1 00:00:00,160 --> 00:00:05,839 50 मिलियन [संगीत] साल पहले भारत वैसा 2 00:00:02,799 --> 00:00:09,120 नहीं था जैसा हम आज जानते हैं। यहां ना 3 00:00:05,839 --> 00:00:11,280 कोई शहर था, ना खेती, ना सभ्यता। लेकिन 4 00:00:09,119 --> 00:00:13,839 इसी जमीन पर कभी किसी ने पहला कदम [संगीत] 5 00:00:11,279 --> 00:00:16,719 रखा था। वे ना हड़प्पा के लोग थे, ना 6 00:00:13,839 --> 00:00:19,519 वैदिक रशी बल्कि उससे भी पहले हमारे 7 00:00:16,719 --> 00:00:22,160 पूर्वज होमोसेपियंस। [संगीत] सवाल यह है 8 00:00:19,519 --> 00:00:24,879 वे भारत में कब आए? कहां से आए? और क्या 9 00:00:22,160 --> 00:00:27,359 वे भारत के पहले इंसान थे? और सबसे बड़ा 10 00:00:24,879 --> 00:00:29,678 सवाल क्या उन्हीं के वंशजों ने आगे चलकर 11 00:00:27,359 --> 00:00:32,094 हड़प्पा [संगीत] जैसी रहस्यमई और उन्नत 12 00:00:29,678 --> 00:00:34,320 सभ्यता को जन्म दिया? इन्हीं सवालों 13 00:00:32,094 --> 00:00:36,879 [संगीत] के जवाब के लिए वीडियो को अंत तक 14 00:00:34,320 --> 00:00:39,359 देखिएगा और अगर आप ऐसी रोचक और रिसर्च की 15 00:00:36,880 --> 00:00:41,840 हुई डॉक्यूमेंट्री पसंद करते हैं तो चैनल 16 00:00:39,359 --> 00:00:44,320 को सब्सक्राइब जरूर करिए क्योंकि ऐसी 17 00:00:41,840 --> 00:00:46,719 डॉक्यूमेंट्री बनाने में हमें घंटों मेहनत 18 00:00:44,320 --> 00:00:50,079 और रिसर्च करनी पड़ती है। एक ऐसी दुनिया 19 00:00:46,719 --> 00:00:51,920 की कल्पना कीजिए जहां इंसान तो क्या हमारे 20 00:00:50,079 --> 00:00:55,840 पूर्वजों [संगीत] का भी कोई नामोनिशान 21 00:00:51,920 --> 00:00:58,800 नहीं था। उस समय जिस जमीन पर आज हम और आप 22 00:00:55,840 --> 00:01:02,879 खड़े हैं, वह एशिया का हिस्सा नहीं थी। 23 00:00:58,799 --> 00:01:05,599 हमारा भारत एक टूटा हुआ, अकेला और वीरान 24 00:01:02,878 --> 00:01:08,000 जमीन का टुकड़ा था। यह अपने परिवार 25 00:01:05,599 --> 00:01:11,199 अफ्रीका से बिछड़ चुका था और हजारों 26 00:01:08,000 --> 00:01:15,280 किलोमीटर दूर एक विशाल समंदर के बीचों-बीच 27 00:01:11,200 --> 00:01:18,159 तैर रहा था। लाखों सालों तक भारत एक विशाल 28 00:01:15,280 --> 00:01:20,799 जहाज की तरह पानी को चीरता हुआ उत्तर दिशा 29 00:01:18,159 --> 00:01:24,495 की तरफ बढ़ता रहा। इसके सामने एक बहुत 30 00:01:20,799 --> 00:01:27,520 बड़ा समंदर था। टेथिस सागर। लेकिन इस जमीन 31 00:01:24,495 --> 00:01:30,560 [संगीत] के नीचे कुदरत की एक अदृश्य ताकत 32 00:01:27,519 --> 00:01:32,319 काम कर रही थी। जमीन के अंदर मैग्मा उभर 33 00:01:30,560 --> 00:01:36,560 रही थी जो भारत को [संगीत] इतनी तेज 34 00:01:32,319 --> 00:01:38,639 रफ्तार दी कि यह रुका नहीं और फिर वह घड़ी 35 00:01:36,560 --> 00:01:41,519 आई [संगीत] जिसने दुनिया का नक्शा हमेशा 36 00:01:38,640 --> 00:01:45,200 के लिए बदल दिया। भारत इस समुद्र को पार 37 00:01:41,519 --> 00:01:49,840 करते हुए सीधे यूरेशियन प्लेट तरफ परा और 38 00:01:45,200 --> 00:01:52,879 फिर वह महा टकराव कोजन हुआ। यह टक्कर इतनी 39 00:01:49,840 --> 00:01:55,920 भयानक थी कि इसने बीच के समंदर को ही निगल 40 00:01:52,879 --> 00:01:58,879 लिया। दो विशाल जमीनी प्लेटें आपस में 41 00:01:55,920 --> 00:02:01,118 भिड़ गई। दबाव इतना ज्यादा था कि धरती का 42 00:01:58,879 --> 00:02:04,319 सीना फट गया। चट्टाने [संगीत] टूटने के 43 00:02:01,118 --> 00:02:07,280 बजाय ऊपर की तरफ मुड़ने लगी। मलबा उठता 44 00:02:04,319 --> 00:02:10,000 गया और उठता ही गया जब तक कि उसने बादलों 45 00:02:07,280 --> 00:02:14,080 को नहीं छू लिया। यही था कुदरत की सबसे 46 00:02:10,000 --> 00:02:17,199 बड़ी दीवार। हिमालय का जन्म। इस नई दीवार 47 00:02:14,080 --> 00:02:20,160 ने सब कुछ बदल दिया। जो हवाएं पहले सीधी 48 00:02:17,199 --> 00:02:23,598 निकल जाती थी। हिमालय ने उन्हें रोक लिया। 49 00:02:20,159 --> 00:02:26,719 नतीजा भारत की प्यासी जमीन पर मानसून की 50 00:02:23,598 --> 00:02:30,159 पहली बारिश हुई। हिमालय की बर्फ पिघली और 51 00:02:26,719 --> 00:02:33,359 गंगा, यमुना, नर्मदा जैसी नदियां इस धरती 52 00:02:30,159 --> 00:02:36,318 को सिंचने लगा। देखते ही देखते लाखों 53 00:02:33,360 --> 00:02:39,360 सालों का यह उथल-पुथल शांत हुआ। जो जमीन 54 00:02:36,318 --> 00:02:42,560 कल तक पथरीली और वीरान थी। वो अब घने 55 00:02:39,360 --> 00:02:45,040 जंगलों, मीठे पानी और हरियाली से भर गई। 56 00:02:42,560 --> 00:02:48,319 करोड़ों साल तक मौसम में उतार-चढ़ाव के 57 00:02:45,039 --> 00:02:50,878 बाद भारत अब एक स्वर्ग बन चुका था। स्टेज 58 00:02:48,318 --> 00:02:54,479 पूरी तरह सज चुका था। इंसानों की स्वागत 59 00:02:50,878 --> 00:02:58,159 के लिए जंगल खामोश थे। नदियां बह रही थी, 60 00:02:54,479 --> 00:03:02,158 हवाएं चल रही थी। लेकिन इस जन्नत में अभी 61 00:02:58,159 --> 00:03:05,199 एक चीज की कमी थी। जीवन की अभी हम यानी 62 00:03:02,158 --> 00:03:08,000 आधुनिक इंसान पैदा भी नहीं हुए थे। तो फिर 63 00:03:05,199 --> 00:03:10,479 आखिर कौन थे वो अनजान मेहमान जो हमसे 64 00:03:08,000 --> 00:03:14,400 लाखों साल पहले [संगीत] इस भारत के पहले 65 00:03:10,479 --> 00:03:18,318 मालिक बने। चलिए उस गहरे राज से पर्दा 66 00:03:14,400 --> 00:03:20,560 उठाते हैं। भारत अब बदल चुका था। जिस जमीन 67 00:03:18,318 --> 00:03:23,439 पर कल तक समंदर की लहरें [संगीत] टकराती 68 00:03:20,560 --> 00:03:26,000 थी, वहां अब मीठे पानी की नदियां बह रही 69 00:03:23,439 --> 00:03:29,359 थी। जिस जमीन पर सिर्फ पत्थर थे, [संगीत] 70 00:03:26,000 --> 00:03:31,199 वहां अब ऐसा घना जंगल उग आया था जिसे भेद 71 00:03:29,360 --> 00:03:34,480 पाना सूरज की किरणों के लिए [संगीत] भी 72 00:03:31,199 --> 00:03:36,806 नामुमकिन था। यह वो भारत नहीं है जिसे आज 73 00:03:34,479 --> 00:03:39,518 आप जानते हैं। ना यहां कोई शहर था, ना 74 00:03:36,806 --> 00:03:42,079 [संगीत] गांव और ना ही आज जैसा कोई इंसान। 