1 00:00:00,160 --> 00:00:07,440 कि इसमें तो कोई शक नहीं है। इसमें सब 2 00:00:03,279 --> 00:00:09,359 मुत्तफिक हैं कि फिल्म का जो मीडिया है वो 3 00:00:07,440 --> 00:00:10,400 लोगों के लिए पब्लिक के लिए सबसे ज्यादा 4 00:00:09,359 --> 00:00:13,919 ताकतवर है। 5 00:00:10,400 --> 00:00:16,399 ये ये बीमारी नहीं है जो फिल्मों में दिख 6 00:00:13,919 --> 00:00:18,640 रही है। बीमारी का सिम्टम है। फिल्में 7 00:00:16,399 --> 00:00:20,239 इतनी इंपॉर्टेंट समाज से ज्यादा, मुशरे से 8 00:00:18,640 --> 00:00:23,839 ज्यादा, मुल्क से ज्यादा तो इंपॉर्टेंट 9 00:00:20,239 --> 00:00:28,320 नहीं हो सकती ना। शायर अगर अपनी जुबान से 10 00:00:23,839 --> 00:00:32,238 और जुबान की नजाकतों से, मुहावरों से और 11 00:00:28,320 --> 00:00:36,238 उसकी खूबसूरती से वाकिफ हो तो वो फिल्मी 12 00:00:32,238 --> 00:00:39,759 गीत में भी नजर आती है। ऐसा हो ही नहीं 13 00:00:36,238 --> 00:00:41,359 सकता कि कोई खराब शायर जो है वो अच्छा 14 00:00:39,759 --> 00:00:44,479 फिल्मी गीत लिखे। 15 00:00:41,359 --> 00:00:46,799 जबान ख्याल नहीं है। लफ्ज ख्याल नहीं है। 16 00:00:44,479 --> 00:00:49,799 लेकिन लफज़ वो ईंटें हैं जिनसे ख्याल बनते 17 00:00:46,799 --> 00:00:49,799 हैं। 18 00:01:06,239 --> 00:01:13,359 वो उर्दू का मुसाफिर है। यही पहचान है 19 00:01:08,959 --> 00:01:16,798 उसकी। वो उर्दू का मुसाफिर है। यही पहचान 20 00:01:13,359 --> 00:01:19,039 है उसकी। जिधर से भी गुजरता है सलीका छोड़ 21 00:01:16,799 --> 00:01:21,680 जाता है। दानिश भाई के इस शेर के साथ इस 22 00:01:19,040 --> 00:01:24,880 आफ्टरनून की शुरुआत हो रही है और तीन बहुत 23 00:01:21,680 --> 00:01:27,040 ही खूबसूरत बहुत ही जहीन बहुत ही कमाल के 24 00:01:24,879 --> 00:01:29,438 हमारे दोस्त हमारे सीनियर्स यहां पर हैं 25 00:01:27,040 --> 00:01:32,479 जिनकी गुफ्तगू सुनने का इंतजार हम कर रहे 26 00:01:29,438 --> 00:01:34,798 हैं। सबसे पहले मैं उनका जिक्र करना चाहता 27 00:01:32,478 --> 00:01:37,039 हूं जो इस सेशन को मॉडरेट करेंगे। जिनके 28 00:01:34,799 --> 00:01:39,360 सवाल जो होते हैं वो बड़े दिलचस्प होते 29 00:01:37,040 --> 00:01:41,840 हैं और वो उसका इंतजार हम सब करते हैं। 30 00:01:39,359 --> 00:01:43,840 अदिल हाशमी साहब इस सेशन को मॉडरेट 31 00:01:41,840 --> 00:01:45,920 करेंगे। 32 00:01:43,840 --> 00:01:47,600 बहुत सारा काम किया है सैन फ्रांसिस्को 33 00:01:45,920 --> 00:01:49,200 सिर्फ फिल्म मेकिंग में भी कोर्स किया है। 34 00:01:47,599 --> 00:01:51,438 सिखाते भी रहे हैं। लेकिन अभी बैक स्टेज 35 00:01:49,200 --> 00:01:52,960 कह रहे थे कि मैं जरा सी चीज पे मेरी 36 00:01:51,438 --> 00:01:54,959 गिरफ्त होती है, पकड़ होती है तो मैं उसको 37 00:01:52,959 --> 00:01:58,639 छोड़ के कुछ और करने लग जाता हूं। तो एक 38 00:01:54,959 --> 00:02:01,118 अलग सेशन मैं अदील साहब के साथ करूंगा और 39 00:01:58,640 --> 00:02:03,599 उस तरफ जो बैठे हैं हम सबके फेवरेट हैं। 40 00:02:01,118 --> 00:02:05,920 और इनके बारे में बहुत बार मुझे बोलने का 41 00:02:03,599 --> 00:02:11,318 मौका मिलता है। अब मैं मैं यही कहता हूं 42 00:02:05,920 --> 00:02:11,318 कि द वन एंड ओनली जावेद अख्तर। 43 00:02:13,598 --> 00:02:19,039 और क्योंकि जावेद साहब हम जानते हैं कैसा 44 00:02:16,878 --> 00:02:22,159 बोलते हैं। तो उन्हीं का शेर मैं पढ़ना 45 00:02:19,039 --> 00:02:24,799 चाहता हूं। अगर पलक पे है मोती तो यह नहीं 46 00:02:22,159 --> 00:02:27,840 काफी। अगर पलक पे है मोती तो यह नहीं 47 00:02:24,800 --> 00:02:31,840 काफी। हुनर भी चाहिए अल्फाज में पिरोने 48 00:02:27,840 --> 00:02:35,120 का। जावेद अख्तर साहब 49 00:02:31,840 --> 00:02:39,319 हम सबकी फेवरेट ज़हरा आपा। हम सब जानते हैं 50 00:02:35,120 --> 00:02:39,319 शायरी में जो आपका नाम है। 51 00:02:42,318 --> 00:02:46,318 गाने भी लिखती रही हैं। स्क्रिप्ट राइटर 52 00:02:44,400 --> 00:02:49,599 भी हैं। और आपका शेर ये है कि बहुत ही 53 00:02:46,318 --> 00:02:53,039 खूबसूरत शेर है। छोटी सी बात पे खुश होना 54 00:02:49,598 --> 00:02:56,000 मुझे आता था। छोटी सी बात पे खुश होना 55 00:02:53,039 --> 00:02:59,919 मुझे आता था। पर बड़ी बात पे चुप रहना 56 00:02:56,000 --> 00:03:02,719 तुम्ही से सीखा। ज़हरा निगाह। 57 00:02:59,919 --> 00:03:06,639 आज की इस गुफ्तगू का टॉपिक है फिल्मी और 58 00:03:02,719 --> 00:03:09,280 अदबी दुनिया। फिल्मी और अदबी दुनिया फासले 59 00:03:06,639 --> 00:03:11,279 और नजदीकियां। यहां से अदील भाई का माइक 60 00:03:09,280 --> 00:03:14,239 शुक्रिया बहुत-बहुत थैंक यू सो मच 61 00:03:11,280 --> 00:03:18,318 गगन बहुत-बहुत शुक्रिया जश्न रेख्ता का 62 00:03:14,239 --> 00:03:22,879 बहुत-बहुत शुक्रिया और हमारी आपकी मेरी 63 00:03:18,318 --> 00:03:26,959 खुशकिस्मती कि हम एक ऐसे अहद में एक ऐसी 64 00:03:22,878 --> 00:03:29,439 जगह पर मौजूद हैं कि जो अहद और जो जगह 65 00:03:26,959 --> 00:03:32,158 ज़हरा आपा और जावेद साहब भी मौजूद हैं। ये 66 00:03:29,439 --> 00:03:36,318 हमारी आपकी खुशकिस्मती है। खुदा इन दोनों 67 00:03:32,158 --> 00:03:42,479 को सेहतमंद रखे, तवाना रखे। 68 00:03:36,318 --> 00:03:46,000 जरा जरा सा मौजू से हट के जश्न रेख्ता एक 69 00:03:42,479 --> 00:03:48,560 रोमांटिक बात होती है। दो अच्छे शेर सुने 70 00:03:46,000 --> 00:03:50,959 दो अच्छी तालियां बजा दी। शाम को गाना 71 00:03:48,560 --> 00:03:53,840 बजाना हुआ। बहुत अच्छा हुआ। वाहवाह की घर 72 00:03:50,959 --> 00:03:57,680 चले गए। क्या इससे ज्यादा अहमियत है 73 00:03:53,840 --> 00:03:59,759 रेख्ता की, जुबान की या ऐसे फेस्टिवल्स की 74 00:03:57,680 --> 00:04:01,920 क्योंकि कोई गहरी अहमियत भी हो सकती है 75 00:03:59,759 --> 00:04:06,079 इसके अलावा? 76 00:04:01,919 --> 00:04:10,079 सबसे पहले तो आप सबका बहुत-बहुत शुक्रिया। 77 00:04:06,080 --> 00:04:13,840 अदील ने जो सवाल किया अहम सवाल है कि आप 78 00:04:10,080 --> 00:04:16,239 लोग यहां इतने शौक से आते हैं। कभी आप 79 00:04:13,840 --> 00:04:18,879 म्यूजिक से लुत्फंदोज होते हैं। कभी आप 80 00:04:16,238 --> 00:04:20,478 तकारीर सुनते हैं। कभी आप शायरी सुनते 81 00:04:18,879 --> 00:04:23,759 हैं। 82 00:04:20,478 --> 00:04:26,879 ये तमाम चीजें अदब की असनाफ है। उस अदब का 83 00:04:23,759 --> 00:04:30,879 ही इससे ताल्लुक है। लेकिन मैं एक बात 84 00:04:26,879 --> 00:04:35,040 आपसे जरूर कहना चाहती हूं कि यह संजीव 85 00:04:30,879 --> 00:04:38,079 साहब का कमाल है कि वो इन तमाम फुनून के 86 00:04:35,040 --> 00:04:42,240 या तमाम जिन तरीकों के जरिए से जो 87 00:04:38,079 --> 00:04:46,560 बुनियादी बात है रेता की वो अदब के अलावा 88 00:04:42,240 --> 00:04:49,600 तहजीब भी है। अदब और तहजीब का यह समझ 89 00:04:46,560 --> 00:04:54,000 लीजिए कि लाजिम और मलजूम है एक दूसरे के 90 00:04:49,600 --> 00:04:58,160 लिए। आप शेर सुनते हैं। आप किस तरह सुनते 91 00:04:54,000 --> 00:05:01,439 हैं? उसके सुनने के आदाब क्या है? यह आपको 92 00:04:58,160 --> 00:05:05,040 रेता के जरिए आप सीखते हैं। आप तकारीर 93 00:05:01,439 --> 00:05:07,360 सुनते हैं। बाज लफ्ज ऐसे होते हैं जो इससे 94 00:05:05,040 --> 00:05:11,120 पहले आपने नहीं सुने होते। आप उन्हें 95 00:05:07,360 --> 00:05:15,199 जानने की कोशिश करते हैं। जब आप यहां के 96 00:05:11,120 --> 00:05:19,680 जलसों से जाते हैं वापस तो मुझे इसका पूरा 97 00:05:15,199 --> 00:05:23,759 यकीन है कि आपके दामन में 98 00:05:19,680 --> 00:05:28,560 कुछ कीमती चीजें जरूर होती हैं। किसी का 99 00:05:23,759 --> 00:05:31,840 कॉल, किसी का शेर, किसी का अंदाज, 100 00:05:28,560 --> 00:05:34,800 यह सब जुगनुओं की तरह आपके दामन में सिमट 101 00:05:31,839 --> 00:05:36,638 के आ जाते हैं। और यही रेफ्ता की सबसे 102 00:05:34,800 --> 00:05:40,720 बड़ी है। 103 00:05:36,639 --> 00:05:44,160 इसीलिए यह कहा जाता है कि अदब और इल्म 104 00:05:40,720 --> 00:05:47,680 दोनों किस लिए कि रेख्ता दोनों ही कजामिन 105 00:05:44,160 --> 00:05:50,880 है। और मैं इस सिलसिले में संजीव की 106 00:05:47,680 --> 00:05:54,400 हिम्मत और उनकी बेगम की हिम्मत की बड़ी 107 00:05:50,879 --> 00:05:57,600 दाद देती हूं कि बावजूद हजार मुश्किलात और 108 00:05:54,399 --> 00:06:01,359 तंगियों के वो बराबर अपने मयार को कायम 109 00:05:57,600 --> 00:06:04,000 रखे हुए हैं और लोग बेतहाशा इसमें शामिल 110 00:06:01,360 --> 00:06:08,479 होते हैं। सुनने के लिए आते हैं। मेरे साथ 111 00:06:04,000 --> 00:06:11,439 जो साहब बैठे हैं अब इनका आलम तो यह है कि 112 00:06:08,478 --> 00:06:14,879 इनका तारुफ अगर मैं करवाऊं तो मेरा तारुफ 113 00:06:11,439 --> 00:06:17,759 फिर आपसे हो जाएगा। क्योंकि इनके तारुफ की 114 00:06:14,879 --> 00:06:21,918 तो किसी को जरूरत ही नहीं है। इनका आना 115 00:06:17,759 --> 00:06:25,600 हमारे लिए बहुत मुबारक फाल है। और मेरी 116 00:06:21,918 --> 00:06:28,799 दुआ है कि सेहत तंदुरुस्ती के साथ रेख्ता 117 00:06:25,600 --> 00:06:32,000 के जलसों में यह बराबर आते रहें और आप 118 00:06:28,800 --> 00:06:34,879 लोगों से बेया मोहब्बत वसूल करते रहें और 119 00:06:32,000 --> 00:06:38,959 आपसे बहुत अच्छी-अच्छी बातें करते रहें। 120 00:06:34,879 --> 00:06:41,959 इनकी बातों में गुलों की खुशबू मैं जावेद 121 00:06:38,959 --> 00:06:41,959 कुमार 122 00:06:42,560 --> 00:06:47,600 जरा आपने बात बहुत जल्दी खत्म कर दी। अब 123 00:06:44,959 --> 00:06:48,560 शुरू हुई थी तो आराम से करते कोई वक्त की 124 00:06:47,600 --> 00:06:52,080 कमी नहीं है। 125 00:06:48,560 --> 00:06:54,240 नहीं तो मैं फिर शुरू खत्म कर दिया। 126 00:06:52,079 --> 00:06:56,318 बहाल बहुत-बहुत शुक्रिया। आप लोग सब यहां 127 00:06:54,240 --> 00:06:58,560 आए और बहुत-बहुत शुक्रिया कि हमें बुलाया 128 00:06:56,319 --> 00:07:01,039 गया। मुझे बुलाया गया। इट इज़ ऑलवेज अ 129 00:06:58,560 --> 00:07:04,240 प्लेज़र कमिंग हियर। जिंदगी जो है ज्यादा 130 00:07:01,038 --> 00:07:07,120 से ज्यादा वक्त के साथ सख्त बेरंग और बड़ी 131 00:07:04,240 --> 00:07:09,280 मतलबी सी होती जा रही है। तो जब यह मवाके 132 00:07:07,120 --> 00:07:12,478 होते हैं जहां कोई दूसरी भी बातें हो जहां 133 00:07:09,279 --> 00:07:15,038 सिर्फ फायदा नुकसान की बात ना हो जहां 134 00:07:12,478 --> 00:07:21,079 सिर्फ उन चीजों की बात ना हो जो बैंक में 135 00:07:15,038 --> 00:07:21,079 डिपॉजिट की जा सकती है तो अच्छा लगता है। 136 00:07:21,120 --> 00:07:26,959 और इसकी अहमियत क्या है? ये बड़ा अच्छा 137 00:07:24,399 --> 00:07:30,318 सवाल किया था हमारे भाई ने। 138 00:07:26,959 --> 00:07:33,038 देखिए आर्ट लिटरेचर और कोई भी फॉर्म ऑफ़ 139 00:07:30,319 --> 00:07:35,439 आर्ट जो है खुसूसन मैं क्योंकि इस वक्त 140 00:07:33,038 --> 00:07:40,399 लिटरेचर की बात हो रही तो लिटरेचर कहूंगा 141 00:07:35,439 --> 00:07:42,800 खासतौर से ये एस्पिरेंट नहीं है। ये ऐसा 142 00:07:40,399 --> 00:07:46,879 नहीं है कि हमने एक डोज़ ले ली लिटरेचर की 143 00:07:42,800 --> 00:07:49,840 और हम बिल्कुल अलग हो गए। ये विटामिन है। 144 00:07:46,879 --> 00:07:52,240 ये अगर आप इसे इस्तेमाल करते रहते हैं तो 145 00:07:49,839 --> 00:07:53,598 जिंदगी की खूबसूरती क्या है? एस्थेटिक्स 146 00:07:52,240 --> 00:07:57,038 क्या है? वो आहिस्ताआहिस्ता 147 00:07:53,598 --> 00:08:02,319 आहिस्ताआहिस्ता आपके ज़हन में नशीन होती है 148 00:07:57,038 --> 00:08:05,038 और आप में खूबसूरती को 149 00:08:02,319 --> 00:08:07,120 समझने का और उसकी इज्जत करने का एतराम 150 00:08:05,038 --> 00:08:10,959 करने का 151 00:08:07,120 --> 00:08:13,038 सलाहियत बढ़ती है। खूबसूरती से मतलब सिर्फ 152 00:08:10,959 --> 00:08:16,079 चेहरे की या जिस्म की खूबसूरती नहीं है। 