरी तारीख कर लें। पढ़ लें तो आपको

00:41:15.679 --> 00:41:19.519
पता चल जाएगा। बहरहाल ये अलग टॉपिक है।

00:41:17.599 --> 00:41:21.680
उसके बाद इन्होंने एक लफ्ज़ कहा वेटिकन ने

00:41:19.519 --> 00:41:23.280
फतवा दिया। वेटिकन का फतवे से कोई ताल्लुक

00:41:21.679 --> 00:41:25.118
नहीं है। दोनों कंट्राडिक्टरी अल्फ़ाज़

00:41:23.280 --> 00:41:27.760
हैं। उसके बाद उन्होंने कहा कि भई हमें

00:41:25.119 --> 00:41:29.760
नहीं मालूम। अगर नहीं मालूम तो क्लियरली

00:41:27.760 --> 00:41:31.760
कह दे ना कि नहीं मालूम है इसमें क्या हरज

00:41:29.760 --> 00:41:33.599
है? तो वही तो मैं कह रहा हूं ना कि आप कह

00:41:31.760 --> 00:41:36.233
दें कि नहीं मालूम लेकिन क्लेम क्यों कर

00:41:33.599 --> 00:41:38.253
रहे हैं कि गॉड एक्सिस्ट नहीं कर रहा है।

00:41:36.233 --> 00:41:38.253
[प्रशंसा]

00:41:39.679 --> 00:41:44.559
आप कह दे नहीं मालूम है। हो सकता है हो

00:41:42.239 --> 00:41:47.598
सकता ना हो। लेकिन आप क्लेम कर रहे हैं। द

00:41:44.559 --> 00:41:50.159
मोमेंट यू से गॉड डज नॉट एक्सिस्ट। दिस इज

00:41:47.599 --> 00:41:53.680
अ क्लेम एंड नाउ द बर्डन ऑफ प्रूफ इज अपॉन

00:41:50.159 --> 00:41:55.759
यू टू जैसे हमारे ऊपर है।

00:41:53.679 --> 00:41:58.960
और क्यों है मैं बताता हूं। क्यों है ये

00:41:55.760 --> 00:42:01.760
भी मैं बताता हूं। फिलॉसोफिकली

00:41:58.960 --> 00:42:04.000
जो क्लेम होता है ना सिर्फ ये नहीं होता

00:42:01.760 --> 00:42:05.920
कि इंसान कहे पॉजिटिव क्लेम करे और

00:42:04.000 --> 00:42:08.480
नेगेटिव क्लेम करे तो बर्डन अप्रूव नहीं

00:42:05.920 --> 00:42:10.720
है। आप मिसाल के तौर पे मैं कहूं कि फुलां

00:42:08.480 --> 00:42:13.358
उस कमरे में कोई नहीं है। मैंने एक नॉलेज

00:42:10.719 --> 00:42:15.199
का क्लेम किया है। उस कमरे में कोई नहीं

00:42:13.358 --> 00:42:16.559
है। मैंने एक नॉलेज का क्लेम किया। या तो

00:42:15.199 --> 00:42:18.639
मैं कहूं मुझे नहीं पता हो भी सकता है

00:42:16.559 --> 00:42:20.318
नहीं भी हो सकता है। दिस इज़ नॉट अ क्लेम।

00:42:18.639 --> 00:42:22.318
लेकिन जब मैं कह रहा हूं कि वहां कोई नहीं

00:42:20.318 --> 00:42:24.318
है। या मैं कह रहा हूं वहां कोई है। दोनों

00:42:22.318 --> 00:42:26.079
क्लेम है और दोनों के ऊपर बर्डन ऑफ प्रूफ

00:42:24.318 --> 00:42:27.759
है। हमारे ऊपर भी बर्डन ऑफ प्रूफ है।

00:42:26.079 --> 00:42:29.943
मैंने कंटिंजेंसी आर्गुमेंट दिया। इसे

00:42:27.760 --> 00:42:31.964
तोड़ कर दिखाइए।

00:42:29.943 --> 00:42:31.963
[प्रशंसा]

00:42:32.400 --> 00:42:38.720
आखिरी चीज इन्होंने कहा कि खुदा दुनिया

00:42:35.920 --> 00:42:42.720
बनाने से पहले 150 साल पहले या करोड़ों

00:42:38.719 --> 00:42:45.039
साल पहले क्या कर रहा था। अरे हजरत

00:42:42.719 --> 00:42:46.799
चलें बहरहाल मैं जवाब दे देता हूं। आप

00:42:45.039 --> 00:42:48.318
हमारे रिस्पेक्टेड पर्सनालिटी हैं। अगर आप

00:42:46.800 --> 00:42:51.318
नहीं होते तो मैं ऐसे एंटरटेन ही नहीं

00:42:48.318 --> 00:42:51.318
करता।

00:42:51.559 --> 00:42:56.880
[प्रशंसा]

00:42:52.800 --> 00:42:59.680
टाइम ये 100 साल पहले या 100 साल बाद पहले

00:42:56.880 --> 00:43:02.240
बाद में अभी ये वो अल्फाज़ हैं जिनका

00:42:59.679 --> 00:43:04.239
ताल्लुक टाइम से है। टाइम शुरू ही हुआ है

00:43:02.239 --> 00:43:05.919
यूनिवर्स की बिगिनिंग के बाद। तो उसके

00:43:04.239 --> 00:43:08.959
पहले खुदा क्या कर रहा था? सवाल ही

00:43:05.920 --> 00:43:10.800
इलॉजिकल है। ये फैलेसी है। यानी आप ये कह

00:43:08.960 --> 00:43:13.199
रहे हैं कि यूनिवर्स के बनने से पहले खुदा

00:43:10.800 --> 00:43:15.200
क्या कर रहा था? टाइम के बनने से पहले

00:43:13.199 --> 00:43:17.199
पहले का ताल्लुक टाइम से है। टाइम उस वक्त

00:43:15.199 --> 00:43:21.088
था ही नहीं। तो ये सवाल ही इनवैलिड है

00:43:17.199 --> 00:43:21.088
खुदा के ताल्लुक से। [प्रशंसा]

00:43:21.760 --> 00:43:28.400
दूसरी चीज आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी जो

00:43:25.199 --> 00:43:30.719
मैंने आपके सामने पेश की है। आपने बार-बार

00:43:28.400 --> 00:43:32.960
ये प्रूफ किया और ये कह रहे हैं कि गॉड ऑफ

00:43:30.719 --> 00:43:34.639
गैप्स। देखिए पहले नहीं मालूम था साइंस ने

00:43:32.960 --> 00:43:37.358
कर दिया। सिंपल इसकी मिसाल से मैं समझा

00:43:34.639 --> 00:43:40.639
देता हूं। जिस गैप्स की आप बात कर रहे हैं

00:43:37.358 --> 00:43:43.838
ना साइंस उन गैप्स को जिन चीज के जरिए भी

00:43:40.639 --> 00:43:47.279
प्रूव करेगा वो कंटिंजेंट ही होगा। अब

00:43:43.838 --> 00:43:49.759
चाहे वो फोर्स हो, मैटर हो या एनर्जी हो।

00:43:47.280 --> 00:43:52.560
लिहाजा सवाल हमारा उस वक्त भी वैलिड होगा

00:43:49.760 --> 00:43:54.800
जब तक कि आप नेसेसरी बीइंग पे ना आ जाएं।

00:43:52.559 --> 00:43:57.920
और इनफिनिट रिग्रेस पॉसिबल नहीं है ऑफ

00:43:54.800 --> 00:44:00.400
कॉजेस इन प्रैक्टिकल वर्ल्ड। तो जाहिर है

00:43:57.920 --> 00:44:04.880
कहीं रुकना पड़ेगा। जहां रुकेंगे वही खुदा

00:44:00.400 --> 00:44:09.720
है। दूसरी चीज़ आपने

00:44:04.880 --> 00:44:09.720
ये कहा क्या कह रहा था मैं? किस पॉइंट को?

00:44:15.039 --> 00:44:18.519
जस्ट जस्ट जस्ट

00:44:19.039 --> 00:44:24.639
हां जहां रुकेंगे वही खुदा है। बहरहाल तो

00:44:22.159 --> 00:44:28.799
टाइम का जिक्र हो गया। गॉड ऑफ़ गैप सॉरी या

00:44:24.639 --> 00:44:32.318
इसकी एक मिसाल आप ले लें। एक कार है। एक

00:44:28.800 --> 00:44:34.640
साहब ने देखा कि भाई कार जो है उसके

00:44:32.318 --> 00:44:38.079
व्हील्स कितने अच्छे लगे हुए हैं। सही जगह

00:44:34.639 --> 00:44:41.679
पे स्टीयरिंग जो है कितने अच्छे जगह पे

00:44:38.079 --> 00:44:44.720
लगी हुई है। और सीट्स कितने वेल डिज़ है।

00:44:41.679 --> 00:44:46.879
कितनी प्रिसाइजली ये कार काम कर रही है।

00:44:44.719 --> 00:44:48.799
तो जरूर कोई ना कोई इसे क्रिएट किया है।

00:44:46.880 --> 00:44:50.960
किसी ने क्रिएट किया है। अब जावेद साहब आए

00:44:48.800 --> 00:44:53.200
और कहे अरे जनाब बोननेट खोलिए। इसमें इंजन

00:44:50.960 --> 00:44:55.280
है। इंजन इस कार को चला रहा है। हेंस

00:44:53.199 --> 00:44:59.039
प्रूव्ड नो वन हैज़ क्रिएटेड द कार। दिस इज़

00:44:55.280 --> 00:45:04.800
इलॉजिकल। दिस इज़ इरशनल। आपने इंजन के जरिए

00:44:59.039 --> 00:45:08.000
उस गैप को तो साबित किया लेकिन क्या उससे

00:45:04.800 --> 00:45:10.640
कार की जो क्रिएशन है और उसका जो क्रिएटर

00:45:08.000 --> 00:45:13.519
है ये इंपॉसिबल हो जाए ऐसा पॉसिबल है उसका

00:45:10.639 --> 00:45:16.078
सवाल खत्म हो जाए ऐसा पॉसिबल है नहीं आपने

00:45:13.519 --> 00:45:18.960
गैप्स को फिल करके कंटिंजेंट चीजों से

00:45:16.079 --> 00:45:21.680
गैप्स को फिल करके हमारे ऑब्जरवेशन को और

00:45:18.960 --> 00:45:24.000
ब्रॉड कर दिया अब हमें और पता चल गया कि

00:45:21.679 --> 00:45:25.759
ये जो कार है इसका सिस्टम कितना ज्यादा

00:45:24.000 --> 00:45:27.760
कॉम्प्लेक्स है। पहले कम समझते थे। अब

00:45:25.760 --> 00:45:29.839
कॉम्प्लेक्सिटी और ज्यादा वाज़ हो गई। अब

00:45:27.760 --> 00:45:32.160
हमें समझ में आ रहा है कि हमारी सर्टेनिटी

00:45:29.838 --> 00:45:34.078
और बढ़ गई कि जरूर इस कार को किसी ना किसी

00:45:32.159 --> 00:45:36.639
ने बनाया। यही मामला यूनिवर्स का है।

00:45:34.079 --> 00:45:38.960
साइंस हमेशा फिजिकल वर्ल्ड की चीजों को ही

00:45:36.639 --> 00:45:40.799
फिल करती जाएगी और फिजिकल चीजों से ही

00:45:38.960 --> 00:45:43.039
करती जाएगी। चूंकि एंपेरिकल एविडेंस का

00:45:40.800 --> 00:45:45.519
ताल्लुक फिजिकल वर्ल्ड से है। आप साइंस के

00:45:43.039 --> 00:45:47.440
जरिए मेटाफिजिकल रियलिटी को कभी साबित

00:45:45.519 --> 00:45:49.759
नहीं कर सकते। ये रॉन्ग टूल का इस्तेमाल

00:45:47.440 --> 00:45:52.000
करना है। यह वही काम है कि आप मेटल

00:45:49.760 --> 00:45:55.616
डिटक्टर से प्लास्टिक डिटक्टर करने चलें

00:45:52.000 --> 00:45:57.635
जो कि जाहिर है सही नहीं है। थैंक यू।

00:45:55.615 --> 00:45:57.635
[प्रशंसा]

00:45:59.920 --> 00:46:03.760
जी।

00:46:01.679 --> 00:46:05.199
ये आर्गुमेंट का राउंड टू है।

00:46:03.760 --> 00:46:07.359
सात मिनट।

00:46:05.199 --> 00:46:09.519
पहले तो मैं आपसे अर्ज करूं कि आपने कहा

00:46:07.358 --> 00:46:11.679
कि जब कायनात ही नहीं थी तो वक्त भी नहीं

00:46:09.519 --> 00:46:13.358
था, कुछ भी नहीं था। कैसे नहीं था? खुदा

00:46:11.679 --> 00:46:16.239
था।

00:46:13.358 --> 00:46:19.519
एक एक्सिस्टेंट तो था ना खुदा का तो जब

00:46:16.239 --> 00:46:22.479
खुदा था तो व भी होगा। ऐसा नहीं है कि कुछ

00:46:19.519 --> 00:46:24.480
भी नहीं था। खुदा था। अच्छा बाकी है कि

00:46:22.480 --> 00:46:26.559
आपने कहा साहब आप साबित कीजिए। आपके पास

00:46:24.480 --> 00:46:28.480
भी लॉजिक है या मेरे पास भी लॉजिक है आप

00:46:26.559 --> 00:46:31.759
मेरा जिम्मेदारी नहीं है साबित करना कि

00:46:28.480 --> 00:46:33.440
खुदा है। बर्टन रसेल ने बड़ी अच्छी बात

00:46:31.760 --> 00:46:35.599
कही।

00:46:33.440 --> 00:46:38.480
बर्टन रसेल ने बड़ी अच्छी बात कही है। मैं

00:46:35.599 --> 00:46:40.720
आपसे अगर यह दावा करूं कि चाय की केतली

00:46:38.480 --> 00:46:43.280
मिररी के चारों तरफ घूम रही है मार्स के

00:46:40.719 --> 00:46:45.519
चारों तरफ तो ये आपका काम नहीं है कि आप

00:46:43.280 --> 00:46:47.760
साबित करें कि कोई चाय की केतली नहीं है।

00:46:45.519 --> 00:46:50.239
ये मेरा काम है। मैंने दावा किया है। ये

00:46:47.760 --> 00:46:52.560
दावा तो मजहबी लोग करते हैं कि खुदा है।

00:46:50.239 --> 00:46:54.159
मैं क्यों साबित करूं कि नहीं है? जब तक

00:46:52.559 --> 00:46:56.400
आप मुझे कंफस नहीं कर देंगे मैं नहीं

00:46:54.159 --> 00:46:59.199
मानूंगा।

00:46:56.400 --> 00:47:01.519
आपकी जिम्मेदारी है। मेरी जिम्मेदारी नहीं

00:46:59.199 --> 00:47:04.879
है।

00:47:01.519 --> 00:47:08.000
दो यह कि यह जो आप कह रहे हैं जो गैप्स है

00:47:04.880 --> 00:47:11.760
ये गैप्स जब जब किसी मजहब को चैलेंज करते

00:47:08.000 --> 00:47:15.280
हैं। जब ऐसा कोई बात आती है तो हंगामा हो

00:47:11.760 --> 00:47:20.400
जाता है। के जब वो चैलेंज करें किसी फेथ

00:47:15.280 --> 00:47:24.880
को ये तमाम साइन जो है इसे मुख्तलिफ जगहों

00:47:20.400 --> 00:47:27.838
पे मुख्तलिफ वक्तों में मजहब ने रोकने की

00:47:24.880 --> 00:47:32.000
कोशिश की है। ये किताब है रिलजन एंड साइंस

00:47:27.838 --> 00:47:35.279
बटर की पढ़िएगा अच्छी लगेगी आपको। तारीख

00:47:32.000 --> 00:47:39.519
ही है साइंस मजहब की साइंस से उसका यही

00:47:35.280 --> 00:47:42.319
रिश्ता है। अच्छा अब ये हम सोचे कि बहाल

00:47:39.519 --> 00:47:45.199
ये वजूद जो है मजहब और ये बिलीफ इन गॉड

00:47:42.318 --> 00:47:47.358
इंसान को बेहतर बना देता है। तो एक काम

00:47:45.199 --> 00:47:49.759
कीजिए हिंदुस्तान वर्ल्ड का नक्शा लीजिए

00:47:47.358 --> 00:47:52.880
और मार्क कीजिए कि रिलजन कहां-कहां ज्यादा

00:47:49.760 --> 00:47:55.760
है। कहां-कहां चाहे वो लैटिन अमेरिका हो

00:47:52.880 --> 00:47:57.838
या मिडिल ईस्ट हो या फस्ट हो या

00:47:55.760 --> 00:48:01.680
हिंदुस्तान के वो इलाके जहां मजहबियत

00:47:57.838 --> 00:48:05.440
ज्यादा है। रख दीजिए नक्शा अलग। अब दूसरा

00:48:01.679 --> 00:48:08.879
नक्शा कि कहां-कहां नाइंसाफी, रिप्रेशन,

00:48:05.440 --> 00:48:14.318
औरतों के हुकूक की पामाली, जुल्म,

00:48:08.880 --> 00:48:18.160
डिक्टेटरशिप कहां है? नक्शा एक ही होगा।

00:48:14.318 --> 00:48:20.559
तो आप मुझे बताएं के जो इसका तरकीब

00:48:18.159 --> 00:48:23.118
इस्तेमाल क्या है?

00:48:20.559 --> 00:48:25.358
खुदा का तरकीब इस्तेमाल तो बताइए। आप छोटी

00:48:23.119 --> 00:48:27.838
सी दवा सड़क पे बेचते हैं उसकी भी तरकीब

00:48:25.358 --> 00:48:31.119
इस्तेमाल बताते हैं। इसके इस्तेमाल से तो

00:48:27.838 --> 00:48:34.400
फायदा ही नहीं हुआ किसी को। जो सारे के

00:48:31.119 --> 00:48:37.519
सारे खराब मुल्क है, खराब समाज है वो सारे

00:48:34.400 --> 00:48:39.838
जुल्म खुदा के नाम पे करते हैं। वो गलत

00:48:37.519 --> 00:48:43.039
करते हैं, सही करते हैं। मुझे क्या लेना

00:48:39.838 --> 00:48:45.599
देना उससे? इस्तेमाल से मालूम होता ना। एक

00:48:43.039 --> 00:48:47.679
विस््की की बोतल कभी शायद देखी हो आपने।

00:48:45.599 --> 00:48:49.519
लाल रंग की होती है। उस पे रोशनी और छिपड़

00:48:47.679 --> 00:48:52.399
इंतहाई खूबसूरत लगती है। क्या बिगाड़ रही

00:48:49.519 --> 00:48:55.358
है किसी का? उसका इस्तेमाल गलत है। इसलिए

00:48:52.400 --> 00:48:59.280
आप उसे नापसंद करते हैं। इसका इस्तेमाल

00:48:55.358 --> 00:49:01.759
गलत है। इस तसवुर का

00:48:59.280 --> 00:49:04.079
इस्तेमाल ही गलत है और हमेशा से गलत हुआ

00:49:01.760 --> 00:49:05.760
है। आप देख लीजिए इंसानी तारीख देख लीजिए।

00:49:04.079 --> 00:49:09.039
आज देख लीजिए हिंदुस्तान देख लीजिए।

00:49:05.760 --> 00:49:11.599
दुनिया देख लीजिए। क्या हो रहा है?

00:49:09.039 --> 00:49:15.199
इसे कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं? फेथ वाले

00:49:11.599 --> 00:49:18.000
लोग क्या फेयर हैं? जस्ट हैं जो अपने

00:49:15.199 --> 00:49:19.358
खुदाओं पे यकीन रखते हैं। वो किस तरह के

00:49:18.000 --> 00:49:21.838
लोग हैं?

00:49:19.358 --> 00:49:24.558
वो लोगों को इंसाफ देते हैं। वो बेहतर

00:49:21.838 --> 00:49:26.239
इंसान बने। तो इस दवा का फायदा क्या है?

00:49:24.559 --> 00:49:29.200
चलो बहुत फायदा हो रहा तो मैं इस्तेमाल कर

00:49:26.239 --> 00:49:32.399
लूंगा। मुझे तो इस दवा का कोई फायदा दिखता

00:49:29.199 --> 00:49:35.598
ही नहीं। मुझे तो ऐसा लगता मैं एक और बात

00:49:32.400 --> 00:49:38.400
बताऊं। अगर कोई आदमी मजहबी है और अच्छा

00:49:35.599 --> 00:49:40.559
आदमी है तो मैं उसकी बहुत इज्जत करता हूं।

00:49:38.400 --> 00:49:42.880
इसलिए कि मेरा ख्याल है मजहबी आदमी का

00:49:40.559 --> 00:49:47.200
अच्छा होना मुझसे अच्छा होने से ज्यादा

00:49:42.880 --> 00:49:49.440
मुश्किल है। भाई हर चीज की एक लिमिट है।

00:49:47.199 --> 00:49:51.679
आप इतना भाग सकते हैं, इतना नहीं भाग

00:49:49.440 --> 00:49:54.000
सकते। इतना वजन उठा सकते, इतना नहीं उठा

00:49:51.679 --> 00:49:56.159
सकते। इतना दूर देख सकते हैं, इतना दूर

00:49:54.000 --> 00:49:59.920
नहीं देख सकते। उसी तरह कॉमन सेंस कहता है

00:49:56.159 --> 00:50:03.598
कि आप में नेकी का भी एक कोटा होगा। अब आप

00:49:59.920 --> 00:50:05.519
अगर सुबह जाते हैं अपनी इबादतगाह और इबादत

00:50:03.599 --> 00:50:07.599
करते हैं तो बाहर निकलते हैं तो आप तो यही

00:50:05.519 --> 00:50:09.759
महसूस करते हैं कि आपने बहुत अच्छा काम

00:50:07.599 --> 00:50:11.680
किया। आपकी नेकी का एक बहुत बड़ा कोटा

00:50:09.760 --> 00:50:14.400
खर्च हो गया जिससे किसी का कोई फायदा नहीं

00:50:11.679 --> 00:50:16.960
होगा। मैं तो नहीं जाता हूं तो मुझे तो

00:50:14.400 --> 00:50:19.358
किसी को खाना खिलाना पड़ेगा। किसी बेवा की

00:50:16.960 --> 00:50:22.720
मदद करनी पड़ेगी। मैं अपना कोटा कैसे

00:50:19.358 --> 00:50:25.119
कंज्यूम करूं? आप अपना कोटा सारे मजहबी

00:50:22.719 --> 00:50:27.838
लोग इंतहाई यूज़लेस कामों में यूज़ करते

00:50:25.119 --> 00:50:31.374
हैं। उसके बाद भी अगर आप में बचती है थोड़ी

00:50:27.838 --> 00:50:33.393
सी शराफत तो भाई वाह क्या बात है।

00:50:31.373 --> 00:50:33.393
[प्रशंसा]

00:50:35.599 --> 00:50:42.318
एक तो मुझे यह बात बहुत अच्छी लग रही है

00:50:37.920 --> 00:50:46.240
कि दोनों ही विद्वान समय को मानते हैं और

00:50:42.318 --> 00:50:48.800
बहुत समय से अपनी दलीलें और बाज दफा समय

00:50:46.239 --> 00:50:51.838
से पहले अपनी तकरीरें पूरी करके अपनीपनी

00:50:48.800 --> 00:50:54.559
कुर्सी पर बैठ रहे हैं। ये इस आर्गुमेंट

00:50:51.838 --> 00:50:56.078
का राउंड टू पूरा हुआ। अब रिबर्टल का

00:50:54.559 --> 00:50:59.359
राउंड टू है और उसके बाद क्रॉस

00:50:56.079 --> 00:51:03.839
एग्जामिनेशन होगा।

00:50:59.358 --> 00:51:06.078
नहीं आपका आर्गुमेंट हो गया सर।

00:51:03.838 --> 00:51:08.239
हमारे यहां स्कूल के सिलेबस में पंच

00:51:06.079 --> 00:51:10.480
परमेश्वर कहानी पढ़ाई जाती है प्रेमचंद जी

00:51:08.239 --> 00:51:12.558
की लिखी हुई। आप निश्चिंत रहिए। आपके कोई

00:51:10.480 --> 00:51:17.079
राउंड मैं मिस नहीं होने दूंगा। रिबटल का

00:51:12.559 --> 00:51:17.079
राउंड टू मुफ्ती शमाल नदी साहब।

00:51:19.679 --> 00:51:24.558
असल में जो हकीकी प्रॉब्लम है असल

00:51:22.000 --> 00:51:27.760
प्रॉब्लम है वो यह है कि जावेद साहब के

00:51:24.559 --> 00:51:30.559
पास कासेप्ट ऑफ गॉड क्लियर नहीं है।

00:51:27.760 --> 00:51:34.880
इन्होंने कहा कि कायनात से पहले खुदा तो

00:51:30.559 --> 00:51:38.160
था तब भी तो टाइम होगा कि खुद कायनात टाइम

00:51:34.880 --> 00:51:40.400
कायनात का हिस्सा है। हम खुदा उस खुदा को

00:51:38.159 --> 00:51:42.480
मानते हैं। नेसेसरी बीइंग का टाइमलेस होना

00:51:40.400 --> 00:51:44.480
जरूरी है। क्योंकि वो टाइम का क्रिएटर है।

00:51:42.480 --> 00:51:46.639
जब उसने टाइम को क्रिएट किया तो वो खुद

00:51:44.480 --> 00:51:48.719
टाइम पे कैसे होगा? उसने जब स्पेस को

00:51:46.639 --> 00:51:51.118
क्रिएट किया तो खुद स्पेस में कैसे होगा?