75 00:03:39,519 --> 00:03:44,799 यह एक अलग ही दुनिया थी। इस दुनिया में 76 00:03:42,080 --> 00:03:47,840 कानून सिर्फ एक था। जिसकी [संगीत] लाठी, 77 00:03:44,799 --> 00:03:50,879 उसकी भैंस नहीं बल्कि जिसका जबड़ा उसका 78 00:03:47,840 --> 00:03:53,039 राज। उस समय भारत की धरती पर इंसानों का 79 00:03:50,878 --> 00:03:55,759 नहीं बल्कि दानवों जॉइंट्स [संगीत] का 80 00:03:53,039 --> 00:03:58,000 राज्य था। अगर आप उस समय के जंगल में चलते 81 00:03:55,759 --> 00:04:01,598 तो आपका सामना आज के हाथियों से नहीं 82 00:03:58,000 --> 00:04:04,560 बल्कि उनके परदादाओं से होता। स्टिगोडन एक 83 00:04:01,598 --> 00:04:07,280 ऐसा विशालकाय जीव जिसके दांत 10 फीट तक 84 00:04:04,560 --> 00:04:10,239 लंबे होते थे। जब यह चलता था [संगीत] तो 85 00:04:07,280 --> 00:04:13,039 जमीन कांपती थी। नदियों में आज के मगरमच्छ 86 00:04:10,239 --> 00:04:15,599 नहीं बल्कि हेक्सा प्रोटोोडन तैरते थे। यह 87 00:04:13,039 --> 00:04:18,478 दरियाई घोड़े जैसा जानवर था। लेकिन इसका 88 00:04:15,598 --> 00:04:19,358 आकार किसी ट्रक से कम नहीं था। इसके जबड़े 89 00:04:18,478 --> 00:04:22,079 इतने मजबूत [संगीत] 90 00:04:19,358 --> 00:04:24,799 थे कि यह पत्थर को भी चबा सकता था। यह 91 00:04:22,079 --> 00:04:27,120 दुनिया ताकतवर जानवरों की थी। कमजोर के 92 00:04:24,800 --> 00:04:30,160 लिए यहां कोई जगह नहीं थी। हर झाड़ी के 93 00:04:27,120 --> 00:04:33,918 पीछे मौत छिपी थी। लेकिन इन्हीं विशाल 94 00:04:30,160 --> 00:04:36,479 जानवरों के भारी पैरों के बीच घास के अंदर 95 00:04:33,918 --> 00:04:39,359 एक नई हलचल शुरू हो चुकी थी। लाखों साल 96 00:04:36,478 --> 00:04:42,639 पहले अफ्रीका की जमीन पर एक नई मानव 97 00:04:39,360 --> 00:04:46,160 प्रजाति उभरी। इस प्रजाति का नाम था होमो 98 00:04:42,639 --> 00:04:48,720 इरेक्टस। यही वह इंसान था जिसने पहली बार 99 00:04:46,160 --> 00:04:51,600 पूरी तरह दो पैरों पर चलना शुरू किया। यह 100 00:04:48,720 --> 00:04:55,360 ना तो वानर थे और ना ही हम यानी 101 00:04:51,600 --> 00:04:58,320 होमोसेपियंस। यह घुमंतु थे। भोजन की तलाश 102 00:04:55,360 --> 00:05:00,879 में चलते-चलते यह अफ्रीका से बाहर निकले। 103 00:04:58,319 --> 00:05:04,159 रास्ते [संगीत] अनजान थे। ना कोई नक्शा था 104 00:05:00,879 --> 00:05:06,959 ना कोई मंजिल। बस पेट की आग थी जो उन्हें 105 00:05:04,160 --> 00:05:09,759 आगे धकेल रही थी और आज से करीब [संगीत] 15 106 00:05:06,959 --> 00:05:12,478 से 20 लाख साल पहले इन्हीं निडर यात्रियों 107 00:05:09,759 --> 00:05:15,057 के एक समूह ने भारत की धरती पर अपना पहला 108 00:05:12,478 --> 00:05:17,279 कदम रखा। यह सिर्फ एक कल्पना कहानी 109 00:05:15,057 --> 00:05:20,478 [संगीत] नहीं बल्कि इसका सबूत हमें अपने 110 00:05:17,279 --> 00:05:23,758 देश भारत में मिलता है। चेन्नई के पास एक 111 00:05:20,478 --> 00:05:26,240 जगह है अतिरम पक्कम। यहां जमीन के [संगीत] 112 00:05:23,759 --> 00:05:29,280 नीचे वैज्ञानिकों को पत्थरों का एक खजाना 113 00:05:26,240 --> 00:05:32,400 मिला। यह साधारण पत्थर नहीं थे। इन्हें 114 00:05:29,279 --> 00:05:34,478 तराशा गया था। इनके किनारे धारदार थे। 115 00:05:32,399 --> 00:05:37,983 वैज्ञानिकों ने जब [संगीत] इनकी उम्र पता 116 00:05:34,478 --> 00:05:40,959 की तो वे सन्न रह गए। यह औजार 15 लाख साल 117 00:05:37,983 --> 00:05:43,439 [संगीत] पुराने थे। यानी आधुनिक इंसान के 118 00:05:40,959 --> 00:05:46,000 पैदा होने से बहुत पहले। यहां कोई [संगीत] 119 00:05:43,439 --> 00:05:48,879 ऐसा था जो दिमाग का इस्तेमाल करना जानता 120 00:05:46,000 --> 00:05:52,478 था। और सबूत सिर्फ पत्थरों तक सीमित नहीं 121 00:05:48,879 --> 00:05:54,478 है। 1982 मध्य प्रदेश की नर्मदा घाटी के 122 00:05:52,478 --> 00:05:57,519 हथनोरा [संगीत] गांव में एक 123 00:05:54,478 --> 00:05:59,918 आर्कियोलॉजिस्ट अरुण सोनाकिया को एक 124 00:05:57,519 --> 00:06:02,873 खोपड़ी [संगीत] का हिस्सा मिला। यह भारत 125 00:05:59,918 --> 00:06:04,879 के इतिहास की सबसे बड़ी खोज थी। यह खोपड़ी 126 00:06:02,874 --> 00:06:07,840 [संगीत] किसी जानवर की नहीं थी। यह एक 127 00:06:04,879 --> 00:06:10,639 मानव पूर्वज की थी। इसे नाम दिया गया। 128 00:06:07,839 --> 00:06:13,439 नर्मदा मानव यह लोग कैसे दिखते थे? इनका 129 00:06:10,639 --> 00:06:16,240 माथा हमसे छोटा था। यानी दिमाग थोड़ा कम 130 00:06:13,439 --> 00:06:19,918 विकसित था। लेकिन इनका जबड़ा बहुत मजबूत 131 00:06:16,240 --> 00:06:23,360 था। इनकी आइब्रास बाहर की तरफ निकली हुई 132 00:06:19,918 --> 00:06:26,240 थी। इनका शरीर किसी एथलीट जैसा गठीला था। 133 00:06:23,360 --> 00:06:29,680 इनके पास हमारी तरह भाषा नहीं थी। इनकी 134 00:06:26,240 --> 00:06:32,478 भाषा थी इशारे और आवाजें। इनका सबसे बड़ा 135 00:06:29,680 --> 00:06:35,280 हथियार था। [संगीत] हैंड एक्स एक नाशपाती 136 00:06:32,478 --> 00:06:38,399 के आकार का पत्थर जिसे यह अपनी मुट्ठी में 137 00:06:35,279 --> 00:06:41,038 पकड़ते थे। यही इनका चाकू था। यही इनका 138 00:06:38,399 --> 00:06:44,159 हथौड़ा था। बिना बंदूक, बिना लोहे के 139 00:06:41,038 --> 00:06:46,639 हथियार के। सिर्फ पत्थरों के दम पर यह लोग 140 00:06:44,160 --> 00:06:49,280 विशाल हाथियों और दरियाई घोड़ों का शिकार 141 00:06:46,639 --> 00:06:52,079 करते थे। यह डरते नहीं थे। इन्होंने भारत 142 00:06:49,279 --> 00:06:55,038 के हर कोने को छान मारा था। उत्तर से 143 00:06:52,079 --> 00:06:58,719 दक्षिण तक। नर्मदा के [संगीत] तट से लेकर 144 00:06:55,038 --> 00:07:01,279 गोदावरी के जंगलों तक इन्हीं का राज था। 145 00:06:58,720 --> 00:07:03,919 लाखों सालों [संगीत] तक। भारत के जंगलों 146 00:07:01,279 --> 00:07:06,399 में इन्हीं की हुंकार गूंजती रही। इन्हें 147 00:07:03,918 --> 00:07:09,519 लगा कि यह इस धरती के मालिक हैं। इन्होंने 148 00:07:06,399 --> 00:07:11,598 बाढ़ को हराया था, सूखे को हराया था और 149 00:07:09,519 --> 00:07:15,198 बड़े-बड़े जानवरों [संगीत] को हराया था। 150 00:07:11,598 --> 00:07:18,719 ऐसा लग रहा था कि इनका वंश अमर रहेगा। 151 00:07:15,199 --> 00:07:21,919 लेकिन उन्हें खबर नहीं थी। कुदरत अपनी 152 00:07:18,720 --> 00:07:25,759 आस्तीन में एक खंजर छिपाए बैठी थी। हजारों 153 00:07:21,918 --> 00:07:29,198 मील दूर समंदर के उस पार इंडोनेशिया के एक 154 00:07:25,759 --> 00:07:32,720 द्वीप पर धरती के नीचे एक दानव जाग रहा 155 00:07:29,199 --> 00:07:35,598 था। यह एक ऐसा टाइम बम था जिसकी टिकटिक 156 00:07:32,720 --> 00:07:37,759 शुरू हो चुकी थी और जब यह फटने वाला था तो 157 00:07:35,598 --> 00:07:40,560 यह इन ताकतवर [संगीत] आदिमानवों की पूरी 158 00:07:37,759 --> 00:07:43,840 दुनिया को सिर्फ राख के ढेर में बदलने 159 00:07:40,560 --> 00:07:46,399 वाला था। वो क्या चीज थी जिसने भारत के 160 00:07:43,839 --> 00:07:50,294 पहले मालिकों को इतिहास के पन्नों से मिटा 161 00:07:46,399 --> 00:07:53,038 दिया और कैसे उस विनाश ने हमारे यानी 162 00:07:50,295 --> 00:07:55,919 [संगीत] आधुनिक इंसान के लिए रास्ता खोला 163 00:07:53,038 --> 00:07:59,598 जो आज खुद को हम भारतीय कहते हैं। हजारों 164 00:07:55,918 --> 00:08:02,878 मील दूर समंदर के उस पार इंडोनेशिया के 165 00:07:59,598 --> 00:08:06,319 सुमात्रा द्वीप पर धरती का सीना फटने वाला 166 00:08:02,879 --> 00:08:09,439 था। एक पहाड़ नहीं बल्कि एक राक्षस जाग 167 00:08:06,319 --> 00:08:12,319 चुका था। टोबा सुपर वोल्केनो की धमाका 168 00:08:09,439 --> 00:08:15,279 इतना जोरदार था कि इसकी आवाज 3000 169 00:08:12,319 --> 00:08:17,919 किलोमीटर दूर भारत तक सुनाई दी होगी। 