WEBVTT

00:00:00.480 --> 00:00:05.439
मुश्किल ये है कि आप अंग्रेजी के अलावा

00:00:02.638 --> 00:00:08.400
कोई जबान बोले तो आप पढ़े लिखे नहीं लगते।

00:00:05.440 --> 00:00:10.719
लेकिन अब आप बर्दाश्त कर लें। तो मैंने

00:00:08.400 --> 00:00:12.400
कहा अच्छा हुजूर एक बात बताएं कि

00:00:10.718 --> 00:00:14.879
बिल्लियों की बहुत आदत होती है। अक्सर

00:00:12.400 --> 00:00:17.839
जाके अवन में बच्चे दे देती हैं। तो उन

00:00:14.880 --> 00:00:21.600
बच्चों को आप बिस्किट कहते हैं क्या? एक

00:00:17.839 --> 00:00:24.640
मकान के एक कमरे में एक गोरा चिट्टा आदमी

00:00:21.600 --> 00:00:27.199
और एक नन्हा मुन्ना बच्चा बाल्टी से नहाए।

00:00:24.640 --> 00:00:29.039
बावरची ने नाश्ता दिया जिसमें उड़द की दाल

00:00:27.199 --> 00:00:34.160
और तो थे।

00:00:29.039 --> 00:00:37.920
आदमी उठा चीख हटाई संदूक खोला उसमें से

00:00:34.159 --> 00:00:41.119
पिस्तौल निकाला दीवार पर टकी बंदूक ली और

00:00:37.920 --> 00:00:45.439
बाहर खड़े रिक्शे में बैठ के चला गया

00:00:41.119 --> 00:00:46.519
बच्चा बेबस देखता रहा अब इसे जरा स्कैन

00:00:45.439 --> 00:00:49.399
करते

00:00:46.520 --> 00:00:52.199
हैं एक मकान मकान

00:00:49.399 --> 00:00:55.079
अरेबिक एक कमरे में

00:00:52.198 --> 00:00:58.718
इटालियन कमरा इज

00:00:55.079 --> 00:01:01.160
इटालियन बाल्टी इज पोर्चुगी

00:00:58.719 --> 00:01:05.118
गोरा चिट्टा आदमी में चिट्टा

00:01:01.159 --> 00:01:06.438
पंजाबी नन्हा नन्हा मुन्ना बच्चा में

00:01:05.118 --> 00:01:09.719
नन्हा

00:01:06.438 --> 00:01:13.359
गुजराती बच्चा

00:01:09.719 --> 00:01:13.359
परशियन बावर्ची

00:01:13.640 --> 00:01:20.640
टर्किश खवातीन हजरात मोज़

00:01:17.799 --> 00:01:24.640
हाज़रीन मुझे सख्त इंस्ट्रक्शंस दिए हैं।

00:01:20.640 --> 00:01:26.799
हुक्म ये है कि आप उर्दू में बोलेंगे।

00:01:24.640 --> 00:01:28.560
मुश्किल यह है कि आप अंग्रेजी के अलावा

00:01:26.799 --> 00:01:33.118
कोई जुबान बोले तो आप पढ़े लिखे नहीं

00:01:28.560 --> 00:01:33.118
लगते। लेकिन अब आप बर्दाश्त कर

00:01:33.400 --> 00:01:42.640
लें। पहले तो मैं बहुत-बहुत शुक्रिया अदा

00:01:37.280 --> 00:01:46.799
करना चाहूंगा किशोर आपका के आपने इतने अहम

00:01:42.640 --> 00:01:50.640
तकरीब में जो पहला आपके वालिद का इस तरह

00:01:46.799 --> 00:01:53.680
का फंक्शन है उसमें मुझे इज्जत बख्शी आपने

00:01:50.640 --> 00:01:56.239
और मैं जानता हूं कि आपके दिल में क्या

00:01:53.680 --> 00:01:59.680
इज्जत और क्या मोहब्बत है उनके लिए। तो

00:01:56.239 --> 00:02:02.158
अगर आपने मुझे याद किया इस काम के लिए तो

00:01:59.680 --> 00:02:05.360
ये एक बहुत बड़ा कॉम्प्लीमेंट है जिसका

00:02:02.159 --> 00:02:05.359
मैं वाकई शुक्रगुजार

00:02:05.399 --> 00:02:13.680
हूं। ये हालांकि शायर ने तो ये शराब के

00:02:10.800 --> 00:02:16.719
बारे में कहा था लेकिन ये उर्दू के बारे

00:02:13.680 --> 00:02:19.040
में भी सच है कि छूटती नहीं है मुंह से ये

00:02:16.719 --> 00:02:23.520
काफिर लगी हुई।

00:02:19.039 --> 00:02:23.519
तो इसमें एक कोई है

00:02:24.199 --> 00:02:33.439
बात जो ये

00:02:27.479 --> 00:02:37.439
जुबान मर नहीं सकती और कत्ल नहीं हो पाती

00:02:33.439 --> 00:02:40.239
कुछ खूबी है इसमें ये आवाम की जुबान है

00:02:37.439 --> 00:02:42.400
मगर इससे पहले कि हम सोचे किसकी जुबान है

00:02:40.239 --> 00:02:46.878
कहां पैदा हुई कहां पली पड़ी कहां जवान

00:02:42.400 --> 00:02:49.680
हुई सवाल ये कि जबान होती क्या है हम जब

00:02:46.878 --> 00:02:53.199
बात करते हैं उर्दू जबान, हिंदी जबान,

00:02:49.680 --> 00:02:54.920
अंग्रेजी जबान, फ्रेंच जबान, तमिल जबान

00:02:53.199 --> 00:03:01.199
जबान क्या चीज

00:02:54.919 --> 00:03:04.799
है? जबान क्या अपनी स्क्रिप्ट है?

00:03:01.199 --> 00:03:09.119
अगर स्क्रिप्ट है तो यह अगर जो पोस्टर लगा

00:03:04.800 --> 00:03:14.120
होता है के यू सी एच के यू सी एच एच ओ टी

00:03:09.120 --> 00:03:17.120
ए एच ए आई ये अंग्रेजी है कुछ-कुछ होता

00:03:14.120 --> 00:03:19.519
है। ये तो इंग्लिश में लिखा है। रोमन में

00:03:17.120 --> 00:03:22.959
लिखा है। और सच तो ये है कि अंग्रेजी फिर

00:03:19.519 --> 00:03:25.599
रोमन है। अंग्रेजी ही नहीं है। चाहे वो

00:03:22.959 --> 00:03:29.360
फ्रेंच हो, जर्मन हो। ये सब एक्चुअली तो

00:03:25.598 --> 00:03:33.679
इटालियन लैंग्वेज है। अगर हम ये मान ले कि

00:03:29.360 --> 00:03:36.560
स्क्रिप्ट जबान है तो ये तो सब सारी यूरोप

00:03:33.680 --> 00:03:38.599
की आधी जो यूरोप है वो तो मांगे कि

00:03:36.560 --> 00:03:41.920
स्क्रिप्ट पे काम कर रहा

00:03:38.598 --> 00:03:41.919
है। तो

00:03:42.039 --> 00:03:47.719
क्या जुबान वोकैबलरी

00:03:45.560 --> 00:03:51.519
है?

00:03:47.719 --> 00:03:55.000
अच्छा ये ऑल एयर कंडीशंड है। मैंने

00:03:51.519 --> 00:03:55.000
अंग्रेजी बोली।

00:03:55.199 --> 00:04:02.399
चार लफ्ज थे। यह हॉल एयर कंडीशन है। इसमें

00:03:59.598 --> 00:04:03.318
जो ज्यादा इंपॉर्टेंट लफज़ थे वो था हॉल और

00:04:02.400 --> 00:04:06.760
एयर

00:04:03.318 --> 00:04:10.079
कंडीशन। तो क्या मैं अंग्रेजी बोल रहा था?

00:04:06.759 --> 00:04:13.959
नहीं। क्यों नहीं बोल रहा था? इसलिए कि

00:04:10.080 --> 00:04:18.759
इधर ये लगा है और उधर है लगा

00:04:13.959 --> 00:04:22.399
है। तो ना स्क्रिप्ट, न वोकैबलरी।

00:04:18.759 --> 00:04:26.639
अल्टीमेटली जबान अपना सिंटेक्स है, अपना

00:04:22.399 --> 00:04:30.239
ग्रामर है। लफज़ तो कहीं से भी आ जाते हैं।

00:04:26.639 --> 00:04:32.079
मैं माफी चाहता हूं कि ये जो एक पैराग्राफ

00:04:30.240 --> 00:04:34.960
मुझे रट गया है। मैंने इतनी बार सुनाया

00:04:32.079 --> 00:04:40.719
है। तो ये एक रटाई बात मैं बोलने वाला

00:04:34.959 --> 00:04:43.439
हूं। लेकिन वो अभी भी असर करती है। तो मैं

00:04:40.720 --> 00:04:46.880
आपसे अर्ज करता हूं। मैं एक छोटा सा

00:04:43.439 --> 00:04:49.360
पैराग्राफ बोलूंगा।

00:04:46.879 --> 00:04:52.360
उसमें किसी को भी इस हॉल में कोई लफ्ज

00:04:49.360 --> 00:04:56.879
मुश्किल लगे तो हाथ उठा

00:04:52.360 --> 00:04:59.600
दीजिएगा। एक मकान के एक कमरे में एक गोरा

00:04:56.879 --> 00:05:01.959
चिट्टा आदमी और एक नन्हा मुन्ना बच्चा

00:04:59.600 --> 00:05:05.360
बाल्टी से

00:05:01.959 --> 00:05:11.159
नहाए। बावरची ने नाश्ता दिया जिसमें उड़द

00:05:05.360 --> 00:05:15.360
की दाल और तो थे। आदमी उठा चीख हटाई संदूक

00:05:11.160 --> 00:05:16.759
खोला। उसमें से पिस्तौल निकाला। दीवार पर

00:05:15.360 --> 00:05:20.680
टकी बंदूक

00:05:16.759 --> 00:05:23.080
ली और बाहर खड़े रिक्शे में बैठ के चला

00:05:20.680 --> 00:05:26.120
गया।

00:05:23.079 --> 00:05:29.079
बच्चा बेबस देखता

00:05:26.120 --> 00:05:32.918
रहा। कोई

00:05:29.079 --> 00:05:37.639
मुश्किल कोई भी मुश्किल

00:05:32.918 --> 00:05:41.680
नहीं। अब इसे जरा स्कैन करते

00:05:37.639 --> 00:05:43.639
हैं। एक मकान मकान अरेबिक।

00:05:41.680 --> 00:05:46.680
एक कमरे में

00:05:43.639 --> 00:05:49.478
इटालियन कमरा इज

00:05:46.680 --> 00:05:52.240
इटालियन बाल्टी इज

00:05:49.478 --> 00:05:54.079
पोर्चुगीज गोरा चिट्टा आदमी में चिट्टा

00:05:52.240 --> 00:05:57.199
पंजाबी

00:05:54.079 --> 00:05:58.519
नन्हा मुन्ना नन्हा मुन्ना बच्चा में

00:05:57.199 --> 00:06:02.038
नन्हा

00:05:58.519 --> 00:06:04.599
गुजराती बच्चा

00:06:02.038 --> 00:06:07.318
परशजियन बावरची

00:06:04.600 --> 00:06:09.560
टर्किश नाश्ता

00:06:07.319 --> 00:06:12.840
परशियन उर

00:06:09.560 --> 00:06:17.680
तमिल टोस्ट इंग्लिश

00:06:12.839 --> 00:06:24.359
टोस्ट चिक टर्किश संदूक टर्किश पिस्तौल

00:06:17.680 --> 00:06:28.360
इंग्लिश दीवार परशियन बंदूक टर्किश रिक्शा

00:06:24.360 --> 00:06:30.280
जैपनीज रिक्शा इज अ जैपनीज

00:06:28.360 --> 00:06:34.800
वर्ड और

00:06:30.279 --> 00:06:34.799
बेबस है विवश

00:06:34.839 --> 00:06:44.478
संस्कृत इतने सिंपल से चार लाइनों में

00:06:39.360 --> 00:06:44.479
हमने 12 13 लैंग्वेज के वर्ड इस्तेमाल

00:06:45.000 --> 00:06:53.279
किए जो हम बोलते हैं हमें मालूम ही नहीं

00:06:49.600 --> 00:06:56.960
है कि कौन सा शब्द कहां से आया है और कब

00:06:53.279 --> 00:07:00.719
आया है और कैसे आ गया।

00:06:56.959 --> 00:07:05.839
अभी मैं पढ़ रहा था कि एक साहब ने रिसर्च

00:07:00.720 --> 00:07:08.960
की है कि मराठी में तकरीबन 30% वर्ड जो है

00:07:05.839 --> 00:07:11.598
वो परर्शियन बेस्ड है। हैरत की बात नहीं

00:07:08.959 --> 00:07:13.918
है। वैसे हमें मालूम नहीं था कि जो पोर्ट

00:07:11.598 --> 00:07:16.519
एरियाज होते हैं उनमें बड़ी आराम से बाहर

00:07:13.918 --> 00:07:20.719
के लफ्ज़ आते हैं। सेलर सिर्फ सामान नहीं

00:07:16.519 --> 00:07:23.000
लाते। वो लफज़ भी लाके छोड़ देते हैं और वो

00:07:20.720 --> 00:07:26.960
लफज़ अपना लिए जाते

00:07:23.000 --> 00:07:31.120
हैं। कमाल यह है कि लफज़ हम या कोई भी

00:07:26.959 --> 00:07:33.519
लैंग्वेज एज इट इज नहीं लेते। जैसे का

00:07:31.120 --> 00:07:35.598
तैसा वैसे नहीं लेते। उसे हम अपने

00:07:33.519 --> 00:07:40.240
सिंटेक्स में अपने ग्रामर में डाल देते

00:07:35.598 --> 00:07:42.598
हैं। मतलब हवा परिजयन है

00:07:40.240 --> 00:07:45.478
लेकिन हवाएं परिशियन नहीं

00:07:42.598 --> 00:07:49.439
है। हवाओं पर नहीं

00:07:45.478 --> 00:07:52.879
है। दोस्त पर्शियन है। दोस्ती परशियन नहीं

00:07:49.439 --> 00:07:56.000
है। और दोस्तों भी पर्शियन नहीं है। और

00:07:52.879 --> 00:07:58.879
दोस्तों भी पर्शियन नहीं है। दोस्तों और

00:07:56.000 --> 00:08:02.079
दोस्तों में भी फर्क है। ये गलती हमारे

00:07:58.879 --> 00:08:04.319
पॉलिटिकल लीडर बहुत करते रहते हैं। जहां

00:08:02.079 --> 00:08:06.000
दोस्तों बोलना चाहिए वहां दोस्तों बोलते

00:08:04.319 --> 00:08:08.960
हैं। जहां दोस्तों बोलना चाहिए वहां

00:08:06.000 --> 00:08:11.800
दोस्तों बोलते हैं। दोस्तों सेकंड पर्सन

00:08:08.959 --> 00:08:16.478
से बोल सकते हैं। मेरे

00:08:11.800 --> 00:08:19.520
दोस्तों, मेरे भाइयों, मेरी बहनों, लेकिन

00:08:16.478 --> 00:08:23.120
जब आप थर्ड पर्सन बनाएंगे उसे तो मैंने

00:08:19.519 --> 00:08:27.359
अपने भाइयों से कहा, अपने दोस्तों से कहा,

00:08:23.120 --> 00:08:29.000
नेजल थर्ड पर्सन में आता है। बिना नेज़ल

00:08:27.360 --> 00:08:32.080
सेकंड पर्सन।

00:08:29.000 --> 00:08:37.918
खैर इतना ज्यादा एक्सपेक्ट नहीं करना

00:08:32.080 --> 00:08:37.919
चाहिए। ठीक है जैसे भी काम चल रहा है चलने

00:08:38.918 --> 00:08:46.319
दो।

00:08:40.440 --> 00:08:50.160
तो सवाल ये है कि ये उर्दू क्या है? ये

00:08:46.320 --> 00:08:52.560
कहां से आई? ये कैसे बनी? इसके बारे में

00:08:50.159 --> 00:08:56.958
भी अजीब अजीब कहानियां हैं। अजीब अजीब

00:08:52.559 --> 00:08:59.439
किस्से हैं। मुझे एक मैं अच्छी खासी पढ़ी

00:08:56.958 --> 00:09:00.838
लिखी औरत हमारी दोस्त हैं। बड़ी अच्छी

00:08:59.440 --> 00:09:03.279
पेंटर

00:09:00.839 --> 00:09:05.040
हैं। मुंबई में रहती हैं। तो मुझसे

00:09:03.278 --> 00:09:07.278
उन्होंने बड़ी हम लोग बड़े गहरे दोस्त

00:09:05.039 --> 00:09:11.120
फैमिली फ्रेंड। तो एक दिन उन्होंने ख्याल

00:09:07.278 --> 00:09:14.240
आ गया। तो मुझसे पूछा उन्होंने के जावेद

00:09:11.120 --> 00:09:16.959
ये उर्दू तो बाबर के साथ आई थी ना। तो मैं

00:09:14.240 --> 00:09:19.360
हां उसके ही घोड़े पे पीछे बैठी हुई थी

00:09:16.958 --> 00:09:21.278
बुर्का पहने।

00:09:19.360 --> 00:09:23.039
और बस वो उसने बाबर ने उसे यहां उतार

00:09:21.278 --> 00:09:26.958
दिया। वो तो कुछ दिनों बाद मर गया। यह इधर

00:09:23.039 --> 00:09:30.199
ही रह गई। तो मतलब देखिए इल्म की कोई

00:09:26.958 --> 00:09:33.359
लिमिट हो तो हो। जियालत की कोई लिमिट नहीं

00:09:30.200 --> 00:09:36.320
है। दुनिया की हर गलत चीज की कोई लिमिट

00:09:33.360 --> 00:09:40.959
नहीं। शराफत की लिमिट तो हो। कमी की लिमिट

00:09:36.320 --> 00:09:42.839
नहीं है। तो हर चीज जो बुरी है और गलत है

00:09:40.958 --> 00:09:44.439
वो इनफिनाइट

00:09:42.839 --> 00:09:48.800
है।

00:09:44.440 --> 00:09:51.360
तो ये जुबान ये प्योरली हिंदुस्तान की

00:09:48.799 --> 00:09:56.159
जुबान है। इसलिए कि जब मैं कहता हूं तुम

00:09:51.360 --> 00:10:00.120
खाना खाओगे? पानी पियोगे? घर जा रहे हो?