153 00:08:13,038 --> 00:08:17,680 खूबसूरती सुलूक की, खूबसूरती सोच की, 154 00:08:16,079 --> 00:08:20,560 फिक्र की 155 00:08:17,680 --> 00:08:23,519 वो खूबसूरती हर खराब जज्बा 156 00:08:20,560 --> 00:08:26,879 वो बदसूरत है। हर अच्छा जज्बा, हर अच्छा 157 00:08:23,519 --> 00:08:30,399 इमोशन, हर अच्छी फीलिंग खूबसूरत है। अह तो 158 00:08:26,879 --> 00:08:33,918 वह उससे हमें धीरे धीरे धीरे धीरे 159 00:08:30,399 --> 00:08:37,199 वाबस्तगी होती है और हम उसे पहचानने लगते 160 00:08:33,918 --> 00:08:40,559 हैं। दो एम ये है कि ज़बान जो है जबान 161 00:08:37,200 --> 00:08:43,599 ख्याल नहीं है। लब्ज़ ख्याल नहीं है। लब्ज़ 162 00:08:40,559 --> 00:08:46,799 वो ईंटें हैं जिनसे ख्याल बनते हैं। तो जब 163 00:08:43,599 --> 00:08:50,320 हम जैसे ईंटों से मकान बनते हैं। ईंट तो 164 00:08:46,799 --> 00:08:54,319 मकान नहीं है। लेकिन हम जब अच्छी जबान 165 00:08:50,320 --> 00:08:58,000 पढ़ते हैं और पढ़ते रहते हैं तो हमारे पास 166 00:08:54,320 --> 00:08:59,760 वो सोर्स पैदा होता है। नहीं वो भी ठीक कह 167 00:08:58,000 --> 00:09:01,679 रहे हैं जो कह रहे हैं लेकिन आप मेरी बात 168 00:08:59,759 --> 00:09:04,639 सुनिए। 169 00:09:01,679 --> 00:09:07,359 आप मेरी बात सुने। 170 00:09:04,639 --> 00:09:10,720 तो दो बातें हमें पता चलती हैं। एक तो 171 00:09:07,360 --> 00:09:13,039 जुबान हमें हमारे अपने ख्यालात को ज्यादा 172 00:09:10,720 --> 00:09:15,839 फोकस में लाती है। क्लियर करती है। 173 00:09:13,039 --> 00:09:18,639 क्योंकि हमारे पास जबान है क्लियरली सोचने 174 00:09:15,839 --> 00:09:21,279 की। अगर जुबान कम होगी तो हम साफ नहीं सोच 175 00:09:18,639 --> 00:09:23,278 पाएंगे। दो ये कि दो बातें हमें लिटरेचर 176 00:09:21,278 --> 00:09:26,720 से पता चलती हैं जो ऑस्टेंसिबली 177 00:09:23,278 --> 00:09:29,759 कंट्राडिक्टरी है। एक ये कि दुनिया में 178 00:09:26,720 --> 00:09:32,720 कैसे-कैसे अलग-अलग तरह के लोग हैं। और 179 00:09:29,759 --> 00:09:35,360 दूसरी बात ये कि दुनिया में सारे लोग 180 00:09:32,720 --> 00:09:40,680 कितने एक दूसरे से मिलते जुलते हैं। ये 181 00:09:35,360 --> 00:09:40,680 दोनों बातें हमें सिर्फ लिटरेचर बताता है। 182 00:09:40,799 --> 00:09:47,679 मुझे लगता है कि ये ये जो इस तरह की 183 00:09:44,320 --> 00:09:51,200 लिटरेरी कॉन्फ्रेंसेस होती हैं ये आपको एक 184 00:09:47,679 --> 00:09:54,000 इशारा देती हैं कि भाई क्या होमवर्क करना 185 00:09:51,200 --> 00:09:57,040 है आपको बाकी अब आप होमवर्क करते हैं कि 186 00:09:54,000 --> 00:09:59,919 नहीं करते आपकी मर्जी जावेद साहब ने एक 187 00:09:57,039 --> 00:10:01,838 लफज़ इस्तेमाल किया ख्याल आप दिन भर सोचते 188 00:09:59,919 --> 00:10:04,639 होंगे कि मुझे आज ये ख्याल आया कल ये 189 00:10:01,839 --> 00:10:07,120 ख्याल आया मुझे ये ख्याल ही नहीं आया तो 190 00:10:04,639 --> 00:10:09,360 ये एक जुमले में मैंने अपने उस्ताद से 191 00:10:07,120 --> 00:10:11,519 पूछा कि ख्याल क्या चीज चीज है। उन्होंने 192 00:10:09,360 --> 00:10:15,919 कहा आप कोई चीज देखते हैं, महसूस करते 193 00:10:11,519 --> 00:10:19,519 हैं, समझते हैं। आपके ज़हन को जब कोई बात 194 00:10:15,919 --> 00:10:22,159 छू जाए और ज़हन को छूकर उसका रुख कुछ और हो 195 00:10:19,519 --> 00:10:24,639 जाए। अब वो जो आपके ज़हन से चीज निकली है, 196 00:10:22,159 --> 00:10:27,759 वो आई तो कहीं से थी। पर अब यह वो नहीं 197 00:10:24,639 --> 00:10:30,319 रही। इसमें आपका कुछ अंग आ गया है। और यह 198 00:10:27,759 --> 00:10:33,200 मुकम्मल आपकी भी नहीं है। आपने कहीं से ली 199 00:10:30,320 --> 00:10:36,320 थी। तो, यह चीज पहली चीज की मानिंद है। पर 200 00:10:33,200 --> 00:10:39,440 वो नहीं है। यह ख्याल है। और गालिब का एक 201 00:10:36,320 --> 00:10:41,600 मिश्रा है। 202 00:10:39,440 --> 00:10:44,720 बिल्कुल वो वाला मिसरा नहीं आते हैं गैब 203 00:10:41,600 --> 00:10:49,200 से ये मजहम में बिल्कुल वो नहीं है आदमी 204 00:10:44,720 --> 00:10:51,200 बजाय खुद एक महशरे ख्याल तो ख्याल तो 205 00:10:49,200 --> 00:10:54,079 जावेद साहब मैंने आप मुझे ये ख्याल आया 206 00:10:51,200 --> 00:10:58,959 आपकी गुफ्तगू सुन के कि जो हमारा उनवान या 207 00:10:54,078 --> 00:11:01,519 मौजू है के फिल्मी और अदबी दुनिया मुझे 208 00:10:58,958 --> 00:11:03,919 अंदेशा ये है कि अब फिल्मी और बे-अदबी 209 00:11:01,519 --> 00:11:06,480 दुनिया हो चुकी है ये लेकिन ये दुनिया 210 00:11:03,919 --> 00:11:09,919 फर्क है क्योंकि आज से बहुत साल पहले जो 211 00:11:06,480 --> 00:11:12,399 गीत थे बिलखसूस फिल्म्स के वो शायरी हुआ 212 00:11:09,919 --> 00:11:15,039 करती थी तो अदब उसका एक हिस्सा हुआ करता 213 00:11:12,399 --> 00:11:19,200 था। तो क्या अब ये दुनियाएं फर्क हो गई 214 00:11:15,039 --> 00:11:21,838 हैं फिल्म की और अदब की? 215 00:11:19,200 --> 00:11:23,600 देखिए पहले तो हमें इस बात पर क्लियर होना 216 00:11:21,839 --> 00:11:25,200 चाहिए कि जो लोग फिल्में बनाते हैं, 217 00:11:23,600 --> 00:11:27,519 फिल्में लिखते हैं, फिल्में डायरेक्ट करते 218 00:11:25,200 --> 00:11:30,560 हैं, फिल्मों में काम करते हैं ये मार्स 219 00:11:27,519 --> 00:11:33,200 या वीनस से नहीं आए हैं। ये सब के सब इसी 220 00:11:30,559 --> 00:11:36,000 मुशरे ने इसी समाज ने इसी सोसाइटी ने भेजे 221 00:11:33,200 --> 00:11:37,920 हैं। इस तरह के लोग क्यों आ रहे हैं? जो 222 00:11:36,000 --> 00:11:40,000 इस तरह की फिल्में बनाते हैं। इस तरह के 223 00:11:37,919 --> 00:11:42,319 गीत लिखते हैं। इस तरह के गीत पसंद करते 224 00:11:40,000 --> 00:11:44,639 हैं। ये जिम्मेदारी आपकी है। आप बताइए आप 225 00:11:42,320 --> 00:11:47,360 सोसाइटी में कर क्या रहे हैं? 226 00:11:44,639 --> 00:11:50,559 एक ये तो आप ही के यहां से आए हैं। हमने 227 00:11:47,360 --> 00:11:55,120 थोड़ी पैदा किए थे। 228 00:11:50,559 --> 00:12:00,639 ये जो वाकया है ये कोई एक वॉइड में नहीं 229 00:11:55,120 --> 00:12:03,600 है। दरअसल हम लोगों ने 40 50 साल 60 साल 230 00:12:00,639 --> 00:12:06,159 इस पे काम किया है कि हम यहां तक पहुंचे। 231 00:12:03,600 --> 00:12:10,159 यह हमारे हालात ऐसे हो। इसके लिए बड़ी 232 00:12:06,159 --> 00:12:13,919 मेहनत की गई है। हमने अपने बच्चों को अदब 233 00:12:10,159 --> 00:12:16,159 से, शायरी से, लिटरेचर से दूर रखा है कि 234 00:12:13,919 --> 00:12:18,639 ये बेकार की चीजें हैं। इससे थोड़ी तुम 235 00:12:16,159 --> 00:12:21,759 कमा पाओगे। तुम्हें वो पढ़ना चाहिए, वो 236 00:12:18,639 --> 00:12:27,360 सीखना चाहिए जिससे कुछ धंधे की कुछ बात 237 00:12:21,759 --> 00:12:29,360 करो, कुछ पैसा जोड़ो। तो हमारा पूरा जो 238 00:12:27,360 --> 00:12:32,560 तालीम का 239 00:12:29,360 --> 00:12:35,600 और एजुकेशन का सिस्टम रहा है वो हमेशा 240 00:12:32,559 --> 00:12:37,439 सिर्फ प्रोफेशन ओरिएंटेड रहा है। तो जबान 241 00:12:35,600 --> 00:12:40,240 सोसाइटी में श्रिंक कर रही है। मैं तो 242 00:12:37,440 --> 00:12:42,399 बंबई में रहता हूं। हर दिन मैं यंग लोगों 243 00:12:40,240 --> 00:12:45,600 से सुनता हूं। यू नो व्हाट आई मीन। तो आई 244 00:12:42,399 --> 00:12:49,360 टेल देम नो आई डोंट नो। 245 00:12:45,600 --> 00:12:52,879 आपके पास हमारे यहां मुहावरे होते थे, 246 00:12:49,360 --> 00:12:55,839 कहावतें होती थी। आज आप कोई 30-40 साल का 247 00:12:52,879 --> 00:12:59,120 इंसान एक बता दीजिए मुझे वो लड़की लड़का 248 00:12:55,839 --> 00:13:02,480 कोई जो कोई कहावत कभी बोलता हो वो गायब हो 249 00:12:59,120 --> 00:13:05,519 गए सब जबान श्रिंक कर रही है सोसाइटी में 250 00:13:02,480 --> 00:13:09,120 ये उसका रिफ्लेक्शन है 251 00:13:05,519 --> 00:13:12,240 ये ये बीमारी नहीं है जो फिल्मों में दिख 252 00:13:09,120 --> 00:13:14,159 रही है बीमारी का सिम्टम है फिल्में इतनी 253 00:13:12,240 --> 00:13:15,839 इंपॉर्टेंट समाज से ज्यादा मुशरे से 254 00:13:14,159 --> 00:13:18,480 ज्यादा मुल्क से ज्यादा तो इंपॉर्टेंट 255 00:13:15,839 --> 00:13:20,959 नहीं हो सकती ना अगर आपको ये दिखाई दे रहा 256 00:13:18,480 --> 00:13:23,440 है तो समझ लीजिए की सिर्फ सिर्फ कलाई में 257 00:13:20,958 --> 00:13:26,799 बुखार नहीं है। बुखार पूरे जिस्म में होता 258 00:13:23,440 --> 00:13:29,360 है। कलाई छू के आप देखते हैं। अब आप कलाई 259 00:13:26,799 --> 00:13:32,879 पे नाराज हो रहे हैं। ये क्या है? ये कोई 260 00:13:29,360 --> 00:13:35,278 रिस्ट है? अरे भाई ये एक जिस्म का हिस्सा 261 00:13:32,879 --> 00:13:39,320 है। अगर इसमें कुछ गड़बड़ लग रही है तो 262 00:13:35,278 --> 00:13:39,320 पूरे जिस्म का इलाज करो। 263 00:13:44,559 --> 00:13:51,199 जरा आपा हमारे सेशन के बाद मुशायरा है 264 00:13:47,759 --> 00:13:53,439 शायर हजरात ये बताइए कि कई दफा जिक्र किया 265 00:13:51,200 --> 00:13:56,639 जावेद साहब ने पहले भी आपको मालूम है कि 266 00:13:53,440 --> 00:13:59,519 जो बहुत अच्छे-अच्छे शायर थे वो जब शायरी 267 00:13:56,639 --> 00:14:01,919 करते थे तो वो गीत भी लिखे लिखते थे और 268 00:13:59,519 --> 00:14:05,039 उन्हीं गीतों में उनकी जितनी ऊंची पाए की 269 00:14:01,919 --> 00:14:07,039 शायरी थी वो झलकती थी और शायद बहुत सारे 270 00:14:05,039 --> 00:14:09,360 दोस्तों को मालूम हो या ना हो कि कितने 271 00:14:07,039 --> 00:14:11,759 बड़े-बड़े शायरों ने फिल्मों के गीत लिखे 272 00:14:09,360 --> 00:14:14,800 हैं। एक तो खैर यहीं मौजूद है लेकिन बहुत 273 00:14:11,759 --> 00:14:19,039 से लोगों ने लिखे हैं। वो कौन-कौन लोग थे 274 00:14:14,799 --> 00:14:22,000 जो मशहूर शायर भी थे उन्होंने गीत भी लिखे 275 00:14:19,039 --> 00:14:24,399 और उसके बाद ये क्या हुआ कि हमने चीजों को 276 00:14:22,000 --> 00:14:27,278 फिल्मी कर दिया कि जैसे फिल्मी होना जो है 277 00:14:24,399 --> 00:14:28,958 वो कोई मायूब चीज है और ये अदबी चीज अदा 278 00:14:27,278 --> 00:14:30,639 है और फिल्मी होना जो है वो तो फिल्म का 279 00:14:28,958 --> 00:14:33,278 आदमी है। वो तो फिल्म की शायरी है। ये 280 00:14:30,639 --> 00:14:36,959 अलेधा कैसे हो गई चीजें? देखिए ये बात गलत 281 00:14:33,278 --> 00:14:40,879 है। इसकी तफसील ये है जैसे कि अभी अदील ने 282 00:14:36,958 --> 00:14:44,559 बताया कि इसमें तो कोई शक नहीं है। इसमें 283 00:14:40,879 --> 00:14:46,720 सब मुत्तफिक हैं कि फिल्म का जो मीडिया है 284 00:14:44,559 --> 00:14:50,638 वो लोगों के लिए पब्लिक के लिए सबसे 285 00:14:46,720 --> 00:14:53,120 ज्यादा ताकतवर है। आप देखते हैं आप फौरन 286 00:14:50,639 --> 00:14:56,639 याद कर लेते हैं, डायलॉग याद कर लेते हैं, 287 00:14:53,120 --> 00:15:00,078 गाने याद कर लेते हैं। हर चीज आपकी अजबर 288 00:14:56,639 --> 00:15:02,799 हो जाती है। फिल्म जो है इसमें जैसे मैंने 289 00:15:00,078 --> 00:15:06,239 अ किया कि सबसे बड़ा इस वक्त मीडिया है। 