1 00:00:00,480 --> 00:00:05,439 मुश्किल ये है कि आप अंग्रेजी के अलावा 2 00:00:02,638 --> 00:00:08,400 कोई जबान बोले तो आप पढ़े लिखे नहीं लगते। 3 00:00:05,440 --> 00:00:10,719 लेकिन अब आप बर्दाश्त कर लें। तो मैंने 4 00:00:08,400 --> 00:00:12,400 कहा अच्छा हुजूर एक बात बताएं कि 5 00:00:10,718 --> 00:00:14,879 बिल्लियों की बहुत आदत होती है। अक्सर 6 00:00:12,400 --> 00:00:17,839 जाके अवन में बच्चे दे देती हैं। तो उन 7 00:00:14,880 --> 00:00:21,600 बच्चों को आप बिस्किट कहते हैं क्या? एक 8 00:00:17,839 --> 00:00:24,640 मकान के एक कमरे में एक गोरा चिट्टा आदमी 9 00:00:21,600 --> 00:00:27,199 और एक नन्हा मुन्ना बच्चा बाल्टी से नहाए। 10 00:00:24,640 --> 00:00:29,039 बावरची ने नाश्ता दिया जिसमें उड़द की दाल 11 00:00:27,199 --> 00:00:34,160 और तो थे। 12 00:00:29,039 --> 00:00:37,920 आदमी उठा चीख हटाई संदूक खोला उसमें से 13 00:00:34,159 --> 00:00:41,119 पिस्तौल निकाला दीवार पर टकी बंदूक ली और 14 00:00:37,920 --> 00:00:45,439 बाहर खड़े रिक्शे में बैठ के चला गया 15 00:00:41,119 --> 00:00:46,519 बच्चा बेबस देखता रहा अब इसे जरा स्कैन 16 00:00:45,439 --> 00:00:49,399 करते 17 00:00:46,520 --> 00:00:52,199 हैं एक मकान मकान 18 00:00:49,399 --> 00:00:55,079 अरेबिक एक कमरे में 19 00:00:52,198 --> 00:00:58,718 इटालियन कमरा इज 20 00:00:55,079 --> 00:01:01,160 इटालियन बाल्टी इज पोर्चुगी 21 00:00:58,719 --> 00:01:05,118 गोरा चिट्टा आदमी में चिट्टा 22 00:01:01,159 --> 00:01:06,438 पंजाबी नन्हा नन्हा मुन्ना बच्चा में 23 00:01:05,118 --> 00:01:09,719 नन्हा 24 00:01:06,438 --> 00:01:13,359 गुजराती बच्चा 25 00:01:09,719 --> 00:01:13,359 परशियन बावर्ची 26 00:01:13,640 --> 00:01:20,640 टर्किश खवातीन हजरात मोज़ 27 00:01:17,799 --> 00:01:24,640 हाज़रीन मुझे सख्त इंस्ट्रक्शंस दिए हैं। 28 00:01:20,640 --> 00:01:26,799 हुक्म ये है कि आप उर्दू में बोलेंगे। 29 00:01:24,640 --> 00:01:28,560 मुश्किल यह है कि आप अंग्रेजी के अलावा 30 00:01:26,799 --> 00:01:33,118 कोई जुबान बोले तो आप पढ़े लिखे नहीं 31 00:01:28,560 --> 00:01:33,118 लगते। लेकिन अब आप बर्दाश्त कर 32 00:01:33,400 --> 00:01:42,640 लें। पहले तो मैं बहुत-बहुत शुक्रिया अदा 33 00:01:37,280 --> 00:01:46,799 करना चाहूंगा किशोर आपका के आपने इतने अहम 34 00:01:42,640 --> 00:01:50,640 तकरीब में जो पहला आपके वालिद का इस तरह 35 00:01:46,799 --> 00:01:53,680 का फंक्शन है उसमें मुझे इज्जत बख्शी आपने 36 00:01:50,640 --> 00:01:56,239 और मैं जानता हूं कि आपके दिल में क्या 37 00:01:53,680 --> 00:01:59,680 इज्जत और क्या मोहब्बत है उनके लिए। तो 38 00:01:56,239 --> 00:02:02,158 अगर आपने मुझे याद किया इस काम के लिए तो 39 00:01:59,680 --> 00:02:05,360 ये एक बहुत बड़ा कॉम्प्लीमेंट है जिसका 40 00:02:02,159 --> 00:02:05,359 मैं वाकई शुक्रगुजार 41 00:02:05,399 --> 00:02:13,680 हूं। ये हालांकि शायर ने तो ये शराब के 42 00:02:10,800 --> 00:02:16,719 बारे में कहा था लेकिन ये उर्दू के बारे 43 00:02:13,680 --> 00:02:19,040 में भी सच है कि छूटती नहीं है मुंह से ये 44 00:02:16,719 --> 00:02:23,520 काफिर लगी हुई। 45 00:02:19,039 --> 00:02:23,519 तो इसमें एक कोई है 46 00:02:24,199 --> 00:02:33,439 बात जो ये 47 00:02:27,479 --> 00:02:37,439 जुबान मर नहीं सकती और कत्ल नहीं हो पाती 48 00:02:33,439 --> 00:02:40,239 कुछ खूबी है इसमें ये आवाम की जुबान है 49 00:02:37,439 --> 00:02:42,400 मगर इससे पहले कि हम सोचे किसकी जुबान है 50 00:02:40,239 --> 00:02:46,878 कहां पैदा हुई कहां पली पड़ी कहां जवान 51 00:02:42,400 --> 00:02:49,680 हुई सवाल ये कि जबान होती क्या है हम जब 52 00:02:46,878 --> 00:02:53,199 बात करते हैं उर्दू जबान, हिंदी जबान, 53 00:02:49,680 --> 00:02:54,920 अंग्रेजी जबान, फ्रेंच जबान, तमिल जबान 54 00:02:53,199 --> 00:03:01,199 जबान क्या चीज 55 00:02:54,919 --> 00:03:04,799 है? जबान क्या अपनी स्क्रिप्ट है? 56 00:03:01,199 --> 00:03:09,119 अगर स्क्रिप्ट है तो यह अगर जो पोस्टर लगा 57 00:03:04,800 --> 00:03:14,120 होता है के यू सी एच के यू सी एच एच ओ टी 58 00:03:09,120 --> 00:03:17,120 ए एच ए आई ये अंग्रेजी है कुछ-कुछ होता 59 00:03:14,120 --> 00:03:19,519 है। ये तो इंग्लिश में लिखा है। रोमन में 60 00:03:17,120 --> 00:03:22,959 लिखा है। और सच तो ये है कि अंग्रेजी फिर 61 00:03:19,519 --> 00:03:25,599 रोमन है। अंग्रेजी ही नहीं है। चाहे वो 62 00:03:22,959 --> 00:03:29,360 फ्रेंच हो, जर्मन हो। ये सब एक्चुअली तो 63 00:03:25,598 --> 00:03:33,679 इटालियन लैंग्वेज है। अगर हम ये मान ले कि 64 00:03:29,360 --> 00:03:36,560 स्क्रिप्ट जबान है तो ये तो सब सारी यूरोप 65 00:03:33,680 --> 00:03:38,599 की आधी जो यूरोप है वो तो मांगे कि 66 00:03:36,560 --> 00:03:41,920 स्क्रिप्ट पे काम कर रहा 67 00:03:38,598 --> 00:03:41,919 है। तो 68 00:03:42,039 --> 00:03:47,719 क्या जुबान वोकैबलरी 69 00:03:45,560 --> 00:03:51,519 है? 70 00:03:47,719 --> 00:03:55,000 अच्छा ये ऑल एयर कंडीशंड है। मैंने 71 00:03:51,519 --> 00:03:55,000 अंग्रेजी बोली। 72 00:03:55,199 --> 00:04:02,399 चार लफ्ज थे। यह हॉल एयर कंडीशन है। इसमें 73 00:03:59,598 --> 00:04:03,318 जो ज्यादा इंपॉर्टेंट लफज़ थे वो था हॉल और 74 00:04:02,400 --> 00:04:06,760 एयर 75 00:04:03,318 --> 00:04:10,079 कंडीशन। तो क्या मैं अंग्रेजी बोल रहा था? 76 00:04:06,759 --> 00:04:13,959 नहीं। क्यों नहीं बोल रहा था? इसलिए कि 77 00:04:10,080 --> 00:04:18,759 इधर ये लगा है और उधर है लगा 78 00:04:13,959 --> 00:04:22,399 है। तो ना स्क्रिप्ट, न वोकैबलरी। 79 00:04:18,759 --> 00:04:26,639 अल्टीमेटली जबान अपना सिंटेक्स है, अपना 80 00:04:22,399 --> 00:04:30,239 ग्रामर है। लफज़ तो कहीं से भी आ जाते हैं। 81 00:04:26,639 --> 00:04:32,079 मैं माफी चाहता हूं कि ये जो एक पैराग्राफ 82 00:04:30,240 --> 00:04:34,960 मुझे रट गया है। मैंने इतनी बार सुनाया 83 00:04:32,079 --> 00:04:40,719 है। तो ये एक रटाई बात मैं बोलने वाला 84 00:04:34,959 --> 00:04:43,439 हूं। लेकिन वो अभी भी असर करती है। तो मैं 85 00:04:40,720 --> 00:04:46,880 आपसे अर्ज करता हूं। मैं एक छोटा सा 86 00:04:43,439 --> 00:04:49,360 पैराग्राफ बोलूंगा। 87 00:04:46,879 --> 00:04:52,360 उसमें किसी को भी इस हॉल में कोई लफ्ज 88 00:04:49,360 --> 00:04:56,879 मुश्किल लगे तो हाथ उठा 89 00:04:52,360 --> 00:04:59,600 दीजिएगा। एक मकान के एक कमरे में एक गोरा 90 00:04:56,879 --> 00:05:01,959 चिट्टा आदमी और एक नन्हा मुन्ना बच्चा 91 00:04:59,600 --> 00:05:05,360 बाल्टी से 92 00:05:01,959 --> 00:05:11,159 नहाए। बावरची ने नाश्ता दिया जिसमें उड़द 93 00:05:05,360 --> 00:05:15,360 की दाल और तो थे। आदमी उठा चीख हटाई संदूक 94 00:05:11,160 --> 00:05:16,759 खोला। उसमें से पिस्तौल निकाला। दीवार पर 95 00:05:15,360 --> 00:05:20,680 टकी बंदूक 96 00:05:16,759 --> 00:05:23,080 ली और बाहर खड़े रिक्शे में बैठ के चला 97 00:05:20,680 --> 00:05:26,120 गया। 98 00:05:23,079 --> 00:05:29,079 बच्चा बेबस देखता 99 00:05:26,120 --> 00:05:32,918 रहा। कोई 100 00:05:29,079 --> 00:05:37,639 मुश्किल कोई भी मुश्किल 101 00:05:32,918 --> 00:05:41,680 नहीं। अब इसे जरा स्कैन करते 102 00:05:37,639 --> 00:05:43,639 हैं। एक मकान मकान अरेबिक। 103 00:05:41,680 --> 00:05:46,680 एक कमरे में 104 00:05:43,639 --> 00:05:49,478 इटालियन कमरा इज 105 00:05:46,680 --> 00:05:52,240 इटालियन बाल्टी इज 106 00:05:49,478 --> 00:05:54,079 पोर्चुगीज गोरा चिट्टा आदमी में चिट्टा 107 00:05:52,240 --> 00:05:57,199 पंजाबी 108 00:05:54,079 --> 00:05:58,519 नन्हा मुन्ना नन्हा मुन्ना बच्चा में 109 00:05:57,199 --> 00:06:02,038 नन्हा 110 00:05:58,519 --> 00:06:04,599 गुजराती बच्चा 111 00:06:02,038 --> 00:06:07,318 परशजियन बावरची 112 00:06:04,600 --> 00:06:09,560 टर्किश नाश्ता 113 00:06:07,319 --> 00:06:12,840 परशियन उर 114 00:06:09,560 --> 00:06:17,680 तमिल टोस्ट इंग्लिश 115 00:06:12,839 --> 00:06:24,359 टोस्ट चिक टर्किश संदूक टर्किश पिस्तौल 116 00:06:17,680 --> 00:06:28,360 इंग्लिश दीवार परशियन बंदूक टर्किश रिक्शा 117 00:06:24,360 --> 00:06:30,280 जैपनीज रिक्शा इज अ जैपनीज 118 00:06:28,360 --> 00:06:34,800 वर्ड और 119 00:06:30,279 --> 00:06:34,799 बेबस है विवश 120 00:06:34,839 --> 00:06:44,478 संस्कृत इतने सिंपल से चार लाइनों में 121 00:06:39,360 --> 00:06:44,479 हमने 12 13 लैंग्वेज के वर्ड इस्तेमाल 122 00:06:45,000 --> 00:06:53,279 किए जो हम बोलते हैं हमें मालूम ही नहीं 123 00:06:49,600 --> 00:06:56,960 है कि कौन सा शब्द कहां से आया है और कब 124 00:06:53,279 --> 00:07:00,719 आया है और कैसे आ गया। 125 00:06:56,959 --> 00:07:05,839 अभी मैं पढ़ रहा था कि एक साहब ने रिसर्च 126 00:07:00,720 --> 00:07:08,960 की है कि मराठी में तकरीबन 30% वर्ड जो है 127 00:07:05,839 --> 00:07:11,598 वो परर्शियन बेस्ड है। हैरत की बात नहीं 128 00:07:08,959 --> 00:07:13,918 है। वैसे हमें मालूम नहीं था कि जो पोर्ट 129 00:07:11,598 --> 00:07:16,519 एरियाज होते हैं उनमें बड़ी आराम से बाहर 130 00:07:13,918 --> 00:07:20,719 के लफ्ज़ आते हैं। सेलर सिर्फ सामान नहीं 131 00:07:16,519 --> 00:07:23,000 लाते। वो लफज़ भी लाके छोड़ देते हैं और वो 132 00:07:20,720 --> 00:07:26,960 लफज़ अपना लिए जाते 133 00:07:23,000 --> 00:07:31,120 हैं। कमाल यह है कि लफज़ हम या कोई भी 134 00:07:26,959 --> 00:07:33,519 लैंग्वेज एज इट इज नहीं लेते। जैसे का 135 00:07:31,120 --> 00:07:35,598 तैसा वैसे नहीं लेते। उसे हम अपने 136 00:07:33,519 --> 00:07:40,240 सिंटेक्स में अपने ग्रामर में डाल देते 137 00:07:35,598 --> 00:07:42,598 हैं। मतलब हवा परिजयन है 138 00:07:40,240 --> 00:07:45,478 लेकिन हवाएं परिशियन नहीं 139 00:07:42,598 --> 00:07:49,439 है। हवाओं पर नहीं 140 00:07:45,478 --> 00:07:52,879 है। दोस्त पर्शियन है। दोस्ती परशियन नहीं 141 00:07:49,439 --> 00:07:56,000 है। और दोस्तों भी पर्शियन नहीं है। और 142 00:07:52,879 --> 00:07:58,879 दोस्तों भी पर्शियन नहीं है। दोस्तों और 143 00:07:56,000 --> 00:08:02,079 दोस्तों में भी फर्क है। ये गलती हमारे 144 00:07:58,879 --> 00:08:04,319 पॉलिटिकल लीडर बहुत करते रहते हैं। जहां 145 00:08:02,079 --> 00:08:06,000 दोस्तों बोलना चाहिए वहां दोस्तों बोलते 146 00:08:04,319 --> 00:08:08,960 हैं। जहां दोस्तों बोलना चाहिए वहां 147 00:08:06,000 --> 00:08:11,800 दोस्तों बोलते हैं। दोस्तों सेकंड पर्सन 148 00:08:08,959 --> 00:08:16,478 से बोल सकते हैं। मेरे 149 00:08:11,800 --> 00:08:19,520 दोस्तों, मेरे भाइयों, मेरी बहनों, लेकिन 150 00:08:16,478 --> 00:08:23,120 जब आप थर्ड पर्सन बनाएंगे उसे तो मैंने 151 00:08:19,519 --> 00:08:27,359 अपने भाइयों से कहा, अपने दोस्तों से कहा, 152 00:08:23,120 --> 00:08:29,000 नेजल थर्ड पर्सन में आता है। बिना नेज़ल 153 00:08:27,360 --> 00:08:32,080 सेकंड पर्सन। 154 00:08:29,000 --> 00:08:37,918 खैर इतना ज्यादा एक्सपेक्ट नहीं करना 155 00:08:32,080 --> 00:08:37,919 चाहिए। ठीक है जैसे भी काम चल रहा है चलने 156 00:08:38,918 --> 00:08:46,319 दो। 157 00:08:40,440 --> 00:08:50,160 तो सवाल ये है कि ये उर्दू क्या है? ये 158 00:08:46,320 --> 00:08:52,560 कहां से आई? ये कैसे बनी? इसके बारे में 159 00:08:50,159 --> 00:08:56,958 भी अजीब अजीब कहानियां हैं। अजीब अजीब 160 00:08:52,559 --> 00:08:59,439 किस्से हैं। मुझे एक मैं अच्छी खासी पढ़ी 161 00:08:56,958 --> 00:09:00,838 लिखी औरत हमारी दोस्त हैं। बड़ी अच्छी 162 00:08:59,440 --> 00:09:03,279 पेंटर 163 00:09:00,839 --> 00:09:05,040 हैं। मुंबई में रहती हैं। तो मुझसे 164 00:09:03,278 --> 00:09:07,278 उन्होंने बड़ी हम लोग बड़े गहरे दोस्त 165 00:09:05,039 --> 00:09:11,120 फैमिली फ्रेंड। तो एक दिन उन्होंने ख्याल 166 00:09:07,278 --> 00:09:14,240 आ गया। तो मुझसे पूछा उन्होंने के जावेद 167 00:09:11,120 --> 00:09:16,959 ये उर्दू तो बाबर के साथ आई थी ना। तो मैं 168 00:09:14,240 --> 00:09:19,360 हां उसके ही घोड़े पे पीछे बैठी हुई थी 169 00:09:16,958 --> 00:09:21,278 बुर्का पहने। 170 00:09:19,360 --> 00:09:23,039 और बस वो उसने बाबर ने उसे यहां उतार 171 00:09:21,278 --> 00:09:26,958 दिया। वो तो कुछ दिनों बाद मर गया। यह इधर 172 00:09:23,039 --> 00:09:30,199 ही रह गई। तो मतलब देखिए इल्म की कोई 173 00:09:26,958 --> 00:09:33,359 लिमिट हो तो हो। जियालत की कोई लिमिट नहीं 174 00:09:30,200 --> 00:09:36,320 है। दुनिया की हर गलत चीज की कोई लिमिट 175 00:09:33,360 --> 00:09:40,959 नहीं। शराफत की लिमिट तो हो। कमी की लिमिट 176 00:09:36,320 --> 00:09:42,839 नहीं है। तो हर चीज जो बुरी है और गलत है 177 00:09:40,958 --> 00:09:44,439 वो इनफिनाइट 178 00:09:42,839 --> 00:09:48,800 है। 179 00:09:44,440 --> 00:09:51,360 तो ये जुबान ये प्योरली हिंदुस्तान की 180 00:09:48,799 --> 00:09:56,159 जुबान है। इसलिए कि जब मैं कहता हूं तुम 181 00:09:51,360 --> 00:10:00,120 खाना खाओगे? पानी पियोगे? घर जा रहे हो? 182 00:09:56,159 --> 00:10:03,278 भूख तो नहीं लग रही। ये कौन सी जुबान 183 00:10:00,120 --> 00:10:06,320 है? ये अगर देवनागरी में लिख दोगे तो 184 00:10:03,278 --> 00:10:10,559 हिंदी हो जाएगी। नस्ताख में लिख दोगे तो 185 00:10:06,320 --> 00:10:13,040 उर्दू हो जाएगी। और वो लोग यूपी में जिनकी 186 00:10:10,559 --> 00:10:15,039 आज भी कमी नहीं है जो ना हिंदी लिख सकते 187 00:10:13,039 --> 00:10:17,439 हैं ना उर्दू लिख सकते हैं ना कुछ पढ़ 188 00:10:15,039 --> 00:10:20,319 सकते हैं। वो जब ये कहते हैं तुम कहां जा 189 00:10:17,440 --> 00:10:25,079 रहे हो? तो कौन सी जबान बोल रहे हैं? वो 190 00:10:20,320 --> 00:10:28,720 कौन सी जुबान है? तो कोई हैरत नहीं है कि 191 00:10:25,078 --> 00:10:31,919 तकरीबन 300 350 साल तक इस जुबान का नाम 192 00:10:28,720 --> 00:10:34,800 हिंदवी था। 