170 00:08:15,279 --> 00:08:20,638 हिमालय की चोटियां भी कांप उठी होंगी। 171 00:08:17,918 --> 00:08:24,560 लेकिन असली खतरा वो आवाज नहीं थी। असली 172 00:08:20,639 --> 00:08:27,680 खतरा वो था जो हवा के साथ उड़कर आ रहा था। 173 00:08:24,560 --> 00:08:31,038 कुछ ही घंटों में भारत का नीला आसमान गायब 174 00:08:27,680 --> 00:08:33,278 हो गया। दोपहर के वक्त रात जैसा गुप 175 00:08:31,038 --> 00:08:37,278 अंधेरा छा गया और फिर आसमान [संगीत] से 176 00:08:33,278 --> 00:08:40,075 गिरने लगी। सफेद मौत यह बर्फ नहीं थी। यह 177 00:08:37,278 --> 00:08:42,080 राख वोल्केनिक ऐश थी। कल्पना कीजिए। 178 00:08:40,075 --> 00:08:45,120 [संगीत] जब उन आदिमानवों ने सांस ली होगी 179 00:08:42,080 --> 00:08:48,399 तो उनका दम घुटने लगा होगा। नदियां जो कल 180 00:08:45,120 --> 00:08:52,000 तक जीवन देती थी। अब कीचड़ और जहर बन चुकी 181 00:08:48,399 --> 00:08:55,360 थी। पेड़-पौधे मर गए। जंगल वीरान हो गए। 182 00:08:52,000 --> 00:08:58,240 भारत जो एक गर्म देश था। अचानक बर्फ जैसा 183 00:08:55,360 --> 00:09:00,879 ठंडा पड़ गया। इसे विज्ञान कहता है 184 00:08:58,240 --> 00:09:04,480 वोल्केनिक विंटर। अब यहां एक बहुत बड़ा 185 00:09:00,879 --> 00:09:07,759 सवाल उठता है। वो आदिमानव जो लाखों सालों 186 00:09:04,480 --> 00:09:10,800 से यहां के बेताज बादशाह थे। वो इस मुसीबत 187 00:09:07,759 --> 00:09:13,600 से क्यों हार गए? वे तो बहुत ताकतवर थे। 188 00:09:10,799 --> 00:09:17,199 फिर उनका वंश क्यों मिट गया? उनकी मौत का 189 00:09:13,600 --> 00:09:20,879 कारण कोई और नहीं बल्कि उनका अपना शरीर और 190 00:09:17,200 --> 00:09:24,959 दिमाग बन गया। देखिए उनके हारने की तीन 191 00:09:20,879 --> 00:09:27,838 बड़ी वजह थी। पहली वजह उनके शरीर की बनावट 192 00:09:24,958 --> 00:09:31,359 उनका शरीर पहलवानों जैसा भारी और गठीला 193 00:09:27,839 --> 00:09:33,839 था। यह शरीर एक बड़ी गाड़ी की तरह था जिसे 194 00:09:31,360 --> 00:09:38,000 चलने के लिए बहुत ज्यादा पेट्रोल यानी 195 00:09:33,839 --> 00:09:41,279 एनर्जी चाहिए थी। जब तक जंगल हरेभरे थे सब 196 00:09:38,000 --> 00:09:43,919 ठीक था। लेकिन जब खाना खत्म हुआ तो उनका 197 00:09:41,278 --> 00:09:47,039 बड़ा शरीर ही उनका सबसे बड़ा दुश्मन बन 198 00:09:43,919 --> 00:09:50,159 गया। वे कम खाने में जिंदा नहीं रह सकते 199 00:09:47,039 --> 00:09:53,838 थे। उनकी ताकत ही उनकी कमजोरी बन गई। 200 00:09:50,159 --> 00:09:56,319 दूसरी वजह थी उनके पुराने हथियार। कड़ी 201 00:09:53,839 --> 00:09:59,360 सर्दी और बदलाव के बाद जंगलों [संगीत] से 202 00:09:56,320 --> 00:10:01,951 बड़े जानवर खत्म हो गए। लेकिन उनके हाथों 203 00:09:59,360 --> 00:10:04,159 में अब भी भारी पत्थर के हथियार ही थे 204 00:10:01,951 --> 00:10:07,120 [संगीत] जो सिर्फ बड़े जानवरों के लिए बने 205 00:10:04,159 --> 00:10:11,199 थे। छोटे जानवरों के सामने यह हथियार 206 00:10:07,120 --> 00:10:13,759 बेकार हो गए। और तीसरी सबसे बड़ी वजह कल 207 00:10:11,200 --> 00:10:17,600 की चिंता ना करना दिक्कत यह थी कि वे 208 00:10:13,759 --> 00:10:19,919 सिर्फ आज में जीते थे। उनके पास हम जैसा 209 00:10:17,600 --> 00:10:22,320 दिमाग नहीं था जो मुसीबत आने से पहले 210 00:10:19,919 --> 00:10:24,799 प्लानिंग कर सके। उन्हें [संगीत] खाना जमा 211 00:10:22,320 --> 00:10:28,160 करना नहीं आता था। उन्हें यह समझ नहीं आया 212 00:10:24,799 --> 00:10:31,679 कि कल क्या होगा और देखते ही देखते एक 213 00:10:28,159 --> 00:10:35,039 पूरी प्रजाति जो कल तक भारत की मालिक थी 214 00:10:31,679 --> 00:10:37,679 वो भूख ठंड और अंधेरे में घुटघुट कर खत्म 215 00:10:35,039 --> 00:10:40,799 हो गई। यह विनाश अंत नहीं था। [संगीत] यह 216 00:10:37,679 --> 00:10:43,439 एक नई शुरुआत की तैयारी थी। राख से ढकी इस 217 00:10:40,799 --> 00:10:46,879 भारत की धरती पर अब एक नई प्रजाति कदम 218 00:10:43,440 --> 00:10:50,760 रखने वाली थी। एक ऐसी प्रजाति जिससे आज हम 219 00:10:46,879 --> 00:10:50,759 सब जुड़े हैं होमोसेपियंस। 220 00:10:51,839 --> 00:10:57,627 टोबा का महाविस्फोट सिर्फ भारत को ही नहीं 221 00:10:54,559 --> 00:11:00,479 झुलसा गया था। सैकड़ों साल बाद भी उसकी 222 00:10:57,626 --> 00:11:03,439 [संगीत] राख और सर्दी की मार अफ्रीका तक 223 00:11:00,480 --> 00:11:06,159 पहुंची ही चुकी। जिस धरती ने लाखों सालों 224 00:11:03,440 --> 00:11:10,160 से इंसान को पाला [संगीत] था, वही धरती अब 225 00:11:06,159 --> 00:11:12,399 उसे बोझ लगने लगी थी। जंगल सूख रहे थे और 226 00:11:10,159 --> 00:11:14,399 इसी धरती पर एक प्रजाति [संगीत] अब सांस 227 00:11:12,399 --> 00:11:15,919 लेने के लिए भी संघर्ष कर रही थी। 228 00:11:14,399 --> 00:11:18,958 होमोसेपियंस। 229 00:11:15,919 --> 00:11:21,919 जरा उस समय के इंसान के बारे में सोचिए। 230 00:11:18,958 --> 00:11:24,799 वह कोई योद्धा या विजेता नहीं था। वह बस 231 00:11:21,919 --> 00:11:27,679 एक पिता था जो सुबह शिकार पर निकलता और 232 00:11:24,799 --> 00:11:31,120 शाम को खाली हाथ झुकी हुई नजरों के साथ 233 00:11:27,679 --> 00:11:33,651 लौटता था। वह एक मां थी जो अपने बच्चे की 234 00:11:31,120 --> 00:11:37,480 प्यास बुझाने के लिए बूंदबूंद पानी के लिए 235 00:11:33,652 --> 00:11:37,480 [संगीत] तरस रही थी। 236 00:11:38,639 --> 00:11:45,199 अफ्रीका उनका अपना घर अब उन्हें पाल नहीं 237 00:11:41,759 --> 00:11:47,039 सकता था। उनके पास दो ही रास्ते थे। या तो 238 00:11:45,200 --> 00:11:49,759 यहीं [संगीत] रुक कर धीरे-धीरे इतिहास से 239 00:11:47,039 --> 00:11:52,647 मिट जाएं या फिर उस अनजान क्षितिज की ओर 240 00:11:49,759 --> 00:11:55,600 बढ़े जहां शायद मौत हो। लेकिन शायद 241 00:11:52,648 --> 00:11:57,888 [संगीत] जिंदगी की एक उम्मीद भी और फिर 242 00:11:55,600 --> 00:12:00,320 भूख ने उन्हें वह फैसला लेने पर मजबूर 243 00:11:57,888 --> 00:12:03,200 [संगीत] कर दिया जो शायद इंसानियत के 244 00:12:00,320 --> 00:12:07,200 इतिहास का सबसे बढ़ा फैसला था। एक पूरा 245 00:12:03,200 --> 00:12:10,320 जनसमूह बच्चे, बूढ़े, जवान अपना सब कुछ 246 00:12:07,200 --> 00:12:13,440 समेट कर चल पड़े। चलते-चलते वे जमीन के 247 00:12:10,320 --> 00:12:16,480 आखिरी छोर पर आ गए। सामने लाल सागर था 248 00:12:13,440 --> 00:12:18,720 जहां पानी ही पानी और आगे कुछ भी नजर नहीं 249 00:12:16,480 --> 00:12:22,079 आ रहा था। विज्ञान कहता [संगीत] है कि उस 250 00:12:18,720 --> 00:12:25,440 समय हिमयुग आइस एज के कारण समंदर का स्तर 251 00:12:22,078 --> 00:12:28,159 नीचे था। अफ्रीका और अरब के बीच की दूरी 252 00:12:25,440 --> 00:12:30,639 आज के मुकाबले [संगीत] बहुत कम थी। लेकिन 253 00:12:28,159 --> 00:12:33,679 उन लोगों के पास ना कोई नक्शा था, ना कोई 254 00:12:30,639 --> 00:12:36,720 बड़ी नाव। उनके लिए वह छोटी सी दूरी भी 255 00:12:33,679 --> 00:12:40,359 मौत के कुएं जैसी थी। इसे आज हम बाब अल 256 00:12:36,720 --> 00:12:40,360 मंदब कहते हैं। 