00:09:56.159 --> 00:10:03.278
भूख तो नहीं लग रही। ये कौन सी जुबान

00:10:00.120 --> 00:10:06.320
है? ये अगर देवनागरी में लिख दोगे तो

00:10:03.278 --> 00:10:10.559
हिंदी हो जाएगी। नस्ताख में लिख दोगे तो

00:10:06.320 --> 00:10:13.040
उर्दू हो जाएगी। और वो लोग यूपी में जिनकी

00:10:10.559 --> 00:10:15.039
आज भी कमी नहीं है जो ना हिंदी लिख सकते

00:10:13.039 --> 00:10:17.439
हैं ना उर्दू लिख सकते हैं ना कुछ पढ़

00:10:15.039 --> 00:10:20.319
सकते हैं। वो जब ये कहते हैं तुम कहां जा

00:10:17.440 --> 00:10:25.079
रहे हो? तो कौन सी जबान बोल रहे हैं? वो

00:10:20.320 --> 00:10:28.720
कौन सी जुबान है? तो कोई हैरत नहीं है कि

00:10:25.078 --> 00:10:31.919
तकरीबन 300 350 साल तक इस जुबान का नाम

00:10:28.720 --> 00:10:34.800
हिंदवी था।

00:10:31.919 --> 00:10:39.519
जमाने हिंदुस्तान जब यह दखन में गई तो उसे

00:10:34.799 --> 00:10:39.519
जुबाने हिंदुस्तान कहते थे।

00:10:41.078 --> 00:10:47.679
हिंदुस्तानी अब ये पैदा कहां हुई? पहली

00:10:44.559 --> 00:10:49.319
बार इसने जन्म कहां लिया? इस पे बहुत सारे

00:10:47.679 --> 00:10:53.199
क्लेम

00:10:49.320 --> 00:10:58.079
है। पंजाब से लेकर दकन तक क्लेममेंट्स

00:10:53.200 --> 00:11:02.240
मौजूद है। आपको एक किताब है महमूद शरानी

00:10:58.078 --> 00:11:04.759
या शामी या शेरी मुझे सरनेम उनका ठीक से

00:11:02.240 --> 00:11:08.000
याद नहीं। उर्दू इन

00:11:04.759 --> 00:11:09.519
पंजाब। उनका कहना है कि उर्दू पंजाब से ही

00:11:08.000 --> 00:11:13.278
शुरू हुई।

00:11:09.519 --> 00:11:16.399
इसलिए कि वहां जो बाहर के लोग आए तो सबसे

00:11:13.278 --> 00:11:20.399
पहले पंजाब में आए और वहां रहे और ठहरे और

00:11:16.399 --> 00:11:23.919
वहां से ट्रेड कर रहे थे और जो हरियाणा तो

00:11:20.399 --> 00:11:27.200
उस समय पंजाबी था तो वो जो हरियाणवी थी और

00:11:23.919 --> 00:11:31.199
जो पंजाबी थी वो मिलके एक जुबान धीरे-धीरे

00:11:27.200 --> 00:11:31.200
डेवलप हुई जो फिर नीचे ट्रिकल डाउन

00:11:31.240 --> 00:11:38.959
हुई जो यूपी वाला है वो तो कहता है भाई

00:11:35.440 --> 00:11:41.920
उन्होंने भी किताबें लिखी हुई है कि यह तो

00:11:38.958 --> 00:11:44.078
खड़ी बोली है जो हमारे वेस्टर्न यूपी में

00:11:41.919 --> 00:11:46.879
बोली जाती है। दिल्ली में बोली जाती है।

00:11:44.078 --> 00:11:49.359
उसी में अलग-अलग जबानों के शब्द आ गए हैं।

00:11:46.879 --> 00:11:52.000
लेकिन ग्रामर तो हमारी है खड़ी बोली की।

00:11:49.360 --> 00:11:55.440
तुम जा रहे हो मैं आ रहा हूं। खाना खाओगे,

00:11:52.000 --> 00:11:58.399
पानी पियोगे तो खड़ी बोली है। इसी में

00:11:55.440 --> 00:12:01.519
डिफरेंट लैंग्वेज के वर्ड जमा करके एक

00:11:58.399 --> 00:12:04.399
जबान बन गई नई। अवेलेबल स्क्रिप्ट उस

00:12:01.519 --> 00:12:08.159
जमाने में जैसे आज अंग्रेजी है। तो लिंगवा

00:12:04.399 --> 00:12:10.759
फ्रंका ऑफ़ द एलिट वाज़ फारसी हिंदुस्तान

00:12:08.159 --> 00:12:14.159
में कोई 7 800 साल

00:12:10.759 --> 00:12:16.799
तो ऑफिशियल लैंग्वेज कोर्ट लैंग्वेज ही

00:12:14.159 --> 00:12:19.278
पर्शियन रही है। उन लोगों की जिनकी मदद

00:12:16.799 --> 00:12:22.078
टंग परशियन नहीं थी।

00:12:19.278 --> 00:12:25.439
लेकिन वो पढ़े लिखे लोगों की जबान कहलाती

00:12:22.078 --> 00:12:29.199
थी। पूरे सेंट्रल एशिया में भी उसी को ये

00:12:25.440 --> 00:12:33.600
दर्जा हासिल था। तो वो स्क्रिप्ट अवेलेबल

00:12:29.200 --> 00:12:37.120
थी। तो ये डायलक्ट उसमें लिखा जाने लगा।

00:12:33.600 --> 00:12:39.680
यह कोई 13वीं सदी में शायद जाहिर एक दिन

00:12:37.120 --> 00:12:42.639
में तो नहीं हुआ होगा लेकिन जो ट्रेसेबल

00:12:39.679 --> 00:12:44.879
है जो हिस्ट्री में मेंशन होते हैं बहुत

00:12:42.639 --> 00:12:48.799
से लोग नहीं मेंशन होते वो अपना काम करके

00:12:44.879 --> 00:12:48.799
चले जाते हैं उनका कभी पता ही नहीं

00:12:48.839 --> 00:12:57.360
लगता वो हम अमीर खुसरो को कहते हैं कि भाई

00:12:53.519 --> 00:13:01.039
अमीर खुसरो जो पटियाली में पैदा हुए थे

00:12:57.360 --> 00:13:03.560
दिल्ली में रहते थे कोई आठ या नौ बादशाहों

00:13:01.039 --> 00:13:05.319
के साथ काम भी किया उन्होंने

00:13:03.559 --> 00:13:09.679
उन्होंने

00:13:05.320 --> 00:13:11.839
उन्होंने ये डायलग जो था लेके और ये डायलग

00:13:09.679 --> 00:13:14.239
जो आज हम उर्दू सुन रहे हैं वैसा नहीं था।

00:13:11.839 --> 00:13:17.360
ये तो वक्त के साथ पॉलिश होती रही बदलती

00:13:14.240 --> 00:13:20.240
रही। वरना आंखें तरसतीियां हैं। इस तरह की

00:13:17.360 --> 00:13:23.200
भी लैंग्वेज होती थी। ये कैसी बस्तियां

00:13:20.240 --> 00:13:26.759
हैं कि जिनको देखने को आंखें तरसियां हैं।

00:13:23.200 --> 00:13:33.120
तो ये सब चला गया धीरे-धीरे करके।

00:13:26.759 --> 00:13:36.720
वली मुझ मन मने आवे ख्याल ऐर तो यह मने

00:13:33.120 --> 00:13:39.679
में मने था पहले तो फिर वो में बना तो

00:13:36.720 --> 00:13:42.480
इसमें धीरे-धीरे इंप्रोवाइजेशन और उसको

00:13:39.679 --> 00:13:45.278
ज्यादा ज्यादा सफिसिकेट किया गया क्लीन

00:13:42.480 --> 00:13:48.759
किया गया लेकिन इसकी बिगिनिंग जो है वो

00:13:45.278 --> 00:13:52.480
हमें मिलती है खुसरो के

00:13:48.759 --> 00:13:56.399
यहां जो कि अच्छा वो भी समान देखिए क्या

00:13:52.480 --> 00:13:58.440
है कि सखी पिया की मैं क्या बताऊं ना आप

00:13:56.399 --> 00:14:01.278
आवे ना भेजे

00:13:58.440 --> 00:14:03.839
पतियां तो अच्छा फिर उसमें कहीं फारसी के

00:14:01.278 --> 00:14:07.120
लफ्ज़ भी आ जाते हैं। कहीं एक लाइन आधी

00:14:03.839 --> 00:14:09.560
फारसी में और आधी अवधि में तो धीरे-धीरे

00:14:07.120 --> 00:14:14.399
एक चीज फोकस में आ रही

00:14:09.559 --> 00:14:16.879
है। ये दौर गया उसके बाद एक अचानक हम

00:14:14.399 --> 00:14:18.759
देखते हैं कि यहां ये सब तो हो रहा है।

00:14:16.879 --> 00:14:22.240
लेकिन जो पहला

00:14:18.759 --> 00:14:27.759
साहिब अह दीवान जिसने पहला दीवान छपा

00:14:22.240 --> 00:14:32.198
उर्दू का पोएट्री का वो छपा दक्कन में तो

00:14:27.759 --> 00:14:35.360
ये दकन कैसे कूद-पांध के पहुंच

00:14:32.198 --> 00:14:38.799
गई। ये मुझे हमेशा डिस्टर्ब करता था। इसकी

00:14:35.360 --> 00:14:41.199
दो थ्यरीज है। मुझे दूसरी ज्यादा ठीक लगती

00:14:38.799 --> 00:14:42.719
है। हो सकता है उसमें मेरे यूपी वाले होने

00:14:41.198 --> 00:14:45.679
का कहा।

00:14:42.720 --> 00:14:48.800
कि एक तो उनका यह कहना है कि देखिए वो

00:14:45.679 --> 00:14:52.159
खड़ी बोली यहां तक आ गई थी लेकिन बाकी

00:14:48.799 --> 00:14:56.078
उर्दू खड़ी बोली बनी इसलिए कि हमारे तरफ

00:14:52.159 --> 00:14:58.719
भी दोनों तरफ वो है समंदर और हमारे पास भी

00:14:56.078 --> 00:15:01.039
सेलर्स आते थे हमारे यहां भी ट्रेड होती

00:14:58.720 --> 00:15:04.320
थी अरब्स भी आते थे टर्क भी आते थे

00:15:01.039 --> 00:15:09.759
ईरानियन भी आते थे और उनके शब्द धीरे-धीरे

00:15:04.320 --> 00:15:12.879
यहां आए और उसके बाद लोग भी आए और वो जबान

00:15:09.759 --> 00:15:15.838
धीरे-धीरे बनी हमने इसको बनाया

00:15:12.879 --> 00:15:19.198
दखनी उसके बाद बाकी लोगों ने सीखी ये तो

00:15:15.839 --> 00:15:22.240
सही है कि कुलू कुतब शाह जो थे वो पहले

00:15:19.198 --> 00:15:24.359
साहिब दीवान शायर उर्दू के थे। लेकिन

00:15:22.240 --> 00:15:29.759
हकीकत क्या है कि

00:15:24.360 --> 00:15:31.759
ये 13 सेंचुरी में अलाउद्दीन खिलजी जो था

00:15:29.759 --> 00:15:35.759
जिसे अभी एक फिल्म में भी दिखाया गया है।

00:15:31.759 --> 00:15:39.198
क्या नाम था उस फिल्म का? हां। अलाउद्दीन

00:15:35.759 --> 00:15:42.319
खिलजी रणवीर सिंह जैसा बिल्कुल नहीं था।

00:15:39.198 --> 00:15:44.039
वो काफी डिफरेंट था। कभी उसके बारे में

00:15:42.320 --> 00:15:47.120
बात

00:15:44.039 --> 00:15:50.120
करेंगे। उसने बहुत से ऐसे काम किए हैं जो

00:15:47.120 --> 00:15:53.720
दुनिया में पहली बार हुए हैं। हैरत

00:15:50.120 --> 00:15:57.000
तंगेज। तो ये पहला बादशाह था जो इतना डीप

00:15:53.720 --> 00:16:00.480
गया और इन्होंने मेरे ख्याल

00:15:57.000 --> 00:16:02.958
से 1303 या कुछ ऐसे ही था मुझे। आई एम

00:16:00.480 --> 00:16:04.959
वेरी बैड एट रिमेंबरिंग नंबर्स। मुझे तो

00:16:02.958 --> 00:16:07.838
अपना कार नंबर नहीं याद रहता। अब

00:16:04.958 --> 00:16:11.278
अलाउद्दीन कब गए थे ये कहां से याद होगा।

00:16:07.839 --> 00:16:13.880
लेकिन बहरहाल ये 14वीं सदी की बात है जब

00:16:11.278 --> 00:16:15.480
वो गए थे वहां

00:16:13.879 --> 00:16:19.759
ईवी

00:16:15.480 --> 00:16:23.039
तो वहां पर बहुत लोग रह गए उसी के एक

00:16:19.759 --> 00:16:25.278
अराउंड 50 इयर्स बाद फिर ये तो आ गए फिर

00:16:23.039 --> 00:16:29.439
वहां बहुत से लोग सेटल हो गए वहां जो इधर

00:16:25.278 --> 00:16:31.919
के थे फिर उसके बाद मोहम्मद बिन तुगलक के

00:16:29.440 --> 00:16:34.320
जमाने में वो दौलताबाद को पूरा दिल्ली

00:16:31.919 --> 00:16:37.360
लेके चले गए थे वो तो मालूम हुआ बाकी सब

00:16:34.320 --> 00:16:39.839
कुछ है पानी नहीं है तो एक से उनके जो

00:16:37.360 --> 00:16:41.959
फैसले हुआ करते थे तो फिर सब वापस आ गए।

00:16:39.839 --> 00:16:48.160
बहुत से लोग फिर भी रह

00:16:41.958 --> 00:16:52.439
गए। तो ये जो यहां गया था और जब ये तुगलक

00:16:48.159 --> 00:16:55.679
सरकार कमजोर पड़ी हुकूमत तो वहां

00:16:52.440 --> 00:16:58.480
बहमनी उन्होंने खुद मुख्तारी का ऐलान कर

00:16:55.679 --> 00:17:01.278
दिया। बहमनी नाम का एक जनरल था जो बादशाह

00:16:58.480 --> 00:17:04.000
बन गया और वो भी कुछ एक 50 साल के अंदर

00:17:01.278 --> 00:17:07.038
टूट गया और पांच डिफरेंट स्टेट्स बन गई

00:17:04.000 --> 00:17:08.279
जिनमें से दो थी गोलकंडा।

00:17:07.038 --> 00:17:12.000
और

00:17:08.279 --> 00:17:14.279
बीजापुर इन्होंने इस जबान को बहुत ज्यादा

00:17:12.000 --> 00:17:17.720
सवारा और आगे

00:17:14.279 --> 00:17:22.399
बढ़ाया कुली कुतुब शाह गोलकंडा का

00:17:17.720 --> 00:17:26.000
था और वही अब वो देखिए फिर वही जमाना पिया

00:17:22.400 --> 00:17:30.160
बाज प्याला पिया जाए ना पियाबाज यक पल

00:17:26.000 --> 00:17:32.319
जिया जाए ना अब ये ये ये अपने पालने में

00:17:30.160 --> 00:17:32.320
है

00:17:32.359 --> 00:17:42.798
उर्दू एक और था जो पैदा तो वहां हुआ था

00:17:38.440 --> 00:17:45.960
वली दक्कनी जिसे कहते हैं लेकिन उसका

00:17:42.798 --> 00:17:50.558
ज्यादातर जिंदगी गुजरात में

00:17:45.960 --> 00:17:53.759
गुजरी और वहीं गुजरात में वो मरा तो उसे

00:17:50.558 --> 00:17:58.079
वली गुजराती भी कहते हैं वो अली दनी भी

00:17:53.759 --> 00:18:03.359
कहते हैं। उसकी कब्र अहमदाबाद में थी। थी

00:17:58.079 --> 00:18:07.000
इसलिए कह रहा हूं कि वो 2002 में उसको

00:18:03.359 --> 00:18:10.159
तोड़ के वहां सड़क बना दी गई।

00:18:07.000 --> 00:18:12.798
आहिस्ताआहिस्ता पहली बार यह रदीफ उसी ने

00:18:10.160 --> 00:18:12.798
इस्तेमाल की

00:18:13.000 --> 00:18:21.359
थी। ये धीरे-धीरे धीरे-धीरे जो वली से एक

00:18:18.558 --> 00:18:23.678
दिल्ली भी वली आए और वली का एक बहुत बड़ा

00:18:21.359 --> 00:18:27.119
कंट्रीब्यूशन इसलिए कि पहले ये जो शायर थे

00:18:23.679 --> 00:18:29.919
वो बड़े-बड़े शायर हुए हैं। लेकिन उनका फोकस

00:18:27.119 --> 00:18:32.479
गज़ल पे नहीं था।

00:18:29.919 --> 00:18:35.440
यह वली का एक बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन है।