00:51:48.719 --> 00:51:52.879
अगर वो टाइम एंड स्पेस को पहले से ही उस

00:51:51.119 --> 00:51:55.920
का पाबंद है तो फिर किस चीज को उसने

00:51:52.880 --> 00:51:58.559
क्रिएट किया? लिहाजा ये सवाल गलत है के

00:51:55.920 --> 00:52:00.960
खुदा था तो टाइम होगा। बिल्कुल नहीं। टाइम

00:51:58.559 --> 00:52:02.319
के पाबंद हम है खुदा नहीं है। हम फिजिकल

00:52:00.960 --> 00:52:04.800
वर्ल्ड से ताल्लुक रखते हैं। वो

00:52:02.318 --> 00:52:06.800
मेटाफिजिकल रियलिटी है। दूसरी चीज

00:52:04.800 --> 00:52:08.559
इन्होंने मिसाल दी कि चाय की केतली हवा

00:52:06.800 --> 00:52:10.160
में घूम रही होगी और पता नहीं शायद वो

00:52:08.559 --> 00:52:13.119
बर्टन रसेल का उन्होंने हवाला दिया।

00:52:10.159 --> 00:52:15.440
बहरहाल यही प्रॉब्लम है। प्रॉब्लम यही है

00:52:13.119 --> 00:52:17.680
कि हम चीजों के दरमियान डिफरेंशिएट नहीं

00:52:15.440 --> 00:52:20.079
कर पाते हैं। ये जो आपने मिसाल दी ये

00:52:17.679 --> 00:52:24.440
इमेजिनेशन है और मैं जो साबित कर रहा हूं

00:52:20.079 --> 00:52:24.440
वो लॉजिकल नेसेसिटी है।

00:52:24.690 --> 00:52:27.598
[प्रशंसा]

00:52:25.280 --> 00:52:29.280
आप इमेजिन करने आए तो कुछ भी करें। जुपिटर

00:52:27.599 --> 00:52:32.318
में पिंक एलीफेंट होगा, यूनिकॉर्न होगा

00:52:29.280 --> 00:52:34.559
करें। उससे कायनात पे क्या फर्क पड़ता है?

00:52:32.318 --> 00:52:37.199
उससे आप लॉजिकल नेसेसिटी साबित नहीं कर

00:52:34.559 --> 00:52:39.359
सकते। मैं तो उस प्राइम कॉज की बात कर रहा

00:52:37.199 --> 00:52:42.000
हूं। उस नेसेसरी बीइंग की बात कर रहा हूं

00:52:39.358 --> 00:52:44.318
जिसके बगैर इस कायनात का एकिस्टेंस मुमकिन

00:52:42.000 --> 00:52:46.079
नहीं है। दूसरी चीज मजहब को साइंस चैलेंज

00:52:44.318 --> 00:52:48.800
करती है वगैरह-वगैरह ये हमारा टॉपिक ही

00:52:46.079 --> 00:52:50.640
नहीं है। मैं मैं इस पे बात करूंगा तो फिर

00:52:48.800 --> 00:52:54.720
मेरा वक्त चला जाएगा। मजहब के ऊपर क्योंकि

00:52:50.639 --> 00:52:57.358
हमारी डिस्कशन नहीं है। साइंस को मजहब और

00:52:54.719 --> 00:52:59.679
बिलखसूस मैं और हमारा वर्ल्ड व्यू कम से

00:52:57.358 --> 00:53:01.759
कम साइंस को पीछा नहीं पीछे नहीं करता है।

00:52:59.679 --> 00:53:04.318
साइंटिज्म की मज़म्मत करता है। इसकी वजाहत

00:53:01.760 --> 00:53:06.640
मैंने पहले कर दी। दूसरी ची चीज इन्होंने

00:53:04.318 --> 00:53:09.119
कहा वर्ल्ड का नक्शा लीजिए। वर्ल्ड मैप

00:53:06.639 --> 00:53:11.838
लीजिए दो अलग-अलग जगह की। हजरत मैंने ये

00:53:09.119 --> 00:53:14.318
होमवर्क किया था और मैंने मिडिल ईस्ट

00:53:11.838 --> 00:53:18.719
मिडिल ईस्ट का एक नक्शा लिया और यूरोप का

00:53:14.318 --> 00:53:21.599
एक नक्शा लिया। ये मजहबी इलाका और ये

00:53:18.719 --> 00:53:25.605
लिबरल और एथस्ट इलाका। मुझे पता चला कि

00:53:21.599 --> 00:53:27.626
सबसे ज्यादा रेप केसेस जो है वहां पर है।

00:53:25.606 --> 00:53:27.626
[प्रशंसा]

00:53:29.519 --> 00:53:33.519
मुझे ये पता चला यूएन की रिपोर्ट के

00:53:31.679 --> 00:53:36.239
मुताबिक। मैं ये अपने घर से नहीं लेके आ

00:53:33.519 --> 00:53:38.960
रहा कि जो वर्किंग वुमेन है यूरोपियन

00:53:36.239 --> 00:53:41.279
कंट्रीज में उसमें 81%

00:53:38.960 --> 00:53:43.947
वुमेन सेक्सुअल हरासमेंट का वर्क में जो

00:53:41.280 --> 00:53:45.760
शुमार ये मिडिल ईस्ट में नहीं हो रहा है।

00:53:43.947 --> 00:53:50.400
[प्रशंसा] वो मजहबी लोग हैं इसलिए नहीं हो

00:53:45.760 --> 00:53:53.359
रहा है। दूसरी चीज आपने ये कहा के मजहबी

00:53:50.400 --> 00:53:56.000
आदमी का अच्छा होना हमारे अच्छे होने से

00:53:53.358 --> 00:53:58.880
बहुत मुश्किल है। बहुत मुश्किल है। तो

00:53:56.000 --> 00:54:01.760
इसका मतलब ये है कि गॉड के अलावा आपके पास

00:53:58.880 --> 00:54:04.480
अच्छे और बुरे का कोई स्टैंडर्ड है। मैं

00:54:01.760 --> 00:54:06.319
चाहूंगा कि कन्वर्सेशनल स्टाइल वाले

00:54:04.480 --> 00:54:09.547
डिस्कशन और सेगमेंट पे इसी पे बात कर लेते

00:54:06.318 --> 00:54:09.547
हैं। थैंक यू वेरी मच। [प्रशंसा]

00:54:13.440 --> 00:54:19.679
ये रिबर्टल का राउंड टू है। आपके पास 5

00:54:16.719 --> 00:54:21.439
मिनट का वक्त है और इसके बाद क्रॉस

00:54:19.679 --> 00:54:23.679
एग्जामिनेशन शुरू करेंगे। आप चाहे तो जो

00:54:21.440 --> 00:54:24.639
इन्होंने सवाल पूछे उनके जवाब आप रिबर्टल

00:54:23.679 --> 00:54:26.318
में भी दे सकते हैं।

00:54:24.639 --> 00:54:29.440
जी

00:54:26.318 --> 00:54:31.920
देखिए पहले तो ये बात कि ये मिसाल गलत

00:54:29.440 --> 00:54:34.400
नहीं है। गलत है। इन्होंने पहले ही हमको

00:54:31.920 --> 00:54:36.480
डिस्म कर दिया। कह अकल से मामला सॉल्व

00:54:34.400 --> 00:54:38.559
नहीं हो सकता। लॉजिक से आप पहुंच नहीं

00:54:36.480 --> 00:54:40.639
सकते। ये एक मेटाफिजिकल चीज है।

00:54:38.559 --> 00:54:42.880
मेटाफिजिकल अजीब सा लब्ज़ है। ठीक से किसी

00:54:40.639 --> 00:54:45.279
को माने नहीं मालूम इसके तो ऐसा लगता है

00:54:42.880 --> 00:54:50.559
कुछ बड़ी चीज है। अरे भाई क्या होता है

00:54:45.280 --> 00:54:53.680
मेटाफिजिकल? बताओ खड़ी हो। ये एक लफज़ है जो

00:54:50.559 --> 00:54:55.359
कहीं भी इस्तेमाल हो जाता है। जब आप एक

00:54:53.679 --> 00:54:57.519
बात कर रहे हैं और आप मुझसे बहस कर रहे

00:54:55.358 --> 00:55:00.078
हैं तो मुझे मेटाफिजिकल मत बताइए। आप

00:54:57.519 --> 00:55:02.318
लॉजिकली मुझे प्रूफ किए और अगर लॉजिकली आप

00:55:00.079 --> 00:55:04.720
नहीं बात करते साहब ये मेटोफिजिकल है तो

00:55:02.318 --> 00:55:07.920
फिर हम आप बात क्या कर रहे हैं मेरा आपका

00:55:04.719 --> 00:55:10.639
किस जुबान में कन्वर्सेशन हुआ

00:55:07.920 --> 00:55:12.318
और ये कहना कि वक्त पहले नहीं था तो फिर

00:55:10.639 --> 00:55:16.799
क्यों कहते हैं ये हमेशा से और हमेशा

00:55:12.318 --> 00:55:19.759
रहेगा हमेशा वक्त है तो आप कैसे कहते हैं

00:55:16.800 --> 00:55:22.960
वो हमेशा से है और हमेशा रहेगा हमेशा का

00:55:19.760 --> 00:55:25.760
मतलब है कोई वक्त अगर वक्त ही नहीं है तो

00:55:22.960 --> 00:55:29.280
हमेशा कैसे

00:55:25.760 --> 00:55:31.839
बहरहाल वो रहेगा। अब मैं ये देखता हूं।

00:55:29.280 --> 00:55:34.720
आपने कहा ना कि वहां रेप ज्यादा होते हैं।

00:55:31.838 --> 00:55:36.960
तो हम एक बात देखते हैं कि ये दुनिया

00:55:34.719 --> 00:55:39.519
जिसमें वो कादरे मुतलक है। जिसकी मर्जी के

00:55:36.960 --> 00:55:43.039
बगैर पत्ता भी नहीं हिलता वो ओमनीपोटेंट

00:55:39.519 --> 00:55:47.199
है। ये दुनिया चल कैसे रही है? और इस

00:55:43.039 --> 00:55:49.358
दुनिया का हाल क्या है? 45,000

00:55:47.199 --> 00:55:54.000
बच्चे

00:55:49.358 --> 00:55:56.239
जो 10 साल की उम्र से कम थे वो गदा में

00:55:54.000 --> 00:55:59.838
मरे हैं।

00:55:56.239 --> 00:56:02.719
भूख से काला हांडी में बच्चे मरते हैं और

00:55:59.838 --> 00:56:05.838
डिप्थेरिया से मरते हैं। डिप्थेरिया अजीब

00:56:02.719 --> 00:56:08.798
मर्ज़ है। गले में जाली मरना शुरू होती है।

00:56:05.838 --> 00:56:11.920
बच्चा नीला हो जाता है। गरीब का बच्चा

00:56:08.798 --> 00:56:14.480
इसलिए कि वो पास आती है। ये कादरे मुक है

00:56:11.920 --> 00:56:16.639
जो चाहे कर दे। इससे आप दुआएं मांगते हैं

00:56:14.480 --> 00:56:20.240
हमारी ये काम कर दे वो कर दे तो इसका मतलब

00:56:16.639 --> 00:56:23.838
है डे टू डे लाइफ में वो इंटरफेयर करता है

00:56:20.239 --> 00:56:26.558
और ये देख रहा है वो अगर वो वाकई भी है

00:56:23.838 --> 00:56:28.318
फॉर डिस्कशन सेक तो मैं जब दुनिया देखता

00:56:26.559 --> 00:56:32.284
हूं तो मेरे दिल में उसके लिए कोई इज्जत

00:56:28.318 --> 00:56:33.279
नहीं पैदा होती क्या कर रहे हो तुम

00:56:32.284 --> 00:56:37.760
[प्रशंसा]

00:56:33.280 --> 00:56:40.640
पूरे ऑल पावरफुल हो ओमनीपोटेंट हो ओमनी

00:56:37.760 --> 00:56:43.520
प्रेजेंट हो तुम तो वहां गदा में रहेगे ना

00:56:40.639 --> 00:56:47.838
तुम हर जगह हो तुम देख रहे थे कि बच्चे की

00:56:43.519 --> 00:56:50.239
कैसे धज्जियां उड़ गई। तुम देख रहे थे और

00:56:47.838 --> 00:56:52.159
तुम चाहते हो मैं तुम्हारी परश कर तुम हो

00:56:50.239 --> 00:56:54.239
भी।

00:56:52.159 --> 00:56:59.138
अरे यार इससे अच्छे तो हमारे चीफ प्राइम

00:56:54.239 --> 00:57:00.239
मिनिस्टर हैं। कुछ तो ख्याल करते हैं।

00:56:59.139 --> 00:57:03.838
[हंसी]

00:57:00.239 --> 00:57:07.838
आप किसकी इबादत कर रहे हैं? अगर वो है भी

00:57:03.838 --> 00:57:11.679
यह दुनिया नाइंसाफी से जुल्म से जब्र से

00:57:07.838 --> 00:57:14.960
तशद्दुद से भरी हुई है और आप ये मत कहिएगा

00:57:11.679 --> 00:57:16.879
कि वो देख रहा है और वो बताएगा एक दिन अगर

00:57:14.960 --> 00:57:19.838
वो देख रहा है और इंटरफेयर नहीं करता तो

00:57:16.880 --> 00:57:22.480
आप दुआ क्यों मांगते आप कहते हैं मेरा ये

00:57:19.838 --> 00:57:26.159
काम करा दे इसका मतलब है वो दखल दे सकता

00:57:22.480 --> 00:57:29.039
है वो आपको नौकरी दिलवा सकता है भले दूसरे

00:57:26.159 --> 00:57:31.838
आदमी को ना मिले मगर आपका काम कर देगा

00:57:29.039 --> 00:57:34.239
क्योंकि आपने दुआ मांगी है तो तो जब वो

00:57:31.838 --> 00:57:36.719
आपको नौकरी दिला सकता है, लड़की की शादी

00:57:34.239 --> 00:57:39.519
कर सकता है, बेटे को ग्रीन कार्ड दिलवा

00:57:36.719 --> 00:57:42.078
सकता है तो कम से कम ये जो मर रहे हैं

00:57:39.519 --> 00:57:44.798
बच्चे इनको रोकते हैं। कुछ तो करें। मुझे

00:57:42.079 --> 00:57:47.200
तो दुनिया में इस दुनिया का कोई मालिक है।

00:57:44.798 --> 00:57:51.440
इसका ओमनीपोटेंट

00:57:47.199 --> 00:57:55.439
कोई रूलर है। और ये दुनिया ऐसी चल रही है।

00:57:51.440 --> 00:57:59.400
मैं तो चाहूंगा कि भाई ना हो। अगर हो तो

00:57:55.440 --> 00:58:01.420
बड़ी शर्मिंदगी की बात है। शुक्रिया।

00:57:59.400 --> 00:58:01.420
[प्रशंसा]

00:58:03.358 --> 00:58:11.358
देवियों और सज्जनों इस बहस के दो राउंड और

00:58:07.119 --> 00:58:14.000
दो रिबटल पूरे हो चुके हैं। अब सबसे जरूरी

00:58:11.358 --> 00:58:17.519
और सबसे मुश्किल राउंड शुरू हो रहा है

00:58:14.000 --> 00:58:20.719
क्रॉस एग्जामिनेशन का। अब इन विद्वानों की

00:58:17.519 --> 00:58:24.400
सज्जनता की एक परख भी होगी और वक्त हमने

00:58:20.719 --> 00:58:26.399
16 मिनट का तय किया है। अह पहला सवाल आप

00:58:24.400 --> 00:58:28.079
पूछना चाहेंगे?

00:58:26.400 --> 00:58:30.184
जी बिलकुल।

00:58:28.079 --> 00:58:30.880
पहले बोले

00:58:30.184 --> 00:58:34.400
[हंसी]

00:58:30.880 --> 00:58:37.640
आप माइक ले लीजिएगा हाथ में

00:58:34.400 --> 00:58:37.639
नीचे से

00:58:38.880 --> 00:58:44.079
जी मैं मैं

00:58:41.838 --> 00:58:47.078
ये डाइस हटा सकते हैं क्या हम थोड़ा

00:58:44.079 --> 00:58:47.079
क्विकली

00:58:47.838 --> 00:58:53.679
डाइस पीछे कर दीजिए बस थोड़ा सा ताकि ये जो

00:58:51.280 --> 00:58:56.559
दाएं बाएं लोग बैठे हैं इसे हटा ही दीजिए

00:58:53.679 --> 00:58:57.440
अब हम वहां तो जाने वाले नहीं आराम से

00:58:56.559 --> 00:59:01.079
आराम

00:58:57.440 --> 00:59:01.079
दोनों तरफ से

00:59:08.000 --> 00:59:14.239
इस बीच आप लोग भी अपनेप सवाल तैयार कर

00:59:10.960 --> 00:59:16.720
लें। ये ध्यान रखेंगे कि मैं यहां से सवाल

00:59:14.239 --> 00:59:20.159
लूंगा। आप लोगों को अपना हाथ ऊपर करना है।

00:59:16.719 --> 00:59:22.879
अपना नाम बताना है और अधिकतम तीन वाक्यों

00:59:20.159 --> 00:59:25.279
में अपना सवाल पूरा करना है। कई लोग सवाल

00:59:22.880 --> 00:59:27.039
की जगह भाषण देने लगते हैं। उससे आज बचना

00:59:25.280 --> 00:59:30.079
है।

00:59:27.039 --> 00:59:31.838
जी मुफ्ती साहब पहला सवाल आपका 16 मिनट है

00:59:30.079 --> 00:59:35.200
हम दोनों लोगों के सवाल जी

00:59:31.838 --> 00:59:36.960
जी बहुत शुक्रिया आप आपकी जो अभी बात हुई

00:59:35.199 --> 00:59:40.719
बहुत अहम थी मैं इसको चाहूंगा कि आगे

00:59:36.960 --> 00:59:42.720
डिस्कस करूं लेकिनकि अभी इस वो सेगमेंट है

00:59:40.719 --> 00:59:46.879
क्रॉस एग्जामिनेशन

00:59:42.719 --> 00:59:49.838
तो सबसे पहला सवाल आपसे ये है कि जो मैं

00:59:46.880 --> 00:59:51.599
इतनी देर से कॉन्टिंजेंसी आर्गुमेंट आपको

00:59:49.838 --> 00:59:55.440
बता रहा था ये अक्कल से ही बता रहा था

00:59:51.599 --> 00:59:57.760
हजरत आप ये बताएं के आप इनफिनिट रिग्रेस

00:59:55.440 --> 00:59:59.280
ऑफ कॉज को पॉसिबल मानते हैं या नेसेसरी

00:59:57.760 --> 01:00:01.440
बीइंग के एक्सिस्टेंस को सही समझते हैं।

00:59:59.280 --> 01:00:02.079
क्योंकि दो ही ऑप्शन हो सकता है। आप ये

01:00:01.440 --> 01:00:04.240
बताएं।

01:00:02.079 --> 01:00:06.480
देखिए आपको मैं ईमानदारी से बात करूंगा।

01:00:04.239 --> 01:00:09.199
एक तो मैं कॉन्टिजेंसी वर्ड ठीक से समझता

01:00:06.480 --> 01:00:12.240
हूं और इस वक्त भी जो आपने अंग्रेजी के

01:00:09.199 --> 01:00:14.798
अल्फाज़ इस्तेमाल किए वो जरा थोड़े से मुझे

01:00:12.239 --> 01:00:16.719
डिफिकल्ट और कॉम्प्लिकेटेड लगे। तो आप जरा

01:00:14.798 --> 01:00:18.318
सिंपल सवाल में ये सवाल कर सकते हैं।

01:00:16.719 --> 01:00:20.558
बिल्कुल कर सकता हूं। जी

01:00:18.318 --> 01:00:22.558
यूनिवर्स की हर चीज कंटिंजेंट होने का

01:00:20.559 --> 01:00:25.040
मतलब ये है कि वो अपने एक्सिस्टेंस में

01:00:22.559 --> 01:00:27.760
किसी के ऊपर डिपेंडेंट है। जो भी चीज

01:00:25.039 --> 01:00:30.239
डिपेंडेंट होगी वो चीज इंडिपेंडेंट नहीं

01:00:27.760 --> 01:00:32.480
हो सकती तो उसका कोई ना कोई कॉज होगा। तो

01:00:30.239 --> 01:00:35.199
अब आप क्या समझते हैं कि ये इनफिनिट

01:00:32.480 --> 01:00:37.920
रिग्रेस है यानी कॉज पर कॉज कॉज पर कॉज

01:00:35.199 --> 01:00:39.679
कॉज पर कॉज और कभी कोई यानी एंडलेसली चलता

01:00:37.920 --> 01:00:41.920
रहा। क्योंकि अगर ऐसा होगा तो हम तो

01:00:39.679 --> 01:00:44.399
एक्सिस्टेंस में आते ही नहीं। लॉजिकली ये

01:00:41.920 --> 01:00:47.358
मुत्तफक अल चीज है। मुत्तफक अल अग्रीड

01:00:44.400 --> 01:00:49.519
अपॉन ओके

01:00:47.358 --> 01:00:50.960
इस पे हमने एग्री किया था कि मुश्किल शब्द

01:00:49.519 --> 01:00:52.960
आएगा तो अर्थ बताना पड़ेगा।

01:00:50.960 --> 01:00:54.880
तो इनफिनिट रिग्रेस तो पॉसिबल नहीं है। तो

01:00:52.960 --> 01:00:55.920
कहीं ना कहीं आपको रुकना पड़ेगा ऐसे

01:00:54.880 --> 01:00:58.079
नेसेसिटी पर।

01:00:55.920 --> 01:01:00.960
नहीं कोई जरूरत नहीं रुकने की। किसने कहा

01:00:58.079 --> 01:01:03.839
रुकना पड़ेगा? आप रुकते हैं वो होता है।

01:01:00.960 --> 01:01:07.199
आप नहीं रुकते। आप कहते हैं वो हमेशा से

01:01:03.838 --> 01:01:10.159
है। जब उस वक्त से है जब वक्त नहीं था। आप

01:01:07.199 --> 01:01:12.318
कहां रुकते हैं? कि अब हुआ था वो। आप नहीं

01:01:10.159 --> 01:01:16.078
कहते। हम क्यों नहीं मान सकते कि यूनिवर्स

01:01:12.318 --> 01:01:20.318
जो है और बल्कि मल्टीिवर्स जो है वो हमेशा

01:01:16.079 --> 01:01:23.920
से है वो बनती है सब एक हमारे यहां एक चीज

01:01:20.318 --> 01:01:26.880
है ब्लैक होल वो समेट लेता है वापस फिर

01:01:23.920 --> 01:01:28.880
ब्लास्ट होता है फिर फैल जाता है और इसमें

01:01:26.880 --> 01:01:32.720
हमारी तो खैर कोई औकात ही नहीं है इंसान

01:01:28.880 --> 01:01:36.000
की एक छोटे से दर्रे पे हम 50 60 साल की

01:01:32.719 --> 01:01:39.199
उम्र रखते हैं जो करोरा अरबों साल की

01:01:36.000 --> 01:01:43.760
कायनात हो उसमें और पैदा भी निहायती

01:01:39.199 --> 01:01:47.358
बेहूदा वजह से हुए थे। तो तो इसमें ये

01:01:43.760 --> 01:01:49.680
सोचना कि इसकी वजूहात और ये क्यों है? ये

01:01:47.358 --> 01:01:52.078
डिपेंडेंट है। ये हम देख रहे हैं। क्या

01:01:49.679 --> 01:01:55.838
मालूम? आप सोचिए कि ये जो फैल रही है

01:01:52.079 --> 01:01:58.240
कायनात ये कहां फैल रही है? ये कहां जा

01:01:55.838 --> 01:02:00.639
रही है? और ये फैल क्यों रही है? अरे बना

01:01:58.239 --> 01:02:03.519
ली थी तुमने। रुको भैया हमें काफी है। ये

01:02:00.639 --> 01:02:05.759
फैल क्यों रही है? ये और कौन सी कायनात?