290 00:15:02,799 --> 00:15:09,599 जहां तक शायरों का ताल्लुक है फिल्म के 291 00:15:06,240 --> 00:15:12,959 साथ जो उन्होंने गाने लिखे हैं वो किन-किन 292 00:15:09,600 --> 00:15:16,000 सब्र आजमा लम्हों से गुजरते हैं और उसके 293 00:15:12,958 --> 00:15:19,039 बाद एक गाना तखलीक होता है। इसको जावेद 294 00:15:16,000 --> 00:15:21,839 ज्यादा जानते होंगे। मैं तो सिर्फ थोड़ी 295 00:15:19,039 --> 00:15:24,639 बहुत जानकारी के साथ ही आपको बतला सकती 296 00:15:21,839 --> 00:15:28,079 हूं कि हमारी फिल्मों में बड़े-बड़े 297 00:15:24,639 --> 00:15:31,120 शायरों ने भी गीत लिखे हैं। मतलब जोश साहब 298 00:15:28,078 --> 00:15:34,159 ने लिखे हैं फिल्मी गीत और बड़े अच्छे 299 00:15:31,120 --> 00:15:37,519 लिखे उन्होंने। उसमें जो गीत हैं उनमें 300 00:15:34,159 --> 00:15:43,198 उसकी उनकी शायरी की झलक नजर आती है। हमारे 301 00:15:37,519 --> 00:15:45,759 जमाने में देखिए जो शायर बहसियत शायर के 302 00:15:43,198 --> 00:15:48,958 अगर मैं गलत कह रही हूं तो जावेद से पूछ 303 00:15:45,759 --> 00:15:52,000 लूं कि मतलब बहुत से शायर ऐसे थे कि जिनका 304 00:15:48,958 --> 00:15:55,198 बहसियत शायर इतना ऊंचा दर्जा नहीं था। 305 00:15:52,000 --> 00:15:57,600 लेकिन उन्होंने गीत दिए हैं। शायरी के 306 00:15:55,198 --> 00:16:00,879 फिल्म के जिक्र में बैकग्राउंड म्यूजिक जो 307 00:15:57,600 --> 00:16:03,519 है वो जरा डिस्टर्ब कर रहा है। लेकिन ये 308 00:16:00,879 --> 00:16:06,480 कि अब क्या किया जाए? 309 00:16:03,519 --> 00:16:08,959 मिसाल के तौर पे मैं आपसे ये कहती हूं कि 310 00:16:06,480 --> 00:16:12,079 जावेद ने बहुत गाने लिखे हैं। अब तो 311 00:16:08,958 --> 00:16:14,879 बेशुमार गाने हैं। घंटों गुजर जाएंगे। 312 00:16:12,078 --> 00:16:17,359 पिछली दफा भी तीन-चार घंटे तक आप लोग 313 00:16:14,879 --> 00:16:18,639 सिर्फ जावेद ही के लिखे हुए गाने सुनते 314 00:16:17,360 --> 00:16:22,879 रहे। 315 00:16:18,639 --> 00:16:27,600 लेकिन होता यह है कि शायर अगर अपनी जुबान 316 00:16:22,879 --> 00:16:31,198 से और जुबान की नजाकतों से, मुहावरों से 317 00:16:27,600 --> 00:16:35,519 और उसकी खूबसूरती से वाकिफ हो तो वो 318 00:16:31,198 --> 00:16:38,958 फिल्मी गीत में भी नजर आती है। ऐसा हो ही 319 00:16:35,519 --> 00:16:42,560 नहीं सकता कि कोई खराब शायर जो है वो 320 00:16:38,958 --> 00:16:45,359 अच्छा फिल्मी गीत लिखे। नहीं उसको जुबान 321 00:16:42,559 --> 00:16:48,399 पे इख्तियार पूरा होना चाहिए। तभी वह 322 00:16:45,360 --> 00:16:51,039 फिल्म फिल्मी गीत लिख सकता है। वरना वह 323 00:16:48,399 --> 00:16:54,000 नहीं लिख सकता क्योंकि इसके भी मराहिल 324 00:16:51,039 --> 00:16:56,319 बहुत ज्यादा होते हैं। फिल्मी गीत बहुत 325 00:16:54,000 --> 00:16:59,039 सारे ऐसे भी हैं जो कि अच्छे नहीं होते 326 00:16:56,320 --> 00:17:01,920 लेकिन वो मकबूल हो जाते हैं। ये लोगों की 327 00:16:59,039 --> 00:17:05,038 समझ और उनका मजाक होता है। लेकिन बहुत 328 00:17:01,919 --> 00:17:08,318 सारे फिल्मी गीत ऐसे भी हैं कि जिन्हें हम 329 00:17:05,038 --> 00:17:11,279 अदबी हैसियत के मुता यानी के सामने रख 330 00:17:08,318 --> 00:17:13,759 सकते हैं। और जैसा कि मैं कहती हूं इनसे 331 00:17:11,279 --> 00:17:16,240 भी मैं अभी यही बात कह रही थी कि इनके 332 00:17:13,759 --> 00:17:19,439 बहुत से गीत जो मुझे याद हैं मुझे वह 333 00:17:16,240 --> 00:17:22,959 शायराना हैसियत से याद हैं कि उसमें पूरी 334 00:17:19,439 --> 00:17:26,079 शेरियत मौजूद है और अगर आप फिल्मों के 335 00:17:22,959 --> 00:17:29,360 गानों की तारीख देखेंगे तो आपको बहुत से 336 00:17:26,078 --> 00:17:33,599 गाने ऐसे मिसाल के तौर पे साहिर का एक 337 00:17:29,359 --> 00:17:37,038 गाना है जो सबको आता है और जिस वक्त वो 338 00:17:33,599 --> 00:17:40,480 बजता है या बजाया जाता है या सुनाया जाता 339 00:17:37,038 --> 00:17:43,200 है उसकी शायरी खूब खूबियों के साथ आपने 340 00:17:40,480 --> 00:17:46,240 उसे नजरअंदाज नहीं कर सकते। और वो गाना 341 00:17:43,200 --> 00:17:49,679 जिसके अल्फाज़ निहायत सीधे साधे हैं। अभी 342 00:17:46,240 --> 00:17:53,359 ना जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं। ये 343 00:17:49,679 --> 00:17:56,320 शेरियत की एक मुकम्मल तस्वीर है। इसमें आप 344 00:17:53,359 --> 00:17:59,678 जावेद से बात कीजिए। वो आपको ज्यादा सही 345 00:17:56,319 --> 00:18:04,079 तरीके से बता सकेंगे कि किन-किन मराहिल से 346 00:17:59,679 --> 00:18:05,840 गुजरना पड़ता है जब कहीं जाकर एक अच्छा 347 00:18:04,079 --> 00:18:09,839 मुतरन्नुम 348 00:18:05,839 --> 00:18:12,839 खूबसूरत गीत पैदा होता है। 349 00:18:09,839 --> 00:18:12,839 अभी 350 00:18:13,279 --> 00:18:18,558 जरा आप आपने साहिर का ये बताया 351 00:18:16,319 --> 00:18:20,639 जावेद साहब का भी कोई ऐसा गाना बताएं 352 00:18:18,558 --> 00:18:21,599 जिसकी शेरियत ऐसी हो कि जो दिल 353 00:18:20,640 --> 00:18:23,840 कई गाने बता सकते हो 354 00:18:21,599 --> 00:18:25,839 आपने मेरी इज्जत बहुत खतरे में डाल दी 355 00:18:23,839 --> 00:18:26,879 फर्ज कर लीजिए उन्हें एक भी ना याद हो तो 356 00:18:25,839 --> 00:18:28,798 नो नो मुझे नहीं 357 00:18:26,880 --> 00:18:30,000 तो मेरी तो यहां नाक कट जाएगी 358 00:18:28,798 --> 00:18:33,918 मुझे बहुत याद है 359 00:18:30,000 --> 00:18:36,079 आपने बहुत मुझे खतरनाक जगह डाल दिया चलिए 360 00:18:33,919 --> 00:18:36,320 आप इन बातों को याद आए तो मैं याद दिला 361 00:18:36,079 --> 00:18:38,399 दूंगा 362 00:18:36,319 --> 00:18:41,119 हां पर याद दिला दीजिएगा मुझे 363 00:18:38,400 --> 00:18:44,240 देखिए एक मुझे इनका गाना मैं आपको बताती 364 00:18:41,119 --> 00:18:47,359 हूं। उसमें कोई मुश्किल लफज़ नहीं है। किसी 365 00:18:44,240 --> 00:18:51,279 तरह का कहीं नहीं है। लेकिन मानवीयत और 366 00:18:47,359 --> 00:18:52,399 शेरियत उसमें भरपूर है। अगर मैं गलत पढूं 367 00:18:51,279 --> 00:18:56,678 तो सही कर देना। 368 00:18:52,400 --> 00:18:56,679 नहीं वो मैंने कही गलत है। 369 00:18:58,640 --> 00:19:03,679 कुछ ना कहो। 370 00:19:01,200 --> 00:19:08,798 कुछ भी ना कहो। 371 00:19:03,679 --> 00:19:11,038 क्या कहना है? क्या सुनना है? 372 00:19:08,798 --> 00:19:12,000 समय 373 00:19:11,038 --> 00:19:17,119 तुमको पता है 374 00:19:12,000 --> 00:19:25,200 तुमको तुमको खबर है मुझको पता है समय का 375 00:19:17,119 --> 00:19:30,399 यह पल थम सा गया है समय का और एक पल में 376 00:19:25,200 --> 00:19:35,440 कोई नहीं है कोई नहीं है सिर्फ एक मैं हूं 377 00:19:30,400 --> 00:19:40,240 और एक तुम हो क्या कहना है क्या सुनना अब 378 00:19:35,440 --> 00:19:43,200 आपने देखा कि इसमें कितनी बड़ी बात आसान 379 00:19:40,240 --> 00:19:48,000 लफ्जों में समो दी गई है 380 00:19:43,200 --> 00:19:52,640 और इस पल में सिर्फ एक तुम हो 381 00:19:48,000 --> 00:19:57,359 सिर्फ एक मैं हूं समय का यह पल थम सा गया 382 00:19:52,640 --> 00:20:01,280 है तो जो शायर के ज़हन में जिस वक्त शरीयत 383 00:19:57,359 --> 00:20:03,918 होती है ये बात देखिए कई आपको मिसाले मैं 384 00:20:01,279 --> 00:20:07,119 बहुत दे सकती हूं लेकिन क्योंकि हमारा कोई 385 00:20:03,919 --> 00:20:09,759 खास मौजू नहीं है शायरी भी हम फिल्मी 386 00:20:07,119 --> 00:20:12,639 गानों का भी तस्करा करेंगे। एक दूसरे की 387 00:20:09,759 --> 00:20:15,519 कभी-कभी तारीफ भी करेंगे। कभी बुराई भी कर 388 00:20:12,640 --> 00:20:18,720 देंगे। लेकिन यह है कि मिलाजुला के यह 389 00:20:15,519 --> 00:20:20,798 मौजू हम आपके सामने रख रहे हैं। ये अदील 390 00:20:18,720 --> 00:20:23,440 मियां आप देखें क्या किस किस्म का सवाल 391 00:20:20,798 --> 00:20:26,319 करते हैं। एक गाना तो मैंने आपको जावेद 392 00:20:23,440 --> 00:20:29,519 साहब का सुना दिया। 100 सुना सकती हूं। अब 393 00:20:26,319 --> 00:20:31,599 आप बता दीजिए। 394 00:20:29,519 --> 00:20:35,038 जरा सी गहरी बात की कोशिश क्योंकि पीछे 395 00:20:31,599 --> 00:20:39,359 फिर यही होगा धमाल। वो यह है कि एक 396 00:20:35,038 --> 00:20:43,200 क्राफ्ट है राइटर का पोएट का और एक पैशन 397 00:20:39,359 --> 00:20:46,158 है। अब यह दोनों मुतजाद भी हैं, मुतसादम 398 00:20:43,200 --> 00:20:47,919 भी है कि जब पैशन है तो फिर कोई लॉजिक रीज़ 399 00:20:46,159 --> 00:20:50,559 कुछ नहीं है। अब तो एक पैशन है, एक इश्क 400 00:20:47,919 --> 00:20:52,960 है, एक एक उभार है, एक उसाहट है एक। लेकिन 401 00:20:50,558 --> 00:20:54,879 जो क्राफ्ट है, उसने एक पैराए में रहना 402 00:20:52,960 --> 00:20:57,759 है। लफ्ज़ कौन सा कहां आना है, इसका वजन 403 00:20:54,880 --> 00:21:01,039 कितना है? सिचुएशन कैसी है? ये ये दोनों 404 00:20:57,759 --> 00:21:02,640 चीजों का कॉम्बिनेशन जो है, ये एक गिरिफ्त 405 00:21:01,038 --> 00:21:04,720 में कैसे रहता है? क्योंकि जैसे ही आप 406 00:21:02,640 --> 00:21:07,200 क्राफ्ट पे तवज्जो देंगे तो पैशन की तरफ 407 00:21:04,720 --> 00:21:09,279 से नजर चूक जाएगी। जब पैशनेट होंगे तो 408 00:21:07,200 --> 00:21:13,038 होशमंदी नहीं रहेगी। क्राफ्ट छूट जाएगा 409 00:21:09,279 --> 00:21:15,678 हाथ से। ये इकट्ठे कैसे चलेंगे दोनों? 410 00:21:13,038 --> 00:21:17,599 देखिए ये सिर्फ पोएट्री की बात नहीं है। 411 00:21:15,679 --> 00:21:20,159 दुनिया का तमाम हार्ट जो है वो 412 00:21:17,599 --> 00:21:22,639 कंट्राडिक्शन में एक अजीब कंट्राडिक्शन 413 00:21:20,159 --> 00:21:25,760 में ही प्रोड्यूस होता है। बिकॉज़ एव्री 414 00:21:22,640 --> 00:21:29,120 हार्ट हैज़ टू साइड्स। ऑन वन हैंड यू हैव 415 00:21:25,759 --> 00:21:31,919 इमेजिनेशन, यू हैव इमोशन, यू हैव पैशन, यू 416 00:21:29,119 --> 00:21:36,719 हैव फेंटसी, यू हैव ड्रीम्स। ऑन द अदर 417 00:21:31,919 --> 00:21:39,038 हैंड यू हैव क्राफ्ट यू हैव टोटल कोल्ड 418 00:21:36,720 --> 00:21:42,400 ब्लडेड लॉजिक 419 00:21:39,038 --> 00:21:45,839 जो पाइथागोरस एक ग्रीक फिलॉसफरस था जिसने 420 00:21:42,400 --> 00:21:49,600 कोई 300 साल पहले एक बात कही है कि एट वन 421 00:21:45,839 --> 00:21:51,199 लेवल म्यूजिक इज प्योर मैथमेटिक्स 422 00:21:49,599 --> 00:21:53,119 व्हिच इज़ ट्रू एंड व्हिच इज़ ट्रू अ 423 00:21:51,200 --> 00:21:55,840 पोएट्री आल्सो 424 00:21:53,119 --> 00:21:57,918 हालांकि लोग इस गलतफहमी में होते हैं कि 425 00:21:55,839 --> 00:21:59,279 जो फ्री वर्स है उसमें कोई मीटर नहीं होता 426 00:21:57,919 --> 00:22:01,919 वो ऐसा नहीं है। नहीं। 427 00:21:59,279 --> 00:22:04,558 यह ऐसा है जैसे कि आप बिलीव करें कि राग 428 00:22:01,919 --> 00:22:06,559 में कोई मीटर नहीं होता। जब राग गा रहा है 429 00:22:04,558 --> 00:22:09,038 आदमी एक गाना होता है उसमें बर-बर की 430 00:22:06,558 --> 00:22:11,839 लाइनें होती हैं। लेकिन जब एक उस्ताद बैठ 431 00:22:09,038 --> 00:22:14,319 के कोई राग यमन गा रहा है तो यमन की एक 432 00:22:11,839 --> 00:22:16,720 तान लंबी होगी, एक छोटी होगी, एक मजली 433 00:22:14,319 --> 00:22:21,119 होगी, एक जाके अचानक रुक जाएगी, एक चलती 434 00:22:16,720 --> 00:22:24,079 जाएगी। मगर उसके अंदर जो स्कैनिंग है वो 435 00:22:21,119 --> 00:22:24,879 चार, 8, 12, 16 ये नहीं हो सकता कि 436 00:22:24,079 --> 00:22:27,119 मैथमेटिक्स 437 00:22:24,880 --> 00:22:31,200 19 पे खत्म हो जाए। नहीं वो नहीं होगा। 438 00:22:27,119 --> 00:22:34,319 20 पे होगी। 24 पे होगी तो उसका अपना अंदर 439 00:22:31,200 --> 00:22:37,600 एक ताल चल रही होती है। यह जो एक फ्रॉड 440 00:22:34,319 --> 00:22:42,720 चला है इट इज अ टोटल फ्रॉड जिसका नाम है 441 00:22:37,599 --> 00:22:44,959 प्रोस पोएट्री। अरे भाई जिस तरह से मतलब 442 00:22:42,720 --> 00:22:46,720 मुर्दा जिंदा नहीं होता है उसी तरह से 443 00:22:44,960 --> 00:22:51,360 प्रोज़ पोएट्री नहीं हो सकती। कुछ नहीं 444 00:22:46,720 --> 00:22:53,679 बकवास है। बिल्कुल बकवास। यू एट द मोस्ट 445 00:22:51,359 --> 00:22:56,158 यू कैन से पोएटिक प्रोज़। 