257 00:12:42,480 --> 00:12:47,759 कल्पना कीजिए उस डर की जब उन्होंने सूखी 258 00:12:45,200 --> 00:12:50,720 लकड़ियों और बांस से बने डगमगाते राफ्टर्स 259 00:12:47,759 --> 00:12:53,439 पर पहली बार अपने बच्चों को बैठाया होगा। 260 00:12:50,720 --> 00:12:56,000 ना जाने कितने पिता ना जाने कितनी माताएं 261 00:12:53,440 --> 00:12:59,040 उस सफर में लहरों में समा गई। ना जाने 262 00:12:56,000 --> 00:13:02,078 कितनों का हाथ अपनों से छूट गया जो बच गए। 263 00:12:59,039 --> 00:13:04,958 वे लहरों से लड़कर अरब के तट आज का यमन पर 264 00:13:02,078 --> 00:13:07,838 पहुंच गए। वे जिंदा तो थे लेकिन वे अब 265 00:13:04,958 --> 00:13:11,199 बेघर थे। उनका घर अफ्रीका हमेशा के लिए 266 00:13:07,839 --> 00:13:14,160 पीछे छूट चुका था। 267 00:13:11,200 --> 00:13:17,600 पर उनका इम्तिहान अभी खत्म नहीं हुआ था। 268 00:13:14,159 --> 00:13:19,519 अरब की जमीन भी सूखी और पथरीली थी। 269 00:13:17,600 --> 00:13:22,399 रेगिस्तान उन्हें निगलने के लिए तैयार 270 00:13:19,519 --> 00:13:25,839 खड़ा था। इसलिए उन्होंने एक समझदारी 271 00:13:22,399 --> 00:13:28,879 दिखाई। वे जमीन के अंदर नहीं गए। वे समंदर 272 00:13:25,839 --> 00:13:32,560 के किनारे-किनारे चलते रहे। इसे हम तटीय 273 00:13:28,879 --> 00:13:36,320 प्रवास कोस्टल माइग्रेशन कहते हैं। समंदर 274 00:13:32,559 --> 00:13:39,039 जिसने उनके अपनों को छीना था। अब वही उनका 275 00:13:36,320 --> 00:13:42,034 सहारा बन गया। उसने उन्हें खाना दिया। 276 00:13:39,039 --> 00:13:44,958 मछलियां, केकड़े, सीपियां वे चलते रहे। 277 00:13:42,033 --> 00:13:47,838 [संगीत] एक साल नहीं, 100 साल नहीं बल्कि 278 00:13:44,958 --> 00:13:50,159 हजारों सालों तक यह सफर एक पीढ़ी की नहीं 279 00:13:47,839 --> 00:13:53,360 कई पीढ़ियों तक पूर्व दिशा की ओर चलते 280 00:13:50,159 --> 00:13:57,198 रहे। बस एक ही उम्मीद में कि कहीं तो ऐसी 281 00:13:53,360 --> 00:13:59,600 जमीन होगी जो घर जैसी लगे। और फिर आज से 282 00:13:57,198 --> 00:14:02,399 लगभग 65,000 [संगीत] साल पहले, उन 283 00:13:59,600 --> 00:14:04,959 यात्रियों के वंशजों को हवा में एक बदलाव 284 00:14:02,399 --> 00:14:08,320 महसूस हुआ। यह धूल की आंधी [संगीत] नहीं 285 00:14:04,958 --> 00:14:10,638 थी। यह ठंडी हवा थी। वे भारत की दहलीज पर 286 00:14:08,320 --> 00:14:12,959 खड़े थे। टोबा की [संगीत] राख जिसने 287 00:14:10,639 --> 00:14:16,639 हजारों साल पहले यहां जीवन खत्म कर दिया 288 00:14:12,958 --> 00:14:19,838 था। अब वही राख उपजाऊ मिट्टी बन चुकी थी। 289 00:14:16,639 --> 00:14:23,039 कुदरत ने अपने घाव भर लिए थे। सूखे पेड़ों 290 00:14:19,839 --> 00:14:26,000 की जगह हरेभरे जंगलों ने ले ली थी। नदियां 291 00:14:23,039 --> 00:14:28,538 मीठे पानी से लबालब बह रही थी। जब उन थके 292 00:14:26,000 --> 00:14:31,198 हुए यात्रियों ने सिंधु और सरस्वती की 293 00:14:28,538 --> 00:14:34,198 [संगीत] उस हरीभरी धरती पर पहला कदम रखा 294 00:14:31,198 --> 00:14:34,198 होगा। 295 00:14:36,799 --> 00:14:42,399 कहानी का सुखद अंत अभी नहीं हुआ था। 296 00:14:39,839 --> 00:14:45,440 उन्हें लगा कि उन्हें स्वर्ग मिल गया है। 297 00:14:42,399 --> 00:14:47,440 लेकिन उन्हें खबर नहीं थी कि यह स्वर्ग भी 298 00:14:45,440 --> 00:14:50,720 उनकी एक कड़ी [संगीत] परीक्षा लेने वाला 299 00:14:47,440 --> 00:14:52,880 था। अफ्रीका के खुले मैदानों में वे दूर 300 00:14:50,720 --> 00:14:56,160 तक [संगीत] देख सकते थे। खतरे को भांप 301 00:14:52,879 --> 00:14:59,759 सकते थे। लेकिन भारत भारत के जंगल [संगीत] 302 00:14:56,159 --> 00:15:02,719 घने थे। मिस्टीरियस थे। यहां हर झाड़ी के 303 00:14:59,759 --> 00:15:05,120 पीछे मौत छिपी थी। यहां के विशालकाय हाथी 304 00:15:02,720 --> 00:15:08,240 और दुनिया के सबसे खूंखार बाघ [संगीत] उन 305 00:15:05,120 --> 00:15:11,600 अजनबियों को घूर रहे थे। रात होते ही यह 306 00:15:08,240 --> 00:15:13,839 जंगल एक भूल भुलैया बन जाता था। खुले 307 00:15:11,600 --> 00:15:17,009 आसमान [संगीत] के नीचे सोना नामुमकिन था 308 00:15:13,839 --> 00:15:19,600 तो सवाल यह है उस पहली रात उस अनजान जंगल 309 00:15:17,009 --> 00:15:22,000 [संगीत] में हमारे पूर्वज जिंदा कैसे रहे? 310 00:15:19,600 --> 00:15:24,959 और भारत की जमीन पर इंसान [संगीत] ने अपनी 311 00:15:22,000 --> 00:15:27,360 पहली सुरक्षा कैसे बनाई? अफ्रीका से मीलों 312 00:15:24,958 --> 00:15:30,559 पैदल चलकर आए उन थके हुए यात्रियों के 313 00:15:27,360 --> 00:15:32,959 लिए। भारत का घना जंगल किसी मौत के कुएं 314 00:15:30,559 --> 00:15:35,518 से कम [संगीत] नहीं था। यहां खुले आसमान 315 00:15:32,958 --> 00:15:38,799 के नीचे सोने का मतलब था सीधे मौत [संगीत] 316 00:15:35,519 --> 00:15:41,839 को दावत देना। उन्हें एक ऐसी जगह चाहिए थी 317 00:15:38,799 --> 00:15:44,559 जहां दीवारें हो लेकिन दरवाजा ना हो और 318 00:15:41,839 --> 00:15:47,199 मध्य भारत के [संगीत] जंगलों में कुदरत ने 319 00:15:44,559 --> 00:15:49,359 उन्हें अपना सबसे नायाब तोहफा दिया। 320 00:15:47,198 --> 00:15:52,399 भीमबेट [संगीत] का यह साधारण गुफाएं नहीं 321 00:15:49,360 --> 00:15:54,959 थी। यह पत्थर के प्राकृतिक महल थे। इन 322 00:15:52,399 --> 00:15:57,600 विशाल चट्टानों ने उन्हें मूसलाधार बारिश 323 00:15:54,958 --> 00:16:01,039 से बचाया। कड़ाके की ठंड से [संगीत] बचाया 324 00:15:57,600 --> 00:16:04,959 और सबसे जरूरी रात के अंधेरे में उन 325 00:16:01,039 --> 00:16:08,719 खूंखार जानवरों से बचाया। 326 00:16:04,958 --> 00:16:11,599 इतिहास में पहली बार इंसान को घर शब्द का 327 00:16:08,720 --> 00:16:14,480 असली मतलब समझ आया था। यह गुफा सिर्फ 328 00:16:11,600 --> 00:16:18,000 पत्थरों का ढेर नहीं थी। यह इंसानियत का 329 00:16:14,480 --> 00:16:20,320 पहला [संगीत] किला थी। जरा कल्पना कीजिए। 330 00:16:18,000 --> 00:16:23,440 आज से 60 हजार [संगीत] साल पहले की एक 331 00:16:20,320 --> 00:16:26,399 सुबह की तब कोई अलार्म क्लॉक नहीं थी। 