1 00:00:00,240 --> 00:00:05,278 हजारों साल तक [संगीत] हम इंसान इस धरती 2 00:00:02,480 --> 00:00:07,759 पर बस एक मेहमान की तरह थे। एक ऐसे यात्री 3 00:00:05,278 --> 00:00:10,638 जो विशाल जंगलों और अंतहीन मैदानों में 4 00:00:07,759 --> 00:00:13,199 भटकता रहता था। हमारी हर सुबह एक ही सवाल 5 00:00:10,638 --> 00:00:16,320 से शुरू होती थी। आज रात का खाना मिलेगा 6 00:00:13,199 --> 00:00:18,559 या नहीं? हर दिन जिंदगी बचाने की एक जंग 7 00:00:16,320 --> 00:00:21,118 थी। [संगीत] जहां या तो हम शिकारी थे या 8 00:00:18,559 --> 00:00:23,439 खुद किसी का शिकार बन जाते। हमारी आंखें 9 00:00:21,118 --> 00:00:26,160 आसमान में बादलों को नहीं बल्कि शिकारी 10 00:00:23,439 --> 00:00:28,160 परिंदों को खोजती थी। हमारे कान हवा की 11 00:00:26,160 --> 00:00:31,198 सरसराहट में किसी छिपे [संगीत] हुए दुश्मन 12 00:00:28,160 --> 00:00:34,320 की आहट सुनते थे। घर जैसी कोई चीज नहीं 13 00:00:31,199 --> 00:00:37,200 थी। बस गुफाओं की अस्थाई पनाहगाहें थी। 14 00:00:34,320 --> 00:00:40,238 जिंदगी का सिर्फ एक ही मकसद था किसी तरह 15 00:00:37,200 --> 00:00:42,800 जीवित [संगीत] रहना। लेकिन फिर आज से लगभग 16 00:00:40,238 --> 00:00:45,919 12,000 साल पहले कुछ ऐसा हुआ [संगीत] 17 00:00:42,799 --> 00:00:48,469 जिसने सब कुछ बदल दिया। जब आखिरी हिमयुग 18 00:00:45,920 --> 00:00:50,719 की बर्फ पिघल रही थी और धरती एक नई करवट 19 00:00:48,469 --> 00:00:53,054 [संगीत] ले रही थी। हमारे पूर्वजों ने 20 00:00:50,719 --> 00:00:56,160 प्रकृति के एक बहुत ही साधारण से नियम में 21 00:00:53,054 --> 00:00:58,799 [संगीत] एक असाधारण राज खोज निकाला। एक 22 00:00:56,159 --> 00:01:01,439 ऐसा राज जो हमें भटकते हुए शिकारी से 23 00:00:58,799 --> 00:01:04,478 अन्नदाता बनाने वाला था। खानाबदोश [संगीत] 24 00:01:01,439 --> 00:01:07,438 से समाज बनाने वाला था और पत्थर के औजारों 25 00:01:04,478 --> 00:01:09,760 से भविष्य लिखने वाला था। यह कहानी सिर्फ 26 00:01:07,438 --> 00:01:13,039 गेहूं के एक दाने या चावल की एक बाली की 27 00:01:09,760 --> 00:01:16,000 नहीं है। यह उस चिंगारी की कहानी है जिसने 28 00:01:13,040 --> 00:01:19,040 इंसानियत के सफर को एक नई रफ्तार दी। यह 29 00:01:16,000 --> 00:01:23,599 उस एक खोज की कहानी है जिसने हमें और आपको 30 00:01:19,040 --> 00:01:26,000 बनाया। तो आखिर वह कौन सी खोज थी? चलिए आज 31 00:01:23,599 --> 00:01:29,199 समय में पीछे चलते हैं और उस क्रांति की 32 00:01:26,000 --> 00:01:31,040 कहानी को परत दर परत खोलते हैं। जरा आज से 33 00:01:29,200 --> 00:01:33,600 12,000 साल पहले [संगीत] की दुनिया की 34 00:01:31,040 --> 00:01:37,040 कल्पना कीजिए। एक ऐसी दुनिया जिसमें ना 35 00:01:33,599 --> 00:01:40,559 शहर थे, ना गांव, ना खेत और ना ही अगले पल 36 00:01:37,040 --> 00:01:43,280 की कोई गारंटी। यह पुरापाषाण और मध्यपाषाण 37 00:01:40,560 --> 00:01:46,478 युग का समय था। मानव इतिहास का वह लंबा 38 00:01:43,280 --> 00:01:48,799 दौर जब हम शिकारी संग्राहक थे। हमारे 39 00:01:46,478 --> 00:01:50,879 पूर्वज 20 से 30 लोगों के छोटे-छोटे 40 00:01:48,799 --> 00:01:53,759 कबीलों में रहते थे। [संगीत] जो लगातार 41 00:01:50,879 --> 00:01:56,879 भोजन और पानी की तलाश में एक जगह से दूसरी 42 00:01:53,759 --> 00:01:59,359 जगह भटकते रियलिटीज थे। उनकी पूरी जिंदगी 43 00:01:56,879 --> 00:02:02,158 प्रकृति [संगीत] के इशारों पर चलती थी। जब 44 00:01:59,359 --> 00:02:04,879 किसी इलाके में फल और कंदमूल खत्म हो जाते 45 00:02:02,159 --> 00:02:07,200 या जानवरों के झुंड कहीं और चले जाते तो 46 00:02:04,879 --> 00:02:10,318 पूरे कबीले को अपना सामान समेट कर [संगीत] 47 00:02:07,200 --> 00:02:12,560 एक नई मंजिल की ओर निकलना पड़ता था। यह एक 48 00:02:10,318 --> 00:02:15,359 कभी ना खत्म होने वाली यात्रा थी। [संगीत] 49 00:02:12,560 --> 00:02:17,759 इस जीवन में घर या स्थायित्व जैसी कोई बात 50 00:02:15,360 --> 00:02:20,720 ही नहीं थी। गुफाएं और पेड़ों [संगीत] की 51 00:02:17,759 --> 00:02:23,359 छांव ही उनका अस्थाई आशियाना हुआ करती थी। 52 00:02:20,719 --> 00:02:26,080 उनके औजार बहुत ही सरल थे। पत्थर को 53 00:02:23,360 --> 00:02:28,959 तोड़कर या दूसरे पत्थर पर घिसकर बनाए गए 54 00:02:26,080 --> 00:02:31,120 मोटे और भारी हथियार। इन्हीं पत्थरों से 55 00:02:28,959 --> 00:02:33,519 वह जानवरों का शिकार करते, [संगीत] उनकी 56 00:02:31,120 --> 00:02:36,239 खाल उतारते और हड्डियों को तोड़कर गुदा 57 00:02:33,519 --> 00:02:39,680 निकालते थे। यह एक मुश्किल और बेरहम 58 00:02:36,239 --> 00:02:42,239 जिंदगी थी। हर दिन एक नई चुनौती थी। कभी 59 00:02:39,680 --> 00:02:45,519 खूंखार जानवरों से सामना होता तो कभी 60 00:02:42,239 --> 00:02:48,560 बदलते मौसम की मार झेलनी पड़ती। भूख एक 61 00:02:45,519 --> 00:02:51,439 स्थाई साथी की तरह थी और मौत हमेशा आसपास 62 00:02:48,560 --> 00:02:54,560 ही मंडराती रहती थी। लेकिन इस संघर्ष के 63 00:02:51,439 --> 00:02:57,519 बीच भी हमारे पूर्वज बेवकूफ नहीं थे। वे 64 00:02:54,560 --> 00:03:00,479 अपने पर्यावरण के विशेषज्ञ थे। उन्हें पता 65 00:02:57,519 --> 00:03:02,747 था कि कौन सा फल जहरीला है और कौन सा खाने 66 00:03:00,479 --> 00:03:05,280 लायक। वे जानवरों के पैरों के निशान 67 00:03:02,747 --> 00:03:08,080 [संगीत] पढ़ सकते थे। मौसम का अंदाजा लगा 68 00:03:05,280 --> 00:03:10,959 सकते थे और जानते थे कि किस मौसम में कौन 69 00:03:08,080 --> 00:03:13,440 से पौधे कहां मिलेंगे। उन्होंने आग पर 70 00:03:10,959 --> 00:03:15,840 काबू पाना सीख लिया था। जो शायद मानव 71 00:03:13,439 --> 00:03:17,840 इतिहास की [संगीत] पहली बड़ी क्रांति थी। 72 00:03:15,840 --> 00:03:19,840 आग ने उन्हें सिर्फ गर्मी और रोशनी ही 73 00:03:17,840 --> 00:03:22,640 नहीं दी बल्कि जंगली [संगीत] जानवरों से 74 00:03:19,840 --> 00:03:25,360 सुरक्षा भी दी। अब वे कच्चा मांस खाने की 75 00:03:22,639 --> 00:03:28,639 जगह भुना हुआ भोजन खा सकते थे जो पचाने 76 00:03:25,360 --> 00:03:30,560 में आसान था और ज्यादा पोषण देता था। इस 77 00:03:28,639 --> 00:03:33,518 जीवन शैली में एक अजीब सी बराबरी [संगीत] 78 00:03:30,560 --> 00:03:36,479 भी थी। कोई अमीर या गरीब नहीं था क्योंकि 79 00:03:33,519 --> 00:03:38,959 निजी संपत्ति जैसी कोई चीज ही नहीं थी। जो 80 00:03:36,479 --> 00:03:41,391 कुछ भी जमा होता था, वह पूरे कबीले में 81 00:03:38,959 --> 00:03:41,920 बराबर बांटा जाता था। जिंदगी मुश्किल 82 00:03:41,391 --> 00:03:45,280 [संगीत] 83 00:03:41,919 --> 00:03:47,439 थी पर सब साथ मिलकर जीते थे। मध्य प्रदेश 84 00:03:45,280 --> 00:03:49,759 की भीमबेटका [संगीत] जैसी गुफाओं में मिली 85 00:03:47,439 --> 00:03:51,919 हजारों साल पुरानी चित्रकारी इस बात की 86 00:03:49,759 --> 00:03:55,359 गवाह है कि शिकार और [संगीत] संघर्ष के 87 00:03:51,919 --> 00:03:57,679 बीच भी उनके अंदर एक कलाकार जिंदा था। वे 88 00:03:55,360 --> 00:03:59,200 अपनी जिंदगी, अपने शिकार और अपने 89 00:03:57,680 --> 00:04:02,799 रीति-रिवाजों को चट्टानों [संगीत] पर 90 00:03:59,199 --> 00:04:05,518 उकेरते थे। लाखों सालों तक इंसान ने ऐसी 91 00:04:02,799 --> 00:04:09,200 ही जिंदगी जी। यह मानव इतिहास [संगीत] का 92 00:04:05,519 --> 00:04:11,519 96% हिस्सा है। एक ऐसी जिंदगी जिसमें 93 00:04:09,199 --> 00:04:14,798 भविष्य की योजना बनाने का कोई मतलब नहीं 94 00:04:11,519 --> 00:04:17,120 था क्योंकि अगला दिन ही अनिश्चित था। वे 95 00:04:14,799 --> 00:04:20,400 प्रकृति के साथ एक संतुलन में तो जी रहे 96 00:04:17,120 --> 00:04:23,312 थे लेकिन वे हमेशा उसकी दया पर निर्भर थे। 97 00:04:20,399 --> 00:04:25,198 पर अब यह सब बदलने वाला था। एक ऐसी 98 00:04:23,312 --> 00:04:28,000 [संगीत] ताकत दस्तक दे रही थी जो इस 99 00:04:25,199 --> 00:04:29,759 संतुलन को हमेशा के लिए तोड़कर इंसानियत 100 00:04:28,000 --> 00:04:32,879 को एक नए रास्ते पर ले जाने [संगीत] वाली 101 00:04:29,759 --> 00:04:35,520 थी। लाखों साल के ठहराव के बाद आखिर ऐसा 102 00:04:32,879 --> 00:04:36,959 क्या हुआ कि इंसान ने हजारों सालों की 103 00:04:35,519 --> 00:04:39,758 अपनी शिकारी जीवनशैली [संगीत] 104 00:04:36,959 --> 00:04:42,239 को छोड़ने का फैसला कर लिया। यह कोई एक 105 00:04:39,759 --> 00:04:44,479 दिन में हुआ चमत्कार नहीं था बल्कि इसके 106 00:04:42,240 --> 00:04:47,918 पीछे कई बड़ी [संगीत] वजह थी। जिसमें 107 00:04:44,478 --> 00:04:50,000 संयोग मजबूरी और प्रकृति का एक बहुत बड़ा 108 00:04:47,918 --> 00:04:54,079 खेल [संगीत] शामिल था। इस कहानी का एक 109 00:04:50,000 --> 00:04:55,839 बड़ा मोड़ आज से लगभग 12,900 से 11,700 110 00:04:54,079 --> 00:04:58,639 साल पहले आया। इस समय [संगीत] को 111 00:04:55,839 --> 00:05:01,918 वैज्ञानिक यंगर ड्राइस कहते हैं जब धरती 112 00:04:58,639 --> 00:05:04,560 का मौसम अचानक बहुत ठंडा और सूखा हो गया। 113 00:05:01,918 --> 00:05:06,879 यह एक छोटे हिमयुग जैसा था। [संगीत] इसका 114 00:05:04,560 --> 00:05:09,439 कारण पूरी तरह साफ नहीं है। लेकिन एक 115 00:05:06,879 --> 00:05:11,600 दमदार सिद्धांत यह है कि पिघलते हुए 116 00:05:09,439 --> 00:05:14,000 ग्लेशियरों का विशाल मीठा पानी [संगीत] 117 00:05:11,600 --> 00:05:16,080 उत्तरी अटलांटिक महासागर में बह गया। 118 00:05:14,000 --> 00:05:18,959 जिससे समुद्र की गर्मी को बैलेंस करने 119 00:05:16,079 --> 00:05:22,159 वाली धाराएं रुक गई। वजह चाहे जो भी हो 120 00:05:18,959 --> 00:05:25,038 इसका असर विनाशकारी था। तापमान अचानक गिर 121 00:05:22,160 --> 00:05:27,039 गया। जंगल सिकुड़ने लगे और मैमथ जैसे 122 00:05:25,038 --> 00:05:29,839 विशालकाय जानवर [संगीत] जिनका हमारे 123 00:05:27,038 --> 00:05:32,719 पूर्वज शिकार करते थे धीरे-धीरे विलुप्त 124 00:05:29,839 --> 00:05:35,279 होने लगे। यह एक प्रलय जैसी स्थिति थी। 