193 00:10:31,919 --> 00:10:39,519 जमाने हिंदुस्तान जब यह दखन में गई तो उसे 194 00:10:34,799 --> 00:10:39,519 जुबाने हिंदुस्तान कहते थे। 195 00:10:41,078 --> 00:10:47,679 हिंदुस्तानी अब ये पैदा कहां हुई? पहली 196 00:10:44,559 --> 00:10:49,319 बार इसने जन्म कहां लिया? इस पे बहुत सारे 197 00:10:47,679 --> 00:10:53,199 क्लेम 198 00:10:49,320 --> 00:10:58,079 है। पंजाब से लेकर दकन तक क्लेममेंट्स 199 00:10:53,200 --> 00:11:02,240 मौजूद है। आपको एक किताब है महमूद शरानी 200 00:10:58,078 --> 00:11:04,759 या शामी या शेरी मुझे सरनेम उनका ठीक से 201 00:11:02,240 --> 00:11:08,000 याद नहीं। उर्दू इन 202 00:11:04,759 --> 00:11:09,519 पंजाब। उनका कहना है कि उर्दू पंजाब से ही 203 00:11:08,000 --> 00:11:13,278 शुरू हुई। 204 00:11:09,519 --> 00:11:16,399 इसलिए कि वहां जो बाहर के लोग आए तो सबसे 205 00:11:13,278 --> 00:11:20,399 पहले पंजाब में आए और वहां रहे और ठहरे और 206 00:11:16,399 --> 00:11:23,919 वहां से ट्रेड कर रहे थे और जो हरियाणा तो 207 00:11:20,399 --> 00:11:27,200 उस समय पंजाबी था तो वो जो हरियाणवी थी और 208 00:11:23,919 --> 00:11:31,199 जो पंजाबी थी वो मिलके एक जुबान धीरे-धीरे 209 00:11:27,200 --> 00:11:31,200 डेवलप हुई जो फिर नीचे ट्रिकल डाउन 210 00:11:31,240 --> 00:11:38,959 हुई जो यूपी वाला है वो तो कहता है भाई 211 00:11:35,440 --> 00:11:41,920 उन्होंने भी किताबें लिखी हुई है कि यह तो 212 00:11:38,958 --> 00:11:44,078 खड़ी बोली है जो हमारे वेस्टर्न यूपी में 213 00:11:41,919 --> 00:11:46,879 बोली जाती है। दिल्ली में बोली जाती है। 214 00:11:44,078 --> 00:11:49,359 उसी में अलग-अलग जबानों के शब्द आ गए हैं। 215 00:11:46,879 --> 00:11:52,000 लेकिन ग्रामर तो हमारी है खड़ी बोली की। 216 00:11:49,360 --> 00:11:55,440 तुम जा रहे हो मैं आ रहा हूं। खाना खाओगे, 217 00:11:52,000 --> 00:11:58,399 पानी पियोगे तो खड़ी बोली है। इसी में 218 00:11:55,440 --> 00:12:01,519 डिफरेंट लैंग्वेज के वर्ड जमा करके एक 219 00:11:58,399 --> 00:12:04,399 जबान बन गई नई। अवेलेबल स्क्रिप्ट उस 220 00:12:01,519 --> 00:12:08,159 जमाने में जैसे आज अंग्रेजी है। तो लिंगवा 221 00:12:04,399 --> 00:12:10,759 फ्रंका ऑफ़ द एलिट वाज़ फारसी हिंदुस्तान 222 00:12:08,159 --> 00:12:14,159 में कोई 7 800 साल 223 00:12:10,759 --> 00:12:16,799 तो ऑफिशियल लैंग्वेज कोर्ट लैंग्वेज ही 224 00:12:14,159 --> 00:12:19,278 पर्शियन रही है। उन लोगों की जिनकी मदद 225 00:12:16,799 --> 00:12:22,078 टंग परशियन नहीं थी। 226 00:12:19,278 --> 00:12:25,439 लेकिन वो पढ़े लिखे लोगों की जबान कहलाती 227 00:12:22,078 --> 00:12:29,199 थी। पूरे सेंट्रल एशिया में भी उसी को ये 228 00:12:25,440 --> 00:12:33,600 दर्जा हासिल था। तो वो स्क्रिप्ट अवेलेबल 229 00:12:29,200 --> 00:12:37,120 थी। तो ये डायलक्ट उसमें लिखा जाने लगा। 230 00:12:33,600 --> 00:12:39,680 यह कोई 13वीं सदी में शायद जाहिर एक दिन 231 00:12:37,120 --> 00:12:42,639 में तो नहीं हुआ होगा लेकिन जो ट्रेसेबल 232 00:12:39,679 --> 00:12:44,879 है जो हिस्ट्री में मेंशन होते हैं बहुत 233 00:12:42,639 --> 00:12:48,799 से लोग नहीं मेंशन होते वो अपना काम करके 234 00:12:44,879 --> 00:12:48,799 चले जाते हैं उनका कभी पता ही नहीं 235 00:12:48,839 --> 00:12:57,360 लगता वो हम अमीर खुसरो को कहते हैं कि भाई 236 00:12:53,519 --> 00:13:01,039 अमीर खुसरो जो पटियाली में पैदा हुए थे 237 00:12:57,360 --> 00:13:03,560 दिल्ली में रहते थे कोई आठ या नौ बादशाहों 238 00:13:01,039 --> 00:13:05,319 के साथ काम भी किया उन्होंने 239 00:13:03,559 --> 00:13:09,679 उन्होंने 240 00:13:05,320 --> 00:13:11,839 उन्होंने ये डायलग जो था लेके और ये डायलग 241 00:13:09,679 --> 00:13:14,239 जो आज हम उर्दू सुन रहे हैं वैसा नहीं था। 242 00:13:11,839 --> 00:13:17,360 ये तो वक्त के साथ पॉलिश होती रही बदलती 243 00:13:14,240 --> 00:13:20,240 रही। वरना आंखें तरसतीियां हैं। इस तरह की 244 00:13:17,360 --> 00:13:23,200 भी लैंग्वेज होती थी। ये कैसी बस्तियां 245 00:13:20,240 --> 00:13:26,759 हैं कि जिनको देखने को आंखें तरसियां हैं। 246 00:13:23,200 --> 00:13:33,120 तो ये सब चला गया धीरे-धीरे करके। 247 00:13:26,759 --> 00:13:36,720 वली मुझ मन मने आवे ख्याल ऐर तो यह मने 248 00:13:33,120 --> 00:13:39,679 में मने था पहले तो फिर वो में बना तो 249 00:13:36,720 --> 00:13:42,480 इसमें धीरे-धीरे इंप्रोवाइजेशन और उसको 250 00:13:39,679 --> 00:13:45,278 ज्यादा ज्यादा सफिसिकेट किया गया क्लीन 251 00:13:42,480 --> 00:13:48,759 किया गया लेकिन इसकी बिगिनिंग जो है वो 252 00:13:45,278 --> 00:13:52,480 हमें मिलती है खुसरो के 253 00:13:48,759 --> 00:13:56,399 यहां जो कि अच्छा वो भी समान देखिए क्या 254 00:13:52,480 --> 00:13:58,440 है कि सखी पिया की मैं क्या बताऊं ना आप 255 00:13:56,399 --> 00:14:01,278 आवे ना भेजे 256 00:13:58,440 --> 00:14:03,839 पतियां तो अच्छा फिर उसमें कहीं फारसी के 257 00:14:01,278 --> 00:14:07,120 लफ्ज़ भी आ जाते हैं। कहीं एक लाइन आधी 258 00:14:03,839 --> 00:14:09,560 फारसी में और आधी अवधि में तो धीरे-धीरे 259 00:14:07,120 --> 00:14:14,399 एक चीज फोकस में आ रही 260 00:14:09,559 --> 00:14:16,879 है। ये दौर गया उसके बाद एक अचानक हम 261 00:14:14,399 --> 00:14:18,759 देखते हैं कि यहां ये सब तो हो रहा है। 262 00:14:16,879 --> 00:14:22,240 लेकिन जो पहला 263 00:14:18,759 --> 00:14:27,759 साहिब अह दीवान जिसने पहला दीवान छपा 264 00:14:22,240 --> 00:14:32,198 उर्दू का पोएट्री का वो छपा दक्कन में तो 265 00:14:27,759 --> 00:14:35,360 ये दकन कैसे कूद-पांध के पहुंच 266 00:14:32,198 --> 00:14:38,799 गई। ये मुझे हमेशा डिस्टर्ब करता था। इसकी 267 00:14:35,360 --> 00:14:41,199 दो थ्यरीज है। मुझे दूसरी ज्यादा ठीक लगती 268 00:14:38,799 --> 00:14:42,719 है। हो सकता है उसमें मेरे यूपी वाले होने 269 00:14:41,198 --> 00:14:45,679 का कहा। 270 00:14:42,720 --> 00:14:48,800 कि एक तो उनका यह कहना है कि देखिए वो 271 00:14:45,679 --> 00:14:52,159 खड़ी बोली यहां तक आ गई थी लेकिन बाकी 272 00:14:48,799 --> 00:14:56,078 उर्दू खड़ी बोली बनी इसलिए कि हमारे तरफ 273 00:14:52,159 --> 00:14:58,719 भी दोनों तरफ वो है समंदर और हमारे पास भी 274 00:14:56,078 --> 00:15:01,039 सेलर्स आते थे हमारे यहां भी ट्रेड होती 275 00:14:58,720 --> 00:15:04,320 थी अरब्स भी आते थे टर्क भी आते थे 276 00:15:01,039 --> 00:15:09,759 ईरानियन भी आते थे और उनके शब्द धीरे-धीरे 277 00:15:04,320 --> 00:15:12,879 यहां आए और उसके बाद लोग भी आए और वो जबान 278 00:15:09,759 --> 00:15:15,838 धीरे-धीरे बनी हमने इसको बनाया 279 00:15:12,879 --> 00:15:19,198 दखनी उसके बाद बाकी लोगों ने सीखी ये तो 280 00:15:15,839 --> 00:15:22,240 सही है कि कुलू कुतब शाह जो थे वो पहले 281 00:15:19,198 --> 00:15:24,359 साहिब दीवान शायर उर्दू के थे। लेकिन 282 00:15:22,240 --> 00:15:29,759 हकीकत क्या है कि 283 00:15:24,360 --> 00:15:31,759 ये 13 सेंचुरी में अलाउद्दीन खिलजी जो था 284 00:15:29,759 --> 00:15:35,759 जिसे अभी एक फिल्म में भी दिखाया गया है। 285 00:15:31,759 --> 00:15:39,198 क्या नाम था उस फिल्म का? हां। अलाउद्दीन 286 00:15:35,759 --> 00:15:42,319 खिलजी रणवीर सिंह जैसा बिल्कुल नहीं था। 287 00:15:39,198 --> 00:15:44,039 वो काफी डिफरेंट था। कभी उसके बारे में 288 00:15:42,320 --> 00:15:47,120 बात 289 00:15:44,039 --> 00:15:50,120 करेंगे। उसने बहुत से ऐसे काम किए हैं जो 290 00:15:47,120 --> 00:15:53,720 दुनिया में पहली बार हुए हैं। हैरत 291 00:15:50,120 --> 00:15:57,000 तंगेज। तो ये पहला बादशाह था जो इतना डीप 292 00:15:53,720 --> 00:16:00,480 गया और इन्होंने मेरे ख्याल 293 00:15:57,000 --> 00:16:02,958 से 1303 या कुछ ऐसे ही था मुझे। आई एम 294 00:16:00,480 --> 00:16:04,959 वेरी बैड एट रिमेंबरिंग नंबर्स। मुझे तो 295 00:16:02,958 --> 00:16:07,838 अपना कार नंबर नहीं याद रहता। अब 296 00:16:04,958 --> 00:16:11,278 अलाउद्दीन कब गए थे ये कहां से याद होगा। 297 00:16:07,839 --> 00:16:13,880 लेकिन बहरहाल ये 14वीं सदी की बात है जब 298 00:16:11,278 --> 00:16:15,480 वो गए थे वहां 299 00:16:13,879 --> 00:16:19,759 ईवी 300 00:16:15,480 --> 00:16:23,039 तो वहां पर बहुत लोग रह गए उसी के एक 301 00:16:19,759 --> 00:16:25,278 अराउंड 50 इयर्स बाद फिर ये तो आ गए फिर 302 00:16:23,039 --> 00:16:29,439 वहां बहुत से लोग सेटल हो गए वहां जो इधर 303 00:16:25,278 --> 00:16:31,919 के थे फिर उसके बाद मोहम्मद बिन तुगलक के 304 00:16:29,440 --> 00:16:34,320 जमाने में वो दौलताबाद को पूरा दिल्ली 305 00:16:31,919 --> 00:16:37,360 लेके चले गए थे वो तो मालूम हुआ बाकी सब 306 00:16:34,320 --> 00:16:39,839 कुछ है पानी नहीं है तो एक से उनके जो 307 00:16:37,360 --> 00:16:41,959 फैसले हुआ करते थे तो फिर सब वापस आ गए। 308 00:16:39,839 --> 00:16:48,160 बहुत से लोग फिर भी रह 309 00:16:41,958 --> 00:16:52,439 गए। तो ये जो यहां गया था और जब ये तुगलक 310 00:16:48,159 --> 00:16:55,679 सरकार कमजोर पड़ी हुकूमत तो वहां 311 00:16:52,440 --> 00:16:58,480 बहमनी उन्होंने खुद मुख्तारी का ऐलान कर 312 00:16:55,679 --> 00:17:01,278 दिया। बहमनी नाम का एक जनरल था जो बादशाह 313 00:16:58,480 --> 00:17:04,000 बन गया और वो भी कुछ एक 50 साल के अंदर 314 00:17:01,278 --> 00:17:07,038 टूट गया और पांच डिफरेंट स्टेट्स बन गई 315 00:17:04,000 --> 00:17:08,279 जिनमें से दो थी गोलकंडा। 316 00:17:07,038 --> 00:17:12,000 और 317 00:17:08,279 --> 00:17:14,279 बीजापुर इन्होंने इस जबान को बहुत ज्यादा 318 00:17:12,000 --> 00:17:17,720 सवारा और आगे 319 00:17:14,279 --> 00:17:22,399 बढ़ाया कुली कुतुब शाह गोलकंडा का 320 00:17:17,720 --> 00:17:26,000 था और वही अब वो देखिए फिर वही जमाना पिया 321 00:17:22,400 --> 00:17:30,160 बाज प्याला पिया जाए ना पियाबाज यक पल 322 00:17:26,000 --> 00:17:32,319 जिया जाए ना अब ये ये ये अपने पालने में 323 00:17:30,160 --> 00:17:32,320 है 324 00:17:32,359 --> 00:17:42,798 उर्दू एक और था जो पैदा तो वहां हुआ था 325 00:17:38,440 --> 00:17:45,960 वली दक्कनी जिसे कहते हैं लेकिन उसका 326 00:17:42,798 --> 00:17:50,558 ज्यादातर जिंदगी गुजरात में 327 00:17:45,960 --> 00:17:53,759 गुजरी और वहीं गुजरात में वो मरा तो उसे 328 00:17:50,558 --> 00:17:58,079 वली गुजराती भी कहते हैं वो अली दनी भी 329 00:17:53,759 --> 00:18:03,359 कहते हैं। उसकी कब्र अहमदाबाद में थी। थी 330 00:17:58,079 --> 00:18:07,000 इसलिए कह रहा हूं कि वो 2002 में उसको 331 00:18:03,359 --> 00:18:10,159 तोड़ के वहां सड़क बना दी गई। 332 00:18:07,000 --> 00:18:12,798 आहिस्ताआहिस्ता पहली बार यह रदीफ उसी ने 333 00:18:10,160 --> 00:18:12,798 इस्तेमाल की 334 00:18:13,000 --> 00:18:21,359 थी। ये धीरे-धीरे धीरे-धीरे जो वली से एक 335 00:18:18,558 --> 00:18:23,678 दिल्ली भी वली आए और वली का एक बहुत बड़ा 336 00:18:21,359 --> 00:18:27,119 कंट्रीब्यूशन इसलिए कि पहले ये जो शायर थे 337 00:18:23,679 --> 00:18:29,919 वो बड़े-बड़े शायर हुए हैं। लेकिन उनका फोकस 338 00:18:27,119 --> 00:18:32,479 गज़ल पे नहीं था। 339 00:18:29,919 --> 00:18:35,440 यह वली का एक बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन है। 340 00:18:32,480 --> 00:18:38,759 इन अ वे ही यू कैन बी ही कैन बी कॉल्ड एस 341 00:18:35,440 --> 00:18:42,720 द फर्स्ट पोएट ऑफ गजल इन 342 00:18:38,759 --> 00:18:45,839 उर्दू। और उसके बाद गजल का एक रिवाज शुरू 343 00:18:42,720 --> 00:18:49,519 हुआ जो धीरे-धीरे बड़ा पॉपुलर हुआ। इससे 344 00:18:45,839 --> 00:18:51,639 पहले कि अभी ये सब हिस्ट्री में चले। गजल 345 00:18:49,519 --> 00:18:57,599 के बारे में कुछ बात करते 346 00:18:51,640 --> 00:18:59,240 हैं। गजल बड़ा पॉपुलर आज भी जॉन है। 