332 00:16:23,440 --> 00:16:30,000 चिड़ियों की चहचहाट और सूरज की पहली किरण 333 00:16:26,399 --> 00:16:33,679 ही उनकी घड़ी थी। जैसे ही आंख खुलती थी तो 334 00:16:30,000 --> 00:16:36,958 सबसे पहला विचार क्या आता होगा? शायद यही 335 00:16:33,679 --> 00:16:40,078 क्या हम सब जिंदा हैं? दिन की शुरुआत चाय 336 00:16:36,958 --> 00:16:43,198 या कॉफी से नहीं होती थी। सबसे पहली जरूरत 337 00:16:40,078 --> 00:16:46,559 थी पानी। लेकिन उस दौर में नदी तक जाना भी 338 00:16:43,198 --> 00:16:49,039 एक फौजी मिशन जैसा था। कबीले के मर्द पहले 339 00:16:46,559 --> 00:16:51,278 बाहर निकलकर मुआयना करते थे कि कहीं 340 00:16:49,039 --> 00:16:54,639 झाड़ियों में कोई तेंदुआ तो घात लगाकर 341 00:16:51,278 --> 00:16:57,278 नहीं बैठा। जब रास्ता साफ होता तभी 342 00:16:54,639 --> 00:17:01,278 महिलाएं और बच्चे पानी के लिए नीचे उतरते 343 00:16:57,278 --> 00:17:04,880 थे। हर सुबह जिंदगी और मौत के बीच का एक 344 00:17:01,278 --> 00:17:07,919 जुआ थी। लेकिन रात के अंधेरे में उनका 345 00:17:04,880 --> 00:17:10,240 सबसे बड़ा रक्षक कोई इंसान नहीं था। वो थी 346 00:17:07,919 --> 00:17:13,280 आग। आग सिर्फ [संगीत] खाना पकाने के लिए 347 00:17:10,240 --> 00:17:15,759 नहीं थी। यह उनकी सिक्योरिटी गार्ड थी। जब 348 00:17:13,279 --> 00:17:18,078 तक गुफा के द्वार पर आग जलती रहती थी। 349 00:17:15,759 --> 00:17:20,806 जंगल का कोई भी जानवर अंदर आने की हिम्मत 350 00:17:18,078 --> 00:17:23,438 नहीं करता था। और यही आग उनका सोशल 351 00:17:20,806 --> 00:17:26,318 [संगीत] मीडिया भी थी। शाम को शिकार के 352 00:17:23,439 --> 00:17:29,200 बाद पूरा कबीला इसी आग के चारों तरफ बैठता 353 00:17:26,318 --> 00:17:31,279 था। यही कहानियां सुनाई जाती थी। यहीं दुख 354 00:17:29,200 --> 00:17:34,080 सुख [संगीत] बांटे जाते थे। इस आग की 355 00:17:31,279 --> 00:17:37,519 गर्मी ने इंसान को एक दूसरे से जोड़ दिया 356 00:17:34,079 --> 00:17:40,079 था। लेकिन भारत बहुत विशाल था। जैसे-जैसे 357 00:17:37,519 --> 00:17:42,639 इंसान फैला उसे अलग-अलग चुनौतियों का 358 00:17:40,079 --> 00:17:45,119 सामना करना पड़ा। विंध्य और हिमालय के पास 359 00:17:42,640 --> 00:17:47,200 रहने वालों को ठंड का सामना करना पड़ा। 360 00:17:45,119 --> 00:17:50,558 इसलिए वे गहरी गुफाओं [संगीत] में रहते थे 361 00:17:47,200 --> 00:17:52,798 और आग पर ज्यादा निर्भर थे। वहीं जो लोग 362 00:17:50,558 --> 00:17:56,000 साउथ [संगीत] इंडिया में कर्नाटक आंध्र की 363 00:17:52,798 --> 00:17:58,400 तरफ गए वहां मौसम गर्म था। वहां उन्हें 364 00:17:56,000 --> 00:18:01,119 गहरी [संगीत] गुफाओं की जरूरत नहीं थी। वे 365 00:17:58,400 --> 00:18:03,840 ग्रेनाइट की पहाड़ियों के नीचे या कभी-कभी 366 00:18:01,119 --> 00:18:06,639 खुले में झोपड़ियां बनाकर रहते थे। वहां 367 00:18:03,839 --> 00:18:09,119 जीवन थोड़ा खुला था। लेकिन खतरा वहां भी 368 00:18:06,640 --> 00:18:12,000 कम [संगीत] नहीं था। उस दौर में कोई राजा 369 00:18:09,119 --> 00:18:14,639 नहीं था। कोई नौकर नहीं था। सब बराबर थे। 370 00:18:12,000 --> 00:18:17,038 अगर कोई बीमार पड़ता तो पूरा समूह उसकी 371 00:18:14,640 --> 00:18:19,759 देखभाल करता। अगर कोई बच्चा [संगीत] अनाद 372 00:18:17,038 --> 00:18:22,480 हो जाता तो पूरा कबीला उसे गोद ले लेता। 373 00:18:19,759 --> 00:18:25,839 वे समझ चुके थे कि इस खतरनाक दुनिया में 374 00:18:22,480 --> 00:18:28,798 अकेला इंसान कमजोर है। लेकिन एक समूह अजय 375 00:18:25,839 --> 00:18:32,000 है। [संगीत] यही एकता उनकी सबसे बड़ी ताकत 376 00:18:28,798 --> 00:18:35,279 थी। उनके पास घर था। उनके पास आग थी। उनके 377 00:18:32,000 --> 00:18:38,880 पास एक दूसरे का साथ था। लेकिन एक चीज की 378 00:18:35,279 --> 00:18:42,000 कमी थी। पेट की भूख। भारत के जानवर तेज 379 00:18:38,880 --> 00:18:44,640 थे। और उनके पुराने भारी हथियार अब काम के 380 00:18:42,000 --> 00:18:46,880 नहीं रहे थे। तो फिर सवाल है उन्होंने खुद 381 00:18:44,640 --> 00:18:49,232 की अस्तित्व बचाए रखने के लिए भारी 382 00:18:46,880 --> 00:18:52,240 पत्थरों से आगे बढ़कर पहला तेज ब्लेड 383 00:18:49,231 --> 00:18:54,879 [संगीत] कैसे बनाया और उनकी वह मिसाइल 384 00:18:52,240 --> 00:18:58,160 टेक्नोलॉजी क्या था जो पल भर में जानवरों 385 00:18:54,880 --> 00:19:00,400 को खत्म कर देता था। आखिर कैसे? पत्थरों 386 00:18:58,160 --> 00:19:03,679 को तोड़ने वाले इंसान [संगीत] ने दुनिया 387 00:19:00,400 --> 00:19:06,640 का पहला ब्लेड बनाया। समय बदल रहा था। 388 00:19:03,679 --> 00:19:09,519 भारत के जंगल बदल रहे थे। अब वो विशाल और 389 00:19:06,640 --> 00:19:12,559 सुस्त जानवर जैसे स्टेगोडन [संगीत] इतिहास 390 00:19:09,519 --> 00:19:15,038 बन चुके थे। उनकी जगह ले ली थी। बिजली की 391 00:19:12,558 --> 00:19:18,079 रफ्तार से दौड़ने वाले हिरणों, चालाक 392 00:19:15,038 --> 00:19:20,879 खरगोशों और आसमान में उड़ने वाले पक्षियों 393 00:19:18,079 --> 00:19:24,240 ने। हमारे पूर्वजों [संगीत] के हाथ में जो 394 00:19:20,880 --> 00:19:26,320 भारीभरकम पत्थर के हथियार थे, वो इन नए 395 00:19:24,240 --> 00:19:29,919 जानवरों के सामने खिलौने [संगीत] बन चुके 396 00:19:26,319 --> 00:19:31,599 थे। जरा सोचिए क्या एक भारी पत्थर से 397 00:19:29,919 --> 00:19:35,840 उड़ती चिड़िया को मारा जा [संगीत] सकता 398 00:19:31,599 --> 00:19:38,879 है? नामुमकिन रोज शाम को जब शिकारी खाली 399 00:19:35,839 --> 00:19:41,359 हाथ थके हारे गुफा में लौटते तो वहां 400 00:19:38,880 --> 00:19:43,919 सन्नाटा [संगीत] छा जाता। 401 00:19:41,359 --> 00:19:46,798 कबीले का लीडर अपनी भूखी नस्ल को देखता 402 00:19:43,919 --> 00:19:50,640 होगा तो उसकी आंखों में सिर्फ एक ही डर 403 00:19:46,798 --> 00:19:53,839 होता होगा। अगर हमने बदलने में देर की तो 404 00:19:50,640 --> 00:19:56,000 हमारा इतिहास यहीं खत्म हो जाएगा। 405 00:19:53,839 --> 00:19:59,359 इंसान को जिंदा रहने के [संगीत] लिए एक 406 00:19:56,000 --> 00:20:03,679 तकनीकी क्रांति टेक रिवॉल्यूशन की जरूरत 407 00:19:59,359 --> 00:20:07,359 थी। और फिर संकट की उसी घड़ी में इंसान के 408 00:20:03,679 --> 00:20:10,320 दिमाग की बत्ती जली। उसने सोचा हथियार का 409 00:20:07,359 --> 00:20:13,199 बड़ा होना जरूरी नहीं। उसका तेज और सटीक 410 00:20:10,319 --> 00:20:16,079 होना जरूरी है। उसने पत्थरों को तोड़ना 411 00:20:13,200 --> 00:20:19,360 बंद किया और उन्हें तराशना शुरू किया। 412 00:20:16,079 --> 00:20:22,240 उसने बनाए माइक्रोलथित इंच भर के छोटे 413 00:20:19,359 --> 00:20:24,399 ब्लेड जैसे धारदार टुकड़े। पुरातत्व 414 00:20:22,240 --> 00:20:26,640 विज्ञान [संगीत] इसे सिर्फ पत्थर कहता है। 