125 00:05:32,720 --> 00:05:37,919 जिन जंगलों और मैदानों पर शिकारी संग्राहक 126 00:05:35,279 --> 00:05:40,638 भोजन के लिए निर्भर थे, वे या तो बंजर हो 127 00:05:37,918 --> 00:05:42,959 गए या बर्फीली ठंड की चपेट में आ गए। 128 00:05:40,639 --> 00:05:45,280 सीरिया में अबू हुरैरा जैसे पुरातात्विक 129 00:05:42,959 --> 00:05:48,000 स्थलों से मिले सबूत बताते हैं कि इस 130 00:05:45,279 --> 00:05:50,719 दौरान शिकारी संग्राहक समुदायों को भोजन 131 00:05:48,000 --> 00:05:53,360 के भयानक संकट का सामना करना पड़ा। उनके 132 00:05:50,720 --> 00:05:55,680 खाने के पारंपरिक स्रोत खत्म हो रहे थे। 133 00:05:53,360 --> 00:05:59,038 अब सिर्फ शिकार पर निर्भर रहना नामुमकिन 134 00:05:55,680 --> 00:06:01,439 था। शायद इसी मजबूरी और हताशा के आलम में 135 00:05:59,038 --> 00:06:04,079 किसी ने कुछ [संगीत] ऐसा देखा होगा जिस पर 136 00:06:01,439 --> 00:06:06,800 पहले कभी किसी ने ध्यान नहीं दिया था। हो 137 00:06:04,079 --> 00:06:09,038 सकता है यह एक महिला रही हो जो अपने कबीले 138 00:06:06,800 --> 00:06:11,439 के लिए जंगली अनाज के दाने इकट्ठा कर रही 139 00:06:09,038 --> 00:06:14,000 थी। शायद कुछ दाने गलती [संगीत] से उसके 140 00:06:11,439 --> 00:06:16,560 डेरे के पास नम जमीन पर गिर गए हो। कुछ 141 00:06:14,000 --> 00:06:18,593 हफ्तों बाद जब बारिश हुई, तो उसने देखा 142 00:06:16,560 --> 00:06:21,439 होगा कि उन्हीं गिरे हुए दानों से नए 143 00:06:18,593 --> 00:06:24,079 [संगीत] पौधे उगाए हैं। यह एक जादुई पल 144 00:06:21,439 --> 00:06:26,959 रहा होगा। यह समझना कि [संगीत] बीज सिर्फ 145 00:06:24,079 --> 00:06:29,728 खाने के लिए नहीं है बल्कि उनसे नया जीवन, 146 00:06:26,959 --> 00:06:31,758 नया भोजन पैदा किया जा सकता है। यह मानव 147 00:06:29,728 --> 00:06:34,800 [संगीत] इतिहास का सबसे बड़ा यूरे का 148 00:06:31,759 --> 00:06:38,000 मोमेंट था। यह किसी एक इंसान या एक जगह की 149 00:06:34,800 --> 00:06:39,680 खोज नहीं थी। यह एक धीमी प्रक्रिया थी। जो 150 00:06:38,000 --> 00:06:42,560 शायद दुनिया के कई [संगीत] हिस्सों में 151 00:06:39,680 --> 00:06:44,793 अलग-अलग समय पर हो रही थी। लोग धीरे-धीरे 152 00:06:42,560 --> 00:06:47,280 समझने लगे थे कि अगर वे बीजों को फेंकने 153 00:06:44,793 --> 00:06:49,839 [संगीत] के बजाय उन्हें सहेज कर रखें और 154 00:06:47,279 --> 00:06:52,478 सही समय पर मिट्टी में बो दें तो उन्हें 155 00:06:49,839 --> 00:06:55,198 भोजन के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। वे अपना 156 00:06:52,478 --> 00:06:59,918 भोजन [संगीत] खुद उगा सकते हैं। यंगर राइस 157 00:06:55,199 --> 00:07:02,400 की ठंडक लगभग 10150 से 10300 साल तक चली। 158 00:06:59,918 --> 00:07:04,560 जब यह दौर खत्म हुआ और जलवायु फिर से 159 00:07:02,399 --> 00:07:07,359 स्थिर और गर्म होने लगी [संगीत] तो खेती 160 00:07:04,560 --> 00:07:10,399 के लिए हालात और भी अच्छे हो गए। अब इंसान 161 00:07:07,360 --> 00:07:12,319 के पास ज्ञान भी था और प्रकृति का साथ भी। 162 00:07:10,399 --> 00:07:15,578 कुछ इतिहासकार [संगीत] इसमें एक मजेदार 163 00:07:12,319 --> 00:07:17,919 पहलू और जोड़ते हैं। आलस। हो सकता है 164 00:07:15,579 --> 00:07:20,163 [संगीत] कुछ कबीले बस इसलिए एक जगह टिक गए 165 00:07:17,918 --> 00:07:22,318 क्योंकि वे भोजन के लिए दूरदराज के इलाकों 166 00:07:20,163 --> 00:07:24,639 [संगीत] में भटक-भटक कर थक चुके थे। 167 00:07:22,319 --> 00:07:26,639 उन्हें यह विचार ज्यादा आकर्षक लगा कि 168 00:07:24,639 --> 00:07:29,759 क्यों ना भोजन को ही अपने पास उगा लिया 169 00:07:26,639 --> 00:07:32,240 जाए। बजाय इसके कि भोजन के पीछे भागा जाए। 170 00:07:29,759 --> 00:07:34,800 कारण [संगीत] चाहे जो भी रहा हो जलवायु का 171 00:07:32,240 --> 00:07:37,598 दबाव, एक अचानक हुई खोज या बस [संगीत] 172 00:07:34,800 --> 00:07:40,160 भटकते जीवन से छुटकारा पाने की इच्छा एक 173 00:07:37,598 --> 00:07:42,879 चिंगारी सुलग चुकी थी। [संगीत] इंसान ने 174 00:07:40,160 --> 00:07:45,599 प्रकृति के कोड को क्रैक कर लिया था। अब 175 00:07:42,879 --> 00:07:48,240 वह सिर्फ प्रकृति से लेने वाला नहीं बल्कि 176 00:07:45,598 --> 00:07:50,959 उसे आकार देने वाला बनने की राह पर था। 