01:02:03.519 --> 01:02:08.480
जिसे मैं दूरबीन से देखता हूं तो दो

01:02:05.760 --> 01:02:11.680
बिलियन लाइट ईयर पे है। उससे मेरा कोई

01:02:08.480 --> 01:02:16.480
वास्ता ही नहीं है। दो बिलियन ईयर यानी

01:02:11.679 --> 01:02:19.440
अगर मैं 80 थाउजेंड माइल्स पर सेकंड से

01:02:16.480 --> 01:02:23.039
चलूं तो 20 करोड़ साल में वहां पहुंच

01:02:19.440 --> 01:02:25.200
जाऊंगा। इसकी जरूरत क्या थी? ये दुनिया ये

01:02:23.039 --> 01:02:27.759
कायनात तो इंसान अशरफुल मखलूकात के लिए

01:02:25.199 --> 01:02:31.199
बनाई गई ना। तो ये सब

01:02:27.760 --> 01:02:35.599
टर्म समझ में नहीं आया।

01:02:31.199 --> 01:02:38.399
इसमें कोई खास समझने वाली बात थी नहीं।

01:02:35.599 --> 01:02:40.480
ये जो अल्टीमेट कहा ये जाता है कि ये जो

01:02:38.400 --> 01:02:42.000
पूरी यूनिवर्स है ये जो दुनिया है ये

01:02:40.480 --> 01:02:44.240
इंसान के लिए बनाई गई।

01:02:42.000 --> 01:02:44.880
अच्छा ये सब इंसान के लिए क्यों साहब सही

01:02:44.239 --> 01:02:46.719
है ना?

01:02:44.880 --> 01:02:48.960
बिल्कुल लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि किसी

01:02:46.719 --> 01:02:51.199
चीज के पीछे रीज़ आपको नहीं पता तो रीज़

01:02:48.960 --> 01:02:53.280
नहीं है। इसे कहते हैं

01:02:51.199 --> 01:02:55.279
मुझे मुझे नहीं पता। लेकिन मेरी

01:02:53.280 --> 01:02:58.559
जिम्मेदारी नहीं है। वो बिल्कुल सही कहा

01:02:55.280 --> 01:03:01.440
था उसने। बल्टन रसल ने। आपने उसे मजाक में

01:02:58.559 --> 01:03:03.839
टाल दिया कि भाई आप एक दावा कर रहे हैं।

01:03:01.440 --> 01:03:06.400
मैं क्यों कहूं कि ये गलत है दावा। आप

01:03:03.838 --> 01:03:09.358
प्रूफ कीजिए। मेरे पे जिम्मेदारी ही नहीं

01:03:06.400 --> 01:03:10.240
है। मैंने थोड़ी कहा है। आप प्रूफ कीजिए

01:03:09.358 --> 01:03:12.480
कि यह सही है।

01:03:10.239 --> 01:03:13.679
आप आर्गुमेंट ऑफ कंटजेंसी का जवाब सवाल

01:03:12.480 --> 01:03:17.280
पूछना चाहेंगे?

01:03:13.679 --> 01:03:19.199
आप सवाल पूछना चाहेंगे मुफ्ती साहब से?

01:03:17.280 --> 01:03:21.359
क्योंकि ये क्रॉस एग्जामिनेशन का दौर है।

01:03:19.199 --> 01:03:24.000
आप जैसे पहले बोल रहे थे फेथ को लेके कुछ?

01:03:21.358 --> 01:03:26.159
मैं ये पूछना चाहूंगा कि खुदा ने जो भी

01:03:24.000 --> 01:03:28.639
रेवोलेशन किए है एक मजहब के नहीं बहुत से

01:03:26.159 --> 01:03:31.358
मजहबों में किए है अलग-अलग रेवोलशन है।

01:03:28.639 --> 01:03:34.879
कहीं कुछ एक बातें हैं कंट्राडिक्शन भी है

01:03:31.358 --> 01:03:37.838
आपस में कहीं कुछ आप कर सकते हैं कहीं कुछ

01:03:34.880 --> 01:03:42.079
नहीं कर सकते। ऐसा नहीं है कि सबकी कोड ऑफ़

01:03:37.838 --> 01:03:44.798
मोरल एक है। तो

01:03:42.079 --> 01:03:47.839
ये

01:03:44.798 --> 01:03:50.079
किस्सा क्या है? अब आप ये देखिए कि मुझे

01:03:47.838 --> 01:03:51.440
कभी-कभी लगता है कि ये जो फुटबॉल फाइनल

01:03:50.079 --> 01:03:53.519
होता है

01:03:51.440 --> 01:03:56.079
लाखों लोग होते हैं। फिर वो टीवी कवर करती

01:03:53.519 --> 01:04:00.719
करोड़ों लोग। अगर उसमें खुदा की एक घूम

01:03:56.079 --> 01:04:03.280
आवाज आ जाती मैं गॉड हूं। तो सारे लोग अभी

01:04:00.719 --> 01:04:06.239
सुन लेते और टीवी पे भी सुन लेते किस्सा

01:04:03.280 --> 01:04:09.760
खत्म होता। ये इतनी राजदारी क्या है कि

01:04:06.239 --> 01:04:12.078
तुम सामने कुछ तो सबूत दे दो हमें। सॉलिड

01:04:09.760 --> 01:04:14.559
ये कह साहब ये यूनिवर्स कैसे बनेगा? इससे

01:04:12.079 --> 01:04:17.599
मसला क्या हल होगा? मैं पूछूंगा आपसे खुदा

01:04:14.559 --> 01:04:20.000
कैसे बना? क्यों नहीं पूछूंगा? कैसे बना?

01:04:17.599 --> 01:04:22.720
बल्कि वो तो कायनात से कहीं ज्यादा

01:04:20.000 --> 01:04:26.400
इंटेलिजेंट है। कायनात से कहीं ज्यादा जी

01:04:22.719 --> 01:04:30.719
वो हमेशा से सही आप कहेंगे मैं मान लूंगा।

01:04:26.400 --> 01:04:33.920
अच्छा दोयम वो काद मुखल यानी कादरे मुख का

01:04:30.719 --> 01:04:36.078
मतलब ओमनीपोटेंट है। जो चाहे कर सकता है।

01:04:33.920 --> 01:04:40.159
आपको नौकरी दिलवा सकता है। आपकी अच्छी जगह

01:04:36.079 --> 01:04:42.160
शादी करवा सकता है। आपके पड़ोसी का मुकदमा

01:04:40.159 --> 01:04:42.798
हरवा सकता है। आपको जिता सकता है। सब काम

01:04:42.159 --> 01:04:44.000
करता है।

01:04:42.798 --> 01:04:47.440
थोड़ा सा माइक

01:04:44.000 --> 01:04:49.838
वो इस दुनिया को चला कैसे रहा है?

01:04:47.440 --> 01:04:53.760
यह दुनिया कैसे चल रही है? आपको इसमें

01:04:49.838 --> 01:04:56.239
हैरत नहीं होती या कयामत के बाद कभी एक

01:04:53.760 --> 01:04:59.680
जस्टिस होगा जब ये बच्चा मर चुका होगा

01:04:56.239 --> 01:05:01.519
जिसकी धज्जियां उड़ गई बम से इसको इंसाफ

01:04:59.679 --> 01:05:02.078
मिलेगा तब

01:05:01.519 --> 01:05:03.599
अच्छा

01:05:02.079 --> 01:05:05.839
अब जवाब दूं

01:05:03.599 --> 01:05:08.559
मैं इसीलिए आपकी तरफ

01:05:05.838 --> 01:05:10.400
सबसे पहले आपने रेवोलेशन और स्क्रिप्चर की

01:05:08.559 --> 01:05:12.160
बात की इस पे मैं बात कर सकता हूं लेकिन

01:05:10.400 --> 01:05:14.240
आज नहीं करूंगा क्योंकि वक्त कम है कभी और

01:05:12.159 --> 01:05:14.960
इस पे डिस्कस करेंगे मैं तैयार हूं उसप भी

01:05:14.239 --> 01:05:17.598
बात करने के लिए

01:05:14.960 --> 01:05:20.240
ये अभी से राउंड टू की भूमिका तय हो रही

01:05:17.599 --> 01:05:23.119
है डस गॉट एक्सिस्ट राउंड टू

01:05:20.239 --> 01:05:26.479
जीकि आज गॉड के एक्सिस्टेंस पे बात है तो

01:05:23.119 --> 01:05:28.480
मैं उसी के रिलेटेड जो है आपके सवालात को

01:05:26.480 --> 01:05:31.599
एंटरटेन भी करूंगा और मैं भी पूछूंगा।

01:05:28.480 --> 01:05:33.599
आपने कहा कि आपने साबित ही नहीं किया जबकि

01:05:31.599 --> 01:05:34.318
आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी बुनियादी

01:05:33.599 --> 01:05:36.640
आर्गुमेंट है।

01:05:34.318 --> 01:05:39.519
आप मुझे कॉनंटिंजेंसी का मतलब बताइए। आपका

01:05:36.639 --> 01:05:44.078
मतलब क्या है? कंटिंजेंसी? कंटिंजेंसी का

01:05:39.519 --> 01:05:47.440
मतलब यह हुआ के हर वो वजूद जो किसी भी चीज

01:05:44.079 --> 01:05:50.318
का पाबंद है। हर वो वजूद या हर वो चीज जो

01:05:47.440 --> 01:05:53.280
अपने एकिस्टेंस में किसी भी चीज के पाबंद

01:05:50.318 --> 01:05:55.440
है और उससे बाउंड है। उसको उसकी जरूरत है।

01:05:53.280 --> 01:05:57.359
उस पर डिपेंड करती है। तो जाहिर सी बात है

01:05:55.440 --> 01:05:59.920
कि उसका कोई ना कोई कॉज होता है। ये तो

01:05:57.358 --> 01:06:01.519
अक्ल की बात है। ये आप रीजनिंग की बात

01:05:59.920 --> 01:06:04.240
करते हैं। मैं वही कर रहा हूं। दूसरी चीज

01:06:01.519 --> 01:06:07.679
आपने ये बात कही कि

01:06:04.239 --> 01:06:09.519
इतने बिलियन लाइट इयर्स दूर है उसका मेरा

01:06:07.679 --> 01:06:12.000
क्या लेना देना फिर मेरे ख्याल से आपको ये

01:06:09.519 --> 01:06:14.719
नहीं कहना चाहिए आई एम आई थिंक देयर फॉर

01:06:12.000 --> 01:06:17.199
आई एम एन एथिस्ट आपको सोचना चाहिए सिर्फ

01:06:14.719 --> 01:06:20.000
आप एक लिमिटेड दायरे में रहकर नहीं सोचे

01:06:17.199 --> 01:06:21.679
बल्कि बाहर निकल कर सोचें आपने तीसरा सवाल

01:06:20.000 --> 01:06:23.760
किया आपने दो तीन सवाल एक साथ

01:06:21.679 --> 01:06:27.598
ऐसी बातें ना कीजिए कुछों को एतराज हो

01:06:23.760 --> 01:06:32.326
जाएगा आप पे कि आप कुछ भी सोचिए ये इजाजत

01:06:27.599 --> 01:06:32.326
आपको है नहीं मुझे है [हंसी]

01:06:34.889 --> 01:06:39.118
[प्रशंसा]

01:06:35.358 --> 01:06:41.679
जी आप आपने प्रॉब्लम ऑफ इविल के ताल्लुक

01:06:39.119 --> 01:06:44.880
से सवाल किया और बार-बार आप एक लफ्ज रिपीट

01:06:41.679 --> 01:06:48.078
कर रहे हैं के ओमनीपोटेंट गॉड है। ऑल

01:06:44.880 --> 01:06:50.240
पावरफुल गॉड है। यही तो दरअसल समझना है कि

01:06:48.079 --> 01:06:53.119
गॉड का कांसेप्ट क्या है? प्रॉब्लम ऑफ

01:06:50.239 --> 01:06:55.759
इविल जो है प्रॉब्लम ऑफ इविल दर हकीकत दो

01:06:53.119 --> 01:06:57.440
असमशन पर कायम है। अगर आप इन दो असंप्शनंस

01:06:55.760 --> 01:06:59.119
को समझ जाएं तो ये प्रॉब्लम प्रॉब्लम नहीं

01:06:57.440 --> 01:07:01.599
रहेगी। आर्गुमेंट आपको समझ में आ जाएगी कि

01:06:59.119 --> 01:07:05.920
ये कोलैप्स कर जाता है। पॉइंट नंबर वन

01:07:01.599 --> 01:07:08.318
यानी जो आपका सबसे पहला फॉल्स असमशन है कि

01:07:05.920 --> 01:07:10.559
गॉड मर्सफुल है, ओमनीपोटेंट है। दुनिया

01:07:08.318 --> 01:07:12.239
में जुल्म हो रहा है। लेकिन आपको ये समझना

01:07:10.559 --> 01:07:14.559
चाहिए कि हमारे वर्ल्ड व्यू के मुताबिक

01:07:12.239 --> 01:07:17.358
गॉड सिर्फ ओमनीपोटेंट और सिर्फ मर्सफुल

01:07:14.559 --> 01:07:20.000
नहीं है बल्कि वो ऑल वाइज भी है और वो ऑल

01:07:17.358 --> 01:07:22.239
नोइंग भी है। उसके हर काम के पीछे हिकमत

01:07:20.000 --> 01:07:24.239
और विज़डम है। ये कोई जरूरी नहीं है कि वो

01:07:22.239 --> 01:07:26.479
हिकमत और विज़डम आपको समझ में आए या मुझे

01:07:24.239 --> 01:07:28.318
समझ में आए। अगर आप जो समझ रहे हैं उसके

01:07:26.480 --> 01:07:30.880
मुताबिक आप फैसला कर रहे हैं। ये लिमिटेड

01:07:28.318 --> 01:07:33.358
पर्सपेक्टिव से आर्गुमेंट है और इस चीज को

01:07:30.880 --> 01:07:34.960
हम अपनी दुनिया में अपने लाइफ में डेली

01:07:33.358 --> 01:07:37.199
लाइफ में इस प्रिंसिपल को एक्सेप्ट करते

01:07:34.960 --> 01:07:39.199
हैं। हम जब किसी डॉक्टर के पास जाते हैं

01:07:37.199 --> 01:07:42.159
डॉक्टर के पास जाकर वो अगर उसने हमें कोई

01:07:39.199 --> 01:07:44.399
दवाई दी है तो हम ये तो नहीं कहते कि जब

01:07:42.159 --> 01:07:46.558
तक आपके पास जितना नॉलेज और जितना विज़डम

01:07:44.400 --> 01:07:48.559
नहीं है आपने क्यों ये दवाई दी है तब तक

01:07:46.559 --> 01:07:50.798
हम इस चीज को एक्सेप्ट नहीं करेंगे। नहीं

01:07:48.559 --> 01:07:52.720
कहते। हम उसकी अथॉरिटी को तस्लीम करते

01:07:50.798 --> 01:07:55.038
हैं। क्यों? क्योंकि उसकी हम जानते हैं कि

01:07:52.719 --> 01:07:56.798
वो नॉलेजेबल है। वो विज़डम वाला है। हमसे

01:07:55.039 --> 01:07:57.599
ज्यादा नॉलेज और हमसे ज्यादा विज़डम है।

01:07:56.798 --> 01:08:00.400
बताएं सर।

01:07:57.599 --> 01:08:03.920
नहीं डॉक्टर में खुदा में बड़ा डिफरेंस है।

01:08:00.400 --> 01:08:05.760
डॉक्टर पढ़ा लिखा होता है। एक तो मैं उसकी

01:08:03.920 --> 01:08:08.559
बात सुनूंगा।

01:08:05.760 --> 01:08:09.599
दो नहीं कुछ जवाब तो ये भी नहीं है।

01:08:08.559 --> 01:08:11.359
सर प्लीज आप

01:08:09.599 --> 01:08:12.720
अगर सब ऑडियंस से बोलने लगेंगे तो फिर

01:08:11.358 --> 01:08:14.639
मतलब नहीं इस बहस में।

01:08:12.719 --> 01:08:16.158
मतलब आप ये कहें कि क्योंकि आप डॉक्टर पे

01:08:14.639 --> 01:08:16.880
बिलीव करते हैं इसलिए खुदा पे बिलीव

01:08:16.158 --> 01:08:18.399
कीजिए। क्या

01:08:16.880 --> 01:08:22.640
ये मिसाल आपको समझाने के लिए

01:08:18.399 --> 01:08:25.198
आर्गुममेंट है इस पे आपको एतराज नहीं है

01:08:22.640 --> 01:08:28.798
तो

01:08:25.198 --> 01:08:31.919
सिंपल बात ये है कि मैं अगर ये यकीन कर

01:08:28.798 --> 01:08:35.198
लूं कि एक ओमनीपटेंट उसकी मसलहत है ये जो

01:08:31.920 --> 01:08:36.399
बच्चे मर रहे हैं ये मसलहत है उसकी मुझे

01:08:35.198 --> 01:08:38.479
नहीं चाहिए थी मसलहत

01:08:36.399 --> 01:08:40.238
उसकी मसलहत नहीं यही तो समझना है

01:08:38.479 --> 01:08:40.879
मतलब एक्सपीरियंस

01:08:40.238 --> 01:08:43.278
अच्छा

01:08:40.880 --> 01:08:45.838
इस आपने अभी मेरी बात पूरी सुनी नहीं

01:08:43.279 --> 01:08:48.560
मैंने कहा आपका पूरा आर्गुमेंट दो फॉल्स

01:08:45.838 --> 01:08:51.278
असमशन पर है। एक फॉल्स असमशन मैंने बता

01:08:48.560 --> 01:08:53.520
दिया। दूसरा फॉल्स असमशन ये है कि इस

01:08:51.279 --> 01:08:56.239
दुनिया में इविल के होने का कोई गुड रीज़

01:08:53.520 --> 01:08:58.640
नहीं है। जबकि हमारे पास बाज़ रीज़ंस मौजूद

01:08:56.238 --> 01:09:00.479
हैं। हमारे पास बाज़ वजूहात मौजूद हैं। अगर

01:08:58.640 --> 01:09:02.560
इस दुनिया में इविल ना हो तो आप गुड को

01:09:00.479 --> 01:09:04.959
डिफाइन कैसे करेंगे? अगर जुल्म ना हो, आप

01:09:02.560 --> 01:09:08.162
इंसाफ को समझेंगे कैसे? अगर तारीकी ना हो,

01:09:04.960 --> 01:09:08.719
तो आप लाइट को समझेंगे कैसे?

01:09:08.162 --> 01:09:09.440
[प्रशंसा]

01:09:08.719 --> 01:09:11.359
बहुत अच्छे।

01:09:09.439 --> 01:09:14.238
अभी और सुन अभी और बाकी है।

01:09:11.359 --> 01:09:16.640
ये तो बात बहुत पसंद आई साहब मुझे के जब

01:09:14.238 --> 01:09:17.198
तक रेप ना हो तब तक औरतों की इज्जत का

01:09:16.640 --> 01:09:18.719
ख्याल आप

01:09:17.198 --> 01:09:21.439
आपने मेरा जवाब पूरा सुना ही नहीं।

01:09:18.719 --> 01:09:23.520
जब तक के बच्चों का कत्ल ना किया जाए तब

01:09:21.439 --> 01:09:24.639
तक आपको बच्चों की मासूमियत की इज्जत

01:09:23.520 --> 01:09:26.799
आपने पूरा जवाब सुना ही नहीं।

01:09:24.640 --> 01:09:27.039
क्या बात है? क्या आपने नुक्ता निकाला

01:09:26.798 --> 01:09:29.039
हुआ?