00:18:32.480 --> 00:18:38.759
इन अ वे ही यू कैन बी ही कैन बी कॉल्ड एस

00:18:35.440 --> 00:18:42.720
द फर्स्ट पोएट ऑफ गजल इन

00:18:38.759 --> 00:18:45.839
उर्दू। और उसके बाद गजल का एक रिवाज शुरू

00:18:42.720 --> 00:18:49.519
हुआ जो धीरे-धीरे बड़ा पॉपुलर हुआ। इससे

00:18:45.839 --> 00:18:51.639
पहले कि अभी ये सब हिस्ट्री में चले। गजल

00:18:49.519 --> 00:18:57.599
के बारे में कुछ बात करते

00:18:51.640 --> 00:18:59.240
हैं। गजल बड़ा पॉपुलर आज भी जॉन है।

00:18:57.599 --> 00:19:04.159
लेकिन ये है

00:18:59.240 --> 00:19:07.519
क्या? मुझे ऐसा ख्याल है कि काफी लोग ये

00:19:04.160 --> 00:19:10.640
बात नहीं जानते कि गज़ होती क्या है? इसलिए

00:19:07.519 --> 00:19:15.079
कि बहुत बार उन्होंने मेरी नज़्म को कहा सर

00:19:10.640 --> 00:19:18.480
वो जो आपकी गज़ल है ना वो गज़ल थी ही

00:19:15.079 --> 00:19:20.798
नहीं। गज़ल क्या चीज है? यह एक बड़ी

00:19:18.480 --> 00:19:23.279
इंटरेस्टिंग चीज है। यह स्टार्ट तो हुई है

00:19:20.798 --> 00:19:26.879
अरब से लेकिन जो हिंदुस्तान

00:19:23.279 --> 00:19:26.879
पहुंचतेपहुंचते तक बदल गई

00:19:27.400 --> 00:19:33.519
हो। शायरी में दुनिया की शायरी में हो

00:19:30.160 --> 00:19:35.320
चाहे अंग्रेजी शायरी हो संस्कृत हो,

00:19:33.519 --> 00:19:40.480
अरेबिक

00:19:35.319 --> 00:19:42.678
हो, फ्रेंच हो, इनमें रम होता है। काफिया

00:19:40.480 --> 00:19:45.759
जिसे हम कहते

00:19:42.679 --> 00:19:48.320
हैं। और अरेबिक पोएट्री में भी काफिया

00:19:45.759 --> 00:19:50.359
होता है। हमारे ट्रेडिशनल दो हैं। उनमें

00:19:48.319 --> 00:19:56.079
भी काफिया होता

00:19:50.359 --> 00:20:00.240
है कि रहीमन मुश्किल ला पड़ी टेढ़े दो काम

00:19:56.079 --> 00:20:03.759
सीधे से जग ना मिले उल्टे मिले ना राम तो

00:20:00.240 --> 00:20:06.880
अब काम और राम आपके पास हैं। अ स्टार बाय

00:20:03.759 --> 00:20:09.400
मौसी स्टोन हाफ हिडन फ्रॉम द आई फस द

00:20:06.880 --> 00:20:13.520
स्टार दैट ओनली वन इज़ शाइनिंग ऑन द

00:20:09.400 --> 00:20:17.480
स्काई स्काई एंड आई

00:20:13.519 --> 00:20:20.759
यही अरेबिक पोएट्री है। यही संस्कृत में

00:20:17.480 --> 00:20:24.120
है। एक चीज नई

00:20:20.759 --> 00:20:26.679
आई जो काफी है के बाद होती

00:20:24.119 --> 00:20:30.959
है। इसका नाम है

00:20:26.679 --> 00:20:33.759
रदीफ। ये अरब्स की नहीं है। ये कहीं

00:20:30.960 --> 00:20:38.279
परशिया में इन्वेंट हुई। उन्होंने बदल

00:20:33.759 --> 00:20:42.960
लेके उसको इसमें एक नई चीज डाली वक्त के

00:20:38.279 --> 00:20:46.798
साथ। दिल नाजा तुझे हुआ क्या है? आखिर इस

00:20:42.960 --> 00:20:50.919
दर्द की दवा क्या है? तो यह हुआ और दवा तो

00:20:46.798 --> 00:20:56.480
रम हो गया काफिया हो गया यह क्या है क्या

00:20:50.919 --> 00:21:03.038
है यह रदीफ है कोई उम्मीद बर नहीं आती कोई

00:20:56.480 --> 00:21:08.200
सूरत नजर नहीं आती तो दर दर ये तो काफिया

00:21:03.038 --> 00:21:12.558
हो गया नहीं आती क्या है ये रदीफ है

00:21:08.200 --> 00:21:14.640
ये हमने इन्हहेरिट किया वर्जन पोएट्री से

00:21:12.558 --> 00:21:17.599
आज हिंदुस्तान में पंजाबी में में भी

00:21:14.640 --> 00:21:21.360
शायरी होती है। गज़ लिखी जाती है। गुजराती

00:21:17.599 --> 00:21:23.519
में भी गज़ लिखी जाती है। मराठी में भी गज़

00:21:21.359 --> 00:21:26.240
लिखी जाती है। उर्दू में तो लिखी जाती है।

00:21:23.519 --> 00:21:27.639
हिंदी में भी लिखी जाती है। और वो रदीफ

00:21:26.240 --> 00:21:33.440
इसमें होता

00:21:27.640 --> 00:21:37.360
है। कुछ भी कुछ उन भी राह आखियां सन कुछ

00:21:33.440 --> 00:21:42.558
गले गमादा तो थी। कुछ शहर लोग भी जालिम

00:21:37.359 --> 00:21:44.879
था। कुछ सर शौक भी थी। ये सी जो है ये

00:21:42.558 --> 00:21:47.759
रदीफ है।

00:21:44.880 --> 00:21:48.840
वरना शौक और टॉक पे खत्म हो जानी चाहिए

00:21:47.759 --> 00:21:53.599
बात।

00:21:48.839 --> 00:21:56.319
सी तो हर जुबान में यह जो हमारे यहां गज़

00:21:53.599 --> 00:21:59.599
लिखी जाती है एक बात कि इसमें रदीफ भी

00:21:56.319 --> 00:22:03.599
होती है। हालांकि नहीं भी हो लेकिन तो कोई

00:21:59.599 --> 00:22:06.558
जेल नहीं भेजेगा लेकिन आमतौर से होती है।

00:22:03.599 --> 00:22:07.879
ऐसी भी गज़ें हैं जिनमें नहीं है। मगर वो

00:22:06.558 --> 00:22:11.798
बहुत कम होती

00:22:07.880 --> 00:22:15.280
है। और बड़े-बड़े शायरों ने ऐसी गज़ें लिखी

00:22:11.798 --> 00:22:19.599
हैं। जिसमें रदीफ नहीं है। जिगर का शेर है

00:22:15.279 --> 00:22:24.558
तेरा तसवुर शब हम शब खिलवते गम भी बस्म

00:22:19.599 --> 00:22:28.158
तरब तो शब तरब कोई रदीफ नहीं लेकिन आमतौर

00:22:24.558 --> 00:22:33.519
से नहीं होता 99 फीसदी गज़लों में आपको

00:22:28.159 --> 00:22:36.480
मिलेगी रदीफ ये तो एक बात हुई दूसरे इसमें

00:22:33.519 --> 00:22:40.359
एक और चीज है जो इसको बहुत यूनिक बनाती है

00:22:36.480 --> 00:22:44.240
इस फॉर्म को वो है कि

00:22:40.359 --> 00:22:46.798
गजल एक बिस्किट के डिब्बे जैसी है

00:22:44.240 --> 00:22:49.038
जिसके अंदर तरह-तरह के बिस्किट हैं। कुछ

00:22:46.798 --> 00:22:50.359
मीठे हैं, कुछ नमकीन है, कुछ क्रीम वाले

00:22:49.038 --> 00:22:54.558
हैं,

00:22:50.359 --> 00:22:57.439
कुछ सादे हैं। किसी में जैम लगा हुआ है,

00:22:54.558 --> 00:22:59.399
किसी में नहीं लगा है। अलग-अलग टेस्ट के

00:22:57.440 --> 00:23:04.120
बिस्किट है मगर एक डिब्बे में

00:22:59.400 --> 00:23:08.880
है। इसमें हर दो लाइनें अपने अंदर मुकम्मल

00:23:04.119 --> 00:23:11.759
है। उनका पहली दो लाइनों से या बाद की दो

00:23:08.880 --> 00:23:13.679
लाइनों से कोई संबंध, कोई ताल्लुक हो, कोई

00:23:11.759 --> 00:23:18.200
जरूरी नहीं।

00:23:13.679 --> 00:23:21.120
सो इट इज अ पैकेज ऑफ एक्टिक थॉट्स एंड

00:23:18.200 --> 00:23:23.159
स्टेटमेंट्स जो कुछ भी हो सकते हैं। तो

00:23:21.119 --> 00:23:28.479
व्हाट इज पुटिंग देम

00:23:23.159 --> 00:23:34.159
टुगेदर? दो चीजें हैं। एक बहर जिसे कहते

00:23:28.480 --> 00:23:37.200
हैं मीटर कि मीटर एक है। दूसरे रदीफ और

00:23:34.159 --> 00:23:39.559
काफिया। रदीफ तो सेम चलती रहेगी लेकिन

00:23:37.200 --> 00:23:44.960
काफिया बदलते रहेंगे।

00:23:39.558 --> 00:23:48.480
मीटर रम रदीफ यह एक होगा और हर दो लाइनें

00:23:44.960 --> 00:23:52.600
अपने अंदर कंप्लीट होंगी जिनका आगे पीछे

00:23:48.480 --> 00:23:55.720
से कोई वास्ता हो नहीं हो कोई फर्क नहीं

00:23:52.599 --> 00:23:58.480
पड़ता दैट मे गज़ल वेरी

00:23:55.720 --> 00:23:59.640
कोर्टेबल कि दो लाइन में आप पूरी बात कह

00:23:58.480 --> 00:24:02.798
देते

00:23:59.640 --> 00:24:05.919
हैं किसी ने सर्वे किया था हिंदुस्तान की

00:24:02.798 --> 00:24:08.639
पार्लियामेंट में जब बातचीत हुआ करती थी

00:24:05.919 --> 00:24:09.799
तो तो

00:24:08.640 --> 00:24:14.480
जो

00:24:09.798 --> 00:24:18.240
ज्यादातर ऑलमोस्ट अबव 90% जो पोएट्री कोट

00:24:14.480 --> 00:24:18.240
हुई है वो उर्दू गल की

00:24:19.000 --> 00:24:22.679
है। इसलिए कि दो लाइन में आप पूरी बात कह

00:24:21.759 --> 00:24:25.679
देते

00:24:22.679 --> 00:24:26.440
हैं। और उसके बाद अगली दूसरी लाइन में कुछ

00:24:25.679 --> 00:24:30.000
और

00:24:26.440 --> 00:24:32.720
होगा। मैं ऐसी मिसाल के तौर पर अपनी एक दो

00:24:30.000 --> 00:24:34.919
शेर बताता हूं जिसमें एक दूसरे से कोई

00:24:32.720 --> 00:24:38.640
ताल्लुक नहीं

00:24:34.919 --> 00:24:41.400
होगा। कल जहां दीवार थी

00:24:38.640 --> 00:24:47.120
है आज एक दर

00:24:41.400 --> 00:24:51.278
देखिए कल जहां दीवार थी है आज एक दर देखिए

00:24:47.119 --> 00:24:54.079
क्या समाई थी भला दीवाने के सर देखिए अब

00:24:51.278 --> 00:24:57.839
इसमें सेल सी बात ये है कि ये जो दर बना

00:24:54.079 --> 00:25:01.119
है ये दीवाने के सर से बना है। तो यहां

00:24:57.839 --> 00:25:03.639
अपने चुपके से सर का प्रेजेंस डाल दिया कि

00:25:01.119 --> 00:25:07.759
ये इसने सर मार मार के दीवार को दर कर

00:25:03.640 --> 00:25:11.278
दिया। अब अगला शेर क्या है? पुरसुकून लगती

00:25:07.759 --> 00:25:11.278
है कितनी झील के पानी पे

00:25:11.558 --> 00:25:16.038
बान पुरसुकून लगती है कितनी झील के पानी

00:25:14.960 --> 00:25:21.360
पे

00:25:16.038 --> 00:25:24.759
बैरों की बेताबियां पानी के अंदर देखिए

00:25:21.359 --> 00:25:28.678
तो देखिए देखिए है

00:25:24.759 --> 00:25:32.798
रदीफ सर दर

00:25:28.679 --> 00:25:33.559
अंदर काफिया चल रहा है लेकिन टॉपिक्स तो

00:25:32.798 --> 00:25:37.278
बिल्कुल

00:25:33.558 --> 00:25:40.960
अलग तो इस तरह आप कोई भी गज़ देखेंगे तो

00:25:37.278 --> 00:25:43.200
उसमें आमतौर से हो सकता है मूड एक हो

00:25:40.960 --> 00:25:44.960
लेकिन शेर अलग-अलग होंगे। उनका आपस में

00:25:43.200 --> 00:25:47.038
कोई वास्ता नहीं है और वास्ता ढूंढने की

00:25:44.960 --> 00:25:50.519
कोशिश करने से सिर्फ कंफ्यूजन होगा आपको।

00:25:47.038 --> 00:25:54.558
हर शेर को अपने अंदर एंजॉय कीजिए

00:25:50.519 --> 00:25:58.720
उसे। अब ये जो दौर आया था इन लोगों के बाद

00:25:54.558 --> 00:26:03.158
जब वली दनी ने और इस तरह के दूसरे शायरों

00:25:58.720 --> 00:26:07.798
ने गज़ल की तरफ भेजा उर्दू पोएट्री

00:26:03.159 --> 00:26:11.200
को। मैं उर्दू प्रोथ्स के बारे में

00:26:07.798 --> 00:26:15.278
बात करूंगा लेकिन इसलिए कि वह जरा बेचारी

00:26:11.200 --> 00:26:17.679
रनर अप है उर्दू लिटरेचर में वो भी

00:26:15.278 --> 00:26:21.440
इंपॉर्टेंट है और बहुत अच्छे काम हुए

00:26:17.679 --> 00:26:22.919
लेकिन फिर भी उर्दू इज़ अल्टीमेटली नोन बाय

00:26:21.440 --> 00:26:26.200
इट्स

00:26:22.919 --> 00:26:29.480
पोएट्री तो

00:26:26.200 --> 00:26:34.000
ये कौन सी होगी

00:26:29.480 --> 00:26:37.720
सदी 18वीं सदी 17वीं सदी जैसा या इसके बीच

00:26:34.000 --> 00:26:39.480
में कि जब दर्द

00:26:37.720 --> 00:26:45.120
जुर्रत

00:26:39.480 --> 00:26:48.319
मीर जिसको शहंशाह सुखन कहते हैं जिसको

00:26:45.119 --> 00:26:48.319
गालिब तक ने माना

00:26:48.359 --> 00:26:57.599
है और सौदा ऐसे बड़े शायर पैदा हुए। अच्छा

00:26:53.679 --> 00:27:01.360
इस बीच में यह मेरे ख्याल से यह बाद में

00:26:57.599 --> 00:27:04.319
हुआ है। 17वीं सदी में हुआ है। 18 सेंचुरी

00:27:01.359 --> 00:27:07.240
में एक शाह हातिम थे जिन्होंने उर्दू को

00:27:04.319 --> 00:27:10.158
एक नया नाम दिया।

00:27:07.240 --> 00:27:11.319
रेख्ता आजकल यहां तो बहुत सुनते हैं ना आप

00:27:10.159 --> 00:27:15.120
रेख्ता। बड़ा

00:27:11.319 --> 00:27:19.720
जबरदस्त यहां एक ऑर्गेनाइजेशन है और

00:27:15.119 --> 00:27:24.399
दुनिया की सबसे बड़ी जो उर्दू साइट

00:27:19.720 --> 00:27:28.600
है नेट पे वो रेख्ता है। संजीव सराफ की

00:27:24.400 --> 00:27:31.880
बनाई हुई। वी शुड बी वेरी प्राउड ऑफ

00:27:28.599 --> 00:27:34.879
दिस। तो रेख्ता का मतलब

00:27:31.880 --> 00:27:34.880
है

00:27:36.359 --> 00:27:42.879
अ जो उसको क्या बोलूं? दो पौधे मिला के जो

00:27:40.880 --> 00:27:44.840
बनाते हैं आप उसे क्या ब्रीडिंग क्या कहते

00:27:42.880 --> 00:27:47.960
हैं?