446 00:22:53,679 --> 00:22:59,280 हां। जो शायराना है 447 00:22:56,159 --> 00:23:02,559 तुम उसे प्रोज़ जो है उसको एडजेक्टिव और 448 00:22:59,279 --> 00:23:04,399 नाउन बना रहे हो पोएट्री बिल्कुल गलत 449 00:23:02,558 --> 00:23:07,359 फ्रॉड है ये 450 00:23:04,400 --> 00:23:10,080 ये एक दफा मैंने फैज साहब से पूछा था 451 00:23:07,359 --> 00:23:11,119 कि फैज साहब आपको इतने बरसा बरस हो गए 452 00:23:10,079 --> 00:23:13,519 लिखते हुए 453 00:23:11,119 --> 00:23:15,759 आपने कभी नसरी नज़्म नहीं लिखी प्रोज़ 454 00:23:13,519 --> 00:23:18,558 पोएट्री नहीं लिखी तो उन्होंने पता है 455 00:23:15,759 --> 00:23:20,960 मुझे क्या जवाब दिया उन्होंने कहा हमसे आई 456 00:23:18,558 --> 00:23:24,000 ही नहीं 457 00:23:20,960 --> 00:23:24,400 हमें आती ही नहीं बहुत कोशिश कोशिश की आई 458 00:23:24,000 --> 00:23:27,519 ही नहीं 459 00:23:24,400 --> 00:23:32,159 मीटर से बाहर ही नहीं जा पाए। 460 00:23:27,519 --> 00:23:34,319 रिदमम ही रहा है और यह सच है। आप अगर 461 00:23:32,159 --> 00:23:37,200 थोड़ा भी सुर में गा लेते आप ट्राई कीजिए 462 00:23:34,319 --> 00:23:37,839 बेसुरा गाना। करके देखिए नहीं हो पाएगा। 463 00:23:37,200 --> 00:23:40,080 नहीं होगा। 464 00:23:37,839 --> 00:23:42,000 मैं जाता हूं कहीं फंक्शन में यहां कुछ 465 00:23:40,079 --> 00:23:44,558 म्यूजिक हो रही है तो पूरा जो ऑडियंस बैठी 466 00:23:42,000 --> 00:23:47,359 होती है वो क्लैप कर रही होती है। और सही 467 00:23:44,558 --> 00:23:49,038 क्लैप कर रही होती है। एक होता है उसमें। 468 00:23:47,359 --> 00:23:52,479 जो जो बेताला 469 00:23:49,038 --> 00:23:54,319 कड़वा बादाम जो बेताला होता है। मैं उसे 470 00:23:52,480 --> 00:23:58,159 ढूंढ लेता हूं। कहां है वो? वो मिल जाता 471 00:23:54,319 --> 00:24:00,879 है। वो बाकी लोग यहां बजा रहे हैं। 472 00:23:58,159 --> 00:24:04,600 तो ये जो ऐसे ताली बजाते हैं ना ये नसरी 473 00:24:00,880 --> 00:24:04,600 नज़्म लिखते हैं। 474 00:24:05,759 --> 00:24:11,519 आपने एक नवेल पढ़ा सबने पढ़ा होगा उमराओ 475 00:24:08,960 --> 00:24:14,720 जान अदा जो उसकी फिल्म भी बन गई। उसमें 476 00:24:11,519 --> 00:24:17,200 आखिरी बाप में पूछते हैं कि उमराव साहब 477 00:24:14,720 --> 00:24:19,440 फला साहब तो आप पे फरेफा थे। आपने क्यों 478 00:24:17,200 --> 00:24:22,960 नहीं उनसे शादी कर ली? उन्होंने कहा हां 479 00:24:19,440 --> 00:24:26,320 पयाम तो दिया था मगर हमेशा गलत सम पे सर 480 00:24:22,960 --> 00:24:29,360 हिला देते थे। 481 00:24:26,319 --> 00:24:33,599 इसलिए मैंने उनसे शादी नहीं की। तो मतलब 482 00:24:29,359 --> 00:24:35,678 ये कि ये जो ताल का मेलजोल है ये शायरी 483 00:24:33,599 --> 00:24:38,240 में भी उतना ही जरूरी है 484 00:24:35,679 --> 00:24:41,600 जितना कि म्यूजिक में है। क्योंकि ये 485 00:24:38,240 --> 00:24:44,240 बुनियादी तौर से शायरी में भी एक अंडर 486 00:24:41,599 --> 00:24:47,278 करंट जिसे कहते हैं कि आहिस्ता-आहिस्ता 487 00:24:44,240 --> 00:24:48,960 म्यूजिक है। अगर वो नहीं है तो फिर वो 488 00:24:47,278 --> 00:24:49,759 शायरी नहीं है। 489 00:24:48,960 --> 00:24:51,519 ये बात हम 490 00:24:49,759 --> 00:24:54,798 वो किस्सा क्या है कि जैसे देखिए जी बुराई 491 00:24:51,519 --> 00:24:55,679 करने में जो मजा है वो सही बात करने में 492 00:24:54,798 --> 00:24:57,839 नहीं है। नहीं। 493 00:24:55,679 --> 00:25:00,640 तो मेरा दिल लग गया था हम लोगों का बुराई 494 00:24:57,839 --> 00:25:03,359 करने में। वो हम कर चुके। अब सवाल का जो 495 00:25:00,640 --> 00:25:07,840 जवाब है जो इन्होंने पूछा था। 496 00:25:03,359 --> 00:25:11,038 तो ये एक इन अ वे इज़ अ इट्स एन एक्सरसाइज 497 00:25:07,839 --> 00:25:13,918 इन स्कडोफोर्निया। कि एक ही वक्त में दो 498 00:25:11,038 --> 00:25:16,319 काम आप कर रहे हैं जो कि मतदात हैं। 499 00:25:13,919 --> 00:25:19,278 कंट्राडिक्टरी है। ऑोजिट डायरेक्शन में जा 500 00:25:16,319 --> 00:25:20,879 रहे हैं। एक तरफ आप लिखते वक्त इमोशनल है 501 00:25:19,278 --> 00:25:21,599 और आपकी आंखों से आंसू बह रहे हैं। 502 00:25:20,880 --> 00:25:23,679 हां सही है। 503 00:25:21,599 --> 00:25:26,959 और दूसरी तरफ आप ये देख रहे हैं नहीं 504 00:25:23,679 --> 00:25:29,440 इसमें ये अलिफ दब रहा है थोड़ा। ये ये 505 00:25:26,960 --> 00:25:33,600 अलिफ यहां पूरा इस्तेमाल नहीं हो सकता है। 506 00:25:29,440 --> 00:25:35,519 तो यहां आप ये तो न जो है ये ना के मीटर 507 00:25:33,599 --> 00:25:38,639 में आ रहा है। ये सब भी देख रहे हैं आप। 508 00:25:35,519 --> 00:25:40,960 वही दिमाग दरअसल हमारा दिमाग भी जो है 509 00:25:38,640 --> 00:25:44,320 बड़ी कॉम्प्लिकेटेड चीज है। हम अपने 510 00:25:40,960 --> 00:25:47,120 कॉन्शियस माइंड को ब्रेन समझते हैं। 511 00:25:44,319 --> 00:25:50,240 कॉन्शियस माइंड हमारा ऐसा है जैसे हमारे 512 00:25:47,119 --> 00:25:54,239 घर में ड्राइंग रूम और उसके साथ ही छोटा 513 00:25:50,240 --> 00:25:58,558 सा ऑफिस। ये है कॉन्शियस माइंड। उसके बाद 514 00:25:54,240 --> 00:25:59,278 कितने कमरे हैं? कितने उसमें 515 00:25:58,558 --> 00:26:01,839 गलियां हैं। 516 00:25:59,278 --> 00:26:04,480 गलियां हैं, कितने 517 00:26:01,839 --> 00:26:06,720 अटैक्स हैं? कितने बेसमेंट है? उसका कोई 518 00:26:04,480 --> 00:26:09,839 हिसाब नहीं और वो सारा घर आपका देखा हुआ 519 00:26:06,720 --> 00:26:12,079 नहीं है। आपका है जरूर आपने सारे कमरे ठीक 520 00:26:09,839 --> 00:26:13,678 से देखे हुए नहीं है। आपको मालूम ही नहीं 521 00:26:12,079 --> 00:26:16,879 है कि आपके पास क्या-क्या है। वो 522 00:26:13,679 --> 00:26:20,159 सबकॉन्शियस लिए बैठा हुआ है। जब आप एक 523 00:26:16,880 --> 00:26:22,400 टॉपिक में डूबते हैं ये पेंटर के लिए भी 524 00:26:20,159 --> 00:26:24,320 सही है, सिंगर के लिए भी सही है, राइटर के 525 00:26:22,400 --> 00:26:26,960 लिए और पोएट के लिए भी सही है। जब आप 526 00:26:24,319 --> 00:26:31,678 इसमें डूब गए और आप सोच रहे हैं क्या 527 00:26:26,960 --> 00:26:33,919 करूं? और फिर थक के थोड़े से हार जाते हैं। 528 00:26:31,679 --> 00:26:36,798 तब आपका सबकॉन्शियस कहता है कि चलो मैं 529 00:26:33,919 --> 00:26:38,799 तुम्हारी मदद कर देता हूं थोड़ी। अभी कुछ 530 00:26:36,798 --> 00:26:41,599 चीजें हैं जो बहुत दिनों से मेरे पास रखी 531 00:26:38,798 --> 00:26:44,879 थी। तुम्हारे काम आ जाएंगी। ले लो। ये 532 00:26:41,599 --> 00:26:46,798 जैसे मुल्कों के बीच में नो मैन लैंड है। 533 00:26:44,880 --> 00:26:49,520 हिंदुस्तान और पाकिस्तान हम तो कई बार 534 00:26:46,798 --> 00:26:51,839 लाहौर गए हैं पैदल चल के तो बीच में एक नो 535 00:26:49,519 --> 00:26:55,359 मैन लैंड है। दुनिया के तमाम मुल्कों के 536 00:26:51,839 --> 00:26:58,480 बीच में। वैसे ही शूर और लाशूर के बीच में 537 00:26:55,359 --> 00:27:01,038 भी एक नो मैन लैंड है। और पोएट्री और 538 00:26:58,480 --> 00:27:02,480 अच्छा अदब और अच्छा आर्ट उस नो मैन लैंड 539 00:27:01,038 --> 00:27:07,960 पर क्रिएट होते हैं। 540 00:27:02,480 --> 00:27:07,960 उधर से मदद आती है थोड़ी कुछ इधर से कोशिश 541 00:27:08,880 --> 00:27:14,080 तब होता है। जिस दिन मैं समझने लगूं कि 542 00:27:12,079 --> 00:27:18,240 मैं इतना होशियार हूं कि कुछ भी कर देता 543 00:27:14,079 --> 00:27:20,158 हूं तो उधर से मदद बंद हो जाएगी। तो राइटर 544 00:27:18,240 --> 00:27:23,359 में जब तक ह्यूमिलिटी रहती है, आर्टिस्ट 545 00:27:20,159 --> 00:27:25,679 में जब तक ह्यूमिलिटी रहती है के कुछ है 546 00:27:23,359 --> 00:27:29,359 जो अभी मेरे पास कॉन्शियस माइंड में नहीं 547 00:27:25,679 --> 00:27:32,000 है। शायद आ जाए और अपने आप को सरेंडर करे 548 00:27:29,359 --> 00:27:34,079 अपने काम को तब वो धीरे-धीरे बनता है। 549 00:27:32,000 --> 00:27:36,240 आपको ऐसे अल्फाज़ याद आते हैं तो आपको पता 550 00:27:34,079 --> 00:27:38,960 ही नहीं था कि आप जानते थे अल्फाज़। आपको 551 00:27:36,240 --> 00:27:41,278 ऐसी थॉट आती है जो उन्हें खुद समझने में 552 00:27:38,960 --> 00:27:43,038 कभी-कभी वक्त लगता है। ऐसा होता है कि 553 00:27:41,278 --> 00:27:45,599 शायर एक नज़्म लिख दे। 554 00:27:43,038 --> 00:27:49,679 और उसके माने वो महीने भर बाद समझे। ये 555 00:27:45,599 --> 00:27:51,439 पॉसिबल है। हालांकि आजकल शायर ऐसे नज़्म 556 00:27:49,679 --> 00:27:53,919 ज्यादा लिख रहे हैं जो महीने बाद उन्हें 557 00:27:51,440 --> 00:27:57,038 मालूम होता है कि इसमें कोई माने नहीं। वो 558 00:27:53,919 --> 00:28:00,720 एक अलग किस्सा है। 559 00:27:57,038 --> 00:28:04,158 लेकिन ये जो है ये एक मैजिक है। 560 00:28:00,720 --> 00:28:04,960 ये जो क्रिएटिविटी है ये पूरी आदमी के हाथ 561 00:28:04,159 --> 00:28:05,679 में नहीं है। 562 00:28:04,960 --> 00:28:07,600 नहीं 563 00:28:05,679 --> 00:28:10,720 ये 564 00:28:07,599 --> 00:28:11,278 कुछ आपके अब एक मोटी मिसाल देता हूं मैं 565 00:28:10,720 --> 00:28:14,399 आपको। 566 00:28:11,278 --> 00:28:17,359 बहुत ही भद्दी समझिए आप। आपने अपनी कार 567 00:28:14,398 --> 00:28:20,239 कहीं पार की बैठे अंदर गए अब आपको चाबी 568 00:28:17,359 --> 00:28:21,839 नहीं मिल रही बहुत ढूंढा यहां गए कहां 569 00:28:20,240 --> 00:28:24,480 कहां गया था मैं अच्छा इस कमरे में यहां 570 00:28:21,839 --> 00:28:26,558 वहां गया था नहीं मिल रही है अच्छा कार के 571 00:28:24,480 --> 00:28:28,640 बैठ गए उसने आपके मेजबान ने कहा चलिए ठीक 572 00:28:26,558 --> 00:28:30,480 है वो मिल जाएगी तो हम दे देंगे आपको 573 00:28:28,640 --> 00:28:32,960 हमारी गाड़ी छोड़ देगी बैठिए ना आराम से 574 00:28:30,480 --> 00:28:35,759 बात कीजिए अब आप उससे बात कर रहे हैं 575 00:28:32,960 --> 00:28:39,440 दुनिया की ट्रंप जीत गया तो क्या होगा इस 576 00:28:35,759 --> 00:28:42,480 पे बात हो अचानक आपको याद आता है कि आपने 577 00:28:39,440 --> 00:28:44,080 कहां रखी थी वो ये होता है ना 578 00:28:42,480 --> 00:28:46,558 ये मुझे कैसे अचानक याद आता है? आप तो 579 00:28:44,079 --> 00:28:49,359 ट्रंप के बारे में बात कर रहे थे। आपके 580 00:28:46,558 --> 00:28:52,240 दिमाग का एक हिस्सा था जो लगा हुआ था। 581 00:28:49,359 --> 00:28:56,000 चाबी कहां रखी थी? कुंजी कहां छोड़ी थी? 582 00:28:52,240 --> 00:28:58,399 और वो जब उसे याद आता है वो आपके शूर को 583 00:28:56,000 --> 00:29:00,398 कॉन्शियस माइंड को दे देता है। आपको लगता 584 00:28:58,398 --> 00:29:02,158 है अचानक याद आया। याद नहीं आया आपके 585 00:29:00,398 --> 00:29:06,558 ब्रेन का एक टुकड़ा था वो इसी पे काम कर 586 00:29:02,159 --> 00:29:09,520 रहा था। ऐसे ही इसमें है। यह जरा थोड़ी सी 587 00:29:06,558 --> 00:29:11,599 प्रोजेक्ट मिसाल है। लेकिन यही होता है कि 588 00:29:09,519 --> 00:29:14,480 जब आप एक जज्बे में, एक ख्याल में, एक 589 00:29:11,599 --> 00:29:16,240 तसवुर में डूबते हैं और आपको अपनी बेबसी 590 00:29:14,480 --> 00:29:19,519 का एहसास होता है कि मैं क्यों नहीं कह पा 591 00:29:16,240 --> 00:29:23,200 रहा हूं जो कहीं है आसपास मेरे। फिर धीरे 592 00:29:19,519 --> 00:29:26,558 से वो कॉन्शियस माइंड आपकी मदद। एंड यू 593 00:29:23,200 --> 00:29:30,399 समटाइ्स इट हैप्स देन एनी राइटर विल टेल 594 00:29:26,558 --> 00:29:32,798 यू। एनी पेंटर विल टेल यू कि आप हेल्थ से 595 00:29:30,398 --> 00:29:35,038 अपना काम देख रहे होते हैं कि ये अब आगे 596 00:29:32,798 --> 00:29:37,839 मैं क्या लिखने वाला हूं। कौन से अल्फाज 597 00:29:35,038 --> 00:29:41,200 में लिखूंगा? आप वॉच कर रहे होते हैं अपने 598 00:29:37,839 --> 00:29:43,678 आप को। कभी-कभी ऐसा भी होता है। 