01:09:27.039 --> 01:09:30.960
आपने पूरा जवाब सुना ही नहीं। आप सुन ले।

01:09:29.039 --> 01:09:34.158
मेरी बात सुन लें। ये मैंने आपको एक चीज

01:09:30.960 --> 01:09:35.920
बताई। दूसरी चीज इस दुनिया में हम आए हैं

01:09:34.158 --> 01:09:38.158
टेस्ट के लिए। हमारा टेस्ट हो रहा है और

01:09:35.920 --> 01:09:41.600
हर इंसान का अलग-अलग अंदाज में टेस्ट होता

01:09:38.158 --> 01:09:44.798
है और इस दुनिया में अगर इविल मौजूद है तो

01:09:41.600 --> 01:09:47.279
वो इविल जरिया है हमारे अंदर ह्यूमन नोबल

01:09:44.798 --> 01:09:50.719
क्वालिटीज को डेवलप करने का और अलग-अलग

01:09:47.279 --> 01:09:53.199
फील्ड में प्रोग्रेस करने का और अगर हमारे

01:09:50.719 --> 01:09:55.039
अंदर और इस दुनिया में इविल नहीं होता तो

01:09:53.198 --> 01:09:57.359
बताइए टेस्ट का मतलब क्या होता है? अगर

01:09:55.039 --> 01:09:59.119
मैं अपने स्टूडेंट को एमसीक्यूस दूं और

01:09:57.359 --> 01:10:00.799
उसमें सिर्फ राइट आंसर लिख कर दे दूं और

01:09:59.119 --> 01:10:02.880
कहूं तुम्हारा टेस्ट हो गया। ये मीनिंगलेस

01:10:00.800 --> 01:10:05.039
है। इस दुनिया में अगर हम टेस्ट के लिए आए

01:10:02.880 --> 01:10:07.113
हैं तो जाहिर है गुड एंड इविल दोनों मौजूद

01:10:05.039 --> 01:10:08.158
है।

01:10:07.113 --> 01:10:11.119
[प्रशंसा]

01:10:08.158 --> 01:10:13.198
तो अगर गुड एंड इविल दोनों मौजूद है तो ये

01:10:11.119 --> 01:10:14.800
इवल भी खुदा का बनाया हुआ है।

01:10:13.198 --> 01:10:15.839
जी हां खुदा का बनाया हुआ है। लेकिन

01:10:14.800 --> 01:10:16.400
अच्छा चलो अच्छी बात है।

01:10:15.840 --> 01:10:21.440
जी बिल्कुल।

01:10:16.399 --> 01:10:24.479
तो अभी अभी तो ये है कि जो मेजॉरिटी

01:10:21.439 --> 01:10:26.879
है दुनिया में वो इविल है। तो ये खुदा

01:10:24.479 --> 01:10:29.384
एक्चुअली इविल के साइड पे लग रहा है मुझे।

01:10:26.880 --> 01:10:30.079
बिल्कुल मेजॉरिटी में तो वो है।

01:10:29.384 --> 01:10:32.800
[प्रशंसा]

01:10:30.079 --> 01:10:35.359
क्या बात कर रहे हैं भाई आप कोई भी जो

01:10:32.800 --> 01:10:38.320
मुसिफ होगा चाहे आपका अपना घर हो जिसके आप

01:10:35.359 --> 01:10:42.000
सबसे बड़े हैं चाहे आपकी ऑर्गेनाइजेशन हो

01:10:38.319 --> 01:10:44.158
जो आप चलाते हैं वहां पर आप इवल रखेंगे

01:10:42.000 --> 01:10:44.800
साबित करने को कि बाकी लोग शरीफ है

01:10:44.158 --> 01:10:47.198
मेरी बात सुनिए

01:10:44.800 --> 01:10:49.840
क्या ये आर्गुमेंट ही गलत है कि जब तक के

01:10:47.198 --> 01:10:50.799
कोई इवल नहीं होगा तब तक के शरीफ आदमी

01:10:49.840 --> 01:10:53.840
शरीफ नहीं लगेगा

01:10:50.800 --> 01:10:56.079
अगर एग्जामिनर इ गलत ऑप्शन दे रहा है तो

01:10:53.840 --> 01:10:58.400
एग्जामिनर इविल नहीं हो गया जो गलत ऑप्शन

01:10:56.079 --> 01:11:01.039
को सेलेक्ट कर रहा है वो फेल होगा क्रिएटर

01:10:58.399 --> 01:11:01.759
ने इविल को बनाया है लेकिन वो इविल नहीं

01:11:01.039 --> 01:11:05.760
है।

01:11:01.760 --> 01:11:08.320
सुनिए मेरी बात सर लेट मी कंप्लीट सर

01:11:05.760 --> 01:11:11.199
क्रिएटर ने इविल को बनाया है टेस्ट के लिए

01:11:08.319 --> 01:11:13.679
वो इविल नहीं है। इविल वो होगा वो होगा जो

01:11:11.198 --> 01:11:15.759
उसे इख्तियार करेगा। छुरी को बनाने वाला

01:11:13.679 --> 01:11:19.719
गलत नहीं होता है। छुरी का गलत इस्तेमाल

01:11:15.760 --> 01:11:19.719
करने वाला गलत होता है।

01:11:21.198 --> 01:11:26.399
रेप को कैसे गलत इस्तेमाल करते हैं?

01:11:24.079 --> 01:11:28.960
रेप इंसान के फ्री व्हील का नतीजा है। ये

01:11:26.399 --> 01:11:31.359
माइक

01:11:28.960 --> 01:11:33.279
ये रेप कैसे गलत इस्तेमाल होता है? ये

01:11:31.359 --> 01:11:34.719
अब सुन ले। अब सुन ले इस्तेमाल होता है।

01:11:33.279 --> 01:11:36.719
हां मैं बता रहा हूं ना कैसे

01:11:34.719 --> 01:11:39.840
मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं कि जो

01:11:36.719 --> 01:11:42.000
इविल इस दुनिया में मौजूद है। उसके कई

01:11:39.840 --> 01:11:44.480
सारे तरीके हैं। एक तरीका इंसान का अपना

01:11:42.000 --> 01:11:46.158
फ्री विल है। अब अगर कोई रेपिस्ट रेप कर

01:11:44.479 --> 01:11:48.158
रहा है तो इसका गॉड का कसूर नहीं है। वो

01:11:46.158 --> 01:11:50.319
अपने फ्री विल का गलत इस्तेमाल करना कर

01:11:48.158 --> 01:11:51.679
रहा है। उसको सजा मिलनी चाहिए। और उसी के

01:11:50.319 --> 01:11:54.799
लिए जहन्नुम बनाई गई है।

01:11:51.679 --> 01:11:56.800
यह फ्री विल का भी बड़ा चक्कर है। आप जब

01:11:54.800 --> 01:11:59.440
कोई बुरा काम करते हैं या कोई बुराई होती

01:11:56.800 --> 01:12:02.400
है तो यह कहा जाता है कि ये फ्री विल है।

01:11:59.439 --> 01:12:06.000
7 बिलियन फ्री विल्स आर मूविंग ऑन दिस

01:12:02.399 --> 01:12:08.319
प्लनेट। 7 बिलियन फ्री विल। और एक आदमी

01:12:06.000 --> 01:12:10.158
अपनी फ्री विल से मुझे कत्ल कर दे तो मैं

01:12:08.319 --> 01:12:12.000
खुदा की मर्जी से मरा हूं। क्या इसकी फ्री

01:12:10.158 --> 01:12:14.960
विल की वजह से?

01:12:12.000 --> 01:12:16.560
मेरी मौत खुदा के हाथ है या इस फ्री विल

01:12:14.960 --> 01:12:19.198
वाले के हाथ है?

01:12:16.560 --> 01:12:21.440
खुदा ने फ्री विल का निजाम बनाया है और उस

01:12:19.198 --> 01:12:21.839
निजाम का गलत इस्तेमाल करके कोई आपको मार

01:12:21.439 --> 01:12:24.000
रहा है।

01:12:21.840 --> 01:12:25.760
इस्तेमाल करके मेरा कत्ल कर देता है। अब

01:12:24.000 --> 01:12:26.960
मेरी मौत का जिम्मेदार कौन है?

01:12:25.760 --> 01:12:27.840
वो इंसान जिम्मेदार है।

01:12:26.960 --> 01:12:28.880
वो इंसान।

01:12:27.840 --> 01:12:30.960
तो ये कहना कि

01:12:28.880 --> 01:12:33.920
और उसको उसको उसको सजा मिलेगी।

01:12:30.960 --> 01:12:36.719
तो अब आप आगे चलिए कि ये तय करना कि

01:12:33.920 --> 01:12:38.880
अल्लाह ही या खुदा सॉरी अल्लाह नहीं। खुदा

01:12:36.719 --> 01:12:39.679
ही जिंदगी देता है। खुदा ही मौत देता है।

01:12:38.880 --> 01:12:40.640
ये गलत है।

01:12:39.679 --> 01:12:41.359
बिल्कुल गलत नहीं है।

01:12:40.640 --> 01:12:43.679
हां नहीं।

01:12:41.359 --> 01:12:45.198
निजाम उसी ने बनाया फ्री विल का। निजाम

01:12:43.679 --> 01:12:47.440
मौत और हयात का उसी ने बनाया।

01:12:45.198 --> 01:12:50.079
यू आर कंट्राडिक्टिंग योरसेल्फ। अभी आपने

01:12:47.439 --> 01:12:52.879
कहा कि एक आदमी ने फ्री विल से आपको मार

01:12:50.079 --> 01:12:56.238
दिया। इसमें उसे फ्री विल दी गई थी। उसने

01:12:52.880 --> 01:12:58.800
गलत इस्तेमाल किया। 7 बिलियन फ्री विल्स

01:12:56.238 --> 01:13:00.959
आर मूविंग ऑन दिस प्लेनेट। और आप चाह रहे

01:12:58.800 --> 01:13:03.840
हैं कि मैं सिर्फ खुदा का ध्यान करूं। ये

01:13:00.960 --> 01:13:05.840
7 बिलियन फ्री विल्स को मुझे लुक आफ्टर

01:13:03.840 --> 01:13:08.400
करना पड़ेगा कि नहीं? ये तो तबाहियां कर

01:13:05.840 --> 01:13:11.360
रही है और तबाहियां ज्यादा हो रही हैं।

01:13:08.399 --> 01:13:14.000
बिल्कुल। तो अगर आप बताएं आप बताएं अगर

01:13:11.359 --> 01:13:16.399
खुदा नहीं है फॉर एग्जांपल तो आप इविल को

01:13:14.000 --> 01:13:19.439
कैसे डिसाइड करेंगे? यानी हाउ कैन यू

01:13:16.399 --> 01:13:22.319
डिफाइन इविल ऑब्जेक्टिवली विदाउट गॉड?

01:13:19.439 --> 01:13:25.519
इविल को डिफाइन।

01:13:22.319 --> 01:13:28.960
देखिए दुनिया में दो तरह के जानवर है। एक

01:13:25.520 --> 01:13:32.640
जो अकेले रहते हैं जंगल में और एक जो

01:13:28.960 --> 01:13:36.480
ग्रुप्स में रहते हैं। ग्रुप में जो भी

01:13:32.640 --> 01:13:40.000
रहेगा चाहे वो आपका फाउंडेशन हो, चाहे कोई

01:13:36.479 --> 01:13:44.639
क्लब हो, चाहे कोई पिटिकल पार्टी हो, चाहे

01:13:40.000 --> 01:13:45.840
कोई यूनिट हो, उसमें आपको इंटलेक्ट करने

01:13:44.640 --> 01:13:47.360
के रूल बनाने पड़ेंगे।

01:13:45.840 --> 01:13:49.039
यानी लोग तय करेंगे।

01:13:47.359 --> 01:13:50.960
लोग तय करेंगे। अगर लोगों ने यह तय किया

01:13:49.039 --> 01:13:51.439
कि किसी का रेप करना सही है, आप जस्टिफाई

01:13:50.960 --> 01:13:52.239
करेंगे?

01:13:51.439 --> 01:13:53.919
नहीं।

01:13:52.238 --> 01:13:55.759
आपका फाउंडेशन तो यह हो गया ना कि लोग

01:13:53.920 --> 01:13:58.560
इविल डिसाइड करेंगे।

01:13:55.760 --> 01:14:02.719
नहीं नहीं अरे [प्रशंसा]

01:13:58.560 --> 01:14:06.159
दुनिया में ऐसे ग्रुप्स हैं जो रेप को

01:14:02.719 --> 01:14:08.880
जायज मानते हैं सर्टेन हालात में। मैं

01:14:06.158 --> 01:14:11.519
डिटेल में नहीं जानूंगा। आप भी जानते हैं।

01:14:08.880 --> 01:14:13.039
ये जो आईिस वाले थे जिन्होंने क्या किया

01:14:11.520 --> 01:14:14.560
था? तो

01:14:13.039 --> 01:14:16.479
उन्होंने क्या किया? उसका खुदा से कोई

01:14:14.560 --> 01:14:18.560
ताल्लुक नहीं है सर। मैंने सिंपल सवाल

01:14:16.479 --> 01:14:19.439
किया कि इविल को आप डिफाइन करते कैसे हैं?

01:14:18.560 --> 01:14:21.039
आइए वापस आइए।

01:14:19.439 --> 01:14:24.799
जी

01:14:21.039 --> 01:14:27.519
आप साथ में तभी रह सकते हैं जब कुछ आप ऐसे

01:14:24.800 --> 01:14:30.640
उसूल डेवलप करें जिसमें हर एक का बेसिक

01:14:27.520 --> 01:14:34.320
तहफुल हर एक का बेसिक राइट हो और हर एक को

01:14:30.640 --> 01:14:37.520
कोई आराम मिले। यही तरीका है किसी भी

01:14:34.319 --> 01:14:40.399
ऑर्गेनाइजेशन जिसमें एक से ज्यादा लोग हैं

01:14:37.520 --> 01:14:43.040
और वो ऐसे चलती है जिंदगी। उसमें अगर आप

01:14:40.399 --> 01:14:46.879
गड़बड़ करेंगे तो तबाही होगी, नुकसान

01:14:43.039 --> 01:14:49.279
होगा, बर्बादियां आएंगी। और अगर उसमें आप

01:14:46.880 --> 01:14:52.400
घर ले लीजिए ना एक हस्बैंड है, एक वाइफ

01:14:49.279 --> 01:14:55.359
है, बच्चे हैं, वालिदा भी है, दो बहनें भी

01:14:52.399 --> 01:14:58.479
है, एक भाई भी है। अब इसमें कोई निजाम

01:14:55.359 --> 01:15:01.679
आपको चाहिए साथ में रहने का। और एक दूसरे

01:14:58.479 --> 01:15:03.839
पे भरोसा रहे। एक दूसरे के वही ख्वाब हो,

01:15:01.679 --> 01:15:05.920
एक दूसरे की मदद करें। ऐसी जिंदगी

01:15:03.840 --> 01:15:07.760
सर आपकी बात आ गई। आप ये कह रहे हैं कि

01:15:05.920 --> 01:15:09.679
लोग डिसाइड करेंगे क्या सही है क्या गलत

01:15:07.760 --> 01:15:11.679
है। यही है मेजॉरिटी डिसाइड करेगी क्या

01:15:09.679 --> 01:15:14.239
सही है क्या गलत है। अरे भाई बिल्कुल

01:15:11.679 --> 01:15:16.239
मेजॉरिटी अगर ये कहे कि नाज़ जर्मनी के साथ

01:15:14.238 --> 01:15:18.896
जिस तरह मेजॉरिटी थी कि जेनोसाइड करना सही

01:15:16.238 --> 01:15:19.198
है आप जस्टिफाई करेंगे

01:15:18.896 --> 01:15:20.960
[प्रशंसा]

01:15:19.198 --> 01:15:22.319
उस वक्त उस वक्त

01:15:20.960 --> 01:15:25.679
आपका आपका ये

01:15:22.319 --> 01:15:26.158
सिर्फ उसके बाद उस वक्त प्लनेट पे जो लोग

01:15:25.679 --> 01:15:28.800
थे

01:15:26.158 --> 01:15:30.960
उनमें कितने लोग हिट को सही समझते

01:15:28.800 --> 01:15:32.640
अच्छा प्लनेट की मेजॉरिटी तय करी सोसाइटी

01:15:30.960 --> 01:15:33.920
की नहीं प्लनेट की मेजॉरिटी गॉड के

01:15:32.640 --> 01:15:37.079
एक्सिस्टेंस को सही मानती है आप क्यों

01:15:33.920 --> 01:15:37.079
नहीं मानते

01:15:39.039 --> 01:15:43.920
ये

01:15:40.319 --> 01:15:47.119
हेलो हेलो हेलो [प्रशंसा] ये क्रॉस

01:15:43.920 --> 01:15:48.560
क्वेश्चन का राउंड यहां पर समाप्त होता है

01:15:47.119 --> 01:15:50.640
और ये बड़ा अच्छा है कि इस तरह से

01:15:48.560 --> 01:15:52.239
फ्रेगमेंट कर दिया गया है ताकि जो मरकरी

01:15:50.640 --> 01:15:52.960
ऊपर जा रहा है नीचे

01:15:52.238 --> 01:15:56.399
जी

01:15:52.960 --> 01:16:00.239
प्लेनेट की ज्यादातर मेजरिटी

01:15:56.399 --> 01:16:03.119
कुछ दूसरे मजहबों के खुदा को मानती है

01:16:00.238 --> 01:16:05.279
नहीं आप तो मेजॉरिटी की बात कर रहे हैं

01:16:03.119 --> 01:16:07.519
आप ये कह रहे हैं इविल और गुड को डिसाइड

01:16:05.279 --> 01:16:09.519
मेजॉरिटी करेगी मेजॉरिटी जो कर दे वो सही

01:16:07.520 --> 01:16:11.679
हो जाएगा

01:16:09.520 --> 01:16:14.400
इसको जैसा आप ही लोगों ने तय किया है उसी

01:16:11.679 --> 01:16:17.359
फॉर्मेट को फॉलो कर लेते हैं।

01:16:14.399 --> 01:16:20.879
भाई मैंने तो भले लोगों पे ऐतबार किया पर

01:16:17.359 --> 01:16:22.719
तब मॉडरेशन तय किया। जी आपके पास 5 मिनट

01:16:20.880 --> 01:16:24.159
का वक्त है क्लोजिंग आर्गुमेंट है। उसके

01:16:22.719 --> 01:16:25.840
बाद हम ऑडियंस से क्वेश्चन आंसर लेंगे

01:16:24.158 --> 01:16:26.879
जावेद साहब के क्लोजिंग आर्गुमेंट के बाद।

01:16:25.840 --> 01:16:27.920
ओके टाइम स्टार्ट।

01:16:26.880 --> 01:16:31.359
बहुत शुक्रिया।

01:16:27.920 --> 01:16:33.920
हमारा जो टॉपिक है डस गॉड एक्सिस्ट? मैं

01:16:31.359 --> 01:16:36.079
इस पे इतने एकेडमिक तैयारी करके आया था।

01:16:33.920 --> 01:16:38.399
मुझे था कि मैं मैंने सोचा था कि कई सारे

01:16:36.079 --> 01:16:40.719
मैं आर्गुमेंट्स दूंगा। लेकिन वक्त की भी

01:16:38.399 --> 01:16:42.559
किल्लत और जावेद साहब बार-बार इधर-उधर चले

01:16:40.719 --> 01:16:44.640
जा रहे थे तो उसको भी थोड़ा एंटरटेन करना

01:16:42.560 --> 01:16:47.120
पड़ गया। डस गॉड एक्सिस्ट पे मैं एक ही

01:16:44.640 --> 01:16:49.520
आर्गुमेंट दे पाया। आर्गुमेंट्स बहुत हैं

01:16:47.119 --> 01:16:51.679
और डेफिनेटिव आर्गुमेंट्स हैं और मेरे

01:16:49.520 --> 01:16:53.120
आर्गुमेंट को किसी एक राउंड में भी

01:16:51.679 --> 01:16:55.920
इन्होंने एंटरटेन नहीं किया और रेफ्यूट

01:16:53.119 --> 01:16:57.039
नहीं किया है। एक राउंड में भी नहीं। एक

01:16:55.920 --> 01:16:59.520
राउंड में भी नहीं।

01:16:57.039 --> 01:17:00.479
और ना ही अभी अभी आपका क्लोजिंग आर्गुमेंट

01:16:59.520 --> 01:17:02.239
आएगा। बता देना।

01:17:00.479 --> 01:17:03.839
आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी सर।

01:17:02.238 --> 01:17:04.959
अरे मैं आपसे कई बार कह चुका हूं

01:17:03.840 --> 01:17:06.800
कंटिंजेंसी का मतलब

01:17:04.960 --> 01:17:07.359
अब मैं कैसे समझाऊं [हंसी] आपको? आपस में

01:17:06.800 --> 01:17:09.119
हां आप

01:17:07.359 --> 01:17:11.759
और कितने आसानी से समझाऊं मैं मुझे तो

01:17:09.119 --> 01:17:14.319
नहीं समझ में आ रहा है बस आप अपनी

01:17:11.760 --> 01:17:16.880
कंटिजेंसी उर्दू में बोल सकते हैं

01:17:14.319 --> 01:17:17.279
हां आप अपनी बात पूरी कर लें आखरी चार

01:17:16.880 --> 01:17:19.440
मिनट

01:17:17.279 --> 01:17:24.158
दूसरी चीज

01:17:19.439 --> 01:17:26.960
जस्ट अ मिनट प्लीज मैम कैन आई टॉक

01:17:24.158 --> 01:17:29.439
दूसरी चीज ये है कि आपने एक तो इसका जवाब

01:17:26.960 --> 01:17:31.198
नहीं दिया दूसरा आपने गॉड के ना होने पर

01:17:29.439 --> 01:17:33.279
कोई डेफिनेटिव आर्गुमेंट नहीं दिया सिर्फ

01:17:31.198 --> 01:17:35.839
मजहब पे बात कर रहे हैं आप मजहब तो आज

01:17:33.279 --> 01:17:38.079
हमारा टॉपिक ही नहीं था आज तो हमारा टॉपिक

01:17:35.840 --> 01:17:40.000
को आप मजहब से ले लेकर आईएस आईएस तक चले

01:17:38.079 --> 01:17:42.319
गए। भाई हमारा क्या ताल्लुक है उससे? वी

01:17:40.000 --> 01:17:44.560
कंडेम देम। और उसका गॉड से क्या ताल्लुक

01:17:42.319 --> 01:17:46.479
है? अगर कोई गलत काम कर रहा है। किसी ने

01:17:44.560 --> 01:17:49.199
किसी को कत्ल किया, किसी ने किसी का रेप

01:17:46.479 --> 01:17:52.879
किया उसको सजा मिलनी चाहिए। और आपके पास

01:17:49.198 --> 01:17:56.079
कोई भी कोई भी रैशन स्ट्रांग फाउंडेशन ऑफ

01:17:52.880 --> 01:17:58.239
मोरालिटी नहीं है। आपने कहा कि मेजॉरिटी

01:17:56.079 --> 01:18:00.079
तय करेगी सोसाइटी की वो सही होगा। मैंने

01:17:58.238 --> 01:18:02.559
कहा हिटलर को फिर आप सही कहेंगे। नहीं

01:18:00.079 --> 01:18:04.800
नहीं नहीं। प्लेनेट की सोसाइट की मेजॉरिटी

01:18:02.560 --> 01:18:06.159
तय करेगी। तो प्लनेट की मेजॉरिटी गॉड के

01:18:04.800 --> 01:18:08.560
एक्सिस्टेंस को मानती है। आप कह रहे हैं

01:18:06.158 --> 01:18:10.879
ये रिलीजियस है। तो यानी आपके पास कोई

01:18:08.560 --> 01:18:13.199
स्ट्रांग फाउंडेशन नहीं है ऑब्जेक्टिव

01:18:10.880 --> 01:18:16.239
मोरालिटी का। ऑब्जेक्टिव मोरालिटी का अगर

01:18:13.198 --> 01:18:21.839
कोई फाउंडेशन है तो वो सिर्फ गॉड है। गॉड

01:18:16.238 --> 01:18:24.559
है। गॉड है। जी ये मुफ्ती शमालय नदवी साहब

01:18:21.840 --> 01:18:26.480
का क्लोजिंग आर्गुमेंट था। अब हमारे पास

01:18:24.560 --> 01:18:28.480
जी मैं

01:18:26.479 --> 01:18:31.599
जी [हंसी]