177 00:07:48,240 --> 00:07:53,280 शिकार का युग खत्म हो रहा था और किसान का 178 00:07:50,959 --> 00:07:56,318 जन्म होने वाला था। खेती की वह चिंगारी 179 00:07:53,279 --> 00:07:59,198 सबसे पहले मध्य पूर्व के खास इलाके में एक 180 00:07:56,319 --> 00:08:01,430 बड़ी आग में बदली। इस इलाके को इतिहासकार 181 00:07:59,199 --> 00:08:02,079 फर्टाइल क्रिसेंट या उपजाऊ अर्धचंद्र 182 00:08:01,430 --> 00:08:04,720 [संगीत] 183 00:08:02,079 --> 00:08:07,120 कहते हैं। यह आज के इजराइल, जॉर्डन, 184 00:08:04,720 --> 00:08:09,840 सीरिया, तुर्की, इराक और ईरान के कुछ 185 00:08:07,120 --> 00:08:13,199 हिस्सों को मिलाकर बना एक चांद के आकार का 186 00:08:09,839 --> 00:08:14,399 क्षेत्र था। यह इलाका बहुत खास था। यहां 187 00:08:13,199 --> 00:08:17,439 टिगरिस और यूफिट्स [संगीत] 188 00:08:14,399 --> 00:08:19,679 जैसी नदियां बहती थी और सबसे जरूरी बात 189 00:08:17,439 --> 00:08:22,879 यहां गेहूं और जौ जैसी जंगली घासें 190 00:08:19,680 --> 00:08:25,598 बहुतायत में थी। यहीं पर लगभग 10,000 ईसा 191 00:08:22,879 --> 00:08:28,479 पूर्व के आसपास दुनिया के पहले किसानों ने 192 00:08:25,598 --> 00:08:30,719 जानबूझकर बीज बोना और फसल काटना शुरू 193 00:08:28,478 --> 00:08:33,519 किया। [संगीत] यह नवपाषाण क्रांति की 194 00:08:30,720 --> 00:08:36,800 औपचारिक शुरुआत थी। जो फसलें उन्होंने 195 00:08:33,519 --> 00:08:40,000 सबसे पहले उगानी शुरू की वे थी गेहूं, जौ, 196 00:08:36,799 --> 00:08:42,694 मटर, मसूर और चना। लेकिन यह प्रक्रिया 197 00:08:40,000 --> 00:08:44,720 सीधी नहीं थी। जंगली गेहूं के दाने छोटे 198 00:08:42,695 --> 00:08:47,040 [संगीत] होते थे और पकने पर बालियां टूट 199 00:08:44,720 --> 00:08:49,440 कर बिखर जाती थी। जिससे उन्हें इकट्ठा 200 00:08:47,039 --> 00:08:52,000 करना बहुत मुश्किल होता था। शुरुआती 201 00:08:49,440 --> 00:08:54,080 किसानों ने शायद अनजाने में ही एक तरह की 202 00:08:52,000 --> 00:08:56,639 जेनेटिक इंजीनियरिंग शुरू कर दी। [संगीत] 203 00:08:54,080 --> 00:08:59,360 वे उन पौधों के बीजों को अगले साल बोने के 204 00:08:56,639 --> 00:09:02,399 लिए चुनते थे जिनकी बालियां मजबूत होती थी 205 00:08:59,360 --> 00:09:04,800 और दाने बड़े होते थे। हजारों सालों की इस 206 00:09:02,399 --> 00:09:07,919 चयन प्रक्रिया [संगीत] के बाद जंगली पौधे 207 00:09:04,799 --> 00:09:10,319 धीरे-धीरे घरेलू फसलों में बदल गए। खेती 208 00:09:07,919 --> 00:09:12,179 के साथ-साथ औजारों में भी क्रांति आई। 209 00:09:10,320 --> 00:09:14,800 पुरापाषाण काल के भारीभरकम पत्थरों 210 00:09:12,179 --> 00:09:17,759 [संगीत] की जगह अब नवपाषाण युग के ज्यादा 211 00:09:14,799 --> 00:09:20,559 बेहतर और पॉलिश किए हुए औजारों ने ले ली। 212 00:09:17,759 --> 00:09:23,306 जमीन खोदने के लिए पत्थर की कुदालें बनी। 213 00:09:20,559 --> 00:09:25,599 फसल काटने के लिए चकमक पत्थर या हड्डियों 214 00:09:23,306 --> 00:09:28,000 [संगीत] से बनी दरती का आविष्कार हुआ। 215 00:09:25,600 --> 00:09:30,720 अनाज पीसकर आटा बनाने के लिए पत्थर के 216 00:09:28,000 --> 00:09:33,130 सिलबट्टे [संगीत] बनाए गए। यह औजार भले ही 217 00:09:30,720 --> 00:09:35,600 साधारण लगे पर इन्होंने खेती को कहीं 218 00:09:33,130 --> 00:09:38,480 [संगीत] ज्यादा आसान बना दिया। यह क्रांति 219 00:09:35,600 --> 00:09:40,480 सिर्फ एक जगह तक सीमित नहीं रही। चीन में 220 00:09:38,480 --> 00:09:43,278 यांगजी और पीली नदी की घाटियों [संगीत] 221 00:09:40,480 --> 00:09:45,920 में लगभग 9000 साल पहले लोगों ने जंगली 222 00:09:43,278 --> 00:09:48,196 चावल को उगाना शुरू किया। अमेरिका में 223 00:09:45,919 --> 00:09:50,319 मक्का और सेम की खेती शुरू हुई और अफ्रीका 224 00:09:48,196 --> 00:09:53,120 [संगीत] में ज्वार और बाजरा उगाया जाने 225 00:09:50,320 --> 00:09:55,920 लगा। अब कहानी को भारतीय उपमहाद्वीप 226 00:09:53,120 --> 00:09:58,480 मिलाते हैं। यहां कृषि क्रांति के सबसे 227 00:09:55,919 --> 00:10:00,319 पुराने सबूतों में से एक मेहरगढ़ नामक 228 00:09:58,480 --> 00:10:02,480 स्थल से मिलते हैं जो आज [संगीत] के 229 00:10:00,320 --> 00:10:05,519 पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित 230 00:10:02,480 --> 00:10:07,680 है। मेहरगढ़ में पुरातत्वविदों को 7000 231 00:10:05,519 --> 00:10:10,080 ईसा पूर्व के भी सबूत [संगीत] मिले हैं जो 232 00:10:07,679 --> 00:10:12,719 दिखाते हैं कि यहां के लोग गेहूं और जौ की 233 00:10:10,080 --> 00:10:15,440 खेती करते थे और भेड़ बकरियों को पालते 234 00:10:12,720 --> 00:10:18,399 थे। यह सिंधु घाटी सभ्यता से भी हजारों 235 00:10:15,440 --> 00:10:20,947 साल पुराना है और भारतीय उपमहाद्वीप में 236 00:10:18,399 --> 00:10:23,200 खेती और स्थाई बस्तियों की शुरुआत का सबसे 237 00:10:20,947 --> 00:10:25,519 [संगीत] मजबूत प्रमाण माना जाता है। 