00:27:44.839 --> 00:27:51.599
हाइब्रिड। रेख्ता का मतलब है

00:27:47.960 --> 00:27:54.480
हाइब्रिड। बिकॉज़ ये जो जुबान है इसने इतनी

00:27:51.599 --> 00:27:57.359
जगहों से शब्द लिया वो खड़ी बोली की

00:27:54.480 --> 00:27:59.839
वोकैबलरी लेके इतनी जबानों के शब्द हैं

00:27:57.359 --> 00:28:01.398
इसमें कि इसे हाइब्रिड। उन्होंने कहा कि

00:27:59.839 --> 00:28:05.199
ये तो हाइब्रिड

00:28:01.398 --> 00:28:07.439
है। तो ये रेख्ता नाम पड़ा जिसको उसके 100

00:28:05.200 --> 00:28:10.640
150 साल बाद गालिब ने ये वर्ड इस्तेमाल

00:28:07.440 --> 00:28:12.600
किया है। मीर के बारे में रेख्ता के तुम

00:28:10.640 --> 00:28:15.919
ही उस्ताद नहीं हो

00:28:12.599 --> 00:28:18.480
गालिब। कहते हैं अगले जमाने में कोई मीर

00:28:15.919 --> 00:28:21.919
भी था।

00:28:18.480 --> 00:28:24.079
और मीर था। मीर के जमाने में एक और भी

00:28:21.919 --> 00:28:27.440
शायर थे जिनका इतना नाम आपने नहीं सुना

00:28:24.079 --> 00:28:29.839
होगा। मगर वह उस वक्त बड़े शायर थे कायम।

00:28:27.440 --> 00:28:32.480
वो दिल्ली के नहीं थे तो शायद इस वजह से

00:28:29.839 --> 00:28:32.480
नाम नहीं हुआ

00:28:33.640 --> 00:28:38.000
इतना नहीं मेरा ये मतलब नहीं

00:28:39.240 --> 00:28:45.480
था एक बात जिस पे मैं क्योंकि मेरी मदद

00:28:43.200 --> 00:28:48.159
टंग उर्दू

00:28:45.480 --> 00:28:51.360
है हालांकि इसमें भी एक झंझट है वो

00:28:48.159 --> 00:28:54.960
बताऊंगा भी आपको मैं बहुत फक्र करता हूं

00:28:51.359 --> 00:28:57.038
कि दुनिया की जितनी ज़बाने हैं जब उसमें

00:28:54.960 --> 00:29:01.440
पोएट्री शुरू हुई उनकी हिस्ट्री में आप

00:28:57.038 --> 00:29:02.679
जाइए तो वो शुरू हुई हिम से चर्च में

00:29:01.440 --> 00:29:06.558
टेंपल

00:29:02.679 --> 00:29:08.278
में इन प्रेज़ ऑफ़ द डेटीज और गॉड द सुपर

00:29:06.558 --> 00:29:11.158
पावर और

00:29:08.278 --> 00:29:15.359
व्हाटएवर एंड धीरे-धीरे

00:29:11.159 --> 00:29:17.720
ट्रांसेंडेंट एंड वेंट टू अदर एवेन्यूस मे

00:29:15.359 --> 00:29:20.959
बी लव

00:29:17.720 --> 00:29:23.278
रोमांस सेंस ऑफ़ लोनली एंड सो ऑन वो बीबी

00:29:20.960 --> 00:29:25.919
फर्स्ट पर्सन सेकंड पर्सन तक रहा और बहुत

00:29:23.278 --> 00:29:26.759
दिनों बाद फिर वो जाके उसमें सोशल इशूज़

00:29:25.919 --> 00:29:30.759
आए।

00:29:26.759 --> 00:29:34.759
है उर्दू इज वन लैंग्वेज इन द

00:29:30.759 --> 00:29:38.359
वर्ल्ड जो पहले दिन से इरिलजस और सेकुलर

00:29:34.759 --> 00:29:41.519
थी। पहले दिन

00:29:38.359 --> 00:29:44.959
से ये कायम अमीर जिनका मैं जिक्र कर रहा

00:29:41.519 --> 00:29:46.879
हूं। इनके शेर आप सुनेंगे तो हैरान होंगे।

00:29:44.960 --> 00:29:49.840
आज पता नहीं किसी शायर की हिम्मत होगी

00:29:46.880 --> 00:29:51.000
स्टेज पे थे शेर पढ़ने की कि नहीं। जो उस

00:29:49.839 --> 00:29:54.519
जमाने में

00:29:51.000 --> 00:29:59.278
लिखे 18 सेंचुरी

00:29:54.519 --> 00:30:03.119
में कायम का शेर है। काबा जो ढह गया है तो

00:29:59.278 --> 00:30:05.919
क्या जाए गम है शेर। अगर काबा टूट गया है,

00:30:03.119 --> 00:30:06.759
डिमोलिश हो गया है तो इसमें कौन से गम की

00:30:05.919 --> 00:30:10.399
बात

00:30:06.759 --> 00:30:14.079
है? कुछ कसरे दिल नहीं, कोई दिल का महल

00:30:10.398 --> 00:30:14.079
नहीं है जो बनाया ना

00:30:15.480 --> 00:30:21.079
जाए। मीर कैसा

00:30:17.880 --> 00:30:25.360
है? निजात मतलब

00:30:21.079 --> 00:30:29.278
मोक्ष। जाए है जी निजात के गम में।

00:30:25.359 --> 00:30:29.278
ऐसी जन्नत गई जहन्नुम

00:30:29.798 --> 00:30:39.918
में। मीर के दीनों मजहब का क्या पूछते हो

00:30:34.960 --> 00:30:43.480
कि उन्होंने तो कशका खींचा दैर मंदिर दैर

00:30:39.919 --> 00:30:47.440
में बैठा कबका करके इस्लाम

00:30:43.480 --> 00:30:50.558
किया। ये ऐसी पोएट्री और एक ये तो मैं एक

00:30:47.440 --> 00:30:55.159
दो सुना रहा हूं आपको। यानी इसी पे अकेले

00:30:50.558 --> 00:30:59.240
एक पूरा शाम गुजारी जा सकती है। एक एंटी

00:30:55.159 --> 00:31:02.960
फंडामेंटलिज्म एंटीजिस्ट

00:30:59.240 --> 00:31:06.079
रिलॉजिसिटी एक हर जगह एक रिवोल्ट और एक

00:31:02.960 --> 00:31:09.278
फॉरवर्ड लुकिंग एटीट्यूड दिखता है उर्दू

00:31:06.079 --> 00:31:12.720
पोएट्री में। परहप्स वि द एक्सेप्शन ऑफ़

00:31:09.278 --> 00:31:14.798
वन। आई एम वेरी एम्बरेस्ड अबाउट दैट। वो

00:31:12.720 --> 00:31:15.640
बड़ी इज्जत होती है उनके अखबार की। मैं तो

00:31:14.798 --> 00:31:19.200
नहीं

00:31:15.640 --> 00:31:22.520
करता। तो

00:31:19.200 --> 00:31:25.120
हर स्टेज पे हुआ।

00:31:22.519 --> 00:31:26.879
गालिब मुझे याद है एक गालिब के बारे में

00:31:25.119 --> 00:31:29.239
आपको एक बात बता लेकिन उससे पहले मैं बता

00:31:26.880 --> 00:31:32.159
दूं कि मेरे क्रेडेंशियल भी इधर डाउटफुल

00:31:29.240 --> 00:31:33.759
है। हुआ ये कि एक बहुत बड़े उर्दू के शायर

00:31:32.159 --> 00:31:36.159
थे वो दुनिया में नहीं रहे तो उनका नाम

00:31:33.759 --> 00:31:38.240
लेना मुनासिब नहीं है। मैंने उनसे कहा

00:31:36.159 --> 00:31:39.919
किसी बात पे बहस हो रही थी जुबान पे। तो

00:31:38.240 --> 00:31:41.919
मैंने उनसे कहा माफ़ कीजिएगा आपको वो जो

00:31:39.919 --> 00:31:45.679
मिश्रा है वो जबान के हिसाब से सही नहीं

00:31:41.919 --> 00:31:48.159
है। गलती है उसमें। कह आप मुझे गलती बता

00:31:45.679 --> 00:31:49.759
रहे हैं। आप कैसे बता सकते हैं? आप जहां

00:31:48.159 --> 00:31:53.120
के हैं वहां के लोगों को मैं अहले जबान

00:31:49.759 --> 00:31:55.440
नहीं मानता हूं। लिंग्विस्ट तो मैंने कहा

00:31:53.119 --> 00:31:57.918
इसे कहां मालूम होगा? मैं तो लखनऊ में पला

00:31:55.440 --> 00:32:00.679
पढ़ा हूं सारी जिंदगी। तो कह मैंने कहा

00:31:57.919 --> 00:32:03.278
मैं कहां का हूं? कहने आप ग्वालियर के

00:32:00.679 --> 00:32:05.759
हैं। ये तो सच है कि मैं ग्वालियर में ही

00:32:03.278 --> 00:32:07.679
पैदा हुआ था। लेकिन दो-चार महीने का था तो

00:32:05.759 --> 00:32:10.480
चला आया।

00:32:07.679 --> 00:32:12.720
तो मैंने कहा अच्छा हुजूर एक बात बताएं कि

00:32:10.480 --> 00:32:14.960
बिल्लियों की बहुत आदत होती है अक्सर जाके

00:32:12.720 --> 00:32:16.679
ओवन में बच्चे दे देती हैं तो उन बच्चों

00:32:14.960 --> 00:32:19.360
को आप बिस्किट कहते हैं

00:32:16.679 --> 00:32:21.600
क्या तो

00:32:19.359 --> 00:32:25.359
भाई कहां पैदा हुए इससे क्या मतलब है कहां

00:32:21.599 --> 00:32:25.359
पले पड़े वो देखो

00:32:27.159 --> 00:32:34.159
हैं तो अब ये देखिए जहां गालिब है एक मेरी

00:32:31.278 --> 00:32:36.319
बहस हो गई थी एक आज वो दुनिया में नहीं है

00:32:34.159 --> 00:32:37.080
मनीक कॉल बहुत अच्छा फिल्म बड़ा फिल्म

00:32:36.319 --> 00:32:42.319
मेकर

00:32:37.079 --> 00:32:44.398
था। वो अलग तरह की फिल्में बनाते थे और हम

00:32:42.319 --> 00:32:47.359
लोग तो मेन स्ट्रीम कमर्शियल सिनेमा में

00:32:44.398 --> 00:32:50.558
थे। ही यूज्ड टू मेक टोटली एक्सपेरिमेंटल

00:32:47.359 --> 00:32:52.719
अनकन्वेंशनल फिल्म्स। और उस जमाने में

00:32:50.558 --> 00:32:56.000
मैंने उसकी वो इज्जत नहीं की जो अब करता

00:32:52.720 --> 00:32:57.919
हूं। उसने एक पिक्चर वाली थी उसकी रोटी।

00:32:56.000 --> 00:33:00.159
तो मुझे किसी ने पूछा वो मनी कॉल की

00:32:57.919 --> 00:33:03.278
पिक्चर देखी उसकी रोटी। मैंने कहा नहीं

00:33:00.159 --> 00:33:06.320
मैं तो अपनी रोटी देख रहा हूं।

00:33:03.278 --> 00:33:09.038
तो वो अलग बात है। लेकिन अब ख्याल होता है

00:33:06.319 --> 00:33:11.759
कि वाकई कितने अच्छे-अच्छे काम किए उसने।

00:33:09.038 --> 00:33:14.440
एक जगह हम दोनों बैठे थे उस जमाने में मैं

00:33:11.759 --> 00:33:19.278
भी शराब पीता था।

00:33:14.440 --> 00:33:23.080
तो बहस हो गई हमारी गालिब पे। और वो ये कह

00:33:19.278 --> 00:33:25.599
रहे थे कि गालिब वाज़ पॉसिबल ओनली इन

00:33:23.079 --> 00:33:27.519
इंडिया। और मैं उनसे कह रहा था कि भ एक

00:33:25.599 --> 00:33:30.798
जीनियस था। वो कहीं भी पैदा होता जीनियस

00:33:27.519 --> 00:33:32.798
ही होता। बट ही वाज़ राइट एंड आई वाज़ रोंग।

00:33:30.798 --> 00:33:34.319
मैंने अभी एक किताब रिसेंटली की है। उसमें

00:33:32.798 --> 00:33:36.079
मैंने इस किस्से का जिक्र किया। मैंने कहा

00:33:34.319 --> 00:33:38.200
आई विश यू वुड हैव बीन अ गालिब तो मैं

00:33:36.079 --> 00:33:42.480
जाके उसे अपोलजाइज

00:33:38.200 --> 00:33:45.440
करता। गालिब को आप अगर सीरियसली पढ़िए तो

00:33:42.480 --> 00:33:48.079
आपकी समझ में आता है कि ये तो हिंदुस्तान

00:33:45.440 --> 00:33:51.440
के अलावा कहीं हो नहीं सकता था।

00:33:48.079 --> 00:33:55.439
देखिए सिमिटिक रिलीजंस में क्रिएशन और

00:33:51.440 --> 00:33:58.080
क्रिएटर अलग है। क्रिएटर जो है वह पैदा भी

00:33:55.440 --> 00:34:00.640
करता है। फिर कास्टेंटली एक आप पे वॉच

00:33:58.079 --> 00:34:02.879
रखता है। फिर आपने कोई भी गलती की तो एक

00:34:00.640 --> 00:34:05.519
दिन वो फिर हिसाब लेता है आपसे। पूछता है

00:34:02.880 --> 00:34:07.919
भाई तुम उस दिन वहां कैसे चले गए थे? ये

00:34:05.519 --> 00:34:12.320
तुमने क्या किया? वगैरह-वगैरह उसके हिसाब

00:34:07.919 --> 00:34:16.800
से फिर आपको जन्नत या दो भेजता है। वाइल

00:34:12.320 --> 00:34:18.119
इन वैदिक कासेप्ट फिलॉसफी क्रिएटर और

00:34:16.800 --> 00:34:21.159
क्रिएशन

00:34:18.119 --> 00:34:24.480
दो आइडेंटिटीज नहीं

00:34:21.159 --> 00:34:26.960
है। वो सब एक है। मैं डॉक्टर साहब के

00:34:24.480 --> 00:34:29.599
सामने बोल रहा हूं। मेरी हिम्मत देखिए आप

00:34:26.960 --> 00:34:32.079
कि ये बैठे हैं और मैं वेदांत के बारे में

00:34:29.599 --> 00:34:33.559
बात कर रहा हूं। लेकिन आजकल ऐसे गलत काम

00:34:32.079 --> 00:34:36.639
बहुत होते हैं। एक और

00:34:33.559 --> 00:34:38.320
सही। तो

00:34:36.639 --> 00:34:41.399
बहुत से लोग जिन्हें नहीं बोलना चाहिए

00:34:38.320 --> 00:34:45.599
बोलते हैं।

00:34:41.398 --> 00:34:49.039
तो वो कांसेप्ट अलग है। वो आप

00:34:45.599 --> 00:34:52.639
मैनिफेस्टेशन उसी सुप्रीम पावर के हैं।

00:34:49.039 --> 00:34:57.039
एंड द मोमेंट यू विल गेट बैक दैट पोरिटी।

00:34:52.639 --> 00:34:59.240
यू विल गो एंड असिमिलेट इंटू इट। तो ये एक

00:34:57.039 --> 00:35:02.800
अलग तजिया मास्टर

00:34:59.239 --> 00:35:05.519
और पीपल और मे बी स्लेव का कांसेप्ट नहीं

00:35:02.800 --> 00:35:09.119
है।

00:35:05.519 --> 00:35:13.679
ना था कुछ तो खुदा था। कुछ ना होता तो

00:35:09.119 --> 00:35:15.240
खुदा होता। डुबोया मुझको होने ने ना मैं

00:35:13.679 --> 00:35:18.159
होता तो क्या

00:35:15.239 --> 00:35:20.479
होता। अब ये तो हिंदुस्तान में ही लिख

00:35:18.159 --> 00:35:20.480
सकता है

00:35:20.679 --> 00:35:28.440
आदमी। जला है जिस्म जहां दिल भी जल गया

00:35:24.760 --> 00:35:32.160
होगा। कुरेदते हो जो अब राग जो सुजू क्या

00:35:28.440 --> 00:35:36.280
है? यह जिस्म कहां जलता है? यह राख कहां

00:35:32.159 --> 00:35:41.159
कुरेदी जाती है? कजाकिस्तान में, ईरान

00:35:36.280 --> 00:35:44.800
में, इजिप्ट में, इराक में,

00:35:41.159 --> 00:35:48.639
कहां? ये तो ये दो मिसाले मैं यहां दे रहा

00:35:44.800 --> 00:35:53.200
हूं। आप कदम कदम पे आप देखेंगे कि उसका जो

00:35:48.639 --> 00:35:56.239
बेसिक अंडरस्टैंडिंग है वो एक अजीब तरह का

00:35:53.199 --> 00:35:58.879
सिंथेसिस है जो परशियन लिटरेचर की

00:35:56.239 --> 00:36:02.000
स्टेटिक्स हैं जो उसकी नफासतें हैं

00:35:58.880 --> 00:36:06.000
नजाकतें हैं वो और जो गहराई और जो डेप्थ

00:36:02.000 --> 00:36:11.039
है वेदांत की वो उसकी शायरी में मौजूद है।

00:36:06.000 --> 00:36:13.679
तो उसने दोनों तरफ से फॉर्म और कंटेंट का

00:36:11.039 --> 00:36:15.440
एक ऐसा कॉम्बिनेशन बनाया ही वास द फर्स्ट

00:36:13.679 --> 00:36:19.118
पोएट जिसने

00:36:15.440 --> 00:36:22.720
थॉट दिए है। इमोशनल रिएक्शनंस मिले हैं

00:36:19.119 --> 00:36:26.559
बहुत लेकिन उर्दू पोएट्री में और शायद

00:36:22.719 --> 00:36:30.039
किसी भी पोएट्री में। म इतनी डीप थॉट जो

00:36:26.559 --> 00:36:34.719
उसके शेरों में मिलती है और दो लाइन

00:36:30.039 --> 00:36:37.279
में वो वो दैट इज व्हाई पवन जी ने लिखा है

00:36:34.719 --> 00:36:39.519
और मैं बिल्कुल इन ऑल ह्यूमिलिटी एक्सेप्ट

00:36:37.280 --> 00:36:41.839
करता हूं कि मैं इनसे आधा भी गालिब के

00:36:39.519 --> 00:36:45.159
बारे में नहीं जानता हूं। इन्होंने जो कहा

00:36:41.838 --> 00:36:48.239
है लिखा है तो मैं बिलीव करूंगा। कि

00:36:45.159 --> 00:36:51.679
गालिब वाज़ द ग्रेटेस्ट पोएट ऑफ द वर्ल्ड

00:36:48.239 --> 00:36:55.199
इन 19 सेंचुरी। जो 19 सेंचुरी के जो शायर

00:36:51.679 --> 00:36:57.519
थे ये नहीं सामने ऑल द टाइम उससे पहले

00:36:55.199 --> 00:37:00.960
बड़े-बड़े उस्ताद पैदा हुए हैं भाई। लेकिन

00:36:57.519 --> 00:37:04.199
ये कि 19 सेंचुरी का वो सबसे बड़ा दुनिया

00:37:00.960 --> 00:37:06.800
का बड़ा शायर था।

00:37:04.199 --> 00:37:10.159
अनबिलीवेबल। उसकी दो-दो लाइनों में जो

00:37:06.800 --> 00:37:12.480
बातें हैं कि देखिए बड़ी वो उस जमाने में

00:37:10.159 --> 00:37:14.960
अब तो छोड़िए। उस जमाने में भी उसकी

00:37:12.480 --> 00:37:18.960
लैंग्वेज जो है डिफिकल्ट मानी जाती थी और

00:37:14.960 --> 00:37:21.838
बहुत ही मतलब डेंस मानते थे वो लोग बड़ा

00:37:18.960 --> 00:37:25.599
इरिटेट होते थे उसकी बहुत बुराई होती थी

00:37:21.838 --> 00:37:28.719
गालिब की तो तंग आके उसने शेर कहा था कि

00:37:25.599 --> 00:37:32.359
ना सताइश की तमन्ना ना सिले की परवाह अगर

00:37:28.719 --> 00:37:34.838
नहीं है मेरे अशार में माने ना

00:37:32.358 --> 00:37:37.000
सही शेर देखिए

00:37:34.838 --> 00:37:42.639
उसका हूं

00:37:37.000 --> 00:37:42.639
गर्मी तसवुर फरदा से नगमा

00:37:43.320 --> 00:37:53.280
मसंज मैं अंधली पे गुलशन ना अफरीदा हूं।

00:37:48.960 --> 00:37:56.039
मैं तो कल जो गुलशन बनने वाला है उसके

00:37:53.280 --> 00:37:57.800
इमेजिनेशन से गा रहा हूं। मैं वो बर्ड

00:37:56.039 --> 00:38:02.480
हूं। मैं

00:37:57.800 --> 00:38:05.320
वो कोयल हूं जो इमेजिनेशन से इतना

00:38:02.480 --> 00:38:09.119
एक्साइटमेंट है उसे कि कल का गुलशन कैसा

00:38:05.320 --> 00:38:12.079
होगा। उसको याद करके गा रहा हूं। मैं एक

00:38:09.119 --> 00:38:16.800
ऐसे गार्डन का बुलबुल हूं। आई एम अ लार्क

00:38:12.079 --> 00:38:16.800
ऑफ अ गार्डन दैट इज येट टू बी

00:38:18.599 --> 00:38:25.920
मेड। अब देखिए कहां है कि ईमां मुझे खींचे

00:38:22.639 --> 00:38:27.000
हैं तो ईचा ईमा मुझे रोके हैं तो खींचे

00:38:25.920 --> 00:38:31.920
हैं मुझे

00:38:27.000 --> 00:38:34.719
कुफ्र। काबा मेरे पीछे है कलीसा मेरे आगे।

00:38:31.920 --> 00:38:34.720
यह सिंबल्स

00:38:35.719 --> 00:38:41.679
हैं। आइए सर आइए जाइए इधर ही किस्सा खत्म

00:38:39.358 --> 00:38:43.559
हो। पार्टनरशिप में मैंने बहुत दिनों काम

00:38:41.679 --> 00:38:48.118
किया

00:38:43.559 --> 00:38:48.119
है। ऐसी क्या बात?