347 00:18:57,599 --> 00:19:04,159 लेकिन ये है 348 00:18:59,240 --> 00:19:07,519 क्या? मुझे ऐसा ख्याल है कि काफी लोग ये 349 00:19:04,160 --> 00:19:10,640 बात नहीं जानते कि गज़ होती क्या है? इसलिए 350 00:19:07,519 --> 00:19:15,079 कि बहुत बार उन्होंने मेरी नज़्म को कहा सर 351 00:19:10,640 --> 00:19:18,480 वो जो आपकी गज़ल है ना वो गज़ल थी ही 352 00:19:15,079 --> 00:19:20,798 नहीं। गज़ल क्या चीज है? यह एक बड़ी 353 00:19:18,480 --> 00:19:23,279 इंटरेस्टिंग चीज है। यह स्टार्ट तो हुई है 354 00:19:20,798 --> 00:19:26,879 अरब से लेकिन जो हिंदुस्तान 355 00:19:23,279 --> 00:19:26,879 पहुंचतेपहुंचते तक बदल गई 356 00:19:27,400 --> 00:19:33,519 हो। शायरी में दुनिया की शायरी में हो 357 00:19:30,160 --> 00:19:35,320 चाहे अंग्रेजी शायरी हो संस्कृत हो, 358 00:19:33,519 --> 00:19:40,480 अरेबिक 359 00:19:35,319 --> 00:19:42,678 हो, फ्रेंच हो, इनमें रम होता है। काफिया 360 00:19:40,480 --> 00:19:45,759 जिसे हम कहते 361 00:19:42,679 --> 00:19:48,320 हैं। और अरेबिक पोएट्री में भी काफिया 362 00:19:45,759 --> 00:19:50,359 होता है। हमारे ट्रेडिशनल दो हैं। उनमें 363 00:19:48,319 --> 00:19:56,079 भी काफिया होता 364 00:19:50,359 --> 00:20:00,240 है कि रहीमन मुश्किल ला पड़ी टेढ़े दो काम 365 00:19:56,079 --> 00:20:03,759 सीधे से जग ना मिले उल्टे मिले ना राम तो 366 00:20:00,240 --> 00:20:06,880 अब काम और राम आपके पास हैं। अ स्टार बाय 367 00:20:03,759 --> 00:20:09,400 मौसी स्टोन हाफ हिडन फ्रॉम द आई फस द 368 00:20:06,880 --> 00:20:13,520 स्टार दैट ओनली वन इज़ शाइनिंग ऑन द 369 00:20:09,400 --> 00:20:17,480 स्काई स्काई एंड आई 370 00:20:13,519 --> 00:20:20,759 यही अरेबिक पोएट्री है। यही संस्कृत में 371 00:20:17,480 --> 00:20:24,120 है। एक चीज नई 372 00:20:20,759 --> 00:20:26,679 आई जो काफी है के बाद होती 373 00:20:24,119 --> 00:20:30,959 है। इसका नाम है 374 00:20:26,679 --> 00:20:33,759 रदीफ। ये अरब्स की नहीं है। ये कहीं 375 00:20:30,960 --> 00:20:38,279 परशिया में इन्वेंट हुई। उन्होंने बदल 376 00:20:33,759 --> 00:20:42,960 लेके उसको इसमें एक नई चीज डाली वक्त के 377 00:20:38,279 --> 00:20:46,798 साथ। दिल नाजा तुझे हुआ क्या है? आखिर इस 378 00:20:42,960 --> 00:20:50,919 दर्द की दवा क्या है? तो यह हुआ और दवा तो 379 00:20:46,798 --> 00:20:56,480 रम हो गया काफिया हो गया यह क्या है क्या 380 00:20:50,919 --> 00:21:03,038 है यह रदीफ है कोई उम्मीद बर नहीं आती कोई 381 00:20:56,480 --> 00:21:08,200 सूरत नजर नहीं आती तो दर दर ये तो काफिया 382 00:21:03,038 --> 00:21:12,558 हो गया नहीं आती क्या है ये रदीफ है 383 00:21:08,200 --> 00:21:14,640 ये हमने इन्हहेरिट किया वर्जन पोएट्री से 384 00:21:12,558 --> 00:21:17,599 आज हिंदुस्तान में पंजाबी में में भी 385 00:21:14,640 --> 00:21:21,360 शायरी होती है। गज़ लिखी जाती है। गुजराती 386 00:21:17,599 --> 00:21:23,519 में भी गज़ लिखी जाती है। मराठी में भी गज़ 387 00:21:21,359 --> 00:21:26,240 लिखी जाती है। उर्दू में तो लिखी जाती है। 388 00:21:23,519 --> 00:21:27,639 हिंदी में भी लिखी जाती है। और वो रदीफ 389 00:21:26,240 --> 00:21:33,440 इसमें होता 390 00:21:27,640 --> 00:21:37,360 है। कुछ भी कुछ उन भी राह आखियां सन कुछ 391 00:21:33,440 --> 00:21:42,558 गले गमादा तो थी। कुछ शहर लोग भी जालिम 392 00:21:37,359 --> 00:21:44,879 था। कुछ सर शौक भी थी। ये सी जो है ये 393 00:21:42,558 --> 00:21:47,759 रदीफ है। 394 00:21:44,880 --> 00:21:48,840 वरना शौक और टॉक पे खत्म हो जानी चाहिए 395 00:21:47,759 --> 00:21:53,599 बात। 396 00:21:48,839 --> 00:21:56,319 सी तो हर जुबान में यह जो हमारे यहां गज़ 397 00:21:53,599 --> 00:21:59,599 लिखी जाती है एक बात कि इसमें रदीफ भी 398 00:21:56,319 --> 00:22:03,599 होती है। हालांकि नहीं भी हो लेकिन तो कोई 399 00:21:59,599 --> 00:22:06,558 जेल नहीं भेजेगा लेकिन आमतौर से होती है। 400 00:22:03,599 --> 00:22:07,879 ऐसी भी गज़ें हैं जिनमें नहीं है। मगर वो 401 00:22:06,558 --> 00:22:11,798 बहुत कम होती 402 00:22:07,880 --> 00:22:15,280 है। और बड़े-बड़े शायरों ने ऐसी गज़ें लिखी 403 00:22:11,798 --> 00:22:19,599 हैं। जिसमें रदीफ नहीं है। जिगर का शेर है 404 00:22:15,279 --> 00:22:24,558 तेरा तसवुर शब हम शब खिलवते गम भी बस्म 405 00:22:19,599 --> 00:22:28,158 तरब तो शब तरब कोई रदीफ नहीं लेकिन आमतौर 406 00:22:24,558 --> 00:22:33,519 से नहीं होता 99 फीसदी गज़लों में आपको 407 00:22:28,159 --> 00:22:36,480 मिलेगी रदीफ ये तो एक बात हुई दूसरे इसमें 408 00:22:33,519 --> 00:22:40,359 एक और चीज है जो इसको बहुत यूनिक बनाती है 409 00:22:36,480 --> 00:22:44,240 इस फॉर्म को वो है कि 410 00:22:40,359 --> 00:22:46,798 गजल एक बिस्किट के डिब्बे जैसी है 411 00:22:44,240 --> 00:22:49,038 जिसके अंदर तरह-तरह के बिस्किट हैं। कुछ 412 00:22:46,798 --> 00:22:50,359 मीठे हैं, कुछ नमकीन है, कुछ क्रीम वाले 413 00:22:49,038 --> 00:22:54,558 हैं, 414 00:22:50,359 --> 00:22:57,439 कुछ सादे हैं। किसी में जैम लगा हुआ है, 415 00:22:54,558 --> 00:22:59,399 किसी में नहीं लगा है। अलग-अलग टेस्ट के 416 00:22:57,440 --> 00:23:04,120 बिस्किट है मगर एक डिब्बे में 417 00:22:59,400 --> 00:23:08,880 है। इसमें हर दो लाइनें अपने अंदर मुकम्मल 418 00:23:04,119 --> 00:23:11,759 है। उनका पहली दो लाइनों से या बाद की दो 419 00:23:08,880 --> 00:23:13,679 लाइनों से कोई संबंध, कोई ताल्लुक हो, कोई 420 00:23:11,759 --> 00:23:18,200 जरूरी नहीं। 421 00:23:13,679 --> 00:23:21,120 सो इट इज अ पैकेज ऑफ एक्टिक थॉट्स एंड 422 00:23:18,200 --> 00:23:23,159 स्टेटमेंट्स जो कुछ भी हो सकते हैं। तो 423 00:23:21,119 --> 00:23:28,479 व्हाट इज पुटिंग देम 424 00:23:23,159 --> 00:23:34,159 टुगेदर? दो चीजें हैं। एक बहर जिसे कहते 425 00:23:28,480 --> 00:23:37,200 हैं मीटर कि मीटर एक है। दूसरे रदीफ और 426 00:23:34,159 --> 00:23:39,559 काफिया। रदीफ तो सेम चलती रहेगी लेकिन 427 00:23:37,200 --> 00:23:44,960 काफिया बदलते रहेंगे। 428 00:23:39,558 --> 00:23:48,480 मीटर रम रदीफ यह एक होगा और हर दो लाइनें 429 00:23:44,960 --> 00:23:52,600 अपने अंदर कंप्लीट होंगी जिनका आगे पीछे 430 00:23:48,480 --> 00:23:55,720 से कोई वास्ता हो नहीं हो कोई फर्क नहीं 431 00:23:52,599 --> 00:23:58,480 पड़ता दैट मे गज़ल वेरी 432 00:23:55,720 --> 00:23:59,640 कोर्टेबल कि दो लाइन में आप पूरी बात कह 433 00:23:58,480 --> 00:24:02,798 देते 434 00:23:59,640 --> 00:24:05,919 हैं किसी ने सर्वे किया था हिंदुस्तान की 435 00:24:02,798 --> 00:24:08,639 पार्लियामेंट में जब बातचीत हुआ करती थी 436 00:24:05,919 --> 00:24:09,799 तो तो 437 00:24:08,640 --> 00:24:14,480 जो 438 00:24:09,798 --> 00:24:18,240 ज्यादातर ऑलमोस्ट अबव 90% जो पोएट्री कोट 439 00:24:14,480 --> 00:24:18,240 हुई है वो उर्दू गल की 440 00:24:19,000 --> 00:24:22,679 है। इसलिए कि दो लाइन में आप पूरी बात कह 441 00:24:21,759 --> 00:24:25,679 देते 442 00:24:22,679 --> 00:24:26,440 हैं। और उसके बाद अगली दूसरी लाइन में कुछ 443 00:24:25,679 --> 00:24:30,000 और 444 00:24:26,440 --> 00:24:32,720 होगा। मैं ऐसी मिसाल के तौर पर अपनी एक दो 445 00:24:30,000 --> 00:24:34,919 शेर बताता हूं जिसमें एक दूसरे से कोई 446 00:24:32,720 --> 00:24:38,640 ताल्लुक नहीं 447 00:24:34,919 --> 00:24:41,400 होगा। कल जहां दीवार थी 448 00:24:38,640 --> 00:24:47,120 है आज एक दर 449 00:24:41,400 --> 00:24:51,278 देखिए कल जहां दीवार थी है आज एक दर देखिए 450 00:24:47,119 --> 00:24:54,079 क्या समाई थी भला दीवाने के सर देखिए अब 451 00:24:51,278 --> 00:24:57,839 इसमें सेल सी बात ये है कि ये जो दर बना 452 00:24:54,079 --> 00:25:01,119 है ये दीवाने के सर से बना है। तो यहां 453 00:24:57,839 --> 00:25:03,639 अपने चुपके से सर का प्रेजेंस डाल दिया कि 454 00:25:01,119 --> 00:25:07,759 ये इसने सर मार मार के दीवार को दर कर 455 00:25:03,640 --> 00:25:11,278 दिया। अब अगला शेर क्या है? पुरसुकून लगती 456 00:25:07,759 --> 00:25:11,278 है कितनी झील के पानी पे 457 00:25:11,558 --> 00:25:16,038 बान पुरसुकून लगती है कितनी झील के पानी 458 00:25:14,960 --> 00:25:21,360 पे 459 00:25:16,038 --> 00:25:24,759 बैरों की बेताबियां पानी के अंदर देखिए 460 00:25:21,359 --> 00:25:28,678 तो देखिए देखिए है 461 00:25:24,759 --> 00:25:32,798 रदीफ सर दर 462 00:25:28,679 --> 00:25:33,559 अंदर काफिया चल रहा है लेकिन टॉपिक्स तो 463 00:25:32,798 --> 00:25:37,278 बिल्कुल 464 00:25:33,558 --> 00:25:40,960 अलग तो इस तरह आप कोई भी गज़ देखेंगे तो 465 00:25:37,278 --> 00:25:43,200 उसमें आमतौर से हो सकता है मूड एक हो 466 00:25:40,960 --> 00:25:44,960 लेकिन शेर अलग-अलग होंगे। उनका आपस में 467 00:25:43,200 --> 00:25:47,038 कोई वास्ता नहीं है और वास्ता ढूंढने की 468 00:25:44,960 --> 00:25:50,519 कोशिश करने से सिर्फ कंफ्यूजन होगा आपको। 469 00:25:47,038 --> 00:25:54,558 हर शेर को अपने अंदर एंजॉय कीजिए 470 00:25:50,519 --> 00:25:58,720 उसे। अब ये जो दौर आया था इन लोगों के बाद 471 00:25:54,558 --> 00:26:03,158 जब वली दनी ने और इस तरह के दूसरे शायरों 472 00:25:58,720 --> 00:26:07,798 ने गज़ल की तरफ भेजा उर्दू पोएट्री 473 00:26:03,159 --> 00:26:11,200 को। मैं उर्दू प्रोथ्स के बारे में 474 00:26:07,798 --> 00:26:15,278 बात करूंगा लेकिन इसलिए कि वह जरा बेचारी 475 00:26:11,200 --> 00:26:17,679 रनर अप है उर्दू लिटरेचर में वो भी 476 00:26:15,278 --> 00:26:21,440 इंपॉर्टेंट है और बहुत अच्छे काम हुए 477 00:26:17,679 --> 00:26:22,919 लेकिन फिर भी उर्दू इज़ अल्टीमेटली नोन बाय 478 00:26:21,440 --> 00:26:26,200 इट्स 479 00:26:22,919 --> 00:26:29,480 पोएट्री तो 480 00:26:26,200 --> 00:26:34,000 ये कौन सी होगी 481 00:26:29,480 --> 00:26:37,720 सदी 18वीं सदी 17वीं सदी जैसा या इसके बीच 482 00:26:34,000 --> 00:26:39,480 में कि जब दर्द 483 00:26:37,720 --> 00:26:45,120 जुर्रत 484 00:26:39,480 --> 00:26:48,319 मीर जिसको शहंशाह सुखन कहते हैं जिसको 485 00:26:45,119 --> 00:26:48,319 गालिब तक ने माना 486 00:26:48,359 --> 00:26:57,599 है और सौदा ऐसे बड़े शायर पैदा हुए। अच्छा 487 00:26:53,679 --> 00:27:01,360 इस बीच में यह मेरे ख्याल से यह बाद में 488 00:26:57,599 --> 00:27:04,319 हुआ है। 17वीं सदी में हुआ है। 18 सेंचुरी 489 00:27:01,359 --> 00:27:07,240 में एक शाह हातिम थे जिन्होंने उर्दू को 490 00:27:04,319 --> 00:27:10,158 एक नया नाम दिया। 491 00:27:07,240 --> 00:27:11,319 रेख्ता आजकल यहां तो बहुत सुनते हैं ना आप 492 00:27:10,159 --> 00:27:15,120 रेख्ता। बड़ा 493 00:27:11,319 --> 00:27:19,720 जबरदस्त यहां एक ऑर्गेनाइजेशन है और 494 00:27:15,119 --> 00:27:24,399 दुनिया की सबसे बड़ी जो उर्दू साइट 495 00:27:19,720 --> 00:27:28,600 है नेट पे वो रेख्ता है। संजीव सराफ की 496 00:27:24,400 --> 00:27:31,880 बनाई हुई। वी शुड बी वेरी प्राउड ऑफ 497 00:27:28,599 --> 00:27:34,879 दिस। तो रेख्ता का मतलब 498 00:27:31,880 --> 00:27:34,880 है 499 00:27:36,359 --> 00:27:42,879 अ जो उसको क्या बोलूं? दो पौधे मिला के जो 500 00:27:40,880 --> 00:27:44,840 बनाते हैं आप उसे क्या ब्रीडिंग क्या कहते 501 00:27:42,880 --> 00:27:47,960 हैं? 502 00:27:44,839 --> 00:27:51,599 हाइब्रिड। रेख्ता का मतलब है 503 00:27:47,960 --> 00:27:54,480 हाइब्रिड। बिकॉज़ ये जो जुबान है इसने इतनी 504 00:27:51,599 --> 00:27:57,359 जगहों से शब्द लिया वो खड़ी बोली की 505 00:27:54,480 --> 00:27:59,839 वोकैबलरी लेके इतनी जबानों के शब्द हैं 506 00:27:57,359 --> 00:28:01,398 इसमें कि इसे हाइब्रिड। उन्होंने कहा कि 507 00:27:59,839 --> 00:28:05,199 ये तो हाइब्रिड 508 00:28:01,398 --> 00:28:07,439 है। तो ये रेख्ता नाम पड़ा जिसको उसके 100 509 00:28:05,200 --> 00:28:10,640 150 साल बाद गालिब ने ये वर्ड इस्तेमाल 510 00:28:07,440 --> 00:28:12,600 किया है। मीर के बारे में रेख्ता के तुम 511 00:28:10,640 --> 00:28:15,919 ही उस्ताद नहीं हो 512 00:28:12,599 --> 00:28:18,480 गालिब। कहते हैं अगले जमाने में कोई मीर 513 00:28:15,919 --> 00:28:21,919 भी था। 514 00:28:18,480 --> 00:28:24,079 और मीर था। मीर के जमाने में एक और भी 515 00:28:21,919 --> 00:28:27,440 शायर थे जिनका इतना नाम आपने नहीं सुना 516 00:28:24,079 --> 00:28:29,839 होगा। मगर वह उस वक्त बड़े शायर थे कायम। 517 00:28:27,440 --> 00:28:32,480 वो दिल्ली के नहीं थे तो शायद इस वजह से 518 00:28:29,839 --> 00:28:32,480 नाम नहीं हुआ 519 00:28:33,640 --> 00:28:38,000 इतना नहीं मेरा ये मतलब नहीं 520 00:28:39,240 --> 00:28:45,480 था एक बात जिस पे मैं क्योंकि मेरी मदद 521 00:28:43,200 --> 00:28:48,159 टंग उर्दू 522 00:28:45,480 --> 00:28:51,360 है हालांकि इसमें भी एक झंझट है वो 523 00:28:48,159 --> 00:28:54,960 बताऊंगा भी आपको मैं बहुत फक्र करता हूं 524 00:28:51,359 --> 00:28:57,038 कि दुनिया की जितनी ज़बाने हैं जब उसमें 525 00:28:54,960 --> 00:29:01,440 पोएट्री शुरू हुई उनकी हिस्ट्री में आप 526 00:28:57,038 --> 00:29:02,679 जाइए तो वो शुरू हुई हिम से चर्च में 527 00:29:01,440 --> 00:29:06,558 टेंपल 528 00:29:02,679 --> 00:29:08,278 में इन प्रेज़ ऑफ़ द डेटीज और गॉड द सुपर 529 00:29:06,558 --> 00:29:11,158 पावर और 530 00:29:08,278 --> 00:29:15,359 व्हाटएवर एंड धीरे-धीरे 531 00:29:11,159 --> 00:29:17,720 ट्रांसेंडेंट एंड वेंट टू अदर एवेन्यूस मे 532 00:29:15,359 --> 00:29:20,959 बी लव 533 00:29:17,720 --> 00:29:23,278 रोमांस सेंस ऑफ़ लोनली एंड सो ऑन वो बीबी 534 00:29:20,960 --> 00:29:25,919 फर्स्ट पर्सन सेकंड पर्सन तक रहा और बहुत 535 00:29:23,278 --> 00:29:26,759 दिनों बाद फिर वो जाके उसमें सोशल इशूज़ 536 00:29:25,919 --> 00:29:30,759 आए। 537 00:29:26,759 --> 00:29:34,759 है उर्दू इज वन लैंग्वेज इन द 538 00:29:30,759 --> 00:29:38,359 वर्ल्ड जो पहले दिन से इरिलजस और सेकुलर 539 00:29:34,759 --> 00:29:41,519 थी। पहले दिन 540 00:29:38,359 --> 00:29:44,959 से ये कायम अमीर जिनका मैं जिक्र कर रहा 541 00:29:41,519 --> 00:29:46,879 हूं। इनके शेर आप सुनेंगे तो हैरान होंगे। 542 00:29:44,960 --> 00:29:49,840 आज पता नहीं किसी शायर की हिम्मत होगी 543 00:29:46,880 --> 00:29:51,000 स्टेज पे थे शेर पढ़ने की कि नहीं। जो उस 544 00:29:49,839 --> 00:29:54,519 जमाने में 545 00:29:51,000 --> 00:29:59,278 लिखे 18 सेंचुरी 546 00:29:54,519 --> 00:30:03,119 में कायम का शेर है। काबा जो ढह गया है तो 547 00:29:59,278 --> 00:30:05,919 क्या जाए गम है शेर। अगर काबा टूट गया है, 548 00:30:03,119 --> 00:30:06,759 डिमोलिश हो गया है तो इसमें कौन से गम की 549 00:30:05,919 --> 00:30:10,399 बात 550 00:30:06,759 --> 00:30:14,079 है? कुछ कसरे दिल नहीं, कोई दिल का महल 551 00:30:10,398 --> 00:30:14,079 नहीं है जो बनाया ना 552 00:30:15,480 --> 00:30:21,079 जाए। मीर कैसा 553 00:30:17,880 --> 00:30:25,360 है? निजात मतलब 554 00:30:21,079 --> 00:30:29,278 मोक्ष। जाए है जी निजात के गम में। 