415 00:20:24,400 --> 00:20:29,759 लेकिन असल में यह उस जमाने की मिसाइल 416 00:20:26,640 --> 00:20:31,840 टेक्नोलॉजी थी। उन्होंने इन नन्हे जानलेवा 417 00:20:29,759 --> 00:20:35,279 पत्थरों को लकड़ियों और हड्डियों की नोक 418 00:20:31,839 --> 00:20:38,319 पर चिपकाया। अब उनके हाथ में भाला था। तीर 419 00:20:35,279 --> 00:20:41,839 और कमान था। अब वे झाड़ियों में छिपकर 420 00:20:38,319 --> 00:20:45,200 मीलों दूर से बिना आहट किए तेज रफ्तार 421 00:20:41,839 --> 00:20:48,399 हिरण का सीना चीर सकते थे। 422 00:20:45,200 --> 00:20:50,420 यह सिर्फ कहानी नहीं है। आज भी राजस्थान 423 00:20:48,400 --> 00:20:51,038 के बाघोर और मध्य प्रदेश के आदमगढ़ 424 00:20:50,420 --> 00:20:53,679 [संगीत] 425 00:20:51,038 --> 00:20:56,798 की मिट्टी में दबे यह हजारों साल पुराने 426 00:20:53,679 --> 00:20:59,840 नन्हे हथियार गवाही देते हैं कि इंसान ने 427 00:20:56,798 --> 00:21:03,200 अपने बाहुबल से नहीं बल्कि अपनी अक्ल से 428 00:20:59,839 --> 00:21:05,599 अपनी भूख को हरा दिया था। क्या आप मान 429 00:21:03,200 --> 00:21:08,960 सकते हैं कि आज का सूखा महाराष्ट्र कभी 430 00:21:05,599 --> 00:21:11,918 शुतुरमुर्गों ऑस्ट्रीचेस का घर था? जी 431 00:21:08,960 --> 00:21:14,798 हां, महाराष्ट्र के पाटनी गांव में हमें 432 00:21:11,919 --> 00:21:18,000 शुतुरमुर्ग के अंडों के 25,000 साल पुराने 433 00:21:14,798 --> 00:21:20,879 छिलके मिले हैं। एक शुतुरमुर्ग का अंडा 434 00:21:18,000 --> 00:21:24,640 मुर्गी के 24 अंडों के बराबर होता था। 435 00:21:20,880 --> 00:21:27,919 सोचिए एक अंडा और पूरे परिवार का पेट भर 436 00:21:24,640 --> 00:21:30,320 गया। यह उनका सबसे बड़ा खजाना था। वे ना 437 00:21:27,919 --> 00:21:32,960 सिर्फ इसे खाते थे बल्कि इसके मजबूत 438 00:21:30,319 --> 00:21:35,918 छिलकों को पानी पीने के प्याले बोल्स की 439 00:21:32,960 --> 00:21:38,720 तरह इस्तेमाल करते थे। लेकिन जंगल में 440 00:21:35,919 --> 00:21:40,880 सिर्फ शिकार नहीं चल रहा था। गुफाओं के 441 00:21:38,720 --> 00:21:44,159 बाहर महिलाओं [संगीत] ने एक और मोर्चा 442 00:21:40,880 --> 00:21:45,919 संभाला हुआ था। जंगल हरियाली से भरा तो था 443 00:21:44,159 --> 00:21:48,559 लेकिन हर पत्ती [संगीत] खाने लायक नहीं 444 00:21:45,919 --> 00:21:51,679 थी। हजारों सालों के तजुर्बे से उन्होंने 445 00:21:48,558 --> 00:21:55,359 सीखा कि कौन सा कंदमूल मीठा है और कौन सा 446 00:21:51,679 --> 00:21:59,280 जंगली चावल पकाया जा सकता है। यही वो 447 00:21:55,359 --> 00:22:02,479 सिलेक्शन था जो आगे चलकर खेती एग्रीकल्चर 448 00:21:59,279 --> 00:22:05,079 की नींव बनने वाला था। वे धीरे-धीरे समझ 449 00:22:02,480 --> 00:22:07,759 रहे थे कि नेचर की सुपर मार्केट से 450 00:22:05,079 --> 00:22:11,119 [संगीत] क्या खरीदना है। उस दौर में पैसा 451 00:22:07,759 --> 00:22:14,158 नहीं था। बैंक नहीं थे। लेकिन एक इकॉनमी 452 00:22:11,119 --> 00:22:17,439 शुरू हो चुकी थी। यह इकॉनमी भरोसे पर चलती 453 00:22:14,159 --> 00:22:20,799 थी। नियम कड़ा था। अगर आज शिकार तुम लाए 454 00:22:17,440 --> 00:22:24,159 हो तो तुम अकेले नहीं खाओगे। तुम बांटोगे। 455 00:22:20,798 --> 00:22:26,400 क्यों? क्योंकि कल शायद तुम खाली हाथ 456 00:22:24,159 --> 00:22:29,440 लौटो। तब कोई और तुम्हें अपना निवाला 457 00:22:26,400 --> 00:22:32,590 देगा। इसे आज हम शेयरिंग कहते हैं। यही वह 458 00:22:29,440 --> 00:22:36,080 आदत थी जिसने जानवरों की भीड़ को इंसानों 459 00:22:32,589 --> 00:22:39,119 [संगीत] का समाज बना दिया। लेकिन जंगल का 460 00:22:36,079 --> 00:22:42,879 सबसे कीमती और ताकतवर खजाना जमीन पर नहीं 461 00:22:39,119 --> 00:22:45,279 बल्कि हवा में झूलता था। सैकड़ों फीट ऊपर 462 00:22:42,880 --> 00:22:47,919 ऊंची और जानलेवा सीधी खड़ी चट्टानों पर 463 00:22:45,279 --> 00:22:50,399 था। शहद भीमबेटका की दीवारों पर मिले 464 00:22:47,919 --> 00:22:53,520 चित्र हमें बताते हैं कि हमारे पूर्वज 465 00:22:50,400 --> 00:22:56,880 सिर्फ ताकतवर ही नहीं बल्कि बेहद चालाक भी 466 00:22:53,519 --> 00:23:00,079 थे। शहद पाना शेर का शिकार करने से भी 467 00:22:56,880 --> 00:23:03,679 ज्यादा खतरनाक था। 468 00:23:00,079 --> 00:23:06,960 जरा सोचिए उस आदिमानव के पास आज की तरह 469 00:23:03,679 --> 00:23:09,679 कोई सेफ्टी गियर नहीं था। वे पेड़ों की 470 00:23:06,960 --> 00:23:13,200 मजबूत लताओं और रेशों से रस्सियां बनाते 471 00:23:09,679 --> 00:23:15,679 थे। एक तरफ नीचे हजारों फीट गहरी खाई होती 472 00:23:13,200 --> 00:23:18,880 थी और दूसरी तरफ हजारों गुस्साए 473 00:23:15,679 --> 00:23:21,200 मधुमक्खियां। लेकिन इंसान ने दिमाग लगाया। 474 00:23:18,880 --> 00:23:24,640 वे जानते थे कि मधुमक्खियों से लड़कर नहीं 475 00:23:21,200 --> 00:23:27,600 जीता जा सकता। इसलिए उन्होंने धुएं स्मोक 476 00:23:24,640 --> 00:23:30,080 का इस्तेमाल किया। वे मशाल जलाकर धुएं से 477 00:23:27,599 --> 00:23:32,158 मधुमक्खियों को शांत करते और फिर बहुत 478 00:23:30,079 --> 00:23:35,678 सावधानी [संगीत] से छत्ते से शहद निकाल 479 00:23:32,159 --> 00:23:38,880 लेते। यह सिर्फ स्वाद के लिए नहीं था। शहद 480 00:23:35,679 --> 00:23:42,080 उस दौर का सुपर एनर्जी फूड था। कुदरत का 481 00:23:38,880 --> 00:23:44,960 दिया हुआ सबसे शुद्ध ग्लूकोस। पेट की आग 482 00:23:42,079 --> 00:23:47,599 बुझ चुकी थी। लेकिन दिमाग में एक नई हलचल 483 00:23:44,960 --> 00:23:49,919 शुरू हो गई थी। आज भी मध्य प्रदेश की 484 00:23:47,599 --> 00:23:52,798 भीमबेटका [संगीत] की चट्टानों पर हजारों 485 00:23:49,919 --> 00:23:54,480 साल पुराने लाल रंग के निशान मौजूद हैं। 486 00:23:52,798 --> 00:23:58,240 आखिर क्या बनाया [संगीत] है उन्होंने इन 487 00:23:54,480 --> 00:24:01,279 दीवारों पर? कहीं शिकार करते हुए इंसान तो 488 00:23:58,240 --> 00:24:04,640 कहीं नाचते हुए समूह और कहीं अजीबोगरीब 489 00:24:01,279 --> 00:24:07,119 जानवर क्या यह सिर्फ सजावट थी या फिर 490 00:24:04,640 --> 00:24:10,320 इंसान [संगीत] के जादू और आत्मा से जुड़ने 491 00:24:07,119 --> 00:24:13,519 की पहली कोशिश एक रात गुफा के अंदर गहरी 492 00:24:10,319 --> 00:24:16,558 खामोशी थी। बाहर बारिश हो रही थी। लेकिन 493 00:24:13,519 --> 00:24:19,519 आग के पास बैठा इंसान कुछ सोच रहा था। वह 494 00:24:16,558 --> 00:24:22,798 अपने हाथ को देख रहा था। फिर अपने साथी के 495 00:24:19,519 --> 00:24:25,918 चेहरे को और फिर उस अंधेरी खुरदरी दीवार 496 00:24:22,798 --> 00:24:29,836 को उसके मन में शिकार और पेट से परे कुछ 497 00:24:25,919 --> 00:24:32,240 सवाल तैरने लगे। मैं कौन हूं? ये जंगल, 498 00:24:29,836 --> 00:24:35,759 [संगीत] ये जानवर, ये तारे मुझसे क्या कह 499 00:24:32,240 --> 00:24:39,038 रहे हैं? इन सवालों का जवाब उस वक्त की 500 00:24:35,759 --> 00:24:42,319 किसी भाषा में नहीं था। इसलिए उसने एक लाल 501 00:24:39,038 --> 00:24:45,278 रंग का पत्थर उठाया। उसे पीसा और गुफा की 502 00:24:42,319 --> 00:24:47,519 दीवार पर एक लकीर खींच दी। यही था इंसान 503 00:24:45,278 --> 00:24:50,079 का पहला अक्षर। यही [संगीत] थी कला की 504 00:24:47,519 --> 00:24:53,038 शुरुआत। मध्य प्रदेश की भीमबेटका की 505 00:24:50,079 --> 00:24:55,519 गुफाओं में आज भी वह चित्र मौजूद है। 