01:18:28.479 --> 01:18:33.759
ये बड़ा अच्छा है कि दोनों लोगों को

01:18:31.600 --> 01:18:36.400
मॉडरेटर से शिकायत भी और बोल रहे हैं भाई

01:18:33.760 --> 01:18:37.199
हमारी शाबाशी भी तो करते चलो

01:18:36.399 --> 01:18:39.679
अब मेरी बात

01:18:37.198 --> 01:18:41.759
जी आपके पास जावेद अख्तर साहब पांच मिनट

01:18:39.679 --> 01:18:42.800
का वक्त है ये आपका क्लोजिंग आर्गुमेंट है

01:18:41.760 --> 01:18:44.880
टाइम रिसेट कर दें

01:18:42.800 --> 01:18:47.360
जी

01:18:44.880 --> 01:18:49.440
देखिए बहुत सारी बातें हैं। गॉड का

01:18:47.359 --> 01:18:51.839
डेफिनेशन दुनिया के किसी भी रिलजन में है

01:18:49.439 --> 01:18:55.359
कि वो भी पोटेंट है। वो भी प्रेजेंट है।

01:18:51.840 --> 01:18:58.719
ही इज़ जस्ट, ही इज़ काइंड, ही लव्स यू एंड

01:18:55.359 --> 01:19:01.198
सो ऑन। मैं जब दुनिया देखता हूं तो मुझे

01:18:58.719 --> 01:19:04.719
कोई ऐसा सुप्रीम पावर यहां दिखाई नहीं

01:19:01.198 --> 01:19:07.279
देती है जो इंसान की बेहबूती के लिए कुछ

01:19:04.719 --> 01:19:09.359
कर रही हो, कमजोर को बचा रही हो, मदद कर

01:19:07.279 --> 01:19:12.800
रही हो, जालिम को पीछे हटा रही हो। मैं

01:19:09.359 --> 01:19:16.238
नहीं देखा। तारीख में नहीं। एक तो अगर है

01:19:12.800 --> 01:19:20.480
और ये देख रहा है तमाशा तो उसका होना ना

01:19:16.238 --> 01:19:24.000
होना बराबर है। दो ये कि

01:19:20.479 --> 01:19:26.718
ये जो है जब आप ये कहते हैं कि कायनात

01:19:24.000 --> 01:19:29.760
जिसकी कंटिंजेंसी है मैं देखिए लफज़

01:19:26.719 --> 01:19:33.039
इस्तेमाल किया मैंने तो ये कैसे हो सकती

01:19:29.760 --> 01:19:35.039
है बात और फौरन आप सरेंडर कर देते हैं कि

01:19:33.039 --> 01:19:37.279
जाहिर है कि इसका बनाने वाला तो इतने

01:19:35.039 --> 01:19:40.000
10,000 गुना ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड होगा।

01:19:37.279 --> 01:19:42.800
उस पर आपके होने पर कोई एतराज नहीं है।

01:19:40.000 --> 01:19:45.439
उसे वो टाइमलेस है। वो पहले से था। टाइम

01:19:42.800 --> 01:19:48.159
तो बहुत बाद में आया। ये सब आप मानने को

01:19:45.439 --> 01:19:50.960
तैयार है। जिसका आपके पास कोई सबूत नहीं।

01:19:48.158 --> 01:19:54.079
आपके पास कोई रीज़ नहीं है। आपकी तारीफ

01:19:50.960 --> 01:19:56.960
क्या है मजहबों की? बिलीफ की जो खुदा का

01:19:54.079 --> 01:19:59.359
बिलीफ है। ये कास्टेंटली गलत साबित होता

01:19:56.960 --> 01:20:02.158
रहा है। मतलब आप कहे कि एस्टोटिस के जमाने

01:19:59.359 --> 01:20:06.000
में तो सब जाहिल थे। वो भी इतने ही यकीन

01:20:02.158 --> 01:20:10.158
से खुदा पे यकीन रखते थे जो अब नहीं रहा।

01:20:06.000 --> 01:20:12.880
यह भी नहीं रहेगा। आप लिख लीजिए और इसके

01:20:10.158 --> 01:20:16.079
आसार आपको दुनिया में दिखाई देना शुरू हो

01:20:12.880 --> 01:20:19.199
चुके हैं। ये बहस क्या आज से 100 साल पहले

01:20:16.079 --> 01:20:23.479
इस तरह हो सकती थी? यहां तक तो आपको हम ले

01:20:19.198 --> 01:20:23.479
आए हैं। तो

01:20:24.238 --> 01:20:28.559
सर सर [प्रशंसा]

01:20:26.158 --> 01:20:30.319
अरे इनको मदद की जरूरत नहीं। भाई ये सेल्फ

01:20:28.560 --> 01:20:31.280
सफिशिएंट आदमी है। आप क्यों इनकी मदद कर

01:20:30.319 --> 01:20:33.439
रहे हैं?

01:20:31.279 --> 01:20:37.119
सर सर सर [हंसी] सर प्लीज प्लीज

01:20:33.439 --> 01:20:39.919
तो ये जो है तमाम बातें अपनी जगह है ये एक

01:20:37.119 --> 01:20:42.158
पैकेज है आप अकेले कोई आदमी ऐसा नहीं है

01:20:39.920 --> 01:20:45.440
जो सिर्फ गॉड को मानता हो उसके साथ बहुत

01:20:42.158 --> 01:20:49.759
पैराफनेलिया आता है अलग-अलग पैराफनेलिया

01:20:45.439 --> 01:20:52.960
आते हैं दे आर ओनली दे हैव ऑलवेज क्रिएटेड

01:20:49.760 --> 01:20:55.679
इन द सोसाइटी मैं तो आपको सीधा ऑफर देता

01:20:52.960 --> 01:20:59.679
हूं कि दुनिया में 10 इंपॉर्टेंट बिलीव

01:20:55.679 --> 01:21:02.480
दैट आप एक मानते हैं नौ नहीं मानते नौ में

01:20:59.679 --> 01:21:05.119
आप एक चीज है नौ को आप बिल्कुल रीज़नेबली

01:21:02.479 --> 01:21:09.279
मेरी तरह देखते हैं

01:21:05.119 --> 01:21:12.238
तो 90 मजहबी आदमी भी 90स है वो दूसरे खुदा

01:21:09.279 --> 01:21:15.679
नहीं मानता एक खुदा मानता है अपना वाला

01:21:12.238 --> 01:21:18.238
बाकियों को कहता है गलत है

01:21:15.679 --> 01:21:20.560
अगर आप मानना ही बंद कर दे तो आपका 10%

01:21:18.238 --> 01:21:22.959
चांस है कि आप सही है और 90% चांस है कि

01:21:20.560 --> 01:21:26.640
आप गलत है। मेरा मशवरा है आप मानना छोड़

01:21:22.960 --> 01:21:30.480
दिए तो 50% चांस होगा कि आप सही है और 50%

01:21:26.640 --> 01:21:33.480
चांस होगा। 40% आप गेन करेंगे बाय बिकम एन

01:21:30.479 --> 01:21:33.479
एथ।

01:21:36.238 --> 01:21:42.399
ये एक फसूदा ख्याल है। ये खत्म हो रहा है।

01:21:39.760 --> 01:21:45.679
हो सकता है मेरी जिंदगी में ना हो। लेकिन

01:21:42.399 --> 01:21:48.960
ये हो जाएगा। जो बातें ये इनको आप

01:21:45.679 --> 01:21:51.119
मेटाफिजिकल ये वो ऐसे रिस्पेक्टेबल टर्म

01:21:48.960 --> 01:21:53.520
दे दिए। ये तो उन लोग के हैं जिन्हें ना

01:21:51.119 --> 01:21:57.119
फिजिक्स मालूम थी ना मेटा मालूम था। ये

01:21:53.520 --> 01:22:00.239
उन्होंने आपको दिए हैं।

01:21:57.119 --> 01:22:03.119
जी बहुत शुक्रिया आप दोनों लोगों का और अब

01:22:00.238 --> 01:22:06.000
इस बातचीत का आखिरी राउंड शुरू होगा डस

01:22:03.119 --> 01:22:08.800
गॉड एक्सिस्ट की ये बहस मुफ्ती शमाइल नदवी

01:22:06.000 --> 01:22:11.279
और जावेद अख्तर साहब के बीच आप लोग अपने

01:22:08.800 --> 01:22:14.159
अपने हाथ ऊपर करेंगे मैं यहां से तय

01:22:11.279 --> 01:22:16.479
करूंगा और माइक हमारे पास है क्या एक ही

01:22:14.158 --> 01:22:20.158
माइक है ऑडियंस के लिए दो माइक है एक इस

01:22:16.479 --> 01:22:23.119
तरफ एक इस तरफ ठीक है तो जी सबसे पहले

01:22:20.158 --> 01:22:25.920
हमारी सहयोगी है मारिया मारिया शकी जी

01:22:23.119 --> 01:22:28.559
पूछिए सवाल थोड़ा सा रुकेंगे ताकि कैमरे

01:22:25.920 --> 01:22:30.239
फ्रेम आप पर आ जाए। आपकी तो प्रैक्टिस है

01:22:28.560 --> 01:22:34.080
टीवी की। जी

01:22:30.238 --> 01:22:36.158
नजवी साहब मैं खुदा को मानती हूं। पहले

01:22:34.079 --> 01:22:39.279
मैं इसी प्रमाइस से शुरू कर रही हूं और ये

01:22:36.158 --> 01:22:41.920
बता रही हूं आपको। मैं मानती हूं। लेकिन

01:22:39.279 --> 01:22:45.039
कुछ कुछ सवाल है जो जावेद साहब ने उठाया।

01:22:41.920 --> 01:22:50.239
उसका जवाब आपको देना चाहिए। पहला सवाल ये

01:22:45.039 --> 01:22:54.319
कि गजा में सालों से छोटे बच्चे मर रहे

01:22:50.238 --> 01:22:57.198
हैं वो उनको अगर खुदा मर्सफुल है हम मानते

01:22:54.319 --> 01:23:00.238
हैं कि अल्लाह ताला में बहुत ताकत है तो

01:22:57.198 --> 01:23:03.439
वो बच्चे क्यों मर रहे हैं? दूसरी बात यह

01:23:00.238 --> 01:23:06.319
कि अगर कंटिंजेंसी की जो आप बात करते हैं

01:23:03.439 --> 01:23:08.799
पूरे मुस्लिम मुालिक

01:23:06.319 --> 01:23:11.840
मिलकर के भी उन गजा के बच्चों को क्यों

01:23:08.800 --> 01:23:14.560
नहीं बचा पा रहे हैं? क्योंकि अगर वो

01:23:11.840 --> 01:23:16.800
चाहते क्योंकि अल्लाह ताला उन पर हुकूमत

01:23:14.560 --> 01:23:17.840
करते हैं। सब पर हुकूमत करते हैं तो वो

01:23:16.800 --> 01:23:18.480
उनको क्यों नहीं बचा?

01:23:17.840 --> 01:23:20.960
जी थैंक यू।

01:23:18.479 --> 01:23:22.799
थैंक यू वेरी मच। बहुत अच्छा किया। आपने

01:23:20.960 --> 01:23:24.480
इस चीज को जिक्र कर दिया। मैं इसको और

01:23:22.800 --> 01:23:25.679
अच्छे से एक्सप्लेन करने की कोशिश करता

01:23:24.479 --> 01:23:28.158
हूं।

01:23:25.679 --> 01:23:30.480
देखें जहां तक आपने कहा कि गजा के बच्चों

01:23:28.158 --> 01:23:32.879
को मारा जा रहा है। देखिए दो वर्ल्ड व्यू

01:23:30.479 --> 01:23:35.519
है। एक एथिस्टिक वर्ल्ड व्यू एक थिस्टिक

01:23:32.880 --> 01:23:37.760
वर्ल्ड व्यू है। बच्चे मर रहे हैं दोनों

01:23:35.520 --> 01:23:39.840
वर्ल्ड व्यू में है। लेकिन हमारा वर्ल्ड

01:23:37.760 --> 01:23:41.920
व्यू कह रहा है कि रिकंपेंस है। ये कह रहे

01:23:39.840 --> 01:23:44.159
हैं कि उनका मर उनका मरना बेकार जाने वाला

01:23:41.920 --> 01:23:46.480
है। कोई उसका रिकंपैेंस नहीं है। क्योंकि

01:23:44.158 --> 01:23:48.799
इनके यहां आखिरत और अल्लाह का कोई तसवुर

01:23:46.479 --> 01:23:51.759
या गॉड का कोई तसवुर नहीं है। आपने ये

01:23:48.800 --> 01:23:54.719
सवाल किया कि गॉड मर्सफुल है। क्यों नहीं

01:23:51.760 --> 01:23:57.199
रोकता? ये मैंने बताया कि ये मिसकंसेप्शन

01:23:54.719 --> 01:23:59.439
है लोगों के दरमियान कि गॉड को सिर्फ

01:23:57.198 --> 01:24:01.678
मर्सफुल और ओमनीपोटेंट समझते हैं। गॉड के

01:23:59.439 --> 01:24:03.759
सिर्फ यही दो एट्रिब्यूट्स नहीं है। गॉड

01:24:01.679 --> 01:24:08.158
के कई सारे एट्रिब्यूट्स हैं। उनमें से अल

01:24:03.760 --> 01:24:11.039
हकीम भी है। उनमें से सॉरी ऑल ऑल ऑल वाइज

01:24:08.158 --> 01:24:14.000
भी है। ऑल नोइंग भी है। लिहाजा अगर इस

01:24:11.039 --> 01:24:16.000
दुनिया में किसी को तकलीफ आ रही है और गॉड

01:24:14.000 --> 01:24:18.158
उसको नहीं रोक रहा है। वो इसलिए नहीं रोक

01:24:16.000 --> 01:24:20.399
रहा है क्योंकि इंसानों को फ्री विल दिया

01:24:18.158 --> 01:24:22.879
गया है। ठीक इसी सुनिए सुनिए। ठीक इसी

01:24:20.399 --> 01:24:24.638
तरीके से अगर एक डॉक्टर किसी छोटे बच्चे

01:24:22.880 --> 01:24:26.719
को इंजेक्शन लगा रहा है उसे तकलीफ पहुंच

01:24:24.639 --> 01:24:29.119
रही है। उसके लिमिटेड पर्सपेक्टिव के

01:24:26.719 --> 01:24:32.719
ऐतबार से ये गलत हो रहा है और डॉक्टर बुरा

01:24:29.119 --> 01:24:34.880
है। लेकिन जब आप ब्रॉडर पिक्चर को देखेंगी

01:24:32.719 --> 01:24:36.960
आपके और हमारे पास सिर्फ एक पिक्सल है।

01:24:34.880 --> 01:24:39.760
हमें इतना नजर आ रहा है कि गज्जा में कत्ल

01:24:36.960 --> 01:24:42.000
हो रहा है। लेकिन इसके पीछे कितना रिकमेंस

01:24:39.760 --> 01:24:44.639
उनको मिलने वाला है। पूरा पिक्चर गॉड के

01:24:42.000 --> 01:24:46.319
पास है। तो एक पिक्सल से आप पूरे पिक्चर

01:24:44.639 --> 01:24:48.560
को कभी भी जज नहीं कर सकती।

01:24:46.319 --> 01:24:51.198
आप आप इसमें कुछ जोड़ना चाहेंगे? आपको कुछ

01:24:48.560 --> 01:24:51.199
बोलना है इसमें?

01:24:51.359 --> 01:24:55.599
भाई आपने बहुत अच्छा जस्टिफिकेशन दिया या

01:24:53.920 --> 01:24:57.440
आप वो जो वहां के प्राइम मिनिस्टर है

01:24:55.600 --> 01:24:58.000
इजराइल के उन्हें भेजिए। वो बहुत खुश

01:24:57.439 --> 01:25:00.238
होंगे।

01:24:58.000 --> 01:25:02.800
आप जस्टिफिकेशन दे देना कि अगर गॉड नहीं

01:25:00.238 --> 01:25:05.198
है तो बच्चे क्यों मर रहे हैं? आप बताएं।

01:25:02.800 --> 01:25:07.039
वो ये सवाल पूछ रहे हैं कि अगर आप ईश्वर

01:25:05.198 --> 01:25:11.519
का अस्तित्व नहीं मानते हैं तो उन बच्चों

01:25:07.039 --> 01:25:14.399
की मौत को आप कैसे इंटरप्रेट करते हैं?

01:25:11.520 --> 01:25:17.280
भाई ये दुनिया जो है जो ताकतवर लोग होते

01:25:14.399 --> 01:25:19.279
हैं वो एक नाइंसाफी करते हैं।

01:25:17.279 --> 01:25:20.719
तो ये अच्छा काम है। आपके नजदीक तो नेचर

01:25:19.279 --> 01:25:23.039
नाइंसाफी पे मबनी है।

01:25:20.719 --> 01:25:23.920
अरे मेरे भाई आप नेचर की कहां बात कर तो

01:25:23.039 --> 01:25:25.679
इंसान की बात

01:25:23.920 --> 01:25:26.800
तो फिर जब मैं इंसान की बात कर रहा था आप

01:25:25.679 --> 01:25:29.039
नेचर की बात करने लग गए।

01:25:26.800 --> 01:25:31.279
क्रॉस एग्जामिनेशन हां अगर मुझे बोलने

01:25:29.039 --> 01:25:32.960
नहीं देंगे तो अलग बात है। आप बोलिए मैं

01:25:31.279 --> 01:25:35.519
मुझे कोई

01:25:32.960 --> 01:25:37.119
नहीं ये क्रॉस एग्जामिनेशन

01:25:35.520 --> 01:25:38.320
मुझे बोल तो लेने दीजिए।

01:25:37.119 --> 01:25:42.238
ठीक है बात

01:25:38.319 --> 01:25:44.719
बात ये है के ह्यूमन सोसाइटी तभी साथ में

01:25:42.238 --> 01:25:47.279
रह सकती है जब वो मोहब्बत से एकता से एक

01:25:44.719 --> 01:25:49.119
दूसरे के एतराम करके रहे। इसके अलावा

01:25:47.279 --> 01:25:51.920
पॉसिबल नहीं है। अकेले तो इंसान रह ही

01:25:49.119 --> 01:25:55.198
नहीं सकता। वहां पर कुछ लोग हैं जो फाउल

01:25:51.920 --> 01:25:58.000
करते हैं। वो फाउल हमेशा से तारीख में

01:25:55.198 --> 01:26:00.399
होता आया है। आज ये हो रहा है जो हो रहा

01:25:58.000 --> 01:26:03.279
है बहुत बुरा हो रहा है। बहुत जालिमाना

01:26:00.399 --> 01:26:06.638
है। बहुत जाबराना है। उसको आप कहे कि ये

01:26:03.279 --> 01:26:09.119
बच्चों को कंपनसेशन मिल जाएगा या इसकी

01:26:06.639 --> 01:26:11.279
इंजेक्शन है। इंजेक्शन तो हेल्थ के लिए

01:26:09.119 --> 01:26:13.198
दिया जाता है। आप ये कह रहे हैं कि ये

01:26:11.279 --> 01:26:14.880
बच्चों की जो धज्जियां उड़ रही है ये

01:26:13.198 --> 01:26:17.279
इंजेक्शन है।

01:26:14.880 --> 01:26:20.159
ये टेस्ट है। यह टेस्ट है और उस टेस्ट में

01:26:17.279 --> 01:26:21.198
उनको उनको ऐसा रिकफेंस मिलेगा जो आपके

01:26:20.158 --> 01:26:23.679
तसवुर के बाहर है।

01:26:21.198 --> 01:26:24.799
ये आप तीन बरस के बच्चे को बारूद से उड़ा

01:26:23.679 --> 01:26:25.279
के टेस्ट ले रहे हैं।

01:26:24.800 --> 01:26:26.960
वाह!