00:38:50.639 --> 00:38:58.879
ये जो गहराई है यह उसके यहां मिलती है कि

00:38:55.760 --> 00:39:02.800
वो कह रहा है देखिए सिंबल्स है और गजल में

00:38:58.880 --> 00:39:05.280
सिंबल ही होते हैं इसलिए कि यहां काबा जो

00:39:02.800 --> 00:39:09.440
है वो उस चौकोर डब्बे का नाम नहीं है जो

00:39:05.280 --> 00:39:13.519
काले कपड़े में होता है। ये काबा जो है वो

00:39:09.440 --> 00:39:16.559
ट्रेडिशनल ट्रेडिशन का और कंजर्वेटिव

00:39:13.519 --> 00:39:19.679
थॉट्स का और बिलीफ का सिंबल बनता है।

00:39:16.559 --> 00:39:22.320
कलीसा इज नॉट द चर्च। इट हैज़ नथिंग टू डू

00:39:19.679 --> 00:39:27.480
दिस कलीसा हैज़ नथिंग टू डू क्रिश्चियनिटी

00:39:22.320 --> 00:39:31.200
बट द यूरोपियन नॉलेज। बट द

00:39:27.480 --> 00:39:35.280
मॉडर्निज़्म। कि मुझे ये रोक रहा है और वो

00:39:31.199 --> 00:39:37.439
मुझे खींच रहा है। ये मेरे पीछे है कलीसा

00:39:35.280 --> 00:39:41.200
मेरे आगे।

00:39:37.440 --> 00:39:43.599
तो उसकी ये सिंबल्स है। अच्छा वजह क्या है

00:39:41.199 --> 00:39:47.199
कि जैसा कि मैंने आपसे अर्ज किया था कि दो

00:39:43.599 --> 00:39:50.640
मिनट में दो लाइनों में पूरी बात कहनी है।

00:39:47.199 --> 00:39:53.759
तो दो लाइनों में जब बात कहनी हो तो यू

00:39:50.639 --> 00:39:56.319
नीड सिंबल्स कि भाई मैं ये वर्ड इस्तेमाल

00:39:53.760 --> 00:39:59.839
करूं तो समझ जाना कि इसके क्या मतलब है।

00:39:56.320 --> 00:40:02.559
और पूरी उसकी डिटेल समझ जाना। हम लोग आपस

00:39:59.838 --> 00:40:04.799
में भी जब धीरे-धीरे बहुत क्लोज होते हैं

00:40:02.559 --> 00:40:06.880
एक दूसरे से तो कुछ सिंबल्स बना लेते हैं

00:40:04.800 --> 00:40:09.359
लैंग्वेज में कि चार आदमी हो उनके सामने

00:40:06.880 --> 00:40:11.400
भी आप कह दे तो किसी की समझ में ना आए

00:40:09.358 --> 00:40:14.960
मेटाफर में बात कर

00:40:11.400 --> 00:40:17.800
ली अब मिसाल के तौर पे आमतौर से लोग का ये

00:40:14.960 --> 00:40:21.760
ख्याल है अरे साहब वो क्या है वो शराब

00:40:17.800 --> 00:40:25.599
मैखाना और साखी ये सब होता है उसमें उर्दू

00:40:21.760 --> 00:40:25.599
पोएट्री में यही सब है शराब

00:40:26.280 --> 00:40:34.240
का ये जो गज़ सिंगर हैं। इनको छोड़ दीजिए।

00:40:30.960 --> 00:40:36.720
इन्होंने गजल की बड़ी ऐसी की तैसी की है।

00:40:34.239 --> 00:40:38.879
तो उन्होंने तो वाकई शराब को शराबी गाया

00:40:36.719 --> 00:40:43.679
है। और महखाने को महखाना ही गाया है।

00:40:38.880 --> 00:40:46.880
इसलिए कि बहुत ही बेचारे क्या कहूं मजबूर

00:40:43.679 --> 00:40:49.919
से शायरों का लिखा हुआ है। लेकिन जो रियल

00:40:46.880 --> 00:40:52.720
पोएट्री है उसमें शराब का मतलब कभी शराब

00:40:49.920 --> 00:40:56.159
नहीं है। उसमें महखाने का मतलब महखाना

00:40:52.719 --> 00:40:58.959
नहीं है। उसमें हरम तो कहते मस्जिद को

00:40:56.159 --> 00:41:04.399
मस्जिद नहीं है।

00:40:58.960 --> 00:41:08.119
ये अलग है। ये या दर मंदिर नहीं है। यह

00:41:04.400 --> 00:41:12.559
सिंबल्स है। या

00:41:08.119 --> 00:41:14.880
जो आशिक है वो सिर्फ आशिक नहीं है। ये

00:41:12.559 --> 00:41:16.559
सिंबल्स यूज़ करते हैं ताकि आप एक बात कहीं

00:41:14.880 --> 00:41:18.680
समझ में आ। मिसाल के तौर पे मैं एक शेर

00:41:16.559 --> 00:41:22.719
सुनाता

00:41:18.679 --> 00:41:26.000
हूं। जिन्हें प्यास है उन्हें कम से कम।

00:41:22.719 --> 00:41:29.039
जिन्हें प्यास कम उन्हें दम बदम।

00:41:26.000 --> 00:41:32.079
जिन्हें प्यास है उन्हें कम से कम जिन्हें

00:41:29.039 --> 00:41:36.079
प्यास कम उन्हें दम बदम मेरे साखिया तेरे

00:41:32.079 --> 00:41:40.359
महकदे का निजाम है कि मजाक है क्या बात है

00:41:36.079 --> 00:41:40.359
ये क्या शराब के बारे में है

00:41:40.719 --> 00:41:49.358
ये एक अनफेयर इकोनॉमिक सिस्टम पे

00:41:44.838 --> 00:41:52.480
है या मीर के आपको जो शेर मिलते हैं वो

00:41:49.358 --> 00:41:52.480
क्या दिल के बारे में

00:41:53.239 --> 00:42:00.159
है ये वो जमाना था। जब अब्दाली के हमले

00:41:57.119 --> 00:42:02.800
हुए हैं। उसने लुटते हुए दिल्ली को देखा।

00:42:00.159 --> 00:42:06.000
बर्बाद होते देखा। एक ऐसा वक्त आया कि उसे

00:42:02.800 --> 00:42:08.480
माइग्रेट करना पड़ा। वो लखनऊ चला गया।

00:42:06.000 --> 00:42:11.358
सौदा जो दूसरा बड़ा शायर था वो भी लखनऊ

00:42:08.480 --> 00:42:13.838
चला गया। होता क्या है कि इनकी रोजी

00:42:11.358 --> 00:42:15.759
रोटियां जो है चलती हैं। जागीर चलती थी।

00:42:13.838 --> 00:42:18.559
जागीरदारों, जमींदारों, राजाओं,

00:42:15.760 --> 00:42:20.960
महाराजाओं, नवाबों बादशाहों से। जब वही

00:42:18.559 --> 00:42:23.599
बर्बाद हो जाए तो इनकी तो रोजी रोटी अवस

00:42:20.960 --> 00:42:26.079
फिर भी उस वक्त बेहतर हालत में था। एंड इट

00:42:23.599 --> 00:42:28.079
वास इमर्जिंग एट अ रिच स्टेट। तो ये सब

00:42:26.079 --> 00:42:31.200
धीरे-धीरे करके वहां शिफ्ट हो रहे थे।

00:42:28.079 --> 00:42:32.760
इसलिए यहां तो सब लुट गया था दिल्ली में।

00:42:31.199 --> 00:42:37.000
अब उसके शेर

00:42:32.760 --> 00:42:40.240
देखिए। ये क्या उसके दिल के बारे में

00:42:37.000 --> 00:42:46.199
है? दिल की बर्बादी का क्या मशकूर हूं।

00:42:40.239 --> 00:42:50.879
क्या बयान करूं? ये नगर 100 मर्तबा लुटा

00:42:46.199 --> 00:42:53.358
गया। दिल की आबादी की इस हद है खराबी कि

00:42:50.880 --> 00:42:55.920
ना पूछ।

00:42:53.358 --> 00:43:00.799
कि जो दिल की आबादी थी उसकी क्या हालत हो

00:42:55.920 --> 00:43:04.720
गई है ना पूछ दिल की आबादी की इस हद है

00:43:00.800 --> 00:43:07.240
खराबी कि ना पूछ जाना जाता है कि इस राह

00:43:04.719 --> 00:43:11.118
से लश्कर

00:43:07.239 --> 00:43:14.679
गुजरा अब देखिए वो टेकन फॉर ग्रांटेड है

00:43:11.119 --> 00:43:19.358
कि जहां से फौज गुजरती है वहां क्या होता

00:43:14.679 --> 00:43:22.318
है तो उसने बार-बार जब लखनऊ भी गया था तब

00:43:19.358 --> 00:43:26.239
उसने वो लिखा क्या बोश पूछो बहु पूरब के

00:43:22.318 --> 00:43:29.440
साकिनों हमको गरीब जान के हस पुकार के

00:43:26.239 --> 00:43:32.039
दिल्ली जो एक शहर था आलम में इंतखाब हम

00:43:29.440 --> 00:43:33.720
रहने वाले हैं उसी उछड़े दया

00:43:32.039 --> 00:43:38.960
के

00:43:33.719 --> 00:43:41.919
तो ये जो दुख है सदा ने लिखे हैं शेर अशोभ

00:43:38.960 --> 00:43:45.599
शेर अशोभ एक अलग फॉर्म है एक जोन है

00:43:41.920 --> 00:43:49.200
पोएट्री का कि जिसमें आप एक जो पूरा समाज

00:43:45.599 --> 00:43:51.280
में बर्बादी आई है जो शहर में बर्बादी आई

00:43:49.199 --> 00:43:53.838
है रियासत में बर्बादी आई है उसका उसका

00:43:51.280 --> 00:43:56.319
डिस्क्रिप्शन भी उसको शहर अशोक कहते सौदा

00:43:53.838 --> 00:43:58.358
ने उसी जमाने में लिखा कि क्या हाल है

00:43:56.318 --> 00:44:02.409
हमारा क्या हो गया

00:43:58.358 --> 00:44:03.559
है सौदा आजकल है नहीं तो

00:44:02.409 --> 00:44:05.960
[संगीत]

00:44:03.559 --> 00:44:11.199
खैर तो

00:44:05.960 --> 00:44:15.599
तो ये कॉन्शियसनेस आपको दिखाई देती है

00:44:11.199 --> 00:44:18.879
पोएट्री में मगर सही मानो में हालांकि मीर

00:44:15.599 --> 00:44:21.838
ने भी लिखा है गालिब ने भी लिखा है बहुत

00:44:18.880 --> 00:44:24.960
कुछ और दूसरे शायरों ने भी लिखा है लेकिन

00:44:21.838 --> 00:44:28.759
फ्रंट फुटेज और क्लियर विदाउट एनी

00:44:24.960 --> 00:44:32.039
कन्फ्यूजन और इनबिशन अगर सोशियोपॉलिटिकल

00:44:28.760 --> 00:44:36.560
कॉन्शियसनेस उर्दू पोएट्री ने ली तो वो

00:44:32.039 --> 00:44:39.039
अर्ली 20थ सेंचुरी में ली। उससे पहले एक

00:44:36.559 --> 00:44:42.559
ऐसा भी वक्त आया था कि बहुत अच्छे-अच्छे

00:44:39.039 --> 00:44:47.119
शायर हुए। दाग थे। क्या जुबान थी उनकी

00:44:42.559 --> 00:44:50.159
बड़ी खूबसूरत रोमांटिक पोएट्री करते थे कि

00:44:47.119 --> 00:44:55.559
खूब पर्दा है कि चिलमन से लगे बैठे हैं।

00:44:50.159 --> 00:45:00.399
साहब छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं

00:44:55.559 --> 00:45:04.559
तो बदली निगाह तौर से बेतौर हो गए तुम तो

00:45:00.400 --> 00:45:08.000
जवान होते ही कुछ और हो गए तो ऐसी मजे-मजे

00:45:04.559 --> 00:45:09.920
की खासतौर से लखनऊ में अच्छा ये ये एक बात

00:45:08.000 --> 00:45:12.639
आगे चलते हुए तरक्की पसंद तहरीक जो

00:45:09.920 --> 00:45:15.280
प्रोग्रेसिव मूवमेंट है उसे जाने से पहले

00:45:12.639 --> 00:45:17.879
मैं दो चार बातें और अर्ज करूं आपसे ये

00:45:15.280 --> 00:45:20.800
जुबान जो पंजाब में

00:45:17.880 --> 00:45:24.318
थी ये जबान

00:45:20.800 --> 00:45:30.039
जो यूपी में थी, दिल्ली में थी और लखनऊ

00:45:24.318 --> 00:45:33.480
में थी। यह जुबान जो दखन में थी, ये थी तो

00:45:30.039 --> 00:45:37.519
उर्दूएं लेकिन सबको अपना अलग रंग

00:45:33.480 --> 00:45:41.719
था। सबका अलग अंदाज था।

00:45:37.519 --> 00:45:48.318
मिसाल के तौर पर इंटरेस्टिंग बात यह है

00:45:41.719 --> 00:45:51.439
के जैसे पंजाब खासतौर से लेट 19थ एंड 20थ

00:45:48.318 --> 00:45:56.639
सेंचुरी पर्टिकुलरली अर्ली जिस तरह की

00:45:51.440 --> 00:46:00.400
शायरी पंजाब ने की है वो कहीं नहीं हुई।

00:45:56.639 --> 00:46:03.199
मुझे ऐसा लगता है कि अगर आपकी मदद टंग कुछ

00:46:00.400 --> 00:46:06.079
और है और दूसरी जमानत बहुत अच्छी तरह

00:46:03.199 --> 00:46:08.879
जानते हैं तो जो फोनेटिक्स का सेंस आपको

00:46:06.079 --> 00:46:09.880
होगा वो उसको नहीं हो सकता जिसकी मदद टंग

00:46:08.880 --> 00:46:13.280
भी वही

00:46:09.880 --> 00:46:16.240
है। इसलिए कि कितना भी पास आए एक हल्का सा

00:46:13.280 --> 00:46:18.800
फासला रहता है। और जब वो फासला होता है तो

00:46:16.239 --> 00:46:22.078
सिर्फ माने नहीं समझ में आते। लफ्ज की

00:46:18.800 --> 00:46:24.160
साउंड भी समझ में आती है ज्यादा। हमारे

00:46:22.079 --> 00:46:26.800
यहां तो जैसे उन्होंने कहा जो साहब ने कि

00:46:24.159 --> 00:46:28.719
भाई उर्दू तो हमारे घर की लौंडी थी तो

00:46:26.800 --> 00:46:31.519
प्रॉब्लम यह हुआ कि अक्सर लोगों ने उसके

00:46:28.719 --> 00:46:35.039
साथ ट्रीटमेंट भी वैसे ही किया।

00:46:31.519 --> 00:46:39.280
लेकिन यहां पर जो फ्रेशनेस ऑब्जेड आपको

00:46:35.039 --> 00:46:42.880
पंजाब के शहरों में दिखती है वो यूपी में

00:46:39.280 --> 00:46:45.760
नहीं मिली आपको तब ये प्रेजर सीकिंग हो गई

00:46:42.880 --> 00:46:49.200
थी लखनऊ की पोएट्री बहुत ज्यादा।

00:46:45.760 --> 00:46:52.480
तो उसमें मीन मे बहुत थी इसलिए कि वो

00:46:49.199 --> 00:46:54.879
नफासत और नजाकतें लखनऊ के कल्चर की कि यह

00:46:52.480 --> 00:46:57.358
लफज़ यू जायज़ है और यूं जायज नहीं है। इसका

00:46:54.880 --> 00:47:00.400
तलफुज़ ये है और ये हद तो ये है कि ये जो

00:46:57.358 --> 00:47:02.199
जेंडरर्स हैं हमारी जुबान में ये भी लखनऊ

00:47:00.400 --> 00:47:05.680
में बने हैं। और

00:47:02.199 --> 00:47:08.279
ये दो चार बड़े शायर थे आतश और दूसरे

00:47:05.679 --> 00:47:12.679
जिन्होंने तय किया है बैठ के कि

00:47:08.280 --> 00:47:15.440
साहब खिड़की होती है और दरवाजा होता

00:47:12.679 --> 00:47:18.399
है। अच्छा भाई खिड़की क्यों होती है?

