[00:01] [संगीत] [00:17] नमस्कार। इस दिल से के एपिसोड [00:21] में हम ऐसी शख्सियत के साथ बात करेंगे जो [00:26] मतलब के हर घर हिंदुस्तान में [00:30] उनका हुनर जानता है। उनका नाम जानता है। [00:34] हिंदुस्तान में ही नहीं दुनिया [00:37] में। और जब हम उनकी बात सुनते हैं तो ऐसा [00:41] लगता है कि वाकई में दिल की बात भी है और [00:44] मन की बात भी है। वो है जावेद अख साहब। [00:48] थैंक यू वेरी मच फॉर बीइंग हियर। आप [00:51] डिस्टिंग्विश पोएट भी हैं, लिरिसिस्ट भी [00:54] हैं, स्क्रीन राइटर भी हैं, सोशल [00:57] एक्टिविस्ट भी [00:59] हैं। आपने हिंदी सिनेमा और लिटरेचर में जो [01:04] आपकी भूमिका रही है वो भी एक गजब है। और [01:08] आपके साथ हम राज्यसभा में मेंबर भी इकट्ठा [01:11] थे और हमने कुछ काम हमने आपके साथ भी किए [01:15] और आपकी शुरुआत मुंबई से हुई। वहां आप [01:19] पहुंचे तो आहिस्ताआहिस्ता आहिस्ता सालीम [01:22] के साथ आपने काम शुरू किया और शुरुआत आपकी [01:28] कमाल अरोही स्टूडियो में हुई 1981 में [01:32] आपने लिरिक्स शुरू कर दिए और कई पिक्चरें [01:37] बनी फिर और लगभग 24 पिक्चरों में 22 तो [01:41] एकदम हिट थी और उनमें से अंदाज है हाथी [01:45] मेरे साथी सीता और गीता जंजीर दीवार शोले [01:49] डॉन मिस्टर इंडिया मैं तो कई गना सकता [01:53] हूं। आपकी शुरुआत आपने एएमयू से की अलीगढ़ [01:57] मुस्लिम यूनिवर्सिटी जहां से आपने मैट्रिक [01:59] किया उसके बाद आपने फिर भोपाल से बीए किया [02:03] और आप एथियस्ट भी हो। आपसे जब सवाल पूछा [02:07] जाता है कि भगवान किधर है? तो आप पूछते [02:10] हैं बताइए। आप ही हमें बताइए और अगर भगवान [02:14] है तो इतनी गरीबी क्यों है? भुखमरी क्यों [02:17] है? इस तरह से भगवान की देखदेख में यह सब [02:22] अन्याय जो हो रहा है, वह क्यों हो रहा है? [02:25] आपको डार्क इन अवार्ड भी मिला। आपको चार [02:27] पांच फिल्म फेयर अवार्ड भी मिले। आपको [02:30] पद्मश्री भी मिला। आपको पद्म भूषण भी [02:32] मिला। क्या-क्या नहीं मिला। [02:35] तो आपसे हम आज आपके दिल की बात सुनना [02:39] चाहते हैं कि [02:41] हिंदुस्तान कैसे बदला, किस तरह बदला और आज [02:45] हम किस स्थिति में हैं? [02:48] देखिए मुझे ऐसा लगता है कब साहब पहले तो [02:51] मैं आपने एक जुमला बोला कि हम आपके साथ [02:54] राज्यसभा में थे गलत थे। मैं आपके साथ था। [02:57] एक दूसरे कि आपका जो हम लोगों की लाइफ में [03:00] हिंदुस्तान के जो आर्टिस्ट है म्यूजिशियन [03:04] हो [03:05] या राइटर्स हो इतना बड़ा कंट्रीब्यूशन है [03:08] जो मुझे लगता है आपको भी नहीं पता जो आपने [03:11] चेंज किया आपके अंडर योर वॉच जो चेंज हुआ [03:15] कॉपीराइट के लॉस [03:17] में 2012 में उसकी बहस अब क्या कानून बन [03:22] जाता है लेकिन फिर उसका इंप्लीमेंटेशन [03:24] पूरी तरह से उसमें भी समय लग जाता कभी-कभी [03:27] तो सिर्फ किताब में रह जाते हैं कानून। तो [03:29] थोड़ा वक्त लगा कुछ दर्शकों को तो नहीं [03:32] पता कि वो कानून क्या था। मैं अभी अर्ज [03:34] करता हूं। तो वो कानून जो था उसने एमावर [03:37] कर दिया कॉपीराइट में राइटर्स को और [03:39] कंपोजर्स को जिसमें बहुत लूप होल थे और [03:42] उन्हें कुछ नहीं मिलता था। करोड़ों की [03:45] रॉयल्टी में एक नया पैसा। अल्टीमेटली हुआ [03:48] यह कि इस कानून की वजह से जो आईपीआरएस जो [03:51] है एक ऑर्गेनाइजेशन गवर्नमेंट रिकग्नाइज [03:53] ऑर्गेनाइजेशन है इंडियन परफॉर्मिंग राइट्स [03:56] सोसाइटी कॉपीराइट जी जी तो परफॉर्मिंग [03:59] राइट्स का मतलब ये होता है कि गाना अगर बज [04:02] रहा है तो एक [04:03] है रिकॉर्डिंग राइट और दूसरे परफॉर्म [04:06] रिकॉर्डिंग राइट उसका है जिसने ये गाना [04:08] रिकॉर्ड किया है वो प्रोड्यूसर हो या [04:10] म्यूजिक कंपनी हो या कोई भी हो एंटिटी और [04:12] परफॉर्मिंग राइट उसे कहते हैं कि जो [04:14] परफॉर्म हो रहा है जब रिकॉर्ड हो रहा [04:16] तो उसमें म्यूजिक परफॉर्म हो रही है और [04:20] इनका कॉपीराइट होता है। तो पेपर पे तो था [04:23] ये कॉपीराइट लेकिन कानून में ऐसे लूप खोल [04:26] थे कि राइटर को या कंपोजर को कुछ मिलता [04:28] मिलाता नहीं था। कुछ ऐसे ही दो-ती% जो था [04:32] बांट देते थे। अच्छा खैरात की तरह भीख की [04:34] तरह। [04:35] जो आपके अंडर जो लॉ चेंज हुआ उसमें एमावर [04:41] हो गया कंपोजर और राइटर और फिर पांच साल [04:46] लगे हमें वो सोसाइटी जो गवर्नमेंट [04:49] रिकग्नाइज सोसाइटी आईपीआरएस को टेकओवर [04:52] करने में और आज पब्लिशर्स और राइटर कंपोजर [04:57] बराबर के नंबर पे हैं गवर्निंग बोर्ड पे [05:00] और 17 से 25 तक क्या हुआ है कि इस साल [05:06] यानी 24 में छ साल समझिए आप 730 करोड़ का [05:11] हमने रॉयल्टी जमा की है। और अगर ये इसी [05:15] तरह बढ़ता रहा तो हम 1000 करोड़ तो शुरुआत [05:19] में कितना था? 24 42 42 42 साल का [05:23] मैक्सिमम कवरेज होती थी। 42 करोड़। अच्छा [05:26] आज 700 30 करोड़ हो गई। जी हां। और यह वो [05:31] वक्त था जब पार्लियामेंट बड़े अफरातफरी [05:34] में और बड़े कंफेशन इसमें बीजेपी ने हमारा [05:37] साथ दिया। जी जी बिल्कुल बिल्कुल और ये हम [05:40] मेंशन ना करें। ऐसी चीजों में हमारा साथ [05:41] दे देते। बहुत यानी ये एक बिल था उस [05:46] हंगामी सूरत में भी जो दोनों हाउसेस में [05:49] यूनेमस पास पास तो मतलब चलिए कहीं अच्छी [05:52] बात की सबने ही और उसके बाद जब आया तो ऐसा [05:57] हो गया है तो वी हैव टू ओ यू अ वर्ड ऑफ़ [06:00] थैंक्स नहीं नहीं वो तो कुछ बात नहीं मैं [06:01] तो वैसे ही आपने ये बात से शुरुआत कर दिया [06:04] असल बात तो ये है कि बॉलीवुड हमेशा एक ऐसी [06:09] हस्ती इस किस्म की है कि बॉलीवुड से जब [06:11] आवाज निकलती थी और जो फिल्में बनती थी [06:15] उसका प्रभाव सारे हिंदुस्तान में बनता था। [06:18] तो वो तो उस समय का दौर है। आज ऐसा क्यों [06:22] नहीं? देखिए वक्त बदलता है। ये जो फिल्म [06:25] इंडस्ट्री है ये किसी कल्चरल वॉइड में [06:27] नहीं है। ये बिल्कुल इंटीग्रल पार्ट है [06:31] सोसाइटी का। अगर आप एक हाथ पकड़ के देखें [06:34] आप कहें अरे भाई हाथ में बुखार क्यों है? [06:38] ये जुमला सही नहीं होगा। बुखार बदन में [06:40] है। ऐसे थोड़ी हो सकता है कि सिर्फ हाथ [06:42] में बुखार है बाकी ठीक चल रहा है बॉडी तो [06:45] उसी तरह से बहुत सारी बातें ये लाइफ ऑफ यू [06:49] पैकेजेस हर पैकेज में कुछ अच्छा है कुछ [06:52] बुरा है अब लिबरलाइजेशन जो हुआ उससे मैं [06:56] समझता हूं कि कम से कम अर्बन मिडिल क्लास [06:59] में बहुत ज्यादा एफुलेंस आई है। मुझे याद [07:02] है अपना बचपन हम मिडिल क्लास के ही थे। हम [07:04] गरीब नहीं थे। मिडिल क्लास लोग थे। सिविल [07:06] लाइन में बंगले में रहते थे। [07:08] लेकिन मेरे घर में एक उषा का फैन था। [07:12] दो एक फैन जो थे टेबल फैन थे। एक छत का तो [07:15] एक ही था। और एक मर्फी रेडियो था। ये [07:18] हमारे पास जो मशीनें थी वो ये थी। आज आप [07:21] एक एवरेज घर देखिए। टेलीफोन बहुत बड़ी चीज [07:24] थी। मोहल्ले में जिसके पास टेलीफोन होता [07:26] था पूरा मोहल्ला उसकी इज्जत करता था। [07:28] इसलिए कि उससे रिलेशन खराब हो गए। तो ठंडी [07:31] अलमारी जो फ्रिज एयर है वो बहुत बड़ी चीज [07:35] थी। आपके घर में दावत होती थी तो मीठा [07:38] पड़ोसी के घर में फ्रिज में रखवा देते थे। [07:41] यह वक्त था। आज आप देखिए आज बच्चों को हम [07:43] भी बचाए 25 साल 20 साल के तो हसेंगे। [07:47] लेकिन कहीं हमने तरक्की तो की ना ऐसा [07:50] थोड़ी है। हम टेकन फॉर ग्रांटेड लेते हैं। [07:52] मिडिल क्लास में कांसेप्ट ही नहीं था कार [07:55] का। वो पूरा टांगा ले ले। यही बहुत बड़ी [07:58] चीज है। वरना स्ट्रेंज हम वो दिल्ली [07:59] स्टेशन से घर पे टांगे पे आते थे। अच्छा [08:02] और पूरा तांगा लेते थे तो अमीर आदमी थे [08:04] आप। वरना तो दो एक स्ट्रेंजर बैठे होते थे [08:07] आपके साथ उसी तरह हमारे साथ भी ऐसा ही हुआ [08:09] सब अलग-अलग जगह उतरते रहते चलिए इमेजिन आज [08:12] कोई मिडिल क्लास फैमिली नहीं होगी जिसके [08:14] वहां कार्य नहीं हो तो तरक्की हुई लेकिन [08:17] इसमें क्या एक और बात हुई जब कुछ नहीं था [08:21] तो हम थे अब मैं [08:24] है जो फ्री मार्केट है इसका एक कॉस्ट ये [08:28] है कि हम कमजोर हो जाता और मैं मजबूत हो [08:31] जाता लोग एंबिशस हो जाते हैं ये अच्छी [08:34] अच्छी बात है। लोग जानते हैं कि स्काई इज़ [08:36] द लिमिट। एनीबडी कैन बिकम एनीथिंग। ये [08:39] बहुत अच्छी बात है। ऐसा नहीं है स्टेटस को [08:40] है कि जो जहां पैदा हुआ है मुंशी का बेटा [08:43] मुंशी रहेगा। जमींदार का बेटा जमींदार है। [08:45] ये बात बॉलीवुड हम नहीं रहा। लेकिन हम का [08:49] कांसेप्ट जब कम होता है तो दिखाई देता है [08:52] हर जगह। ये ये मैनिफेस्टेशन है। जो [08:56] फिल्में हिंदुस्तान की वो हिंदुस्तान की [08:59] किस्मत नहीं बना रही। हिंदुस्तान फिल्मों [09:01] की किस्मत बनाता है। कौन सी फिल्म लोग [09:04] देखते हैं? क्या वो देखना चाहते हैं? एक [09:06] प्रोड्यूसर तो यही चाहता है ना फिल्म मेरी [09:08] चले। तो ही हैज़ एन आई टू द ग्राउंड। ही इज़ [09:11] नॉट अ सोशियोलॉजिस्ट। ही इज़ नॉट अ [09:13] पॉलिटिकल साइंटिस्ट। मगर उसको कॉमन सेंस [09:16] है उसका। वो धंधा है उसका। तो उसे मालूम [09:19] है कि अब ये नहीं चलेगा। तो वो सोसाइटी [09:23] रिजेक्ट करती है और एक्सेप्ट करती है [09:25] चीजों को। तो भाई मैं आपसे इस इसी बात पे [09:27] एक सवाल पूछता हूं। [09:28] देखिए मेरी अपनी राय है। गलत भी हो सकता [09:31] हूं। मैं सोचता हूं कि आज के हिंदुस्तान [09:34] में आम आदमी में बड़ा रोष है। गुस्सा भी [09:39] है कि हमारी बेहतरी नहीं हो रही, हमारी [09:42] आमदनी नहीं बढ़ रही, बेरोजगारी बढ़ी [09:45] है। और इसकी रिफ्लेक्शन बॉलीवुड में होनी [09:48] चाहिए। [09:50] लेकिन अगर जो आम जनता ये सोचती है उसकी [09:53] रिफ्लेक्शन आज बॉलीवुड में क्यों नहीं [09:55] होती? इसलिए कि टिकट जो है वह 700 और ₹800 [09:58] का है। आम जनता देखिए एक जमाना था अभी आज [10:02] भी है अमीरों के हॉस्पिटल है। गरीबों के [10:05] हॉस्पिटल है। अमीरों के होटल है। गरीबों [10:08] के होटल है। ये क्या हुआ है विद टाइम एंड [10:12] मल्टीप्लेक्सेस? अमीरों का सिनेमा हो गया [10:14] है। और गरीबों का सिनेमा। गरीबों का [10:17] सिनेमा बचा ही नहीं है। हाउ मेनी थिएटर्स [10:19] यू हैव इन इंडिया? [10:21] 14,000 के करीब थिएटर है। जिनमें से 803 [10:25] सदर्न स्टेट्स में है। तमिलनाडु, आंध्र [10:28] प्रदेश, कर्नाटक। अब बचे कितने? आपने आठ [10:32] ही निकाल दिए तो छह बचे। छह में से बड़ा [10:36] नंबर है वेस्टर्न कोस्ट पे महाराष्ट्र, [10:39] गुजरात। उसके बाद जो बचे वो आते हैं [10:43] हिंदी बेल्ट में। समझिए एक सवा 11 लाख 12 [10:49] लाख आदमी के ऊपर एक थिएटर है। 11 लाख 12 [10:53] लाख आदमियों के ऊपर एक सिनेमा हाउस है। [10:56] अनलाइक यूएसए जहां 1 लाख थिएटर है। जहां [11:00] 35 36 करोड़ आबादी है। अनलाइक चाइना जहां [11:04] 500 से ऊपर थिएटर है। हमारे हिंदी बेल्ट [11:07] में एक चार 5000 थिएटर आते हैं। तो वो [11:12] उसका वही नहीं है। आउटलेट फिल्म का। दूसरी [11:17] तरफ आ गए हैं मल्टीप्लेक्सेस। [11:19] मल्टीप्लेक्स में तो समोसा भी बिकता है [11:21] ₹200 का। टिकट होता है 500 ₹700 का। तो [11:25] मतलब एक चार आदमी की न्यूक्लियर फैमिली भी [11:28] जाए तो एक तीन ₹500 का खर्चा है। तो वो तो [11:32] प्रिविलेज ही क्लास देखती है। जब [11:34] प्रिविलेज क्लास देखती है तो गरीबों के [11:36] प्रॉब्लम क्यों डिस्कस किए? तो आपका मतलब [11:38] है कि प्रोड्यूस इसलिए नहीं होती क्योंकि [11:40] जो दर्शक हैं और जो जाते हैं वो तो अमीर [11:42] लोग हैं। उनको गरीबी से क्या लेना देना? [11:44] क्या लेना देना? भाई आप फाइव स्टार होटल [11:47] है। आपको ऐतराज नहीं हुआ। फाइव स्टार [11:50] हॉस्पिटल है। आपको ऐतराज नहीं हुआ। तो अब [11:52] फाइव स्टार सिनेमा से क्या प्रॉब्लम है? [11:54] हम चलिए छोड़िए। इंस्टीट्यूशन की बात [11:57] छोड़िए। इंडिविजुअली भी कोई आज के दिन जो [12:01] एक्टर हैं जी। वो भी अपनी आवाज नहीं [12:04] उठाते। जैसे यूनाइटेड स्टेट्स में मेरल [12:06] स्ट्रीप ने आवाज [12:08] उठाई सरकार के प्रति वहां की सरकार के [12:11] प्रति यहां भी सब चुप हैं वो क्यों पहले [12:13] तो होता था आप वाकई जानना चाहते हैं हां [12:16] बिल्कुल जानना चाहता हूं आपको कोई अंदाजा [12:18] नहीं मुझे बिल्कुल नहीं बिल्कुल मैं [12:20] बिल्कुल जानना चाहता हूं ये तो कुछ भी [12:21] नहीं है क्या है इनका नाम बहुत है मगर [12:23] वैसे क्या है इनका इकोनॉमिक स्टेटस इतना [12:26] तो नहीं ना ये सारी फिल्म इंडस्ट्री को एक [12:28] मिडिल क्लास जो इंडस्ट्री है जेब में रख [12:31] सकता है लेकिन ये बड़े-बड़े जो जैसे [12:33] क्रिकेट के लोग जेब में रखते हैं। जैसे [12:35] क्रिकेट के लोग भी इंडस्ट्रियलिस्ट जेब [12:37] में रख लेते हैं। वो है ही नहीं। यह [12:38] इंडस्ट्रियलिस्ट है असल में तो ना जो बड़ा [12:41] आदमी है जिसके पास पैसा है उनमें से कौन [12:44] बोलता है? कोई है? नहीं नहीं कोई जो [12:48] डिसेंट करता हो कौन है? कोई भी नहीं। तो [12:52] इतने बड़े-बड़े अंपायर्स वहां क्योंकि ईडी [12:55] पहुंच जाएगी। आपके लगा आपका नजरिया उस पे [12:57] है। [12:59] देखते तो कुछ ऐसा ही है हम कि