555 00:30:25,359 --> 00:30:29,278 ऐसी जन्नत गई जहन्नुम 556 00:30:29,798 --> 00:30:39,918 में। मीर के दीनों मजहब का क्या पूछते हो 557 00:30:34,960 --> 00:30:43,480 कि उन्होंने तो कशका खींचा दैर मंदिर दैर 558 00:30:39,919 --> 00:30:47,440 में बैठा कबका करके इस्लाम 559 00:30:43,480 --> 00:30:50,558 किया। ये ऐसी पोएट्री और एक ये तो मैं एक 560 00:30:47,440 --> 00:30:55,159 दो सुना रहा हूं आपको। यानी इसी पे अकेले 561 00:30:50,558 --> 00:30:59,240 एक पूरा शाम गुजारी जा सकती है। एक एंटी 562 00:30:55,159 --> 00:31:02,960 फंडामेंटलिज्म एंटीजिस्ट 563 00:30:59,240 --> 00:31:06,079 रिलॉजिसिटी एक हर जगह एक रिवोल्ट और एक 564 00:31:02,960 --> 00:31:09,278 फॉरवर्ड लुकिंग एटीट्यूड दिखता है उर्दू 565 00:31:06,079 --> 00:31:12,720 पोएट्री में। परहप्स वि द एक्सेप्शन ऑफ़ 566 00:31:09,278 --> 00:31:14,798 वन। आई एम वेरी एम्बरेस्ड अबाउट दैट। वो 567 00:31:12,720 --> 00:31:15,640 बड़ी इज्जत होती है उनके अखबार की। मैं तो 568 00:31:14,798 --> 00:31:19,200 नहीं 569 00:31:15,640 --> 00:31:22,520 करता। तो 570 00:31:19,200 --> 00:31:25,120 हर स्टेज पे हुआ। 571 00:31:22,519 --> 00:31:26,879 गालिब मुझे याद है एक गालिब के बारे में 572 00:31:25,119 --> 00:31:29,239 आपको एक बात बता लेकिन उससे पहले मैं बता 573 00:31:26,880 --> 00:31:32,159 दूं कि मेरे क्रेडेंशियल भी इधर डाउटफुल 574 00:31:29,240 --> 00:31:33,759 है। हुआ ये कि एक बहुत बड़े उर्दू के शायर 575 00:31:32,159 --> 00:31:36,159 थे वो दुनिया में नहीं रहे तो उनका नाम 576 00:31:33,759 --> 00:31:38,240 लेना मुनासिब नहीं है। मैंने उनसे कहा 577 00:31:36,159 --> 00:31:39,919 किसी बात पे बहस हो रही थी जुबान पे। तो 578 00:31:38,240 --> 00:31:41,919 मैंने उनसे कहा माफ़ कीजिएगा आपको वो जो 579 00:31:39,919 --> 00:31:45,679 मिश्रा है वो जबान के हिसाब से सही नहीं 580 00:31:41,919 --> 00:31:48,159 है। गलती है उसमें। कह आप मुझे गलती बता 581 00:31:45,679 --> 00:31:49,759 रहे हैं। आप कैसे बता सकते हैं? आप जहां 582 00:31:48,159 --> 00:31:53,120 के हैं वहां के लोगों को मैं अहले जबान 583 00:31:49,759 --> 00:31:55,440 नहीं मानता हूं। लिंग्विस्ट तो मैंने कहा 584 00:31:53,119 --> 00:31:57,918 इसे कहां मालूम होगा? मैं तो लखनऊ में पला 585 00:31:55,440 --> 00:32:00,679 पढ़ा हूं सारी जिंदगी। तो कह मैंने कहा 586 00:31:57,919 --> 00:32:03,278 मैं कहां का हूं? कहने आप ग्वालियर के 587 00:32:00,679 --> 00:32:05,759 हैं। ये तो सच है कि मैं ग्वालियर में ही 588 00:32:03,278 --> 00:32:07,679 पैदा हुआ था। लेकिन दो-चार महीने का था तो 589 00:32:05,759 --> 00:32:10,480 चला आया। 590 00:32:07,679 --> 00:32:12,720 तो मैंने कहा अच्छा हुजूर एक बात बताएं कि 591 00:32:10,480 --> 00:32:14,960 बिल्लियों की बहुत आदत होती है अक्सर जाके 592 00:32:12,720 --> 00:32:16,679 ओवन में बच्चे दे देती हैं तो उन बच्चों 593 00:32:14,960 --> 00:32:19,360 को आप बिस्किट कहते हैं 594 00:32:16,679 --> 00:32:21,600 क्या तो 595 00:32:19,359 --> 00:32:25,359 भाई कहां पैदा हुए इससे क्या मतलब है कहां 596 00:32:21,599 --> 00:32:25,359 पले पड़े वो देखो 597 00:32:27,159 --> 00:32:34,159 हैं तो अब ये देखिए जहां गालिब है एक मेरी 598 00:32:31,278 --> 00:32:36,319 बहस हो गई थी एक आज वो दुनिया में नहीं है 599 00:32:34,159 --> 00:32:37,080 मनीक कॉल बहुत अच्छा फिल्म बड़ा फिल्म 600 00:32:36,319 --> 00:32:42,319 मेकर 601 00:32:37,079 --> 00:32:44,398 था। वो अलग तरह की फिल्में बनाते थे और हम 602 00:32:42,319 --> 00:32:47,359 लोग तो मेन स्ट्रीम कमर्शियल सिनेमा में 603 00:32:44,398 --> 00:32:50,558 थे। ही यूज्ड टू मेक टोटली एक्सपेरिमेंटल 604 00:32:47,359 --> 00:32:52,719 अनकन्वेंशनल फिल्म्स। और उस जमाने में 605 00:32:50,558 --> 00:32:56,000 मैंने उसकी वो इज्जत नहीं की जो अब करता 606 00:32:52,720 --> 00:32:57,919 हूं। उसने एक पिक्चर वाली थी उसकी रोटी। 607 00:32:56,000 --> 00:33:00,159 तो मुझे किसी ने पूछा वो मनी कॉल की 608 00:32:57,919 --> 00:33:03,278 पिक्चर देखी उसकी रोटी। मैंने कहा नहीं 609 00:33:00,159 --> 00:33:06,320 मैं तो अपनी रोटी देख रहा हूं। 610 00:33:03,278 --> 00:33:09,038 तो वो अलग बात है। लेकिन अब ख्याल होता है 611 00:33:06,319 --> 00:33:11,759 कि वाकई कितने अच्छे-अच्छे काम किए उसने। 612 00:33:09,038 --> 00:33:14,440 एक जगह हम दोनों बैठे थे उस जमाने में मैं 613 00:33:11,759 --> 00:33:19,278 भी शराब पीता था। 614 00:33:14,440 --> 00:33:23,080 तो बहस हो गई हमारी गालिब पे। और वो ये कह 615 00:33:19,278 --> 00:33:25,599 रहे थे कि गालिब वाज़ पॉसिबल ओनली इन 616 00:33:23,079 --> 00:33:27,519 इंडिया। और मैं उनसे कह रहा था कि भ एक 617 00:33:25,599 --> 00:33:30,798 जीनियस था। वो कहीं भी पैदा होता जीनियस 618 00:33:27,519 --> 00:33:32,798 ही होता। बट ही वाज़ राइट एंड आई वाज़ रोंग। 619 00:33:30,798 --> 00:33:34,319 मैंने अभी एक किताब रिसेंटली की है। उसमें 620 00:33:32,798 --> 00:33:36,079 मैंने इस किस्से का जिक्र किया। मैंने कहा 621 00:33:34,319 --> 00:33:38,200 आई विश यू वुड हैव बीन अ गालिब तो मैं 622 00:33:36,079 --> 00:33:42,480 जाके उसे अपोलजाइज 623 00:33:38,200 --> 00:33:45,440 करता। गालिब को आप अगर सीरियसली पढ़िए तो 624 00:33:42,480 --> 00:33:48,079 आपकी समझ में आता है कि ये तो हिंदुस्तान 625 00:33:45,440 --> 00:33:51,440 के अलावा कहीं हो नहीं सकता था। 626 00:33:48,079 --> 00:33:55,439 देखिए सिमिटिक रिलीजंस में क्रिएशन और 627 00:33:51,440 --> 00:33:58,080 क्रिएटर अलग है। क्रिएटर जो है वह पैदा भी 628 00:33:55,440 --> 00:34:00,640 करता है। फिर कास्टेंटली एक आप पे वॉच 629 00:33:58,079 --> 00:34:02,879 रखता है। फिर आपने कोई भी गलती की तो एक 630 00:34:00,640 --> 00:34:05,519 दिन वो फिर हिसाब लेता है आपसे। पूछता है 631 00:34:02,880 --> 00:34:07,919 भाई तुम उस दिन वहां कैसे चले गए थे? ये 632 00:34:05,519 --> 00:34:12,320 तुमने क्या किया? वगैरह-वगैरह उसके हिसाब 633 00:34:07,919 --> 00:34:16,800 से फिर आपको जन्नत या दो भेजता है। वाइल 634 00:34:12,320 --> 00:34:18,119 इन वैदिक कासेप्ट फिलॉसफी क्रिएटर और 635 00:34:16,800 --> 00:34:21,159 क्रिएशन 636 00:34:18,119 --> 00:34:24,480 दो आइडेंटिटीज नहीं 637 00:34:21,159 --> 00:34:26,960 है। वो सब एक है। मैं डॉक्टर साहब के 638 00:34:24,480 --> 00:34:29,599 सामने बोल रहा हूं। मेरी हिम्मत देखिए आप 639 00:34:26,960 --> 00:34:32,079 कि ये बैठे हैं और मैं वेदांत के बारे में 640 00:34:29,599 --> 00:34:33,559 बात कर रहा हूं। लेकिन आजकल ऐसे गलत काम 641 00:34:32,079 --> 00:34:36,639 बहुत होते हैं। एक और 642 00:34:33,559 --> 00:34:38,320 सही। तो 643 00:34:36,639 --> 00:34:41,399 बहुत से लोग जिन्हें नहीं बोलना चाहिए 644 00:34:38,320 --> 00:34:45,599 बोलते हैं। 645 00:34:41,398 --> 00:34:49,039 तो वो कांसेप्ट अलग है। वो आप 646 00:34:45,599 --> 00:34:52,639 मैनिफेस्टेशन उसी सुप्रीम पावर के हैं। 647 00:34:49,039 --> 00:34:57,039 एंड द मोमेंट यू विल गेट बैक दैट पोरिटी। 648 00:34:52,639 --> 00:34:59,240 यू विल गो एंड असिमिलेट इंटू इट। तो ये एक 649 00:34:57,039 --> 00:35:02,800 अलग तजिया मास्टर 650 00:34:59,239 --> 00:35:05,519 और पीपल और मे बी स्लेव का कांसेप्ट नहीं 651 00:35:02,800 --> 00:35:09,119 है। 652 00:35:05,519 --> 00:35:13,679 ना था कुछ तो खुदा था। कुछ ना होता तो 653 00:35:09,119 --> 00:35:15,240 खुदा होता। डुबोया मुझको होने ने ना मैं 654 00:35:13,679 --> 00:35:18,159 होता तो क्या 655 00:35:15,239 --> 00:35:20,479 होता। अब ये तो हिंदुस्तान में ही लिख 656 00:35:18,159 --> 00:35:20,480 सकता है 657 00:35:20,679 --> 00:35:28,440 आदमी। जला है जिस्म जहां दिल भी जल गया 658 00:35:24,760 --> 00:35:32,160 होगा। कुरेदते हो जो अब राग जो सुजू क्या 659 00:35:28,440 --> 00:35:36,280 है? यह जिस्म कहां जलता है? यह राख कहां 660 00:35:32,159 --> 00:35:41,159 कुरेदी जाती है? कजाकिस्तान में, ईरान 661 00:35:36,280 --> 00:35:44,800 में, इजिप्ट में, इराक में, 662 00:35:41,159 --> 00:35:48,639 कहां? ये तो ये दो मिसाले मैं यहां दे रहा 663 00:35:44,800 --> 00:35:53,200 हूं। आप कदम कदम पे आप देखेंगे कि उसका जो 664 00:35:48,639 --> 00:35:56,239 बेसिक अंडरस्टैंडिंग है वो एक अजीब तरह का 665 00:35:53,199 --> 00:35:58,879 सिंथेसिस है जो परशियन लिटरेचर की 666 00:35:56,239 --> 00:36:02,000 स्टेटिक्स हैं जो उसकी नफासतें हैं 667 00:35:58,880 --> 00:36:06,000 नजाकतें हैं वो और जो गहराई और जो डेप्थ 668 00:36:02,000 --> 00:36:11,039 है वेदांत की वो उसकी शायरी में मौजूद है। 669 00:36:06,000 --> 00:36:13,679 तो उसने दोनों तरफ से फॉर्म और कंटेंट का 670 00:36:11,039 --> 00:36:15,440 एक ऐसा कॉम्बिनेशन बनाया ही वास द फर्स्ट 671 00:36:13,679 --> 00:36:19,118 पोएट जिसने 672 00:36:15,440 --> 00:36:22,720 थॉट दिए है। इमोशनल रिएक्शनंस मिले हैं 673 00:36:19,119 --> 00:36:26,559 बहुत लेकिन उर्दू पोएट्री में और शायद 674 00:36:22,719 --> 00:36:30,039 किसी भी पोएट्री में। म इतनी डीप थॉट जो 675 00:36:26,559 --> 00:36:34,719 उसके शेरों में मिलती है और दो लाइन 676 00:36:30,039 --> 00:36:37,279 में वो वो दैट इज व्हाई पवन जी ने लिखा है 677 00:36:34,719 --> 00:36:39,519 और मैं बिल्कुल इन ऑल ह्यूमिलिटी एक्सेप्ट 678 00:36:37,280 --> 00:36:41,839 करता हूं कि मैं इनसे आधा भी गालिब के 679 00:36:39,519 --> 00:36:45,159 बारे में नहीं जानता हूं। इन्होंने जो कहा 680 00:36:41,838 --> 00:36:48,239 है लिखा है तो मैं बिलीव करूंगा। कि 681 00:36:45,159 --> 00:36:51,679 गालिब वाज़ द ग्रेटेस्ट पोएट ऑफ द वर्ल्ड 682 00:36:48,239 --> 00:36:55,199 इन 19 सेंचुरी। जो 19 सेंचुरी के जो शायर 683 00:36:51,679 --> 00:36:57,519 थे ये नहीं सामने ऑल द टाइम उससे पहले 684 00:36:55,199 --> 00:37:00,960 बड़े-बड़े उस्ताद पैदा हुए हैं भाई। लेकिन 685 00:36:57,519 --> 00:37:04,199 ये कि 19 सेंचुरी का वो सबसे बड़ा दुनिया 686 00:37:00,960 --> 00:37:06,800 का बड़ा शायर था। 687 00:37:04,199 --> 00:37:10,159 अनबिलीवेबल। उसकी दो-दो लाइनों में जो 688 00:37:06,800 --> 00:37:12,480 बातें हैं कि देखिए बड़ी वो उस जमाने में 689 00:37:10,159 --> 00:37:14,960 अब तो छोड़िए। उस जमाने में भी उसकी 690 00:37:12,480 --> 00:37:18,960 लैंग्वेज जो है डिफिकल्ट मानी जाती थी और 691 00:37:14,960 --> 00:37:21,838 बहुत ही मतलब डेंस मानते थे वो लोग बड़ा 692 00:37:18,960 --> 00:37:25,599 इरिटेट होते थे उसकी बहुत बुराई होती थी 693 00:37:21,838 --> 00:37:28,719 गालिब की तो तंग आके उसने शेर कहा था कि 694 00:37:25,599 --> 00:37:32,359 ना सताइश की तमन्ना ना सिले की परवाह अगर 695 00:37:28,719 --> 00:37:34,838 नहीं है मेरे अशार में माने ना 696 00:37:32,358 --> 00:37:37,000 सही शेर देखिए 697 00:37:34,838 --> 00:37:42,639 उसका हूं 698 00:37:37,000 --> 00:37:42,639 गर्मी तसवुर फरदा से नगमा 699 00:37:43,320 --> 00:37:53,280 मसंज मैं अंधली पे गुलशन ना अफरीदा हूं। 700 00:37:48,960 --> 00:37:56,039 मैं तो कल जो गुलशन बनने वाला है उसके 701 00:37:53,280 --> 00:37:57,800 इमेजिनेशन से गा रहा हूं। मैं वो बर्ड 702 00:37:56,039 --> 00:38:02,480 हूं। मैं 703 00:37:57,800 --> 00:38:05,320 वो कोयल हूं जो इमेजिनेशन से इतना 704 00:38:02,480 --> 00:38:09,119 एक्साइटमेंट है उसे कि कल का गुलशन कैसा 705 00:38:05,320 --> 00:38:12,079 होगा। उसको याद करके गा रहा हूं। मैं एक 706 00:38:09,119 --> 00:38:16,800 ऐसे गार्डन का बुलबुल हूं। आई एम अ लार्क 707 00:38:12,079 --> 00:38:16,800 ऑफ अ गार्डन दैट इज येट टू बी 708 00:38:18,599 --> 00:38:25,920 मेड। अब देखिए कहां है कि ईमां मुझे खींचे 709 00:38:22,639 --> 00:38:27,000 हैं तो ईचा ईमा मुझे रोके हैं तो खींचे 710 00:38:25,920 --> 00:38:31,920 हैं मुझे 711 00:38:27,000 --> 00:38:34,719 कुफ्र। काबा मेरे पीछे है कलीसा मेरे आगे। 712 00:38:31,920 --> 00:38:34,720 यह सिंबल्स 713 00:38:35,719 --> 00:38:41,679 हैं। आइए सर आइए जाइए इधर ही किस्सा खत्म 714 00:38:39,358 --> 00:38:43,559 हो। पार्टनरशिप में मैंने बहुत दिनों काम 715 00:38:41,679 --> 00:38:48,118 किया 716 00:38:43,559 --> 00:38:48,119 है। ऐसी क्या बात? 717 00:38:50,639 --> 00:38:58,879 ये जो गहराई है यह उसके यहां मिलती है कि 718 00:38:55,760 --> 00:39:02,800 वो कह रहा है देखिए सिंबल्स है और गजल में 719 00:38:58,880 --> 00:39:05,280 सिंबल ही होते हैं इसलिए कि यहां काबा जो 720 00:39:02,800 --> 00:39:09,440 है वो उस चौकोर डब्बे का नाम नहीं है जो 721 00:39:05,280 --> 00:39:13,519 काले कपड़े में होता है। ये काबा जो है वो 722 00:39:09,440 --> 00:39:16,559 ट्रेडिशनल ट्रेडिशन का और कंजर्वेटिव 723 00:39:13,519 --> 00:39:19,679 थॉट्स का और बिलीफ का सिंबल बनता है। 724 00:39:16,559 --> 00:39:22,320 कलीसा इज नॉट द चर्च। इट हैज़ नथिंग टू डू 725 00:39:19,679 --> 00:39:27,480 दिस कलीसा हैज़ नथिंग टू डू क्रिश्चियनिटी 726 00:39:22,320 --> 00:39:31,200 बट द यूरोपियन नॉलेज। बट द 727 00:39:27,480 --> 00:39:35,280 मॉडर्निज़्म। कि मुझे ये रोक रहा है और वो 728 00:39:31,199 --> 00:39:37,439 मुझे खींच रहा है। ये मेरे पीछे है कलीसा 729 00:39:35,280 --> 00:39:41,200 मेरे आगे। 730 00:39:37,440 --> 00:39:43,599 तो उसकी ये सिंबल्स है। अच्छा वजह क्या है 731 00:39:41,199 --> 00:39:47,199 कि जैसा कि मैंने आपसे अर्ज किया था कि दो 732 00:39:43,599 --> 00:39:50,640 मिनट में दो लाइनों में पूरी बात कहनी है। 733 00:39:47,199 --> 00:39:53,759 तो दो लाइनों में जब बात कहनी हो तो यू 734 00:39:50,639 --> 00:39:56,319 नीड सिंबल्स कि भाई मैं ये वर्ड इस्तेमाल 735 00:39:53,760 --> 00:39:59,839 करूं तो समझ जाना कि इसके क्या मतलब है। 