599 00:29:41,200 --> 00:29:46,399 क्या कहूं? 600 00:29:43,679 --> 00:29:49,278 बोलिए। 601 00:29:46,398 --> 00:29:51,918 देखिए ऐसी अच्छी-अच्छी आपने बातें सुनी। 602 00:29:49,278 --> 00:29:56,558 मेरे भी ज़हन में एक चीज आई। देखिए हर शायर 603 00:29:51,919 --> 00:29:59,038 के ज़हन में दिल में एक जज बैठा होता है। 604 00:29:56,558 --> 00:30:03,038 ये और बात है कि वो उस जज की बात सुनता 605 00:29:59,038 --> 00:30:06,158 बहुत कम है। लेकिन वो बताता है। जैसे कि 606 00:30:03,038 --> 00:30:09,440 अभी जावेद ने कहा कि यह जो चीज आप लिख रहे 607 00:30:06,159 --> 00:30:13,919 हैं यह लफ्ज जो आपने इस्तेमाल किया है यह 608 00:30:09,440 --> 00:30:17,360 ठीक नहीं है। अगर आप उसकी बात सुन लें और 609 00:30:13,919 --> 00:30:20,640 उस पे आप मेहनत कर लें तो फिर चीज जगमगाना 610 00:30:17,359 --> 00:30:24,079 शुरू करती है। यह सबके साथ होता है। एक-एक 611 00:30:20,640 --> 00:30:26,240 चीज को लोगों ने 10-10 दफा लिखा है। जांचा 612 00:30:24,079 --> 00:30:29,359 है फिर साफ किया है। फिर देखा है। फिर 613 00:30:26,240 --> 00:30:32,319 लिखा है। तब कहीं जाके एक चीज होती है। एक 614 00:30:29,359 --> 00:30:36,079 बात जो मैं आपसे कहना चाहती हूं खासतौर से 615 00:30:32,319 --> 00:30:40,000 कि शायरी हो जिस अदब के बारे में मैं कहना 616 00:30:36,079 --> 00:30:44,798 चाहती हूं। चाहे वो नज़्र हो या नज़्म हो। 617 00:30:40,000 --> 00:30:49,200 आदमी वही अच्छा शेर कह सकता है जो अपने 618 00:30:44,798 --> 00:30:53,278 चारों तरफ का दर्द महसूस करता है। यह दर्द 619 00:30:49,200 --> 00:30:57,600 उसकी जात में शामिल हो जाता है। 620 00:30:53,278 --> 00:31:02,079 इसीलिए शायरी को मौलाना रूम ने जुजस्त 621 00:30:57,599 --> 00:31:06,240 पैगंबरी भी कहा। एक साहब ने कहा कि शेर 622 00:31:02,079 --> 00:31:08,879 करना शेर कहना जो काम है वह मुरस्सा सास 623 00:31:06,240 --> 00:31:12,319 का काम है जो नग नग जड़ता है। किसी ने 624 00:31:08,880 --> 00:31:15,919 शायरी के लिए कुछ कहा किसी ने कुछ कहा आते 625 00:31:12,319 --> 00:31:19,519 हैं अर्श से ये मजामी ख्याल में ये नहीं 626 00:31:15,919 --> 00:31:23,600 होता है। शायरी अपने ज़हन, अपने जज्बात और 627 00:31:19,519 --> 00:31:27,359 अपने अतराफ के हालात से मुतासिर होती है। 628 00:31:23,599 --> 00:31:31,199 देखिए जब मुसीबतें आती हैं, शहर बर्बाद 629 00:31:27,359 --> 00:31:34,798 होते हैं तो शहरों के मलबों के ऊपर आके एक 630 00:31:31,200 --> 00:31:39,120 बड़ा शायर बैठता है। अहमद शाह अब्दाली की 631 00:31:34,798 --> 00:31:44,158 जंगों के बाद कौन बैठा? मीर बैठा। 632 00:31:39,119 --> 00:31:45,518 देखिए आप 1857 के बाद जब हंगामों के बाद 633 00:31:44,159 --> 00:31:48,080 कौन बैठा? 634 00:31:45,519 --> 00:31:50,880 गालिब बैठ गया आके। 635 00:31:48,079 --> 00:31:55,678 उसके बाद आप देखते जाइए कहीं ना कहीं कहीं 636 00:31:50,880 --> 00:32:00,320 ना कहीं हमारे जमाने में 47 में जो कुछ भी 637 00:31:55,679 --> 00:32:03,679 हुआ आके कौन तख्त पे बैठा? फैज बैठ गए। यह 638 00:32:00,319 --> 00:32:07,439 चीजें होती हैं। मलबों के ऊपर बड़े शायर 639 00:32:03,679 --> 00:32:11,679 नमूदार हो जाते हैं। इसलिए कि उनके ज़हन 640 00:32:07,440 --> 00:32:14,159 में वो तमाम बातें एक तरह से उनके ज़हन में 641 00:32:11,679 --> 00:32:18,880 जज्ब हो जाती हैं। वो मुसीबतें, वो 642 00:32:14,159 --> 00:32:22,320 हंगामे, वो हकतफियां वो तल्खियां उनके शेर 643 00:32:18,880 --> 00:32:25,919 में ढलती हैं। वही अल्फाज़ होते हैं जो हम 644 00:32:22,319 --> 00:32:28,558 और आप गुफ्तगू में कहते हैं। ये वो का 645 00:32:25,919 --> 00:32:31,600 फलां चुनी चुना क्या हो गया? क्यों हो 646 00:32:28,558 --> 00:32:34,319 गया? अरे हर वो हर वो लफ्ज़ जो आप गुफ्तगू 647 00:32:31,599 --> 00:32:37,519 में इस्तेमाल करते हैं जब शेर में जाता 648 00:32:34,319 --> 00:32:40,398 है। शेर के लाइन में मिसरे की लाइन में 649 00:32:37,519 --> 00:32:43,200 आता है तो उसके मानी ही बदल जाते हैं। 650 00:32:40,398 --> 00:32:46,719 मानी बदल जाते हैं। एक मामूली सा लब्ज़ है 651 00:32:43,200 --> 00:32:50,880 तो। आप इसको देख लीजिए। ये तो ये हो गया। 652 00:32:46,720 --> 00:32:54,480 ये तो यूं हो गया। तो तो कैसा ते वाव जरा 653 00:32:50,880 --> 00:32:56,960 सा अलिफ यूं करके तो लेकिन जब शायर के 654 00:32:54,480 --> 00:32:57,759 मिसरे में आता है मानी बदल जाती है 655 00:32:56,960 --> 00:33:00,880 जैसे 656 00:32:57,759 --> 00:33:05,200 जैसे मैं आपको मिसाल देती हूं सब आने वाले 657 00:33:00,880 --> 00:33:09,240 आ गए अपने पर आए तो पर जिनका इंतजार था 658 00:33:05,200 --> 00:33:09,240 वही ना आए तो 659 00:33:09,519 --> 00:33:15,278 अब ये तो तो बदल गया 660 00:33:12,319 --> 00:33:18,879 खत्म हो गया 661 00:33:15,278 --> 00:33:21,278 मैं आपको बताऊं काफ़ बयानिया हम उसे कहते 662 00:33:18,880 --> 00:33:24,880 हैं काफ़ और यूं करके के जो जुमले के बीच 663 00:33:21,278 --> 00:33:28,798 में आता है। नज़र अकबर आबादी ने काफ़ 664 00:33:24,880 --> 00:33:33,760 बयानिया से शेर शुरू किया है। उसने कहा है 665 00:33:28,798 --> 00:33:39,119 कि के वो शोक जिस घर में मेहमान होगा 666 00:33:33,759 --> 00:33:42,558 कि वो शोक जिस इसमें इसमें जा वो बड़ी ये 667 00:33:39,119 --> 00:33:46,398 वाला के नहीं है। के वह शौक जिस घर में 668 00:33:42,558 --> 00:33:48,480 मेहमान होगा, क़यामत का उस घर में सामान 669 00:33:46,398 --> 00:33:51,759 होगा। 670 00:33:48,480 --> 00:33:55,360 ये मैं आपसे सिर्फ यह कहना चाहती हूं कि 671 00:33:51,759 --> 00:33:58,079 शायरी की जुबान में अल्फ़ाज़ अपना चोला बदल 672 00:33:55,359 --> 00:34:00,558 लेते हैं। जो आप गुफ्तगू के दौरान 673 00:33:58,079 --> 00:34:03,519 इस्तेमाल करते हैं। जब वो शेर में चला 674 00:34:00,558 --> 00:34:06,720 जाता है। पिरो लिया जाता है मोती की तरह 675 00:34:03,519 --> 00:34:10,480 से। वो जगमगाता है। उसकी शक्ल बदल जाती 676 00:34:06,720 --> 00:34:13,280 है। उसमें से श्वा फूटती है। लौ देता है। 677 00:34:10,480 --> 00:34:16,639 लॉ देता है और 678 00:34:13,280 --> 00:34:18,159 एक शायर के लिए लफ्ज वही है जो एक पेंटर 679 00:34:16,639 --> 00:34:20,480 के लिए रंग है। 680 00:34:18,159 --> 00:34:23,119 कोई शक नहीं वो कैसे कहां इस तरह इस्तेमाल 681 00:34:20,480 --> 00:34:26,079 करें उनमें जिंदगी आ जाएगी। रंग तो ऐसे 682 00:34:23,119 --> 00:34:29,280 पड़े हो तो क्या है कुछ भी नहीं। मगर एक 683 00:34:26,079 --> 00:34:31,359 बात ज़रापा मैं तमाम एहतराम के साथ आपसे 684 00:34:29,280 --> 00:34:35,839 डिसए्री करना चाहूंगा। जरूर कीजिए 685 00:34:31,358 --> 00:34:37,440 कि शायर जो है वो अपने जमानो मकान से आगाह 686 00:34:35,838 --> 00:34:40,398 होता है। दुनिया में क्या तबाही क्या 687 00:34:37,440 --> 00:34:43,519 बर्बादी हो रही है। उसका पूरा उसमें एहसास 688 00:34:40,398 --> 00:34:46,078 होता है। तो ये अगर हम इस नतीजे पे पहुंचे 689 00:34:43,519 --> 00:34:47,358 कि तो नतीजा ये निकलता है कि हर शायर बहुत 690 00:34:46,079 --> 00:34:48,240 अच्छा आदमी होता है। 691 00:34:47,358 --> 00:34:50,559 हर शायर 692 00:34:48,239 --> 00:34:51,358 अच्छा आदमी होता है। हालांकि ऐसा नहीं है। 693 00:34:50,559 --> 00:34:54,799 नहीं ऐसा नहीं है। 694 00:34:51,358 --> 00:34:57,519 कभी-कभी शायर अच्छे आदमी होते हैं। 695 00:34:54,800 --> 00:34:59,519 ज्यादातर शायर अच्छे लोग नहीं होते। और 696 00:34:57,519 --> 00:35:00,159 उन्हें होना भी नहीं चाहिए। 697 00:34:59,519 --> 00:35:02,559 अब हर 698 00:35:00,159 --> 00:35:05,199 बात समझ में आती है बात समझ में आती है 699 00:35:02,559 --> 00:35:06,639 भाई कितनी नेकी करे आदमी इतनी शायरी में 700 00:35:05,199 --> 00:35:09,358 अच्छी-अच्छी बातें कर रहा अब जिंदगी में 701 00:35:06,639 --> 00:35:11,358 भी करे वो आप तो सिर्फ जिंदगी में है तो 702 00:35:09,358 --> 00:35:16,719 आप बेहतर है जिंदगी में अच्छी बातें कीजिए 703 00:35:11,358 --> 00:35:19,598 सच ये है कि आदमी जो है वो एक है नहीं 704 00:35:16,719 --> 00:35:22,319 मैं आपको हमारे बुजुर्गों को नाम इनवॉल्वड 705 00:35:19,599 --> 00:35:24,880 है तो मैं शायद नाम लेने से हिचकिचाऊंगा 706 00:35:22,320 --> 00:35:28,480 लेकिन मैंने जिंदगी में ऐसे शायर देखे जो 707 00:35:24,880 --> 00:35:30,640 इतनी हसास शायरी करते हैं इतनी पाकीजा 708 00:35:28,480 --> 00:35:33,519 शायरी करते हैं कि ऐसा लगता है कि आसमान 709 00:35:30,639 --> 00:35:36,639 से ही उतरी होगी। ये क्या एहसास है? ये 710 00:35:33,519 --> 00:35:38,880 क्या इसमें नफासत है? वो अपनी पर्सनल 711 00:35:36,639 --> 00:35:42,960 जिंदगी में कास्टेंटली व्गर बातें करते 712 00:35:38,880 --> 00:35:45,838 रहते हैं। गालियां बकते हैं। ये सच है। 713 00:35:42,960 --> 00:35:46,159 बिकॉज़ एक आदमी के अंदर बहुत से आदमी होते 714 00:35:45,838 --> 00:35:47,759 हैं। 715 00:35:46,159 --> 00:35:50,960 ये बिल्कुल सही है। 716 00:35:47,760 --> 00:35:55,359 अच्छा तीन तरह के लोग हैं। एक जैसा लिखते 717 00:35:50,960 --> 00:35:58,960 हैं वैसे वो हैं। एक जैसा लिखते हैं उससे 718 00:35:55,358 --> 00:36:02,719 बिल्कुल अलग लोग हैं। एक जो जरा मिलेजुले 719 00:35:58,960 --> 00:36:06,079 से हैं। मतलब कृष्ण चंद्र बहुत बड़े अदीत 720 00:36:02,719 --> 00:36:08,239 थे। मैं उनका फैन हूं और मेरी जो पहली 721 00:36:06,079 --> 00:36:10,720 शायरी की किताब थी अमूमन होता है नस्ल की 722 00:36:08,239 --> 00:36:13,519 किताब पे बाहर एक शेर लिखा होता है। मेरी 723 00:36:10,719 --> 00:36:17,519 शायरी की किताब पे पहले पेज पे नसी कृष्ण 724 00:36:13,519 --> 00:36:21,280 चंद्र की नस्ल लिखी थी कोटेशन की तरह वो 725 00:36:17,519 --> 00:36:22,880 इतने खूब मतलब मैंने उनकी मैं खुशकिस्मत 726 00:36:21,280 --> 00:36:25,839 हूं कि इन लोगों के मैं बहुत करीब रहा 727 00:36:22,880 --> 00:36:29,039 हूं। मैंने उनकी मैनुस्क्रिप्ट देखी हैं। 728 00:36:25,838 --> 00:36:31,039 80-80 पेज में एक लफ्ज कटा हुआ नहीं। आप 729 00:36:29,039 --> 00:36:34,960 पलटते जाइए। लिखा हुआ है। बस एक हाथ से 730 00:36:31,039 --> 00:36:37,679 लिखा हुआ और हाथ से लिखते थे। वही आदमी 731 00:36:34,960 --> 00:36:38,240 तीन जुमले एक साथ नहीं बोल सकता था। 732 00:36:37,679 --> 00:36:40,399 बोलने में 733 00:36:38,239 --> 00:36:43,279 ही वास सो अपवर्ड। जब बात कर रहा है तो 734 00:36:40,400 --> 00:36:45,280 बोल नहीं सकता। इस्मत आपा जो थी जैसा 735 00:36:43,280 --> 00:36:47,200 बोलती थी वैसा लिखती थी। जैसा लिखती थी 736 00:36:45,280 --> 00:36:50,560 वैसा बोलती थी। 737 00:36:47,199 --> 00:36:52,879 ऐसे भी लोग देखें जिनकी शायरी में इतना 738 00:36:50,559 --> 00:36:56,960 इथीरियल क्वालिटी है। पर्सनल लाइफ में 739 00:36:52,880 --> 00:37:00,720 व्गर और क्रूड लोग हैं। लालची लोग हैं। तो 740 00:36:56,960 --> 00:37:04,559 ये जरूरी नहीं है। वो एक हिस्सा है ज़हन का 741 00:37:00,719 --> 00:37:07,279 जो इसे ले रहा है और उससे रिएक्ट कर रहा 742 00:37:04,559 --> 00:37:09,679 है। बाकी हिस्सा कुछ और है। ये पॉसिबल है। 743 00:37:07,280 --> 00:37:11,280 उसी शख्स की दूसरी शख्सियत। मुझे तो जैसे 744 00:37:09,679 --> 00:37:13,440 मैं माफ़ कीजिएगा। आप लोगों में कुछ लोगों 745 00:37:11,280 --> 00:37:15,839 को शायद थोड़ा खराब भी लगे। मैं ऐसे लोगों 746 00:37:13,440 --> 00:37:18,400 की बहुत इज़्ज़त करता हूं। जो रिलीजियस है 747 00:37:15,838 --> 00:37:21,400 मगर अच्छे लोग हैं। 