मैरिन [13:02] स्ट्रिप ने इतना बयान दिया खड़े हो के [13:05] ऑस्कर में लेकिन उस पे इनकम टैक्स की रेड [13:09] नहीं [13:11] हुई। तो ये इनसिक्योरिटी वो रियली है नहीं [13:15] है। मैं इस बहस में क्यों पड़ूं? परसेप्शन [13:17] तो यही है। तो अगर यह परसेप्शन ये दहशत [13:21] दिल में होगी तो आदमी डरेगा। कि भाई वो [13:26] कहो ना ईडी आ जाएगी सीबीआ जाएगी इनकम [13:29] टैक्स आ जाएगा और हमारी फाइलें खोल देंगे [13:32] हमें ये करेंगे हमसे पूछे और इंडस्ट्री [13:34] फाइनेंस भी नहीं करेगी हम इंडस्ट्री [13:36] फाइनेंस भी नहीं करेगी फिल्म को ये भी तो [13:38] है ना तो ये सारे प्रॉब्लम्स है ये [13:41] प्रॉब्लम फिल्म इंडस्ट्री के नहीं है [13:43] फिल्म इंडस्ट्री से बाहर के हैं देश के [13:45] प्रॉब्लम फिल्म इंडस्ट्री भी तो अब वही [13:48] लोग तो वही है ना अब अलग-अलग काम कर रहे [13:51] हैं इस काम में जरा धूमधाम ज्यादा हो जाती [13:53] है वरना सब अपनी-अपनी नौकरियां कर रहे [13:55] हैं। अपने-अपने काम कर रहे हैं। जो कर [13:57] सकते हैं। वो सो द मिडिल क्लास कल्चर [14:00] दी जो कहते हैं खान मार्केट कल्चर इज नाउ [14:04] प्रिवेलिंग ओवर [14:06] बॉलीवुड। सो इट्स मैं तो खान मार्केट कई [14:09] बार गया हूं। मेरा तो घर पास में ही था। [14:10] जब मैं लोधी स्टेट में रहता था। तो मुझे [14:13] तो कोई कल्चर वहां नहीं। दुकानें देखी [14:15] मुझे बस। और दो-तीन अच्छे रेस्टोरेंट हैं। [14:17] खानावाना अच्छा मिलता है। वहां कल्चर क्या [14:19] है? [14:20] तो नहीं खत्म हो गया ना हिंदुस्तान का। [14:23] यही तो मैं कह रहा हूं। मार्केट में कल्चर [14:25] क्यों ढूंढ रहे हो भाई? हां तो वो भी [14:26] मार्केट हो गई। ये भी मार्केट है। कल्चर [14:28] खत्म हो गया। तो हिंदुस्तान का कल्चर मतलब [14:30] कि जो सभ्यता थी नहीं नहीं वो खत्म नहीं [14:33] हो सकता। खत्म नहीं हो सकता। नहीं हो [14:34] सकती। वो क्यों? वो वजह क्या है? देखिए [14:37] मैं आपको अपनी धरती ही की मिसाल दूंगा। एक [14:41] गंगा है, एक जमुना है। अभी हम लोग बहुत [14:43] देखिए जमुना की क्या हालत है। दिल्ली के [14:45] पास आप देख लीजिए। गंगा के बारे में बरसों [14:48] से बात चल रही है। उसको क्लीन करना है, [14:50] साफ करना है। यह गंगाजल वो जल होता था और [14:52] शायद अभी भी गंगोत्री से आप ले उसे बोतल [14:55] में रख दीजिए। 5 साल तक वो पानी खराब नहीं [14:58] होगा। खराब ही नहीं होता। अब वो उसमें [15:01] क्या जब वो नीचे आता है मैदान में तो [15:04] जितना उस एरिया का इंडस्ट्रियल वेस्टेज है [15:07] वो विदाउट ट्रीटमेंट नदी में जा रहा है। [15:11] ये आम आदमी की वजह से गंदी नहीं हो गई है। [15:13] सही बात है। ये इंडस्ट्रियल वेस्टेज ने [15:16] नदियों को खराब किया है। अमीर लोगों ने, [15:19] प्रिविलेज लोगों ने। वो जो इंडस्ट्री है [15:22] वो किसी बेचारे गरीब आदमी मजदूर की तो [15:25] नहीं है। आपने सीपीआई या सीपीएम क्यों [15:27] नहीं कभी जॉइ किया? मैं मैंने कभी नहीं। [15:29] ख्यालात तो आपके वैसे ही हैं। नहीं नहीं [15:31] जो सही बात जिसकी हो बहुत सारी बातों से [15:33] मैं उनसे डिसए्री भी करता हूं। मौका हुआ [15:36] तो उसका भी जिक्र कर दूंगा। [15:39] ये पोल्यूट हो गई है। जी हां। [15:41] लेकिन एक हमारा यह बिलीफ है कि एक और नदी [15:45] है यहां सरस्वती जो नीचे बहती है अंदर ही [15:51] अंदर सबके जेहन में है वो सरस्वती जो है [15:54] उसको इंडस्ट्रियल वेस्टेज गंदा नहीं कर [15:57] सकता। बहुत अच्छे। बहुत अच्छा कहा। [15:59] हिंदुस्तान वो सरस्वती है। यह जो ऊपर आप [16:02] देख रहे हैं ना यह आती जाती चीजें हैं। जो [16:06] असली हिंदुस्तान है वो नीचे बह रहा है और [16:09] बहता रहेगा उसे कोई नहीं रोक सकता। और जब [16:12] मौका होगा जब जरूरत होगी फिर वो पानी ऊपर [16:14] आ जाएगा। और ये गंदगी को कोई और धोए ना [16:18] धोए सरस्वती साफ कर देगी। ऐसा मैं वो तो [16:21] इतिहास हमें बताता है। जो शहंशाह हुए वो [16:24] गिरे भी जो बादशाह हुए वो खत्म भी हुए। [16:28] हां जो डिक्टेटर्स हुए वो खत्म भी हुए। [16:33] आप जो कह रहे हैं सही है लेकिन ये थोड़ा [16:35] सा अलग टॉपिक है। टॉपिक ये है कि क्या [16:37] हमारा कल्चर खत्म हो जाएगा? हमारी [16:38] सिविलाइजेशन मिटा देगा कोई नहीं मिटा [16:41] सकता। हिंदुस्तान में कितने लोग आए गए? [16:43] क्या अब आपसे फिर इस सवाल उन्होंने मिटा [16:46] दिया क्या? आप इससे सवाल पूछता हूं। उर्दू [16:49] लैंग्वेज भी हमारा पार्ट ऑफ कल्चर है। जी [16:51] हां। तो उसको मिटाने की कोशिश क्यों हो [16:53] रही है? लैंग्वेज ना सरकारें बनाती है ना [16:56] बिठाती हैं। यह उनका काम ही नहीं है और कर [16:58] भी नहीं सकती। लैंग्वेज सड़क पर बनती है [17:02] और सड़क पे मिटती है। ये आप जरूर कर सकते [17:05] हैं कि आप उसे उसका जो इकोनॉमिक एडवांटेज [17:10] है उस लैंग्वेज का उसे कट कर दे। ये कर [17:12] सकते हैं आप। तो थोड़ी सी वो अनाथ हो [17:16] जाएगी। मगर अनाथ भी तो दुनिया में रहते ही [17:19] है ना। ऐसा थोड़ी है आज मर गए हैं। उर्दू [17:21] की अहमियत हिंदुस्तान के कल्चर में क्या [17:23] रही? जरा बता दीजिए दर्शकों। [17:25] देखिए उर्दू लैंग्वेज क्या होती है? पहले [17:28] तो ये तय करें फिर देखेंगे उर्दू कसौटी पे [17:31] उतरती है कि नहीं? क्या लैंग्वेज अपनी [17:34] स्क्रिप्ट है? देखिए आप पंजाबी आप जानते [17:37] होंगे। पंजाबी जो है वो देवनागरी में भी [17:41] लिखते हैं, गुरुमुखी में भी लिखते हैं और [17:42] उर्दू स्क्रिप्ट में भी लिखते हैं। जी [17:44] हां। अच्छा मगर रहती तो पंजाबी है। उर्दू [17:47] स्क्रिप्ट में लिख के उर्दू नहीं हो जाती [17:49] या देवनागरी में लिख के वो हिंदी नहीं हो [17:51] जाती। और गुरुमुखी में लिख के सिर्फ [17:53] गुरुमुखी की नहीं हो जाती। स्क्रिप्ट नहीं [17:56] है। अगर स्क्रिप्ट होती जुबान तो इंग्लिश, [18:01] जर्मन, फ्रेंच ये सब लैटिन कहलाती। इसलिए [18:04] कि स्क्रिप्ट तो लैटिन की है। उनकी मांगे [18:06] की स्क्रिप्ट है। और स्क्रिप्ट कर जाती है [18:10] ट्रेवल एक जगह से दूसरी जगह। जबान अपनी [18:12] जगह रहती है। जबान नहीं जाती [18:15] कहीं। तो स्क्रिप्ट नहीं है तो फिर क्या [18:18] है? वर्ड्स है। अच्छा मैं कहता [18:21] हूं ये हॉल ब्राइट [18:26] चार वर्ड बोले जिनमें दो जो दो इंपॉर्टेंट [18:27] वर्ड थे हॉल और ब्राइट इंग्लिश के। मैं [18:29] इंग्लिश बोल रहा हूं। नहीं। या मैंने किसी [18:33] और भाषा में इंग्लिश के दो वर्ड यूज़ किए। [18:35] तो फिर भाषा क्या है? ये और है ने भाषा तय [18:38] की। [18:40] लैंग्वेज अपना ग्रामर अपनी सिंटेक्स [18:43] अब मुझे बताइए कि हिंदी और उर्दू की [18:46] सिंटेक्स में ग्रामर में क्या फर्क कोई [18:50] फर्क ही नहीं और होगा भी कैसे ये दोनों एक [18:53] मां की बेटियां है अच्छा वो कैसे वो एक [18:56] डायलग उसे कहते हैं जिसमें स्क्रिप्ट नहीं [18:58] हो बोल रहा है आदमी बोली नहीं लिखने को [19:00] कुछ नहीं है ये डायलग कोई 700 800 साल [19:04] पहले कुछ लोग परशियन स्क्रिप्ट में लिखने [19:07] लगे खड़ी बोली जिसे कहते हैं। अच्छा [19:11] परजियन स्क्रिप्ट में क्यों लिखने लगे? [19:13] परजियन का स्टेटस उस जमाने में एशिया में [19:16] वही था जो आज इंग्लिश का है दुनिया में। [19:19] ठीक बात। इवन मुगलों की मदद टंग परशियन [19:23] नहीं थी मगर बोलना पड़ता था उन्हें। हमारे [19:26] जो पेशवा पेशवा तो खुद ही वर्ड जो है वो [19:29] पर्शियन का है। उनका भी सरकारी काम जो है [19:32] वो पर्शियन में ही होता था। [19:34] शिवाजी महाराज वा द फर्स्ट पर्सन [19:36] जिन्होंने मराठी को भी परर्शियन को निकाला [19:38] नहीं मराठी को भी इंट्रोड्यूस किया सरकारी [19:41] काम को सही तो ये जो थी लैंग्वेज इट वाज़ द [19:45] लिंग ऑफ़ फ्रंका ऑफ़ द इलिट अच्छा वो [19:48] अवेलेबल थी तो सम पीपल स्टार्टेड [19:51] राइटिंग खड़ी बोली अच्छा इन पर स्क्रिप्ट [19:56] जो पहला नाम लोग लेते हैं अमीर खुसरो का [19:59] लेकिन जाहिर है कि उनका हाई प्रोफाइल हो [20:01] गया और भी लोग होंगे जो ऐसा करते होंगे। [20:03] वो इतने मशहूर नहीं हुए। यही लैंग्वेज [20:06] अलग-अलग स्टेजेस से गुजरती रही। वहां [20:08] हैदराबाद भी पहुंच गई और वहां डेवलप हुई। [20:13] लखनऊ में अलग कई स्टेट्स में तो ये सेकंड [20:15] लैंग्वेज है। जी जी अभी भी है। में है [20:18] यूपी में है। जी जी तो यही जो लैंग्वेज [20:21] महाराष्ट्र में भी है। यही लैंग्वेज जो है [20:23] ये उर्दू है। अच्छा उर्दू क्या फारसी है? [20:26] उर्दू क्या अरबी है? एक साहब ने आरजू [20:30] लखनवी साहब एक शायर थे लखनऊ के और [20:32] उन्होंने बड़े अच्छे-अच्छे गाने लिखे हैं। [20:34] वो न्यू थिएटर्स के बहुत गाने लिखे हैं। [20:38] तो किसी ने कहा साहब उर्दू अगर परर्शियन [20:40] वर्ड ना यूज़ करें तो उर्दू क्या है? अच्छा [20:42] हां। तो उन्होंने कहा कि देखिए हम सिर्फ [20:45] पर्शियन के हम तो पता नहीं कितनी लैंग्वेज [20:47] के वर्ड यूज़ करते हैं। हमारी उर्दू में [20:49] बहुत सारी लैंग्वेज के वर्ड। लेकिन उर्दू [20:52] डिपेंडेंट नहीं है पर्शियन पे। अब मैं एक [20:54] पूरी किताब लिखूंगा जो आपने बात कही वो [20:56] मुझे खराब लगी। जिसमें एक वर्ड ऐसा नहीं [21:00] होगा जो के परियन में जिसके रूट्स हो। [21:03] अच्छा और उसने पूरी किताब लिख दी पोएट्री [21:06] की। अच्छा जिसमें एक वर्ड नहीं था जो [21:09] कनेक्टेड हो पर्शियन से किसी भी तरह [21:11] डायरेक्टली इनडायरेक्टली। अब देखिए उनके [21:14] एक दो शेर सुनाता हूं मैं आपको। प्लीज [21:15] सुनाइए। काली घटा में कौंधा लपका वन में [21:20] जो कोयल कूक गई। जितनी गहरी सांस खींची थी [21:25] उतनी लंबी हुक गई। [21:27] वाह उसने भीगे हुए बालों से जो झटका पानी [21:31] झूम के आई घटा टूट के बरसा पानी अब ये जो [21:36] है ये कौन सी जबान है इसमें कोई फर्जन का [21:38] वर्ड नहीं और पूरी किताब उनकी ऐसी है नॉट [21:42] वन वर्ड तो हमारे यहां लैंग्वेज में हम [21:45] सबकी लैंग्वेज में जो वर्ड है इतने मिले [21:48] हुए हैं हमें पता भी नहीं है कहां से आए [21:50] हैं। नहीं वकालतनामा हलफनामा ये सब उर्दू [21:53] के वर्ड्स हैं। पंजाब खुद ही उर्दू का [21:54] वर्ड है। पंजाब खुद ही उर्दू अच्छा मैंने [21:56] सुना है। मैंने सुना है कि हिंदी हिंडावी [21:59] से आया है। ये ओरिजिनली इसका नाम हिंदवी [22:03] था। हिंदवी था। उर्दू का तो वो भी उर्दू [22:05] का है। जी जी जी तो उर्दू इज़ अल्टीमेटली [22:08] कोई भी लैंग्वेज हो। इट इज़ एन एक्यूमुलेशन [22:11] ऑफ़ [22:12] कल्चरल चेंज इन टर्म्स ऑफ हाउ यू स्पीक द [22:16] लैंग्वेज। कैसी आप बात करते हो वो हमारी [22:19] संस्कृति से जुड़ा हुआ है। बहुत जुड़ा है। [22:21] और जो हमारी मोरल वैल्यूस है वो उनको कौन [22:24] सा वर्ड सूट करता है वो भी ले लेते हैं। [22:26] देखिए मैं आपको अजीब मिसाल दूं। [22:29] किसी से आप कहे कि एक काम करो यार मेबख ले [22:32] लो 4.5 करोड़ की मिलती है। बड़ी अच्छी [22:34] गाड़ी है। वो आपसे ये कहे मेरी इतनी [22:37] हैसियत नहीं है। अच्छा तो खराब लगता है [22:39] ना? बिल्कुल। भाई मैं नहीं अफोर्ड कर [22:41] सकता। ये ठीक लगता है। हां। अब क्या आज [22:44] मेरी हैसियत नहीं है। बुरा क्यों लग रहा [22:46] है? और मैं अफोर्ड कर नहीं कर सकता। ठीक [22:48] क्यों लगता है? बिकॉज़ विद अफोर्ड ये [22:51] वैल्यू सिस्टम आता है कि अगर आपके पास [22:54] पैसा कम है तो कोई बुरी बात नहीं है। सही [22:57] बात है। हैसियत में औकात कम हो जाती है। [23:00] इसलिए कि ये तो फ्यूडरल टाइम से आया है। [23:03] वर्ड इसके वर्ड जो है वेस्टर्न वैल्यू से [23:06] है। जहां पर इतनी बुरी बात नहीं है कि आप [23:08] नहीं खरीद सकते। तो तो अफोर्ड आपको एक [23:12] पर्दा देता है जो हैसियत नहीं देता। यह [23:15] लैंग्वेज बड़ी सेंसिटिव चीज है। उसको आप [23:17] बेखरी में इस्तेमाल करें तो कुछ नहीं। [23:20] लेकिन वरना हर वर्ड जो है उसकी अपनी एक [23:22] हिस्ट्री है। उसके पीछे मोरालिटी है। एक [23:24] सर्टेन कल्चर है। ट्रेडिशन है। वर्ड बड़ी [23:28] सेंसिटिव चीज होता है। तमिलनाडु का [23:31] मुसलमान तमिल थोड़ी बोलता। वो उर्दू थोड़ी [23:33] बोलता। तमिल बोलता है। केरला में बशीर जो [23:35] था इतना बड़ा राइटर या बंगाल का बोल रहे [23:39] होंगे उर्दू। वो बोल रहे होंगे। कई करोड़ [23:41] लोग हैं जो हिंदी बेल्ट के लोग हैं। अच्छा [23:44] वही उर्दू भी बोलते हैं। और ये तो अब आपने [23:47] कर दिया इसलिए कि लैंग्वेज किसी रिलीजन की [23:51] लैंग्वेज हो ही नहीं सकती। जी हां [23:53] लैंग्वेज एंड रिलजन आर नॉट हो ही नहीं [23:56] इलॉजिकल। मतलब आप कह सकते हैं कि [23:59] क्रिश्चियन की क्या लैंग्वेज है? या हिंदू [24:01] की क्या लैंग्वेज है? हिंदू की लैंग्वेज [24:03] आप कहें हिंदी है तो तमिलनाडु में जाके [24:06] पूछिए कि है कि नहीं है? वो भी बहुत हिंदू [24:08] है। तो लैंग्वेज रीजंस की होती है। [24:11] करेक्ट। तो जो इस रीजन में जो मुसलमान है [24:14] उनकी भी कल तक ये आप जहां हैं और जहां से [24:19] आए हैं वहां तो आप कॉन्स्टेंटली सुनते [24:21] होंगे। पहले लोग फादर के बारे में बोलते [24:23] थे। अब 30-40 साल गुजर गए तो दादा के बारे [24:25] में। साहब मेरे जो फादर थे वो तो उर्दू ही [24:28] लिखते पढ़ते थे। क्या बहुत सुनते थे? बड़े [24:30] भारी। अब अपने दादा के