736 00:39:56,320 --> 00:40:02,559 और पूरी उसकी डिटेल समझ जाना। हम लोग आपस 737 00:39:59,838 --> 00:40:04,799 में भी जब धीरे-धीरे बहुत क्लोज होते हैं 738 00:40:02,559 --> 00:40:06,880 एक दूसरे से तो कुछ सिंबल्स बना लेते हैं 739 00:40:04,800 --> 00:40:09,359 लैंग्वेज में कि चार आदमी हो उनके सामने 740 00:40:06,880 --> 00:40:11,400 भी आप कह दे तो किसी की समझ में ना आए 741 00:40:09,358 --> 00:40:14,960 मेटाफर में बात कर 742 00:40:11,400 --> 00:40:17,800 ली अब मिसाल के तौर पे आमतौर से लोग का ये 743 00:40:14,960 --> 00:40:21,760 ख्याल है अरे साहब वो क्या है वो शराब 744 00:40:17,800 --> 00:40:25,599 मैखाना और साखी ये सब होता है उसमें उर्दू 745 00:40:21,760 --> 00:40:25,599 पोएट्री में यही सब है शराब 746 00:40:26,280 --> 00:40:34,240 का ये जो गज़ सिंगर हैं। इनको छोड़ दीजिए। 747 00:40:30,960 --> 00:40:36,720 इन्होंने गजल की बड़ी ऐसी की तैसी की है। 748 00:40:34,239 --> 00:40:38,879 तो उन्होंने तो वाकई शराब को शराबी गाया 749 00:40:36,719 --> 00:40:43,679 है। और महखाने को महखाना ही गाया है। 750 00:40:38,880 --> 00:40:46,880 इसलिए कि बहुत ही बेचारे क्या कहूं मजबूर 751 00:40:43,679 --> 00:40:49,919 से शायरों का लिखा हुआ है। लेकिन जो रियल 752 00:40:46,880 --> 00:40:52,720 पोएट्री है उसमें शराब का मतलब कभी शराब 753 00:40:49,920 --> 00:40:56,159 नहीं है। उसमें महखाने का मतलब महखाना 754 00:40:52,719 --> 00:40:58,959 नहीं है। उसमें हरम तो कहते मस्जिद को 755 00:40:56,159 --> 00:41:04,399 मस्जिद नहीं है। 756 00:40:58,960 --> 00:41:08,119 ये अलग है। ये या दर मंदिर नहीं है। यह 757 00:41:04,400 --> 00:41:12,559 सिंबल्स है। या 758 00:41:08,119 --> 00:41:14,880 जो आशिक है वो सिर्फ आशिक नहीं है। ये 759 00:41:12,559 --> 00:41:16,559 सिंबल्स यूज़ करते हैं ताकि आप एक बात कहीं 760 00:41:14,880 --> 00:41:18,680 समझ में आ। मिसाल के तौर पे मैं एक शेर 761 00:41:16,559 --> 00:41:22,719 सुनाता 762 00:41:18,679 --> 00:41:26,000 हूं। जिन्हें प्यास है उन्हें कम से कम। 763 00:41:22,719 --> 00:41:29,039 जिन्हें प्यास कम उन्हें दम बदम। 764 00:41:26,000 --> 00:41:32,079 जिन्हें प्यास है उन्हें कम से कम जिन्हें 765 00:41:29,039 --> 00:41:36,079 प्यास कम उन्हें दम बदम मेरे साखिया तेरे 766 00:41:32,079 --> 00:41:40,359 महकदे का निजाम है कि मजाक है क्या बात है 767 00:41:36,079 --> 00:41:40,359 ये क्या शराब के बारे में है 768 00:41:40,719 --> 00:41:49,358 ये एक अनफेयर इकोनॉमिक सिस्टम पे 769 00:41:44,838 --> 00:41:52,480 है या मीर के आपको जो शेर मिलते हैं वो 770 00:41:49,358 --> 00:41:52,480 क्या दिल के बारे में 771 00:41:53,239 --> 00:42:00,159 है ये वो जमाना था। जब अब्दाली के हमले 772 00:41:57,119 --> 00:42:02,800 हुए हैं। उसने लुटते हुए दिल्ली को देखा। 773 00:42:00,159 --> 00:42:06,000 बर्बाद होते देखा। एक ऐसा वक्त आया कि उसे 774 00:42:02,800 --> 00:42:08,480 माइग्रेट करना पड़ा। वो लखनऊ चला गया। 775 00:42:06,000 --> 00:42:11,358 सौदा जो दूसरा बड़ा शायर था वो भी लखनऊ 776 00:42:08,480 --> 00:42:13,838 चला गया। होता क्या है कि इनकी रोजी 777 00:42:11,358 --> 00:42:15,759 रोटियां जो है चलती हैं। जागीर चलती थी। 778 00:42:13,838 --> 00:42:18,559 जागीरदारों, जमींदारों, राजाओं, 779 00:42:15,760 --> 00:42:20,960 महाराजाओं, नवाबों बादशाहों से। जब वही 780 00:42:18,559 --> 00:42:23,599 बर्बाद हो जाए तो इनकी तो रोजी रोटी अवस 781 00:42:20,960 --> 00:42:26,079 फिर भी उस वक्त बेहतर हालत में था। एंड इट 782 00:42:23,599 --> 00:42:28,079 वास इमर्जिंग एट अ रिच स्टेट। तो ये सब 783 00:42:26,079 --> 00:42:31,200 धीरे-धीरे करके वहां शिफ्ट हो रहे थे। 784 00:42:28,079 --> 00:42:32,760 इसलिए यहां तो सब लुट गया था दिल्ली में। 785 00:42:31,199 --> 00:42:37,000 अब उसके शेर 786 00:42:32,760 --> 00:42:40,240 देखिए। ये क्या उसके दिल के बारे में 787 00:42:37,000 --> 00:42:46,199 है? दिल की बर्बादी का क्या मशकूर हूं। 788 00:42:40,239 --> 00:42:50,879 क्या बयान करूं? ये नगर 100 मर्तबा लुटा 789 00:42:46,199 --> 00:42:53,358 गया। दिल की आबादी की इस हद है खराबी कि 790 00:42:50,880 --> 00:42:55,920 ना पूछ। 791 00:42:53,358 --> 00:43:00,799 कि जो दिल की आबादी थी उसकी क्या हालत हो 792 00:42:55,920 --> 00:43:04,720 गई है ना पूछ दिल की आबादी की इस हद है 793 00:43:00,800 --> 00:43:07,240 खराबी कि ना पूछ जाना जाता है कि इस राह 794 00:43:04,719 --> 00:43:11,118 से लश्कर 795 00:43:07,239 --> 00:43:14,679 गुजरा अब देखिए वो टेकन फॉर ग्रांटेड है 796 00:43:11,119 --> 00:43:19,358 कि जहां से फौज गुजरती है वहां क्या होता 797 00:43:14,679 --> 00:43:22,318 है तो उसने बार-बार जब लखनऊ भी गया था तब 798 00:43:19,358 --> 00:43:26,239 उसने वो लिखा क्या बोश पूछो बहु पूरब के 799 00:43:22,318 --> 00:43:29,440 साकिनों हमको गरीब जान के हस पुकार के 800 00:43:26,239 --> 00:43:32,039 दिल्ली जो एक शहर था आलम में इंतखाब हम 801 00:43:29,440 --> 00:43:33,720 रहने वाले हैं उसी उछड़े दया 802 00:43:32,039 --> 00:43:38,960 के 803 00:43:33,719 --> 00:43:41,919 तो ये जो दुख है सदा ने लिखे हैं शेर अशोभ 804 00:43:38,960 --> 00:43:45,599 शेर अशोभ एक अलग फॉर्म है एक जोन है 805 00:43:41,920 --> 00:43:49,200 पोएट्री का कि जिसमें आप एक जो पूरा समाज 806 00:43:45,599 --> 00:43:51,280 में बर्बादी आई है जो शहर में बर्बादी आई 807 00:43:49,199 --> 00:43:53,838 है रियासत में बर्बादी आई है उसका उसका 808 00:43:51,280 --> 00:43:56,319 डिस्क्रिप्शन भी उसको शहर अशोक कहते सौदा 809 00:43:53,838 --> 00:43:58,358 ने उसी जमाने में लिखा कि क्या हाल है 810 00:43:56,318 --> 00:44:02,409 हमारा क्या हो गया 811 00:43:58,358 --> 00:44:03,559 है सौदा आजकल है नहीं तो 812 00:44:02,409 --> 00:44:05,960 [संगीत] 813 00:44:03,559 --> 00:44:11,199 खैर तो 814 00:44:05,960 --> 00:44:15,599 तो ये कॉन्शियसनेस आपको दिखाई देती है 815 00:44:11,199 --> 00:44:18,879 पोएट्री में मगर सही मानो में हालांकि मीर 816 00:44:15,599 --> 00:44:21,838 ने भी लिखा है गालिब ने भी लिखा है बहुत 817 00:44:18,880 --> 00:44:24,960 कुछ और दूसरे शायरों ने भी लिखा है लेकिन 818 00:44:21,838 --> 00:44:28,759 फ्रंट फुटेज और क्लियर विदाउट एनी 819 00:44:24,960 --> 00:44:32,039 कन्फ्यूजन और इनबिशन अगर सोशियोपॉलिटिकल 820 00:44:28,760 --> 00:44:36,560 कॉन्शियसनेस उर्दू पोएट्री ने ली तो वो 821 00:44:32,039 --> 00:44:39,039 अर्ली 20थ सेंचुरी में ली। उससे पहले एक 822 00:44:36,559 --> 00:44:42,559 ऐसा भी वक्त आया था कि बहुत अच्छे-अच्छे 823 00:44:39,039 --> 00:44:47,119 शायर हुए। दाग थे। क्या जुबान थी उनकी 824 00:44:42,559 --> 00:44:50,159 बड़ी खूबसूरत रोमांटिक पोएट्री करते थे कि 825 00:44:47,119 --> 00:44:55,559 खूब पर्दा है कि चिलमन से लगे बैठे हैं। 826 00:44:50,159 --> 00:45:00,399 साहब छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं 827 00:44:55,559 --> 00:45:04,559 तो बदली निगाह तौर से बेतौर हो गए तुम तो 828 00:45:00,400 --> 00:45:08,000 जवान होते ही कुछ और हो गए तो ऐसी मजे-मजे 829 00:45:04,559 --> 00:45:09,920 की खासतौर से लखनऊ में अच्छा ये ये एक बात 830 00:45:08,000 --> 00:45:12,639 आगे चलते हुए तरक्की पसंद तहरीक जो 831 00:45:09,920 --> 00:45:15,280 प्रोग्रेसिव मूवमेंट है उसे जाने से पहले 832 00:45:12,639 --> 00:45:17,879 मैं दो चार बातें और अर्ज करूं आपसे ये 833 00:45:15,280 --> 00:45:20,800 जुबान जो पंजाब में 834 00:45:17,880 --> 00:45:24,318 थी ये जबान 835 00:45:20,800 --> 00:45:30,039 जो यूपी में थी, दिल्ली में थी और लखनऊ 836 00:45:24,318 --> 00:45:33,480 में थी। यह जुबान जो दखन में थी, ये थी तो 837 00:45:30,039 --> 00:45:37,519 उर्दूएं लेकिन सबको अपना अलग रंग 838 00:45:33,480 --> 00:45:41,719 था। सबका अलग अंदाज था। 839 00:45:37,519 --> 00:45:48,318 मिसाल के तौर पर इंटरेस्टिंग बात यह है 840 00:45:41,719 --> 00:45:51,439 के जैसे पंजाब खासतौर से लेट 19थ एंड 20थ 841 00:45:48,318 --> 00:45:56,639 सेंचुरी पर्टिकुलरली अर्ली जिस तरह की 842 00:45:51,440 --> 00:46:00,400 शायरी पंजाब ने की है वो कहीं नहीं हुई। 843 00:45:56,639 --> 00:46:03,199 मुझे ऐसा लगता है कि अगर आपकी मदद टंग कुछ 844 00:46:00,400 --> 00:46:06,079 और है और दूसरी जमानत बहुत अच्छी तरह 845 00:46:03,199 --> 00:46:08,879 जानते हैं तो जो फोनेटिक्स का सेंस आपको 846 00:46:06,079 --> 00:46:09,880 होगा वो उसको नहीं हो सकता जिसकी मदद टंग 847 00:46:08,880 --> 00:46:13,280 भी वही 848 00:46:09,880 --> 00:46:16,240 है। इसलिए कि कितना भी पास आए एक हल्का सा 849 00:46:13,280 --> 00:46:18,800 फासला रहता है। और जब वो फासला होता है तो 850 00:46:16,239 --> 00:46:22,078 सिर्फ माने नहीं समझ में आते। लफ्ज की 851 00:46:18,800 --> 00:46:24,160 साउंड भी समझ में आती है ज्यादा। हमारे 852 00:46:22,079 --> 00:46:26,800 यहां तो जैसे उन्होंने कहा जो साहब ने कि 853 00:46:24,159 --> 00:46:28,719 भाई उर्दू तो हमारे घर की लौंडी थी तो 854 00:46:26,800 --> 00:46:31,519 प्रॉब्लम यह हुआ कि अक्सर लोगों ने उसके 855 00:46:28,719 --> 00:46:35,039 साथ ट्रीटमेंट भी वैसे ही किया। 856 00:46:31,519 --> 00:46:39,280 लेकिन यहां पर जो फ्रेशनेस ऑब्जेड आपको 857 00:46:35,039 --> 00:46:42,880 पंजाब के शहरों में दिखती है वो यूपी में 858 00:46:39,280 --> 00:46:45,760 नहीं मिली आपको तब ये प्रेजर सीकिंग हो गई 859 00:46:42,880 --> 00:46:49,200 थी लखनऊ की पोएट्री बहुत ज्यादा। 860 00:46:45,760 --> 00:46:52,480 तो उसमें मीन मे बहुत थी इसलिए कि वो 861 00:46:49,199 --> 00:46:54,879 नफासत और नजाकतें लखनऊ के कल्चर की कि यह 862 00:46:52,480 --> 00:46:57,358 लफज़ यू जायज़ है और यूं जायज नहीं है। इसका 863 00:46:54,880 --> 00:47:00,400 तलफुज़ ये है और ये हद तो ये है कि ये जो 864 00:46:57,358 --> 00:47:02,199 जेंडरर्स हैं हमारी जुबान में ये भी लखनऊ 865 00:47:00,400 --> 00:47:05,680 में बने हैं। और 866 00:47:02,199 --> 00:47:08,279 ये दो चार बड़े शायर थे आतश और दूसरे 867 00:47:05,679 --> 00:47:12,679 जिन्होंने तय किया है बैठ के कि 868 00:47:08,280 --> 00:47:15,440 साहब खिड़की होती है और दरवाजा होता 869 00:47:12,679 --> 00:47:18,399 है। अच्छा भाई खिड़की क्यों होती है? 870 00:47:15,440 --> 00:47:21,760 इसमें इ लगी है उसमें तो फिर सिपाही क्यों 871 00:47:18,400 --> 00:47:24,800 होता है? उसमें भी तो ई लगा है और खदांची 872 00:47:21,760 --> 00:47:27,920 क्यों होता है? वो भी होती तो ठीक था। कुछ 873 00:47:24,800 --> 00:47:31,680 नहीं ये तय हो गया और अब आप इससे इधर-उधर 874 00:47:27,920 --> 00:47:35,119 गए तो गलत है। तो जेंडरर्स तय किए गए हैं 875 00:47:31,679 --> 00:47:37,679 लखनऊ में। और ये जेंडर इसीलिए नाराज होते 876 00:47:35,119 --> 00:47:39,920 हैं लखनऊ वाले। हैदराबादियों से भी और 877 00:47:37,679 --> 00:47:42,639 पंजाबियों से भी। उनके जेंडर जरा फर्क हो 878 00:47:39,920 --> 00:47:43,838 जाते हैं। नहीं साहब ये नहीं होगा। यह गलत 879 00:47:42,639 --> 00:47:46,960 है। 880 00:47:43,838 --> 00:47:49,759 तो ये ये आपस के बायसेस और प्रिजसेस बहुत 881 00:47:46,960 --> 00:47:51,838 हैं। तो कहीं यह हो गया था कि उर्दू 882 00:47:49,760 --> 00:47:55,680 पोएट्री वाकई धीरे-धीरे सिर्फ प्लेजर 883 00:47:51,838 --> 00:47:59,318 स्पीकिंग हो रही थी। एंड देन अ मेजर 884 00:47:55,679 --> 00:48:03,440 हैपनिंग टू प्लेस। दैट वाज़ इन परहेब 885 00:47:59,318 --> 00:48:06,880 36 ये लंदन के एक छोटे से रेस्टोर में बात 886 00:48:03,440 --> 00:48:11,280 शुरू हुई। जहां मुल्क राजानंद सज्जाद जहीर 887 00:48:06,880 --> 00:48:13,119 ज्योतिमर घोष और भी एक तमिल के भी राइटर 888 00:48:11,280 --> 00:48:16,599 इनका नाम इस वक्त मेरे दिमाग से स्लिप हो 889 00:48:13,119 --> 00:48:21,920 रहा है। इन लोगों ने बैठ के बात की यह बात 890 00:48:16,599 --> 00:48:26,480 है 34 की 1934 की कि इस वक्त मुल्क को 891 00:48:21,920 --> 00:48:29,519 जरूरत है कि हमारे जो कलम है हमारी 892 00:48:26,480 --> 00:48:32,960 पोएट्री हमारा आर्ट हमारा लिटरेचर हमारी 893 00:48:29,519 --> 00:48:36,199 शॉर्ट स्टोरीज हमारे नवेल्स ये मुल्क में 894 00:48:32,960 --> 00:48:40,240 एक तो पोलिटिकल अवेयरनेस के 895 00:48:36,199 --> 00:48:42,960 लिए और सोशल इनजस्टिस के खिलाफ वुमेन 896 00:48:40,239 --> 00:48:45,118 एंपावरमेंट के लिए यह कलम इस्तेमाल होने 897 00:48:42,960 --> 00:48:47,838 चाहिए। 898 00:48:45,119 --> 00:48:48,680 सज्जाद जहीर को यह रिस्पांसिबिलिटी दी गई 899 00:48:47,838 --> 00:48:52,239 कि वो 900 00:48:48,679 --> 00:48:55,759 उसका तैयार करें मेनिफेस्टो व्हिच ऑलमोस्ट 901 00:48:52,239 --> 00:48:57,159 टूक टू इयर्स एंड इन 36 ही केम ही सेंड वन 902 00:48:55,760 --> 00:49:02,040 कॉपी टू 903 00:48:57,159 --> 00:49:05,399 गुरुदेव मेट प्रेमचंद जी एंड 904 00:49:02,039 --> 00:49:10,199 अथर्स राइटर्स फ्रॉम डिफरेंट 905 00:49:05,400 --> 00:49:13,838 लैंग्वेजेस और 1936 लखनऊ 906 00:49:10,199 --> 00:49:15,919 में एक बहुत ह्यूज कॉन्फ्रेंस हुई जिसको 907 00:49:13,838 --> 00:49:17,838 प्रसाइड किया मुंशी प्रेमचंद ने। मैंने 908 00:49:15,920 --> 00:49:21,760 मुंशी प्रेमचंद का अभी तक आपसे जिक्र नहीं 909 00:49:17,838 --> 00:49:21,759 किया इसलिए कि मैं प्रोज़ की तरफ नहीं गया 910 00:49:22,199 --> 00:49:30,480 हूं। वो ही वाज़ द फादर ऑफ़ उर्दू नवेल एंड 911 00:49:27,039 --> 00:49:33,119 पर्टिकुलरली उर्दू शॉर्ट स्टोरी। उर्दू 912 00:49:30,480 --> 00:49:35,240 में शॉर्ट स्टोरी का कांसेप्ट ही नहीं था 913 00:49:33,119 --> 00:49:39,119 प्रेमचंद से 914 00:49:35,239 --> 00:49:42,479 पहले। और वहां पर उनका गुरुदेव का 915 00:49:39,119 --> 00:49:44,720 ब्लेसिंग आई। उन्होंने एक खत भेजा कि यह 916 00:49:42,480 --> 00:49:47,199 बहुत अच्छा कदम है और ये बहुत जरूरी है और 917 00:49:44,719 --> 00:49:49,838 बहुत अच्छा कर रहे हैं आप और बहुत अच्छी 918 00:49:47,199 --> 00:49:52,480 स्पीच उन्होंने दी मुंशी प्रेमचंद ने यहां 919 00:49:49,838 --> 00:49:56,480 बताया कि आज हमारे कदम ये हुस्न और इश्क 920 00:49:52,480 --> 00:49:58,880 और ये शराब और महक गदा ये सब जो कि सचमुच 921 00:49:56,480 --> 00:50:01,760 हो गए थे जैसे कि मैंने आपसे अ किया इसे 922 00:49:58,880 --> 00:50:04,800 छोड़िए और अब मुल्क के लोगों को जगाने के 923 00:50:01,760 --> 00:50:08,400 लिए मुल्क के लोगों को उठाने के लिए हमारे 924 00:50:04,800 --> 00:50:11,880 कलम इस्तेमाल होने चाहिए। 