01:26:25.279 --> 01:26:29.439
वो नहीं ले रहा है। खुदा नहीं उड़ा रहा है।

01:26:26.960 --> 01:26:32.000
इजराइल उड़ा रहा है। तो उसको उसको

01:26:29.439 --> 01:26:34.238
अगला सवाल लेते हैं। अगला सवाल लेते हैं

01:26:32.000 --> 01:26:36.880
प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल।

01:26:34.238 --> 01:26:37.359
मुफ्ती साहब एक निवेदन आपसे है कि कम से

01:26:36.880 --> 01:26:38.159
कम

01:26:37.359 --> 01:26:40.639
थोड़ा सा माइक क्लोज।

01:26:38.158 --> 01:26:42.479
एक रिलीजियस और फिलोसफिकल

01:26:40.639 --> 01:26:45.840
कर रहे कर रहे हैं। करम प्लीज

01:26:42.479 --> 01:26:48.559
एक रिलीजियस और फिलोसफिकल ट्रेडिशन है।

01:26:45.840 --> 01:26:52.880
जो ब्रह्मांड को यानी यूनिवर्स को ही

01:26:48.560 --> 01:26:56.080
अंतिम मानती है। सर्वम खल इदम ब्रह्मम।

01:26:52.880 --> 01:26:59.679
दिस इज छंदोग उपनिषद एंड इट कंप्लीटली

01:26:56.079 --> 01:27:02.800
रूल्स आउट द एकिस्टेंस और नेसेसिटी आपके

01:26:59.679 --> 01:27:06.239
शब्दों में नेसेसिटी ऑफ़ अ क्रिएटर। द

01:27:02.800 --> 01:27:09.039
क्रिएशन इटसेल्फ इज द क्रिएटर। तो एक मिनट

01:27:06.238 --> 01:27:11.359
प्लीज। दूसरा जो सवाल आपने अभी जो आप

01:27:09.039 --> 01:27:16.079
बार-बार कह रहे हैं कि भगवान विद्वान भी

01:27:11.359 --> 01:27:18.158
है, वाइज सब जानने वाला। तो अगर विडम में

01:27:16.079 --> 01:27:21.198
दुनिया भर के पापों और अत्याचारों को

01:27:18.158 --> 01:27:23.279
बर्दाश्त करना शामिल है तो फिर इसका मतलब

01:27:21.198 --> 01:27:25.678
ये हुआ कि अगर मैं फ्री विल से उसको अपोज

01:27:23.279 --> 01:27:28.000
करता हूं तो ईश्वर की विज़डम और मेरी फ्री

01:27:25.679 --> 01:27:30.480
विल में कंट्राडिक्शन है। बिकॉज़ व्हेन आई

01:27:28.000 --> 01:27:33.600
एम अपोजिंग व्हाटएवर हैपनिंग इन गाजा देन

01:27:30.479 --> 01:27:35.519
आई एम अपोजिंग द गॉड्स विल और गॉड्स विज़डम

01:27:33.600 --> 01:27:38.960
जवाब ले क्योंकि तो गॉड की विज़डम एक मिनट

01:27:35.520 --> 01:27:40.880
सॉरी प्लीज सर [हंसी] ये एक एक जुमला गॉड

01:27:38.960 --> 01:27:43.119
की विज़डम है कि गाजा में जो कुछ हो रहा है

01:27:40.880 --> 01:27:45.760
वो हो रहा है। मैं उसका अपोज कर रहा हूं

01:27:43.119 --> 01:27:47.519
तो मैं गॉड की विडम के खिलाफ जा रहा हूं।

01:27:45.760 --> 01:27:50.000
एक सवाल दूसरा यह

01:27:47.520 --> 01:27:50.400
नहीं नहीं आपने दो ऑलरेडी

01:27:50.000 --> 01:27:52.238
सर

01:27:50.399 --> 01:27:54.638
आप और सवाल कर लें लेकिन मुझे दो जवाब

01:27:52.238 --> 01:27:57.439
देने पहले आपने ये कहा सुनिए मेरी बात

01:27:54.639 --> 01:27:58.719
सुनिए के मुताबिक थोड़ा ठीक हो रहा है ना

01:27:57.439 --> 01:28:00.319
नहीं नहीं हो रहा है ठीक नहीं हो रहा है

01:27:58.719 --> 01:28:01.920
मैं बता रहा हूं क्या हो रहा है आप तशरीफ

01:28:00.319 --> 01:28:02.639
रखिए मैं बता रहा हूं क्या हो रहा है लेट

01:28:01.920 --> 01:28:05.520
मी कंप्लीट प्लीज

01:28:02.639 --> 01:28:09.119
एक सेकंड गाइस एक सेकंड ये देखिए ऐसा है

01:28:05.520 --> 01:28:11.520
कि ये सब बड़ा आपस में विचार विमर्श के

01:28:09.119 --> 01:28:15.519
बाद ये तय हुआ था कि कुछ नियम बना लिए

01:28:11.520 --> 01:28:18.239
जाएं ताकि एक टाइम बाउंड बातचीत चले और

01:28:15.520 --> 01:28:20.000
भाई साहब आप बड़ा जरूरी काम कर रहे हैं

01:28:18.238 --> 01:28:22.399
लेकिन कैमरे के फ्रेम में आके उस काम को

01:28:20.000 --> 01:28:24.238
गड़बड़ कर दे रहे हैं। ठीक है गुरु अब

01:28:22.399 --> 01:28:26.319
मेरे को कहीं का गुस्सा कहीं निकालना था।

01:28:24.238 --> 01:28:28.959
सॉरी [हंसी]

01:28:26.319 --> 01:28:31.119
नहीं कोई गुस्सा नहीं है। जी तो प्रोफेसर

01:28:28.960 --> 01:28:33.679
ने सवाल पूछे आप उनके जवाब दें। और थोड़ा

01:28:31.119 --> 01:28:37.279
ये सब लोग थोड़ा ख्याल रखें। भाई सवाल

01:28:33.679 --> 01:28:39.279
संक्षिप्त रखें। आपने दो सवाल किए। सबसे

01:28:37.279 --> 01:28:42.000
पहला ये कहा कि हमारे पास ये कांसेप्ट है

01:28:39.279 --> 01:28:44.800
कि ये यूनिवर्स खुद नेसेसरी बीइंग है।

01:28:42.000 --> 01:28:48.079
क्रिएशन इटसेल्फ इज द क्रिएटर।

01:28:44.800 --> 01:28:49.679
हाउ इररेशनल इज दिस? कि मैं एक्सिस्ट

01:28:48.079 --> 01:28:51.198
करूंगा बाद में लेकिन अभी एक्सिस्ट कर भी

01:28:49.679 --> 01:28:52.800
रहा हूं। यानी एक ही टाइम में एक्सिस्ट भी

01:28:51.198 --> 01:28:56.638
कर रहे हैं, नहीं भी कर रहे हैं। दिस इज

01:28:52.800 --> 01:28:59.440
नॉट ट्रू। दूसरी चीज आपने कहा के अगर

01:28:56.639 --> 01:29:04.600
इजराइल में सॉरी माफ कीजिएगा इजराइल डजंट

01:28:59.439 --> 01:29:04.599
एक्सिस्ट। ऑक्युपाइड पैलेस्टाइन में अगर

01:29:06.800 --> 01:29:11.920
अगर ऑक्युपाइड पैलेस्टाइन में बच्चों को

01:29:09.119 --> 01:29:14.399
मारा जा रहा है फ्री विल की वजह से और गॉड

01:29:11.920 --> 01:29:16.639
नहीं रोक रहा ये कंट्राडिक्शन है ये बताइए

01:29:14.399 --> 01:29:19.359
कि एक एग्जाम में एक बच्चा गलत आंसर लिख

01:29:16.639 --> 01:29:21.600
रहा है सुनिए एग्जामिनर चाहे तो रोक रोक

01:29:19.359 --> 01:29:23.519
सकता है| क्यों नहीं रोक रहा है?

01:29:21.600 --> 01:29:25.600
ये कंट्राडिक्शन है या कंट्राडिक्शन नहीं

01:29:23.520 --> 01:29:29.360
है?

01:29:25.600 --> 01:29:32.639
सर माइक नहीं सर ये आपस में [हंसी]

01:29:29.359 --> 01:29:33.119
ये क्या आपका सवाल माइक माइक माइक माइक

01:29:32.639 --> 01:29:35.679
दीजिए

01:29:33.119 --> 01:29:37.760
फ्री विल दिया गया है टेस्ट के लिए

01:29:35.679 --> 01:29:39.840
अकाउंटेबिलिटी के लिए अगर फ्री विल नहीं

01:29:37.760 --> 01:29:41.840
होता तो आप कहते हमें रोबोट बना दिया गया

01:29:39.840 --> 01:29:45.039
नॉट रिप्रेजेंट माय पोजीशन आपकी जो भी

01:29:41.840 --> 01:29:47.039
पोजीशन मैं अपनी फ्री विल के नाते अपने

01:29:45.039 --> 01:29:48.479
ह्यूमन विज़डम के नाते गाजा में हो रही

01:29:47.039 --> 01:29:49.279
अत्याचार का विरोध करता हूं

01:29:48.479 --> 01:29:50.959
बिल्कुल करना चाहिए

01:29:49.279 --> 01:29:51.439
आपके हिसाब से मैं गॉड की विज़डम का विरोध

01:29:50.960 --> 01:29:51.920
कर रहा हूं

01:29:51.439 --> 01:29:52.879
बिल्कुल नहीं

01:29:51.920 --> 01:29:55.679
समाज हो रहा है गॉड

01:29:52.880 --> 01:29:58.960
बिल्कुल भी नहीं बिल्कुल भी नहीं। उसका

01:29:55.679 --> 01:30:01.119
वहां पर गाजा में कत्ल होना यह इंसानों के

01:29:58.960 --> 01:30:03.679
गलत इस्तेमाल का नतीजा है। फ्री विल के

01:30:01.119 --> 01:30:05.920
इस्तेमाल का नतीजा है। गॉड इसको गॉड इसका

01:30:03.679 --> 01:30:07.520
हुक्म नहीं देता। उससे रोकता है। यही तो

01:30:05.920 --> 01:30:09.359
मसला है ना आपके लिए कांसेप्ट क्लियर है।

01:30:07.520 --> 01:30:11.199
नहीं नहीं भाई आपने तो बताया था इंजेक्शन

01:30:09.359 --> 01:30:12.079
लगाने से बच्चे को तकलीफ होती है। ये

01:30:11.198 --> 01:30:14.079
इंजेक्शन लगा

01:30:12.079 --> 01:30:16.319
सर आप ऐसे रेटोरिक स्टेटमेंट दे तब तो कोई

01:30:14.079 --> 01:30:18.158
मसला नहीं समझते रहेंगे। दिस इज अ रेटोरिक

01:30:16.319 --> 01:30:20.319
स्टेटमेंट। दिस इज नॉट अ लॉजिकल आर्गुमेंट

01:30:18.158 --> 01:30:22.238
सर। आई एम सॉरी। आई एम सॉरी। सर आखरी 30

01:30:20.319 --> 01:30:24.079
मिनट बड़े मुश्किल होने वाले हैं। जी

01:30:22.238 --> 01:30:25.039
मुफ्ती साहब आगे बैठे हैं। इनको माइक

01:30:24.079 --> 01:30:27.519
दीजिए।

01:30:25.039 --> 01:30:28.719
हां तरुण माइक आप अपने पास रखिए। आपको

01:30:27.520 --> 01:30:30.159
कैमरे का फ्रेम पता है।

01:30:28.719 --> 01:30:31.920
जी

01:30:30.158 --> 01:30:35.679
सबसे पहले दोनों को मुबारकबाद।

01:30:31.920 --> 01:30:36.960
एक सर अपना आप नाम बता दें। आप अमेरिका

01:30:35.679 --> 01:30:37.199
में शिकागो में रहते हैं। इतना मुझे याद

01:30:36.960 --> 01:30:39.039
है।

01:30:37.198 --> 01:30:42.000
बताएं आपको। यासिर नदीम अलवाजदी मेरा नाम

01:30:39.039 --> 01:30:43.679
है। जावेद सर आपसे क्वेश्चन है इनफिनिटी

01:30:42.000 --> 01:30:45.439
इंग्रेस के ताल्लुक से। एक हाइपोथेटिकल

01:30:43.679 --> 01:30:47.600
सिनेरियो है। मसल अगर आप

01:30:45.439 --> 01:30:50.319
सर माइक थोड़ा सा प्लीज क्लोज। जी

01:30:47.600 --> 01:30:52.960
अगर आप शायर इसलिए हैं कि आपके कोई उस्ताद

01:30:50.319 --> 01:30:55.359
शायर थे और वो इसलिए शायर थे कि उनके कोई

01:30:52.960 --> 01:30:58.319
उस्ताद शायर थे और इसी तरीके से हम माज़

01:30:55.359 --> 01:31:00.158
में पीछे चलते चलते चले जाए और कहीं ना

01:30:58.319 --> 01:31:02.399
रुके तो माफ़ कीजिएगा आप कभी शायर नहीं हो

01:31:00.158 --> 01:31:04.399
सकते लेकिन आप शायर हैं। आपका शायर

01:31:02.399 --> 01:31:06.638
एक्सिस्ट करता है। इसका मतलब ये है कि आप

01:31:04.399 --> 01:31:09.759
कहीं ना कहीं रुके हैं। तो मेरा सवाल यह

01:31:06.639 --> 01:31:13.039
है कि क्या आप इनफिनिट रिग्रेस ऑफ कॉजेस

01:31:09.760 --> 01:31:17.000
को लॉजिकल फैलेसी मानते हैं या नहीं

01:31:13.039 --> 01:31:17.000
मानते? हां या ना?

01:31:17.039 --> 01:31:23.198
मैं इन्हें लॉजिकल फैलेसी नहीं मानता हूं।

01:31:20.719 --> 01:31:25.039
लेकिन मैं मेरा प्रॉब्लम यह है कि जब मैं

01:31:23.198 --> 01:31:28.719
नहीं मानता हूं तो आई विल कंटिन्यू विद

01:31:25.039 --> 01:31:31.600
दिस लॉजिक जो फैलेसी नहीं हो। आप एक जगह

01:31:28.719 --> 01:31:33.920
रुक जाते हैं जाके। आप कहते हैं ये गेंद

01:31:31.600 --> 01:31:36.800
कैसे बनी? ये जजीरा कैसे बना? ये समंदर

01:31:33.920 --> 01:31:39.600
कैसे बना? ये जमीन कैसे बनी? और अचानक गॉड

01:31:36.800 --> 01:31:42.079
पे जाके आपको ब्रेक लग जाता है। एक बार आप

01:31:39.600 --> 01:31:45.039
सवाल नहीं करते कि भाई इनको बनाने वाला तो

01:31:42.079 --> 01:31:47.039
इनसे भी कॉम्प्लिकेटेड होगा। वो कैसे बना

01:31:45.039 --> 01:31:50.079
उसके बारे में आपने इत्मीनान कर लिया वो

01:31:47.039 --> 01:31:52.319
हमेशा से तो अगर आप उसे हमेशा से मानते

01:31:50.079 --> 01:31:53.600
हैं तो फिर ये मान लीजिए कि कायनात हमेशा

01:31:52.319 --> 01:31:54.799
से क्या तकलीफ है

01:31:53.600 --> 01:31:55.760
फिर हम वजूद में नहीं आते

01:31:54.800 --> 01:31:56.639
जी

01:31:55.760 --> 01:31:57.520
हम मौजूद नहीं

01:31:56.639 --> 01:31:59.039
अच्छा सर सर सर

01:31:57.520 --> 01:32:01.760
क्यों नहीं होते मैं बताऊंगा प्लीज

01:31:59.039 --> 01:32:03.600
जैसे मैंने मिसाल दी आपके शेर

01:32:01.760 --> 01:32:05.119
आपका शेर कभी वजूद में ना आता अगर शायद

01:32:03.600 --> 01:32:08.000
इसी तरह चलता रहे हमेशा

01:32:05.119 --> 01:32:09.519
माइक माइक मेरे ख्याल से इनफिनिट रिग्रेस

01:32:08.000 --> 01:32:10.560
का कांसेप्ट क्लियर नहीं हो पाया ऐसा रहने

01:32:09.520 --> 01:32:10.880
दे लेट्स गोप

01:32:10.560 --> 01:32:14.400
ठीक है

01:32:10.880 --> 01:32:16.480
हां थोड़ा सा मॉडरेटर का भी ख्याल रखें।

01:32:14.399 --> 01:32:18.238
नहीं नहीं आपने तो रखा है। आपने रखा है।

01:32:16.479 --> 01:32:21.119
यहां पे गौहर रजा साहब है। वो भी एक सवाल

01:32:18.238 --> 01:32:25.879
पूछना चाहते हैं।

01:32:21.119 --> 01:32:25.880
माइक या नहीं तो ऑन करिए।

01:32:26.319 --> 01:32:33.198
पहले तो ये कह दूं के

01:32:29.039 --> 01:32:35.774
मैं उन बच्चों से शर्मिंदा हूं जिनको गजा

01:32:33.198 --> 01:32:36.719
में कत्ल किया गया।

01:32:35.774 --> 01:32:39.039
[प्रशंसा]

01:32:36.719 --> 01:32:41.039
क्योंकि हमारे होते हुए कत्ल किया गया।

01:32:39.039 --> 01:32:44.560
लेकिन उससे ज्यादा शर्मिंदगीगी इस बात से

01:32:41.039 --> 01:32:47.039
हुई कि मुझे लगा कि मुफ्ती साहब उसको

01:32:44.560 --> 01:32:49.600
जस्टिफाई कर रहे हैं।

01:32:47.039 --> 01:32:51.679
बिल्कुल भी नहीं आप आप गलत मुझे लगा मैं

01:32:49.600 --> 01:32:54.079
गलत हो सकता हूं। गलत मैं सवाल पूछ रहा

01:32:51.679 --> 01:32:56.239
हूं। मैं सवाल

01:32:54.079 --> 01:32:57.359
मैं जावेद भाई से डिसए्री करता हूं।

01:32:56.238 --> 01:33:00.079
एक सेकंड आस्किंग

01:32:57.359 --> 01:33:02.960
देखिए अगर देखिए ऐसा एक सेकंड

01:33:00.079 --> 01:33:05.679
आप सर वेट वेट अरे आप मैं कुछ मेरे पहले

01:33:02.960 --> 01:33:07.679
मुझे अपनी बात कह लेने दीजिए। अगर ऑडियंस

01:33:05.679 --> 01:33:12.079
तय करेगी तो फिर मॉडरेटर का मतलब नहीं।

01:33:07.679 --> 01:33:14.399
मेरा आप सबसे यह कहना है ये बहस दो लोगों

01:33:12.079 --> 01:33:17.359
के बीच में है। एक तरफ मुफ्ती साहब, एक

01:33:14.399 --> 01:33:20.719
तरफ जावेद साहब। पिछले डेढ़ घंटे से ये

01:33:17.359 --> 01:33:22.799
लोग अपने-अपने तर्क रख रहे हैं। आपकी इनसे

01:33:20.719 --> 01:33:25.760
इत्तेफाकी हो सकती है ना इत्तेफाकी हो

01:33:22.800 --> 01:33:29.600
सकती है। मेरे उस्ताद मुझे सिखा गए हैं कि

01:33:25.760 --> 01:33:33.119
मुखा मुखम में असहमति की गुंजाइश बची रहनी

01:33:29.600 --> 01:33:35.600
चाहिए। अगर मैं आपकी बहुत इज्जत करता हूं

01:33:33.119 --> 01:33:37.760
गौर साहब। आपने जो कमाल की किताबें लिखी

01:33:35.600 --> 01:33:41.199
हैं साइंटिफिक टरामेंट लेकिन मेरी ये

01:33:37.760 --> 01:33:43.920
गुजारिश है आप सबसे कि यदि आप इन लोगों ने

01:33:41.198 --> 01:33:46.879
जो बोला उनप टिप्पणियां करेंगे तो ना वक्त

01:33:43.920 --> 01:33:49.440
की पाबंदी रहेगी ना वनशा आप सवाल पूछ लें

01:33:46.880 --> 01:33:51.760
उस सवाल में जो बात आ जाए वो आ जाए मैं

01:33:49.439 --> 01:33:54.000
जावेद साहब से डिसए्री करता हूं इसलिए

01:33:51.760 --> 01:33:55.039
जावेद साहब से सवाल पूछ रहा हूं आपका सवाल

01:33:54.000 --> 01:33:57.760
जावेद अख्तर साहब से

01:33:55.039 --> 01:34:01.679
और सवाल ये है मेरा कि जावेद साहब ने कई

01:33:57.760 --> 01:34:03.920
बार लॉजिक का इस्तेमाल किया के साइंस में

01:34:01.679 --> 01:34:06.158
लॉजिक है और रिलजन में लॉजिक लॉजिक नहीं

01:34:03.920 --> 01:34:10.239
है। मेरा ख्याल ये है कि रिलजन में भी

01:34:06.158 --> 01:34:12.799
लॉजिक है। लेकिन उस लॉजिक की बेसिस ये है

01:34:10.238 --> 01:34:15.519
कि आप रुक जाते हैं जिसका जिक्र जावेद

01:34:12.800 --> 01:34:17.920
साहब ने बार-बार किया। यानी खुदा के तसवुर

01:34:15.520 --> 01:34:22.880
पे आते हुए, गॉड के तसवुर पे आते हुए रुक

01:34:17.920 --> 01:34:25.920
जाते हैं। और इसके इसमें सवाल पूछना मतलब

01:34:22.880 --> 01:34:28.880
फॉरबिटन होता है। सवाल ये है कि क्या

01:34:25.920 --> 01:34:32.880
जावेद साहब इससे एग्री करते हैं कि साइंस

01:34:28.880 --> 01:34:33.440
की लॉजिक अलग है और रिलीजन की लॉजिक अलग

01:34:32.880 --> 01:34:36.079
है।

01:34:33.439 --> 01:34:36.079
बताइए सर।

01:34:36.719 --> 01:34:44.399
देखिए तीन चीजें हैं। साइंस है, एक है

01:34:40.399 --> 01:34:48.479
मंतिक है, इ्तदाल है। और एक जो है कुछ भी

01:34:44.399 --> 01:34:52.079
नहीं है। फथ है, अकीदा है। मैं अकीदे के

01:34:48.479 --> 01:34:55.599
लॉजिक का कायल नहीं हूं। मुझे आप इ्तदाल

01:34:52.079 --> 01:34:58.319
से, लॉजिक से, रीज़ से समझाइए। मैं मानने

01:34:55.600 --> 01:35:00.880
को तैयार हूं। मेरा क्या नुकसान होगा?

01:34:58.319 --> 01:35:03.119
लेकिन ये कि अकीदे पे मैं नहीं जा सकता

01:35:00.880 --> 01:35:07.199
हूं। अकीदे का मतलब है कि तुम ये मान लो

01:35:03.119 --> 01:35:09.760
सवाल को ये नहीं आप सारी बातें करके बड़ी

01:35:07.198 --> 01:35:11.919
साइंटिफिक बातें करके एक जगह जाके खुदा के

01:35:09.760 --> 01:35:15.440
हुजूद पे रुक जाते हैं सरेंडर कर देते हैं

01:35:11.920 --> 01:35:18.000
मैं सरेंडर करने को तैयार हूं दैट्स ऑल

01:35:15.439 --> 01:35:18.479
जी ये आगे सर बैठे हुए हैं इनको माइक

01:35:18.000 --> 01:35:20.399
दीजिए

01:35:18.479 --> 01:35:22.479
भाई वो वो आप पूछना चाह रहे थे ना

01:35:20.399 --> 01:35:23.759
हां नहीं मैं ये

01:35:22.479 --> 01:35:25.039
जी आपका नाम

01:35:23.760 --> 01:35:26.960
आसिम इफ्तखार

01:35:25.039 --> 01:35:29.039
आसिम जी पूछिए

01:35:26.960 --> 01:35:29.600
सर जावेद सर से सवाल है कि आपने अपनी

01:35:29.039 --> 01:35:31.679
क्लोजिंग

01:35:29.600 --> 01:35:35.360
माइक थोड़ा करीब आपने क्लोजिंग स्टेटमेंट

01:35:31.679 --> 01:35:38.000
में ये बात कही थी के मजहब का जो फ्यूचर

01:35:35.359 --> 01:35:40.000
है वो ज्यादा दिन नहीं जाने वाला है।

01:35:38.000 --> 01:35:42.800
लेकिन मैं देख पा रहा हूं कि जो ऑक्सफोर्ड

01:35:40.000 --> 01:35:45.920
यूनिवर्सिटी की एक स्टडी है 2011 में हुई

01:35:42.800 --> 01:35:50.960
है जिसके 50 एकेडमिशंस ने इसको अंजाम दिया

01:35:45.920 --> 01:35:53.199
था। उसमें वो ये कहते हैं कि जो फथ इन गॉड

01:35:50.960 --> 01:35:55.039
है वो इनबिल्ट है ह्यूमन नेचर के अंदर

01:35:53.198 --> 01:35:58.319
जिसको हम कहते हैं फितरत के अंदर शामिल है

01:35:55.039 --> 01:36:02.238
वो और वो ये कहते हैं कि अगर कोई ये समझता

01:35:58.319 --> 01:36:05.279
है के मजहब को वो खत्म कर देगा तो ये उसकी

01:36:02.238 --> 01:36:06.559
गलतफहमी है तो आप इसके बारे में इस स्टडीज

01:36:05.279 --> 01:36:09.039
के बारे में क्या कहते हैं?