बारे में बोलते [24:32] हैं। हमारे दादा तो साहब उर्दू उनकी किताब [24:34] नोटबुक भी रखी पूरी उर्दू में। मैं तो [24:36] नहीं पढ़ पाता। आपके ग्रेट ग्रैंडफादर तो [24:38] बड़े भारी स्कॉलर थे। वो तो सही है। मगर [24:41] आपकी मदर भी टीचर [24:43] और स्कॉलर थी। उर्दू लिखती थी। तब तो आपकी [24:47] सारी फैमिली की हिस्ट्री यही है। उर्दू से [24:49] आप पूरी जड़े हुए हैं। एक बात बताऊं आपको [24:52] सच कहूंगा और सच के सिवा कुछ नहीं कहूंगा। [24:55] ये पहली सरकार नहीं है। हां। [24:57] इतने बरसों से अगर लोगों को बच्चों को [25:00] उर्दू जिनकी मदद टंग उर्दू थी या मदर टंग [25:04] ये नहीं मुसलमान बच्चे पंजाब का तो हर [25:07] बच्चा उर्दू जानता था इरेिस्पेक्टिव ऑफ़ ह [25:10] रिलजन जो आज बोलते हैं मुझे दिल्ली में [25:14] लोग कि मेरे फादर तो साहब उर्दू ही का [25:17] अखबार पढ़ते थे। मेरे दादा तो उर्दू अखबार [25:19] ये सब मुसलमान नहीं है। नहीं सही बात है। [25:22] सही तो ये किसने खत्म की? ये कौन था? [25:25] तो जो भी प्रदेश था वहां उनकी पॉलिसी रही [25:28] लेकिन सेंट्रल गवर्नमेंट से [25:31] जो सपोर्ट मिलती थी सपोर्ट किसी ने नहीं [25:33] दी नहीं सेंट्रल गवर्नमेंट तो देते थे आप [25:37] यूपी के एक मिनिस्टर थे कांग्रेस के थे वो [25:39] उनका कौन वीर बहादुर सिंह उन्होंने कहा था [25:42] कि मैं उर्दू का मुंह काला करके गधे पे [25:45] बिठा के घुमाऊंगा हो अच्छा तो ये जो उर्दू [25:48] खत्म हुई है या ये जो आपका सच कमीशन [25:51] रिपोर्ट है सच बात करते हैं ये उसने [25:54] रिपोर्ट दी के यह मुसलमान तो ज्यादातर [25:58] दलित से भी बुरी हालत में है। यहां वो तो [26:00] है वो तो जिस आदमी ने अनाउंस किया था कि [26:02] उर्दू मुसलमानों की जबान है वो आदमी उर्दू [26:05] नहीं बोल सकता था जिसका नाम था जिरा हम [26:08] अच्छा ये जरा देखिए सही बात है और दुनिया [26:11] में पाकिस्तान का एक रिकॉर्ड है जो [26:13] अनब्रेकेबल हम जैसे एक जिम लेकर था बॉलर [26:18] उसका रिकॉर्ड कभी नहीं टूटेगा 19 विकेट [26:20] उसने एक टेस्ट मैच में 19 विकेट लिए 19 [26:22] उसी तरह से ये रिकॉर्ड भी नहीं टूटेगा [26:25] दुनिया में बहुत पार्टीशंस हुए ऐसा नहीं [26:27] है कि हिंदुस्तान में ही हुआ था बहुत जगह [26:29] जगह हुए हैं। हर जगह माइनॉरिटी इवन इन [26:32] इंडिया माइनॉरिटी ने पार्टीशन मांगा। [26:34] पाकिस्तान का डिस्टिंशन यह है कि वहां [26:37] मेजॉरिटी [26:39] ने पार्टीशन मांगा। 10 करोड़ आदमी ने 7 [26:43] करोड़ आदमी से पार्टीशन मांगा कि हम अलग [26:46] होना चाहते थे। मेजॉरिटी अलग होना चाहती [26:48] थी। जो मेजर इश्यूज थे उनमें एक लैंग्वेज [26:51] भी थी। [26:52] 10 करोड़ मुसलमान जो थे वह कह रहे थे हम [26:55] बंगाली हैं। हमारी मदर टंग बंगाली है। हम [26:57] पर उर्दू मत इंपोज करो। मेरी मदर टंग है [27:00] उर्दू। मुझे बहुत मोहब्बत है उससे। बट आई [27:02] स्टैंड बाय दोज़ बंगाली। हु वांटेड टू सेव [27:05] देयर मदर टंग। लाइक आई वांट टू सेव माय [27:07] मदर टंग। [27:09] तो ये जो है इतने बड़े सबूत के बाद भी अगर [27:13] समझ में ना आए लोगों के कि भाई उर्दू [27:16] मुसलमानों की आवाज नहीं है। 10 करोड़ [27:18] मुसलमान कह रहे हैं हम मुल्क तोड़ देंगे। [27:20] उर्दू नहीं पढ़ेंगे। जी उसके बाद भी आप ना [27:23] समझे तो ना समझिए तो अभी पीछे मैं आपको [27:26] इंटरेस्टिंग बात बताऊं कि सुप्रीम कोर्ट [27:28] में मामला आया और मामला यह था कि एक [27:31] म्युनिसिपल कॉरपोरेशन आपको मालूम है [27:33] म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के बोर्ड लगते हैं [27:36] उसमें ऊपर मराठी में लिखा जाता है और नीचे [27:39] उर्दू में लिखा जाता [27:41] है। तो एक फैसला आया कॉरपोरेशन का कि भैया [27:45] ये उर्दू जो नीचे से लिखा जाता है इसको [27:48] मिटाना चाहिए। उसके बाद एक 1900 मेरे [27:51] ख्याल 2022 में एक एक्ट भी बन गया। तो यह [27:54] सारा मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। तो [27:57] सुप्रीम कोर्ट ने वही बात की जो आपने अभी [28:00] कही कि ये दुर्भाग्य है हमारा कि कोई [28:04] जुबान को धर्म के साथ जोड़ा जाए। और इसलिए [28:08] उर्दू की अहमियत कमती हो जा रही है। जो [28:11] उन्होंने कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है [28:12] कि आहिस्ताआहिस्ता उर्दू जुबान को मुस्लिम [28:16] के साथ जोड़ा जा रहा है। रिलीजन के साथ [28:18] जोड़ा जा रहा है। हालांकि उर्दू जुबान इज [28:21] पार्ट ऑफ़ आवर सिंक्रेटिक कल्चर। ये [28:23] सुप्रीम कोर्ट ने अभी मैंने पढ़ा। का भी [28:26] इतना जबरदस्त जजमेंट दिया है और उन्होंने [28:28] यह भी कहा है कि कई प्रदेशों में तो उर्दू [28:30] सेकंड लैंग्वेज है और इसमें कोई गलत बात [28:33] भी नहीं है। और हिंदुस्तान में कहते हैं [28:36] कि भ 2075 2011 के सेंसस में 2075 [28:40] लैंग्वेजेस हैं। हालांकि शेड्यूल एट में [28:42] तो 22 ही हैं। डायलग्स नहीं नहीं [28:45] लैंग्वेज। डायलॉग्स तो इससे भी कहीं [28:47] ज्यादा हैं। वो लैंग्वेज कैसे जोड़ते हैं [28:49] कि अगर 10,000 लोग एक लैंग्वेज बोल रहे हो [28:52] तो फिर वो लैंग्वेज कहलाई जाती है। नहीं [28:54] वो लैंग्वेज की अगर स्क्रिप्ट अलग है हां [28:57] नहीं तब वो जाके सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा [28:59] है जो 10,000 की संख्या हो तभी लैंग्वेज [29:01] कहलाई जाती है। बाकी जो डायलग्स हैं वो तो [29:03] कई हैं। हजारों में है। तो तो इसका मतलब [29:08] ये सुप्रीम कोर्ट ने दुख व्यक्त किया है। [29:11] बहुत बढ़िया जजमेंट है। इसमें एक बड़ी [29:12] अच्छी उन्होंने एक बड़ी अच्छी पोयम लिखी [29:14] है। मैं आपको सुनाना चाहता हूं। कहती है [29:17] किसने लिखी ये उसी [29:19] में ये नहीं कहा किसने लिखी है? हां जज [29:22] साहब ने इसको कोट किया है। उर्दू है मेरा [29:25] नाम मैं खुसरो की पहेली। उर्दू है मेरा [29:30] नाम। मैं खुसरो की पहेली। क्यों मुझको [29:33] बनाते हो [29:35] तासुब का निशाना। [29:37] हां ये सुनिए ना मैंने। बहुत जगह गाई [29:40] तासुब का निशाना। मैंने तो कभी खुद को [29:42] मुसलमान नहीं माना। देखा था कभी मैंने भी [29:46] खुशियों का जमाना अपने ही वतन में हूं मगर [29:50] आज अकेली उर्दू है मेरा नाम मैं खुसरो की [29:54] पहेली आपको एक इंटरेस्टिंग बात हिस्टोरिकल [29:58] बताऊं 1897 में पहली दफा इसी दिल्ली में [30:02] एक स्कॉलर इस्लामिक स्कॉलर रहते थे शाह [30:04] अब्दुल कादिर उन्होंने कुरान का [30:08] ट्रांसलेशन उर्दू में किया एस लेट एस 18 [30:12] 97 इसलिए कि उसके 700 800 साल पहले सिंधी [30:15] में हो चुका था कुरान का तर्जुमा। [30:18] तो