925 00:50:08,400 --> 00:50:15,240 हर जुबान में इस तरह के राइटर आए बंगाली 926 00:50:11,880 --> 00:50:19,280 में, मराठी में, गुजराती 927 00:50:15,239 --> 00:50:22,399 में। मैं क्योंकि उर्दू मेरे जमाने में 928 00:50:19,280 --> 00:50:25,920 उर्दू के बारे में जानता हूं। मैं ये बात 929 00:50:22,400 --> 00:50:30,880 बहुत ही फक्र से कहता हूं कि इस एक लंबी 930 00:50:25,920 --> 00:50:33,519 जो पहली जो कतार थी फौज की उस पे आपको 931 00:50:30,880 --> 00:50:35,680 उर्दू के कितने शायर और कितने अदीब दिखाई 932 00:50:33,519 --> 00:50:38,960 दे थे। 933 00:50:35,679 --> 00:50:42,639 मतलब उस वक्त जो बड़ा पोएट या बड़ा राइटर 934 00:50:38,960 --> 00:50:45,199 था वो इसी मोमेंट में था और उसने अपने कलम 935 00:50:42,639 --> 00:50:49,598 को अपनी पोएट्री को अपने अफसाने को अपने 936 00:50:45,199 --> 00:50:51,159 नवेल को इस कॉज के लिए इस्तेमाल किया। 937 00:50:49,599 --> 00:50:55,920 मुंशी 938 00:50:51,159 --> 00:51:00,558 प्रेमचंद राय सिंह बेदी इस्मत जुताई कृष्ण 939 00:50:55,920 --> 00:51:06,079 चंद्र अहमद नदीम कासमी फैज अहमद फैज मजाज 940 00:51:00,559 --> 00:51:07,480 सरदार जाफरी जानसर अख्तर कैफी आजमी 941 00:51:06,079 --> 00:51:09,480 ताहिर 942 00:51:07,480 --> 00:51:12,800 लुधियावी 943 00:51:09,480 --> 00:51:13,880 मजरू मतलब ये अब भी मैं कुछ नाम भूल रहा 944 00:51:12,800 --> 00:51:17,359 होगा 945 00:51:13,880 --> 00:51:19,119 शायद वो तो भैया कैसे भूलूंगा कैसी बात कर 946 00:51:17,358 --> 00:51:22,000 रहे हो 947 00:51:19,119 --> 00:51:22,000 मरवाएंगे 948 00:51:22,119 --> 00:51:26,119 तो तो 949 00:51:29,119 --> 00:51:35,720 ये प्रोज़ में मंटो इस्मत 950 00:51:33,838 --> 00:51:39,358 मैं उन्हें तरीके पसंद नहीं 951 00:51:35,719 --> 00:51:41,118 मानता। मैं मुझे दुख है वो बहुत गजब के 952 00:51:39,358 --> 00:51:42,799 मतलब मैं कौन होता हूं उनके बारे में राय 953 00:51:41,119 --> 00:51:45,119 रखने वाला लेकिन हम सबके बारे में राय 954 00:51:42,800 --> 00:51:47,440 रखते हैं तो उनके बारे में रखें। 955 00:51:45,119 --> 00:51:50,880 है क्या कि वो शुरू बहुत उनकी पहली किताब 956 00:51:47,440 --> 00:51:53,599 है बांगेदरा बांगेदरा में बिल्कुल ठीक थे 957 00:51:50,880 --> 00:51:56,559 सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा बहुत 958 00:51:53,599 --> 00:51:59,200 अच्छी-अच्छी उन्होंने की नया शिवाला 959 00:51:56,559 --> 00:52:02,760 क्या-क्या सच कह दूं ब्राह्मण अगर तू बुरा 960 00:51:59,199 --> 00:52:06,799 ना माने और वो पूरा 961 00:52:02,760 --> 00:52:09,119 उसमें शेख को भी उन्होंने एड्रेस किया और 962 00:52:06,800 --> 00:52:12,240 ब्राह्मण को भी ये सब उसके बाद उनको पता 963 00:52:09,119 --> 00:52:15,358 नहीं कुछ गड़बड़ हो गई उनकी वो उनके इन 964 00:52:12,239 --> 00:52:19,039 ताजा खुदाओं में बड़ा सबसे वतन है। जो 965 00:52:15,358 --> 00:52:22,078 पैरान इसका है वो मजहब का कफ़न है। तो ठीक 966 00:52:19,039 --> 00:52:26,239 है भाई आप अपने रास्ते खुश रह। हमारा तो 967 00:52:22,079 --> 00:52:29,400 वो रास्ता नहीं है। और हम अब पहले पैदा 968 00:52:26,239 --> 00:52:32,558 हुए थे बड़े आदमी हैं। पाकिस्तान में तो आप 969 00:52:29,400 --> 00:52:35,358 शायरे कौम कहलाते हैं जो भी है वहां। उनकी 970 00:52:32,559 --> 00:52:37,280 कब्र पे चारों तरफ चार फौजी खड़े रहते हैं 971 00:52:35,358 --> 00:52:41,078 सुबह से शाम तक। पता नहीं किसका खतरा है 972 00:52:37,280 --> 00:52:41,079 उन्हें। तो तो 973 00:52:41,679 --> 00:52:46,480 लेकिन ये है कि वो मैं जरा एम्बरेस हूं इस 974 00:52:43,838 --> 00:52:48,799 बात से कि इतना मतलब उनके टैलेंट में कोई 975 00:52:46,480 --> 00:52:53,358 शक नहीं। फैक्ट ये है कि बहुत सारे तरक्की 976 00:52:48,800 --> 00:52:56,880 पसंद शायर वुड यूज़ टू प्रज़ हिम ओनली फॉर ह 977 00:52:53,358 --> 00:53:00,239 क्राफ्ट एंड ह वोकैबलरी एंड ह फ्लो नॉट 978 00:52:56,880 --> 00:53:04,559 फॉर ह कंटेंट। वो शुरू में था और ठीक है 979 00:53:00,239 --> 00:53:08,558 ये जो अच्छी वो शायरी थी कि उठो मेरी 980 00:53:04,559 --> 00:53:12,800 दुनिया के गरीबों को जगा दो का उमरा के 981 00:53:08,559 --> 00:53:15,920 ताज क्या ताज हिला दो और जिस खेत से दहखा 982 00:53:12,800 --> 00:53:18,400 को मैसन हो रही उठी उस खेत के हर खुश 983 00:53:15,920 --> 00:53:21,200 गंदुम को जला दो वगैरह वगैरह तो यहां तक 984 00:53:18,400 --> 00:53:24,400 तो ठीक बात थी फिर उसके बाद वो पता नहीं 985 00:53:21,199 --> 00:53:26,960 क्या लिखने लगे कि रहमतें हैं तेरी अयार 986 00:53:24,400 --> 00:53:30,000 के काशानों पर बर गिरती है तो बेचारे 987 00:53:26,960 --> 00:53:32,318 मुसलमानों पर तो वो मैंने तो बहुत लोगों 988 00:53:30,000 --> 00:53:35,838 पे गिरती देखी है तो मैं कैसे मानूं कि 989 00:53:32,318 --> 00:53:38,480 सिर्फ मुसलमानों पे गिरती है ऐसा नहीं है 990 00:53:35,838 --> 00:53:43,759 तो वो हमें जरा कुछ कहीं अपील नहीं करती 991 00:53:38,480 --> 00:53:48,079 बात लेकिन बहरहाल अब ऐसा भी होता है नजर 992 00:53:43,760 --> 00:53:51,040 का टीका भी चाहिए होता है तो जहां तक इनका 993 00:53:48,079 --> 00:53:54,400 ताल्लुक है इन शायरों का इन अदीबों का 994 00:53:51,039 --> 00:53:58,000 मतलब एसएफ जो है स्टूडेंट फेडरेशन 50ज में 995 00:53:54,400 --> 00:54:02,639 एक सर्वे किया गया सच तो यह है कि जो 996 00:53:58,000 --> 00:54:05,199 प्रोज़ राइटर है उन्होंने जो असर डाला है 997 00:54:02,639 --> 00:54:07,279 वो अनबिलीवेबल है अनसंग है टू अ ग्रेट 998 00:54:05,199 --> 00:54:10,000 एक्सटेंट शायरों को तो हम पढ़ते रहते हैं 999 00:54:07,280 --> 00:54:12,720 फैज की शायरी सबको याद है साहिर की शायरी 1000 00:54:10,000 --> 00:54:14,358 सबको याद है लेकिन हम ये नहीं जानते कि 1001 00:54:12,719 --> 00:54:19,118 कृष्ण चंद्र ने क्या 1002 00:54:14,358 --> 00:54:22,000 किया इन 50 परहेप्स 55 56 एक उस जमाने में 1003 00:54:19,119 --> 00:54:24,720 कुछ मेरे ख्याल से अराउंड 50 52 1004 00:54:22,000 --> 00:54:28,079 यूनिवर्सिटीज थी पूरे हिंदुस्तान में तो 1005 00:54:24,719 --> 00:54:31,598 वहां जो स्टूडेंट फेडरेशन के मेंबर्स थे। 1006 00:54:28,079 --> 00:54:33,519 उनको एक सर्वे किया गया उनमें कि भाई आप 1007 00:54:31,599 --> 00:54:34,960 लेफ्टिस्ट क्यों है? 1008 00:54:33,519 --> 00:54:37,280 तो उन्होंने यह नहीं कहा कि हमने 1009 00:54:34,960 --> 00:54:39,559 कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो पढ़ा है। ना 1010 00:54:37,280 --> 00:54:43,280 उन्होंने यह कहा कि हमने डांस कैपिटल पढ़ा 1011 00:54:39,559 --> 00:54:46,000 है। ना उन्होंने यह कहा कि हमने माओ की 1012 00:54:43,280 --> 00:54:48,800 रेड बुक पढ़ी है। उन्होंने कहा हमने कृष्ण 1013 00:54:46,000 --> 00:54:50,760 चंद्र को पढ़ा है। हम कृष्ण चंद्र को 1014 00:54:48,800 --> 00:54:54,640 पढ़ते हैं इसलिए हम रेप्टिस्ट 1015 00:54:50,760 --> 00:54:57,480 हैं। ये बात बहुत कम लोगों को मालूम है। 1016 00:54:54,639 --> 00:55:01,799 क्या लोगों ने क्या काम किए 1017 00:54:57,480 --> 00:55:04,920 हैं। यह शुरू हुआ था 30 से और समझिए 70 तक 1018 00:55:01,800 --> 00:55:08,359 आते-आते। होता क्या है कि हर चीज 1019 00:55:04,920 --> 00:55:10,039 अल्टीमेटली आदमी 1020 00:55:08,358 --> 00:55:14,318 मूवमेंट 1021 00:55:10,039 --> 00:55:18,000 पार्टी इज वक्त के साथ अपना करकेचर बन 1022 00:55:14,318 --> 00:55:22,880 जाते हैं। और उनके अंदर वही बातें आ जाती 1023 00:55:18,000 --> 00:55:25,000 हैं जिनके खिलाफ वो लड़े थे। कमाल ये है। 1024 00:55:22,880 --> 00:55:28,720 तो यही होता है वो एक वो 1025 00:55:25,000 --> 00:55:31,760 जो सख्ती आ जाती है। और उसमें जो 1026 00:55:28,719 --> 00:55:33,759 एक्सट्रीम एटीट्यूड आ जाता है वो फिर उसको 1027 00:55:31,760 --> 00:55:36,319 तबाह कर देता है। आप तो लड़े थे ना 1028 00:55:33,760 --> 00:55:40,240 एक्सट्रीम एटीट्यूड के खिलाफ उससे ही तो 1029 00:55:36,318 --> 00:55:42,960 आपने बगावत की थी उन्हीं वैल्यू सिस्टम से 1030 00:55:40,239 --> 00:55:44,959 तो आपने रिवोल्ट किया था। अब आपके वैल्यू 1031 00:55:42,960 --> 00:55:47,440 सिस्टम ऐसे हो गए कि जरा सा कोई हिले तो 1032 00:55:44,960 --> 00:55:49,798 आप उसको फांसी पे चढ़ाने को तैयार हो जाए 1033 00:55:47,440 --> 00:55:54,400 तो ये तो ठीक बात नहीं 1034 00:55:49,798 --> 00:55:58,798 है। मतलब फैज ने जो हिंदुस्तान की आजादी 1035 00:55:54,400 --> 00:56:01,200 पे नल्म लिखी थी। हिंदुस्तान की आजादी के 1036 00:55:58,798 --> 00:56:04,159 साथ एक हादसा हुआ था। यह मुल्क के टुकड़े 1037 00:56:01,199 --> 00:56:06,879 हुए थे। हजारों लाखों लोग मरे थे, कत्ल 1038 00:56:04,159 --> 00:56:10,879 हुए थे, बेघर हुए थे। 1039 00:56:06,880 --> 00:56:16,640 तो फैज ने नज़्म लिखी थी यह दाग दाग उजाला 1040 00:56:10,880 --> 00:56:19,280 यह शबदा शहर यह रात की डसी हुई सुबह ये 1041 00:56:16,639 --> 00:56:24,318 उजाला जो दागदाग है जिस पे स्पॉट्स पड़े 1042 00:56:19,280 --> 00:56:27,240 हुए हैं ये शब ये शहर जिसको डसा हुआ है 1043 00:56:24,318 --> 00:56:31,639 रात में ये वो शहर तो नहीं जिसकी आरजू 1044 00:56:27,239 --> 00:56:37,118 लेकर चले थे यार कि मिल जाएगी कहीं ना 1045 00:56:31,639 --> 00:56:39,279 कहीं इस नज्म पे उसको क्रिटिसाइज किया 1046 00:56:37,119 --> 00:56:42,079 कि ये आप क्या बोल रहे हैं कि ठीक नहीं 1047 00:56:39,280 --> 00:56:45,440 है। आजादी परफेक्ट नहीं आई है। मतलब क्या 1048 00:56:42,079 --> 00:56:48,119 है आपका? आप हिंदू राष्ट्र चाहते हैं। ये 1049 00:56:45,440 --> 00:56:51,119 कम्युनिस्ट पार्टी उससे पूछ रही है फैब 1050 00:56:48,119 --> 00:56:51,960 से। वो गम कर रहा है कि मुल्क के टुकड़े 1051 00:56:51,119 --> 00:56:56,960 हो 1052 00:56:51,960 --> 00:57:00,318 गए। तो इस तरह की सख्तियां आई कहीं कहीं 1053 00:56:56,960 --> 00:57:04,159 लोग एक इतनी खूबसूरत नज़्म है फैज की रकीब 1054 00:57:00,318 --> 00:57:07,279 से। इट्स अ ब्रांड न्यू एंगल। 1055 00:57:04,159 --> 00:57:10,719 जो है कि आके वाबस्ता है उस हुस्न की 1056 00:57:07,280 --> 00:57:12,160 यादें तुझसे जिसने इस दिल को परीखाना बना 1057 00:57:10,719 --> 00:57:16,239 रखा था। 1058 00:57:12,159 --> 00:57:20,879 तुझ पे भी उठी है वो खोई हुई जाहिर आंखें 1059 00:57:16,239 --> 00:57:23,439 तूने भी ये मतलब और क्या तुझको मालूम है 1060 00:57:20,880 --> 00:57:25,680 कि उम्र गवा दी हमने क्यों रकीब से मेरा 1061 00:57:23,440 --> 00:57:28,400 रिश्ता क्या है या तो वो जानता है ये मैं 1062 00:57:25,679 --> 00:57:31,759 जानता हूं कि हम किसके दीवाने हैं तो मेरा 1063 00:57:28,400 --> 00:57:34,119 तुम्हारा कुछ कॉमन है ये कितना नया एंगल 1064 00:57:31,760 --> 00:57:37,440 है कि एड्रेसिंग द 1065 00:57:34,119 --> 00:57:40,640 राइवल अब ये भाई नज़्म कंप्लीट हो गई थी 1066 00:57:37,440 --> 00:57:43,119 मगर ये कि कहीं खौफ था सर पे तो तीन चार 1067 00:57:40,639 --> 00:57:45,679 फिर आगे लगा दिए ये और देख बाजार में 1068 00:57:43,119 --> 00:57:49,440 बिकता हुआ मजदूर का गोश्त ये अरे भाई इस 1069 00:57:45,679 --> 00:57:52,078 नज़्म का कोई ताल्लुक नहीं उस बात से तो ये 1070 00:57:49,440 --> 00:57:54,960 सख्तियां कहीं आई जिसके खिलाफ रिवोल्ट भी 1071 00:57:52,079 --> 00:57:57,680 हुआ फिर एक रिवोल्ट जो है वो भी एक एक 1072 00:57:54,960 --> 00:58:02,159 तरफ़ा हो गया जब तक तुम दुनिया की बात 1073 00:57:57,679 --> 00:58:06,159 करोगे समाज की बात करोगे गलत है ये सब 1074 00:58:02,159 --> 00:58:10,239 एक्सटर्नल बातें हैं। ये माइंड की बातें 1075 00:58:06,159 --> 00:58:13,039 हैं। गो इनटू योर ओन वर्ल्ड। अंदर जाओ 1076 00:58:10,239 --> 00:58:17,358 अपने अंदर ढूंढो। मुझे शक है कि किसी ना 1077 00:58:13,039 --> 00:58:20,558 किसी हद तक जो इंपीरियस पावर जो वेस्टर्न 1078 00:58:17,358 --> 00:58:23,598 पार्ट्स काम करती हैं और ये ऐसा कोई 1079 00:58:20,559 --> 00:58:26,640 पैरानोया की बात नहीं है। ये कहीं 1080 00:58:23,599 --> 00:58:29,680 उन्होंने इन चीजों को इनकरेज किया वेस्ट 1081 00:58:26,639 --> 00:58:31,759 में भी और यहां भी कि जहां शायरी पॉलिटिकल 1082 00:58:29,679 --> 00:58:34,078 कॉन्शियसनेस के साथ ना हो। अरे भाई ये तो 1083 00:58:31,760 --> 00:58:35,920 प्रोपेगेंडा है। पॉलिटिकल सोशियो और 1084 00:58:34,079 --> 00:58:38,079 पॉलिटिकल कॉन्शियसनेस से आप शायरी कर रहे 1085 00:58:35,920 --> 00:58:41,280 हैं। तो ये तो माइंड से कर रहे हैं हम। 