00:47:15.440 --> 00:47:21.760
इसमें इ लगी है उसमें तो फिर सिपाही क्यों

00:47:18.400 --> 00:47:24.800
होता है? उसमें भी तो ई लगा है और खदांची

00:47:21.760 --> 00:47:27.920
क्यों होता है? वो भी होती तो ठीक था। कुछ

00:47:24.800 --> 00:47:31.680
नहीं ये तय हो गया और अब आप इससे इधर-उधर

00:47:27.920 --> 00:47:35.119
गए तो गलत है। तो जेंडरर्स तय किए गए हैं

00:47:31.679 --> 00:47:37.679
लखनऊ में। और ये जेंडर इसीलिए नाराज होते

00:47:35.119 --> 00:47:39.920
हैं लखनऊ वाले। हैदराबादियों से भी और

00:47:37.679 --> 00:47:42.639
पंजाबियों से भी। उनके जेंडर जरा फर्क हो

00:47:39.920 --> 00:47:43.838
जाते हैं। नहीं साहब ये नहीं होगा। यह गलत

00:47:42.639 --> 00:47:46.960
है।

00:47:43.838 --> 00:47:49.759
तो ये ये आपस के बायसेस और प्रिजसेस बहुत

00:47:46.960 --> 00:47:51.838
हैं। तो कहीं यह हो गया था कि उर्दू

00:47:49.760 --> 00:47:55.680
पोएट्री वाकई धीरे-धीरे सिर्फ प्लेजर

00:47:51.838 --> 00:47:59.318
स्पीकिंग हो रही थी। एंड देन अ मेजर

00:47:55.679 --> 00:48:03.440
हैपनिंग टू प्लेस। दैट वाज़ इन परहेब

00:47:59.318 --> 00:48:06.880
36 ये लंदन के एक छोटे से रेस्टोर में बात

00:48:03.440 --> 00:48:11.280
शुरू हुई। जहां मुल्क राजानंद सज्जाद जहीर

00:48:06.880 --> 00:48:13.119
ज्योतिमर घोष और भी एक तमिल के भी राइटर

00:48:11.280 --> 00:48:16.599
इनका नाम इस वक्त मेरे दिमाग से स्लिप हो

00:48:13.119 --> 00:48:21.920
रहा है। इन लोगों ने बैठ के बात की यह बात

00:48:16.599 --> 00:48:26.480
है 34 की 1934 की कि इस वक्त मुल्क को

00:48:21.920 --> 00:48:29.519
जरूरत है कि हमारे जो कलम है हमारी

00:48:26.480 --> 00:48:32.960
पोएट्री हमारा आर्ट हमारा लिटरेचर हमारी

00:48:29.519 --> 00:48:36.199
शॉर्ट स्टोरीज हमारे नवेल्स ये मुल्क में

00:48:32.960 --> 00:48:40.240
एक तो पोलिटिकल अवेयरनेस के

00:48:36.199 --> 00:48:42.960
लिए और सोशल इनजस्टिस के खिलाफ वुमेन

00:48:40.239 --> 00:48:45.118
एंपावरमेंट के लिए यह कलम इस्तेमाल होने

00:48:42.960 --> 00:48:47.838
चाहिए।

00:48:45.119 --> 00:48:48.680
सज्जाद जहीर को यह रिस्पांसिबिलिटी दी गई

00:48:47.838 --> 00:48:52.239
कि वो

00:48:48.679 --> 00:48:55.759
उसका तैयार करें मेनिफेस्टो व्हिच ऑलमोस्ट

00:48:52.239 --> 00:48:57.159
टूक टू इयर्स एंड इन 36 ही केम ही सेंड वन

00:48:55.760 --> 00:49:02.040
कॉपी टू

00:48:57.159 --> 00:49:05.399
गुरुदेव मेट प्रेमचंद जी एंड

00:49:02.039 --> 00:49:10.199
अथर्स राइटर्स फ्रॉम डिफरेंट

00:49:05.400 --> 00:49:13.838
लैंग्वेजेस और 1936 लखनऊ

00:49:10.199 --> 00:49:15.919
में एक बहुत ह्यूज कॉन्फ्रेंस हुई जिसको

00:49:13.838 --> 00:49:17.838
प्रसाइड किया मुंशी प्रेमचंद ने। मैंने

00:49:15.920 --> 00:49:21.760
मुंशी प्रेमचंद का अभी तक आपसे जिक्र नहीं

00:49:17.838 --> 00:49:21.759
किया इसलिए कि मैं प्रोज़ की तरफ नहीं गया

00:49:22.199 --> 00:49:30.480
हूं। वो ही वाज़ द फादर ऑफ़ उर्दू नवेल एंड

00:49:27.039 --> 00:49:33.119
पर्टिकुलरली उर्दू शॉर्ट स्टोरी। उर्दू

00:49:30.480 --> 00:49:35.240
में शॉर्ट स्टोरी का कांसेप्ट ही नहीं था

00:49:33.119 --> 00:49:39.119
प्रेमचंद से

00:49:35.239 --> 00:49:42.479
पहले। और वहां पर उनका गुरुदेव का

00:49:39.119 --> 00:49:44.720
ब्लेसिंग आई। उन्होंने एक खत भेजा कि यह

00:49:42.480 --> 00:49:47.199
बहुत अच्छा कदम है और ये बहुत जरूरी है और

00:49:44.719 --> 00:49:49.838
बहुत अच्छा कर रहे हैं आप और बहुत अच्छी

00:49:47.199 --> 00:49:52.480
स्पीच उन्होंने दी मुंशी प्रेमचंद ने यहां

00:49:49.838 --> 00:49:56.480
बताया कि आज हमारे कदम ये हुस्न और इश्क

00:49:52.480 --> 00:49:58.880
और ये शराब और महक गदा ये सब जो कि सचमुच

00:49:56.480 --> 00:50:01.760
हो गए थे जैसे कि मैंने आपसे अ किया इसे

00:49:58.880 --> 00:50:04.800
छोड़िए और अब मुल्क के लोगों को जगाने के

00:50:01.760 --> 00:50:08.400
लिए मुल्क के लोगों को उठाने के लिए हमारे

00:50:04.800 --> 00:50:11.880
कलम इस्तेमाल होने चाहिए।

00:50:08.400 --> 00:50:15.240
हर जुबान में इस तरह के राइटर आए बंगाली

00:50:11.880 --> 00:50:19.280
में, मराठी में, गुजराती

00:50:15.239 --> 00:50:22.399
में। मैं क्योंकि उर्दू मेरे जमाने में

00:50:19.280 --> 00:50:25.920
उर्दू के बारे में जानता हूं। मैं ये बात

00:50:22.400 --> 00:50:30.880
बहुत ही फक्र से कहता हूं कि इस एक लंबी

00:50:25.920 --> 00:50:33.519
जो पहली जो कतार थी फौज की उस पे आपको

00:50:30.880 --> 00:50:35.680
उर्दू के कितने शायर और कितने अदीब दिखाई

00:50:33.519 --> 00:50:38.960
दे थे।

00:50:35.679 --> 00:50:42.639
मतलब उस वक्त जो बड़ा पोएट या बड़ा राइटर

00:50:38.960 --> 00:50:45.199
था वो इसी मोमेंट में था और उसने अपने कलम

00:50:42.639 --> 00:50:49.598
को अपनी पोएट्री को अपने अफसाने को अपने

00:50:45.199 --> 00:50:51.159
नवेल को इस कॉज के लिए इस्तेमाल किया।

00:50:49.599 --> 00:50:55.920
मुंशी

00:50:51.159 --> 00:51:00.558
प्रेमचंद राय सिंह बेदी इस्मत जुताई कृष्ण

00:50:55.920 --> 00:51:06.079
चंद्र अहमद नदीम कासमी फैज अहमद फैज मजाज

00:51:00.559 --> 00:51:07.480
सरदार जाफरी जानसर अख्तर कैफी आजमी

00:51:06.079 --> 00:51:09.480
ताहिर

00:51:07.480 --> 00:51:12.800
लुधियावी

00:51:09.480 --> 00:51:13.880
मजरू मतलब ये अब भी मैं कुछ नाम भूल रहा

00:51:12.800 --> 00:51:17.359
होगा

00:51:13.880 --> 00:51:19.119
शायद वो तो भैया कैसे भूलूंगा कैसी बात कर

00:51:17.358 --> 00:51:22.000
रहे हो

00:51:19.119 --> 00:51:22.000
मरवाएंगे

00:51:22.119 --> 00:51:26.119
तो तो

00:51:29.119 --> 00:51:35.720
ये प्रोज़ में मंटो इस्मत

00:51:33.838 --> 00:51:39.358
मैं उन्हें तरीके पसंद नहीं

00:51:35.719 --> 00:51:41.118
मानता। मैं मुझे दुख है वो बहुत गजब के

00:51:39.358 --> 00:51:42.799
मतलब मैं कौन होता हूं उनके बारे में राय

00:51:41.119 --> 00:51:45.119
रखने वाला लेकिन हम सबके बारे में राय

00:51:42.800 --> 00:51:47.440
रखते हैं तो उनके बारे में रखें।

00:51:45.119 --> 00:51:50.880
है क्या कि वो शुरू बहुत उनकी पहली किताब

00:51:47.440 --> 00:51:53.599
है बांगेदरा बांगेदरा में बिल्कुल ठीक थे

00:51:50.880 --> 00:51:56.559
सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा बहुत

00:51:53.599 --> 00:51:59.200
अच्छी-अच्छी उन्होंने की नया शिवाला

00:51:56.559 --> 00:52:02.760
क्या-क्या सच कह दूं ब्राह्मण अगर तू बुरा

00:51:59.199 --> 00:52:06.799
ना माने और वो पूरा

00:52:02.760 --> 00:52:09.119
उसमें शेख को भी उन्होंने एड्रेस किया और

00:52:06.800 --> 00:52:12.240
ब्राह्मण को भी ये सब उसके बाद उनको पता

00:52:09.119 --> 00:52:15.358
नहीं कुछ गड़बड़ हो गई उनकी वो उनके इन

00:52:12.239 --> 00:52:19.039
ताजा खुदाओं में बड़ा सबसे वतन है। जो

00:52:15.358 --> 00:52:22.078
पैरान इसका है वो मजहब का कफ़न है। तो ठीक

00:52:19.039 --> 00:52:26.239
है भाई आप अपने रास्ते खुश रह। हमारा तो

00:52:22.079 --> 00:52:29.400
वो रास्ता नहीं है। और हम अब पहले पैदा

00:52:26.239 --> 00:52:32.558
हुए थे बड़े आदमी हैं। पाकिस्तान में तो आप

00:52:29.400 --> 00:52:35.358
शायरे कौम कहलाते हैं जो भी है वहां। उनकी

00:52:32.559 --> 00:52:37.280
कब्र पे चारों तरफ चार फौजी खड़े रहते हैं

00:52:35.358 --> 00:52:41.078
सुबह से शाम तक। पता नहीं किसका खतरा है

00:52:37.280 --> 00:52:41.079
उन्हें। तो तो

00:52:41.679 --> 00:52:46.480
लेकिन ये है कि वो मैं जरा एम्बरेस हूं इस

00:52:43.838 --> 00:52:48.799
बात से कि इतना मतलब उनके टैलेंट में कोई

00:52:46.480 --> 00:52:53.358
शक नहीं। फैक्ट ये है कि बहुत सारे तरक्की

00:52:48.800 --> 00:52:56.880
पसंद शायर वुड यूज़ टू प्रज़ हिम ओनली फॉर ह

00:52:53.358 --> 00:53:00.239
क्राफ्ट एंड ह वोकैबलरी एंड ह फ्लो नॉट

00:52:56.880 --> 00:53:04.559
फॉर ह कंटेंट। वो शुरू में था और ठीक है

00:53:00.239 --> 00:53:08.558
ये जो अच्छी वो शायरी थी कि उठो मेरी

00:53:04.559 --> 00:53:12.800
दुनिया के गरीबों को जगा दो का उमरा के

00:53:08.559 --> 00:53:15.920
ताज क्या ताज हिला दो और जिस खेत से दहखा

00:53:12.800 --> 00:53:18.400
को मैसन हो रही उठी उस खेत के हर खुश

00:53:15.920 --> 00:53:21.200
गंदुम को जला दो वगैरह वगैरह तो यहां तक

00:53:18.400 --> 00:53:24.400
तो ठीक बात थी फिर उसके बाद वो पता नहीं

00:53:21.199 --> 00:53:26.960
क्या लिखने लगे कि रहमतें हैं तेरी अयार

00:53:24.400 --> 00:53:30.000
के काशानों पर बर गिरती है तो बेचारे

00:53:26.960 --> 00:53:32.318
मुसलमानों पर तो वो मैंने तो बहुत लोगों

00:53:30.000 --> 00:53:35.838
पे गिरती देखी है तो मैं कैसे मानूं कि

00:53:32.318 --> 00:53:38.480
सिर्फ मुसलमानों पे गिरती है ऐसा नहीं है

00:53:35.838 --> 00:53:43.759
तो वो हमें जरा कुछ कहीं अपील नहीं करती

00:53:38.480 --> 00:53:48.079
बात लेकिन बहरहाल अब ऐसा भी होता है नजर

00:53:43.760 --> 00:53:51.040
का टीका भी चाहिए होता है तो जहां तक इनका

00:53:48.079 --> 00:53:54.400
ताल्लुक है इन शायरों का इन अदीबों का

00:53:51.039 --> 00:53:58.000
मतलब एसएफ जो है स्टूडेंट फेडरेशन 50ज में

00:53:54.400 --> 00:54:02.639
एक सर्वे किया गया सच तो यह है कि जो

00:53:58.000 --> 00:54:05.199
प्रोज़ राइटर है उन्होंने जो असर डाला है

00:54:02.639 --> 00:54:07.279
वो अनबिलीवेबल है अनसंग है टू अ ग्रेट

00:54:05.199 --> 00:54:10.000
एक्सटेंट शायरों को तो हम पढ़ते रहते हैं

00:54:07.280 --> 00:54:12.720
फैज की शायरी सबको याद है साहिर की शायरी

00:54:10.000 --> 00:54:14.358
सबको याद है लेकिन हम ये नहीं जानते कि

00:54:12.719 --> 00:54:19.118
कृष्ण चंद्र ने क्या

00:54:14.358 --> 00:54:22.000
किया इन 50 परहेप्स 55 56 एक उस जमाने में

00:54:19.119 --> 00:54:24.720
कुछ मेरे ख्याल से अराउंड 50 52

00:54:22.000 --> 00:54:28.079
यूनिवर्सिटीज थी पूरे हिंदुस्तान में तो

00:54:24.719 --> 00:54:31.598
वहां जो स्टूडेंट फेडरेशन के मेंबर्स थे।

00:54:28.079 --> 00:54:33.519
उनको एक सर्वे किया गया उनमें कि भाई आप

00:54:31.599 --> 00:54:34.960
लेफ्टिस्ट क्यों है?

00:54:33.519 --> 00:54:37.280
तो उन्होंने यह नहीं कहा कि हमने

00:54:34.960 --> 00:54:39.559
कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो पढ़ा है। ना

00:54:37.280 --> 00:54:43.280
उन्होंने यह कहा कि हमने डांस कैपिटल पढ़ा

00:54:39.559 --> 00:54:46.000
है। ना उन्होंने यह कहा कि हमने माओ की

00:54:43.280 --> 00:54:48.800
रेड बुक पढ़ी है। उन्होंने कहा हमने कृष्ण

00:54:46.000 --> 00:54:50.760
चंद्र को पढ़ा है। हम कृष्ण चंद्र को

00:54:48.800 --> 00:54:54.640
पढ़ते हैं इसलिए हम रेप्टिस्ट

00:54:50.760 --> 00:54:57.480
हैं। ये बात बहुत कम लोगों को मालूम है।

00:54:54.639 --> 00:55:01.799
क्या लोगों ने क्या काम किए

00:54:57.480 --> 00:55:04.920
हैं। यह शुरू हुआ था 30 से और समझिए 70 तक

00:55:01.800 --> 00:55:08.359
आते-आते। होता क्या है कि हर चीज

00:55:04.920 --> 00:55:10.039
अल्टीमेटली आदमी

00:55:08.358 --> 00:55:14.318
मूवमेंट

00:55:10.039 --> 00:55:18.000
पार्टी इज वक्त के साथ अपना करकेचर बन

00:55:14.318 --> 00:55:22.880
जाते हैं। और उनके अंदर वही बातें आ जाती

00:55:18.000 --> 00:55:25.000
हैं जिनके खिलाफ वो लड़े थे। कमाल ये है।

00:55:22.880 --> 00:55:28.720
तो यही होता है वो एक वो

00:55:25.000 --> 00:55:31.760
जो सख्ती आ जाती है। और उसमें जो

00:55:28.719 --> 00:55:33.759
एक्सट्रीम एटीट्यूड आ जाता है वो फिर उसको

00:55:31.760 --> 00:55:36.319
तबाह कर देता है। आप तो लड़े थे ना

00:55:33.760 --> 00:55:40.240
एक्सट्रीम एटीट्यूड के खिलाफ उससे ही तो

00:55:36.318 --> 00:55:42.960
आपने बगावत की थी उन्हीं वैल्यू सिस्टम से

00:55:40.239 --> 00:55:44.959
तो आपने रिवोल्ट किया था। अब आपके वैल्यू

00:55:42.960 --> 00:55:47.440
सिस्टम ऐसे हो गए कि जरा सा कोई हिले तो

00:55:44.960 --> 00:55:49.798
आप उसको फांसी पे चढ़ाने को तैयार हो जाए

00:55:47.440 --> 00:55:54.400
तो ये तो ठीक बात नहीं

00:55:49.798 --> 00:55:58.798
है। मतलब फैज ने जो हिंदुस्तान की आजादी

00:55:54.400 --> 00:56:01.200
पे नल्म लिखी थी। हिंदुस्तान की आजादी के

00:55:58.798 --> 00:56:04.159
साथ एक हादसा हुआ था। यह मुल्क के टुकड़े

00:56:01.199 --> 00:56:06.879
हुए थे। हजारों लाखों लोग मरे थे, कत्ल

00:56:04.159 --> 00:56:10.879
हुए थे, बेघर हुए थे।

00:56:06.880 --> 00:56:16.640
तो फैज ने नज़्म लिखी थी यह दाग दाग उजाला

00:56:10.880 --> 00:56:19.280
यह शबदा शहर यह रात की डसी हुई सुबह ये

00:56:16.639 --> 00:56:24.318
उजाला जो दागदाग है जिस पे स्पॉट्स पड़े

00:56:19.280 --> 00:56:27.240
हुए हैं ये शब ये शहर जिसको डसा हुआ है

00:56:24.318 --> 00:56:31.639
रात में ये वो शहर तो नहीं जिसकी आरजू

00:56:27.239 --> 00:56:37.118
लेकर चले थे यार कि मिल जाएगी कहीं ना

00:56:31.639 --> 00:56:39.279
कहीं इस नज्म पे उसको क्रिटिसाइज किया

00:56:37.119 --> 00:56:42.079
कि ये आप क्या बोल रहे हैं कि ठीक नहीं

00:56:39.280 --> 00:56:45.440
है। आजादी परफेक्ट नहीं आई है। मतलब क्या

00:56:42.079 --> 00:56:48.119
है आपका? आप हिंदू राष्ट्र चाहते हैं। ये

00:56:45.440 --> 00:56:51.119
कम्युनिस्ट पार्टी उससे पूछ रही है फैब

00:56:48.119 --> 00:56:51.960
से। वो गम कर रहा है कि मुल्क के टुकड़े

00:56:51.119 --> 00:56:56.960
हो

00:56:51.960 --> 00:57:00.318
गए। तो इस तरह की सख्तियां आई कहीं कहीं

00:56:56.960 --> 00:57:04.159
लोग एक इतनी खूबसूरत नज़्म है फैज की रकीब

00:57:00.318 --> 00:57:07.279
से। इट्स अ ब्रांड न्यू एंगल।

00:57:04.159 --> 00:57:10.719
जो है कि आके वाबस्ता है उस हुस्न की

00:57:07.280 --> 00:57:12.160
यादें तुझसे जिसने इस दिल को परीखाना बना

00:57:10.719 --> 00:57:16.239
रखा था।

00:57:12.159 --> 00:57:20.879
तुझ पे भी उठी है वो खोई हुई जाहिर आंखें

00:57:16.239 --> 00:57:23.439
तूने भी ये मतलब और क्या तुझको मालूम है

00:57:20.880 --> 00:57:25.680
कि उम्र गवा दी हमने क्यों रकीब से मेरा

00:57:23.440 --> 00:57:28.400
रिश्ता क्या है या तो वो जानता है ये मैं

00:57:25.679 --> 00:57:31.759
जानता हूं कि हम किसके दीवाने हैं तो मेरा

00:57:28.400 --> 00:57:34.119
तुम्हारा कुछ कॉमन है ये कितना नया एंगल

00:57:31.760 --> 00:57:37.440
है कि एड्रेसिंग द

00:57:34.119 --> 00:57:40.640
राइवल अब ये भाई नज़्म कंप्लीट हो गई थी

00:57:37.440 --> 00:57:43.119
मगर ये कि कहीं खौफ था सर पे तो तीन चार

00:57:40.639 --> 00:57:45.679
फिर आगे लगा दिए ये और देख बाजार में

00:57:43.119 --> 00:57:49.440
बिकता हुआ मजदूर का गोश्त ये अरे भाई इस

00:57:45.679 --> 00:57:52.078
नज़्म का कोई ताल्लुक नहीं उस बात से तो ये

00:57:49.440 --> 00:57:54.960
सख्तियां कहीं आई जिसके खिलाफ रिवोल्ट भी

00:57:52.079 --> 00:57:57.680
हुआ फिर एक रिवोल्ट जो है वो भी एक एक

00:57:54.960 --> 00:58:02.159
तरफ़ा हो गया जब तक तुम दुनिया की बात

00:57:57.679 --> 00:58:06.159
करोगे समाज की बात करोगे गलत है ये सब

00:58:02.159 --> 00:58:10.239
एक्सटर्नल बातें हैं। ये माइंड की बातें

00:58:06.159 --> 00:58:13.039
हैं। गो इनटू योर ओन वर्ल्ड। अंदर जाओ

00:58:10.239 --> 00:58:17.358
अपने अंदर ढूंढो। मुझे शक है कि किसी ना

00:58:13.039 --> 00:58:20.558
किसी हद तक जो इंपीरियस पावर जो वेस्टर्न

00:58:17.358 --> 00:58:23.598
पार्ट्स काम करती हैं और ये ऐसा कोई

00:58:20.559 --> 00:58:26.640
पैरानोया की बात नहीं है। ये कहीं

00:58:23.599 --> 00:58:29.680
उन्होंने इन चीजों को इनकरेज किया वेस्ट

00:58:26.639 --> 00:58:31.759
में भी और यहां भी कि जहां शायरी पॉलिटिकल

00:58:29.679 --> 00:58:34.078
कॉन्शियसनेस के साथ ना हो। अरे भाई ये तो

00:58:31.760 --> 00:58:35.920
प्रोपेगेंडा है। पॉलिटिकल सोशियो और

00:58:34.079 --> 00:58:38.079
पॉलिटिकल कॉन्शियसनेस से आप शायरी कर रहे

00:58:35.920 --> 00:58:41.280
हैं। तो ये तो माइंड से कर रहे हैं हम।

00:58:38.079 --> 00:58:44.400
आपके अंदर जो इंसान छुपा हुआ है जो आपके

00:58:41.280 --> 00:58:48.559
अंदर है आपकी रूह, आपकी आत्मा, आपका

00:58:44.400 --> 00:58:52.000
सबकॉन्शियस उसमें जाइए और वहां ढूंढिए कौन

00:58:48.559 --> 00:58:54.640
है, क्या है अपनी दुनिया में। तो मतलब यह

00:58:52.000 --> 00:58:57.519
है कि आप दुनिया के काम के नारा है। और

00:58:54.639 --> 00:59:00.400
ऐसी भी बहुत शायरी हुई। बहुत ज्यादा, फिर

00:58:57.519 --> 00:59:02.679
एक वक्त आया के यह हुआ कि भई क्यों? व्हाई

00:59:00.400 --> 00:59:05.680
शुड पोएट्री बी डिपेंडेंट ऑन

00:59:02.679 --> 00:59:08.480
वर्ल्ड? व्हाई कांट वी हैव पोएट्री विदाउट

00:59:05.679 --> 00:59:11.838
वर्ड्स?