238 00:10:23,200 --> 00:10:28,399 मेहरगढ़ की खुदाई में मिट्टी की ईंटों से 239 00:10:25,519 --> 00:10:30,320 बने घर, अनाज रखने के भंडार, पत्थर के 240 00:10:28,399 --> 00:10:32,958 औजार और यहां [संगीत] तक कि दुनिया में 241 00:10:30,320 --> 00:10:36,399 कपास की खेती के शुरुआती सबूतों में से एक 242 00:10:32,958 --> 00:10:38,719 मिला है। मेहरगढ़ अकेला नहीं था। उत्तर 243 00:10:36,399 --> 00:10:40,958 प्रदेश की बेलन घाटी से चावल की खेती के 244 00:10:38,720 --> 00:10:44,480 शुरुआती सबूत मिले हैं [संगीत] जो लगभग 245 00:10:40,958 --> 00:10:46,958 4500 ईसा पूर्व के हो सकते हैं। बिहार के 246 00:10:44,480 --> 00:10:48,959 चिरांद जैसे स्थलों से [संगीत] भी नवपाषाण 247 00:10:46,958 --> 00:10:52,000 युग की कृषि बस्तियों के अवशेष मिले हैं। 248 00:10:48,958 --> 00:10:54,958 खेती के साथ एक नई चुनौती सामने आई। फसल 249 00:10:52,000 --> 00:10:57,360 को जमा कैसे किया जाए? इस जरूरत ने एक और 250 00:10:54,958 --> 00:11:00,319 बड़े आविष्कार को जन्म दिया। मिट्टी के 251 00:10:57,360 --> 00:11:02,480 बर्तन। शुरुआती किसानों ने गीली मिट्टी को 252 00:11:00,320 --> 00:11:06,079 आकार देकर और फिर उसे आग [संगीत] में 253 00:11:02,480 --> 00:11:08,560 पकाकर मजबूत बर्तन बनाना सीखा। इन बर्तनों 254 00:11:06,078 --> 00:11:10,958 में वे अनाज और पानी को चूहों और नमी से 255 00:11:08,559 --> 00:11:13,679 बचाकर सुरक्षित [संगीत] रख सकते थे। इस 256 00:11:10,958 --> 00:11:16,319 तरह बीज बोने के एक छोटे से विचार ने पूरी 257 00:11:13,679 --> 00:11:18,799 दुनिया को बदलना शुरू कर दिया था। खेत 258 00:11:16,320 --> 00:11:21,278 तैयार थे, [संगीत] औजार हाथ में थे और 259 00:11:18,799 --> 00:11:24,479 अनाज को सहेजने के लिए बर्तन भी बन चुके 260 00:11:21,278 --> 00:11:27,039 थे। इंसान अब सिर्फ एक शिकारी नहीं था। वो 261 00:11:24,480 --> 00:11:29,440 एक निर्माता [संगीत] बन चुका था। लेकिन इस 262 00:11:27,039 --> 00:11:32,341 बदलाव का असर सिर्फ उसके पेट तक ही सीमित 263 00:11:29,440 --> 00:11:35,440 नहीं रहने वाला था। यह उसके पूरे समाज 264 00:11:32,341 --> 00:11:37,439 [संगीत] को जड़ से बदलने वाला था। खेती के 265 00:11:35,440 --> 00:11:40,399 आविष्कार ने मानव समाज के [संगीत] पूरे 266 00:11:37,440 --> 00:11:42,399 ताने-बाने को हमेशा के लिए बदल दिया। यह 267 00:11:40,399 --> 00:11:44,958 सिर्फ भोजन पैदा करने का एक नया तरीका 268 00:11:42,399 --> 00:11:47,919 नहीं था बल्कि यह जीवन [संगीत] जीने का एक 269 00:11:44,958 --> 00:11:50,399 बिल्कुल नया नजरिया था। जिसके असर इतने 270 00:11:47,919 --> 00:11:52,879 गहरे हुए कि हम आज [संगीत] भी उसी दुनिया 271 00:11:50,399 --> 00:11:56,240 में जी रहे हैं जिसकी नींव पहले किसानों 272 00:11:52,879 --> 00:11:59,360 ने रखी थी। इसका सबसे पहला और सबसे बड़ा 273 00:11:56,240 --> 00:12:02,560 असर था स्थायित्व। शिकारी संग्राहक का 274 00:11:59,360 --> 00:12:05,360 जीवन एक अंतहीन सफर था। लेकिन किसान को 275 00:12:02,559 --> 00:12:08,078 अपनी जमीन और फसल के पास रहना पड़ता था। 276 00:12:05,360 --> 00:12:11,680 उसे बीज बोने, पौधों की देखभाल करने और 277 00:12:08,078 --> 00:12:14,000 फसल पकने तक उसकी रक्षा करने की जरूरत थी। 278 00:12:11,679 --> 00:12:17,199 इसी जरूरत ने उसे एक जगह टिकने [संगीत] पर 279 00:12:14,000 --> 00:12:19,919 मजबूर कर दिया और इसी से स्थाई बस्तियों 280 00:12:17,200 --> 00:12:22,240 और गांव का जन्म हुआ। जेरीो [संगीत] जो आज 281 00:12:19,919 --> 00:12:24,879 के फिलिस्तीन में है और मेहरगढ़ जैसे 282 00:12:22,240 --> 00:12:28,320 स्थान दुनिया के कुछ सबसे पुराने ज्ञात 283 00:12:24,879 --> 00:12:31,120 गांव हैं। अब इंसान के पास एक घर था। एक 284 00:12:28,320 --> 00:12:34,000 स्थाई [संगीत] पता था। खेती के साथ-साथ एक 285 00:12:31,120 --> 00:12:36,240 और क्रांति चल रही थी। पशुपालन। 286 00:12:34,000 --> 00:12:38,799 इंसानों ने महसूस किया कि कुछ जानवरों को 287 00:12:36,240 --> 00:12:42,159 मारने के बजाय उन्हें जिंदा पकड़ कर पालना 288 00:12:38,799 --> 00:12:45,199 ज्यादा फायदेमंद है। भेड़, बकरी, गाय और 289 00:12:42,159 --> 00:12:47,519 सूअर जैसे जानवरों को पालतू बनाया गया। यह 290 00:12:45,200 --> 00:12:50,288 जानवर सिर्फ मांस का स्रोत नहीं थे। 291 00:12:47,519 --> 00:12:52,399 भेड़ों से ऊन, गाय, बकरियों से दूध 292 00:12:50,288 --> 00:12:55,200 [संगीत] और बैलों का इस्तेमाल खेत जोतने 293 00:12:52,399 --> 00:12:57,600 और भारी बोझ ढोने के लिए होने लगा। 