506 00:24:53,038 --> 00:24:58,240 लेकिन जरा सोचिए उन्होंने वो चित्र क्यों 507 00:24:55,519 --> 00:25:00,960 बनाए? वह कोई आर्ट [संगीत] गैलरी नहीं थी। 508 00:24:58,240 --> 00:25:03,599 वहां कोई दर्शक आने वाला नहीं था। अंधेरी 509 00:25:00,960 --> 00:25:05,840 गुफाओं में मशाल की रोशनी में उन्होंने 510 00:25:03,599 --> 00:25:09,759 जानवरों के चित्र बनाए। नाचते [संगीत] हुए 511 00:25:05,839 --> 00:25:12,000 इंसानों के चित्र बनाए। शायद यह एक जादू 512 00:25:09,759 --> 00:25:14,798 था। उनका मानना था कि अगर [संगीत] वे 513 00:25:12,000 --> 00:25:16,880 दीवार पर शिकार को कैद कर लेंगे तो अगले 514 00:25:14,798 --> 00:25:20,558 दिन जंगल में भी शिकार उनकी मुट्ठी में 515 00:25:16,880 --> 00:25:24,000 होगा। यह चित्रकारी उनकी उम्मीद थी, उनकी 516 00:25:20,558 --> 00:25:26,798 प्रार्थना थी। लेकिन बदलाव सिर्फ दीवारों 517 00:25:24,000 --> 00:25:29,278 पर नहीं उनके शरीरों पर भी हो रहा था। 518 00:25:26,798 --> 00:25:31,918 इंसान ने पहली बार खुद को सजाना शुरू 519 00:25:29,278 --> 00:25:35,278 किया। शुतुरमुर्ग के अंडों के छिलकों को 520 00:25:31,919 --> 00:25:37,759 घिसकर उनमें छेद करके उन्होंने मनके बनाए 521 00:25:35,278 --> 00:25:41,359 और [संगीत] गले में पहन लिया। यह फैशन 522 00:25:37,759 --> 00:25:44,400 नहीं था। यह पहचान आइडेंटिटी थी। यह 523 00:25:41,359 --> 00:25:48,079 दुनिया को बताने का तरीका था कि मैं हूं। 524 00:25:44,400 --> 00:25:50,798 मैं अलग हूं। मेरी एक कहानी है। जानवर 525 00:25:48,079 --> 00:25:54,079 सिर्फ जीते हैं, लेकिन इंसान अपनी पहचान 526 00:25:50,798 --> 00:25:57,278 बनाना चाहता था। और फिर उन्होंने जीवन के 527 00:25:54,079 --> 00:26:00,000 सबसे कड़वे सच का सामना किया। मौत। 528 00:25:57,278 --> 00:26:03,200 जानवरों की दुनिया में जब कोई मरता है तो 529 00:26:00,000 --> 00:26:05,679 उसे वहीं छोड़ दिया जाता है। गिद्ध उसे खा 530 00:26:03,200 --> 00:26:08,880 जाते हैं। लेकिन हमारे पूर्वजों ने ऐसा 531 00:26:05,679 --> 00:26:11,600 नहीं किया। जब उनका कोई साथी, कोई बुजुर्ग 532 00:26:08,880 --> 00:26:14,480 या कोई बच्चा हमेशा के लिए सो गया तो 533 00:26:11,599 --> 00:26:17,599 उन्होंने उसे जंगल में नहीं फेंका। उत्तर 534 00:26:14,480 --> 00:26:20,079 प्रदेश के सराय नाहर राय और महादाहा में 535 00:26:17,599 --> 00:26:23,038 मिली हजारों साल पुरानी [संगीत] कब्रें 536 00:26:20,079 --> 00:26:25,599 हमें एक भावुक कहानी सुनाती हैं। उन्होंने 537 00:26:23,038 --> 00:26:29,400 गड्ढा खोदा। अपने प्रियजन [संगीत] को बहुत 538 00:26:25,599 --> 00:26:29,399 प्यार से उसमें लिटाया। 539 00:26:31,679 --> 00:26:37,200 और ध्यान दीजिए। उन्होंने उसे खाली हाथ 540 00:26:34,720 --> 00:26:41,839 नहीं भेजा। उन्होंने उसके साथ उसका 541 00:26:37,200 --> 00:26:45,600 पसंदीदा भाला रखा, मांस रखा और गहने रखे। 542 00:26:41,839 --> 00:26:48,720 क्यों? क्योंकि इतिहास में पहली बार इंसान 543 00:26:45,599 --> 00:26:51,678 यह मान रहा था कि मौत अंत नहीं है। उन्हें 544 00:26:48,720 --> 00:26:55,120 लगा कि मरने के बाद भी एक सफर है। एक 545 00:26:51,679 --> 00:26:58,720 दूसरी दुनिया है जहां उसे भूख लगेगी। जहां 546 00:26:55,119 --> 00:27:01,599 उसे हथियारों की जरूरत होगी। यही आत्मा का 547 00:26:58,720 --> 00:27:05,038 पहला विचार था। यही धर्म की [संगीत] पहली 548 00:27:01,599 --> 00:27:07,599 नींव थी। गुफाओं में कहानियां गूंजने लगी। 549 00:27:05,038 --> 00:27:09,519 बुजुर्ग आग के पास बैठकर बच्चों को बताने 550 00:27:07,599 --> 00:27:12,319 लगे [संगीत] कि कैसे उन्होंने शेर का 551 00:27:09,519 --> 00:27:14,558 सामना किया। कैसे उन्होंने नदियां पार की। 552 00:27:12,319 --> 00:27:17,119 ज्ञान अब [संगीत] एक दिमाग से दूसरे दिमाग 553 00:27:14,558 --> 00:27:20,639 में जा रहा था। इंसान अब सिर्फ शिकारी 554 00:27:17,119 --> 00:27:24,067 नहीं था। वह एक चिंतक थिंकर बन चुका था। 555 00:27:20,640 --> 00:27:27,038 वह सपने देखने लगा था। लेकिन यह घुमंतु 556 00:27:24,067 --> 00:27:29,962 [संगीत] जीवन, यह शिकार, यह गुफाएं अब 557 00:27:27,038 --> 00:27:32,319 पीछे छूटने वाली थी। इंसान के इतिहास में 558 00:27:29,962 --> 00:27:35,119 [संगीत] एक ऐसा मोड़ आने वाला था जो सब 559 00:27:32,319 --> 00:27:37,678 कुछ बदलने वाला था। वह भोजन उगाने वाला 560 00:27:35,119 --> 00:27:39,759 था। गुफाओं से निकलकर खुले मैदानों में 561 00:27:37,679 --> 00:27:42,960 शहर बसने वाले थे। [संगीत] पत्थर की 562 00:27:39,759 --> 00:27:46,558 नालियां, विशाल स्नान गृह और हड़प्पा जैसी 563 00:27:42,960 --> 00:27:49,200 अद्भुत सभ्यता जिसे देखकर आज का इंजीनियर 564 00:27:46,558 --> 00:27:52,079 भी सोच में पड़ जाए। लेकिन कहानी यहीं 565 00:27:49,200 --> 00:27:55,278 नहीं रुकती। सनौली और हस्तिनापुर की 566 00:27:52,079 --> 00:27:58,240 खुदाइयों से शाही रथ और हथियार मिले हैं। 567 00:27:55,278 --> 00:28:01,599 जो महाभारत में वर्णित पांडव कौरव युद्ध 568 00:27:58,240 --> 00:28:05,359 से मेल खाता है। तो क्या महाभारत सिर्फ एक 569 00:28:01,599 --> 00:28:08,719 कथा है या सच में इतिहास में घटित हुआ था। 570 00:28:05,359 --> 00:28:12,079 भारत के इतिहास में आज से लगभग 9000 साल 571 00:28:08,720 --> 00:28:15,278 पहले एक ऐसा पल आया जिसने इंसान की नियति 572 00:28:12,079 --> 00:28:18,000 ही बदल दी। लाखों सालों से भोजन के पीछे 573 00:28:15,278 --> 00:28:22,319 भागते हुए हमारे पूर्वजों ने भागना बंद कर 574 00:28:18,000 --> 00:28:24,960 दिया। वजह थी एक नन्हा सा बीज। इंसान को 575 00:28:22,319 --> 00:28:27,759 समझ आ गया था कि पेट भरने के लिए जंगल में 576 00:28:24,960 --> 00:28:31,120 भटकना जरूरी नहीं। भोजन को अपनी जमीन पर 577 00:28:27,759 --> 00:28:33,679 उगाया जा सकता है। शिकारी इंसान अब किसान 578 00:28:31,119 --> 00:28:36,118 बन चुका था। नदियों के किनारे कच्ची 579 00:28:33,679 --> 00:28:38,960 मिट्टी की दीवारें उठी और इंसान को उसका 580 00:28:36,118 --> 00:28:41,519 [संगीत] पहला परमानेंट एड्रेस मिल गया। 