00:59:08.480 --> 00:59:14.639
चमक चमकारने शबशीर ने के मजे मोह का मल

00:59:11.838 --> 00:59:17.558
पिंजीर ने के कुछ मतलब नहीं है सिर्फ

00:59:14.639 --> 00:59:22.318
फाउंड है ऐसी लिखी

00:59:17.559 --> 00:59:24.880
गई अंदर से नया हो के निकलता हुआ जैसे साए

00:59:22.318 --> 00:59:28.480
से जुदा हो के वो दालान में आया क्या बोल

00:59:24.880 --> 00:59:30.640
रहे हो भाई एक शेर सुने मैं मजाक कर रहा

00:59:28.480 --> 00:59:33.039
हूं ये सीरियस एक पोएट उस जमाने के पोएट

00:59:30.639 --> 00:59:33.039
का शेर

00:59:33.798 --> 00:59:41.559
है कुत्ते पर खरगोश आया

00:59:37.440 --> 00:59:45.280
तब जाके अहमदाबाद बना। ये शेर

00:59:41.559 --> 00:59:48.480
है। तो ये ये पागलपन भी हुआ कुछ दिनों।

00:59:45.280 --> 00:59:51.920
लेकिन थैंकफुली अल्टीमेटली पेंडुलम बीच

00:59:48.480 --> 00:59:54.798
में आ गया। और आज जो पोएट्री हो रही है

00:59:51.920 --> 00:59:57.519
उसके ऊपर कोई अंकुश नहीं है। लेकिन बहुत

00:59:54.798 --> 00:59:59.358
अच्छी शादी कर रहे हैं लोग। जो यंग जनरेशन

00:59:57.519 --> 01:00:01.880
है उनके मैं शेर सुनता हूं तो मैं बहुत

00:59:59.358 --> 01:00:06.000
एनवी करता हूं।

01:00:01.880 --> 01:00:08.000
और ये है कि जहां तक इसका प्रोज़ का

01:00:06.000 --> 01:00:11.199
ताल्लुक है मुंशी प्रेमचंद हो ये जिन

01:00:08.000 --> 01:00:14.239
लोगों के मैंने नाम लिए इनको आप देखिए एक

01:00:11.199 --> 01:00:17.239
और शक्ल है टुवर्ड्स द एंड कितनी देर हो

01:00:14.239 --> 01:00:17.239
गई

01:00:21.119 --> 01:00:25.720
मतलब मुझे पता नहीं चलना चाहिए मुझे आप

01:00:24.400 --> 01:00:27.559
बाद में ना

01:00:25.719 --> 01:00:32.318
बताइएगा

01:00:27.559 --> 01:00:32.319
तो थैंक यू सो काइंड ऑफ यू

01:00:35.960 --> 01:00:43.440
तो जी हां प्रो जो है वो उसका इतना नहीं

01:00:41.119 --> 01:00:46.599
किया गया है। दूसरा जो रुख है हिंदुस्तान

01:00:43.440 --> 01:00:50.639
की उर्दू पोएट्री के बारे में लोग नहीं

01:00:46.599 --> 01:00:53.880
जानते। वो है कि हिंदुस्तान के कई 100 साल

01:00:50.639 --> 01:01:00.159
की जो फ्रीडम मूवमेंट

01:00:53.880 --> 01:01:03.358
रहा 1857 से और उससे पहले से टिल

01:01:00.159 --> 01:01:04.679
15th ऑफ अगस्त और आफ्टर दैट द आफ्टर मार्च

01:01:03.358 --> 01:01:07.759
ऑफ द

01:01:04.679 --> 01:01:09.199
पार्टीशन इसके ऊपर उर्दू में क्या पोएट्री

01:01:07.760 --> 01:01:13.839
है?

01:01:09.199 --> 01:01:18.239
हर जो मूवमेंट आया चाहे वह नॉन कोऑपरेशन

01:01:13.838 --> 01:01:21.838
का हो चाहे कोई सा भी हो चाहे सेलर्स की

01:01:18.239 --> 01:01:25.919
रिवोल्ट हो चाहे कोई भी चोराचोरी का

01:01:21.838 --> 01:01:30.239
किस्सा हो जो भी हो जो भी इतने दिनों में

01:01:25.920 --> 01:01:33.838
हिंदुस्तान में अंग्रेज से इंटरेक्ट किया

01:01:30.239 --> 01:01:37.598
आजादी के मत वालों ने आजादी की कोशिश करने

01:01:33.838 --> 01:01:40.798
वालों में वहां आपको उस सिचुएशन पे उर्दू

01:01:37.599 --> 01:01:40.798
क्या पोएट्री मिलती

01:01:41.239 --> 01:01:49.598
है। पाकिस्तान और हिंदुस्तान जब बन गए तो

01:01:45.358 --> 01:01:49.598
क्या पोएट्री उर्दू की आपको मिलती है उस

01:01:49.639 --> 01:01:56.480
पे। जो उस वक्त लिखी गई और क्या अफसाने

01:01:53.440 --> 01:02:00.318
मिलते हैं वो भी है। क्या नवेल्स मिलते

01:01:56.480 --> 01:02:03.440
हैं एक गद्दार नाम का एक नवेल है वो हिंदी

01:02:00.318 --> 01:02:05.519
में भी अवेलेबल है करण चंद्र का। वो मैंने

01:02:03.440 --> 01:02:07.760
छह सात बार पढ़ा। मैं पढ़ ही नहीं सकता

01:02:05.519 --> 01:02:09.440
उसे बिना रोए। और मैं आप लोग को बहुत

01:02:07.760 --> 01:02:13.440
स्ट्रांगली रिकमेंड करूंगा कि वो नवेल

01:02:09.440 --> 01:02:13.440
पढ़िए आप पार्टीशन पे।

01:02:15.000 --> 01:02:22.559
गद्दार हिंदुस्तान के जितने डटीज हैं देवी

01:02:19.760 --> 01:02:25.839
देवता जितने त्यौहार हैं जितने शहर हैं

01:02:22.559 --> 01:02:29.480
जितने मौसम हैं उन पे उर्दू में जो

01:02:25.838 --> 01:02:32.318
पोएट्री है कई 100 साल

01:02:29.480 --> 01:02:35.318
की वो पोएट्री आप पढ़िए और मैं आपको

01:02:32.318 --> 01:02:40.079
बताऊंगा सब आपको मिल जाएगी एक ही

01:02:35.318 --> 01:02:42.798
जगह मेरे फादर ने कई बरस लगा के दो

01:02:40.079 --> 01:02:46.240
वॉल्यूम एडिट किए थे जिनका नाम है

01:02:42.798 --> 01:02:49.400
हिंदुस्तान हमारा और वो यहां राजकमल में

01:02:46.239 --> 01:02:53.838
हिंदी में देवनागरी में अवेलेबल

01:02:49.400 --> 01:02:55.680
है। किस-किस जमाने की पोएट्री होली पे मैं

01:02:53.838 --> 01:02:58.960
दावा करता हूं कि हिंदुस्तान में कितनी

01:02:55.679 --> 01:03:01.039
जमाने हैं। उर्दू से बेटर होली पे तो आपको

01:02:58.960 --> 01:03:04.318
पोएट्री नहीं मिल सकती। ये मैं गारंटी से

01:03:01.039 --> 01:03:09.480
बोलता हूं। जो होली पे नज़्में लिखी गई है।

01:03:04.318 --> 01:03:09.480
दिवाली पे, जन्माष्टमी पे।

01:03:10.000 --> 01:03:14.559
क्षमावनी एक त्यौहार है जैनों का जो मुझे

01:03:12.639 --> 01:03:19.239
उर्दू पोएट्री से मालूम हुआ। मुझे पता ही

01:03:14.559 --> 01:03:23.440
नहीं था। क्षमावनी पर लिखी हुई है

01:03:19.239 --> 01:03:25.519
पोयम। राम कृष्ण ओ कृष्ण और राधा पे तो

01:03:23.440 --> 01:03:28.798
कितनी पोएट्री कोई एंड नहीं है। एंड ही

01:03:25.519 --> 01:03:32.318
लेंड हिमसेल्फ टू पोएट्री। तो कितनी शायरी

01:03:28.798 --> 01:03:37.199
है और कब की बनारस के घाटों पे जो शायरी

01:03:32.318 --> 01:03:40.798
लिखी गई। मतलब आप हैरान होंगे। और दूसरी

01:03:37.199 --> 01:03:43.919
तरफ झांसी की रानी पर भी है और टीपू

01:03:40.798 --> 01:03:46.000
सुल्तान पर भी है वहां भी ऐसी पोएट्री है

01:03:43.920 --> 01:03:50.318
कि आप पढ़े तो रोंगटे खड़े हो जाए और जो

01:03:46.000 --> 01:03:54.318
हमारे त्यौहार कल्चर ट्रेडिशन बसंत और जो

01:03:50.318 --> 01:03:57.358
जो रस्में हैं उन पे जो शायरी है और वो आज

01:03:54.318 --> 01:03:59.679
की लिखी हुई नहीं है।

01:03:57.358 --> 01:04:02.920
आई वोंट मिंस माय वर्ड। आज तो हो सकता है

01:03:59.679 --> 01:04:06.279
पॉलिटिकल कंसीडरेशन से

01:04:02.920 --> 01:04:09.079
और एक्सपीडेंसी से आदमी ऐसी बात

01:04:06.280 --> 01:04:12.400
लिखते। 300 बरस

01:04:09.079 --> 01:04:14.760
पहले और उसका मुझे क्या फायदा हुआ? एक

01:04:12.400 --> 01:04:16.519
पिक्चर बन रही थी युगानंद नाम था

01:04:14.760 --> 01:04:19.200
उसका।

01:04:16.519 --> 01:04:23.119
तो लक्ष्मीकांत प्यारेलाल म्यूजिक

01:04:19.199 --> 01:04:24.960
डायरेक्टर थे उसके और एन चंद्रा एक

01:04:23.119 --> 01:04:28.559
प्रोड्यूसर डायरेक्टर। बड़े कामयाब अपने

01:04:24.960 --> 01:04:31.280
वक्त के वो उसके डायरेक्टर थे। तो दो-तीन

01:04:28.559 --> 01:04:33.680
गाने हो चुके थे। तो फिर हमारी एक सिंग

01:04:31.280 --> 01:04:37.519
थी। मैं गया तो एन चंद्रा और लक्ष्मीकांत

01:04:33.679 --> 01:04:41.358
बैठे थे तो थोड़े से ऑकवर्ड थे। हां जी

01:04:37.519 --> 01:04:43.759
बताइए क्या सिचुएशन है? तो उन्हें बताना

01:04:41.358 --> 01:04:46.639
चाहिए कि भाई सिचुएशन क्या है? नहीं असल

01:04:43.760 --> 01:04:50.400
में क्या था कि ऐसा सोच रहे थे हम लोग कि

01:04:46.639 --> 01:04:52.798
मतलब यहां पर अगर एक वो आ जाता तो क्या आ

01:04:50.400 --> 01:04:57.280
जाता? क्या सोच रहे थे? नहीं नहीं मतलब

01:04:52.798 --> 01:04:59.519
ऐसा आईडिया आया था कि बहुत ही हां हूं

01:04:57.280 --> 01:05:01.680
नहीं करके अल्टीमेटली उन्होंने बताया कि

01:04:59.519 --> 01:05:02.759
हम सोच रहे हैं कि यहां एक कृष्ण की आरती

01:05:01.679 --> 01:05:05.960
रखते

01:05:02.760 --> 01:05:10.480
हैं। तो उन्होंने कहा कितना भी हो यह

01:05:05.960 --> 01:05:14.639
काफिर मुझे यथ है तो मुसलमान नाम तो जावेद

01:05:10.480 --> 01:05:17.280
अख्तरी है ना तो मैंने कहा अच्छा सुनाइए

01:05:14.639 --> 01:05:21.358
क्या ट्यून है कोई तो उन्होंने मुझे ट्यून

01:05:17.280 --> 01:05:23.760
दी और बहुत ही मतलब चलो अब ये रस्म अदा कर

01:05:21.358 --> 01:05:25.679
देते हैं दे देते हैं इन्हें जब नहीं लिख

01:05:23.760 --> 01:05:28.880
पाएंगे तो हम कहेंगे हम किसी से लिखा लेते

01:05:25.679 --> 01:05:31.919
हैं ना तो मैंने कहा ठीक है दो दिन बाद

01:05:28.880 --> 01:05:34.000
मिलते हैं मैं दो दिन बाद गया फिर दोनों

01:05:31.920 --> 01:05:36.480
बैठे थे तो मैंने कहा मैंने मैंने वो लिख

01:05:34.000 --> 01:05:39.880
लिया है। लेकिन आपने मुझे जो ट्यून दी थी

01:05:36.480 --> 01:05:43.838
वो आरती की नहीं थी। वो एक गाने की ट्यून

01:05:39.880 --> 01:05:46.079
थी। आरती में एक क्रिसेंडो होता है। आपने

01:05:43.838 --> 01:05:49.199
क्रिसेंडो मुझे दिए ही नहीं। वो तो दो तीन

01:05:46.079 --> 01:05:54.240
अंतरे खत्म। एक क्रिसेंडो चाहिए जहां पर

01:05:49.199 --> 01:05:56.239
वो ऊपर जाए। वो कहां है? हर आरती टेमो

01:05:54.239 --> 01:05:58.879
इनक्रीस होता है उसका। वो है ही नहीं

01:05:56.239 --> 01:06:02.239
उसमें। वो मैंने अपनी तरफ से लिख दिया है।

01:05:58.880 --> 01:06:04.400
आप उसे कंपोज कर लीजिए। कली जी बहुत अच्छा

01:06:02.239 --> 01:06:07.038
क्या लिखा आपने मैंने कहा मैंने कुछ भी

01:06:04.400 --> 01:06:09.599
नहीं लिखा मैंने तो सिर्फ नाम जमा कर दिए

01:06:07.039 --> 01:06:12.440
उसमें सिर्फ कृष्ण के नाम है अपनी तरफ से

01:06:09.599 --> 01:06:14.880
कुछ नहीं है तो कह

01:06:12.440 --> 01:06:16.599
सुनाइए तो मैंने उन्हें सुनाया आपको भी

01:06:14.880 --> 01:06:20.480
सुना देता

01:06:16.599 --> 01:06:24.318
हूं वो कृष्ण कन्हैया मुरलीधर मनमोहन कान

01:06:20.480 --> 01:06:28.400
मुरारी है गोपाल मनोहर दुख भंजन गोपाल

01:06:24.318 --> 01:06:28.400
मनोहर दुख भंजन दुख

01:06:28.679 --> 01:06:35.759
भंजन एक बार अब अटल बनवारी है वो कुंज

01:06:32.400 --> 01:06:37.240
फिरैया सांवरिया नंदलाला कान मुरारी है बन

01:06:35.760 --> 01:06:41.760
कुंज फिरैया

01:06:37.239 --> 01:06:45.439
सांवरिया नंदलाला कान मुरारी है वो वो कंस

01:06:41.760 --> 01:06:48.640
विनाशक महारथी सुदर्शन चक्रधारी है हर रूप

01:06:45.440 --> 01:06:52.000
निराला है उसका हर उसकी लारी है वो

01:06:48.639 --> 01:06:56.558
गोपीनाथ मदन मोहन वो श्याम पीतांबर आएगा

01:06:52.000 --> 01:07:00.639
आएगा जो अंध आएगा आएगा जो अंदर आएगा तू तो

01:06:56.559 --> 01:07:04.000
बड़े परेशान हुए कहने आप इतने नाम तो हमें

01:07:00.639 --> 01:07:06.798
नहीं पता है तो आपको कैसे पता है? मैंने

01:07:04.000 --> 01:07:09.440
कहा दो ही वजह हैं। एक मैं लखनऊ का हूं

01:07:06.798 --> 01:07:13.710
जहां सबसे ज्यादा महिमा कृष्ण की है और

01:07:09.440 --> 01:07:21.440
दूसरे ये कि मुझे उर्दू आती है। शुक्रिया।

01:07:13.710 --> 01:07:25.480
[प्रशंसा]