294 00:12:55,200 --> 00:13:01,519 जैसे-जैसे गांव बड़े हुए और खेती बेहतर 295 00:12:57,600 --> 00:13:03,440 हुई, एक और बड़ा बदलाव आया। खाद्य अधिशेष 296 00:13:01,519 --> 00:13:06,399 यानी जरूरत से ज्यादा अनाज का [संगीत] 297 00:13:03,440 --> 00:13:08,959 पैदा होना। शिकारी जीवन में हर किसी को 298 00:13:06,399 --> 00:13:11,519 भोजन खोजने में लगना पड़ता था। लेकिन अब 299 00:13:08,958 --> 00:13:14,159 कुछ किसानों की मेहनत पूरे गांव का पेट भर 300 00:13:11,519 --> 00:13:17,039 सकती थी। इसने समाज [संगीत] में पहली बार 301 00:13:14,159 --> 00:13:19,759 श्रम विभाजन को जन्म दिया। अब हर कोई 302 00:13:17,039 --> 00:13:22,319 किसान नहीं था। जिन्हें खेती करने की 303 00:13:19,759 --> 00:13:25,039 जरूरत नहीं थी, वे दूसरे कामों में माहिर 304 00:13:22,320 --> 00:13:27,760 होने लगे। कुछ लोग मिट्टी के बर्तन बनाने 305 00:13:25,039 --> 00:13:30,399 वाले कुम्हार बन गए। कुछ पत्थर के औजार 306 00:13:27,759 --> 00:13:34,480 बनाने वाले कारीगर तो कुछ कपड़े बुनने 307 00:13:30,399 --> 00:13:38,000 वाले बुनकर। समाज अब सरल नहीं रहा वो जटिल 308 00:13:34,480 --> 00:13:41,519 होने लगा था। इसी अधिशेष और श्रम विभाजन 309 00:13:38,000 --> 00:13:44,799 से एक शक्तिशाली और नई सोच पैदा हुई। निजी 310 00:13:41,519 --> 00:13:48,078 संपत्ति। शिकारी समाज में सब कुछ साझा 311 00:13:44,799 --> 00:13:51,199 होता था। लेकिन अब पहली बार यह मेरी जमीन 312 00:13:48,078 --> 00:13:54,399 है। यह मेरी फसल है और यह मेरे जानवर हैं 313 00:13:51,200 --> 00:13:57,099 का विचार पनपा। जिसके पास ज्यादा जमीन, 314 00:13:54,399 --> 00:13:59,839 अनाज और जानवर होते, वह ज्यादा शक्तिशाली 315 00:13:57,099 --> 00:14:03,360 [संगीत] और अमीर माना जाने लगा। यहीं से 316 00:13:59,839 --> 00:14:06,079 समाज में असमानता की शुरुआत हुई। गांव का 317 00:14:03,360 --> 00:14:08,159 आकार बढ़ने और समाज के जटिल होने के साथ 318 00:14:06,078 --> 00:14:10,559 व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमों और 319 00:14:08,159 --> 00:14:13,838 नेतृत्व की जरूरत [संगीत] महसूस हुई। 320 00:14:10,559 --> 00:14:17,278 विवादों को कौन सुलझाएगा? अनाज के भंडार 321 00:14:13,839 --> 00:14:19,680 की रक्षा कौन करेगा? इन सवालों ने मुखिया, 322 00:14:17,278 --> 00:14:23,120 सरदार या राजा जैसी भूमिकाओं को जन्म 323 00:14:19,679 --> 00:14:26,159 दिया। समाज में एक पदानुक्रम बनने लगा 324 00:14:23,120 --> 00:14:29,039 जिसमें शासक, पुजारी, सैनिक और आम लोग 325 00:14:26,159 --> 00:14:32,319 शामिल थे। कृषि ने जनसंख्या में एक 326 00:14:29,039 --> 00:14:34,434 अभूतपूर्व विस्फोट को भी संभव बनाया। एक 327 00:14:32,320 --> 00:14:36,079 शिकारी मां के लिए घूमते हुए जीवन में 328 00:14:34,434 --> 00:14:39,518 [संगीत] एक से ज्यादा छोटे बच्चों की 329 00:14:36,078 --> 00:14:41,639 देखभाल करना लगभग नामुमकिन था। लेकिन एक 330 00:14:39,519 --> 00:14:43,759 स्थाई गांव में एक महिला ज्यादा बच्चों को 331 00:14:41,639 --> 00:14:47,039 [संगीत] जन्म दे सकती थी और उनकी बेहतर 332 00:14:43,759 --> 00:14:49,759 देखभाल कर सकती थी। ज्यादा भोजन का मतलब 333 00:14:47,039 --> 00:14:52,319 था ज्यादा लोग और ज्यादा लोग का मतलब था 334 00:14:49,759 --> 00:14:55,679 बड़े गांव जो आगे चलकर [संगीत] दुनिया के 335 00:14:52,320 --> 00:14:58,160 पहले शहरों में बदल गए। इस तरह खेती सिर्फ 336 00:14:55,679 --> 00:15:01,679 पेट भरने की तकनीक नहीं थी। यह एक [संगीत] 337 00:14:58,159 --> 00:15:04,799 सामाजिक और आर्थिक इंजन था। इसने हमें घर 338 00:15:01,679 --> 00:15:08,559 दिया, समाज दिया, [संगीत] विशेषज्ञता दी, 339 00:15:04,799 --> 00:15:11,679 व्यापार दिया। और हां, इसने हमें असमानता 340 00:15:08,559 --> 00:15:14,719 और संघर्ष भी दिया। जिस दुनिया को हम आज 341 00:15:11,679 --> 00:15:17,759 जानते हैं, जिसमें सरकारें, सेनाएं, बाजार 342 00:15:14,720 --> 00:15:20,285 और राष्ट्र हैं। उस सब की जड़े उसी पहले 343 00:15:17,759 --> 00:15:22,559 बीज में छिपी हैं जिसे किसी गुमनाम पूर्वज 344 00:15:20,284 --> 00:15:25,679 [संगीत] ने हजारों साल पहले जमीन में बोया 345 00:15:22,559 --> 00:15:28,559 था। अब तक हमने कृषि क्रांति की शानदार 346 00:15:25,679 --> 00:15:30,799 कहानी सुनी है। कैसे एक खोज ने हमें 347 00:15:28,559 --> 00:15:33,679 अनिश्चितता से निकालकर सभ्यता की [संगीत] 348 00:15:30,799 --> 00:15:36,319 दहलीज पर खड़ा कर दिया? लेकिन क्या यह 349 00:15:33,679 --> 00:15:39,599 कहानी इतनी सीधी है? क्या इस तरक्की की 350 00:15:36,320 --> 00:15:42,399 कोई कीमत नहीं चुकानी पड़ी? कुछ इतिहासकार 351 00:15:39,600 --> 00:15:45,199 और मानव विज्ञानी जैसे कि जेरेट डायमंड 352 00:15:42,399 --> 00:15:47,794 कृषि को मानव इतिहास की सबसे बड़ी गलती तक 353 00:15:45,198 --> 00:15:47,919 कहते हैं। यह एक चौंकाने वाला विचार है। 354 00:15:47,794 --> 00:15:50,799 [संगीत] 355 00:15:47,919 --> 00:15:53,599 लेकिन इसके पीछे कुछ ठोस तर्क हैं। पहला 356 00:15:50,799 --> 00:15:56,000 बड़ा नुकसान था हमारे खानपान में गिरावट। 357 00:15:53,600 --> 00:15:58,931 शिकारी संग्राहक दर्जनों तरह के फल, 358 00:15:56,000 --> 00:16:00,799 कंदमूल, मेवे और जानवरों का मांस खाते थे। 