01:36:06.560 --> 01:36:10.400
ठीक है। मैं उनसे एग्री नहीं करता हूं। वो

01:36:09.039 --> 01:36:12.319
कौन से प्रोफेसर होंगे ऐसा

01:36:10.399 --> 01:36:14.960
उनके पास डाटा है। इन्होंने डाटा के

01:36:12.319 --> 01:36:16.639
होगा। डाटा क्या हो सकता है? फ्यूचर का

01:36:14.960 --> 01:36:19.039
डाटा तो नहीं हो सकता ना उनके पास

01:36:16.639 --> 01:36:21.920
प्रेजेंट का डाटा हो सकता है। डाटा आपने

01:36:19.039 --> 01:36:25.119
सुना 100 साल पहले का बाद का डाटा मैंने

01:36:21.920 --> 01:36:27.600
तो नहीं सुना अब तक तो आज उनकी ये राय है

01:36:25.119 --> 01:36:30.079
और होगी राय है। ठीक है? दुनिया में

01:36:27.600 --> 01:36:32.480
तरह-तरह की राय है लोग। लेकिन मैं समझता

01:36:30.079 --> 01:36:35.760
हूं कि वक्त के साथ इंसान ज्यादा से

01:36:32.479 --> 01:36:38.399
ज्यादा रीज़नेबल और लॉजिकल होता जा रहा है।

01:36:35.760 --> 01:36:42.239
आज आप देखिए वेस्टर्न यूरोप में क्या

01:36:38.399 --> 01:36:45.118
परसेंटेज है नॉन बिलीवर्स की। बहुत हाई।

01:36:42.238 --> 01:36:46.638
वहां चर्च खाली पड़े होते हैं। तो

01:36:45.118 --> 01:36:50.479
अल्टीमेटली

01:36:46.639 --> 01:36:54.719
तो इंसान कोई ऐसी बात बहुत अरसे तक नहीं

01:36:50.479 --> 01:36:57.519
मान सकेगा चाहे गलत या सही जो उसे उसके

01:36:54.719 --> 01:36:59.920
दिमाग को उसके ज़हन को उसके लॉजिक को अपील

01:36:57.520 --> 01:37:01.679
ना करे। वो कह रहे हैं तो ऑक्सफोर्ड के

01:36:59.920 --> 01:37:04.560
होंगे तो केवरेज के होंगे तो मुझे क्या

01:37:01.679 --> 01:37:05.600
लेना देना? उनका डाटा मुस्तकबिल का नहीं

01:37:04.560 --> 01:37:09.199
हो सकता है।

01:37:05.600 --> 01:37:11.119
जी दीपक हां पूछिए। मैं आऊंगा अभी पीछे की

01:37:09.198 --> 01:37:12.079
साइड भी आऊंगा। माइक व भेजूंगा दो-ती साल

01:37:11.118 --> 01:37:14.399
के लिए। जी।

01:37:12.079 --> 01:37:14.960
जावेद साहब आपसे सवाल है। नमस्ते।

01:37:14.399 --> 01:37:17.279
अरे भाई

01:37:14.960 --> 01:37:19.600
सर अगर आप ही लोगों को तय करना है तो फिर

01:37:17.279 --> 01:37:21.519
सब फिर 200 लोग तय कर लेंगे। नहीं सर

01:37:19.600 --> 01:37:24.239
प्लीज डोंट डू दिस सर। सर एवरीबडी हैज़ अ

01:37:21.520 --> 01:37:25.760
राइट सर। बट वी कैन ओनली टेक सिलेक्टेड

01:37:24.238 --> 01:37:29.198
क्वेश्चन।

01:37:25.760 --> 01:37:31.039
सर ये यंग लोग भी हैं तो इनकी ये आप उतने

01:37:29.198 --> 01:37:33.359
यंग भाई आप यंग है कि नहीं है?

01:37:31.039 --> 01:37:36.719
वो कह रहे हैं वो भी यंग है साहब। आप उनकी

01:37:33.359 --> 01:37:40.000
नौजवानी पर दावा उनको ही करने दें।

01:37:36.719 --> 01:37:41.679
हां। मुफ्ती साहब आप यंग हां पूछिए।

01:37:40.000 --> 01:37:43.520
अरे भैया मेरा सवाल यह है

01:37:41.679 --> 01:37:46.079
इनसे भी तो पूछो जी

01:37:43.520 --> 01:37:48.000
बस आपसे एक सवाल [हंसी] है जैसे थीस्टो के

01:37:46.079 --> 01:37:49.760
पास अपने जो ईश्वर को मानते हैं उनके पास

01:37:48.000 --> 01:37:52.158
अपने सोशल गेट टुगेदर्स हैं पांच रोजा

01:37:49.760 --> 01:37:54.079
क्रिसमस आने वाला है होली है दिवाली है ईद

01:37:52.158 --> 01:37:55.519
है एथिस्ट क्या ऑफर कर रहे हैं मतलब मैं

01:37:54.079 --> 01:37:57.118
इनकी दुकान से दूर में आना चाहता हूं उस

01:37:55.520 --> 01:38:01.360
तरफ पर मैं अट्रैक्ट नहीं हो पा रहा हूं

01:37:57.118 --> 01:38:04.158
मैं सोशल गेट टुगेदर्स क्या है आपके पास

01:38:01.359 --> 01:38:07.519
वो ये कह रहे हैं कि जो धार्मिक लोग हैं

01:38:04.158 --> 01:38:08.238
अलग-अलग धर्म के लोग उनके उत्सव त्यौहार

01:38:07.520 --> 01:38:09.679
बहुत है

01:38:08.238 --> 01:38:12.319
अब आपको मैं एक सुनाता हूं यहां

01:38:09.679 --> 01:38:16.719
हिस्टोरियन भी बैठे हैं। मृदुला जी आप

01:38:12.319 --> 01:38:19.840
बताइएगा सही है क्या? ये एक कॉन्सेंटाइन

01:38:16.719 --> 01:38:23.039
एक ग्रीक रोमन भाषा था जो क्रिश्चियनिटी

01:38:19.840 --> 01:38:24.560
आने के 400 साल बाद उसने डिसाइड किया कि

01:38:23.039 --> 01:38:27.039
मैं क्रिश्चियन हो जाऊंगा। मेरी पूरी

01:38:24.560 --> 01:38:29.440
स्टेट कैंसिल हो जाएगी। उस जमाने में ऐसे

01:38:27.039 --> 01:38:32.000
ही होता था राजा जो धर्म इख्तियार करता था

01:38:29.439 --> 01:38:34.879
वो जनता भी कर लेती थी।

01:38:32.000 --> 01:38:38.719
इसलिए कि वो हो गया था बैंककरप्ट और उसे

01:38:34.880 --> 01:38:41.840
जो मेडिटेरियन पोस्ट के रिच क्रिश्चियन वो

01:38:38.719 --> 01:38:44.158
थे मर्चेंट उससे पैसा चाहिए था। तो उसने

01:38:41.840 --> 01:38:47.840
कहा यार क्रिश्चियन हो जाओ। तो उसने अपने

01:38:44.158 --> 01:38:49.920
वजीर से कहा कि भाई ये हिस्ट्री है के अब

01:38:47.840 --> 01:38:52.000
हम लोग क्रिश्चियन हो जाते हैं। कहते सर

01:38:49.920 --> 01:38:57.039
हो जाएंगे कोई प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन एक

01:38:52.000 --> 01:39:00.079
प्रॉब्लम ये है कि 17 दिसंबर से 25 दिसंबर

01:38:57.039 --> 01:39:03.198
तक जो पिगम फेस्टिवल होता जो पिगम स्टेबल

01:39:00.079 --> 01:39:04.960
हो जो फेस्टिवल होता है वो बंद हो जाएगा।

01:39:03.198 --> 01:39:07.839
इसलिए कि हम क्रिश्चियन हो गए तो होगा

01:39:04.960 --> 01:39:10.079
नहीं। तो वो बच्चों को बहुत बुरा लगेगा।

01:39:07.840 --> 01:39:12.960
पब्लिक को बहुत डे बहुत एंजॉय करते हैं।

01:39:10.079 --> 01:39:14.880
खास तौर से 25 को मेन डे उसने कहा हां ये

01:39:12.960 --> 01:39:17.359
तो सही कह रहे हो ये जीसस क्राइस्ट की

01:39:14.880 --> 01:39:20.880
पैदाइश कब थी? कह साहब वो अप्रैल में थी

01:39:17.359 --> 01:39:23.198
नहीं कट करो वो 25 दिसंबर को [हंसी]

01:39:20.880 --> 01:39:26.159
ये हकीकत है।

01:39:23.198 --> 01:39:29.198
और 400 साल बाद क्रिश्चियनिटी के अप्रैल

01:39:26.158 --> 01:39:31.359
से दिसंबर ले आए और इसलिए कि यहां बेगम

01:39:29.198 --> 01:39:35.198
फेस्टिवल होता था। अब मनाते हैं आप आराम

01:39:31.359 --> 01:39:37.519
से। ये जो सारे फेस्टिवल है ये रिलीजन थे।

01:39:35.198 --> 01:39:40.238
हर एक को एक एंटरटेनमेंट डिपार्टमेंट

01:39:37.520 --> 01:39:43.520
चाहिए होता है अपनी कंपनी चलाने के लिए।

01:39:40.238 --> 01:39:46.238
तो ये रिलीजंस ने ये सेुलर त्यहार थे

01:39:43.520 --> 01:39:49.280
जिन्हें रिलीजंस ने ले लिया है। ये मौसम

01:39:46.238 --> 01:39:52.718
के थे, फसलों के थे, किसानों के थे। उसको

01:39:49.279 --> 01:39:56.639
आपने लेके रिलीजियस रंग दे दिया। ये ये

01:39:52.719 --> 01:40:00.239
कोई रिवीजन से थोड़ी आए आप आप अच्छा हमें

01:39:56.639 --> 01:40:02.239
देखिए हम तो मुद है हम ईद मनाते हैं हम

01:40:00.238 --> 01:40:04.479
दिवाली मनाते हैं हम होली मनाते हैं हम

01:40:02.238 --> 01:40:07.039
क्रिसमस मनाते हैं मुंबई की फिल्म

01:40:04.479 --> 01:40:11.519
इंडस्ट्री की सबसे बड़ी होली हमारे घर में

01:40:07.039 --> 01:40:14.238
सबसे बड़ी ईद हमारे घर में वो हमारी सोशल

01:40:11.520 --> 01:40:17.119
वो है हमारे यहां हेरिटेज है ऐसा थोड़ी है

01:40:14.238 --> 01:40:20.158
कि वी विल थ्रो द बेबी अलोंग वि द वाटर ये

01:40:17.118 --> 01:40:21.599
तो अच्छी चीज है इन्हें रखो तो बेकार है

01:40:20.158 --> 01:40:26.399
फेंक दो

01:40:21.600 --> 01:40:30.000
जी हां हेलो जी मेरा सवाल नादरी जी से है।

01:40:26.399 --> 01:40:32.719
जैसा कि आपने बोला कि गॉड टाइम के भी परे

01:40:30.000 --> 01:40:36.238
हैं और गॉड इतनी कॉम्प्लेक्स चीज है कि

01:40:32.719 --> 01:40:38.880
उसे ह्यूमन माइंड समझ नहीं सकता और गॉड ने

01:40:36.238 --> 01:40:40.638
अर्थ पे फ्री वेल भी दे दी है। तो आप अपना

01:40:38.880 --> 01:40:42.400
वक्त जाया क्यों कर रहे हैं गॉड के बारे

01:40:40.639 --> 01:40:44.480
में बात करके। अपन को तो बात करनी चाहिए

01:40:42.399 --> 01:40:46.559
कि सोसाइटी को बेहतर कैसे करें?

01:40:44.479 --> 01:40:48.879
मैं गॉड वही बताता है सोसाइटी को कैसे

01:40:46.560 --> 01:40:52.159
बेहतर करें? अभी मैं आपका जवाब देता हूं।

01:40:48.880 --> 01:40:54.960
आपने कहा कि टाइम पे वो एक्सिस्ट नहीं

01:40:52.158 --> 01:40:58.000
करता। सो

01:40:54.960 --> 01:41:00.719
नहीं मेरा सवाल ये है कि जैसा आपने बोला

01:40:58.000 --> 01:41:01.920
कि गॉड बहुत ही कॉम्प्लेक्स चीज है।

01:41:00.719 --> 01:41:04.000
मैंने कहा ही नहीं कि कॉम्प्लेक्स है ये

01:41:01.920 --> 01:41:06.079
तो आपके अल्फाज़ हैं। कॉम्प्लेक्स का लव्स

01:41:04.000 --> 01:41:07.920
गॉड के लिए सूटेबल नहीं है। क्यों?

01:41:06.079 --> 01:41:09.920
क्योंकि कॉम्प्लेक्स वो चीजें होती है जो

01:41:07.920 --> 01:41:12.239
ऑब्जेक्ट हो। गॉड इज नॉट एन ऑब्जेक्ट

01:41:09.920 --> 01:41:13.679
जिसको आप इंस्ट्रूमेंट के जरिए लैबोरेटरी

01:41:12.238 --> 01:41:16.319
में जाकर टेस्ट करें। ओह इट्स वैरी

01:41:13.679 --> 01:41:18.480
कॉम्प्लेक्स। वो कोई कार का इंजन नहीं है।

01:41:16.319 --> 01:41:21.279
वो फिलोसफिकली

01:41:18.479 --> 01:41:24.079
नेसेसरी बीइंग ऐसी बीइंग है जो सिंपल

01:41:21.279 --> 01:41:26.158
बीइंग है। हां आप उसको मुकम्मल तौर पे

01:41:24.079 --> 01:41:28.319
उसकी तमाम हिकमतों को जान ले और हर चीज को

01:41:26.158 --> 01:41:31.039
जान ले ये पॉसिबल नहीं है। क्योंकि वो ऑल

01:41:28.319 --> 01:41:33.359
वाइज है आप ऑल वाइज नहीं है और वो खुदा है

01:41:31.039 --> 01:41:34.079
वो आपको सारी चीजें बता दे ये जरूरी नहीं

01:41:33.359 --> 01:41:36.639
है।

01:41:34.079 --> 01:41:40.319
मेरा सवाल ये नहीं था। मेरा सवाल यह था कि

01:41:36.639 --> 01:41:42.800
जब गॉड इतना परे है इस दुनिया से कि उसने

01:41:40.319 --> 01:41:45.599
अर्थ पे फ्री विल भी दी है हम सब ह्यूमंस

01:41:42.800 --> 01:41:48.079
की फ्री विल है और जो सोसाइटी में हो रहा

01:41:45.600 --> 01:41:50.239
है वो अपन लोग डिसाइड करेंगे तो अपन लोग

01:41:48.079 --> 01:41:54.238
डिसाइड नहीं करेंगे ना अपन लोग डिसाइड

01:41:50.238 --> 01:41:57.118
नहीं करेंगे गॉड जो है गॉड ने वो उसकी जात

01:41:54.238 --> 01:41:58.799
उसकी एकिस्टेंस टाइम एंड स्पेस से परे है

01:41:57.118 --> 01:42:01.039
लेकिन वो हमारा टेस्ट ले रहा है और उसी

01:41:58.800 --> 01:42:02.560
गॉड ने हमें बताया कि तुम्हें क्या करना

01:42:01.039 --> 01:42:03.519
है क्या नहीं करना है तो जाहिर है उस गॉड

01:42:02.560 --> 01:42:04.080
की बात सुनेंगे ना हम

01:42:03.520 --> 01:42:07.440
जी

01:42:04.079 --> 01:42:11.920
वो पीछे पीछे एक चश्मा लगा है जो मैम खड़ी

01:42:07.439 --> 01:42:14.238
है उनको दीजिए। हां आप आप

01:42:11.920 --> 01:42:16.319
जी जी बिलकुल आएंगे देखिए मैं कोशिश कर

01:42:14.238 --> 01:42:19.638
रहा हूं सब तरफ जाने की हां उनको दीजिए

01:42:16.319 --> 01:42:19.639
माइक जी

01:42:20.079 --> 01:42:23.920
हेलो सर

01:42:21.118 --> 01:42:26.079
मैं ओमनी प्रेजेंट नहीं हूं टाइम पाबंद

01:42:23.920 --> 01:42:27.760
हूं और जहां तक कोशिश कर सकता हूं करूंगा

01:42:26.079 --> 01:42:29.439
जी अपना नाम बताइए

01:42:27.760 --> 01:42:30.880
मेरा नाम उर्सला है मैं दिल्ली

01:42:29.439 --> 01:42:34.479
यूनिवर्सिटी की एक स्टूडेंट हूं और मैं

01:42:30.880 --> 01:42:37.279
स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया से हूं अ मेरा

01:42:34.479 --> 01:42:38.799
सवाल मुफ्ती जी से है कि इस हॉल के इस

01:42:37.279 --> 01:42:41.359
कमरे में बैठ के हम हम लोग रेप की

01:42:38.800 --> 01:42:44.320
मोरालिटी के बारे में फिलॉसफिकली बात तो

01:42:41.359 --> 01:42:46.639
कर सकते हैं। बट असलियत ये है कि रोजमर्रा

01:42:44.319 --> 01:42:49.840
की जिंदगी में औरतें रेप के थ्रू गुजरती

01:42:46.639 --> 01:42:52.480
हैं। और हम लोग सिर्फ नंबर्स पे इस तरह

01:42:49.840 --> 01:42:54.079
नहीं देख सकते क्योंकि कितनी औरतें हैं इन

01:42:52.479 --> 01:42:56.399
कंट्रीज में जहां पे आप बता रहे हैं कि

01:42:54.079 --> 01:42:59.519
केसेस कम है जिनका एक्सेस है कि वो जाके

01:42:56.399 --> 01:43:03.039
केस फाइल कर सके। कितनी औरतें हैं जो

01:42:59.520 --> 01:43:05.360
वर्किंग जिनको काम करने की आजादी है उन

01:43:03.039 --> 01:43:07.439
कंट्रीज में। यूरोप में ये आजादी आ गई।

01:43:05.359 --> 01:43:08.880
यूरोप में ये रूल्स आ गए। तो हम आज उसके

01:43:07.439 --> 01:43:10.638
बारे में बात कर पा रहे हैं।

01:43:08.880 --> 01:43:14.560
जी जाओ।

01:43:10.639 --> 01:43:16.560
आपने ये कहा कि कमरे में बंद होकर हम लोग

01:43:14.560 --> 01:43:19.760
इस पर फिलॉसफिकली बात कर सकते हैं। लेकिन

01:43:16.560 --> 01:43:22.000
हकीकत में क्या हो रहा है वो ग्राउंड लेवल

01:43:19.760 --> 01:43:24.800
पे क्या हो रहा है? जो बहुत गलत हो रहा है

01:43:22.000 --> 01:43:26.719
और वो सफर कर रही हैं। आई एग्री? बहुत गलत

01:43:24.800 --> 01:43:28.880
हो रहा है। और जो गलत हो रहा है उसको हमें

01:43:26.719 --> 01:43:30.960
रोकना है। और क्यों रोकना है? वो गलत

01:43:28.880 --> 01:43:33.440
क्यों है? हमारे पास इसका ऑब्जेक्टिव

01:43:30.960 --> 01:43:35.279
फाउंडेशन है। इनके पास उसका ऑब्जेक्टिव

01:43:33.439 --> 01:43:37.359
फाउंडेशन नहीं है। मैं ये कहना चाह रहा

01:43:35.279 --> 01:43:39.039
हूं कि जहां पे भी जुल्म हो रहा है, जहां

01:43:37.359 --> 01:43:41.198
पे भी औरत पे जुल्म हो रहा है या उसकी

01:43:39.039 --> 01:43:42.960
इज्जत लूटी जा रही है या उसे तकलीफ

01:43:41.198 --> 01:43:45.839
पहुंचाई जा रही है। और सिर्फ औरत नहीं

01:43:42.960 --> 01:43:48.480
किसी इंसान के ऊपर भी जुल्म हो रहा है तो

01:43:45.840 --> 01:43:50.800
उसके खिलाफ खड़ा होना ये मोरालिटी हमारे

01:43:48.479 --> 01:43:52.559
पास गॉड के पास से आई है। वरना जावेद साहब

01:43:50.800 --> 01:43:57.279
तो कह रहे हैं कि जो है मेजॉरिटी डिसाइड

01:43:52.560 --> 01:44:01.119
करेगी तो मेजॉरिटी तो कभी भी बदल सकती है।

01:43:57.279 --> 01:44:04.319
क्या आप ये थोड़ी सी आपको गलतफहमी है। मैं

01:44:01.118 --> 01:44:06.319
अगर मेरे जुमले से ये मजला निकला या मैंने

01:44:04.319 --> 01:44:08.960
कहा तो ये जुमला मैं वापस लेता हूं। ये

01:44:06.319 --> 01:44:11.519
मेरा मतलब ही नहीं था कि मेजरिटी डिसाइड

01:44:08.960 --> 01:44:12.000
करेगा। मेजरिटी डिसाइड करे तो दुनिया में

01:44:11.520 --> 01:44:13.920
बड़ी

01:44:12.000 --> 01:44:14.560
वैसे आपने कहा था ये जुमला।

01:44:13.920 --> 01:44:15.679
मैं मान रहा हूं।

01:44:14.560 --> 01:44:18.159
बाद में रीकैप कर लेंगे।

01:44:15.679 --> 01:44:18.880
अरे एक सेकंड मैं अपनी एक्सप्लेनेशन देता

01:44:18.158 --> 01:44:21.679
हूं।

01:44:18.880 --> 01:44:23.760
मुनासिब बात ये है कि हम सब के सब दिल में

01:44:21.679 --> 01:44:26.079
जानते हैं कि क्या अच्छा है, क्या बुरा

01:44:23.760 --> 01:44:27.600
है। हमें पता है अच्छी तरह से। जो लोग

01:44:26.079 --> 01:44:29.198
बुरे काम करते हैं उन्हें भी मालूम है

01:44:27.600 --> 01:44:31.360
अच्छा अच्छा

01:44:29.198 --> 01:44:32.000
यही तो सवाल था हजरत कि फिर ये मोरालिटी

01:44:31.359 --> 01:44:33.439
आई कहां से

01:44:32.000 --> 01:44:36.399
क्रॉस एग्जामिनेशन हां जी हां जी

01:44:33.439 --> 01:44:38.960
मोरालिटी साथ रहने की डिजायर से आई

01:44:36.399 --> 01:44:39.679
यानी साथ रहकर जो कुछ कह दे जो कुछ कर दे

01:44:38.960 --> 01:44:40.000
वो हो जाएगा

01:44:39.679 --> 01:44:40.480
नहीं

01:44:40.000 --> 01:44:43.359
तो

01:44:40.479 --> 01:44:45.919
आप कायदे से रहित सकते हैं जब तक लोगों

01:44:43.359 --> 01:44:47.118
में मोरालिटी हो वरना केस हो जाएगा

01:44:45.920 --> 01:44:49.840
ये आपको कैसे पता

01:44:47.118 --> 01:44:51.279
जी हमने देखा ना जहां मोरालिटी का कॉस हो

01:44:49.840 --> 01:44:51.920
गया हम देखते हैं

01:44:51.279 --> 01:44:55.920
कहां पे देखते हैं

01:44:51.920 --> 01:45:00.639
भाई दुनिया में आप क्यों

01:44:55.920 --> 01:45:02.079
अगर गलत हो रहा है इसको आप सर आपोलॉजी की

01:45:00.639 --> 01:45:05.440
बात कर रहे हैं मैं ऑटोलॉजी की बात कर रहा

01:45:02.079 --> 01:45:07.279
हूं मैं इस दोनों लोगों को चैट करूंगा

01:45:05.439 --> 01:45:09.759
वहां पे क्रॉस एग्जामिनेशन कर लीजिएगा अभी

01:45:07.279 --> 01:45:12.479
ऑडियंस का हक मार रहे हैं आप लोग भाई जस्ट

01:45:09.760 --> 01:45:15.039
लोग हैं आप लोग और भाई ये

01:45:12.479 --> 01:45:17.359
हां उधर उधर आएंगे उधर जी सर आएंगे आएंगे

01:45:15.039 --> 01:45:19.039
सर सर मेरा नाम लख उर रहमान है और मैं

01:45:17.359 --> 01:45:21.439
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का स्टूडेंट

01:45:19.039 --> 01:45:23.198
हूं और जहां तक मुझे पता है कि सर यू आर

01:45:21.439 --> 01:45:26.158
आल्सो प्रोडक्ट ऑफ अलीगढ़ मुस्लिम

01:45:23.198 --> 01:45:28.000
मैं भी उसी चमन का बुलबुल हूं सर तो बड़ी

01:45:26.158 --> 01:45:28.960
खुशी हुई मुझे जान के कि मैं आपसे

01:45:28.000 --> 01:45:31.920
मिलूंगा। सवाल

01:45:28.960 --> 01:45:35.679
सर मेरा सवाल ये है कि सर सैयद अली रहमा

01:45:31.920 --> 01:45:39.760
का नजरिया ये था के खुदा के वजूद को अकल

01:45:35.679 --> 01:45:42.639
के दायरे में रह के तलाश करना ना के पूरी

01:45:39.760 --> 01:45:45.039
तौर से उसका इंकार कर देना। सर हाउ विल यू

01:45:42.639 --> 01:45:48.639
डिफाइन इट? नहीं नहीं तो यह तो आप इन्हें

01:45:45.039 --> 01:45:51.920
बताइए सवाल है कि खुदा का वजूद साबित कर

01:45:48.639 --> 01:45:52.800
रहे हैं। तो सर आपने इनकार रखा है। इस वजह

01:45:51.920 --> 01:45:55.199
से मेरा क्वेश्चन

01:45:52.800 --> 01:45:58.560
उन्होंने यही सर एक सेकंड सर सैयद ने यही

01:45:55.198 --> 01:46:01.279
कहा है ना कि अकल से आप खुदा के वजूद को

01:45:58.560 --> 01:46:03.199
साबित नहीं कर सकते। यही कहा ना भाई

01:46:01.279 --> 01:46:04.238
वो उन्होंने कहा है कर सकते हैं और वो कर

01:46:03.198 --> 01:46:06.000
दिया गया आज।

01:46:04.238 --> 01:46:09.599
वो फ़

01:46:06.000 --> 01:46:12.399
तलाश करना या साबित करना अक्ल से ताल्लुक

01:46:09.600 --> 01:46:15.920
अक्ल से नहीं। अरे सवाल तो सुन लीजिए। जी

01:46:12.399 --> 01:46:18.238
अक्ल से नहीं हो सकता। यही कहा ना आपने?