01:07:21.440 --> 01:07:25.480
चलिए थैंक यू।

01:07:29.318 --> 01:07:35.199
वंडरफुल एस यू वांटेड टू टेक अ फ्यू

01:07:31.599 --> 01:07:36.960
क्वेश्चन लाइक टू देयर एंड वी कैन नहीं

01:07:35.199 --> 01:07:39.759
नहीं देखिए खड़े रहने में क्या होता है

01:07:36.960 --> 01:07:43.119
भागना आसान रहता है तो अगर कभी बुरा वक्त

01:07:39.760 --> 01:07:47.319
आ जाए आप यहीं से करिए बोलिए कुड आई हैव

01:07:43.119 --> 01:07:47.318
सम वाटर हां जी

01:07:48.000 --> 01:07:54.400
वन सेकंड वन सेकंड प्लीज प्लीज देखिए यहां

01:07:51.280 --> 01:07:55.599
सब किशोर जी की इजाजत से होगा आप पहले

01:07:54.400 --> 01:07:58.160
उनसे पूछ

01:07:55.599 --> 01:08:01.160
मैं आपको सिर्फ दो तीन चीज़ याद दिलाना

01:07:58.159 --> 01:08:01.159
चाहूंगा

01:08:02.519 --> 01:08:08.639
जी खून जग में डुबोली नहीं खूने दिल में

01:08:06.159 --> 01:08:11.199
खू दिल में डुबोली है उंगलियां मैंने और

01:08:08.639 --> 01:08:14.239
जुबान पे मोहर लगी है तो क्या कि रख दी है

01:08:11.199 --> 01:08:18.639
हर एक खलके जंजीर में जुबां मैंने बिल्कुल

01:08:14.239 --> 01:08:22.479
एक तो ये है एक वो उनका प्रजन का जो वो था

01:08:18.640 --> 01:08:25.759
रोशन ना उससे उन्होंने दो लिखी है एक तो

01:08:22.479 --> 01:08:29.358
शाम के पेचो खम सितारों जीना जीना उतर रही

01:08:25.759 --> 01:08:31.479
है रात यूं सभा पास से बह जाती है जैसे कह

01:08:29.359 --> 01:08:36.239
दी किसी ने प्यार की

01:08:31.479 --> 01:08:39.039
बात अच्छी बात मुझे आधा थैंक यू सो मच

01:08:36.238 --> 01:08:41.759
थैंक यू नहीं नहीं कोई बात नहीं कैन आई

01:08:39.039 --> 01:08:44.960
जस्ट टेक अ मोमेंट टू से दैट वी डू वांट

01:08:41.759 --> 01:08:48.880
टू थैंक जावेद साहब वेरी मच फॉर दैट रियली

01:08:44.960 --> 01:08:52.359
एंटलाइटनिंग लेक्चर एंड समथिंग सो अ बिग

01:08:48.880 --> 01:08:52.359
राउंड ऑफ़ अप्लॉज़

01:08:56.880 --> 01:09:02.159
आई वुड आल्सो लाइक जावेद साहब जस्ट अ मिनट

01:08:59.679 --> 01:09:05.600
टू आस्क माय ब्रदर दीपक रोशा टू कम ऑन

01:09:02.158 --> 01:09:08.559
स्टेज एंड ही कैन कंडक्ट द नेक्स्ट राउंड

01:09:05.600 --> 01:09:11.199
ऑफ़ टू ऑर थ्री क्वेश्चन्स ओनली प्लीज एंड

01:09:08.560 --> 01:09:14.000
वी वुड लाइक यू टू जस्ट रिमेन विथ इन द

01:09:11.198 --> 01:09:17.358
टॉपिक दैट जावेद साहब हेज़ जस्ट अह स्पोकन

01:09:14.000 --> 01:09:20.520
अबाउट एंड आफ्टर अह

01:09:17.359 --> 01:09:24.719
हां दीपक यू कैन टेक दिस अह द

01:09:20.520 --> 01:09:26.719
माइक्रोफोन ओके। ओके। ah एंड सो इफ देयर

01:09:24.719 --> 01:09:28.798
आर एनीबडी देयर इज़ एनीबडी विथ अ क्वेश्चन

01:09:26.719 --> 01:09:31.198
इफ यू कैन जस्ट रेज़ योर हैंड प्लीज देन वी

01:09:28.798 --> 01:09:33.600
कैन हैव जस्ट अ मिनट। द माइक्रोफोन विल कम

01:09:31.198 --> 01:09:37.198
टू यू एंड दीपक यू कैन कंडक्ट दिस एंड

01:09:33.600 --> 01:09:40.400
आल्सो गिव द थैंक्स गिविंग। थैंक यू। सो

01:09:37.198 --> 01:09:43.399
एनी क्वेश्चन्स? एनीबडी? यस, द लेडी देर

01:09:40.399 --> 01:09:43.399
प्लीज।

01:09:43.600 --> 01:09:48.640
जी, उर्दू के पॉपुलर के लिए तवाइफ़ों का

01:09:46.560 --> 01:09:51.520
क्या रोल रहा?

01:09:48.640 --> 01:09:55.119
उर्दू को पॉपुलराइज करने में तवाइफों का

01:09:51.520 --> 01:09:57.080
क्या कोई रोल रहा?

01:09:55.119 --> 01:10:01.519
पॉपुलर तवाइफों का

01:09:57.079 --> 01:10:04.960
रहा। तो सबका नहीं जो पॉपुलर थी। देखिए

01:10:01.520 --> 01:10:07.120
क्या है कि जो पोएट्री गाई जाएगी और उस

01:10:04.960 --> 01:10:09.279
जमाने में तो औरतों में तो सिर्फ तवाइफें

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ही गा सकती थी। न जाने कितनी अच्छी

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सिंगर्स होंगी जिनका गला घरों में घोट

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दिया गया। तो कम से कम तवाइफ के पास ये

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राइट तो था कि वो गा सकती थी। तो जब वो

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गाएगी तो अच्छी शायरी ही गाएगी तो कोई

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हैरत की बात नहीं कि वो उर्दी गज़ें गाती

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थी और यकीनन जब गा के कोई सुनाता है चाहे

01:10:25.439 --> 01:10:31.599
वो मेदी हसन हो और वो चाहे जगजीत सिंह हो

01:10:28.399 --> 01:10:36.238
तो गज़ल बहुत दूर तक पहुंचती है। वन लास्ट

01:10:31.600 --> 01:10:38.320
क्वेश्चन फ्रॉम जेंटलमैन देयर सर उर्दू के

01:10:36.238 --> 01:10:41.279
जेनिस्ट के बारे में आपने दिल्ली की

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थ्योरी जो है उसको नजरअंदाज कर दिया कि ये

01:10:41.279 --> 01:10:47.679
उर्दू जो है वो जो टर्किश सिपाही आते थे

01:10:44.960 --> 01:10:50.399
उनके कैंप्स होते थे। और उर्दू बाजार के

01:10:47.679 --> 01:10:52.800
अंदर इस जो दिल्ली में उर्दू बाजार है

01:10:50.399 --> 01:10:55.359
वहां पर जो कैंप्स की लैंग्वेज थी वो

01:10:52.800 --> 01:10:58.400
उर्दू के जेनेसिस में थी। तो इस पर आपकी

01:10:55.359 --> 01:11:00.880
कोई राय और दूसरा हसरत मोहानी साहब का जो

01:10:58.399 --> 01:11:02.719
कंट्रीब्यूशन था हिंदुस्तान में इंकलाब

01:11:00.880 --> 01:11:05.199
लाने के बारे में। बहुत सही। इंकलाब

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जिंदाबाद तो नारा ही हसरत मोहानी का बनाया

01:11:05.198 --> 01:11:10.399
हुआ है। और आपको एक और बताऊं उर्दू की एक

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और भी डिस्टिंशन है। हिंदुस्तान में जो

01:11:10.399 --> 01:11:15.679
पहला शायर अपनी शायरी की वजह से फांसी पे

01:11:12.800 --> 01:11:17.920
चढ़ा है। वो इसी शहर दिल्ली में था। ये

01:11:15.679 --> 01:11:21.560
जमाने में एक फर्रुख सियर नाम का बादशाह

01:11:17.920 --> 01:11:26.640
था यहां जिसके जमाने में एक शायर था जाफर

01:11:21.560 --> 01:11:28.560
जटली जो कि उस बादशाह के खिलाफ और उसकी

01:11:26.640 --> 01:11:30.640
पॉलिसीज के खिलाफ और जिस तरह से वो

01:11:28.560 --> 01:11:32.960
एक्सप्लइट कर रहा था लोगों को उसके खिलाफ

01:11:30.640 --> 01:11:35.600
पोएट्री करता था एंड अल्टीमेटली ही वाज़

01:11:32.960 --> 01:11:38.880
कॉट एंड ही वाज़ हैंड।

01:11:35.600 --> 01:11:41.360
हमारे दूसरे भी जो शायर हैं वो फैज हो,

01:11:38.880 --> 01:11:46.000
सरदार जाफरी हो, मजरू हो, कैफी हो सब जेल

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गए हुए हैं। यह अंग्रेज के जेल गए हैं। तो

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ये जो रेवोलशनरी फरवर था वो उर्दू पोएट्री

01:11:49.600 --> 01:11:55.120
में हर दौर में रहा है।

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लेकिन उर्दू जैसे वर्ल्ड जो है इट इज़ अ

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टर्किश

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वर्ल्ड। जिसका मतलब है कंटोनमेंट एरिया।

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नाउ कंटोनमेंट एरिया को आज हम समझते हैं

01:12:01.760 --> 01:12:06.000
कि जहां सिर्फ सिपाही रहते हैं। दरअसल

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जिसे आज आप सिविल लाइंस कहते हैं उस वक्त

01:12:06.000 --> 01:12:12.800
तो कोई सिविल लाइंस का कांसेप्ट नहीं था।

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तो वो सब सिविल लाइन का हिस्सा है। इट वाज़

01:12:12.800 --> 01:12:20.079
बाय एंड लार्ज एन अर्बन लैंग्वेज एन अर्बन

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फिनोमना। तो उसका नाम तरहतरह के नाम पड़े

01:12:20.079 --> 01:12:29.119
जैसे के हिंदवी फिर

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ये ज़बाने उर्दू है मोहल्ला तो वो वो तो

01:12:29.119 --> 01:12:35.000
जुबान और मोहल्ला तो गिर गए उर्दू बची तो

01:12:33.119 --> 01:12:39.079
ये इस तरह से है

01:12:35.000 --> 01:12:41.960
लेकिन सिपाही जो है

01:12:39.079 --> 01:12:45.760
वो लिटरेचर नहीं बना

01:12:41.960 --> 01:12:48.239
देते वो इतना सिंपल नहीं होता वो जब

01:12:45.760 --> 01:12:50.880
सोसाइटी में चली जाती जाती है। जब मिडिल

01:12:48.238 --> 01:12:52.879
क्लास के पास जाती है, जब यह सेंसिटिव

01:12:50.880 --> 01:12:55.199
लोगों के पास जाती है तबान तब लिटरेचर

01:12:52.880 --> 01:13:00.000
क्रिएट होता है।

01:12:55.198 --> 01:13:03.719
सिपाही और तवा से जी सिपाही और तवा से

01:13:00.000 --> 01:13:06.800
मिलके आपकी राय है मेरी नहीं

01:13:03.719 --> 01:13:09.119
है। आजकल भी सिपाही तवाइयफों से बहुत

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मिलते हैं। तो शैल वी एक्सपेक्ट अनदर

01:13:09.119 --> 01:13:11.599
लैंग्वेज?

01:13:14.399 --> 01:13:18.079
वेल, आई एम सॉरी। आई डोंट थिंक बिकॉज़ ऑफ़

01:13:16.640 --> 01:13:21.079
शॉर्टेज ऑफ़ टाइम वी कैन टेक मोर

01:13:18.079 --> 01:13:21.079
क्वेश्चंस।

01:13:21.760 --> 01:13:29.600
ओके वन लास्ट वन द यंग जेंटलमैन देयर।

01:13:27.039 --> 01:13:32.319
आई होप यू हैव टू टर्ड सर। नहीं नहीं मगर

01:13:29.600 --> 01:13:33.400
मैं आपको एक बात बताना चाहूंगा। आप देखिए

01:13:32.319 --> 01:13:37.119
इसको

01:13:33.399 --> 01:13:39.439
बरसों स्टेट पे ट्रेन नहीं मिली है। ये

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जवान जिंदा क्यों है? यह सिपाहियों की वजह

01:13:39.439 --> 01:13:46.559
से जिंदा है। या तवाों की वजह से? यह जबान

01:13:42.000 --> 01:13:46.560
इसलिए जिंदा है कि आप यहां बैठे हुए

01:13:48.359 --> 01:13:55.039
हैं। आपको उससे दिलचस्पी है। और अगर शेर

01:13:52.960 --> 01:13:56.800
आपको कोई भी याद होगा तो उर्दू ही का याद

01:13:55.039 --> 01:13:59.600
होगा।

01:13:56.800 --> 01:14:01.679
है कि नहीं?

01:13:59.600 --> 01:14:04.159
देयर इज़ अ यंग जेंटलमैन देयर हो। लाइक टू

01:14:01.679 --> 01:14:08.719
आस्क यू सर। सर थैंक यू फॉर द लेक्चर। सर

01:14:04.158 --> 01:14:12.479
इट वास रियली फुल ऑफ़ अवेकनिंग। अह सर, जो

01:14:08.719 --> 01:14:17.840
एक 20 से 50ज़ में जो एक सरियलिज्म का जो

01:14:12.479 --> 01:14:21.119
मूवमेंट था उसका इफेक्ट उर्दू पर क्या था?

01:14:17.840 --> 01:14:23.119
जो वर्ल्ड वॉर के टाइम पे सरियलिज्म बहुत

01:14:21.119 --> 01:14:24.960
ज्यादा नहीं मैं आपसे अर्ज किया लेकिन

01:14:23.119 --> 01:14:27.840
उसमें क्या होता है? एव्री फैशन बिकम्स

01:14:24.960 --> 01:14:30.239
इट्स ओन कार्टून। तो भाई सेलिज्म ठीक है।

01:14:27.840 --> 01:14:33.199
सिंबॉलिज्म भी ठीक है। एब्स्ट्रैक्शन भी

01:14:30.238 --> 01:14:35.039
ठीक है। लेकिन उसमें क्या होता है? लोग हद

01:14:33.198 --> 01:14:36.479
से आगे गुजर जाते हैं। और यह इल्जाम मैं

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सिर्फ इन पे ही नहीं लगा रहा। मैंने तो

01:14:36.479 --> 01:14:41.039
प्रोग्रेसिव राइटर्स मूवमेंट पे भी लगाया

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है। यही इल्जाम हद से मत आगे बैलेंस तो

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रखो। अब मिसाल के तौर पे एक किस्सा सुनाता

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हूं आपको और ये सच्चा इंसिडेंट है। एक

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छोटी सी लिटरेरी कॉन्फ्रेंस थी।

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कॉन्फ्रेंस क्या मीटिंग थी वो 50-60 आदमी

01:14:51.198 --> 01:14:57.039
थे उसमें। तो उसमें एक जो सरल आप पोएट बोल

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रहे हैं ना सर स्टिक वो खड़े हुए और

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उन्होंने एक नज़्म सुनाई कि जिसका सेंस कुछ

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ऐसा था कि मेरे घर के आंगन में एक अलगनी

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है उस एलगनी पे कल मैंने एक सफेद चादर

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टांगी थी सूखने के लिए लेकिन एक कौवा आया

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उस पे बैठा उस पे बीट करके उड़ गया। बस ये

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उनकी पोएम थी। तो फैज साहब इत्तेफाक से

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उसे प्रिसाइड कर रहे जब वो माइक से हटने

01:15:17.119 --> 01:15:22.238
लगे पोएट तो फैज साहब ने रोक लिया उन्हें

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और कहा कि देखिए मैं अपनी जिहालत मानने को

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तैयार हूं। इस नज़्म की सिंबॉलिज्म मैं

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नहीं समझा हूं तो मैं चाहूंगा कि शायर

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थोड़ा एक्सप्लेन कर दे। तो इससे पहले अगर

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शायर कुछ बोलता ऑडियंस में से एक आदमी

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खड़ा हो गया। और कहने लगा कि साहब सिंपल

01:15:35.679 --> 01:15:40.880
सी नज़ आपकी समझ में क्यों नहीं आई? मुझे

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कल ही इन शायर ने मेरे दोस्त हैं ये।

01:15:40.880 --> 01:15:45.760
इन्होंने मुझे इस पोयम के मीनिंग बताए

01:15:43.198 --> 01:15:48.559
हैं। तो शायर ने कहा बैठ जाइए। मैंने

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मीनिंग चेंज कर

01:15:53.479 --> 01:16:01.279
दिए। सो अह जावेद साहब, लेडीज एंड

01:15:58.198 --> 01:16:04.158
जेंटलमैन, आई एम स्टैंडिंग बिफोर यू विथ

01:16:01.279 --> 01:16:06.158
लॉट ऑफ विंग्स फीलिंग्स। वन ऑन द वन साइड

01:16:04.158 --> 01:16:09.519
इज़ जावेद साहब, हु हैज़ डिलीवर सच अ

01:16:06.158 --> 01:16:12.319
डिलाइटफुल टॉक एंड सच सो विथ सो मच

01:16:09.520 --> 01:16:15.280
एलेक्वेंस। एंड ही हैज़ लेफ्ट अस स्पेल

01:16:12.319 --> 01:16:18.559
बाउंड एंड इनथ्रोल्ड। एंड ऑन दी अदर साइड,

01:16:15.279 --> 01:16:21.920
आई एम रिमेंबरिंग माय फादर हु लिव्ड ऑन

01:16:18.560 --> 01:16:24.239
दिस प्लेनेट फॉर 100 इयर्स। जावेद साहब,

01:16:21.920 --> 01:16:26.880
इफ ही हैड एवर मेट यू, ही वुड हैव बीन

01:16:24.238 --> 01:16:30.879
रियली हैप्पी टू कन्वर्स फॉर आवर्स विथ यू

01:16:26.880 --> 01:16:34.480
ऑन द नोसेस ऑफ़ सम गजल्स एंड ऑन सम शेयर्स

01:16:30.880 --> 01:16:37.840
बट इट वास नॉट टू बी। लेडीज एंड जेंटलमैन,

01:16:34.479 --> 01:16:40.718
अमंग यू आई सी मेनी फ्रेंड्स, फैमिली एंड

01:16:37.840 --> 01:16:43.760
फ्रेंड्स ऑफ माय फादर आल्सो। एंड टू ऑल ऑफ

01:16:40.719 --> 01:16:46.319
यू आई थैंक यू वि ऑल आवर हार्ट फ्रॉम माय

01:16:43.760 --> 01:16:49.280
मदर साइड आल्सो जावेद साहब हमारे पास मां

01:16:46.319 --> 01:16:53.479
भी है। जी जी

01:16:49.279 --> 01:16:57.198
सो आई थैंक यू ऑल फॉर कमिंग हियर

01:16:53.479 --> 01:17:00.559
एंड गिविंग अस सच अ मेमोरेबल टाइम एंड

01:16:57.198 --> 01:17:08.759
जावेद साहब वंस मोर थैंक यू

01:17:00.560 --> 01:17:08.760
[प्रशंसा]