1086 00:58:38,079 --> 00:58:44,400 आपके अंदर जो इंसान छुपा हुआ है जो आपके 1087 00:58:41,280 --> 00:58:48,559 अंदर है आपकी रूह, आपकी आत्मा, आपका 1088 00:58:44,400 --> 00:58:52,000 सबकॉन्शियस उसमें जाइए और वहां ढूंढिए कौन 1089 00:58:48,559 --> 00:58:54,640 है, क्या है अपनी दुनिया में। तो मतलब यह 1090 00:58:52,000 --> 00:58:57,519 है कि आप दुनिया के काम के नारा है। और 1091 00:58:54,639 --> 00:59:00,400 ऐसी भी बहुत शायरी हुई। बहुत ज्यादा, फिर 1092 00:58:57,519 --> 00:59:02,679 एक वक्त आया के यह हुआ कि भई क्यों? व्हाई 1093 00:59:00,400 --> 00:59:05,680 शुड पोएट्री बी डिपेंडेंट ऑन 1094 00:59:02,679 --> 00:59:08,480 वर्ल्ड? व्हाई कांट वी हैव पोएट्री विदाउट 1095 00:59:05,679 --> 00:59:11,838 वर्ड्स? 1096 00:59:08,480 --> 00:59:14,639 चमक चमकारने शबशीर ने के मजे मोह का मल 1097 00:59:11,838 --> 00:59:17,558 पिंजीर ने के कुछ मतलब नहीं है सिर्फ 1098 00:59:14,639 --> 00:59:22,318 फाउंड है ऐसी लिखी 1099 00:59:17,559 --> 00:59:24,880 गई अंदर से नया हो के निकलता हुआ जैसे साए 1100 00:59:22,318 --> 00:59:28,480 से जुदा हो के वो दालान में आया क्या बोल 1101 00:59:24,880 --> 00:59:30,640 रहे हो भाई एक शेर सुने मैं मजाक कर रहा 1102 00:59:28,480 --> 00:59:33,039 हूं ये सीरियस एक पोएट उस जमाने के पोएट 1103 00:59:30,639 --> 00:59:33,039 का शेर 1104 00:59:33,798 --> 00:59:41,559 है कुत्ते पर खरगोश आया 1105 00:59:37,440 --> 00:59:45,280 तब जाके अहमदाबाद बना। ये शेर 1106 00:59:41,559 --> 00:59:48,480 है। तो ये ये पागलपन भी हुआ कुछ दिनों। 1107 00:59:45,280 --> 00:59:51,920 लेकिन थैंकफुली अल्टीमेटली पेंडुलम बीच 1108 00:59:48,480 --> 00:59:54,798 में आ गया। और आज जो पोएट्री हो रही है 1109 00:59:51,920 --> 00:59:57,519 उसके ऊपर कोई अंकुश नहीं है। लेकिन बहुत 1110 00:59:54,798 --> 00:59:59,358 अच्छी शादी कर रहे हैं लोग। जो यंग जनरेशन 1111 00:59:57,519 --> 01:00:01,880 है उनके मैं शेर सुनता हूं तो मैं बहुत 1112 00:59:59,358 --> 01:00:06,000 एनवी करता हूं। 1113 01:00:01,880 --> 01:00:08,000 और ये है कि जहां तक इसका प्रोज़ का 1114 01:00:06,000 --> 01:00:11,199 ताल्लुक है मुंशी प्रेमचंद हो ये जिन 1115 01:00:08,000 --> 01:00:14,239 लोगों के मैंने नाम लिए इनको आप देखिए एक 1116 01:00:11,199 --> 01:00:17,239 और शक्ल है टुवर्ड्स द एंड कितनी देर हो 1117 01:00:14,239 --> 01:00:17,239 गई 1118 01:00:21,119 --> 01:00:25,720 मतलब मुझे पता नहीं चलना चाहिए मुझे आप 1119 01:00:24,400 --> 01:00:27,559 बाद में ना 1120 01:00:25,719 --> 01:00:32,318 बताइएगा 1121 01:00:27,559 --> 01:00:32,319 तो थैंक यू सो काइंड ऑफ यू 1122 01:00:35,960 --> 01:00:43,440 तो जी हां प्रो जो है वो उसका इतना नहीं 1123 01:00:41,119 --> 01:00:46,599 किया गया है। दूसरा जो रुख है हिंदुस्तान 1124 01:00:43,440 --> 01:00:50,639 की उर्दू पोएट्री के बारे में लोग नहीं 1125 01:00:46,599 --> 01:00:53,880 जानते। वो है कि हिंदुस्तान के कई 100 साल 1126 01:00:50,639 --> 01:01:00,159 की जो फ्रीडम मूवमेंट 1127 01:00:53,880 --> 01:01:03,358 रहा 1857 से और उससे पहले से टिल 1128 01:01:00,159 --> 01:01:04,679 15th ऑफ अगस्त और आफ्टर दैट द आफ्टर मार्च 1129 01:01:03,358 --> 01:01:07,759 ऑफ द 1130 01:01:04,679 --> 01:01:09,199 पार्टीशन इसके ऊपर उर्दू में क्या पोएट्री 1131 01:01:07,760 --> 01:01:13,839 है? 1132 01:01:09,199 --> 01:01:18,239 हर जो मूवमेंट आया चाहे वह नॉन कोऑपरेशन 1133 01:01:13,838 --> 01:01:21,838 का हो चाहे कोई सा भी हो चाहे सेलर्स की 1134 01:01:18,239 --> 01:01:25,919 रिवोल्ट हो चाहे कोई भी चोराचोरी का 1135 01:01:21,838 --> 01:01:30,239 किस्सा हो जो भी हो जो भी इतने दिनों में 1136 01:01:25,920 --> 01:01:33,838 हिंदुस्तान में अंग्रेज से इंटरेक्ट किया 1137 01:01:30,239 --> 01:01:37,598 आजादी के मत वालों ने आजादी की कोशिश करने 1138 01:01:33,838 --> 01:01:40,798 वालों में वहां आपको उस सिचुएशन पे उर्दू 1139 01:01:37,599 --> 01:01:40,798 क्या पोएट्री मिलती 1140 01:01:41,239 --> 01:01:49,598 है। पाकिस्तान और हिंदुस्तान जब बन गए तो 1141 01:01:45,358 --> 01:01:49,598 क्या पोएट्री उर्दू की आपको मिलती है उस 1142 01:01:49,639 --> 01:01:56,480 पे। जो उस वक्त लिखी गई और क्या अफसाने 1143 01:01:53,440 --> 01:02:00,318 मिलते हैं वो भी है। क्या नवेल्स मिलते 1144 01:01:56,480 --> 01:02:03,440 हैं एक गद्दार नाम का एक नवेल है वो हिंदी 1145 01:02:00,318 --> 01:02:05,519 में भी अवेलेबल है करण चंद्र का। वो मैंने 1146 01:02:03,440 --> 01:02:07,760 छह सात बार पढ़ा। मैं पढ़ ही नहीं सकता 1147 01:02:05,519 --> 01:02:09,440 उसे बिना रोए। और मैं आप लोग को बहुत 1148 01:02:07,760 --> 01:02:13,440 स्ट्रांगली रिकमेंड करूंगा कि वो नवेल 1149 01:02:09,440 --> 01:02:13,440 पढ़िए आप पार्टीशन पे। 1150 01:02:15,000 --> 01:02:22,559 गद्दार हिंदुस्तान के जितने डटीज हैं देवी 1151 01:02:19,760 --> 01:02:25,839 देवता जितने त्यौहार हैं जितने शहर हैं 1152 01:02:22,559 --> 01:02:29,480 जितने मौसम हैं उन पे उर्दू में जो 1153 01:02:25,838 --> 01:02:32,318 पोएट्री है कई 100 साल 1154 01:02:29,480 --> 01:02:35,318 की वो पोएट्री आप पढ़िए और मैं आपको 1155 01:02:32,318 --> 01:02:40,079 बताऊंगा सब आपको मिल जाएगी एक ही 1156 01:02:35,318 --> 01:02:42,798 जगह मेरे फादर ने कई बरस लगा के दो 1157 01:02:40,079 --> 01:02:46,240 वॉल्यूम एडिट किए थे जिनका नाम है 1158 01:02:42,798 --> 01:02:49,400 हिंदुस्तान हमारा और वो यहां राजकमल में 1159 01:02:46,239 --> 01:02:53,838 हिंदी में देवनागरी में अवेलेबल 1160 01:02:49,400 --> 01:02:55,680 है। किस-किस जमाने की पोएट्री होली पे मैं 1161 01:02:53,838 --> 01:02:58,960 दावा करता हूं कि हिंदुस्तान में कितनी 1162 01:02:55,679 --> 01:03:01,039 जमाने हैं। उर्दू से बेटर होली पे तो आपको 1163 01:02:58,960 --> 01:03:04,318 पोएट्री नहीं मिल सकती। ये मैं गारंटी से 1164 01:03:01,039 --> 01:03:09,480 बोलता हूं। जो होली पे नज़्में लिखी गई है। 1165 01:03:04,318 --> 01:03:09,480 दिवाली पे, जन्माष्टमी पे। 1166 01:03:10,000 --> 01:03:14,559 क्षमावनी एक त्यौहार है जैनों का जो मुझे 1167 01:03:12,639 --> 01:03:19,239 उर्दू पोएट्री से मालूम हुआ। मुझे पता ही 1168 01:03:14,559 --> 01:03:23,440 नहीं था। क्षमावनी पर लिखी हुई है 1169 01:03:19,239 --> 01:03:25,519 पोयम। राम कृष्ण ओ कृष्ण और राधा पे तो 1170 01:03:23,440 --> 01:03:28,798 कितनी पोएट्री कोई एंड नहीं है। एंड ही 1171 01:03:25,519 --> 01:03:32,318 लेंड हिमसेल्फ टू पोएट्री। तो कितनी शायरी 1172 01:03:28,798 --> 01:03:37,199 है और कब की बनारस के घाटों पे जो शायरी 1173 01:03:32,318 --> 01:03:40,798 लिखी गई। मतलब आप हैरान होंगे। और दूसरी 1174 01:03:37,199 --> 01:03:43,919 तरफ झांसी की रानी पर भी है और टीपू 1175 01:03:40,798 --> 01:03:46,000 सुल्तान पर भी है वहां भी ऐसी पोएट्री है 1176 01:03:43,920 --> 01:03:50,318 कि आप पढ़े तो रोंगटे खड़े हो जाए और जो 1177 01:03:46,000 --> 01:03:54,318 हमारे त्यौहार कल्चर ट्रेडिशन बसंत और जो 1178 01:03:50,318 --> 01:03:57,358 जो रस्में हैं उन पे जो शायरी है और वो आज 1179 01:03:54,318 --> 01:03:59,679 की लिखी हुई नहीं है। 1180 01:03:57,358 --> 01:04:02,920 आई वोंट मिंस माय वर्ड। आज तो हो सकता है 1181 01:03:59,679 --> 01:04:06,279 पॉलिटिकल कंसीडरेशन से 1182 01:04:02,920 --> 01:04:09,079 और एक्सपीडेंसी से आदमी ऐसी बात 1183 01:04:06,280 --> 01:04:12,400 लिखते। 300 बरस 1184 01:04:09,079 --> 01:04:14,760 पहले और उसका मुझे क्या फायदा हुआ? एक 1185 01:04:12,400 --> 01:04:16,519 पिक्चर बन रही थी युगानंद नाम था 1186 01:04:14,760 --> 01:04:19,200 उसका। 1187 01:04:16,519 --> 01:04:23,119 तो लक्ष्मीकांत प्यारेलाल म्यूजिक 1188 01:04:19,199 --> 01:04:24,960 डायरेक्टर थे उसके और एन चंद्रा एक 1189 01:04:23,119 --> 01:04:28,559 प्रोड्यूसर डायरेक्टर। बड़े कामयाब अपने 1190 01:04:24,960 --> 01:04:31,280 वक्त के वो उसके डायरेक्टर थे। तो दो-तीन 1191 01:04:28,559 --> 01:04:33,680 गाने हो चुके थे। तो फिर हमारी एक सिंग 1192 01:04:31,280 --> 01:04:37,519 थी। मैं गया तो एन चंद्रा और लक्ष्मीकांत 1193 01:04:33,679 --> 01:04:41,358 बैठे थे तो थोड़े से ऑकवर्ड थे। हां जी 1194 01:04:37,519 --> 01:04:43,759 बताइए क्या सिचुएशन है? तो उन्हें बताना 1195 01:04:41,358 --> 01:04:46,639 चाहिए कि भाई सिचुएशन क्या है? नहीं असल 1196 01:04:43,760 --> 01:04:50,400 में क्या था कि ऐसा सोच रहे थे हम लोग कि 1197 01:04:46,639 --> 01:04:52,798 मतलब यहां पर अगर एक वो आ जाता तो क्या आ 1198 01:04:50,400 --> 01:04:57,280 जाता? क्या सोच रहे थे? नहीं नहीं मतलब 1199 01:04:52,798 --> 01:04:59,519 ऐसा आईडिया आया था कि बहुत ही हां हूं 1200 01:04:57,280 --> 01:05:01,680 नहीं करके अल्टीमेटली उन्होंने बताया कि 1201 01:04:59,519 --> 01:05:02,759 हम सोच रहे हैं कि यहां एक कृष्ण की आरती 1202 01:05:01,679 --> 01:05:05,960 रखते 1203 01:05:02,760 --> 01:05:10,480 हैं। तो उन्होंने कहा कितना भी हो यह 1204 01:05:05,960 --> 01:05:14,639 काफिर मुझे यथ है तो मुसलमान नाम तो जावेद 1205 01:05:10,480 --> 01:05:17,280 अख्तरी है ना तो मैंने कहा अच्छा सुनाइए 1206 01:05:14,639 --> 01:05:21,358 क्या ट्यून है कोई तो उन्होंने मुझे ट्यून 1207 01:05:17,280 --> 01:05:23,760 दी और बहुत ही मतलब चलो अब ये रस्म अदा कर 1208 01:05:21,358 --> 01:05:25,679 देते हैं दे देते हैं इन्हें जब नहीं लिख 1209 01:05:23,760 --> 01:05:28,880 पाएंगे तो हम कहेंगे हम किसी से लिखा लेते 1210 01:05:25,679 --> 01:05:31,919 हैं ना तो मैंने कहा ठीक है दो दिन बाद 1211 01:05:28,880 --> 01:05:34,000 मिलते हैं मैं दो दिन बाद गया फिर दोनों 1212 01:05:31,920 --> 01:05:36,480 बैठे थे तो मैंने कहा मैंने मैंने वो लिख 1213 01:05:34,000 --> 01:05:39,880 लिया है। लेकिन आपने मुझे जो ट्यून दी थी 1214 01:05:36,480 --> 01:05:43,838 वो आरती की नहीं थी। वो एक गाने की ट्यून 1215 01:05:39,880 --> 01:05:46,079 थी। आरती में एक क्रिसेंडो होता है। आपने 1216 01:05:43,838 --> 01:05:49,199 क्रिसेंडो मुझे दिए ही नहीं। वो तो दो तीन 1217 01:05:46,079 --> 01:05:54,240 अंतरे खत्म। एक क्रिसेंडो चाहिए जहां पर 1218 01:05:49,199 --> 01:05:56,239 वो ऊपर जाए। वो कहां है? हर आरती टेमो 1219 01:05:54,239 --> 01:05:58,879 इनक्रीस होता है उसका। वो है ही नहीं 1220 01:05:56,239 --> 01:06:02,239 उसमें। वो मैंने अपनी तरफ से लिख दिया है। 1221 01:05:58,880 --> 01:06:04,400 आप उसे कंपोज कर लीजिए। कली जी बहुत अच्छा 1222 01:06:02,239 --> 01:06:07,038 क्या लिखा आपने मैंने कहा मैंने कुछ भी 1223 01:06:04,400 --> 01:06:09,599 नहीं लिखा मैंने तो सिर्फ नाम जमा कर दिए 1224 01:06:07,039 --> 01:06:12,440 उसमें सिर्फ कृष्ण के नाम है अपनी तरफ से 1225 01:06:09,599 --> 01:06:14,880 कुछ नहीं है तो कह 1226 01:06:12,440 --> 01:06:16,599 सुनाइए तो मैंने उन्हें सुनाया आपको भी 1227 01:06:14,880 --> 01:06:20,480 सुना देता 1228 01:06:16,599 --> 01:06:24,318 हूं वो कृष्ण कन्हैया मुरलीधर मनमोहन कान 1229 01:06:20,480 --> 01:06:28,400 मुरारी है गोपाल मनोहर दुख भंजन गोपाल 1230 01:06:24,318 --> 01:06:28,400 मनोहर दुख भंजन दुख 1231 01:06:28,679 --> 01:06:35,759 भंजन एक बार अब अटल बनवारी है वो कुंज 1232 01:06:32,400 --> 01:06:37,240 फिरैया सांवरिया नंदलाला कान मुरारी है बन 1233 01:06:35,760 --> 01:06:41,760 कुंज फिरैया 1234 01:06:37,239 --> 01:06:45,439 सांवरिया नंदलाला कान मुरारी है वो वो कंस 1235 01:06:41,760 --> 01:06:48,640 विनाशक महारथी सुदर्शन चक्रधारी है हर रूप 1236 01:06:45,440 --> 01:06:52,000 निराला है उसका हर उसकी लारी है वो 1237 01:06:48,639 --> 01:06:56,558 गोपीनाथ मदन मोहन वो श्याम पीतांबर आएगा 1238 01:06:52,000 --> 01:07:00,639 आएगा जो अंध आएगा आएगा जो अंदर आएगा तू तो 1239 01:06:56,559 --> 01:07:04,000 बड़े परेशान हुए कहने आप इतने नाम तो हमें 1240 01:07:00,639 --> 01:07:06,798 नहीं पता है तो आपको कैसे पता है? मैंने 1241 01:07:04,000 --> 01:07:09,440 कहा दो ही वजह हैं। एक मैं लखनऊ का हूं 1242 01:07:06,798 --> 01:07:13,710 जहां सबसे ज्यादा महिमा कृष्ण की है और 1243 01:07:09,440 --> 01:07:21,440 दूसरे ये कि मुझे उर्दू आती है। शुक्रिया। 1244 01:07:13,710 --> 01:07:25,480 [प्रशंसा] 1245 01:07:21,440 --> 01:07:25,480 चलिए थैंक यू। 