748 00:37:18,400 --> 00:37:21,400 सर 749 00:37:22,559 --> 00:37:31,119 मैं ये बात आपसे दिल से कह रहा हूं। 750 00:37:27,280 --> 00:37:36,800 एंड आई हैव अ रैशन अ लॉजिक बिहाइंड इट। 751 00:37:31,119 --> 00:37:38,880 मेरे पास एक लॉजिक है। देखिए एक आदमी अगर 752 00:37:36,800 --> 00:37:40,400 सुबह इबादत करने जाता है। वो मंदिर में 753 00:37:38,880 --> 00:37:42,960 जाता है, मस्जिद में जाता है, चर्च में 754 00:37:40,400 --> 00:37:44,480 जाता है। दैट्स नॉटेंट। तो वो जब बाहर 755 00:37:42,960 --> 00:37:45,519 निकलता है तो ये महसूस करता है ना कि 756 00:37:44,480 --> 00:37:47,039 मैंने एक अच्छा काम किया। 757 00:37:45,519 --> 00:37:49,920 अच्छा काम किया उसने। 758 00:37:47,039 --> 00:37:51,759 हर काम की एक लिमिट है। आप इतना वजन उठा 759 00:37:49,920 --> 00:37:53,838 सकते हैं। इससे ज्यादा वजन नहीं उठा सकते। 760 00:37:51,760 --> 00:37:56,079 आप इतनी दूर भाग सकते हैं। उससे दूर नहीं 761 00:37:53,838 --> 00:37:58,559 भाग सकते। आप इतनी दूर देख सकते हैं। इससे 762 00:37:56,079 --> 00:38:00,880 दूर नहीं देख सकते। आप इतनी दूर की आवाज 763 00:37:58,559 --> 00:38:04,000 सुन सकते हैं। उसके बाद में हर चीज का 764 00:38:00,880 --> 00:38:06,559 कोटा है। कॉमन सेंस कि आप में कॉमन सेंस 765 00:38:04,000 --> 00:38:10,239 कहता है कि आप में नेकी का भी कोई तो कोटा 766 00:38:06,559 --> 00:38:13,440 होगा कि इतना आप कर सकते। तो उस नेकी के 767 00:38:10,239 --> 00:38:18,078 कोटे को हम 10 यूनिट्स में तब्दील कर देते 768 00:38:13,440 --> 00:38:21,679 हैं। बल्कि पांच में बेहतर रहेगा। पांच 769 00:38:18,079 --> 00:38:23,760 में आपने उसे कर दिया। तो आपने जब पांच 770 00:38:21,679 --> 00:38:25,039 वक्त नमाज पढ़ी तो आपको लगा ना पांच अच्छे 771 00:38:23,760 --> 00:38:26,240 काम किए आपने। 772 00:38:25,039 --> 00:38:27,519 बिल्कुल सही। 773 00:38:26,239 --> 00:38:28,239 किए कि नहीं किए? 774 00:38:27,519 --> 00:38:30,159 किए। 775 00:38:28,239 --> 00:38:33,039 आपने अपना कोटा इसके लिए इस्तेमाल किया 776 00:38:30,159 --> 00:38:35,519 इबादत में। मैं करता नहीं हूं। मैं क्या 777 00:38:33,039 --> 00:38:37,440 करूं? मुझे तो किसी की मदद करनी पड़ेगी। 778 00:38:35,519 --> 00:38:41,440 किसी को रोटी खिलानी पड़ेगी। किसी की 779 00:38:37,440 --> 00:38:43,119 स्कूल की फीस देनी पड़ेगी। यह आदमी इबादत 780 00:38:41,440 --> 00:38:44,960 भी करता है उसके बाद भी नेकियां कर रहा 781 00:38:43,119 --> 00:38:48,640 है। तो इसका कोटा तो बहुत बड़ा है नेकी 782 00:38:44,960 --> 00:38:52,880 का। कमाल की बात मैं आई रिस्पेक्ट दिस 783 00:38:48,639 --> 00:38:56,559 मैन। मेरे लिए तो नेक होना बहुत आसान है। 784 00:38:52,880 --> 00:38:58,640 इसके लिए मुश्किल है। तो आई जेनुइनली 785 00:38:56,559 --> 00:39:01,358 रिस्पेक्ट पीपल हु इंस्पाइट ऑफ़ बीइंग 786 00:38:58,639 --> 00:39:04,400 पोएट्स। इंस्पाइट ऑफ़ गुड राइटर्स। दे आर 787 00:39:01,358 --> 00:39:07,920 गुड पीपल आल्सो। इसलिए कि वैसे भी पीपल 788 00:39:04,400 --> 00:39:08,160 थोड़े से बोरिंग होते हैं। तो अब आप कुछ 789 00:39:07,920 --> 00:39:10,159 बात 790 00:39:08,159 --> 00:39:12,719 जो बिगड़े होते हैं ना लोग वो दुनिया में 791 00:39:10,159 --> 00:39:14,559 तरह-तरह के तजुर्ब तरह-तरह की चीज़ जो सीधे 792 00:39:12,719 --> 00:39:16,959 रास्ते पे चल रहा है बेचारा उतना नेक सा 793 00:39:14,559 --> 00:39:18,960 आदमी उसे ज्यादा तजुर्बा होता भी नहीं है। 794 00:39:16,960 --> 00:39:21,280 उसके बावजूद ही अच्छा राइटर है। उसके 795 00:39:18,960 --> 00:39:25,440 बावजूद ही अच्छा पोएट तो रिस्पेक्टेबल बात 796 00:39:21,280 --> 00:39:27,440 है। और अगर वो बदमाश है राइटर या पोएट तो 797 00:39:25,440 --> 00:39:30,000 बिल्कुल समझ में आने वाली बात। 798 00:39:27,440 --> 00:39:35,200 बदमाशी भूल जाए। किसी ने अच्छी बात कही है 799 00:39:30,000 --> 00:39:39,119 कि आप दुनिया से लड़िए तो खिताबत पैदा 800 00:39:35,199 --> 00:39:42,759 होती है। अपने आप से लड़िए तो फिर शायरी 801 00:39:39,119 --> 00:39:42,760 पैदा होती है। 802 00:39:44,079 --> 00:39:50,079 मुझे इसी से सवाल मेरे ज़हन में आया जो 803 00:39:47,760 --> 00:39:51,440 जिक्र किया था जावेद साहब ने कि कुछ शायर 804 00:39:50,079 --> 00:39:55,440 ऐसे होते हैं जो बहुत अच्छे होते हैं। 805 00:39:51,440 --> 00:39:57,519 मेरे ज़हन में ऐसे एक शायर आए फैज साहब। तो 806 00:39:55,440 --> 00:40:00,400 उनका सवाल मैंने आपसे पूछना है आप दोनों 807 00:39:57,519 --> 00:40:03,679 से और वो यह है कि उन्होंने एक नज़्म लिखी 808 00:40:00,400 --> 00:40:07,200 जेल में और जब लिख ली तो साथ खत भी लिखा 809 00:40:03,679 --> 00:40:10,000 एलिस को अपनी बेगम को और कहा कि लोग समझते 810 00:40:07,199 --> 00:40:13,118 हैं कि किसी शायर के लिए आसान होता है कि 811 00:40:10,000 --> 00:40:16,960 बस लिख दी। लेकिन लोग यह नहीं देखते कि 812 00:40:13,119 --> 00:40:19,358 किस कदर अर्क रेजी करनी पड़ती है और एक-एक 813 00:40:16,960 --> 00:40:22,240 लफ्ज को ऐसे तलाश करना पड़ता है कि वो 814 00:40:19,358 --> 00:40:24,159 नगीने की तरह आकर बैठे और उसको निकालो और 815 00:40:22,239 --> 00:40:26,239 उसके बाद देखते हैं कि हां भाई इसका वजन 816 00:40:24,159 --> 00:40:29,440 पूरा है एहसास पूरा है। 817 00:40:26,239 --> 00:40:31,279 और ये जो उन्होंने नज़्म लिखी ये है जिंदा 818 00:40:29,440 --> 00:40:32,880 की एक शाम। मैं आपको उसका एक शेर सुना 819 00:40:31,280 --> 00:40:33,280 दूंगा। फिर मैंने सवाल इससे जुड़ा हुआ 820 00:40:32,880 --> 00:40:34,880 पूछना है। 821 00:40:33,280 --> 00:40:37,280 शाम के पेचखम सितारों 822 00:40:34,880 --> 00:40:39,119 और वो ऐसे होती है कि वो जेल में है और 823 00:40:37,280 --> 00:40:43,760 बाहर देख रहे हैं और फैज साहब यह कहते हैं 824 00:40:39,119 --> 00:40:46,160 कि शाम के पेचुखम सितारों से जीना जीना 825 00:40:43,760 --> 00:40:49,520 उतर रही है रात। 826 00:40:46,159 --> 00:40:52,799 यूं सबा पास से गुजरती है जैसे कह दी किसी 827 00:40:49,519 --> 00:40:54,639 ने प्यार की बात। 828 00:40:52,800 --> 00:40:56,480 अब वाह कह रहे हैं तो मैं पूरी सुना देता 829 00:40:54,639 --> 00:40:57,759 हूं। 830 00:40:56,480 --> 00:41:01,358 सहने जिंदा 831 00:40:57,760 --> 00:41:04,960 जिंदा के बेवतन अशजार सर निगू महब है 832 00:41:01,358 --> 00:41:08,239 बनाने में दामने आसमा पे नक्शो निगार 833 00:41:04,960 --> 00:41:12,318 शाना बाम पे दमकता है मेहरबान चांदनी का 834 00:41:08,239 --> 00:41:16,399 दस्ते जमील खाक में घुल गई है आबे नजूम 835 00:41:12,318 --> 00:41:20,719 नूर में घुल गया है अर्श का नील 836 00:41:16,400 --> 00:41:25,280 सब गोशों में नीलग साए लहलहाते हैं जिस 837 00:41:20,719 --> 00:41:28,639 तरह दिल में मौजे दर्द फिराक यार 838 00:41:25,280 --> 00:41:30,560 दिल से पैम ख्याल कहता है इतनी शरी है 839 00:41:28,639 --> 00:41:33,519 जिंदगी इस पल 840 00:41:30,559 --> 00:41:36,799 जुल्म का ज़हर घोलने वाले कामना हो सकेंगे 841 00:41:33,519 --> 00:41:40,239 आज ना कल जलवागाहे विसाल की शमें वो बुझा 842 00:41:36,800 --> 00:41:43,480 भी चुके अगर तो क्या चांद को गुल करें तो 843 00:41:40,239 --> 00:41:43,479 हम जाने 844 00:41:43,760 --> 00:41:51,760 सर इसके एक बात मैं कहना चाहूंगा 845 00:41:47,599 --> 00:41:52,640 दुनिया में तीन तरह के आर्टिस्ट है 846 00:41:51,760 --> 00:41:55,040 तीन तरह के 847 00:41:52,639 --> 00:41:57,358 आर्टिस्ट है उनको तो जाने दीजिए जो खराब 848 00:41:55,039 --> 00:42:04,079 है उन्हें भूल जाइए जो काउंट हम कर रहे 849 00:41:57,358 --> 00:42:07,759 हैं एक वो जो आदमी बड़े हैं टैलेंट छोटा 850 00:42:04,079 --> 00:42:10,000 है लेकिन क्योंकि उनके यहां बड़ी थिंकिंग 851 00:42:07,760 --> 00:42:12,480 है और अच्छे लोग हैं। टैलेंट इतना नहीं है 852 00:42:10,000 --> 00:42:16,239 तो अपने टैलेंट को भी इज्जत दिला लेते हैं 853 00:42:12,480 --> 00:42:18,400 कुछ। कुछ ऐसे हैं जिनका टैलेंट बड़ा है 854 00:42:16,239 --> 00:42:20,479 लेकिन आदमी बहुत छोटे और घटिया है। तो 855 00:42:18,400 --> 00:42:23,119 अक्सर ये होता है कि वो अपने टैलेंट को भी 856 00:42:20,480 --> 00:42:26,639 नीचे खींच लेते हैं। लेकिन बेपनाह टैलेंट 857 00:42:23,119 --> 00:42:29,838 हो तो वो इस घटियापन को भी ऊपर ले आता है। 858 00:42:26,639 --> 00:42:30,879 तीसरे वो हैं जो आदमी भी बड़े हैं और 859 00:42:29,838 --> 00:42:31,599 टैलेंट भी बड़ा है। 860 00:42:30,880 --> 00:42:34,318 क्या कहना? 861 00:42:31,599 --> 00:42:36,880 तो आप जिस शायर का जिक्र कर रहे थे वो उन 862 00:42:34,318 --> 00:42:37,679 रेयर पोएट्स में से जो आदमी बड़ा था और 863 00:42:36,880 --> 00:42:39,119 शायर भी बड़ा है। 864 00:42:37,679 --> 00:42:43,039 यानी कोई फर्क ही नहीं है। 865 00:42:39,119 --> 00:42:45,680 वो गालिब था वो फैज था। मगर बाकी जो है 866 00:42:43,039 --> 00:42:48,639 इसमें है। कुछ लोग होते हैं टैलेंट इतना 867 00:42:45,679 --> 00:42:51,039 नहीं है। लेकिन कुछ उनकी समझदारी 868 00:42:48,639 --> 00:42:53,039 दुनियादारी ऐसी होती है कि उसे ऊपर इज्जत 869 00:42:51,039 --> 00:42:55,279 दिला लेते हैं। कुछ ऐसे होते हैं बहुत 870 00:42:53,039 --> 00:42:57,039 अच्छे शायर होते हैं। वो आदमी इतने घटिया 871 00:42:55,280 --> 00:42:59,359 होते हैं कि अपनी शायरी को भी नीचे ले आते 872 00:42:57,039 --> 00:43:01,358 हैं। कुछ ऐसे होते हैं जो कि घटिया होते 873 00:42:59,358 --> 00:43:03,838 हैं लेकिन उनकी शायरी इतनी जबरदस्त होती 874 00:43:01,358 --> 00:43:07,838 है कि उस घटियापन के बावजूद ऊपर चली जाती 875 00:43:03,838 --> 00:43:09,759 है। और कुछ होते हैं जो आदमी भी बड़े होते 876 00:43:07,838 --> 00:43:11,199 हैं और शायर भी बड़े होते। ऐसा बहुत कम 877 00:43:09,760 --> 00:43:12,960 होता है। ऐसा बहुत कम होता है। 878 00:43:11,199 --> 00:43:13,439 वो कभी 100 150 साल में एक बार हो जाता 879 00:43:12,960 --> 00:43:15,679 है। 880 00:43:13,440 --> 00:43:18,240 यह बात मैं इसलिए कह सकती हूं कि मैं 881 00:43:15,679 --> 00:43:22,239 थोड़ा सा मेरा कुर्ब रहा है फैज साहब के 882 00:43:18,239 --> 00:43:24,318 साथ। उनकी शख्सियत में और उनकी शायरी में 883 00:43:22,239 --> 00:43:30,239 कोई फर्क ही नहीं था। 884 00:43:24,318 --> 00:43:35,759 जो मुलायमत और जो अंदाज जो नरमी जो धीमापन 885 00:43:30,239 --> 00:43:39,358 एक लिहाज से शराफत मुलायमत ये सब चीज उनकी 886 00:43:35,760 --> 00:43:42,720 शख्सियत में उसी तरह थी जैसी उनकी शायरी 887 00:43:39,358 --> 00:43:45,920 में थी जैसी उनकी गुफ्तगू में थी। बात 888 00:43:42,719 --> 00:43:49,039 जावेद ने बिल्कुल आपके सामने सही कही कि 889 00:43:45,920 --> 00:43:51,838 यह जरूरी नहीं है कि शायर अच्छा हो तो 890 00:43:49,039 --> 00:43:54,559 आदमी अच्छा हो। आदमी अच्छा हो तो शायर 891 00:43:51,838 --> 00:43:57,119 अच्छा हो। कहा भी यही जाता है हमारे एक 892 00:43:54,559 --> 00:43:59,838 बहुत अच्छे शायर थे। उनके बारे में लोग 893 00:43:57,119 --> 00:44:02,160 कहते थे तरह-तरह की बातें लेकिन वो शायर 894 00:43:59,838 --> 00:44:05,039 बहुत अच्छे थे। तो मैंने पूछा तो उन्होंने 895 00:44:02,159 --> 00:44:05,759 कहा मैं लिखते वक्त कोई और होता हूं। 896 00:44:05,039 --> 00:44:08,079 सही है। 897 00:44:05,760 --> 00:44:08,800 मैं लिखते वक्त वो होता ही नहीं हूं जो 898 00:44:08,079 --> 00:44:09,920 मैं हूं। 