581 00:28:38,960 --> 00:28:45,120 समय का पहिया तेजी से घूमा। यह [संगीत] 582 00:28:41,519 --> 00:28:47,759 छोटे गांव कस्बों में बदलने लगे और फिर 583 00:28:45,119 --> 00:28:50,158 मेहरगढ़ से [संगीत] शुरू हुआ यह सफर भारत 584 00:28:47,759 --> 00:28:53,148 के पश्चिमी हिस्से में एक महानगरीय 585 00:28:50,159 --> 00:28:55,760 विस्फोट में बदल गया। आज से 5000 साल 586 00:28:53,148 --> 00:28:58,388 [संगीत] पहले जब पूरी दुनिया कबीलों और 587 00:28:55,759 --> 00:29:00,879 झोपड़ियों में रह रही थी तब भारत में जन्म 588 00:28:58,388 --> 00:29:04,398 [संगीत] ले रही थी। दुनिया की सबसे आधुनिक 589 00:29:00,880 --> 00:29:07,600 सभ्यता इंडस वैली सिविलाइजेशन 590 00:29:04,398 --> 00:29:10,879 जरा कल्पना कीजिए। हजारों साल पहले के वे 591 00:29:07,599 --> 00:29:13,599 लोग शहरी नियोजन अर्बन प्लानिंग के उस्ताद 592 00:29:10,880 --> 00:29:16,720 थे। उनकी सड़कें आज के गांवों की तरह 593 00:29:13,599 --> 00:29:20,240 टेढ़ी-मेढ़ी नहीं थी। वे एक दूसरे को ठीक 594 00:29:16,720 --> 00:29:23,278 90 डिग्री राइट एंगल पर काटती थी। हड़प्पा 595 00:29:20,240 --> 00:29:26,399 के शहरों में हर मकान हर गली एक सलीके से 596 00:29:23,278 --> 00:29:30,079 बनी थी। यहां तक कि मकान बनाने वाली ईंटों 597 00:29:26,398 --> 00:29:33,119 का अनुपात रेश्यो भी पूरी सभ्यता में 4 598 00:29:30,079 --> 00:29:35,918 अनुपात 2 अनुपात एक [संगीत] ही रहता था। 599 00:29:33,119 --> 00:29:38,000 चाहे शहर हजारों मील दूर हो। ईंटों का यह 600 00:29:35,919 --> 00:29:41,679 स्टैंडर्ड [संगीत] साइज दिखाता है कि उनकी 601 00:29:38,000 --> 00:29:43,759 शासन व्यवस्था कितनी मजबूत और संगठित थी। 602 00:29:41,679 --> 00:29:46,640 लेकिन हड़प्पा की सबसे बड़ी गहराई [संगीत] 603 00:29:43,759 --> 00:29:49,679 उनके महलों में नहीं बल्कि उनकी नालियों 604 00:29:46,640 --> 00:29:52,559 ड्रेनेज सिस्टम में छिपी थी। हर घर का 605 00:29:49,679 --> 00:29:54,720 अपना [संगीत] बाथरूम था। गंदा पानी 606 00:29:52,558 --> 00:29:57,440 निकालने के लिए पक्की और ढकी हुई नालियां 607 00:29:54,720 --> 00:30:00,615 [संगीत] बनाई गई थी। इन नालियों में 608 00:29:57,440 --> 00:30:00,720 जगह-जगह पर मैन होल्स छोड़े गए थे 609 00:30:00,615 --> 00:30:04,000 [संगीत] 610 00:30:00,720 --> 00:30:07,819 ताकि कचरा साफ किया जा सके। और फिर आता है 611 00:30:04,000 --> 00:30:10,159 मोहनजोदड़ो का वह विशाल स्नानागार। यह महज 612 00:30:07,819 --> 00:30:13,278 [संगीत] एक कुंड नहीं था बल्कि प्राचीन 613 00:30:10,159 --> 00:30:14,399 इंजीनियरिंग का चमत्कार था। 614 00:30:13,278 --> 00:30:16,880 इसे वाटरप्रूफ [संगीत] 615 00:30:14,398 --> 00:30:19,678 बनाने के लिए उन लोगों ने ईंटों के ऊपर 616 00:30:16,880 --> 00:30:22,960 नेचुरल बिटुमेन यानी [संगीत] प्राकृतिक 617 00:30:19,679 --> 00:30:24,798 डामर की परत चढ़ाई थी। हजारों सालों बाद 618 00:30:22,960 --> 00:30:27,759 भी वह पानी [संगीत] को रोकने में सक्षम 619 00:30:24,798 --> 00:30:30,558 था। वहां पानी भरने के लिए अलग कुआमा था 620 00:30:27,759 --> 00:30:33,599 और गंदा पानी निकालने के लिए एक विशाल 621 00:30:30,558 --> 00:30:36,480 आउटलेट। यह दिखाता है कि वे पानी के 622 00:30:33,599 --> 00:30:38,879 प्रबंधन, वाटर मैनेजमेंट के कितने बड़े 623 00:30:36,480 --> 00:30:41,360 जानकार थे। हड़प्पा के शहरों का 624 00:30:38,880 --> 00:30:44,640 आर्किटेक्चर दुनिया का पहला स्मार्ट सिटी 625 00:30:41,359 --> 00:30:47,038 मॉडल था। क्या आप जानते हैं? उनके घरों के 626 00:30:44,640 --> 00:30:49,919 दरवाजे कभी मुख्य सड़क की तरफ नहीं खुलते 627 00:30:47,038 --> 00:30:52,158 थे। वे पीछे की गलियों में खुलते थे। यह 628 00:30:49,919 --> 00:30:54,640 प्राइवेसी और धूल मिट्टी से बचने का एक 629 00:30:52,159 --> 00:30:57,278 अनोखा [संगीत] तरीका था। हर घर का अपना 630 00:30:54,640 --> 00:31:00,720 आंगन था रोशनी और ताजी हवा [संगीत] के 631 00:30:57,278 --> 00:31:03,679 लिए। 5000 साल पहले आधुनिक वेंटिलेशन का 632 00:31:00,720 --> 00:31:06,079 ऐसा उदाहरण कहीं और नहीं मिलता। हड़प्पा 633 00:31:03,679 --> 00:31:09,200 के शहरों का आर्किटेक्चर दुनिया का पहला 634 00:31:06,079 --> 00:31:10,879 स्मार्ट सिटी मॉडल था। और अगर आप हड़प्पा 635 00:31:09,200 --> 00:31:13,360 सभ्यता [संगीत] के ऐसे ही उन्नत 636 00:31:10,880 --> 00:31:16,080 आर्किटेक्चर, शहरों की प्लानिंग और उनकी 637 00:31:13,359 --> 00:31:18,560 चौंकाने वाली तकनीक के बारे और जानना 638 00:31:16,079 --> 00:31:18,879 चाहते हैं तो कमेंट में अवश्य बताइए। 639 00:31:18,560 --> 00:31:22,398 [संगीत] 640 00:31:18,880 --> 00:31:24,456 लेकिन जैसे-जैसे हम सिंधु सभ्यता से गंगा 641 00:31:22,398 --> 00:31:28,000 के मैदानों की ओर मुड़ते हैं, इतिहास 642 00:31:24,455 --> 00:31:30,798 [संगीत] एक नया और रोमांचक मोड़ लेता है। 643 00:31:28,000 --> 00:31:34,319 जहां एक तरफ हड़प्पा में शांति और व्यापार 644 00:31:30,798 --> 00:31:37,440 था, वहीं दूसरी तरफ उत्तर भारत की जमीन को 645 00:31:34,319 --> 00:31:39,519 कुरेदने पर कुछ ऐसे राज मिलते हैं जो 646 00:31:37,440 --> 00:31:42,798 हमारी महाकाव्य में [संगीत] वर्णित 647 00:31:39,519 --> 00:31:47,120 महाभारत की युद्ध को प्रमाणित करता है। हम 648 00:31:42,798 --> 00:31:50,720 बात कर रहे हैं सिनोली की। साल 2005 और 649 00:31:47,119 --> 00:31:53,678 फिर 2018 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण 650 00:31:50,720 --> 00:31:56,159 एईएसआई को यहां जो [संगीत] मिला उसने 651 00:31:53,679 --> 00:31:58,880 हजारों साल पुराने इतिहास को हिला कर रख 652 00:31:56,159 --> 00:32:01,840 दिया। जमीन के सीने से निकले [संगीत] हैं 653 00:31:58,880 --> 00:32:04,960 दो पहियों वाले शाही रथ चैरियट्स। 654 00:32:01,839 --> 00:32:07,678 इतिहासकार पहले कहते थे कि भारत में रथ और 655 00:32:04,960 --> 00:32:10,720 घोड़े बाहर से आए। लेकिन सिनोली ने साबित 656 00:32:07,679 --> 00:32:13,519 कर दिया कि भारत में अपने खुद के रथ थे। 657 00:32:10,720 --> 00:32:15,759 यह तांबे से मड़े हुए थे जो इनकी मजबूती 658 00:32:13,519 --> 00:32:18,822 और [संगीत] शाही ठाट को दिखाते हैं। यहां 659 00:32:15,759 --> 00:32:21,679 से मिली एंटीना स्वर्ड्स तांबे की मुंठ 660 00:32:18,821 --> 00:32:24,959 [संगीत] वाली आठ विशाल तलवारें जो आज भी 661 00:32:21,679 --> 00:32:27,759 वैसी ही धारदार लगती हैं। तो दोस्तों आज 662 00:32:24,960 --> 00:32:29,759 के लिए बस इतना ही। कमेंट करके बताइए कि 663 00:32:27,759 --> 00:32:32,319 अगले डॉक्यूमेंट्री किस टॉपिक पर होना 664 00:32:29,759 --> 00:32:34,558 चाहिए और अगर आप भी ऐसा ही वीडियो बनाना 665 00:32:32,319 --> 00:32:37,119 चाहते हैं तो मेरे WhatsApp कम्युनिटी से 666 00:32:34,558 --> 00:32:40,720 जुड़े और यह वीडियो आप किस राज्य से देख 667 00:32:37,119 --> 00:32:40,719 रहे हैं यह भी कमेंट में बताएं।