1246 01:07:29,318 --> 01:07:35,199 वंडरफुल एस यू वांटेड टू टेक अ फ्यू 1247 01:07:31,599 --> 01:07:36,960 क्वेश्चन लाइक टू देयर एंड वी कैन नहीं 1248 01:07:35,199 --> 01:07:39,759 नहीं देखिए खड़े रहने में क्या होता है 1249 01:07:36,960 --> 01:07:43,119 भागना आसान रहता है तो अगर कभी बुरा वक्त 1250 01:07:39,760 --> 01:07:47,319 आ जाए आप यहीं से करिए बोलिए कुड आई हैव 1251 01:07:43,119 --> 01:07:47,318 सम वाटर हां जी 1252 01:07:48,000 --> 01:07:54,400 वन सेकंड वन सेकंड प्लीज प्लीज देखिए यहां 1253 01:07:51,280 --> 01:07:55,599 सब किशोर जी की इजाजत से होगा आप पहले 1254 01:07:54,400 --> 01:07:58,160 उनसे पूछ 1255 01:07:55,599 --> 01:08:01,160 मैं आपको सिर्फ दो तीन चीज़ याद दिलाना 1256 01:07:58,159 --> 01:08:01,159 चाहूंगा 1257 01:08:02,519 --> 01:08:08,639 जी खून जग में डुबोली नहीं खूने दिल में 1258 01:08:06,159 --> 01:08:11,199 खू दिल में डुबोली है उंगलियां मैंने और 1259 01:08:08,639 --> 01:08:14,239 जुबान पे मोहर लगी है तो क्या कि रख दी है 1260 01:08:11,199 --> 01:08:18,639 हर एक खलके जंजीर में जुबां मैंने बिल्कुल 1261 01:08:14,239 --> 01:08:22,479 एक तो ये है एक वो उनका प्रजन का जो वो था 1262 01:08:18,640 --> 01:08:25,759 रोशन ना उससे उन्होंने दो लिखी है एक तो 1263 01:08:22,479 --> 01:08:29,358 शाम के पेचो खम सितारों जीना जीना उतर रही 1264 01:08:25,759 --> 01:08:31,479 है रात यूं सभा पास से बह जाती है जैसे कह 1265 01:08:29,359 --> 01:08:36,239 दी किसी ने प्यार की 1266 01:08:31,479 --> 01:08:39,039 बात अच्छी बात मुझे आधा थैंक यू सो मच 1267 01:08:36,238 --> 01:08:41,759 थैंक यू नहीं नहीं कोई बात नहीं कैन आई 1268 01:08:39,039 --> 01:08:44,960 जस्ट टेक अ मोमेंट टू से दैट वी डू वांट 1269 01:08:41,759 --> 01:08:48,880 टू थैंक जावेद साहब वेरी मच फॉर दैट रियली 1270 01:08:44,960 --> 01:08:52,359 एंटलाइटनिंग लेक्चर एंड समथिंग सो अ बिग 1271 01:08:48,880 --> 01:08:52,359 राउंड ऑफ़ अप्लॉज़ 1272 01:08:56,880 --> 01:09:02,159 आई वुड आल्सो लाइक जावेद साहब जस्ट अ मिनट 1273 01:08:59,679 --> 01:09:05,600 टू आस्क माय ब्रदर दीपक रोशा टू कम ऑन 1274 01:09:02,158 --> 01:09:08,559 स्टेज एंड ही कैन कंडक्ट द नेक्स्ट राउंड 1275 01:09:05,600 --> 01:09:11,199 ऑफ़ टू ऑर थ्री क्वेश्चन्स ओनली प्लीज एंड 1276 01:09:08,560 --> 01:09:14,000 वी वुड लाइक यू टू जस्ट रिमेन विथ इन द 1277 01:09:11,198 --> 01:09:17,358 टॉपिक दैट जावेद साहब हेज़ जस्ट अह स्पोकन 1278 01:09:14,000 --> 01:09:20,520 अबाउट एंड आफ्टर अह 1279 01:09:17,359 --> 01:09:24,719 हां दीपक यू कैन टेक दिस अह द 1280 01:09:20,520 --> 01:09:26,719 माइक्रोफोन ओके। ओके। ah एंड सो इफ देयर 1281 01:09:24,719 --> 01:09:28,798 आर एनीबडी देयर इज़ एनीबडी विथ अ क्वेश्चन 1282 01:09:26,719 --> 01:09:31,198 इफ यू कैन जस्ट रेज़ योर हैंड प्लीज देन वी 1283 01:09:28,798 --> 01:09:33,600 कैन हैव जस्ट अ मिनट। द माइक्रोफोन विल कम 1284 01:09:31,198 --> 01:09:37,198 टू यू एंड दीपक यू कैन कंडक्ट दिस एंड 1285 01:09:33,600 --> 01:09:40,400 आल्सो गिव द थैंक्स गिविंग। थैंक यू। सो 1286 01:09:37,198 --> 01:09:43,399 एनी क्वेश्चन्स? एनीबडी? यस, द लेडी देर 1287 01:09:40,399 --> 01:09:43,399 प्लीज। 1288 01:09:43,600 --> 01:09:48,640 जी, उर्दू के पॉपुलर के लिए तवाइफ़ों का 1289 01:09:46,560 --> 01:09:51,520 क्या रोल रहा? 1290 01:09:48,640 --> 01:09:55,119 उर्दू को पॉपुलराइज करने में तवाइफों का 1291 01:09:51,520 --> 01:09:57,080 क्या कोई रोल रहा? 1292 01:09:55,119 --> 01:10:01,519 पॉपुलर तवाइफों का 1293 01:09:57,079 --> 01:10:04,960 रहा। तो सबका नहीं जो पॉपुलर थी। देखिए 1294 01:10:01,520 --> 01:10:07,120 क्या है कि जो पोएट्री गाई जाएगी और उस 1295 01:10:04,960 --> 01:10:09,279 जमाने में तो औरतों में तो सिर्फ तवाइफें 1296 01:10:07,119 --> 01:10:12,479 ही गा सकती थी। न जाने कितनी अच्छी 1297 01:10:09,279 --> 01:10:15,119 सिंगर्स होंगी जिनका गला घरों में घोट 1298 01:10:12,479 --> 01:10:17,439 दिया गया। तो कम से कम तवाइफ के पास ये 1299 01:10:15,119 --> 01:10:19,679 राइट तो था कि वो गा सकती थी। तो जब वो 1300 01:10:17,439 --> 01:10:21,839 गाएगी तो अच्छी शायरी ही गाएगी तो कोई 1301 01:10:19,679 --> 01:10:25,440 हैरत की बात नहीं कि वो उर्दी गज़ें गाती 1302 01:10:21,840 --> 01:10:28,400 थी और यकीनन जब गा के कोई सुनाता है चाहे 1303 01:10:25,439 --> 01:10:31,599 वो मेदी हसन हो और वो चाहे जगजीत सिंह हो 1304 01:10:28,399 --> 01:10:36,238 तो गज़ल बहुत दूर तक पहुंचती है। वन लास्ट 1305 01:10:31,600 --> 01:10:38,320 क्वेश्चन फ्रॉम जेंटलमैन देयर सर उर्दू के 1306 01:10:36,238 --> 01:10:41,279 जेनिस्ट के बारे में आपने दिल्ली की 1307 01:10:38,319 --> 01:10:44,960 थ्योरी जो है उसको नजरअंदाज कर दिया कि ये 1308 01:10:41,279 --> 01:10:47,679 उर्दू जो है वो जो टर्किश सिपाही आते थे 1309 01:10:44,960 --> 01:10:50,399 उनके कैंप्स होते थे। और उर्दू बाजार के 1310 01:10:47,679 --> 01:10:52,800 अंदर इस जो दिल्ली में उर्दू बाजार है 1311 01:10:50,399 --> 01:10:55,359 वहां पर जो कैंप्स की लैंग्वेज थी वो 1312 01:10:52,800 --> 01:10:58,400 उर्दू के जेनेसिस में थी। तो इस पर आपकी 1313 01:10:55,359 --> 01:11:00,880 कोई राय और दूसरा हसरत मोहानी साहब का जो 1314 01:10:58,399 --> 01:11:02,719 कंट्रीब्यूशन था हिंदुस्तान में इंकलाब 1315 01:11:00,880 --> 01:11:05,199 लाने के बारे में। बहुत सही। इंकलाब 1316 01:11:02,719 --> 01:11:07,920 जिंदाबाद तो नारा ही हसरत मोहानी का बनाया 1317 01:11:05,198 --> 01:11:10,399 हुआ है। और आपको एक और बताऊं उर्दू की एक 1318 01:11:07,920 --> 01:11:12,800 और भी डिस्टिंशन है। हिंदुस्तान में जो 1319 01:11:10,399 --> 01:11:15,679 पहला शायर अपनी शायरी की वजह से फांसी पे 1320 01:11:12,800 --> 01:11:17,920 चढ़ा है। वो इसी शहर दिल्ली में था। ये 1321 01:11:15,679 --> 01:11:21,560 जमाने में एक फर्रुख सियर नाम का बादशाह 1322 01:11:17,920 --> 01:11:26,640 था यहां जिसके जमाने में एक शायर था जाफर 1323 01:11:21,560 --> 01:11:28,560 जटली जो कि उस बादशाह के खिलाफ और उसकी 1324 01:11:26,640 --> 01:11:30,640 पॉलिसीज के खिलाफ और जिस तरह से वो 1325 01:11:28,560 --> 01:11:32,960 एक्सप्लइट कर रहा था लोगों को उसके खिलाफ 1326 01:11:30,640 --> 01:11:35,600 पोएट्री करता था एंड अल्टीमेटली ही वाज़ 1327 01:11:32,960 --> 01:11:38,880 कॉट एंड ही वाज़ हैंड। 1328 01:11:35,600 --> 01:11:41,360 हमारे दूसरे भी जो शायर हैं वो फैज हो, 1329 01:11:38,880 --> 01:11:46,000 सरदार जाफरी हो, मजरू हो, कैफी हो सब जेल 1330 01:11:41,359 --> 01:11:49,599 गए हुए हैं। यह अंग्रेज के जेल गए हैं। तो 1331 01:11:46,000 --> 01:11:52,479 ये जो रेवोलशनरी फरवर था वो उर्दू पोएट्री 1332 01:11:49,600 --> 01:11:55,120 में हर दौर में रहा है। 1333 01:11:52,479 --> 01:11:56,119 लेकिन उर्दू जैसे वर्ल्ड जो है इट इज़ अ 1334 01:11:55,119 --> 01:11:59,198 टर्किश 1335 01:11:56,119 --> 01:12:01,760 वर्ल्ड। जिसका मतलब है कंटोनमेंट एरिया। 1336 01:11:59,198 --> 01:12:04,158 नाउ कंटोनमेंट एरिया को आज हम समझते हैं 1337 01:12:01,760 --> 01:12:06,000 कि जहां सिर्फ सिपाही रहते हैं। दरअसल 1338 01:12:04,158 --> 01:12:08,479 जिसे आज आप सिविल लाइंस कहते हैं उस वक्त 1339 01:12:06,000 --> 01:12:12,800 तो कोई सिविल लाइंस का कांसेप्ट नहीं था। 1340 01:12:08,479 --> 01:12:16,079 तो वो सब सिविल लाइन का हिस्सा है। इट वाज़ 1341 01:12:12,800 --> 01:12:20,079 बाय एंड लार्ज एन अर्बन लैंग्वेज एन अर्बन 1342 01:12:16,079 --> 01:12:23,880 फिनोमना। तो उसका नाम तरहतरह के नाम पड़े 1343 01:12:20,079 --> 01:12:29,119 जैसे के हिंदवी फिर 1344 01:12:23,880 --> 01:12:33,119 ये ज़बाने उर्दू है मोहल्ला तो वो वो तो 1345 01:12:29,119 --> 01:12:35,000 जुबान और मोहल्ला तो गिर गए उर्दू बची तो 1346 01:12:33,119 --> 01:12:39,079 ये इस तरह से है 1347 01:12:35,000 --> 01:12:41,960 लेकिन सिपाही जो है 1348 01:12:39,079 --> 01:12:45,760 वो लिटरेचर नहीं बना 1349 01:12:41,960 --> 01:12:48,239 देते वो इतना सिंपल नहीं होता वो जब 1350 01:12:45,760 --> 01:12:50,880 सोसाइटी में चली जाती जाती है। जब मिडिल 1351 01:12:48,238 --> 01:12:52,879 क्लास के पास जाती है, जब यह सेंसिटिव 1352 01:12:50,880 --> 01:12:55,199 लोगों के पास जाती है तबान तब लिटरेचर 1353 01:12:52,880 --> 01:13:00,000 क्रिएट होता है। 1354 01:12:55,198 --> 01:13:03,719 सिपाही और तवा से जी सिपाही और तवा से 1355 01:13:00,000 --> 01:13:06,800 मिलके आपकी राय है मेरी नहीं 1356 01:13:03,719 --> 01:13:09,119 है। आजकल भी सिपाही तवाइयफों से बहुत 1357 01:13:06,800 --> 01:13:11,600 मिलते हैं। तो शैल वी एक्सपेक्ट अनदर 1358 01:13:09,119 --> 01:13:11,599 लैंग्वेज? 1359 01:13:14,399 --> 01:13:18,079 वेल, आई एम सॉरी। आई डोंट थिंक बिकॉज़ ऑफ़ 1360 01:13:16,640 --> 01:13:21,079 शॉर्टेज ऑफ़ टाइम वी कैन टेक मोर 1361 01:13:18,079 --> 01:13:21,079 क्वेश्चंस। 1362 01:13:21,760 --> 01:13:29,600 ओके वन लास्ट वन द यंग जेंटलमैन देयर। 1363 01:13:27,039 --> 01:13:32,319 आई होप यू हैव टू टर्ड सर। नहीं नहीं मगर 1364 01:13:29,600 --> 01:13:33,400 मैं आपको एक बात बताना चाहूंगा। आप देखिए 1365 01:13:32,319 --> 01:13:37,119 इसको 1366 01:13:33,399 --> 01:13:39,439 बरसों स्टेट पे ट्रेन नहीं मिली है। ये 1367 01:13:37,119 --> 01:13:42,000 जवान जिंदा क्यों है? यह सिपाहियों की वजह 1368 01:13:39,439 --> 01:13:46,559 से जिंदा है। या तवाों की वजह से? यह जबान 1369 01:13:42,000 --> 01:13:46,560 इसलिए जिंदा है कि आप यहां बैठे हुए 1370 01:13:48,359 --> 01:13:55,039 हैं। आपको उससे दिलचस्पी है। और अगर शेर 1371 01:13:52,960 --> 01:13:56,800 आपको कोई भी याद होगा तो उर्दू ही का याद 1372 01:13:55,039 --> 01:13:59,600 होगा। 1373 01:13:56,800 --> 01:14:01,679 है कि नहीं? 1374 01:13:59,600 --> 01:14:04,159 देयर इज़ अ यंग जेंटलमैन देयर हो। लाइक टू 1375 01:14:01,679 --> 01:14:08,719 आस्क यू सर। सर थैंक यू फॉर द लेक्चर। सर 1376 01:14:04,158 --> 01:14:12,479 इट वास रियली फुल ऑफ़ अवेकनिंग। अह सर, जो 1377 01:14:08,719 --> 01:14:17,840 एक 20 से 50ज़ में जो एक सरियलिज्म का जो 1378 01:14:12,479 --> 01:14:21,119 मूवमेंट था उसका इफेक्ट उर्दू पर क्या था? 1379 01:14:17,840 --> 01:14:23,119 जो वर्ल्ड वॉर के टाइम पे सरियलिज्म बहुत 1380 01:14:21,119 --> 01:14:24,960 ज्यादा नहीं मैं आपसे अर्ज किया लेकिन 1381 01:14:23,119 --> 01:14:27,840 उसमें क्या होता है? एव्री फैशन बिकम्स 1382 01:14:24,960 --> 01:14:30,239 इट्स ओन कार्टून। तो भाई सेलिज्म ठीक है। 1383 01:14:27,840 --> 01:14:33,199 सिंबॉलिज्म भी ठीक है। एब्स्ट्रैक्शन भी 1384 01:14:30,238 --> 01:14:35,039 ठीक है। लेकिन उसमें क्या होता है? लोग हद 1385 01:14:33,198 --> 01:14:36,479 से आगे गुजर जाते हैं। और यह इल्जाम मैं 1386 01:14:35,039 --> 01:14:38,319 सिर्फ इन पे ही नहीं लगा रहा। मैंने तो 1387 01:14:36,479 --> 01:14:41,039 प्रोग्रेसिव राइटर्स मूवमेंट पे भी लगाया 1388 01:14:38,319 --> 01:14:43,119 है। यही इल्जाम हद से मत आगे बैलेंस तो 1389 01:14:41,039 --> 01:14:45,679 रखो। अब मिसाल के तौर पे एक किस्सा सुनाता 1390 01:14:43,119 --> 01:14:48,479 हूं आपको और ये सच्चा इंसिडेंट है। एक 1391 01:14:45,679 --> 01:14:51,199 छोटी सी लिटरेरी कॉन्फ्रेंस थी। 1392 01:14:48,479 --> 01:14:55,039 कॉन्फ्रेंस क्या मीटिंग थी वो 50-60 आदमी 1393 01:14:51,198 --> 01:14:57,039 थे उसमें। तो उसमें एक जो सरल आप पोएट बोल 1394 01:14:55,039 --> 01:14:59,840 रहे हैं ना सर स्टिक वो खड़े हुए और 1395 01:14:57,039 --> 01:15:03,039 उन्होंने एक नज़्म सुनाई कि जिसका सेंस कुछ 1396 01:14:59,840 --> 01:15:05,600 ऐसा था कि मेरे घर के आंगन में एक अलगनी 1397 01:15:03,039 --> 01:15:08,399 है उस एलगनी पे कल मैंने एक सफेद चादर 1398 01:15:05,600 --> 01:15:11,760 टांगी थी सूखने के लिए लेकिन एक कौवा आया 1399 01:15:08,399 --> 01:15:14,719 उस पे बैठा उस पे बीट करके उड़ गया। बस ये 1400 01:15:11,760 --> 01:15:17,119 उनकी पोएम थी। तो फैज साहब इत्तेफाक से 1401 01:15:14,719 --> 01:15:19,920 उसे प्रिसाइड कर रहे जब वो माइक से हटने 1402 01:15:17,119 --> 01:15:22,238 लगे पोएट तो फैज साहब ने रोक लिया उन्हें 1403 01:15:19,920 --> 01:15:24,719 और कहा कि देखिए मैं अपनी जिहालत मानने को 1404 01:15:22,238 --> 01:15:26,959 तैयार हूं। इस नज़्म की सिंबॉलिज्म मैं 1405 01:15:24,719 --> 01:15:29,920 नहीं समझा हूं तो मैं चाहूंगा कि शायर 1406 01:15:26,960 --> 01:15:32,880 थोड़ा एक्सप्लेन कर दे। तो इससे पहले अगर 1407 01:15:29,920 --> 01:15:35,679 शायर कुछ बोलता ऑडियंस में से एक आदमी 1408 01:15:32,880 --> 01:15:38,000 खड़ा हो गया। और कहने लगा कि साहब सिंपल 1409 01:15:35,679 --> 01:15:40,880 सी नज़ आपकी समझ में क्यों नहीं आई? मुझे 1410 01:15:38,000 --> 01:15:43,198 कल ही इन शायर ने मेरे दोस्त हैं ये। 1411 01:15:40,880 --> 01:15:45,760 इन्होंने मुझे इस पोयम के मीनिंग बताए 1412 01:15:43,198 --> 01:15:48,559 हैं। तो शायर ने कहा बैठ जाइए। मैंने 1413 01:15:45,760 --> 01:15:48,560 मीनिंग चेंज कर 1414 01:15:53,479 --> 01:16:01,279 दिए। सो अह जावेद साहब, लेडीज एंड 1415 01:15:58,198 --> 01:16:04,158 जेंटलमैन, आई एम स्टैंडिंग बिफोर यू विथ 1416 01:16:01,279 --> 01:16:06,158 लॉट ऑफ विंग्स फीलिंग्स। वन ऑन द वन साइड 1417 01:16:04,158 --> 01:16:09,519 इज़ जावेद साहब, हु हैज़ डिलीवर सच अ 1418 01:16:06,158 --> 01:16:12,319 डिलाइटफुल टॉक एंड सच सो विथ सो मच 1419 01:16:09,520 --> 01:16:15,280 एलेक्वेंस। एंड ही हैज़ लेफ्ट अस स्पेल 1420 01:16:12,319 --> 01:16:18,559 बाउंड एंड इनथ्रोल्ड। एंड ऑन दी अदर साइड, 1421 01:16:15,279 --> 01:16:21,920 आई एम रिमेंबरिंग माय फादर हु लिव्ड ऑन 1422 01:16:18,560 --> 01:16:24,239 दिस प्लेनेट फॉर 100 इयर्स। जावेद साहब, 1423 01:16:21,920 --> 01:16:26,880 इफ ही हैड एवर मेट यू, ही वुड हैव बीन 1424 01:16:24,238 --> 01:16:30,879 रियली हैप्पी टू कन्वर्स फॉर आवर्स विथ यू 1425 01:16:26,880 --> 01:16:34,480 ऑन द नोसेस ऑफ़ सम गजल्स एंड ऑन सम शेयर्स 1426 01:16:30,880 --> 01:16:37,840 बट इट वास नॉट टू बी। लेडीज एंड जेंटलमैन, 1427 01:16:34,479 --> 01:16:40,718 अमंग यू आई सी मेनी फ्रेंड्स, फैमिली एंड 1428 01:16:37,840 --> 01:16:43,760 फ्रेंड्स ऑफ माय फादर आल्सो। एंड टू ऑल ऑफ 1429 01:16:40,719 --> 01:16:46,319 यू आई थैंक यू वि ऑल आवर हार्ट फ्रॉम माय 1430 01:16:43,760 --> 01:16:49,280 मदर साइड आल्सो जावेद साहब हमारे पास मां 1431 01:16:46,319 --> 01:16:53,479 भी है। जी जी 1432 01:16:49,279 --> 01:16:57,198 सो आई थैंक यू ऑल फॉर कमिंग हियर 1433 01:16:53,479 --> 01:17:00,559 एंड गिविंग अस सच अ मेमोरेबल टाइम एंड 1434 01:16:57,198 --> 01:17:08,759 जावेद साहब वंस मोर थैंक यू 1435 01:17:00,560 --> 01:17:08,760 [प्रशंसा]