899 00:44:08,800 --> 00:44:10,800 सही है। 900 00:44:09,920 --> 00:44:12,960 इस जवाब 901 00:44:10,800 --> 00:44:13,839 अच्छा वो हम दोनों ने एक्सचेंज नहीं किए 902 00:44:12,960 --> 00:44:15,679 नाम। 903 00:44:13,838 --> 00:44:19,000 लेकिन मैं जानता हूं कि ये भी उसी का 904 00:44:15,679 --> 00:44:19,000 जिक्र करें। 905 00:44:19,358 --> 00:44:23,598 हम दोनों को पता है वो कौन है। 906 00:44:24,960 --> 00:44:29,280 क्योंकि बुराई बुराई में लुत्फ बहुत आता 907 00:44:27,440 --> 00:44:30,318 है तो मैं यही सिलसिला रोक दूं। मुझे एक 908 00:44:29,280 --> 00:44:30,960 सवाल भी पूछना है। 909 00:44:30,318 --> 00:44:33,679 हां पूछिए। 910 00:44:30,960 --> 00:44:36,720 हम भी पड़े हैं राहों में। ये बताइए कि एक 911 00:44:33,679 --> 00:44:38,960 तो क्राफ्ट एक चीज है। एक तपस्या है। अर्क 912 00:44:36,719 --> 00:44:41,439 रेजी जिसको फैज साहब कहते थे कि उसको उस 913 00:44:38,960 --> 00:44:43,440 चीज को तलाश करना है। लेकिन कुछ लोग ये 914 00:44:41,440 --> 00:44:46,000 कहते हैं या शायर या आर्टिस्ट भी कि अच्छा 915 00:44:43,440 --> 00:44:48,079 अभी रात के पिछले पहर मुझे कुछ ऐसा होता 916 00:44:46,000 --> 00:44:52,318 है, कुछ उतरता है, ऊपर से कुछ अता होता 917 00:44:48,079 --> 00:44:54,720 है। तो आर्ट फॉर्म जो है वो क्या इंसान के 918 00:44:52,318 --> 00:44:57,039 थ्रू गुजर कर जाती है और इंसान जो है वह 919 00:44:54,719 --> 00:44:59,439 सिर्फ महज एक प्याला है जिसमें कुछ आता है 920 00:44:57,039 --> 00:45:01,920 या उसका अपना भी कुछ उसमें है कि जोर 921 00:44:59,440 --> 00:45:02,480 लगाने से सीखने से क्या सीखा जा सकता है 922 00:45:01,920 --> 00:45:04,559 ये काम 923 00:45:02,480 --> 00:45:07,199 ये ऊपर से अगर आता है तो उसी जबान में 924 00:45:04,559 --> 00:45:10,639 क्यों आता है जो आप जानते हैं भाई चाइनीस 925 00:45:07,199 --> 00:45:13,519 में आ जाए ग्रीक में आ जाए 926 00:45:10,639 --> 00:45:17,598 ये ऊपर ऊपर कुछ है नहीं समझे ऊपर सिर्फ 927 00:45:13,519 --> 00:45:21,039 पोल्यूटेड हवाएं हैं आजकल बाकी ये के जहां 928 00:45:17,599 --> 00:45:23,760 तक नीचे की बात है वही आपका जो लाश मशहूर 929 00:45:21,039 --> 00:45:27,199 है उसे आप ऊपर समझते हैं। वो आपके सर के 930 00:45:23,760 --> 00:45:29,839 ही अंदर है। अगर वो रगें जो आपके ब्रेन को 931 00:45:27,199 --> 00:45:31,118 आपसे कनेक्ट करती है वो काट दिए जाए तो 932 00:45:29,838 --> 00:45:33,039 ऊपर से कुछ नहीं आने वाला। 933 00:45:31,119 --> 00:45:34,318 कुछ नहीं आता। 934 00:45:33,039 --> 00:45:36,800 बिल्कुल सही। 935 00:45:34,318 --> 00:45:40,559 जरापा मुझे एक शरारत करनी है आपके साथ। वो 936 00:45:36,800 --> 00:45:42,640 ये है कि साहिर से लेके फैज से लेके जोश 937 00:45:40,559 --> 00:45:46,318 से लेके जावेद साहब से लेके इन सब लोगों 938 00:45:42,639 --> 00:45:48,960 ने अपनी शायरी भी की और कुछ ने ज्यादा कुछ 939 00:45:46,318 --> 00:45:51,920 नहीं कहा। फिल्मी गीत लिखे। आपने फिल्मी 940 00:45:48,960 --> 00:45:52,480 गीत नहीं लिखे। ये क्या ये खुद इंतखाब ना 941 00:45:51,920 --> 00:45:54,960 लिखने का 942 00:45:52,480 --> 00:45:57,039 मुझसे आए नहीं 943 00:45:54,960 --> 00:46:00,240 जैसे उन्होंने कहा मुझसे ना फिल्मी गीत 944 00:45:57,039 --> 00:46:02,719 लिखना आसान काम नहीं है मैंने देखा है 945 00:46:00,239 --> 00:46:06,399 किन-किन मुश्किलों से इन पे तो गुजरी होगी 946 00:46:02,719 --> 00:46:08,639 मैंने तो आंखों से देखा है मैं कि भाई वो 947 00:46:06,400 --> 00:46:11,680 म्यूजिक डायरेक्टर अलग कुछ निकाल रहा है 948 00:46:08,639 --> 00:46:14,000 धुन शायर का कहीं लव फिट हो रहा है नहीं 949 00:46:11,679 --> 00:46:16,480 हो रहा है ये तो यही बता सकेंगे किन 950 00:46:14,000 --> 00:46:19,358 मुश्किलों से आदमी गुजरता है तो मुझसे आए 951 00:46:16,480 --> 00:46:22,000 हां सीरियल का मुखड़ा हुआ करा किसी ने कहा 952 00:46:19,358 --> 00:46:23,838 ये लिख दीजिए तो मैंने लिखा है। बाकी मेरा 953 00:46:22,000 --> 00:46:26,480 दिल बहुत है कि मैं भी कोई अच्छा सा 954 00:46:23,838 --> 00:46:29,119 फिल्मी गीत लिखूं मुझसे आया ही नहीं तो 955 00:46:26,480 --> 00:46:31,280 मैं क्या करती? देखिए जिन पे गुजरी होगी 956 00:46:29,119 --> 00:46:34,400 गुजरी होगी। मुझ पे तो कुछ नहीं गुजरी। 957 00:46:31,280 --> 00:46:36,720 मैं कुछ लोगों पे जरूर गुजराऊंगा। 958 00:46:34,400 --> 00:46:39,440 जहां मेरी मर्जी की बात नहीं हुई। मुझे 959 00:46:36,719 --> 00:46:41,279 लगा राय लोगों की सुनना बुरी बात नहीं है। 960 00:46:39,440 --> 00:46:43,920 आप सुनिए अगर वो सही राय दे रहा है। मान 961 00:46:41,280 --> 00:46:46,400 भी जाए आपका ही काम बेहतर होगा। लेकिन अगर 962 00:46:43,920 --> 00:46:48,800 लगे कि ये जिसके साथ मैं काम कर रहा हूं 963 00:46:46,400 --> 00:46:50,960 ये जायल है और गलत राय दे रहा है तो मैं 964 00:46:48,800 --> 00:46:54,318 उसका काम छोड़ देता हूं। 965 00:46:50,960 --> 00:46:56,559 मैं करता ही नहीं तो उसके बाद क्या है? 966 00:46:54,318 --> 00:46:58,400 अगर तुम्हें हमारी बात पे भरोसा नहीं है 967 00:46:56,559 --> 00:46:58,880 तो तुम किसी और को ले लो। मैं छोड़ देता 968 00:46:58,400 --> 00:47:00,318 हूं। 969 00:46:58,880 --> 00:47:02,000 यू आर इन अ पोजीशन टू डू दैट। 970 00:47:00,318 --> 00:47:04,079 नहीं नहीं नहीं। ये पोजीशन में कभी नहीं 971 00:47:02,000 --> 00:47:05,119 होता आदमी। इसका ताल्लुक पोजीशन से नहीं 972 00:47:04,079 --> 00:47:07,359 है। मिजाज से। 973 00:47:05,119 --> 00:47:07,680 अगर बेचारा किसी को जरूरत हो उसको डांट भी 974 00:47:07,358 --> 00:47:09,119 रहा है। 975 00:47:07,679 --> 00:47:11,759 नहीं नहीं नहीं मुझे भी जरूरत रही है। मैं 976 00:47:09,119 --> 00:47:14,960 तो शुरू से ऐसा ही था। मैं एक पिक्चर कर 977 00:47:11,760 --> 00:47:16,960 रहा था सरद लुटेरा ₹1 महीना पे डायलॉग लिख 978 00:47:14,960 --> 00:47:20,480 रहा था ₹100 महीना 979 00:47:16,960 --> 00:47:22,880 तो और मेरी उम्र थी 21 या 22 साल जब मैं 980 00:47:20,480 --> 00:47:25,519 नया-नया गया था तो वो प्रोड्यूसर 981 00:47:22,880 --> 00:47:28,720 डायरेक्टर ने क्लाइमेक्स में शेख मुख्तार 982 00:47:25,519 --> 00:47:31,519 के डायलॉग चंट फिल्म थी सरहदी लुटेरा 983 00:47:28,719 --> 00:47:34,318 अच्छा भाई वो कौन देखने वाला है कहीं सी 984 00:47:31,519 --> 00:47:36,960 टीचर से सिनेमा हाउस में तीन-चार हफ्ते 985 00:47:34,318 --> 00:47:39,039 चलेगी चली जाएगी कोई जानता भी नहीं उसे 986 00:47:36,960 --> 00:47:41,199 मेरे डायलॉग उसने क्लाइम्स में चेंज कर 987 00:47:39,039 --> 00:47:44,000 दिए मैंने मैंने वो ₹100 महीना की नौकरी 988 00:47:41,199 --> 00:47:45,838 छोड़ दी। मैंने कहा वो आप मैं नहीं कर 989 00:47:44,000 --> 00:47:50,159 सकता। आप मेरा नाम मत दीजिएगा। मेरा नाम 990 00:47:45,838 --> 00:47:53,759 जानता कौन था? तो वो आपका ये कभी जो 991 00:47:50,159 --> 00:47:56,399 पोजीशन की बात है ना वो जैसे कंजूस आदमी 992 00:47:53,760 --> 00:47:59,119 तो कंजूस ही रहेगा। वो चाहे उसके पास 993 00:47:56,400 --> 00:48:00,960 करोड़ों हो तब भी कंजूस रहेगा। डरपोक आदमी 994 00:47:59,119 --> 00:48:03,599 को आप पिस्तौल देगी तो बहादुर हो जाएगा 995 00:48:00,960 --> 00:48:05,920 क्या? वो डरपोक ही रहेगा। ये मिजाज की बात 996 00:48:03,599 --> 00:48:08,000 है। ये पोजीशन की बात नहीं है। देखा जाएगा 997 00:48:05,920 --> 00:48:08,720 जो भी होगा। हम तो सारी जिंदगी ऐसे ही 998 00:48:08,000 --> 00:48:11,920 जिए। 999 00:48:08,719 --> 00:48:14,959 मैं एक एक शायर मेरे पास आए। कहने लगे आप 1000 00:48:11,920 --> 00:48:18,159 मेरी मदद कर दीजिए। क्योंकि हीरो जो है वह 1001 00:48:14,960 --> 00:48:20,800 पाइप के जरिए हीरोइन के कमरे में जाता है। 1002 00:48:18,159 --> 00:48:24,879 तो मैं चाहता हूं कि गाने में पाइप का लफज़ 1003 00:48:20,800 --> 00:48:27,519 आ जाए। मैंने कहा आप कितना ही अच्छा गाना 1004 00:48:24,880 --> 00:48:30,640 क्यों ना बना लें। पाइप उसमें डालेंगे तो 1005 00:48:27,519 --> 00:48:33,440 कैसे आएगा भाई? कैसे? वो कह रहे हैं कि 1006 00:48:30,639 --> 00:48:36,799 नहीं पाइप के जरिए क्योंकि वो चढ़ के जा 1007 00:48:33,440 --> 00:48:38,960 रहा है। तो आप इसका बताइए कुछ बना दीजिए। 1008 00:48:36,800 --> 00:48:39,839 पाइप को रोमांटिक बना दीजिए। भाई, कैसे 1009 00:48:38,960 --> 00:48:42,000 बना दे? 1010 00:48:39,838 --> 00:48:46,000 अरे, मिश्रा मैं दे देता हूं, बाकी आप कर 1011 00:48:42,000 --> 00:48:49,000 लीजिए। इश्क पर जोर नहीं है वो। आतिश 1012 00:48:46,000 --> 00:48:49,000 पाइप। 1013 00:48:52,480 --> 00:49:00,079 ना उतारे ना बने। जो चढ़ाए, ना चढ़े और 1014 00:48:56,079 --> 00:49:00,960 उतारे ना बने। हो गया। 1015 00:49:00,079 --> 00:49:04,480 मैं नहीं पाया। 1016 00:49:00,960 --> 00:49:07,920 एक एक मैं ये सब्जेक्ट मेरा है। मैं एक 1017 00:49:04,480 --> 00:49:10,800 बात बता। देखिए फर्क है। मैंने भी कई गाने 1018 00:49:07,920 --> 00:49:14,880 इस तरह के लिखे हैं जिस पर लोग एतराज करते 1019 00:49:10,800 --> 00:49:17,440 हैं। फर्क ये है कि आप अगर एक सेमिनार में 1020 00:49:14,880 --> 00:49:19,519 बोल रहे हैं यहां पढ़े लिखे लोग बैठे हैं। 1021 00:49:17,440 --> 00:49:23,119 इस टॉपिक को अच्छी तरह जानते हैं तो आपकी 1022 00:49:19,519 --> 00:49:27,679 वोकैबलरी आपके बोलने का अंदाज आपका इशारा 1023 00:49:23,119 --> 00:49:30,400 आपकी अलामत कुछ और होंगी। अगर आप वही बात 1024 00:49:27,679 --> 00:49:33,919 25,000 आदमी के मजमे से कहना चाह रहे हैं 1025 00:49:30,400 --> 00:49:36,559 तो आप दूसरी तरह से वो बात कहेंगे। ये जो 1026 00:49:33,920 --> 00:49:38,400 है जोन कोई अच्छी और बुरी नहीं होती है। 1027 00:49:36,559 --> 00:49:40,880 आप अच्छा फिल्मी गाना लिख सकते हैं। 1028 00:49:38,400 --> 00:49:44,800 इंतहाई बुरी गजल लिख सकते हैं। लेकिन 1029 00:49:40,880 --> 00:49:47,838 कभी-कभी यह आप आपका नहीं है। मिसाल तौर 1030 00:49:44,800 --> 00:49:50,640 तौर पे अगर शेक्सपियर ने शयलॉग के डायलॉग 1031 00:49:47,838 --> 00:49:54,000 लिखे तो इसके मतलब नहीं है कि शेक्सपियर 1032 00:49:50,639 --> 00:49:56,558 जो था वो जू हेटर था। ये डायलॉग का पॉइंट 1033 00:49:54,000 --> 00:49:58,800 ऑफ व्यू दे रहा है वो। जो विलेन का पॉइंट 1034 00:49:56,559 --> 00:50:00,400 ऑफ व्यू अगर मतलब कल को आप कहें तुम तो 1035 00:49:58,800 --> 00:50:03,599 डकैत रह चुके हो। तुमने गब्बर सिंह के 1036 00:50:00,400 --> 00:50:06,400 डायलॉग लिखे। तो वो उसका पॉइंट ऑफ व्यू 1037 00:50:03,599 --> 00:50:08,960 मेरा नहीं है। इसी तरह गाने भी होते हैं। 1038 00:50:06,400 --> 00:50:13,039 गानों की एक सिचुएशन होती है। तो आपको ये 1039 00:50:08,960 --> 00:50:15,280 पता होना चाहिए कि इसमें किस तरह की जबान 1040 00:50:13,039 --> 00:50:18,318 पाइप भी आ सकता है गाने में। कोई हर नहीं। 1041 00:50:15,280 --> 00:50:20,880 लेकिन आप एक कॉमन मैन के लिए एक इस तरह की 1042 00:50:18,318 --> 00:50:22,960 सिचुएशन के लिए सही लिख रहे हैं कि नहीं। 