जितने हिंदुस्तान में बड़े काजी थे और [30:24] मुल्ला थे बड़े सबने अब्दुल कादिर के [30:27] खिलाफ फतवा दे दिया। अच्छा कि इस आदमी की [30:30] हिम्मत कैसे हुई कि इस पाक किताब का [30:33] तर्जुमा इस गंदी गली हिडन लैंग्वेज में [30:37] किया है। [30:39] कि ये इस लैंग्वेज में कुरान का [30:41] ट्रांसलेशन कर दिया। [30:43] तो यह तो पाप है। जैसे कि तुलसीदास ने [30:47] किया था पाप रामचरितमानस लिख दिया था जो [30:50] संस्कृत में थी रामायण उसको आम आदमी की [30:52] जुबान में ट्रांसलेट कर दिया तो पाप था। [30:55] उन्हें निकाल दिया गया था बिरादरी से उस [30:58] उन्होंने एक चौपाई भी कही थी बड़ी अच्छी [31:00] थी। दूत कहो राजपूत [31:03] कहो अवधूत कहो कि जुलाहा कोहू कोहू की जात [31:07] बिगाड़ कोहू की बेटी से बेटा ना ब्याह [31:10] कोहू की जात बिगाड़ ना चोू मांग के खबो [31:13] मस्जिद में सोइबो लेबे का एक ना देबे का [31:16] दोहू ऐसे उन्हें भी तो ये फंडामेंटली [31:20] माइंडसेट तो एक ही होता है कहीं भी हो तो [31:22] उसको तो निकाल दिया था उसी के एक 60 70 [31:26] साल बाद एक आर्टिफिशियल दाढ़ी चिपका दी गई [31:28] उर्दू के और टोकी सर पे रख दी। इसलिए कि [31:31] अब तो डायवर्जन 1857 के बाद तो खासतौर से [31:35] इन्हें डिवाइड करना था। यह जो यूनाइट होके [31:37] अंग्रेज के खिलाफ लड़े थे तो इसमें शिज्म [31:40] पैदा करना जरूरी था और इंटेंशनली हिंदी और [31:43] उर्दू को अलग करने का इंस्टीटश ने काम [31:47] किया। ये जो है सेमी स्क्वेंस है। ये एक [31:51] दूसरे के बिना नेहरू जी ने कहा कि [31:53] हिंदुस्तानी शुड बी आवर लैंग्वेज। [31:55] हिंदुस्तानी शुड बी जी जी सही है सही है [31:58] ये जो है ये ये एक दूसरे आप बोल ही नहीं [32:01] सकते लोगों को यही नहीं मालूम क्या बोल [32:03] रहे हैं कि ये उर्दू है कि हिंदी है अच्छा [32:06] चलिए एक आदमी यूपी का रहने वाला है वो [32:09] आदमी पढ़ा लिखा नहीं है तो ऐसा यूपी में [32:12] मिलना मुश्किल नहीं है [32:15] वो आदमी कहता है खाना खाओगे पानी पियोगे [32:19] क्या घर जा रहे हो कल आ जाना ये क्या है [32:24] ये हिंदी के उर्दू लिखता तो है नहीं वो [32:26] पढ़ता भी नहीं है। ये जो बोल रहा है ये [32:27] क्या है? हिंदुस्तानी है। अच्छा यही हिंदी [32:30] है। यही उर्दू है। सही बात। कोई आप जुमला [32:33] जो है हिंदी के बगैर उर्दू सेंटेंस [32:36] कंप्लीट ही नहीं कर सकते। इसलिए ग्रामर तो [32:38] दोनों की एक है और ना उसकी आप सेंटेंस बना [32:41] सकते हैं। यह उसको आर्टिफिशियली [32:44] संस्कृताइज करके और आर्टिफिशियली अर्बनाइज [32:47] करके अरब की ओर वर्ड डाल के कन्वेंशनल [32:51] वर्ड जो हम लोग बोलते ही नहीं है। इसे [32:53] आर्टिफिशियली अलग करने की कोशिश करते हैं। [32:56] सिनेमा क्या है? ये सिनेमा की भाषा देखिए। [32:59] ये हिंदी उर्दू की मिली हुई जबान है। उसे [33:01] आप हिंदी सर्टिफिकेट दे दीजिए। लेकिन ये [33:04] क्या दूरदर्शन की हिंदी तो नहीं होती ना [33:06] फिल्में ये कौन सी हिंदी ये वो हिंदी है [33:09] जो उर्दू की जुड़वा बहन है जैसे आपने कहा [33:12] जुबान और स्क्रिप्ट में बहुत अंतर है। हां [33:14] तो ये जो है उसको आप ज्यादा ये होगा कि आप [33:19] उसकी स्क्रिप्ट खत्म कर देंगे जो हो रही [33:22] है। लेकिन ये सारी पोएट्री जो है उर्दू [33:25] पोएट्स की ये देवनागरी में अवेलेबल है। और [33:28] देवनागरी में इट सेल्स लाइक हॉट केक। ऑलदो [33:32] आई डोंट नो यह हॉट केक्स कहां बहुत बिकते [33:34] थे। मुझे पता नहीं बावरा है। तो हां मैंने [33:37] देखी नहीं कोई जगह जहां हॉट केक बहुत बिक [33:39] रहे हो। तो मगर बिकते हैं। अब मेरे जैसे [33:43] शायर की कोई मेरे ख्याल से 26 या 27वीं [33:46] एडिशन छप गया है। 26 या 27वा एडिशन आपकी [33:52] वजह से। अरे मगर वह किताब देवनागिरी में [33:55] शायरी उर्दू की है। मैंने तो एक वर्ड भी [33:57] नहीं चेंज किया। वही है जो नहीं आप सरल [33:59] तरीके से बोलते हो। बड़े सरल तरीके से सरल [34:02] तरीके से बोलना चाहिए। लोग समझते हैं। मगर [34:05] जुबान जो है वही वो इसीलिए तो होती है [34:07] जुबान। इसीलिए और इसीलिए मैं कह रहा हूं [34:10] कि 26वीं 27वीं जो आप कह रहे हो वो उसकी [34:13] मैजिशियन आ रही है। ये तो कोशिश बेकार है। [34:16] ये मीनिंगलेस है। आप ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी [34:19] देखिए। तो उनका प्रेफरेंस आप जब नया [34:21] एडिक्शन आएगा तो कहते हैं हमने 50 पॉइंट [34:24] इस बार पढ़ाए हैं। इवन जुगाड़ हैज़ एंटर्ड [34:27] जुगाड़ जुगाड़ है एंटर्ड आई नो ऑक्सफोर्ड [34:29] यूनिवर्सिटी डिक्शनरी में जा चुका है। हम [34:32] क्या कहते हैं अभी हम 500 वर्ड निकालने [34:35] वाले हैं। जमाने ऐसे नहीं जिंदा रहती हैं। [34:39] जो लोग ये कर रहे हैं वो हिंदी का नुकसान [34:41] कर रहे हैं। हिंदी अमीर है इसलिए कि उसके [34:44] पास सब लैंग्वेज के वर्ड है। आप उसे वर्ड [34:46] निकाल के गरीब बना रहे हैं। [34:49] ऐसा नहीं होता। चलिए एक एक और बात पे आते [34:52] हैं। जी वो थोड़ी गंभीर है और उसका जिक्र [34:57] मैं इसलिए कर रहा हूं कि आपकी मैं राय [35:00] चाहता हूं कि जो 22 तारीख को जो हादसा [35:02] हादसा हुआ जम्मू कश्मीर में उसका [35:08] नतीजा मुझे नहीं मालूम क्या होगा। [35:11] लेकिन सारा देश एकजुट [35:15] होकर कश्मीर एकजुट होकर बोला कि [35:20] ऐसा हम नहीं होने देंगे नहीं होना [35:24] चाहिए और ये पाकिस्तान तो हर करता रहता है [35:29] ये सब हमने आरोप भी लगाया पाकिस्तान पे वो [35:32] सही भी [35:33] है अब मैं आपकी राय चाहता हूं कि किस [35:40] तरीके से आप इसको देखते हैं। देखिए मैं तो [35:43] इस बारे में एक दो जगह बोल भी चुका हूं और [35:48] स्टेज से भी और कैमरा के सामने भी ये बहुत [35:51] हो गया है और मैं शायद मुझे बहुत इसलिए भी [35:55] लग रहा है कि मैं मुंबई में था जब मुंबई [35:57] में हुआ और तीन दिन तक वो शहर की क्या [36:01] हालत थी। कैसी [36:04] लाशें विक्टोरिया टर्मिनस के प्लेटफार्म [36:08] पे पड़ी हुई थी। अभी हम तो वो होटल जो है [36:12] उनका क्या हाल था? किस तरह से लोगों को [36:14] मारा [36:15] गया और कहां से लोग आए भाई? इस पे आप [36:19] इंकार करें। मैंने तो पाकिस्तान में लाहौर [36:22] गया था। मैं फैज अहमद फैज के उसमें फैज [36:25] मेला जो है वो तो अच्छे लोग हैं। उन लोग [36:28] पे तो इल्जाम लगता है कि इंडियन एजेंट [36:30] हैं। ये तो पैसिफिस्ट है। ये वो वहां [36:33] मुल्लाओं को ये लोग बिलकुल नहीं पसंद है। [36:35] इसीलिए मुझे पसंद है। तो उन्होंने ही मुझे [36:37] वीजा किसी तरह दिलाया। वरना मुझे वीजा [36:40] पाकिस्तान रिफ्यूज कर चुका है पहले। जी जी [36:43] तो वहां पर मुझसे यही सवाल किसी ने किया [36:46] खड़े होके जब 25 हजार आदमी हॉल में बैठे [36:49] थे कि हम तो आपसे बहुत अच्छी तरह मिलते [36:52] हैं। देखिए हमने आपको कैसे रिसीव किया है [36:54] और कितनी इज्जत दी है और आप लोग पता नहीं [36:56] हमारे बारे में क्या समझते हैं कि हम सब [36:58] टेररिस्ट हैं। हमने आप पे बम फेंक दिया। [37:00] क्या गोली चलाई आप पर? एक महिला ने आपसे [37:03] जब हां मैडम ने पूछा एक तो मैंने कहा और [37:07] हम तो कितने खुले आर्म्स के साथ बाहें खोल [37:10] के आपसे मिलते हैं। आप लोगों को पता नहीं [37:12] क्या कॉम्प्लेक्स है। मैंने कहा ये बात तो [37:14] मैं आपसे तकक्लुक में बात नहीं कर सकता [37:16] हूं। आपने सवाल ऐसा कर दिया है। तो सच ये [37:19] है कि हमारा रिकॉर्ड क्या है कि लता ये [37:23] नुसरत फतेह अली आए मेहदी हसन आए, गुलाम [37:26] अली आए। हमने तो बड़े-बड़े फंक्शन किए [37:29] हिंदुस्तान में। फैज अहमद फैज हु वाज़ अ [37:32] पोएट। यस ऑफकोर्स। एंड आई विल नॉट कॉल हिम [37:34] अ पाकिस्तानी पोएट। आई विल कॉल हिम। मैं [37:36] आपको एक छोटी पर्सनल बात बताऊं छोटी सी। [37:38] आई एम सॉरी टू इंटरप्ट यू कि मेरे फादर [37:40] वकील थे लाहौर में जी। तो जब मंटो का [37:43] ट्रायल हुआ तो फैज अहमद फैज विटनेस थे। [37:46] विटनेस थे। तो मेरे फादर वकील थे। अरे [37:48] वाह। और वो उनके बड़े दोस्त बने। और जब हम [37:52] अपने घर जाते थे इसलिए मुझे उर्दू से बड़ी [37:55] दिलचस्पी है क्योंकि जब मैं चंडीगढ़ घर [37:57] जाता था तो बात केवल उर्दू शायरी की होती [38:00] थी और मेरे फादर और मेरे सबसे बड़े भाई दे [38:03] नो सो मच ऑफ उर्दू लिटरेचर दैट आई फील के [38:08] मैं मुझे लगता है कि मैं मुझे भी ऐसा हो [38:12] मुझे भी उस उस जुबान से तैयारी शुरू कर दी [38:15] और क्या मैंने तो दूसरे दूसरी तो तरीके से [38:19] की लेकिन ये हमारा फैज अहमद के साथ अटल [38:22] बिहारी वाजपेई साहब उस वक्त प्राइम [38:24] मिनिस्टर थे। फैज को ऐसा ट्रीटमेंट मिला [38:28] था इस मुल्क में जैसे कोई हेड ऑफ द स्टेट [38:31] आए। वो जहां भी गए राजभवन में ठहरे। सामने [38:35] एक लाल बत्ती की गाड़ी चलती थी। उनके एक [38:38] गाड़ी में वो होते थे। मतलब उनको रेड [38:41] कारपेट बिछा दिए गए। उनके लिए हाजिर [38:43] हिंदुस्तान के भी बहुत बड़े-बड़े पोएट और [38:46] राइटर्स के अब्बास सरदार जाफरी कैफी यादमी [38:49] ये लोग गए हैं लाहौर भी गए हैं कराची इनको [38:52] कभी पीटीवी पे नहीं बुलाया गया [38:55] सही हमारे यहां तो ये हाल था अभी तो [38:58] दूरदर्शन बदल गया है कि कोई कराची से सड़क [39:02] पे झाड़ू देने वाला आता था तो दूरदर्शन पे [39:04] इंटरव्यू होता कौन-कौन सी सड़कों पे आप [39:06] झाड़ू देते आपकी झाड़ू किस तरह की है ये [39:09] इंटरव्यू होता था हमारा तो कोई राइटर [39:13] कोई राइटर कितना भी बड़ा हो पी टीवी नहीं [39:15] इनवाइट करती थी। अब तो उनके प्राइवेट [39:18] चैनल्स आ गए हैं तो अभी फिर भी वो बात कर [39:20] लेते हैं। पी टीवी नहीं तो आप लता मंगेशकर [39:24] बोथ हैंड्स डाउन द मोस्ट पॉपुलर इंडिया [39:27] इंडियन इन 50 एंड 60 एंड 70 उसका आपने कभी [39:32] बुला के शो किया। हमने तो बहुतों के किए। [39:34] ये तो आप गलत कह रही हैं। और मैंने कहा कि [39:37] आप मुझे बता रही हैं कि आपने कोई बम मुझ [39:40] पे नहीं फेंका। कोई गोली नहीं चलाई। मैं [39:43] तो मुंबई का रहने वाला हूं। मैंने तो अपने [39:45] शहर को जलते देखा है। तो जो लोग आए थे [39:47] जलाने वो स्वीडन से तो नहीं आए थे और ना [39:51] इजिप्ट से आए थे। [39:54] तो ये हैद थी थोड़ी सी और ये एक बार नहीं [39:59] बहुत बार हुआ है। वो कुछ कहे बाहर के [40:02] मुल्क के ऐसा कंट्रोल कर लो और वैसा कर [40:04] लो। खुद करते हैं। इन पे जरा सी आंच आ जाए [40:07] तो यह तो जाके पूरी बस्तियों के बस्तियां [40:09] और शहर के शहर बमबाड कर देते हैं। यह हमें [40:12] सिखा रहे हैं मॉडरेशन। [40:14] ये इनकी राय की हिंदुस्तान को जरूरत नहीं [40:16] है। आई थिंक टाइम हैज़ कम। आई हैव नथिंग [40:20] अगेंस्ट द पीपल ऑफ़ नोबडी हैज़ एनीथिंग [40:23] अगेंस्ट द पीपल। नो एक्चुअली दे आर ट्रैप [40:25] पीपल। अब्सोलुटली। दे आर द बस्ट सफरर्स। [40:27] वो तो वहां उनके नीचे रह रहे हैं। हम तो [40:30] पड़ोस में यहां से देख रहे हैं। गड़बड़ [40:33] वहां पर है। इस्टैब्लिशमेंट [40:36] मिलिट्री मिलिट्री [40:37] मिलिट्री एंड मुल्ला [40:40] ये जो फंडामेंटलिस्ट है वो भी बहुत टेढ़ा [40:44] है। खतरनाक है। ये तीन हैं जिनके उनका [40:49] क्या है कि उनका एकिस्टेंस का रीजन नहीं [40:51] बचेगा। अगर हिंदुस्तान से रिलेशन ठीक हो। [40:54] तो फिर तुम क्यों? बट जावेद साहब यह तो [40:56] चलता रहा है। उडी हुआ, पुलवामा हुआ मतलब [41:02] यह पठानकोट हुआ, यह हुआ उससे [41:05] पहले पीट के कुछ ना कुछ तो करना पड़ेगा। [41:09] 100% यही यह मेरी राय नहीं है। मुझे बहुत [41:12] खुशी है कि इस बारे में अह पहली बार ऐसा [41:15] हुआ है कि सारी अपोजिशन पार्टीज ने विदाउट [41:18] एनी इफ एंड बट अह सरकार से कहा है कि हम [41:21] आपके साथ हैं। सारा देश उनके साथ है। [41:25] बिल्कुल है। व्यक्ति नहीं है। और क्या [41:27] करेंगे? इतनी मुझे समझ होती तो फिर मैं [41:30] कहीं मिनिस्टर होता वो तो मैं हूं नहीं। [41:32] लेकिन कोई भी नहीं जानता। यह कि कुछ एक [41:36] ऐसी बात होनी ही चाहिए कि जिससे वहां की [41:39] आर्मी और उनका आर्मी चीफ क्या मैंने उसपे [41:42] देखा YouTube पे स्पीच मैंने देखी ये [41:46] कितना इनसेंसिटिव आदमी है इसको एक बात का [41:49] ख्याल नहीं भाई हम बुरे लोग हैं इंडियन [41:51] बड़े खराब लोग होते हैं तो हमको गालियां [41:53] दो ना तुम ये कह रहे हो कि हिंदू ऐसे होते [41:57] हैं तुम्हारे मुल्क में चलो दो ही परसेंट [42:00] होंगे 2ाई% होंगे हिंदू रहते हैं ना [42:03] तुम्हें उनकी कोई इज्जत नहीं है नहीं उनको [42:06] क्या इज्जत है अपनी पावर मुझे ये बताइए [42:08] तुम हिंदुस्तानियों को गाली दो तो मेरी [42:10] समझ में आएगा कि भाई हम बड़े खराब लोग हैं [42:13] हम देखो कारगिल में घुस गए थे हम कश्मीर [42:16] में कई बार घुस गए थे हम तो सारे खराब काम [42:19] तो हम करते हैं ना तुमने तो आज तक कुछ [42:21] नहीं किया बुरा तो मैं मान लेता हूं मगर [42:24] तुम्हें अपने मुल्क में जो हिंदू रहते हैं [42:27] यू आर उनकी तो इज्जत करो उनकी तो इज्जत [42:29] करो तुम किस तरह के आदमी हो तुम वो तो साफ [42:33] जाहिर कहता है कि जे एंड के इज़ द जगर नॉट [42:36] दैट वी हैव [42:38] यू नहीं यू डोंट हैव मे बी इट इज़ योर जगर [42:40] नॉट मुझे क्या तुम अपनी बॉडी का कौन सा [42:42] हिस्सा बताते हो मुझे उससे कोई लेना देना [42:45] बट यू डोंट हैव इट एंड यू विल नेवर हैव इट [42:47] विल नेवर हैव इट्स करेक्ट नहीं होगा हां [42:49] ये नहीं होगा क्या बात कर रहे हो क्या कह [42:52] रहे हो तुम्हें कुछ समझ ही नहीं भाई नहीं [42:54] भाई देयर होल एस्टैब्लिशमेंट डिपेंड्स ऑन [42:56] दैट एंटी इंडियन प्रोपेगेंडा एंड टेररिज्म [42:59] इन इंडिया सारी तो उनकी रेलेवेंस ही वह [43:02] है। और तो कुछ है भी नहीं तो हमें कुछ तो [43:04] करना पड़ेगा ना हम तो चाहते हैं [43:06] प्रधानमंत्री जी कुछ कुछ करें मतलब के अह [43:09] हम उनके जो मिसाइल्स हैं उनके जो मिसाइल्स [43:12] हैं उसमें एक का नाम है अब्दाली [43:14] चलो बाय सम वप थिंकिंग मैं सोच लूं कि जब [43:18] हिंदुस्तान में मुसलमान ही नहीं थे तो उधर [43:20] जो हमला किया था तो उन्होंने तो इन [43:22] काफिरों पे किया था। अरे मगर अब्दाली ने [43:25] जब हमला किया था और जहां हमला किया था [43:27] वहां मुसलमान रहते थे। तो अब्दाली [43:30] तुम्हारा हीरो तो इसके मतलब जो इस जमीन पर [43:32] पैदा हुए लोग हैं वो तुम्हारे हीरो नहीं [43:34] है। तुम उस इनवेडर जो तुम पर इनवेडर था [43:38] तुम्हारा कांसेप्ट ऑफ हिस्ट्री क्या है? [43:41] इनका चक्कर क्या है कि इनकी हिस्ट्री और [43:43] ज्योग्राफी इनकंपैटबल है। वो कैसे? इसलिए [43:46] कि ये गाना गाते हैं सुनी धरती अल्लाह रखे [43:49] कदम कदम माबाद। और इनका हीरो है मोहम्मद [43:52] बिन कासिम जिसने सुनी धरती पे हमला किया [43:54] था। तो हिस्ट्री कुछ और है और जग्राफी कुछ [43:57] और है। करेक्ट। जोगरी ही इनको थोड़ा तड़पा [44:00] रही है। बलूचिस्तान अबे खोदो नहीं अच्छा [44:02] खोदो। उसमें तक्षला के बुत निकलते हैं। तो [44:05] ये बुत तुम्हारे बाप दादों के हैं कि नहीं [44:08] है? अगर नहीं है तो ये जमीन कैसे [44:12] तुम्हारी तो उनका ज्योग्राफी एक सीरियस [44:16] प्रॉब्लम है। और हिस्ट्री एक अच्छा जिसे [44:19] कहते हैं कि हम उनके वो कहते तुम्हारे को [44:21] हुई नहीं। [44:23] इनको अभी ज्यादातर जो मुल्क हैं, अरब [44:27] मुल्क है उन्होंने बैन कर दिया है कि [44:30] पाकिस्तानी को वीजा ही नहीं देना है। तुम [44:32] ये बोलते हो हम उनके हैं। वो नहीं मानते [44:35] लेकिन तुम जैसे ही कोई दिल्ली में लड़का [44:37] सड़क पे उमरा करे मैं शाहरुख खान का कत्ल [44:39] हूं। शाहरुख खान कह रहा है तुम्हें [44:41] पहचानते नहीं भाई। ये इनका हाल है। अरे [44:43] वाह। [44:46] तो हम चाहेंगे कि आइंदा में पाकिस्तान की [44:50] असलियत को विश्व पहचाने सारे देश मगर फिर [44:53] जब मैं पाकिस्तान को ऐसे मुझे दुख होता है [44:56] मेरे बहुत अच्छे-अच्छे वहां दोस्त हैं और [44:58] बड़े अच्छे लोग हैं वो और फंसे हुए हैं [45:00] बेचारे उनके पास कोई पावर तो है नहीं कोई [45:02] से नहीं उनकी वो होने का चांस भी नहीं है। [45:04] इनफ्लेशन इतनी बढ़ गई। उनकी आर्थिक स्थिति [45:07] बहुत खराब है और तो क्या होगा पाकिस्तान [45:11] का और हमारे लिए लोगों से कहूंगा कि डोंट [45:15] थिंक एनी कंट्री इज नॉट अ मोनोलिथ कोई भी [45:18] मुल्क में सारे लोग एक जैसे नहीं होते हो [45:20] ही नहीं सकते अच्छा अगर मुल्क की हुकूमत [45:24] खराब है तो सबसे ज्यादा तो खराब उनके लिए [45:27] होगी ना जिन पे वो राज कर रही है। जी [45:30] मुल्क की अगर फौज खराब है तो सबसे ज्यादा [45:33] तो खराब उनके लिए होगी जिन पे उसकी असर [45:36] है। सही बात है। तो ये जो लोग सफर कर रहे [45:40] हैं उस मुल्क में हम उनसे क्यों दुश्मनी [45:42] बोल लें? हम उन्हें क्यों गाली दें कि कोई [45:45] भी पाकिस्तान नहीं हम नहीं करेंगे। हमको [45:48] फौज, हुकूमत और मुल्ला तीन। और हमारी पूरी [45:52] सिंपथी है उस पाकिस्तान की मासूम आवाम से [45:55] जो इनके जुल्म सह रही है। चाहे वो [45:59] बिलचस्तान में रहती हो, चाहे वो सिंध में [46:01] रहती हो, चाहे वो पंजाब में रहती हो। और [46:04] ये एक गलती और हो रही है। अरे भाई [46:07] कश्मीरियों ने अपनी मर्जी से हिंदुस्तान [46:10] चुना है। ये कोई हिंदुस्तान की फौज नहीं [46:13] चली गई थी। उन्होंने अपनी मर्जी से वहां [46:15] आप चले गए। अपनी मर्जी से। सच ये है [46:19] कि [46:21] तो इन पे तो हमला कर दिया था पाकिस्तान [46:24] ने। अच्छा पाकिस्तान का एक और भी कमाल है [46:27] जो कि पाकिस्तानियों को फेस करना चाहिए। [46:30] अरे भाई हमारा सिपाही मरता है। हम उसे [46:32] सलूट करते हैं। हम उसका अर्थी में जब चलते [46:35] हैं तो झंडा लेके चलते हैं और उसका उसकी [46:38] अर्थी पेप हिंदुस्तान का झंडा रखते हैं। [46:41] कि ये हमारे मुल्क के लिए जान दी है इसने। [46:44] जो लोग कारगिल में मले उनकी बॉडी लेने को [46:47] तैयार नहीं थी। पाकिस्तान आर्मी वो कहना [46:51] चाहते थे हमारा कोई ताल्लुक नहीं है। [46:52] अच्छा तो उसको हिंदुस्तान ने बहुत [46:55] प्रॉपर्ली कुछ मौलवी वालवे बुला के [46:57] प्रॉपर्ली उनका फाइनल राइट्स कराए उसके [47:01] बाद उनकी तस्वीरें एडजट जो थे उसको जो [47:04] अल्टीमेटली बाद में चीफ भी बने पुलिस के [47:07] इसके आर्मी के इंडियन आर्मी के ही वास [47:09] देयर ही गव दिस एल्बम एक मीटिंग दोनों [47:13] एडजट्स में हुई जब वो झगड़ा सी फायर हो [47:15] चुका था उन्होंने कहा भैया ये एल्बम है ये [47:18] तुम्हारे सिपाहियों को हमने बेरी करवाया [47:20] उसने एल्बम लेने से इंकार कर [47:22] लिया आप मालूम कर लीजिए। उसने कहा मैं [47:25] नहीं लूंगा। मैंने लिया तो हम तो मान [47:27] लेंगे कि हमारे आर्मी के लोग थे। मीटिंग [47:30] खत्म हुई। बाहर निकले। उसने हाथ मिलाया। [47:32] कह यार छोड़ो वो मीटिंग ऑफिशियल थी। [47:34] अनऑफिशियली मुझे दे दो। मैं उनके घर वालों [47:37] को खबर कर [47:38] दूंगा। तो तुम्हें तो जो तुम्हारे मुल्क [47:41] के लिए जान दे रहे हैं गलत यार सही। [47:44] उन्हीं की इज्जत से तुम हमारी क्या इज्जत [47:46] करोगे सही बात है। [47:49] चलिए कुछ ना कुछ तो होना चाहिए और यकीनन [47:52] होना चाहिए। और ये ये जो [47:54] है आई डू बिलीव कि ये जो हमारी प्रेजेंट [47:59] गवर्नमेंट है वो इसको आसानी से नहीं लेगी। [48:03] नहीं नहीं ये एक स्ट्रांग स्टेप लेगी। अब [48:06] ये तो बचकाना बातें करते हैं। तो अभी [48:08] मैंने सुना अरे साहब 10 दिन हो गए। नहीं [48:11] नहीं होता एक सोचता है तैयारी होती है [48:14] प्लानिंग होती है तो होता है मुझे यकीन है [48:17] कि कोई हम सबको यकीन है कि हमारे [48:20] प्रधानमंत्री जरूर कुछ ना कुछ ऐसा कदम [48:22] उठाएंगे ताकि इसका असर दोबारा ना उठ पाए [48:25] जी टेररिज्म का थैंक यू साहब बहुत-बहुत [48:29] शुक्रिया बड़ा लुत्फ आया आपसे बात करने का [48:32] थैंक