359 00:15:58,931 --> 00:16:03,440 [संगीत] जिससे उन्हें हर तरह के विटामिन 360 00:16:00,799 --> 00:16:06,000 और प्रोटीन मिल जाते थे। इसके उलट शुरुआती 361 00:16:03,440 --> 00:16:08,639 किसान कुछ गिनी चुनी फसलों जैसे गेहूं, 362 00:16:06,000 --> 00:16:11,375 चावल या मक्का पर निर्भर हो गए। उनका पेट 363 00:16:08,639 --> 00:16:13,600 तो भर जाता था लेकिन उनके भोजन से पोषण 364 00:16:11,375 --> 00:16:15,519 [संगीत] की विविधता गायब हो गई। प्राचीन 365 00:16:13,600 --> 00:16:18,159 कंकालों के अध्ययन से पता चलता है कि 366 00:16:15,519 --> 00:16:20,720 शुरुआती किसानों का कद छोटा था। उनके 367 00:16:18,159 --> 00:16:22,480 दांतों में ज्यादा सड़न थी और वे पोषण की 368 00:16:20,720 --> 00:16:25,139 कमी से होने वाली बीमारियों से ज्यादा 369 00:16:22,480 --> 00:16:27,600 पीड़ित थे। दूसरा बड़ा खतरा था अकाल का 370 00:16:25,139 --> 00:16:30,240 [संगीत] डर। एक शिकारी संग्राहक कबीले के 371 00:16:27,600 --> 00:16:32,879 पास भोजन के कई विकल्प होते थे। अगर एक 372 00:16:30,240 --> 00:16:35,278 तरह का फल नहीं मिला तो कुछ और खा लिया। 373 00:16:32,879 --> 00:16:37,519 लेकिन एक किसान पूरी तरह से अपनी फसल पर 374 00:16:35,278 --> 00:16:40,480 निर्भर था। अगर सूखा [संगीत] पड़ गया, 375 00:16:37,519 --> 00:16:42,879 बाढ़ आ गई या कीड़ों ने फसल बर्बाद कर दी 376 00:16:40,480 --> 00:16:45,519 तो पूरे गांव के सामने भूखमरी का संकट 377 00:16:42,879 --> 00:16:48,399 खड़ा हो जाता था। एक ही खाद्य स्रोत पर 378 00:16:45,519 --> 00:16:51,120 निर्भरता ने समाज को बहुत कमजोर बना दिया। 379 00:16:48,399 --> 00:16:53,919 तीसरी बड़ी कीमत थी बीमारियों का फैलाव। 380 00:16:51,120 --> 00:16:56,560 जब लोग छोटे घुमंतू समूहों में रहते थे तो 381 00:16:53,919 --> 00:16:58,639 महामारियां फैलना मुश्किल था। लेकिन गांव 382 00:16:56,559 --> 00:17:01,518 और शहरों में हजारों लोग [संगीत] एक दूसरे 383 00:16:58,639 --> 00:17:04,078 के करीब घनी आबादी में रहने लगे। इसके 384 00:17:01,519 --> 00:17:06,720 अलावा पालतू जानवरों के बेहद करीब रहने से 385 00:17:04,078 --> 00:17:08,720 चेचक, खसरा और इन्फ्लुएंजा जैसी कई नई 386 00:17:06,720 --> 00:17:12,160 बीमारियां जानवरों से इंसानों में फैलने 387 00:17:08,720 --> 00:17:14,160 लगी। चौथा कृषि ने काम और मेहनत को बहुत 388 00:17:12,160 --> 00:17:16,400 ज्यादा [संगीत] बढ़ा दिया। माना जाता है 389 00:17:14,160 --> 00:17:18,558 कि शिकारी संग्राहक भोजन जुटाने के लिए 390 00:17:16,400 --> 00:17:21,439 हफ्ते में बस 15 [संगीत] से 20 घंटे ही 391 00:17:18,558 --> 00:17:24,160 काम करते थे। बाकी समय वे आराम करने और 392 00:17:21,439 --> 00:17:26,160 सामाजिक मेलजोल में बिताते थे। वहीं एक 393 00:17:24,160 --> 00:17:28,640 किसान को सुबह से शाम तक खेत में [संगीत] 394 00:17:26,160 --> 00:17:31,919 कमरतोड़ मेहनत करनी पड़ती थी। यह एक 395 00:17:28,640 --> 00:17:34,480 अंतहीन और थकाऊ काम था। कंकालों पर गठिया 396 00:17:31,919 --> 00:17:36,720 के निशान इस बात का सबूत हैं कि खेती का 397 00:17:34,480 --> 00:17:39,759 जीवन [संगीत] शरीर के लिए कितना कठोर था 398 00:17:36,720 --> 00:17:42,000 और अंत में जैसा कि हमने पहले देखा कृषि 399 00:17:39,759 --> 00:17:44,386 ने सामाजिक असमानता और युद्ध को जन्म 400 00:17:42,000 --> 00:17:47,119 दिया। जब जमीन और अनाज के रूप में संपत्ति 401 00:17:44,386 --> 00:17:49,839 [संगीत] जमा होने लगी तो लालच और संघर्ष 402 00:17:47,119 --> 00:17:52,959 पैदा हुए। एक गांव दूसरे गांव के अनाज पर 403 00:17:49,839 --> 00:17:55,678 हमला करने लगा। समाज शासकों और शासितों, 404 00:17:52,960 --> 00:17:58,558 अमीरों और गरीबों में बट गया। युद्ध और 405 00:17:55,679 --> 00:18:00,320 गुलामी जैसी संस्थाएं कृषि समाज की ही देन 406 00:17:58,558 --> 00:18:03,759 है। [संगीत] तो क्या इसका मतलब यह है कि 407 00:18:00,319 --> 00:18:06,079 कृषि एक गलती थी? शायद नहीं। यह एक ऐसा 408 00:18:03,759 --> 00:18:08,640 जाल था जिसमें इंसानियत एक बार फंसने के 409 00:18:06,079 --> 00:18:10,798 बाद बाहर नहीं निकल सकती थी। खेती ने भले 410 00:18:08,640 --> 00:18:13,200 ही व्यक्तिगत स्तर पर जीवन को ज्यादा कठिन 411 00:18:10,798 --> 00:18:16,319 बना दिया हो, लेकिन इसने जनसंख्या वृद्धि 412 00:18:13,200 --> 00:18:19,120 को संभव बनाया। एक बार जब आबादी बढ़ गई तो 413 00:18:16,319 --> 00:18:21,678 वापस शिकारी जीवन की ओर लौटना नामुमकिन था 414 00:18:19,119 --> 00:18:24,719 क्योंकि वह जीवन शैली इतनी बड़ी आबादी का 415 00:18:21,679 --> 00:18:26,880 पेट नहीं भर सकती थी। यह एक तरह का समझौता 416 00:18:24,720 --> 00:18:30,000 था। हमने व्यक्तिगत स्वास्थ्य, [संगीत] 417 00:18:26,880 --> 00:18:33,039 आराम और बराबरी की कीमत पर खाद्य सुरक्षा 418 00:18:30,000 --> 00:18:35,519 और बड़ी आबादी को चुना। यह एक ऐसी क्रांति 419 00:18:33,038 --> 00:18:38,960 थी जिसने हमें सभ्यता तो दी लेकिन उसकी