1043 00:50:20,880 --> 00:50:25,358 मिसाल के तौर पर मैंने एक गाना लिखा था 1044 00:50:22,960 --> 00:50:27,760 जिसपे मुझे बहुत क्रिटिसाइज किया गया। और 1045 00:50:25,358 --> 00:50:29,838 बल्कि मैं एक मर्त कराची गया था तो एक 1046 00:50:27,760 --> 00:50:32,319 अदबी महफिल में दाखिल हुआ तो पीछे से किसी 1047 00:50:29,838 --> 00:50:32,558 ने आवाज दी मुझे। के आप थी वहां 1048 00:50:32,318 --> 00:50:34,318 हां 1049 00:50:32,559 --> 00:50:35,680 के वो सुनाइए एक दो तीन चार 1050 00:50:34,318 --> 00:50:36,719 एक दो तीन पढ़ा है 1051 00:50:35,679 --> 00:50:38,318 हां 1052 00:50:36,719 --> 00:50:40,480 तो मैंने कहा सुना देता हूं आपको उसमें 1053 00:50:38,318 --> 00:50:43,440 क्या है सबसे पहले वही सुनिए और अगर खराब 1054 00:50:40,480 --> 00:50:46,240 लगे तो हुट भी कीजिएगा 1055 00:50:43,440 --> 00:50:48,880 ये क्या है अरे भाई सिचुएशन ये थी कि एक 1056 00:50:46,239 --> 00:50:51,118 लड़की है जो नौटंकी में काम करती है। अब 1057 00:50:48,880 --> 00:50:54,559 नौटंकी में मेरे ख्याल से अगर वह स्टेज पे 1058 00:50:51,119 --> 00:50:58,800 गा रही होती कावे कावे सख्त जानी हाय तनाई 1059 00:50:54,559 --> 00:51:02,240 ना पूछ तो कुछ ठीक नहीं लगता 1060 00:50:58,800 --> 00:51:06,079 तो मुनासिब नहीं होता शायद 1061 00:51:02,239 --> 00:51:09,759 तो ऐसा गाना होना चाहिए जो नौटंकी का लगे 1062 00:51:06,079 --> 00:51:12,640 अच्छा हमारे मुल्क में बरसगीर में एक 1063 00:51:09,760 --> 00:51:15,440 ट्रेडिशन रही है जिसे बारामासा कहते हैं। 1064 00:51:12,639 --> 00:51:19,440 12 मासा मतलब एक बिरहम यह डिस्क्राइब करती 1065 00:51:15,440 --> 00:51:20,079 है कि यह मैंने एक-एक महीना तेरे बगैर 1066 00:51:19,440 --> 00:51:20,720 कैसे 1067 00:51:20,079 --> 00:51:24,079 गुजारा 1068 00:51:20,719 --> 00:51:27,439 गुजारा मैंने उस 12 मसा को श्रिंक करके एक 1069 00:51:24,079 --> 00:51:29,680 महीने में डाल दिया वो ट्रेडिशन को मैं आप 1070 00:51:27,440 --> 00:51:32,400 लोगों को सुनाता हूं उसके अंतरे जो कभी 1071 00:51:29,679 --> 00:51:37,118 किसी ने सुने नहीं शायद वो 13 पे तो नाचना 1072 00:51:32,400 --> 00:51:38,639 शुरू कर देते हैं तो फिर सुनेंगे कैसे आगे 1073 00:51:37,119 --> 00:51:43,440 तो 1074 00:51:38,639 --> 00:51:47,039 एक दो तीन चार पांच छ 7 8 9 10 11 12 13 1075 00:51:43,440 --> 00:51:48,240 तेरा करूं दिन गिनगिन के इंतजार आजा पिया 1076 00:51:47,039 --> 00:51:51,519 आई बहार 1077 00:51:48,239 --> 00:51:54,799 14 को तेरा संदेशा आया 15 को आऊंगा ये 1078 00:51:51,519 --> 00:51:57,599 कहलाया 14 को आया ना 15 को तू तड़पा के 1079 00:51:54,800 --> 00:52:00,960 तूने मुझे क्या पाया 16 को भी 16 किए थे 1080 00:51:57,599 --> 00:52:04,400 श्रृंगार आजा पिया आई बाहर 17 को चमजी संग 1081 00:52:00,960 --> 00:52:07,679 छूट गया 18 को दिल टूट गया रो-रो गुजारा 1082 00:52:04,400 --> 00:52:10,559 मैंने सारा 19 20 को दिल के टुकड़े हुए 20 1083 00:52:07,679 --> 00:52:15,279 फिर भी नहीं दिल से गया तेरा प्यार आजा 1084 00:52:10,559 --> 00:52:19,040 पिया आई बाहर 21 बीती 22 गई 23 गुजरी 24 1085 00:52:15,280 --> 00:52:22,319 गई 25 26 ने मारा मुझे बिरहा की चक्की में 1086 00:52:19,039 --> 00:52:25,880 पिस गई दिन बस महीने के हैं और चार आजा 1087 00:52:22,318 --> 00:52:25,880 पिया ही बाहर 1088 00:52:28,159 --> 00:52:35,920 ये एक प्योरिटन एटीट्यूड है ये हाई हाई ये 1089 00:52:32,719 --> 00:52:38,639 हाई नोस किए हुए स्नोप्स का कि जो चीज 1090 00:52:35,920 --> 00:52:40,800 कॉमन मैन की समझ में आए वो खराब है। 1091 00:52:38,639 --> 00:52:43,519 ये उनका अंदाजा है। 1092 00:52:40,800 --> 00:52:45,680 अरे भैया तो फिर सारे फोक सॉन्ग बकवास है। 1093 00:52:43,519 --> 00:52:48,960 तुम सारी फोक म्यूजिक को कहो कि बहुत ही 1094 00:52:45,679 --> 00:52:51,358 सबस्टैंडर्ड चीज है। यह क्या बात है? कहां 1095 00:52:48,960 --> 00:52:53,599 क्या सिचुएशन है? क्या मीनिंग मैंने 1096 00:52:51,358 --> 00:52:56,719 मीनिंगलेस गाने लिखे हैं। इसलिए कि डिमांड 1097 00:52:53,599 --> 00:52:59,280 थी उनकी। पूरे गाने में एक वर्ड मीनिंग 1098 00:52:56,719 --> 00:53:01,919 नहीं रखता। आप लिख के दिखाइए। बहुत 1099 00:52:59,280 --> 00:53:04,000 मुश्किल काम है। मीनिंगलेस बात कर लेना। 1100 00:53:01,920 --> 00:53:06,880 जब बामाने बात करना चाह रहे हैं आप तो 1101 00:53:04,000 --> 00:53:08,880 आसान है। लेकिन मीनिंगलेस को मीनिंगलेस 1102 00:53:06,880 --> 00:53:10,559 बनाके लिखना बहुत मुश्किल काम है। 1103 00:53:08,880 --> 00:53:13,280 जिब्रिश 1104 00:53:10,559 --> 00:53:16,160 हां दर्ज डिस्को वो पूरा मीनिंगलेस गाना 1105 00:53:13,280 --> 00:53:18,559 है। उसकी जरूरत थी फिल्म में या यह कि 1106 00:53:16,159 --> 00:53:21,039 उसके अलावा एक और गाना दरमियान एक पिक्चर 1107 00:53:18,559 --> 00:53:23,200 थी उसमें एक गाना मैंने लिखा दो अंतरों के 1108 00:53:21,039 --> 00:53:28,719 साथ। आई हैव नॉट यूज्ड अ सिंगल वर्ड ओनली 1109 00:53:23,199 --> 00:53:32,719 साउंड्स। वहां वो जरूरत थी। तो ये आप 1110 00:53:28,719 --> 00:53:35,598 जो अ राइटर इज अ काइंड ऑफ़ अ डोमिनेंट 1111 00:53:32,719 --> 00:53:38,318 एक्टर। उसको रोल दिया गया है ये कि आप ये 1112 00:53:35,599 --> 00:53:40,559 करिए। तो वो वो कर रहा है। वो कैरेक्टर 1113 00:53:38,318 --> 00:53:42,800 करेगा। उस कैरेक्टर की वो डिमांड है। उस 1114 00:53:40,559 --> 00:53:45,599 सिचुएशन की वो डिमांड है। और अगर आप नहीं 1115 00:53:42,800 --> 00:53:48,800 कर सकते तो ये आपकी इनकैपेबिलिटी है। आपके 1116 00:53:45,599 --> 00:53:51,039 पास इतना एल्बो रूम क्यों नहीं है? जब आप 1117 00:53:48,800 --> 00:53:53,599 मैंने जो जगजीत के लिए गज़ें लिखी हैं 1118 00:53:51,039 --> 00:53:56,480 दो-तीन मैंने एल्बम किए उनमें से एक भी 1119 00:53:53,599 --> 00:53:57,680 गज़ल जो पब्लिश थी वो अलग बात है। वरना जो 1120 00:53:56,480 --> 00:53:59,039 मैंने उसके लिए लिखी है, एक भी मेरी 1121 00:53:57,679 --> 00:54:02,318 किताबों में नहीं है। 1122 00:53:59,039 --> 00:54:06,000 वो बीच के लोगों के लिए है। जो गजल के 1123 00:54:02,318 --> 00:54:08,000 शौकीन होते हैं ना दे लव गजल। वो उनके लिए 1124 00:54:06,000 --> 00:54:11,519 लिखी है। 1125 00:54:08,000 --> 00:54:13,760 तो ठीक है। वो एक कमर्शियल एक्सरसाइज है। 1126 00:54:11,519 --> 00:54:15,920 दे पेड मी वेल। मैंने उनको वैसे लिख के दे 1127 00:54:13,760 --> 00:54:18,800 दिया। जाओ खुश रहो। मैं अपनी किताब में 1128 00:54:15,920 --> 00:54:21,599 थोड़ी रखूंगा उसे। 1129 00:54:18,800 --> 00:54:26,240 नहीं ये बिल्कुल सही कहा। बहुत अच्छी बात 1130 00:54:21,599 --> 00:54:28,480 आपने सुनी। ये अभी जो नज़्म सुनाई अदील ने 1131 00:54:26,239 --> 00:54:31,838 फैज साहब की। तो मैंने फैज साहब से पूछा 1132 00:54:28,480 --> 00:54:36,318 था कि ये इमेजरी कैसे आपके सहने जिंदा के 1133 00:54:31,838 --> 00:54:40,880 बेवतन अशार सर निगू महव हैं बनाने में 1134 00:54:36,318 --> 00:54:43,519 दामन आसमा पे नक्शो निगार ये क्या कैसे 1135 00:54:40,880 --> 00:54:47,838 आया ये ज़हन में तो उन्होंने कहा भाई सीधी 1136 00:54:43,519 --> 00:54:51,599 सी बात है जेल के सलाखों में से जितना 1137 00:54:47,838 --> 00:54:55,440 आसमान नजर आता था दो चार ऊंचे दरख्त नजर 1138 00:54:51,599 --> 00:54:59,440 आते थे फासला बहुत था तो हमें यूं लगता था 1139 00:54:55,440 --> 00:55:02,800 कि वो आसमान में चिपके हुए हैं। आसमान से 1140 00:54:59,440 --> 00:55:05,119 बिल्कुल लगे हुए हैं। इसीलिए यूं लगता एक 1141 00:55:02,800 --> 00:55:08,880 लफ्ज उन्होंने इस्तेमाल किया कि हमें यूं 1142 00:55:05,119 --> 00:55:12,720 महसूस होता था जैसे किसी ने आसमान पर 1143 00:55:08,880 --> 00:55:15,760 मनव्बतकारी कर रखी हो। अब मनवतकारी के 1144 00:55:12,719 --> 00:55:18,558 माने नहीं मनवतकारी जरदोजी जैसे कि 1145 00:55:15,760 --> 00:55:22,240 निकालते हैं कपड़ों के ऊपर उस हमें लगता 1146 00:55:18,559 --> 00:55:25,440 था कि किसी ने फूल बेल आसमान पे बना दिए। 1147 00:55:22,239 --> 00:55:28,799 तो ये इमेजरी उस वक्त हमारे ज़हन में आई। 1148 00:55:25,440 --> 00:55:32,880 अजीब आदमी थे कि उन्होंने कभी अपनी शायरी 1149 00:55:28,800 --> 00:55:36,240 पर या किसी और पे यानी मैंने उनको कोई नाज 1150 00:55:32,880 --> 00:55:41,838 करते हुए कभी नहीं देखा बल्कि मैंने तो उस 1151 00:55:36,239 --> 00:55:44,719 तब उनको हमेशा एक मतलब भाई हम तो हम कहां 1152 00:55:41,838 --> 00:55:47,119 भाई हमारी सदी में तो हो गया एक शायर 1153 00:55:44,719 --> 00:55:49,439 इकबाल हो गया। किसी ने कहा नहीं नहीं 1154 00:55:47,119 --> 00:55:52,880 हमारी सदी के तो आप ही हैं। भाई वो तो 1155 00:55:49,440 --> 00:55:56,240 इकबाल हो गए। बात यह है कि शायरी की जो 1156 00:55:52,880 --> 00:55:59,519 सल्तनत है वह बड़ी अजीब सल्तनत होती है। 1157 00:55:56,239 --> 00:56:03,598 बड़ी मुश्किल से एक सदी में आके एक शायर 1158 00:55:59,519 --> 00:56:07,199 मसनदे सदारत पे बैठता है और बाकी तो काम 1159 00:56:03,599 --> 00:56:10,318 चलते रहते हैं। तो ये है कि इकबाल हो गया। 1160 00:56:07,199 --> 00:56:12,558 हम तो गुड सेकंड डिवीजन में हैं। हमेशा 1161 00:56:10,318 --> 00:56:14,719 कहते थे कि एक सेकंड डिवीजन है। 1162 00:56:12,559 --> 00:56:17,440 देखिए फैज साहब अफोर्ड कर सकते थे बॉस्ट 1163 00:56:14,719 --> 00:56:21,078 होना। हम लोग नहीं कर सकते थे। हम कहेंगे 1164 00:56:17,440 --> 00:56:21,079 तो लोग मान जाएंगे। 1165 00:56:21,440 --> 00:56:25,838 नहीं तुम गुड सेकंड डिवीजन में अब नहीं हो 1166 00:56:24,000 --> 00:56:28,000 भाई इसीलिए तो कह रहे हो ये बात 1167 00:56:25,838 --> 00:56:30,400 देखिए एक और बात बताओ 1168 00:56:28,000 --> 00:56:32,639 शायर से ये पूछना कि तुमने कैसे लिखा वो 1169 00:56:30,400 --> 00:56:34,400 कुछ बता देगा एक्सप्लेनेशन दे देगा तो अब 1170 00:56:32,639 --> 00:56:36,400 एक्सप्लेनेशन दे दी तो फिर हम भी वैसे ही 1171 00:56:34,400 --> 00:56:37,200 लिखने लगे अब तो हमारे पास है ऐसा नहीं 1172 00:56:36,400 --> 00:56:40,639 होता है 1173 00:56:37,199 --> 00:56:45,039 वो जिस वक्त वो लिख रहे थे वो कोई वाकई को 1174 00:56:40,639 --> 00:56:47,440 एक अजीब एक वज में एक अजीब तरह के माहौल 1175 00:56:45,039 --> 00:56:49,599 में एक अजीब दुनिया में थे तो लिख लिया 1176 00:56:47,440 --> 00:56:50,880 फिर दुनिया से वापस आए तो उनका अच्छा अभी 1177 00:56:49,599 --> 00:56:53,838 लोगों को सुना देते हैं। 1178 00:56:50,880 --> 00:56:55,920 ये अगर इतना आसान हो कि शायर बता दे ये ये 1179 00:56:53,838 --> 00:56:56,960 तरीका है करने का तो फिर सब फैज है मतफज 1180 00:56:55,920 --> 00:56:57,920 हो जाना। 1181 00:56:56,960 --> 00:56:59,039 हां ये इकबाल ने 1182 00:56:57,920 --> 00:57:02,000 100 साल में एक ना हो। 1183 00:56:59,039 --> 00:57:04,798 इकबाल ने भी ये लिखा है जावेद। उन्होंने 1184 00:57:02,000 --> 00:57:07,760 कहा बहुत सी नज़्में जो हैं 1185 00:57:04,798 --> 00:57:10,318 कैसे हो गई? कैसे मेरे ज़हन में आए हैं? 1186 00:57:07,760 --> 00:57:11,839 कैसे वो लफज़ आए ये मेरी समझ में। 1187 00:57:10,318 --> 00:57:15,119 बाद में तो उन्होंने काफी ऐसी नज़्में 1188 00:57:11,838 --> 00:57:18,719 लिखी। ना लिखते तो अच्छा था। 1189 00:57:15,119 --> 00:57:21,760 साथियों ऐसी गुफ्तगू होती रहेगी। 1190 00:57:18,719 --> 00:57:24,719 फिराक साहब से माज़रत हल्की सी गुस्ताखी 1191 00:57:21,760 --> 00:57:27,920 मैं कर रहा हूं। आने वाली नस्लें तुम पर 1192 00:57:24,719 --> 00:57:32,759 फक्र करेंगी हम असरो जब भी उनको ध्यान 1193 00:57:27,920 --> 00:57:32,760 आएगा तुमने इनको देखा है। 1194 00:57:37,920 --> 00:57:42,559 जहरा आपा और जावेद साहब का शुक्रिया। जश्न 1195 00:57:40,559 --> 00:57:46,040 रेखता का बहुत-बहुत शुक्रिया और आप सबका 1196 00:57:42,559 --> 00:57:46,040 बहुत-बहुत शुक्रिया।