01:46:15.920 --> 01:46:20.639
अक्ल से हो सकता है। अरे वो यही कह रहे

01:46:18.238 --> 01:46:22.959
हैं भाई आप बता रहे हो सकता है। वो तो कुछ

01:46:20.639 --> 01:46:24.800
और

01:46:22.960 --> 01:46:27.520
आप अगर सर देखो नौजवान

01:46:24.800 --> 01:46:30.239
फ़ इतनी कमाल की यूनिवर्सिटी है

01:46:27.520 --> 01:46:33.199
भाई दे दो जरा एक मिनट। अरे भाई मेरी बात

01:46:30.238 --> 01:46:33.519
सुनो। माइक पे बोलो ताकि जो लाखों लोग देख

01:46:33.198 --> 01:46:34.479
रहे हैं।

01:46:33.520 --> 01:46:38.080
माइक दे दो ना।

01:46:34.479 --> 01:46:41.759
अरे देंगे ना माइक तुम ठहरो तो। हां सर

01:46:38.079 --> 01:46:45.600
मेरा सवाल यह था कि सर सैयद अल रहमा का एक

01:46:41.760 --> 01:46:48.639
नजरिया था अपना के खुदा का जो वजूद है

01:46:45.600 --> 01:46:51.440
उसको अकल के दायरे में रह के तलाश करना है

01:46:48.639 --> 01:46:53.840
ना कि पूरे तौर से इंकार कर देना है ये ये

01:46:51.439 --> 01:46:55.519
उनका कांसेप्ट था लेकिन मेरा सवाल ये है

01:46:53.840 --> 01:46:57.199
कि आप इसको कैसे डिफाइन करते हैं

01:46:55.520 --> 01:46:59.679
एक्सप्लेन कैसे करेंगे मैं आपसे जानना

01:46:57.198 --> 01:47:00.479
चाहता हूंकि यू आर द प्रोडक्ट ऑफ अलीगढ़

01:46:59.679 --> 01:47:04.000
मुस्लिम यूनिवर्सिटी

01:47:00.479 --> 01:47:06.933
मुझे अली मुझे अकल के दायरे में मैंने

01:47:04.000 --> 01:47:08.880
बहुत तलाश की मुझे मिला नहीं

01:47:06.934 --> 01:47:11.679
[हंसी]

01:47:08.880 --> 01:47:14.079
हां ये इधर उधर वो चश्मा लगाए हां उनको दे

01:47:11.679 --> 01:47:16.158
दीजिए

01:47:14.079 --> 01:47:17.118
जी जी फटाफट पूछिए बस पांच मिनट है पांच

01:47:16.158 --> 01:47:18.960
मिनट में खत्म हो रहा है हां

01:47:17.118 --> 01:47:21.439
अस्सलाम वालेकुम मुफ्ती साहब एंड मेरा

01:47:18.960 --> 01:47:22.319
सवाल मेरा सवाल जावेद अख्तर साहब से

01:47:21.439 --> 01:47:24.559
क्या नाम है आपका

01:47:22.319 --> 01:47:25.519
अरे भैया मुझे पूछ रहे हो यार

01:47:24.560 --> 01:47:26.880
फैज फैज फैज

01:47:25.520 --> 01:47:30.480
फैज पूछिए फैज साहब

01:47:26.880 --> 01:47:32.639
तो मेरा सवाल ये है कि अभी जो एथियस्ट है

01:47:30.479 --> 01:47:34.479
वो प्रॉब्लम ऑफ इवल आर्गुमेंट यूज कर रहे

01:47:32.639 --> 01:47:36.480
हैं अगेंस्ट मुस्लिम्स राइट कि इस दुनिया

01:47:34.479 --> 01:47:37.039
में इतना सारा ईवल है और अगेंस्ट मुस्लिम

01:47:36.479 --> 01:47:39.118
तो यहां

01:47:37.039 --> 01:47:41.279
अगेंस्ट थिएस्ट अगेंस्ट थिएस्ट हां थोड़ा

01:47:39.118 --> 01:47:43.279
सा करेक्ट कर लीजिए भाई पूरी मशक्कत ही

01:47:41.279 --> 01:47:44.079
इसी बात की थी कि किसी एक मजहब पे बात ना

01:47:43.279 --> 01:47:47.039
टिके।

01:47:44.079 --> 01:47:48.559
जी तो बेसिकली ये आर्गुमेंट ऐसा है कि इस

01:47:47.039 --> 01:47:50.479
दुनिया में इतना ज्यादा ईवल एक्सिस्ट करता

01:47:48.560 --> 01:47:52.880
है और अगर एक ऑल गुड गॉड है तो वो रोकता

01:47:50.479 --> 01:47:54.559
क्यों नहीं है? लेकिन इस सवाल में एक हिडन

01:47:52.880 --> 01:47:56.639
असंप्शन ये है कि इस दुनिया में ईवल

01:47:54.560 --> 01:47:58.400
एक्सिस्ट करता है। अब एथियस कि कैसे

01:47:56.639 --> 01:47:59.760
ऑनटोलॉजिकली प्रूव कर सकते हैं कि इस

01:47:58.399 --> 01:48:00.960
दुनिया में ईवल एक्सिस्ट करता है। मैं

01:47:59.760 --> 01:48:02.639
आपको बताता हूं थोड़ा सा समझा।

01:48:00.960 --> 01:48:04.399
नहीं नहीं सर [हंसी]

01:48:02.639 --> 01:48:04.560
इनको सुनिए। नहीं नहीं प्लीज डोंट डू।

01:48:04.399 --> 01:48:06.000
नहीं।

01:48:04.560 --> 01:48:07.760
आई वांट टू एक्सप्लेन ऑनटोलॉजी।

01:48:06.000 --> 01:48:08.238
नहीं नहीं हम समझ गए, सर। इनको आप जवाब

01:48:07.760 --> 01:48:09.520
देने दीजिए।

01:48:08.238 --> 01:48:10.399
अच्छा सवाल पूछ रहा हूं मैं।

01:48:09.520 --> 01:48:12.719
अभी तक क्या था?

01:48:10.399 --> 01:48:15.439
वो मैं थोड़ा सा ऐड ऑन कर लेता हूं।

01:48:12.719 --> 01:48:17.520
तुम गुरु तो हम जब इसका राउंड 13 करेंगे

01:48:15.439 --> 01:48:20.719
ना, तब तुमको स्टेज पे बिठाएंगे।

01:48:17.520 --> 01:48:22.960
जी, जी। तो, हां, जल्दी से। तो, तो देखिए,

01:48:20.719 --> 01:48:24.800
एथिज, एथिज्म के हिसाब से सब कुछ रैंडमली

01:48:22.960 --> 01:48:26.480
बन गया है। सब कुछ एटम्स और मॉलिक्यूल्स

01:48:24.800 --> 01:48:28.000
है। एक पत्थर में और मुझ में सिर्फ इतना

01:48:26.479 --> 01:48:29.919
फर्क है कि हम लोग एटम्स और मॉलिक्यूल्स

01:48:28.000 --> 01:48:31.679
का अलग-अलग रिअरेंजमेंट है। अब एक पत्थर

01:48:29.920 --> 01:48:33.440
को कोई इंसान तलवार से दो टुकड़ों में

01:48:31.679 --> 01:48:34.960
काटते हैं या मुझे? अकॉर्डिंग टू एथिज्म

01:48:33.439 --> 01:48:37.198
इट इज़ सेम। देयर इज नो इवल एंड गुड

01:48:34.960 --> 01:48:41.198
अकॉर्डिंग टू एथिज्म।

01:48:37.198 --> 01:48:43.279
जी। अच्छा फैज साहब का सवाल ये है कि

01:48:41.198 --> 01:48:45.198
कोशिश भी करते तो इससे गलत सवाल नहीं कर

01:48:43.279 --> 01:48:48.479
पाते।

01:48:45.198 --> 01:48:51.919
एक लाइफ फॉर्म है और लाइफ फॉर्म में

01:48:48.479 --> 01:48:55.118
फीलिंग्स है। मतलब लाइफ फॉर्म सुनता है,

01:48:51.920 --> 01:48:59.199
देखता है, टेस्ट कर सकता है, फील कर सकता

01:48:55.118 --> 01:49:01.920
है। तो उसकी जो ये जो क्वालिटी एक बबल में

01:48:59.198 --> 01:49:04.479
आ गई है कि वो जानवर में भी है, इंसान में

01:49:01.920 --> 01:49:06.960
भी है। तो जाहिर है कि उसे कोई तकलीफ

01:49:04.479 --> 01:49:10.079
पहुंचेगी तोकि उसके पास वो सेंसिटिविटी है

01:49:06.960 --> 01:49:12.960
तो करेगा। पत्थर में वह सेंसिटिविटी नहीं

01:49:10.079 --> 01:49:14.880
है। तो यह क्या सवाल हुआ कि अगर पत्थर को

01:49:12.960 --> 01:49:17.279
काटा तो पत्थर को तकलीफ नहीं होती तो आपको

01:49:14.880 --> 01:49:19.359
काटे तो आपको क्यों तकलीफ होगी? बैठ जाइए।

01:49:17.279 --> 01:49:20.880
जी हां अगला सवाल

01:49:19.359 --> 01:49:22.479
हां पूछिए पूछिए पूछिए।

01:49:20.880 --> 01:49:25.840
जी जावेद अख्तर साहब।

01:49:22.479 --> 01:49:28.399
अरे भैया सब आप लोग मुफ्ती साहब को छोड़

01:49:25.840 --> 01:49:30.159
रहे हैं। वो मेरे ही पीछे पड़े हैं। क्या?

01:49:28.399 --> 01:49:32.638
चलो बोलो भाई।

01:49:30.158 --> 01:49:35.519
यू यू आस्क हाउ गॉड कैन एक्सिस्ट व्हेन

01:49:32.639 --> 01:49:38.400
चिल्ड्रन डाई एंड गाज़ा। हां यू आस्क्ड

01:49:35.520 --> 01:49:41.280
हाउ गॉड कैन एकिस्ट व्हेन चिल्ड्रन डाई इन

01:49:38.399 --> 01:49:44.479
काज़ा एंड यू आल्सो मेंशन द राइज़ ऑफ़ एथिज्म

01:49:41.279 --> 01:49:46.880
इन यूरोप बट द सेम इवेंट्स आल्सो आर

01:49:44.479 --> 01:49:49.359
लीडिंग मेनी एथिस्ट एंड नॉट बिलीवर्स टू

01:49:46.880 --> 01:49:52.719
टर्न टुवर्ड्स फेथ हाउ डू यू इंटरप्रेट

01:49:49.359 --> 01:49:55.679
दिस कंट्राडिक्शन वेल सफरिंग पुशेस सम अवे

01:49:52.719 --> 01:49:58.800
फ्रॉम गॉड येट ब्रिंग्स अदर्स क्लोजर टू

01:49:55.679 --> 01:50:01.600
बिलीफ आपको एक बात बताऊं दुनिया परफेक्ट

01:49:58.800 --> 01:50:05.760
तो कहीं भी नहीं है हर जगह कुछ खामियां है

01:50:01.600 --> 01:50:09.440
बेटा एक मिनट मैं आप ही को कहेंगे देखो वो

01:50:05.760 --> 01:50:12.480
तो कुछ खामियां कमजोरियां खराबियां सब जगह

01:50:09.439 --> 01:50:15.759
है लेकिन अगर देखोगे ईमानदारी से कि

01:50:12.479 --> 01:50:20.399
दुनिया सबसे ज्यादा मुजब कहां है एक आम

01:50:15.760 --> 01:50:22.480
शहरी को कहां हुकूक हासिल है वो बोल सकता

01:50:20.399 --> 01:50:24.960
है अपनी मर्जी से काम कर सकता है अपनी

01:50:22.479 --> 01:50:28.479
मर्जी से राय दे सकता है हुकूमत के खिलाफ

01:50:24.960 --> 01:50:31.039
बोल सकता है बरसरे इख्तेदार लोगों के बारे

01:50:28.479 --> 01:50:33.678
में बोल सकता है सरमायादारों के खिलाफ बोल

01:50:31.039 --> 01:50:35.439
सकता है तो आपको ये स्कडी नेवियन कंट्रीज

01:50:33.679 --> 01:50:37.600
में मिलेगा। वेस्टर्न यूरोप में मिलेगा।

01:50:35.439 --> 01:50:39.439
मैं नहीं कह रहा वो परफेक्ट है। बिल्कुल

01:50:37.600 --> 01:50:41.679
नहीं। वहां बहुत खराबियां भी है। परफेक्ट

01:50:39.439 --> 01:50:46.079
तो कोई नहीं। लेकिन जिनजिन मुल्कों में

01:50:41.679 --> 01:50:48.800
लैटिन अमेरिका देखो, गल्फ देखो। वहां पर

01:50:46.079 --> 01:50:51.118
आपको ये जरूर है कि रेप नहीं होते होंगे।

01:50:48.800 --> 01:50:53.679
रेप की जरूरत क्या है? भ उसको तो खरीद लो।

01:50:51.118 --> 01:50:57.359
घर में रखो। तो सड़क पे रेप करने की क्या

01:50:53.679 --> 01:51:01.039
जरूरत है? मगर सुनिए सुनिए सुनिए। मगर

01:50:57.359 --> 01:51:04.399
हकीकत ये है कि वहां शख्स आजादी राय देने

01:51:01.039 --> 01:51:06.560
की बोलने की नहीं है।

01:51:04.399 --> 01:51:09.599
जी ये एक आखरी सवाल मुफ्ती साहब से हां

01:51:06.560 --> 01:51:12.080
मैम इनको माइक दीजिए।

01:51:09.600 --> 01:51:14.320
शुक्रिया। मेरा नाम मनीषा है। मैं हरियाणा

01:51:12.079 --> 01:51:16.399
से आई हूं। मैं मुफ्ती साहब से एक बात

01:51:14.319 --> 01:51:18.238
पूछना चाहती हूं। आप बार-बार जावेद साहब

01:51:16.399 --> 01:51:20.799
को कंट्राडिक्ट तो कर रहे हैं कि आपने ये

01:51:18.238 --> 01:51:23.198
कहा ये कहा। लेकिन आप भी एजम्पशनंस के

01:51:20.800 --> 01:51:26.560
बेसिस पे बात कर रहे हैं। आपने खुदा के

01:51:23.198 --> 01:51:28.960
होने का कौन सा प्रूफ पेश किया है? खुदा

01:51:26.560 --> 01:51:30.800
की एक्सिस्टेंस का। अब मां इस सवाल को अलग

01:51:28.960 --> 01:51:33.840
रहने दीजिए कौन एथस्ट है कौन नहीं है। और

01:51:30.800 --> 01:51:36.239
दूसरी बात जो आपने एक छोटी सी कही थी के

01:51:33.840 --> 01:51:38.719
ये फ्री विल का इस्तेमाल करता है इंसान

01:51:36.238 --> 01:51:42.479
अपनी। लेकिन उस फ्री विल का इस्तेमाल में

01:51:38.719 --> 01:51:45.279
मतलब खुदा ने ये दे दी सबको ये इजाजत के

01:51:42.479 --> 01:51:46.879
वो कितना घिनौनापन और कितने ज्यादा खराब

01:51:45.279 --> 01:51:47.920
से खराब तरीके इस्तेमाल कर सकते हैं। लोग

01:51:46.880 --> 01:51:50.159
जब आप

01:51:47.920 --> 01:51:51.920
आप फ्री विल को मानती है ना या कहती है कि

01:51:50.158 --> 01:51:55.359
फ्री विल नहीं है।

01:51:51.920 --> 01:51:58.800
है ना? मानती है ना? तो अब आपके पास इसका

01:51:55.359 --> 01:52:01.118
कोई एक्सप्लेनेशन नहीं है कि अगर एक इंसान

01:51:58.800 --> 01:52:03.679
उस फ्री विल का इस्तेमाल करके गलत काम कर

01:52:01.118 --> 01:52:05.519
रहा है और बच के अच्छी जिंदगी गुजार के

01:52:03.679 --> 01:52:10.480
निकल जा रहा है उसका कोई रिकंपेंस नहीं

01:52:05.520 --> 01:52:12.639
है। हमारे वर्ल्ड व्यू में जो इंसान गलत

01:52:10.479 --> 01:52:15.198
काम कर रहा है उसको भी रिकंपैेंस यानी

01:52:12.639 --> 01:52:18.400
उसका बुरा बदला मिलना है और जो सही काम कर

01:52:15.198 --> 01:52:20.719
रहा है उसको सही बदला मिलना है। लिहाजा जो

01:52:18.399 --> 01:52:23.279
फ्री विल है वो इस तरीके से है कि एक

01:52:20.719 --> 01:52:25.039
लिमिटेड टाइम तक खुदा ने मोहलत दी है। ऐसा

01:52:23.279 --> 01:52:28.238
नहीं कि छूट दे दी जो करना है करते रहो

01:52:25.039 --> 01:52:30.399
हमेशा। वक्त आएगा जब एग्जाम का टाइम खत्म

01:52:28.238 --> 01:52:32.079
होगा तब रिजल्ट आएगा। दौरान एग्जाम

01:52:30.399 --> 01:52:34.719
जबरदस्ती आपको नहीं बताया जाएगा।

01:52:32.079 --> 01:52:39.800
अरे भाई एक सेकंड सवाल मुफ़्ती साहब से

01:52:34.719 --> 01:52:39.800
मेरा मैम मुफ्ती साहब सेम

01:52:40.319 --> 01:52:47.920
एक सेकंड रुक जाइए। आपसे आपसे

01:52:44.880 --> 01:52:50.880
मैं मुफ्ती साहब एक ही सवाल करता हूं

01:52:47.920 --> 01:52:55.199
के अगर जो हो रहा है फ्री विल से हो रहा

01:52:50.880 --> 01:52:57.599
है और एक दिन बरोज़ कयामत इंसाफ होगा महशर

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में वगैरह वगैरह

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तो दुआ क्यों मांगते हैं लोग

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दुआ मांगते हैं इसके मतलब है अभी भी उसने

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ये डिपार्टमेंट रखा है कि मैं रोजमर्रा की

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जिंदगी में इंटरव्यू ही कैन

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तो तुम कैन हो तुम मुझे नौकरी दिला देते

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हो। मेरे बेटे को ग्रीन कार्ड दिला देते

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हो और 45,000 बच्चे मरते हैं उन्हें रोकते

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नहीं हो।

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नहीं। तो क्या आप ये कह रहे हैं कि इस

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दुनिया में जालिमों को कभी पकड़ ही नहीं

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होती है।

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अरे जो भी पकड़ होगी वो बच्चे रोते हैं।

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बिल्कुल देखिए मैंने अपने ओपनिंग

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स्टेटमेंट में यही कहा था कि जनाब जावेद

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साहब सिर्फ इमोशनल आर्गुमेंट है। दिस इज़

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एन इमोशनल आर्गुमेंट।

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ये छोटे इसके पीछे

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इसके पीछे का रीज़न मैंने बताया क्या है?

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इसके पीछे का विज़डम क्या है? मैंने बताया।

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मंच से आप लोगों को सज्जनों इसलिए कह रहा

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हूं ताकि थोड़ा सा आपके कॉन्शेंस पे जोर

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रहे कि आपको आर्डर बचा के रखना है। वक्त

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तय हुआ था। ये वक्त पूरा हुआ। आपने इतने

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धैर्य पूर्वक सुना। मैं आप सबका बहुत-बहुत

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शुक्रगुजार हूं। यदि इन दोनों विद्वानों

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की इच्छा होगी। तो कभी हम इस बातचीत का

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राउंड टू राउंड थ्री यही तो देखिए खूबी है

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इंसान की कि बहस मुबासे में वो पड़ा रहता

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है। आप लोगों ने बड़े धैर्य का परिचय

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दिया। बहुत-बहुत शुक्रिया। इसी के साथ ये

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बातचीत

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आप लोग को मैं एक बात बता दूं। ये सारी

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बहस हो गई। अब मुफ्ती साहब और बड़े मुफ्ती

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साहब इन सब के साथ में खाना खाने वाला

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हूं।

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[संगीत]