एक 420 00:18:35,519 --> 00:18:41,038 भारी कीमत भी वसूली। तो चलिए वापस आज की 421 00:18:38,960 --> 00:18:42,960 दुनिया में लौटते हैं। [संगीत] आप शायद ही 422 00:18:41,038 --> 00:18:45,679 अपने स्मार्टफोन पर देख रहे हैं। एक 423 00:18:42,960 --> 00:18:48,000 आरामदायक कुर्सी पर बैठकर अपने घर की चार 424 00:18:45,679 --> 00:18:50,798 दीवारी के अंदर। हो सकता है कि आपने 425 00:18:48,000 --> 00:18:53,359 अभी-अभी भोजन किया हो जिसमें रोटी या चावल 426 00:18:50,798 --> 00:18:56,400 शामिल हो। क्या आपने कभी सोचा है कि आपके 427 00:18:53,359 --> 00:18:59,199 जीवन की यह साधारण सी सच्चाई उस पहली फसल 428 00:18:56,400 --> 00:19:02,480 से कैसे जुड़ी है जिसे हजारों साल पहले 429 00:18:59,200 --> 00:19:04,400 किसी गुमनाम इंसान ने बोया था। वो एक खोज 430 00:19:02,480 --> 00:19:07,200 जिसने हमें [संगीत] शिकारी से अन्नदाता 431 00:19:04,400 --> 00:19:09,600 बनाया। मानव इतिहास की सिर्फ एक घटना नहीं 432 00:19:07,200 --> 00:19:12,480 है। यह वो नीव है जिस पर हमारी [संगीत] 433 00:19:09,599 --> 00:19:14,798 पूरी आधुनिक दुनिया खड़ी है। आपके हाथ में 434 00:19:12,480 --> 00:19:17,440 मौजूद स्मार्टफोन जिस शहर में आप रहते 435 00:19:14,798 --> 00:19:20,079 हैं, जो किताबें आप पढ़ते हैं, जिस सरकार 436 00:19:17,440 --> 00:19:22,720 को आप चुनते हैं। इनमें से कुछ भी मुमकिन 437 00:19:20,079 --> 00:19:24,798 नहीं होता अगर हम आज भी भोजन की तलाश में 438 00:19:22,720 --> 00:19:27,360 भटक रहे होते। खेती ने [संगीत] हमें 439 00:19:24,798 --> 00:19:31,359 स्थायित्व दिया और उसी स्थायित्व ने हमें 440 00:19:27,359 --> 00:19:34,719 समय दिया। समय सोचने का, आविष्कार करने 441 00:19:31,359 --> 00:19:37,599 का, लिखने का, कला बनाने का और ब्रह्मांड 442 00:19:34,720 --> 00:19:40,079 के रहस्यों को समझने का। जब पेट भरने की 443 00:19:37,599 --> 00:19:42,942 चिंता कम हुई, तभी दिमाग का विकास सही 444 00:19:40,079 --> 00:19:44,960 मायनों में शुरू हुआ। गांव से शहर बने, 445 00:19:42,942 --> 00:19:47,279 [संगीत] शहरों से साम्राज्य बने और 446 00:19:44,960 --> 00:19:50,240 साम्राज्यों ने ज्ञान विज्ञान को जन्म 447 00:19:47,279 --> 00:19:52,798 दिया। हां, यह रास्ता हमेशा आसान नहीं 448 00:19:50,240 --> 00:19:55,839 रहा। हमने देखा कि कैसे खेती अपने [संगीत] 449 00:19:52,798 --> 00:19:58,480 साथ बीमारियां, असमानता और युद्ध भी लेकर 450 00:19:55,839 --> 00:20:01,279 आई। आज भी हम उन चुनौतियों से जूझ रहे 451 00:19:58,480 --> 00:20:04,240 हैं। जलवायु परिवर्तन हमारी खाद्य सुरक्षा 452 00:20:01,279 --> 00:20:07,038 के लिए एक नया खतरा है और औद्योगिक खेती 453 00:20:04,240 --> 00:20:10,079 ने हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है। 454 00:20:07,038 --> 00:20:12,319 लेकिन कहानी का सार यह है। उस पहले बीज ने 455 00:20:10,079 --> 00:20:15,038 हमें सिर्फ भोजन नहीं दिया। उसने हमें 456 00:20:12,319 --> 00:20:16,639 अपना भविष्य बनाने की क्षमता दी। उसने 457 00:20:15,038 --> 00:20:19,679 हमें प्रकृति का [संगीत] गुलाम होने से 458 00:20:16,640 --> 00:20:22,320 निकालकर उसका भागीदार बना दिया। यह कहानी 459 00:20:19,679 --> 00:20:25,440 इस बात का सबूत है कि इंसान की सबसे बड़ी 460 00:20:22,319 --> 00:20:28,399 ताकत उसके शारीरिक बल में नहीं बल्कि उसके 461 00:20:25,440 --> 00:20:30,159 अवलोकन करने, सीखने और एक विचार को 462 00:20:28,400 --> 00:20:32,640 क्रांति [संगीत] में बदलने की क्षमता में 463 00:20:30,159 --> 00:20:35,679 है। अगली बार जब आप अपनी थाली में भोजन 464 00:20:32,640 --> 00:20:38,559 देखें तो एक पल के लिए उन पहले किसानों को 465 00:20:35,679 --> 00:20:41,440 याद जरूर [संगीत] कीजिएगा। वे गुमनाम नायक 466 00:20:38,558 --> 00:20:43,918 जिन्होंने डर और अनिश्चितता के बीच एक बीज 467 00:20:41,440 --> 00:20:47,038 बोने का [संगीत] साहस किया और उस एक छोटे 468 00:20:43,919 --> 00:20:49,759 से कदम से हमारी दुनिया को हमेशा हमेशा के 469 00:20:47,038 --> 00:20:51,719 लिए बदल दिया। अगर आपको मानव सभ्यता के इस 470 00:20:49,759 --> 00:20:53,679 अविश्वसनीय सफर में हमारे साथ चलना 471 00:20:51,719 --> 00:20:56,000 [संगीत] पसंद आया तो इस वीडियो को लाइक 472 00:20:53,679 --> 00:20:58,269 करें और हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना ना 473 00:20:56,000 --> 00:21:00,400 भूलें। कमेंट सेक्शन में हमें बताएं 474 00:20:58,269 --> 00:21:03,200 [संगीत] आपके अनुसार कृषि के बाद मानव 475 00:21:00,400 --> 00:21:05,919 इतिहास का सबसे बड़ा आविष्कार कौन सा था? 476 00:21:03,200 --> 00:21:08,319 आपके जवाब पढ़कर हमें खुशी होगी। और भी 477 00:21:05,919 --> 00:21:12,240 ऐसी ही ज्ञानवर्धक कहानियों के लिए हमारे 478 00:21:08,319 --> 00:21:12,240 साथ जुड़े रहें। धन्यवाद।